CHURCH AT EL-SHADDAI · OFFLINE SONGBOOK

Siyon Ke Geet

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740 songs

1 यहोवा प्रभु मेरे, भूमि आकाश मेंyahova prabhu mere, bhoomi aakaash mein
यहोवा प्रभु मेरे, भूमि आकाश में;
महिमामय नाम तेरा महान है ।।

1.पल्टा लेनेवाले शत्रु को रोका,
प्रभाव ये नन्हों की आराधना का;
स्थापित किया है ये दृढ़ गढ़ तू ने,
आश्रय.स्थान मैं पाऊँ जिस में ।

2.आकाश और चन्द्रमा और तारागण,
हाथों का काम तेरे देखता क्षण क्षण;
क्या है मनुष्य कि तू करता स्मरण ?
सुधि तू ले उसकी क्या है कारण ?

3.क्योंकि प्रभु तू ने स्वर्गदूतों से,
थोड़ा सा ही कम हैं ठहराया उसे;
महिमा और प्रताप का मुकुट मगर,
पहिनाया है तू ने उस के सिर पर ।

4.आकाश के पक्षी, समुद्री मछलियाँ,
जंगल के जानवर और भेड़ें बकरियाँ;
पाँव तले उसके, तू सब कुछ किया,
कामों पर अपने है अधिकार दिया ।

5.हे यहोवा तू है प्रभु हमारा,
कितना प्रतापमय है नाम प्रभु तेरा;
दिया है तू हमें स्वरुप तेरा,
तेरे ही नाम द्वारा, हल्लेलूयाह ।
2 मुबारक ! मुबारक !mubaarak ! mubaarak !
(भजन 16:7-11)  

मुबारक ! मुबारक ! 
मुबारक यहोवा को मैं कहूँगा,(2) 
कि जिसने है दी मुझ को उत्तम सलाह, मुबारक ! 

1.कि रातों को मेरे ये गुर्दे मुझे,(2) 
सिखाते ही रहते हैं मुझ को सदा ।(2) 
मुबारक यहोवा को मैं कहूँगा, मुबारक ! 

2.यहोवा पर दृष्टि है मेरी सदा, 
वह है मेरे दहिने, न टल जाऊँगा ।मुबारक यहोवा को... ! 

3.मेरे दिल में इसी कारण है खुशी; 
है आनन्दित मेरे सब मान मर्यादा ।मुबारक यहोवा को... ! 

4.सुन अब ऐ मेरी जान, तेरा खुदा; 
तुझे वह कबर में नहीं छोड़ेगा ।मुबारक यहोवा को... ! 

5.तेरे पवित्र जन की देह कभी भी, 
कबर में न सड़के वह रह जाएगी ।मुबारक यहोवा को... ! 

6.कि जीवन का रास्ता जो है सिद्ध और साफ, 
यहोवा तू ही मुझको दिखलाएगा ।मुबारक यहोवा को... ! 

7.तेरे घेरे के भीतर आनन्द आनन्द, 
तेरे दहिने हाथ में है सुख सर्वदा ।मुबारक यहोवा को... ।
3 हे यहोवा, हे बल मेरे,he yahova, he bal mere
(भजन -18)  
हे यहोवा, हे बल मेरे, सदा है सच्चे मार्ग तेरे; 
करता है सिद्ध सब मार्ग मेरे, हे यहोवा ।। 

1.मेरे शत्रु धेरें मुझ को, बन्धनों से पाताल के जकड़ें; (2) 
बाढ़ अधर्म की मुझको डरायें, पर प्रभु मुझ को कभी न छोड़े । (2) 

2.मृत्यु के जाल से जब दी दुहाई, बन गया रक्षक और ऊँचा गढ; 
मन्दिर से सुनी मेरी दुहाई, तब पृथ्वी काँपी और थर्रराई । 

3.जब प्रभु कोप में क्रोधित हुआ, नेवें पहाड़ों की सब हिल गई; 
उसके मुख से अग्नि निकलकर, शत्रुओं को चट कर गई । 

4.दयावन्तों पर दयालु बनता, टेढ़ें पर तू तिरछा बनता;  
घमण्डियों को नीचा करता, तू सर्वज्ञान और सामर्थ रखता । 

5.तू ही मेरा दीपक जलाता, मेरे अंधियारे को ज्योति बनाता; 
अपनी शक्ति का हाथ बढाता, अपनी सामर्थ से मुझ को उठाता । 

6.पैरों को हरिणी समान बनाता, ऊँचे स्थानों पर स्थिर है करता; 
मुझ को बचाव की ढाल है देता, दहिने हाथ से मुझ को सम्भालता । 

7.हे यहोवा तू जो जीवित है, तू जो महिमा ही के योग्य है; 
जातियों के सम्मुख स्तुति करके, गाऊँगा दिल से मैं हल्लेलूयाह ।
4 यहोवा मेरा चरवाहा हैyahova mera charavaaha hai
(भजन - 23)  
यहोवा मेरा चरवाहा है,  
कमती मुझ को कभी न होगी । 

1.हरी.हरी चराइयों में मुझ को बैठाता,(2) 
सुखदाई जल के पास ले चलता ।... यहोवा 

2.वह मेरे जी में जी ले आता, धर्म के मार्ग में अगुवाई करता ।
 
3.जब मैं मौत की घाटी से चलूँ, मैं किसी हानि से कभी न डरुँ । 

4.क्योंकि तू मेरे साथ है रहता, सोंटे और लाठी से शान्ति देता । 

5.मेरे सताने वालों के सामने, मेरे लिए तू मेज बिछाता । 

6.सिर पर मेरे तेल तू मलता, प्याला मेरा खूब छलकता । 

7.भलाई करुणा साथ रहेंगी, यहोवा के धाम में सदा रहूँगा ।
5 तू ही यहोवा मेरा चरवाहाtoo hee yahova mera charavaaha
(भजन - 23) 
तू ही यहोवा मेरा चरवाहा; (2)  
घटी कभी भी मुझे न होगी ।।(2) 

1.हरी चराइयों में मुझे बैठाता, 
सुखदाई झरनों के पास है ले चलता; 
वह मेरे जी में जी है ले आता,(2) 
धर्म के मार्गो में अगुवाई करता ।(2) 

2.घोर अन्धकार की घाटी में चलूँ, तौभी मैं भय से कभी न डरुँ; 
क्योंकि यहोवा तू मेरे संग है, सोंटे और लाठी से तसल्ली देता । 

3.तू मेरे सब शत्रुओं के सामने, मेरे लिए अपनी मेज है बिछाता; 
तू मेरे सिर पर है तेल मलता, मेरा कटोरा खुश हो छलकता । 

4.निश्चय करुणा भलाई तेरी भी, जीवन भर मेरे संग संग रहेगी; 
मैं अपने यहोवा के भवन में, सदा सर्वदा निवास करूँगा ।
6 यहोवा चरवाहा मेराyahova charavaaha mera
(भजन - 23)  
यहोवा चरवाहा मेरा, कोई घटी मुझे नहीं है; 
हरी चराइयों में मुझे, स्नेह से चलाता वह है ।।
 
1.मृत्यु के अन्धकार से, मैं जो जाता था; 
प्रभु यीशु करुणा से, तसल्ली मुझे दी है । 

2.शत्रुओं के सामने, मेज को बिछाता है; 
प्रभु ने जो तैयार की, मन मेरा मगन है । 

3.सिर पर वह तेल मला है, अभिषेक मुझे किया है; 
दिल मेरा भर गया है, और उमड़ भी रहा है । 

4.सर्वदा प्रभु-घर में, करूँगा निवास जो मैं; 
करुणा-भलाई भी उसकी, आनन्दित मुझे करती है ।
7 यीशु मेरा चरवाहा मैंyeeshu mera charavaaha main
(भजन - 23)  
यीशु मेरा चरवाहा मैं उसका गुण गाता हूँ, 
छोटी उसकी भेड़ उसके पीछे जाता हूँ ।।
 
1.हरियाली चरागाह मुझे चराता है, 
और निर्मल सोतों से मुझे पिलाता है; 
वह आगे आगे चलता है, रक्षा भी करता जाता है; 
उसकी मधुर वाणी से मैं तृप्त हो जाता हूँ । 

2.मौत की घाटी से मुझे ले जाता है, 
जंगल के खतरों से मुझे बचाता है; 
वह मलहम पट्टी करता है, ढाढ़स भी मुझे देता है, 
उसकी प्रेम-सेवा से मैं आनन्द पाता हूँ । 

3.दुश्मन के सामने वह मेज बिछाता है, 
कटोरा आनन्द से वह उमड़ा जाता है; 
वह पाक पवित्र करता है, आत्मा का दान देता है, 
उसकी रोज सहायता से जय पाता जाता हूँ ।
8 प्रभु यीशु राजा है वह महिमा काprabhu yeeshu raaja hai - vah mahima ka
(भजन - 24) 
प्रभु यीशु राजा है - वह महिमा का राजा है ।। 

1.पृथ्वी और जो कुछ है उसमें, यीशु ही का है; 
जगत और निवास सब उसके, यीशु ही के हैं ।... प्रभु 

2.क्योंकि उसने नेव पृथ्वी की, पानी पर डाली है; 
और महानदों पर उसको स्थिर भी किया है । 

3.यहोवा के पर्वत ऊपर कौन है चढ़ सकता ? 
उसके पवित्र स्थान में कौन, खड़ा हो सकता ? 

4.वही जिसका दिल निर्दोष है, काम भी है पवित्र; 
जिसने अपने मन को झुठ पर नहीं लगाया हैं । 

5.वही जो झूठी शपथ न खाता, प्रभु से आशीषें पाता; 
और उसका परमेश्वर उसको, धर्मी ठहराता है । 

6.धर्मी लोग हैं प्रभु सब ही, खोजी तेरे ही हैं; 
वे सब तेरा दर्शन पाने, तेरे घर में आते । 

7.ऊँचे करो सिर दरवाजों, ऊँचे हो सब द्वारों; 
ताकि महान राजा आवे, सिर तब ऊँचे करो । 

8.यह महिमा का राजा कौन है ? कौन राजा प्रतापी ? 
सेनाओं का जो यहोवा, वह राजा प्रतापी ।
9 सुबह, शाम और हर समयsubah, shaam aur har samay
(भजन - 27) 
 
सुबह, शाम और हर समय प्रभुजी, ध्यान करके गुण गाता हूँ; 
‘पवित्र, पवित्र, पवित्र है प्रभु,’ दूतों का गान सुनता हूँ ।। 

1.यहोवा है मेरी ज्योति और उद्धार, डरूँ मैं फिर किस से क्योंकर? 
यहोवा मेरे जीवन का बना है गढ़, शत्रु गिरे ठोकर खाकर । 

2.युद्ध करने मुझ से सेना भी आए, मेरे दिल में न होगा डर; 
विरोध में मेरे चाहे लड़ाई ठन जाए, भरोसा मेरा उस पर । 

3.यहोवा से मैंने माँगा है एक वर, रहूँ मैं उसी के यत्न पर; 
यहोवा के भवन में रहूँ जीवनभर, ध्यान करुँ सुन्दरता पर ।
 
4.मण्डप में अपने मुझे छिपायेगा, आपत्ति-दिन आये अगर; 
तम्बू में अपने वह मुझे छिपाकर, चढाएगा चट्टान पर । 

5.देखो मेरी और, सुनो मेरे स्वर, तू ने है कहा हे ईश्वर; 
देखता हूँ तेरी ओर, सुनता मैं तेरा स्वर, छिपना न तू मुझ से पर । 

6.माता-पिता मेरे छोड़ जाये अगर, यहोवा सम्भालेगा फिर; 
धीरज मैं रखकर, निर्भय मैं होकर, करूँ मैं तेरा इन्तजार । 

7.यहोवा के उद्देश्य मेरे लिये जो हैं, पूरे करेगा समय पर; 
यहोवा का वचन जो पालन करे अगर, पूरी करेगा चाह हर ।
10 हे प्रभु यहोवा सर्वदा, मैं तेरी,he prabhu yahova sarvada, main teree
(भजन - 30)  
हे प्रभु यहोवा सर्वदा, मैं तेरी स्तुति करुँगा; 
हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह ।। 

1.यहोवा तू मेरे शत्रुओं को, मुझ पर सन्तोष होने न देगा; 
तू ने मेरा उद्धार किया है, इसलिये मैं तेरी स्तुति करूँगा । 

2.मैं तेरे पास रोया और मांगा, तू ने मुझे है किया चंगा; 
पवित्र नाम से स्मरण होवे जिसका, सन्तों करो उसकी प्रसंशा । 

3.यहोवा तू मेरे प्राणो को, पाताल से है उठा लिया; 
कब्र में पड़ने से मुझे बचाया, तू ने मुझे जीवन दान दिया । 

4.क्रोध तो है उसका क्षणभर का, जीवन भर है उसकी प्रसन्नता; 
कदाचित् रात को रोना पडे पर, सबेरे आनन्द ही पहुँचेगा । 

5.मैं न गीरूँगा मैं ने सोच लिया, जिस समय मैंने था सुख चैन पाया; 
यहोवा तू ही ने मुझ पर की दया, मेरे पर्वत को स्थिर किया ।
 
6.तू ने जब मुंह अपना फेर लिया, तब तो मैं बहुत ही घबरा गया; 
हे यहोवा मैंने तुझ ही को पुकारा, गिड़गिड़ाकर के बिनती किया । 

7.कब्र में चला जाऊँगा जब मैं, प्राण से मेरे तब क्या लाभ होगा ? 
मिट्टी क्या तब तेरा धन्यवाद करेगी, या प्रचार करेगी सच्चाई का? 

8.मेरे विलाप को हे यहोवा, नृत्य में तू ने है बदल दिया; 
मेरी कमर से तू टाट वस्त्र उतारा, आनन्द का पटुका बान्ध दिया ।
11 धन्य है वह जिसके क्षमा हुएdhany hai vah jisake kshama hue
(भजन 32)  

धन्य है वह जिसके क्षमा हुए अपराध, 
और ढांपे गये जिसके है सारे पाप ।।(2) 

1.है धन्य क्या ही जिस के पाप का हिसाब, 
यहोवा न लेता, न कपट जिस के पास ।(2)... धन्य 

2.जब मैं चूप रहा, तब सारे दिवस भर; 
कहरते मेरी हड्डियाँ पिघल गयी । 

3.रात दिन तेरे हाथ के नीचे दबा था, 
तरावट धूपकाल की झुराँहट बन गयी । 

4.तेरे पास किया मैं ने पाप का स्वीकार, 
छिपाए नहीं भी अधर्म के काम । 

5.दूर तू ने किये मेरे सारे अपराध, 
क्षमा कर दिये तू ने मेरे सब पाप । 

6.इस कारण हर भक्त जब खुल जाए उसका पाप, 
ढूँढेगा तुझे जब तू मिल सकता आप । 

7.निश्चय जल की बाढ़ बड़ी जब आ जाए, 
वह भक्तों के पास कभी भी न पहुँचे । 

8.तू मेरे लिए है छिपने का स्थान, 
संकट में बचाता तू ही मेरी जान । 

9.चारों ओर छुटकारे के संगीतों से, 
तू ही मेरी जान को है घेरे हुए ।
12 सदा प्रभु को धन्य कहूँ मैंsada prabhu ko dhany kahoon main
(भजन 34:1-8)  

सदा प्रभु को धन्य कहूँ मैं,  
उसकी स्तुति निरन्तर करूँ मैं ।(2) 

1.अपने प्रभु पर घमण्ड करूँगा;(2) 
नम्र जन यह सुन आनन्दित होंगे ।(2)... सदा 

2.आओ मिलकर बड़ाई तुम करो, उसके नाम की सदा जय मनाओ । 

3.मैं ने जब की यहोवा से बिनती, सुनकर उसने मुझे दी भी शान्ति । 

4.देखा जितनों ने उस की तरफ भी, चेहरे उनके प्रकाशित हुए भी । 

5.मैं ने प्रभु की दी जब दुहाई, उसने दुःखों से दी तब रिहाई । 

6.उसके सन्तों को दूत है बचाता, छावनी चारों तरफ है लगाता ।
 
7.परखो यहोवा कैसा भला है, धन्य है जो शरण उसकी आए ।
13 हे यहोवा तू अद्भुत हैhe yahova too adbhut hai
(भजन 36:5-10)  

हे यहोवा तू अद्भुत है;(2) 
हे यहोवा तू धन्य है ।।(2) 

1.तेरी करुणा स्वर्ग में है;(2) 
जो कोई आए तुझ से वह पाए, सब पर दयालु तू है ।(2) 

2.तेरी विश्वासयोग्यता महान; 
बहुत ही ऊँची वह सब के लिए है, कभी न बदलती वह है । 

3.तेरी धार्मिकता दृढ़ है; 
जांचता तू सबको, कैसा गंभीर है, सब को सीधा बनाता है । 

4.तेरी ममता भी अनमोल है; 
पंखो में सब को ढांपे रहता है, जो कोई शरण लेते है । 

5.तेरे घर में ही तृप्ति है; 
सुख की नदी से वे सब पीते है, जीवन का सोता बहता है । 

6.तेरा प्रकाश अब हम पर है; 
जो तुझे जानते, जिन को तू जानता, कृपा सदा उन पर रहे ।
14 राजकुमारी तू सुनraajakumaaree too sun
(भजन 45:10-17)  

राजकुमारी तू सुन, और कान लगाके जरा तू ध्यान दे;(2) 
भूल जा अपने घर और अपने लोगों को,(2) 
राजा तेरे रूप की चाह करेगा ।।(2) 

1.वही प्रभु तेरा है, ऐ बेटी तू उसे झुक के दण्डवत कर;(2) 
सोर की बेटी भी भंेट आके करेगी,(2) 
प्रजा के लोग तुझ से प्रसन्न होवेंगे ।(2) राजकुमारी 

2.रानी कैसी सुन्दर है, वह महलों में अपने राजा की चहेती है; 
वस्त्र पर उस के सब बूटे कढ़े हैं, 
राजा के महलों में ऐसी ही जाएँगी । 

3.तेरी सहेलियाँ भी, तेरे पीछे पीछे महलों में वे जाएँगी; 
राजा उन्हें खुश हो महलों में लाएगा, 
महलों में राजा के तब वे रहेंगी । 

4.बेटे तेरे ऐ रानी, गद्दी पर अपने पिता की वे बैठेंगे; 
जिनको राजा अघिकारी बनाएगा, 
देश देश के लोग तुझे धन्यवाद कहेंगे ।
15 शरणस्थान और बल हमाराsharanasthaan aur bal hamaara
(भजन - 46)  

शरणस्थान और बल हमारा, संकट में सहाय ... परमेश्वर (2) 
इस कारण कोई डर नहीं है, उल्टे पृथ्वी भी(2) ... परमेश्वर 

1.चाहे सागर गर्जन करे, फेन उठाए,(2) ... और कांपे, 
पर्वत भी बड़े लहरांे के, बाढ़ से उसके ।(2) ... परमेश्वर 

2.एक नदी है नहरों से जिसकी, प्रभु के नगर में,(2) ... परम 
प्रधान के पवित्र भवन में, होता है आनन्द । ... 

3.बीच में है परमेश्वर उसके, वह न टलेगा,(2) ... कभी भी 
पौ फटते ही ईश्वर उसकी, सहायता करेगा । ... 

4.जाति के लोग सब झल्ला उठे है, डगमगाने लगे,(2) ... राज्य सब, 
यहोवा जब बोल उठा, पिघल गयी पृथ्वी ... 

5.सेनाओं का जो यहोवा, संग हमारे है,(2) ... याकूब का, 
परमेश्वर जो ऊँचा गढ़ वह, बल हमारा है ... 

6.यहोवा के महाकर्मो को, आओ हम देखें,(2) ... कि उसने 
पृथ्वी पर भी कैसे कैसे, काम है किये ... 

7.चुप हो जाओ, और यह जानो, मैं हूँ परमेश्वर(2) ... सारे लोग, 
मैं हूँ महान सारी पृथ्वी में, सारी जातियों पर ...,
16 ऐ देश देश के सब लोगोंai desh desh ke sab logon
(भजन 47)

1.ऐ देश देश के सब लोगों, तालियाँ बजाओ;  
ऊँचे शब्द से परमेश्वर का जयजयकार करो ।। 

2.क्योंकि यहोवा परमप्रधान भययोग्य है, 
वह सारी पृथ्वी के ऊपर महाराजा है । 

3.वह देश के लोगों को हमारे सन्मुख नीचा करता, 
अन्य जातियों को हमारे पाँव के नीचे करता । 

4.हमारे लिये उत्तम भाग वही चुनता है, 
जो उसके प्रिय याकूब के धण्मड़ का कारण है । 

5.परमेश्वर जयजयकार सहित ऊपर गया है, 
वह नरसिंगे के शब्द के साथ ऊपर गया है । 

6.परमेश्वर का भजन गाओ, भजन गाओ; 
महाराजा का भजन गाओ, भजन गाओ । 

7.क्योंकि परमेश्वर महाराजा सारी पृथ्वी का, 
समझबूझ कर बुद्धि से गाओ भजन उसका ।
 
8.परमेश्वर जाति-जाति पर राज्य करता है, 
अपने पवित्र सिंहासन पर बिराजमान है । 

9.राज्य के रईस ईब्राहीम के परमेश्वर की, 
प्रजा होने को इकट्ठा हुए हैं वे सभी । 

10.यहोवा परमेश्वर वह शिरोमणी है, 
क्योंकि पृथ्वी की ढ़ालें परमेश्वर के वश में हैं ।
17 परमेश्वर अपने पवित्र नगरparameshvar apane pavitr nagar
(भजन - 45) 

परमेश्वर अपने पवित्र नगर, और पर्वत पर है महान;(2)
स्तुति के है वह योग्य अति, यहोवा ही है महान ।।(2)

1.सिय्योन का पर्वत ऊँचा है, और सुन्दर भी है महान;(2)
सब जग के हर्ष का कारण है, महाराजा की नगरी महान ।(2)

2.परमेश्वर ही ऊँचा गढ है, उन महलों की वह शान;
यह नगर है राजाधिराजा का, उत्तर में स्थित यह जान ।

3.सब राजा मिल के आगे बढ़े, देखा उसको भयमान;
लोग विस्मित हो वे घबराएँ, लेके भागे सब प्राण ।

4.कंपकंपी ने उनको धर पकड़ा, और उतर गया अभिमान;
जननेहारी सी पीड़ा उठी, और निकल गई सब शान ।

5.पुरवायु चला के तोड़ डाले, तरशीश के सब जलयान;
परमेश्वर नगर में जा देखा, जैसा सुना था उसका मान ।

6.तू सदा रखेगा दृढ़ उसको, हे परमेश्वर हे महान;
मन्दिर के भीतर हमने किया, तेरी करुणा पर ध्यान ।

7.पृथ्वी के छोर लों फैल गयी, तेरे नाम की स्तुति महान;
हस्त दहिना तेरा भरा हुआ, धर्म नीति के प्रमाण ।

8.सिय्योन की तुम परिक्रमा करो, गुम्मट गिन लो गुणवान;
और शहरपनाह पर ध्यान करो, लो महलों को सब जान ।

9.तब भावी पीढ़ी के लोगों से, तुम कर सकोगे बयान;
सदा यह है हमारा परमेश्वर, मृत्यु तक है अगुवा ।
18 सारे लोगों यीशु ही की जय जयsaare logon yeeshu hee kee jay jay
(भजन 66:1-4, 10-13) 

सारे लोगों यीशु ही की जय जय मिलके गाओ,(2)
उसकी महिमा का भजन ऐ सारी प्रजा गाओ ।(2)

1.उसकी स्तुति करते हुए (2), उसकी महिमा गाओ;(2)
हे प्रभु भयंकर तेरे, काम सब ही बने हैं ।(2)

2.महासामर्थी तू यीशु, बैरी सब झुकेंगे;
दण्डवत करके जय जयकार तब, सारे लोग कहेंगे ।

3.तू ने हमको है परमेश्वर, पूरी तरह जाँचा;
तू ही ने चान्दी की नाई, हमको भी है ताया ।

4.तू ही ने जाल में फँसाया, पीठ पर बोझ भी रखा;
घुडसवारों को भी तू ने, सिर पर है चलाया ।

5.आग और जल में से हम गुजरे, जब हमारे प्रभु;
तू ही ने हमें बचाया, धनी जगह लाया ।

6.होमबलि को लेके प्रभु, तेरे घर में आऊँगा;
मन्नतों को तेरे लिए, पूरी मैं करूँगा ।
19 रहेगा नाम सदा बना मसीह काrahega naam sada bana maseeh ka
(भजन 72:17-19)  

1.रहेगा नाम सदा बना मसीह का,
नया होगा सूरज जब तक रहेगा ।

2.धन्य अपने को कहेंगे नाम के कारण,
कहेंगी जातियाँ भाग्यवान उस को ।

3.धन्य है परमेश्वर यहोवा इस्राएल का,
आश्चर्य काम केवल वही है करता ।

4.और उसका नाम महिमा योग्य जो है,
युगानुयुग धन्य वह रहेगा ।

5.महिमा से परिपूर्ण होगी पृथ्वी,
आमीन, आमीन, आमीन, आमीन हो सारी ।
20 परमेश्वर यहुदा में जाना गया हparameshvar yahooda mein jaana gaya hai
(भजन 76)  

परमेश्वर यहुदा में जाना गया है,(2)
उसका नाम इस्राएल में महान हुआ है;(2)
और उसका मण्डप शालेम में है,(2)
और उसका धाम भी सिय्योन में है ।(2)

1.वहाँ से उसने चमचमाते तीरों को...और
वहाँ से उसने युद्ध की मजबूत ढ़ालों को;
वहाँ से उसने जंग की मजबूत तलवार को,...और
वहाँ से तोडा निदान ही लड़ाई को,
हे परमेश्वर, तू है ज्योतिर्मय,
अहेर से भरे हुए पहाडों से उत्तम है ।...परमेश्वर

2.दृढ़ मनवाले सभी लुट गए हैं,...और
भारी नींद में वे सब पड़े हुए हैं;
शूरवीरों में से किसी का हाथ न चला,...और
वहाँ वह बिलकुल ही निकम्मा हो गया;
याकूब के परमेश्वर तेरी घुड़की से,
रथों समेत घोड़े भारी नींद में पड़े हैं ।

3.केवल यहोवा तू ही भय योग्य है,...क्रोध
तेरे के सामने खड़ा कौन हो सके;
जब यहोवा उठ गया न्याय करने को,...और
नम्र लोगों का भी उद्धार करने को;
निर्णय का वचन स्वर्ग से सुनाया,
पृथ्वी उस समय सुनकर भय से चुप हो गई ।

4.मनुष्य का कोप तेरी स्तुति बन जायेगा,...और
जो कोप रह जाए उसको तू ही रोकेगा;
प्रभु की मन्नत मानो पूरी भी करो,...और
भय योग्य यहोवा के पास भेटें ले आओ;
प्रधानों के अभिमान को मिटाएगा,
भययोग्य वह पृथ्वी के राजाओं को लगेगा ।
21 जय गाओ प्रभु की वही बल हैjay gao prabhu kee vahee bal hai
(भजन 81:1-10)

1.जय गाओ प्रभु की वही बल है,
याकूब के परमेश्वर की करो जय जय;
भजन तुम उठाओ मधुर राग से,
डफ, वीणा बजाओ पूरे बल से ।

2.गीत गाओं एक स्वर होके तबले के साथ,
और रागें मिलाओं सितारों के साथ;
नये चाँद और पूर्णमासी के समय,
नरसिंगे तुम फूंको सब पर्वो समय ।

3.इस्राएल के लिए विधि है यही,
याकुब के प्रभु का नियम है यही;
यूसुफ के लिए यह चितौनी दे दी,
मिस्र देश से उसको निकाला जभी ।

4.वहाँ मैंने अनजानी भाषा सुनी,
उतारा कन्धों पर से बोझ सब ही;
छुटा उनका टोकरी ढोना सब ही,
संकट से छुड़ाया पुकार जब सुनी ।

5.घन गर्जन के गुप्त स्थान से तेरी सुनी,
मरीबा के सोते पास परीक्षा भी की;
हे मेरी प्रजा, सुन चितौनी मेरी,
भला इस में है जो सुने तू मेरी ।

6.तेरे बीच ईश्वर पराया न हो,
न दण्डवत करे तू पराए देव को;
तेरा परमेश्वर यहोवा हूँ मैं,
मिस्र से निकालकर के लाया हूँ मैं ।

7.तू मुँह अपना खोल कि मैं उसे भरूँ,
तेरे दिल की चाहना पूरी करूँ;
विश्वास से तू माँग कि मैं पूरी करूँ,
तेरा परमेश्वर यहोवा मैं हूँ ।
22 हे सेनाओं के यहोवाhe senaon ke yahova
(भजन 84:1-10)  

1.हे सेनाओं के यहोवा, निवास तेरे प्रिय हैं;
आँगनों की लालसा मेरे, प्राण को मूर्छित करती है ।
सेनाओं के यहोवा ।

2.मेरा तन मन दोनों जीवते, ईश्वर को पुकारे;
सेनाओं के यहोवा, राजा मेरे परमेश्वर ।

3.गौरेया बसेरा पाया, शूपाबेंनी धोंसला;
प्राण मेरा वेदी पाया, जिस में मुझे तृप्ति है ।

4.क्या ही धन्य हैं वे जो, तेरे भवन में रहते हैं;
वे तेरी स्तुति निरन्तर, करते ही रहेंगे ।

5.क्या ही धन्य है मनुष्य जो, तुझ से शक्ति पाता है;
वे जिनको सिय्योन की, सड़क की सुधि रहती है ।

6.वे रोने की धाटी को, सोतों का स्थान बनाते;
अगली वृष्टि उस में होकर, आशीषें उपजाती है ।

7.वे बल पर बल पाते हुए, सिय्योन की ओर जाते है;
हर एक परमेश्वर को वहाँ, मुँह अपना दिखाते हैं ।

8.हे याकूब के परमेश्वर, तू मेरी प्रार्थना सुन ले;
हे सेनाओं के परमेश्वर, कान अपना लगा ले ।

9.हे परमेश्वर, ढाल हमारी, हम पर दृष्टि कर ले;
अपने अभिषिक्त के मुख पर, दृष्टि भी तू कर ले ।

10.तेरे आँगनों में एक दिन, हजार दिन से उत्तम है;
तेरे धर की देवढ़ी पर, खड़ा रहना भावता है ।
23 हे प्रभु तू ही पीढी पीढी सेhe prabhu too hee peedhee peedhee se
(भजन 90;1-7)  

1.हे प्रभु तू ही पीढी पीढी से... धाम हमारा सदा बना है;
युगों-युगों से तू ही हमारा... ईश्वर है, ईश्वर है, ईश्वर है, ईश्वर है ।

2.पहाड़ उत्पन्न होने से पहले... जगत और पृथ्वी रचने से पहले;
अनादि काल से अनन्त काल तक...
तू ही है, तू ही है, तू ही है, तू ही है ।

3.मनुष्यों को मिट्टी में मिलाता... ‘‘हे मनुष्यों लौट आओ’’ कहता;
हजार वर्ष प्रभु तेरी दृष्टि में...
क्षणभर है, क्षणभर है, क्षणभर है, क्षणभर है ।

4.हजार वर्ष प्रभु तेरी नजर में... ऐसे जैसे कल का दिन है;
रात्रि के एक पहर समान वह...
तुझ को है, तुझ को है, तुझ को है, तुझ को है ।

5.मनुष्यों को धारा में बहाता... स्वप्न जैसा उन्हें ठहराता;
भोर की बढ़ती घास समान वे...
होते हैं, होते हैं, होते हैं, होते हैं ।

6.भोर की घास है उगती, बढती,... सांझ तक कटकर मुरझा जाती;
ऐसे ही हम तेरे क्रोध से...
नाश हुए, नाश हुए, नाश हुए, नाश हुए ।

7.क्योंकि प्रभु तेरे क्रोध से,... नाश हुए हम देखो कैसे;
तेरी जलजलाहट ही से... घबराए, घबराए, घबराए, घबराए ।
24 पीढ़ी से पीढ़ी तू ही यहोवाpeedhee se peedhee too hee yahova
(भजन 90:1-7, 17)  

पीढ़ी से पीढ़ी... तू ही यहोवा, बना हमारा है धाम ।(2)
1.इससे पहले कि पहाड़़ उत्पन्न हुए, जगत और पृथ्वी बने;(2)

अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू ही, सनातन परमेश्वर है ।(2)

2.मनुष्य को लौटाकर चूर है तू करता, देता है मिट्टी बना;
और उस से कहता है - ‘आओ तुम लौटो, हे मनुष्यों के सन्तान’ ।

3.तेरी दृष्टि में साल है हजारों, कल जैसे बीता हुआ;
या जैसे होता है छोटा सा पहर, रातों का बीता हुआ ।

4.तू मनुष्यों को धारा में बहाता, स्वप्न ठहरते हैं वे;
भोर की घास नाई वे सब है बढ़ते, और पनप जाते हैं वे ।

5.वह भोर को फूलती और बढ़ती जाती, साँझ तक मुर्झा जाती है;
क्योंकि हम तेरे क्रोध से नाश हुए, जलजलाहट से घबराए ।

6.हमारे परमेश्वर की मनोहरता, हम पर अब प्रगट हो;
कर्म को हमारे हाथों के दृढ कर, दृढ कर, हमारे सब काम ।
25 परम प्रधान के स्थानों मेंparam pradhaan ke sthaanon mein
(भजन 91)  

1.परम प्रधान के स्थानों में, जो बैठा रहेगा;
वह सर्वशक्तिमान के छाए मेें, ठिकाना पाएगा;
उसके पंखों तले शरण मिलती मुझे, ढाँपे रहता परों के तले ।।(2)

2.यहोवा गढ़ है मेरा, और शरणस्थान वह है;
सच्चाई और ढाल मेरा प्रभु तू है, मेरा भरोसा प्रभु पर है ।

3.रात के भय से न डरेगा, न उजाडनेवाले दिन के तीरों से;
अन्धेरे में फैलनेवाली मरी से तू, कभी हरगिज नहीं डरेगा ।

4.तेरे निकट हजार गिरेंगे, दस हजार दहिने ओर गिरेंगे;
तेरी दया दिखाने से हे यहोवा, वे न पास मेरे आएँगे ।

5.यहोवा मेरा शरणस्थान, और मेरा बना है धाम;
इसलिए मेरे डेरे के निकट कभी, दुःख विपत्ति न आएगी ।

6.दूतों को वह आज्ञा देवेगा, रक्षा मार्ग में करने को;
अपने हाथों पर वे उठाएँगे तुझे, कि पैरों को ठेस न लगे ।

7.तू सिंह और नाग को कुचलेगा, अजगर और सिंह को लताडेगा;
तू ने मुझ से जो स्नेह किया है, मैं तुझ को छुडाऊँगा ।

8.उसने मेरा नाम पहिचाना है, ऊँचे स्थानों पर रहेगा वह;
जब पुकारे मुझे उŸार दूँगा उसे, संकट में रहूँगा साथ उसके ।
26 यहोवा का धन्यवाद है करनाyahova ka dhanyavaad hai karana
(भजन - 92)  

यहोवा का धन्यवाद है करना कैसा भला;(2)
हे परम प्रधान तेरे नाम को भजना कैसा भला ।।(2)

1.प्रातःकाल को तेरी करुणा, (2) रात को तेरी विश्वासयोग्यता का (2)
प्रचार करना, मेरे प्रभु, है कैसा भला । (2)

2.दस तार के बाजे और सारंगी पर, गम्भीर स्वर से वीणा के ऊपर;
गान करना, मेरे प्रभु, है कैसा भला ।

3.क्योंकि यहोवा तू ने मुझ को, आनन्दित किया कामों से अपने;
जय जयकार करूँगा, तेरे कामों के लिए ।

4.काम तेरे यहोवा कैसे बड़े है, कल्पनाएँ तेरी कैसी गंभीर है;
पशु समान मूढ इसे समझते न जरा ।

5.दुष्ट जो घास नाई फूलते फलते, सब अनर्थकारी प्रफुल्लित होते;
होते इसलिए, नाश हों वे सदा के लिये ।

6.यहोवा सदा विराजमान होगा, तेरे सब शत्रु नाश होंगे;
सब अनर्थकारी भी तितर बितर हो जाएँगे ।

7.सींग मेरा तू जंगली साँढ सा, शत्रुओं पर ऊँचा किया है;
टटके तेल से तूने मुझे अभिषेक किया ।
27 यहोवा के लिए गाएँyahova ke lie gaen
(भजन 95:1-7)

यहोवा के लिए गाएँ,
आओ यहोवा के लिए ऊँचे स्वर से हम गाएँ ।।(2)

1.अपने उद्धार की चट्टान का (2), करें हम सब जय जयकार;(2)
धन्यवाद उसका करते हुए (2), हम सन्मुख उसके आएँ । आओ...

2.हम भजन गाते हुए, जय जयकार उसका करें;
क्योंकि यहोवा महान है, सब देवताओं पर महाराजा है ।

3.गहरे स्थान पृथ्वी के, हाथों में उसी के हैं;
चोटियाँ पहाडों की भी, सब यहोवा ही की हैं ।

4.समुद्र भी है उसका, उसी ने उसको बनाया;
स्थल भी उसके हाथों का, रचा हुआ सारा है ।

5.आओ झुककर दण्डवत करें, सन्मुख अपने कर्ता के;
यहोवा के समीप आके, हम झुककर दण्डवत करें ।

6.क्योंकि वही है हमारा, उद्धारकर्ता परमेश्वर;
हम हैं उस की चराई की प्रजा, हाथों की भेड़ें है हम ।
28 यहोवा के लिए नया गीत गाओyahova ke lie naya geet gao
(भजन 96:1-8)  

यहोवा के लिए नया गीत गाओ,(2)
पृथ्वी भर के लोगों यहोवा के लिए गाओ;(2)
यहोवा को गाओ ।।

1.यहोवा के महान नाम को धन्यवाद देओ,(2)
दिन दिन उसके उद्धार का शुभ समाचार सुनाओ ।(2) यहोवा...

2.अन्यजातियों में उसकी महिमा सुनाओ,
आश्चर्य कामों का देश देश में तुम वर्णन करो ।

3.क्योंकि यहोवा महान और स्तुति के योग्य है,
वह तो सब देवताओं से भी अधिक भय के योग्य है ।

4.क्योंकि देश देश के सब देवता, वे तो मूरतें हैं;
परन्तु यहोवा ही ने स्वर्ग को बनाया भी है ।

5.उसके चारों ओर विभव और ऐश्वर्य भी है,
उसके पवित्रस्थान में सामर्थ और शोभा है ।

6.हे देश के कुलो, यहोवा के गुण गाओ;
यहोवा की महिमा और सामर्थ को तुम मानो ।

7.यहोवा के नाम की ऐसी महिमा तुम करो,
भेटें उसके योग्य लेकर आंगनो में आओ ।

8.पवित्रता की शोभा से तुम यहोवा को दण्डवत करो,
हे पृथ्वी के सारे लोगों कांपते तुम रहो ।
29 यहोवा का जय जयकारyahova ka jay jayakaar
(भजन - 100)  

यहोवा का जय जयकार हे सारी पृथ्वी करो,
आनन्द से यहोवा की आराधना करो ।।

1.जय जयकार तुम करते हुए सन्मुख उसके आओ,(2)
यहोवा ही परमेश्वर है, निश्चय यह तुम जानो ।(2)

2.उसी ने हमको बनाया और हम उसी के है,
हम उसकी प्रजा, उसकी चराई की भेड़ें है ।

3.फाटकों से धन्यवाद, आंगनों में स्तुति,
प्रवेश करो करते हुए, धन्यवाद और स्तुति ।

4.यहोवा भला और करूणा सदा उसकी,
और पीढ़ी पीढ़ी तक बनी है सच्चाई उसकी ।
30 हे सारी पृथ्वी के लोगोंhe saaree prthvee ke logon
(भजन - 100)

हे सारी पृथ्वी के लोगों, यहोवा की स्तुति तुम करो,
आनन्द करते सन्मुख आओ, जय जयकार सदा करो ।।

1.काम सामर्थी उसने किए है, पापी बचाने हुआ बलिदान,(2)
शत्रु के राज्य को तोड़ दिया है,(2)
उसको तुम सब याद करो, उसकी स्तुति तुम करो ।

2.स्मरण करो इस्राएली जो तुम हो, छुड़ाया तुमको मिस्र से उसने;
चालीस बरस तक तुमको चलाया,
ताकि कनान में प्रवेश करो, उसकी स्तुति तुम करो ।

3.मुसा को दिया सेवा में उनकी, यहोशू सदा जयवन्त जो हुआ;
शत्रु पर जयवन्त राज्य जीते वह,
महान काम को याद करो, उसकी स्तुति तुम करो ।

4.तुम जो प्रभु की निज प्रजा हो, लोहू से उसने खरीदा तुम्हें;
आत्मा बचाया, मण्डली बनाया,
उसकी योजना याद करो, उसकी स्तुति तुम करो ।

5.प्रभु बुलाता उसकी सेवा में, आज अवाज तुम उसकी सुनो;
अर्पण कर दो अपने को तुम,
दण्डवत उसको सब करो, उसकी स्तुति तुम करो ।
31 मेरे आत्मा ! प्रभु को धन्य कहmere aatma ! prabhu ko dhany kah
(भजन 103)  

मेरे आत्मा ! प्रभु को धन्य कह ! जो कुछ मुझ में है उसके नाम को,
धन्य सदा कह, पवित्र वह है, न भूलना उसके उपकार जो है ।।

1.वही तेरे पाप क्षमा करता है, और सब रोगों को चंगा करता है;
प्राण को तेरे नाश से बचाकर, दया का मुकुट बान्धता वह है ।

2.पूरब से पश्चिम दूर जितना है, हमारे पाप उतनी दूर किये है;
जैसे पिता अपने बच्चों पर करता, वैसे दया उसके डरवैयों पर है ।

3.उत्तम पदार्थ से वह तृप्त करता है, उकाब जैसे जवानी होती है;
दुःखी जनों का न्याय करता है, प्रभु दयालु और करुणामय है ।

4.सृष्टि हमारी प्रभु जानता है, मिट्टी हैं हम प्रभु स्मरण रखता है;
आयु हमारी फूल के समान जो, पवन लगते ही वह झड़ जाता है ।

5.सिंहासन स्वर्ग में स्थिर उसका है, राज्य प्रभु का सारी सृष्टि पर है;
वाचा हम पालते और आज्ञा मानते है, तू ही सदा प्रभु धन्य है ।
32 स्तुति प्रभु की, करो स्तुति प्रभु कीstuti prabhu kee, karo stuti prabhu kee
(भजन - 103) 

स्तुति प्रभु की, करो स्तुति प्रभु की, ... तुम
हे मेरे प्राण, हे मेरे सब कुछ ।।

1.उपकार उसके कभी न भूलना,
हे मेरे मन तू मत भूलना ... कभी (2), प्रभु को न कभी भूलना । (2)

2.तेरे अधर्म को क्षमा वह करता,
तेरे रोगों को चंगा करता ... प्रभु, है सब कुछ ठीक वह करता ।

3.वह तेरे प्राण को विनाश होने से,
कर के करुणा बचा लेता है... प्रभु, दया का मुकुट वह बान्धता है ।

4.उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है वही,
जवानी तेरी ऊकाब की नाई ... ताकि, हमेशा होती जाए नई ।

5.अनुग्रहकारी, करुणामय यहोवा,
सर्वदा वादविवाद न करेगा ... वह, वह हम पर क्रोध न करेगा ।

6.आकाश है ऊँचा पृथ्वी के ऊपर,
वैसे करुणा उसकी डरवैयों पर ... होती, होती है प्रबल वह उन पर ।

7.पूरब से पश्चिम जितनी दूर है,
पाप हमारे उतनी दूर किए हैं ... हम से, प्रभु ने दूर किए है ।

8.जैसे पिता अपने बच्चों पर करता,
वैसे यहोवा है दया करता ... बहुत, दया वह सन्तों पर करता ।

9.मिट्टी हैं हम प्रभु स्मरण है रखता,
सृष्टि हमारी वह है जानता ... क्योंकि, यहोवा है हमें जानता ।

10.हे यहोवा की सारी सेनाओं,
हे स्वर्गदूतों और हे टहलूओं ... सारे, हल्लेलूयाह गीत सब गाओ ।
33 बहती नदियों को यहोवाbahatee nadiyon ko yahova
(भजन - 107:33-43)

बहती नदियों को यहोवा बियावान बनाता है,
चश्मों को बहते पानी के खुश्क जमीन बनाता है ।

1.वह जमीन बनाता बंजर जो थी मेवेदार,
क्योंकि उसमें पापी रहते, बदी करते है बदकार ।

2.सूखे जंगल को जब चाहे तब वह झील बनाता है,
खुश्क जमीन में जब वह चाहे सोते आप निकालता है ।

3.भूखों और लाचारों को वह आप वहाँ बसाता है,
उनके रहने के लिए वह नगर तैयार करता है ।

4.ताकि वहाँ खेती करें, दाखबारी लगावें भी;
यों वे भांति भांति के फल पैदा करें वहाँ भी ।

5.जब आशीषें देता उनको, वे बहुत बढ़ जाते है;
उनके पशुओं को भी तू न कभी घटने देता है ।

6.उपद्रव में तकलीफ आती शोकित होके मरते है,
धीरे धीरे घटते जा कर बिलकुल ही दब जाते हैं ।

7.और हाकिमों पर अपमान का बोझा जब वह डालता है,
तब वे जंगल में बेराह को भटके भटके फिरते हैं ।

8.वह दरिद्र को छुड़ा कर ऊँचे पर बैठाता है,
और उनको भेड़ो के झुंड सा परिवार भी देता है ।

9.सीधे लोग यह सब कुछ देखकर पूर्ण आनन्दित होते हैं,
और सब कुटिल लोगों के मुंह आप ही बन्द हो जाते हैं ।

10.जो कोई बुद्धिमान हो इन बातों पर ध्यान लगाएगा,
और यहोवा की करुणा के कामों पर सोचेगा ।
34 हे ईश्वर मेरा हृदयhe eeshvar mera hrday
(भजन 108:1-7) 

हे ईश्वर मेरा हृदय, स्थिर है मैं गाऊँगा;
मैं अपनी आत्मा से, तेरा भजन करूँगा ।।(2)

1.सारंगी वीणा जागो, तड़के मैं भी उठूंगा;
देशों के मध्य में तेरा, धन्यवाद मैं करूँगा ।

2.क्योंकि तेरी करुणा, आकाश से है ऊँची;
आकाश मण्डल तक है, पहुँची तेरी सच्चाई ।

3.तू स्वर्ग के ऊपर हो, मेरे पिता परमेश्वर;
और तेरी महिमा प्रभु, होवे सारी पृथ्वी पर ।

4.इसलिए तेरे प्रिय, कि सब छुडाए जाएँ;
तू अपने दहिने हाथ से, बचा के बिनती सुन ले ।

5.अपनी पवित्रता में, परमेश्वर ने कहा है;
मैं प्रफुल्लित हो कर, शेकेम को बाँटूंगा ।
35 स्तुति करो तुम याह कीstuti karo tum yaah kee
(भजन 111:1-7) 

स्तुति करो तुम याह की (2), तुम स्तुति करो ।। (2)

1.सीधे लोगों की गोष्ठी और मण्डली में,(2)
यहोवा तेरा धन्यवाद (2), मन से मैं करूँगा ।(2)

2.काम यहोवा के कैसे बड़े है,
प्रसन्न जो रहते हैं उनसे, करते ध्यान सदा ।

3.काम उसके विभवमय और है प्रतापी,
और उसका धर्म सदा तक, बना ही रहेगा ।

4.आश्चर्य कामों का स्मरण कराया
अनुग्रहकारी और दयावन्त, तू ही है यहोवा ।

5.अपने डरवैयों को आहार दिया है,
वाचा को अपनी सदा तक, स्मरण वह रखेगा ।

6.अपने कामों का प्रताप दिखाया,
अपनी प्रजा को देने भाग, अन्यजातियों का ।

7.सच्चाई और न्याय उसके हाथों के काम है;
विश्वासयोग्य है उपदेश, सब यहोवा के ।
36 हजारों रूपयों और मुहरों से भलीhajaaron roopayon aur muharon se bhalee
(भजन 119:72-77) 

हजारों रूपयों और मुहरों से भली,(2)
तेरी व्यवस्था है मेरे लिये ।।(2)

1.तेरे हाथों से रचा मैं गया हूँ,(2)
हाथों से तेरे बनाया गया हूँ,(2)
मुझे समझ दे कि आज्ञा को सीखूं ।... हजारों

2.तेरे डरवैये सब होंगे आनन्दित,
देख कर वे मुझ को होंगे आनन्दित;
मैंने वचन पर है आश लगाई ।

3.हे यहोवा, मैं यह जान भी गया हूँ,
कि तेरे नियम सारे धर्ममय है;
अपनी सच्चाई से मुझे दुःख दिया ।

4.मुझे अपनी करुणा से शान्ति दे,
जैसे ही कि तू ने प्रेम से अपने;
दास को अपना वचन तू ने दिया ।

5.तेरी दया जब होवेगी मुझ पर,
जीवित रहूँगा मैं तेरे ही बल पर;
तेरी व्यवस्था से मैं तो सुखी हूँ ।
37 जब लोगों ने कहा मैंjab logon ne kaha main
(भजन - 122) 

जब लोगों ने कहा मैं हुआ प्रसन्न,(2)
यहोवा के आओं हम चलें भवन ।।(2)

1.हे यरूशलेम तेरे फाटकों के,(2)
भीतर हम आकर के खड़े हो गये ।(2) ... जब

2.यरूशलेम बना ऐसा नगर,
सटे हुए जिसके बने सारे घर ।

3.वहाँ गोत्र गोत्र के जाते हैं लोग,
यहोवा का धन्यवाद सब करने को ।

4.धरे है वहाँ सिंहासन न्याय के,
दाऊद के घराने के सब के लिये ।

5.यरूशलेम की शान्ति का वर माँगो,
तेरे प्रेमियों की कुशलता भी हो ।

6.शान्ति हो तेरी शहरपनाह के भीतर,
कुशल होवे तेरे महलों के भीतर ।

7.कारण अपने भाइयों और संगियों के,
मैं कहूँगा कि तुझ में शान्ति होवे ।

8.अपने यहोवा के भवन के निमित्त,
मैं तेरी भलाई का यत्न करूँ भी ।
38 यहोवा के सेवकों स्तुति करोyahova ke sevakon stuti karo
(भजन 135:1-14) 

यहोवा के सेवकों स्तुति करो, यहोवा नाम की स्तुति करो;
यहोवा के भवन के आंगनों में, खडे रहते जो तुम सब स्तुति करो ।।

1.याह की स्तुति करो क्योंकि वह भला है,
नाम उसका भजना, मनभाऊ है;
याकूब को अपने लिये चुना उसने,
इस्राएल को अपना निजधन माना है ।

2.यहोवा सब देवताओं से महान है,
यह तो सदियों से जानता हूँ मैं;
भूमि आकाश और गहिरे समुद्र में,
जो कुछ यहोवा चाहे करता है ।

3.पृथ्वी की छोर से कुहरे उठाता है,
उसी से वर्षा बरसाता है;
बिजली बनाता है महान यहोवा ही,
अपने भण्डार में से पवन निकालता है ।

4.मिस्र के सब मनुष्यों और पशुओं के,
पहिलौठों को उसने मार डाला है;
फिरौन और उसके सब कर्मचारियों में,
चिन्ह और चमत्कार उसने किये है ।

5.बहुत सी जातियाँ और सामर्थी राजाओं को,
प्रभु यहोवा ने नाश किया है;
एमोरियों के राजा सीहोन को, और
बाशान के राजा ओग को धात किया है ।

6.कनान के राजाओं को धात उसने किया है,
उनका देश इस्राएल को दे दिया है;
यहोवा नाम से स्मरण होता जिसका,
पीढ़ी-पीढ़ी वह बना रहता है ।

7.यहोवा ही अपनी सारी प्रजा का,
न्याय चुकाएगा, हल्लेलूयाह;
अपने दासों की दुर्दशा देखकर,
तरस खाएगा वही, हल्लेलूयाह ।
39 यहोवा की स्तुति करो की वहyahova kee stuti karo kee vah
(भजन 136:1-9, 26)

1.यहोवा की स्तुति करो की वह भला है ।
करुणा है उसकी अनन्तकाल ।।

2.प्रभुओं के प्रभु की स्तुति करो ।करुणा...

3.ईश्वरों के ईश्वर की स्तुति करो ।

4.उस को छोड़ कोई आश्चर्य-काम न करता ।

5.बुद्धि से अपनी आकाश है बनाया ।

6.जिस ने पृथ्वी को जल पर फैलाया ।

7.उस ने बड़ी-बड़ी ज्योतियाँ बनाई ।

8.दिन पर प्रभुता को सूर्य बनाया ।

9.रात पर प्रभुता को चाँद तारे बनाए ।

10.स्वर्ग के ईश्वर का धन्यवाद करो ।
40 यहोवा अनुग्रहकारी... औरyahova anugrahakaaree... aur
(भजन 145:8-17) 

1.यहोवा अनुग्रहकारी... और दयालु भी है,
विलम्ब से क्रोध करनेवाला... और अति करुणामय है ।
यहोवा सभी के लिए... भलाई करता रहता है,
और उसकी दया, उस की... सारी सृष्टि पर है ।

2.यहोवा, तेरी सृष्टि भी... धन्यवाद करेगी,
और तेरे सारे भक्त सदा... तुझे धन्य कहेंगे ।

3.वह तेरे राज्य की महिमा... की चर्चा करेंगे,
और तेरे पराक्रम के विषय... में बातें करेंगे ।

4.तेरे पराक्रम के कामों को... लोगों में सुनाएँ,
तेरे प्रतापी राज्य की... महिमा प्रगट करें ।

5.और तेरा राज्य भी सदा... युगानुयुग तक है,
हे प्रभु ! तेरी प्रभुता... सब पीढ़ियों की है ।

6.गिरते हुओं को यहोवा... सम्भालता भी है,
झुके हुए लोगों को भी... खड़ा वह करता है ।

7.आँखे सब लोगों की सदा... तेरी ओर रहेती है,
और उन्हें ठीक समय पर... तू आहार भी देता है ।

8.मुðी तू अपनी खोलता... प्राणियों को तृप्त करता,
यहोवा अपनी गति और... कामों में धर्मी है ।
41 हे ईश्वर मेरे राजाhe eeshvar mere raaja
(भजन 145:1)  

हे ईश्वर मेरे राजा, मैं तुझ को सराहूँगा;(2)
और तेरे नाम को सदा, मैं धन्य कहता रहूँगा ।।(2)

1.हर रोज तुझ को धन्य कहूँगा, स्तुति मैं तेरी करता रहूँगा ।

2.तेरे कामों का वर्णन करूँगा, भलाई तेरी मैं स्मरण करूँगा ।

3.उद्धार के गीतें मैं तो गाऊँगा, स्तुुति के नारे सदा मारूँगा ।

4.विजय के संगीत जग में सुनाऊँगा, जीवन भर उसको मैं तो भजूँगा ।

5.आशा से भरपूर सदा रहूँगा, अपने प्रभु को आते देखूँगा ।
42 हे प्रभावशाली तू ईश्वरhe prabhaavashaalee too eeshvar
(भजन 4:8)  

हे प्रभावशाली तू ईश्वर, सम्पूर्ण महिमा में तू है;
तेरा उद्धार प्रबल हुआ ।।(2)

1.मैं शान्ति से लेट कर सो जाऊँगा,(2)
चाहे दस हजार मुझे आके घेरे(2), उनसे कभी न डरुँगा ।(2)

2.हजारों मुझ से आके ये कहते थे,
छुटकारा उसका जरा भी नहीं है, तूने मुझे है सम्भाला ।

3.हे प्रभु तेरी उपस्थिति में जब,
रोया और माँगा मैं गिड़गिडा करके, अद्भुत उद्धार मुझे दिया ।

4.उद्धार यहोवा की ओर से मिलता है,
प्रभु की प्रजा को आशीषें मिलती, और जग में फुले वे फलते ।
43 हल्लेलूयाह, स्तुति करो हरदमhallelooyaah, stuti karo haradam
(भजन - 146)  

हल्लेलूयाह, स्तुति करो हरदम... यहोवा की ।।(2)

1.मैं सारे जीवन भर... स्तुति करूँगा यहोवा की;
जब तक बना रहूँगा मैं... स्तुति करूँगा यहोवा की ।

2.प्रधानों ऊपर तुम... न रखो भरोसा कभी;
मनुष्य के बल से तुझे... मुक्ति नहीं मिलती ।

3.जब प्राण निकल जाएँ... देह मिट्टी में मिल जाएँ;
एक दिन सब उसकी कल्पनाएँ... नाश हो जाएँ ।

4.वह क्या ही है धन्य... जिस का प्रभु है याकूब का;
जिस का भरोसा अपने... यहोवा के ऊपर है ।

5.आकाश ओ जल, भूमि... की चीजें बनाई भी;
वह अपना वचन पूरा सदा... करता रहेगा ।

6.वह न्याय है करता... तृप्त भुखों को करता;
वह कैदियों को कैद से... छूटकारा है देता ।

7.वह बीना है करता... वह शक्ति है देता;
और धर्मी लोगों से सदा है... प्रेम वह करता ।

8.परदेशी का सहारा... अनाथ और विधवा का;
दुष्टों के मार्ग को वह टेढा... है बना देता;

9.वह राज्य सदा करेगा... सिय्योन का परमेश्वर;
ऐ सारे लोगों, आओ भजो... यही है परमेश्वर ।
44 ईश्वर की स्तुति, तुम करोeeshvar kee stuti, tum karo
(भजन - 147) 

ईश्वर की स्तुति, तुम करो, स्तुति गाना है भला ।।

1.यरूशलेम को अब प्रभु... बसा रहा है वेग से,
और इकट्ठा कर रहा है... इस्राएली वंश को ।

2.नम्र लोगों को प्रभु... क्षण में चंगा कर रहा,
और उनके शोक पर अब... मल्हम पट्टी बाँधता ।

3.तारागण को है प्रभु... ध्यान से अब गिन रहा,
और उन में से हर एक का... नाम भी वह दे रहा ।

4.प्रभु अपना है महान... और अति सामर्थी भी,
उसकी बुद्धि है अधिक... ज्ञान अपरम्पार भी ।

5.नम्रों को सम्भालता... दुष्टों को है पछाडता,
अपने कर्ता-धर्ता को अब... धन्यवाद तुम करो ।

6.मेधों से आकाश को... हे यहोवा लादता,
और पृथ्वी के लिए वह... भारी वर्षा भेजता ।

7.घास पशुओं के लिए... पर्वत पर उपजा रहा,
आहार बच्चों के लिये वह... कौवों को भी दे रहा ।

8.न तो बल भी घोड़ों का... न मनुष्य का चाहता,
होता है प्रसन्न उनसे... भय जो उसका मानते ।

9.यरूशलेम यहोवा की... सिय्योन अपने राजा की,
स्तुति प्रशंसा करो... एक हो कर के सभी ।

10.तेरे लडके-बालों पर... है यहोवा की आशीष,
और तेरे फाटकों के... खम्भों को दृढ़ करता है ।

11.शान्ति देता है प्रभु... तेरे सिवानों में सदा,
तृप्त करता है सदा... उत्तम उत्तम गेहूँ से ।

12.वचन दिया याकूब को... विधियाँ इस्राएल को,
न किया व्यवहार ऐसा... अन्य जातियों से कभी ।
45 स्तुति करो याह की स्वर्ग-निवासियोंstuti karo yaah kee svarg-nivaasiyon
(भजन 148:1-11)  

1.स्तुति करो याह की स्वर्ग-निवासियों,
स्तुति यहोवा की ऊँचे स्थानों में करो ।
स्तुति करो, शुद्ध यहोवा की स्तुति करो ।।

2.स्तुति करो याह की हे सब दूतों,
स्तुति करो याह की सारी सेनाओं ।

3.स्तुति करो याह की हे सूर्य, चन्द्रमा,
स्तुति करो याह की ज्योतिर्मय तारों ।

4.स्तुति करो याह की हे ऊँचे आकाश,
स्तुति करो याह की ऊपर के जल ।

5.स्तुति करो याह की हे मगरमच्छों,
स्तुति करो याह की गहिरे समुद्रों ।

6.स्तुति करो याह की अग्नि और ओलों,
स्तुति करो याह की हिम और कुहरो ।

7.स्तुति करो याह की आज्ञाकारी बयारों,
स्तुति करो याह की पहाड़ो और टीलों ।

8.स्तुति करो याह की फलदायी वृक्षो,
स्तुति करो याह की सब देवदारों ।

9.स्तुति करो याह की हे वन-पशुओं,
स्तुति करो याह की घरेलू पशुओं ।

10.स्तुति करो याह की रेंगनेवाले जन्तुओं,
स्तुति करो याह की हे सब पक्षिओं ।

11.स्तुति करो याह की पृथ्वी के राजाओं,
स्तुति करो याह की जग के सब लोगों ।
46 याह की स्तुति, स्तुति ईश्वर कीyaah kee stuti, stuti eeshvar kee
(भजन 148:1-13)  

याह की स्तुति, स्तुति ईश्वर की, सूर्य और चन्द्रमा,
पवित्र दूतगण, सेना ईश्वर की ऊँचे स्थानों में,
करो... स्तुति यहोवा की ।।

1.हे ज्योतिर्मय तारागण सब, हे विशाल आकाश,
और भूलोक के निर्मल जल और ओलों, हिम, कुहरे,
महासागर और पर्वत, अग्नि, आँधी, मेघ, बयार,
प्रशंसा करो फलदाई वृक्ष, पिता ईश्वर की,
करो ... स्तुति यहोवा की ।

2.राजा, प्रजा, न्यायाधीश, हाकिम, राज्य-राज्य के लोग,
बालक, जवान और कुंवारी वृद्ध सारे जगत के,
वन पशु और पशु घरेलू, पक्षी गगन के,
प्रशंसा करो अद्भुत, महान, पिता ईश्वर की,
करो ... स्तुति यहोवा की ।
47 स्तुति करो तुम, स्तुति करोstuti karo tum, stuti karo
(भजन - 148)  

स्तुति करो तुम, स्तुति करो,(2)
याह की स्तुति तुुम करो (2) ... स्तुति करो ।

1.हे सब दूतों और सारी सेना,(2)
सूर्य, चन्द्रमा, ज्योतिर्मय तारे;(2)
प्रभु की स्तुति करो ।(2)

2.हे ऊँचे आकाश ऊपर के जो जल,
सिरजा तुम ही को आज्ञा देकर, ... सृजक की स्तुति करो ।

3.हे मगरमच्छो और गहरे सागर,
अग्नि, ओले, हिम, कुहरे, बयार, ... कर्ता की स्तुति करो ।

4.हे पर्वत, टीलों, वृक्षों, लताओं,
पशु, पक्षियों और रेंगनेवालों, ... मालिक की स्तुति करो ।

5.हे सब राजा, हाकिम, न्यायियों,
बालक, कुंवारी, जवान, वृद्धों, ... सम्राट की स्तुति करो ।

6.महान है वही आकाश के ऊपर,
ऐश्वर्य से भरपूर पृथ्वी ऊपर, ... ईश्वर की स्तुति करो ।

7.उद्धार का सींग है वह सब के लिए,
इस्राएल का भी भक्तों के लिये, ... पिता को दण्डवत करो ।
48 यहोवा की स्तुति सब गाएँ, गाएँyahova kee stuti sab gaen, gaen
(भजन 149:1-7)

यहोवा की स्तुति सब गाएँ, गाएँ, (2)
मण्डली में प्रभु की प्रशंसा सुनाएँ (2), सब मिल गाएँ, गाएँ ।

1.इस्राएल अपने कर्ता के कारण, सिय्योन निवासी राजा के कारण;
मगन वे होते आनन्द करते, (2) नाच नाच कर स्तुति सुनाएँ, गाएँ ।

2.डफ और वीणा मधुर बजाकर, भजन हम गाएँ स्तुति से भरकर;
प्रसन्न वह रहता अपनी प्रजा से, भक्त सदा उसकी प्रशंसा गाएँ, गाएँ ।

3.नम्र लोगों का उद्धार वह करता, और उन को सुन्दरता से भरता;
प्रफुल्लित होवें भक्त जो उसके, जयजयकार सब निश दिन गाएँ, गाएँ ।

4.होठों से ईश्वर की प्रशंसा वे गाएँ, हाथों में दोधारी तलवार वे रखें;
जातियों से पलटा लेने कारण, राज्य राज्य के लोग सजा पाएँ, गाएँ ।
49 यहोवा के लिए एक नया गीत गाओyahova ke lie ek naya geet gao
(भजन 149:1-5)

यहोवा के लिए एक नया गीत गाओ, यहोवा की स्तुति करो;
भक्तों की सभा में उसकी स्तुति गाओ, प्रशंसा उसकी करो ।

1.इस्राएल अपने सृष्टिकर्ता के... कारण आनन्दित होवेंगे;
सिय्योन के निवासी अपने राजा के... कारण मगन होवेंगे ।

2.नाचते हुए वे याह के नाम की... स्तुति बड़ाई करेंगे;
डफ और वीणा बजाते हुए वे... उसका भजन गायेंगे ।

3.क्योंकि यहोवा अपनी प्रजा से... बहुत ही प्रसन्न रहता है;
नम्र लोगों को वह अपने उद्धार से... शोभायमान करता है ।

4.भक्त लोग उसकी महिमा के कारण... प्रफुल्लित सदा होवेंगे;
आनन्द से भरकर वे अपने बिछौने पर... जयजयकार उसका करेंगे ।
50 रब्ब की होवे सना हमेशाrabb kee hove sana hamesha
(भजन - 150) 

रब्ब की होवे सना हमेशा,... रब्ब की होवे सना ।

1.रब्ब की होवे मदाह सराई (2), उसके नाम की सना;
उसके नाम की सना,... हमेशा रब्ब की होवे सना ।

2.रब्ब के घर में होवे सिताइश,... उसको हम्द ओ सना ।

3.कामों में है वह कैसा कादिर,... उसकी कुदरत बता ।

4.जय के जोर से फूंको नरसिंगे,... बर्बत वीणा बजा ।

5.तारदार साजों पे रागिनी छेडो,... डफ और तबले बजा ।

6.बांसुरी पर सुना सुरें सुरीली,... झन झन झाँझ बजा ।

7.सारे मिलकर ताली बजाओ,... गाओ रब्ब की सना ।
51 हल्लेलूयाह ! यीशु प्रभुhallelooyaah ! yeeshu prabhu
(भजन 148-150)

1.हल्लेलूयाह ! यीशु प्रभु, तुम सब स्तुति करो;
काम सामर्थी उसने किये, ध्यान देकर स्तुति करो;
सामर्थी काम उसने किये प्रभु, शक्तिमान की स्तुति करो;
सभों को जो ग्रहण करता, यीशु की स्तुति करो ।
राजाओं का राजा यीशु राजा, विश्व वर राज्य करता;
हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, ईश्वर की स्तुति करो ।।

2.सारंगी और वीणा के साथ, प्रभु की स्तुति करो;
पापों को लोहू से मिटा दिया, उसकी स्तुति करो;
नरसिंगे और झांझ बजाकर, प्रभु की स्तुति करो;
कभी भी वह न बदले, ईश्वर की स्तुति करो ।

3.सूरज और चाँद-सितारे, तुम सब स्तुति करो;
हृदयों को प्रकाशित किया, यीशु की स्तुति करो;
अग्नि, ओले, हिम, कुहरे, प्रभु की स्तुति करो;
कठिन हृदय तोड़ने वाला, उसकी स्तुति करो ।

4.हे जवानों और बालकों, ईश्वर की स्तुति करो;
सौंप कर जीवन सेवा के लिये, उसकी स्तुति करो;
हे प्राचीनों और हाकिमों, यहोवा की स्तुति करो;
अर्पो यीशु को धन-सम्पत्ति, तुम सब स्तुति करो ।

5.ऊपर के जल और गहरे सागर, ईश्वर की स्तुति करो;
आज्ञाकारी सेवक जो तुम, उसकी स्तुति करो;
हे स्वर्गदूत और सारी सेना, ईश्वर की स्तुति करो;
स्वर्ग में तुम सब जो सन्त हो, ईश्वर की स्तुति करो ।
52 दुःखों में सदा तेरी यहोवाduhkhon mein sada teree yahova
(भजन 20:1-5) 

दुःखों में सदा तेरी यहोवा सुने दुआ,
इज्जत तेरी बढाएगा याकूब का खुदा ।। (2)

1.मन्दिर से अपनी भेजे तेरे वास्ते मदद,(2)
सिय्योन से वह अपने सम्भाले तुझे खुदा ।(2)

2.भेटों को तेरी सारी सदा वह करे मंजूर,
और होम बलि को तेरी सदा वह करे मंजूर ।

3.पूरी करेगा सब जो तेरी दिल की चाहना,
पूरी करेगा वह तेरी सब दिल की कामना ।

4.गाएँगे गीत हे मसीह तेरी नजात के,
झण्डा करेंगे अपने यहोवा ही का खड़ा ।

5.दरखास्ते वह सब सदा पूरी करेगा आप,
अपनी पवित्रता से ही याकूब का खुदा ।

6.अपने दहिने हाथ के सामर्थी कामों से,
उत्तर वह देगा स्वर्ग से छुटकारा देने में ।
53 मेरे खुदा ! मेरे खुदा !mere khuda ! mere khuda !
(भजन 22:1-10)  

मेरे खुदा ! मेरे खुदा ! ... तू ने मुझे छोड़ दिया ?(2)
मेरी मदद से दूर क्यों... रहता है तू मेरे खुदा ?(2)

1.दिन को पुकारता हूँ मैं... जवाब मुझे नहीं दिया;(2)
रातों को चूप रहूँ न मैं... क्यों फिर जवाब नहीं दिया ?(2)

2.प्रशंसा के सिंहासन पर... बैठा तू इस्राएल के है;
तू ही केवल पवित्र है... पूरखों ने तेरी आस की ।

3.सब जो भरोसा रखते थे...  उद्धार वे तुझ से पाते थे;
जब दुहाई उन्होंने दी... तू ने उन्हें बचाया भी ।

4.तुझ पर भरोसा रखते थे... लज्जित कभी न होते थे;
परन्तु प्रभु मैं कीडा हूँ... मैं तो मनुष्य नहीं हूँ ।

5.नाम धराई मनुष्यों में... अपमान मेरा लोगों में है;
वे सब जो देखते मुझे... ठट्ठा मेरा भी वे करते हैं ।

6.मुँह मेरा भी चिढ़ाते हैं... और सिर हिला के कहते है;
‘‘भरोसा कर यहोवा का... वही तुझे छुड़ाएगा ।’’

7.पेट से बाहर लाया मुझे... आस रखना सिखलाया मुझे;
गर्भ से तू मेरा ईश्वर है... जन्म से पालनहार तू है ।
54 यहोवा अपने मुख को, मुझ सेyahova apane mukh ko, mujh se
(भजन 27:9-14) 

यहोवा अपने मुख को, मुझ से छिपा न रखो;
क्रोध करके अपने दास को, प्रभु न दूर हटाओ ।।

1.प्रभु तू मेरा रक्षक, तू ही मेरा सहायक;
मुझ को कभी न छोड़ो, मुझ को कभी न त्यागो ।

2.माता-पिता गर मेरे, मुझ को छोड़ भी देवें;
प्रभु यहोवा मेरा, मुझ को सम्भाल लेगा ।

3.द्रोहियों के कारण से, अगुवाई मेरी करो;
मार्ग अपना मुझे सिखलाओ, सरल राह चलाओ ।

4.मेरे विरुद्ध गर उठे, सतानेवाले झूठे;
मेरे विरोधियों के, हाथ में मुझे न छोड़ो ।

5.पृथ्वी पर जीवितों की, देखूं भलाई याह की;
विश्वास मुझे ये न होता, तो मूर्छित मैं हो जाता ।

6.धीरज हमेशा धर तू, हृदय में दृढ़ रह तू;
प्रभु यहोवा ही का, इन्तजार करते रह तू ।
55 झिडके क्यों तू कोप मेंjhidake kyon too kop mein
(भजन 38:1-9) 

झिडके क्यों तू कोप में,... मुझ को ऐ खुदा;
और क्रोध में अपने क्यों,... देवे मुझे सजा ?(2)

1.मुझे तेरे तीर भी अब जोर से लगे है,(2)
हाथ तेरे जो भारी अब मेरे ऊपर है ।(2)

2.कोप तेरे से है यह मेरा तन बीमार,
हड्डियाँ बेआराम है, हूँ बड़ा गुनाहगार ।

3.सिर से पार भी हो गए मेरे सब गुनाह,
कैसे मैं उठा सकूं यह भारी है गुनाह ।

4.दुर्गन्ध है बन गए ये धाँव मेरे सब ही,
सड़ गए हैं ये सब ही मूढ़ता है मेरी ।

5.कुबड़ा होकर झुक गया मैं, रोता सुबह शाम;
जलन है कमर में, शरीर बेआराम ।

6.मैं लाचार हो गया, बैठा जाता हूँ;
दिल मेरा बेचैन है, कराहता रहता हूँ ।

7.दिल की प्रभु चाहना, सब तेरे सन्मुख है;
वेदनाएँ सब मेरी, न तुझ से छीपी हों ।
56 मैं धीरज से आशा रखकेmain dheeraj se aasha rakhake
(भजन 40:1-4) 

मैं धीरज से आशा रखके... यहोवा की करता था इन्तिजारी;
तब उसने मेरी ओर झुक के... सुनी मेरी हाँ सारी दूहाई ।।

1.उसने मुझे विनाश के गढ़े और... दलदल की किचड़ में से निकाला;
चट्टान पर खड़ा करके मुझे... स्थिर किया है पैरों को मेरे ।

2.प्रभु ने गीत एक नया सिखाया... की जिसके लिये स्तुति हो उसकी;
बहुतेरे यह देखकर डरेंगे... और उस पर भरोसा सब रखेंगे ।

3.वह आदमी है बड़ा ही धन्य... भरोसा जिसका है यहोवा पर;
धमण्डियों की सलाह न लेता... न झूठे लोगों की ओर मुड़ता ।
57 प्यास में हाँफे जैसे हरणीpyaas mein haanphe jaise haranee
(भजन 42:1-5) 

प्यास में हाँफे जैसे हरणी पानी के लिए,(2)
वैसे ही हाँफता हूँ, हे प्रभु मैं तेरे लिए ।।(2)

1.आत्मा मेरी प्यासी है जीवते पिता परमेश्वर की;(2)
उस से कब भेंट करुँ, स्तुति करुँ प्रभु यीशु की । (2)... प्यास

2.रात ओ दिन खाना मेरा मेरे आँसू देखो बने;
पूछते सब लोग जब है, तेरा यहोवा है कहाँ ?

3.याद कर बातों को यह मेरा दिल भर आता है;
जाता था उत्सव मनाने के लिए मैं दिल के साथ ।

4.जाता था घर में यहोवा के मैं भाईयों के साथ;
जय-जयकार करते हुए जाता था मैं भीड़ के साथ ।

5.इसलिए आशा सारी यीशु पर लगाए तू रह;
दर्शन से पाके उद्धार करता जा उसको धन्यवाद ।
58 अपनी ज्योति, अपनी सच्चाईapanee jyoti, apanee sachchaee
(भजन 43:3-5)  

अपनी ज्योति, अपनी सच्चाई,... प्रकट अब होने दे;(2)
हे यहोवा मेरे ।।

1.क्योंकि वही मुझे चलाए,(2)... और तेरे निवासस्थानों में,
पहुँचाए, तेरे पर्वत पर,(2)... हे यहोवा मेरे... अपनी ।

2.तब में वीणा बजाऊँगा... धन्यवाद तेरा मैं करूँगा,
ओ... होशाना, होशाना... हे यहोवा मेरे... अपनी ।

3.गिरा... क्यों जाता है मेरे प्राण... भरोसा यहोवा पर रख,
आशा मेरी सदा उसमें है... हे यहोवा मेरे... अपनी ।
59 दया कर हे प्रभुdaya kar he prabhu
(भजन 51:1-7,12,13)

1.दया कर हे प्रभु... पाप मिटा सब मेरे;
करुणा के मुताबिक... अनुग्रह दे मुझे(2), दया कर हे प्रभु ।

2.भली भाँति धोके... मेरी कर सफाई;
मुझ को कर तू पावन... पाप मिटा सब मेरे ।दया...

3.मैं तो जानता हूँ सब... अपने अपराधों को;
मेरा पाप निरन्तर.. मेरे सन्मुख रहता ।

4.तेरे ही विरोध में... पाप मैं ने किया है;
किया मैं ने बुरा... दृष्टि तेरी में है ।

5.अपने बोलने में तू... धर्मी भी ठहरा है;
और तू न्याय करने में... निष्कलंक ठहरा है ।

6.देख अधर्म के साथ मैं... उत्पन्न हुआ भी हूँ;
गर्भ में अपनी माँ के... पाप के साथ पड़ा हूँ ।

7.देख प्रभु तू चाहता... हृदय में सच्चाई;
अन्तःकरण में मेरे... ज्ञान मुझे सिखा दे ।

8.पावन कर तू जूफे से... शुद्ध तब मैं होऊँगा;
धो दे मुझे ऐसे... हिम से श्वेत बनूँगा ।

9.हर्ष उद्धार का अपने... मुझे फिर से दे दे;
मुझे तू सम्भाल ले... उद्धार आत्मा देके ।

10.तब मैं अपराधियों को... तेरा मार्ग सिखाऊँ;
ऐसे पापियों को... तेरी और फिराऊँ ।
60 ढूंढूँगा मैं यत्न सेdhoondhoonga main yatn se
(भजन 63:1-8)  

ढूंढूँगा मैं यत्न से... तू ही है मेरा ईश्वर ।।(2)

1.सूखी ऊसर भूमि पर... पानी जहाँ नहीं है;(2)
मन मेरा प्यासा तेरा... देह अभिलाषी तेरा ।(2)... ढूंढूँगा

2.तेरे पवित्र स्थान में... इस तरह दृष्टि लगाई;
कि सामर्थ और महिमा... देखूं वहाँ मैं तेरी ।

3.तेरी करुणा प्रभु... जीवन से भी है उत्तम;
प्रशंसा मैं करूँगा... जीवन भर धन्य कहूँगा ।

4.लेकर के नाम तेरा... हाथों को मैं उठाऊँ;
तृप्त जान मेरी होवे... ज्यों चिकने भोजन खावे ।

5.स्तुति तेरी करूँगा... होठों से हे प्रभु मैं,
बिस्तर पर जब पडूँगा... स्मरण तेरा करूँगा ।

6.रातों के हर पहर में... ध्यान तेरा मैं करूँगा,
तू मेरा हे सहायक,... मैं जय जयकार करूँगा ।

7.मेरा मन तेरे पीछे... पीछे लगा चलता है,
तू मुझे दहिने हाथ से... अपने सम्भालता है ।
61 ईश्वर हम पर अनुग्रह करेeeshvar ham par anugrah kare
(भजन - 67)  

ईश्वर हम पर अनुग्रह करे... आशीष हम को देवे,(2)
अपने मुँह का पूरा प्रकाश... हम पर चमकाए ।।(2)

1.तेरी गति सब पृथ्वी के ऊपर... प्रगट भी हो जाए,
जातियों में भी तेरी मुक्ति... पूरी पहचानी जाए ।

2.हे परमेश्वर देश देश के लोग सब... धन्यवाद तेरा करें,
देश देश के लोग सब मिलकर तेरा... धन्यवाद सारे करें ।

3.राज्य राज्य के सब आनन्द करें... जय जयकार मनाएँ,
क्योंकि तू देश देश के लोगों का सारे,... न्याय धर्म से करें ।

4.हे परमेश्वर देश देश के लोग सब... धन्यवाद तेरा करें;
देश देश के लोग सब मिलकर तेरा... धन्यवाद सारें करें ।

5.भूमि ने अपनी उपज हमें दे दी... बढती है कैसी घनेरी,
प्रभु जो है हमारा परमेश्वर... आशीषें देगा भारी ।

6.परमेश्वर हमको आशीष देगा... स्वर्गीय स्थानों में भारी,
पृथ्वी भर की जातियाँ सारी... डर मानेंगी भारी ।
62 चिल्ला-चिल्ला कर यहोवा कीchilla-chilla kar yahova kee
(भजन 77:1-14)

1.चिल्ला-चिल्ला कर यहोवा की दोहाई दूँगा,
दोहाई यहोवा की दूँ, वह कान लगाएगा ।

2.संकट के दिन प्रभु की खोज में मैं लगा रहा,
रात को मेरा हाथ फैला रहा, ढीला न हुआ ।

3.परमेश्वर का स्मरण कर के मैं कहरता हूँ,
मैं चिन्ता करते करते मूर्छित हो चला हूँ ।

4.प्रभु तू मुझे झपकी लगने नहीं देता,
मैं घबराया हूँ ऐसे मुंह से शब्द न निकलता ।

5.प्राचीन काल के दिनों को मैं स्मरण करता हूँ,
रात के समय मैं अपने गीत को स्करण करता हूँ ।

6.संपूर्ण हृदय से मैं तेरा ध्यान करता हूँ,
मन ही मन मैं भली भाँति-विचार करता हूँ ।

7.क्या यहोवा युग-युग के लिए छोड़ देगा ?
क्या यहोवा फिर कभी सन्तुष्ट न होगा ?

8.क्या यहोवा की करुणा जाती रही है ?
क्या यहोवा का वचन निष्फल हुआ है ?

9.क्या यहोवा अनुग्रह करना भूल गया ?
क्या यहोवा ने क्रोध करके रोक रखी दया ?

10.मेरी दुर्बलता में तो मैं ने ऐसा सोच लिया,
क्या परम प्रधान का दाहिना हाथ बदल गया ?

11.मैं याह के बड़े कामो की चर्चा करुँगा,
प्राचीन काल के अद्भुत कार्य निश्चय स्मरूंगा ।

12.प्रभु मैं तेरे कामों पर ध्यान करूँगा,
मैं तेरे सब बड़े कामों का स्मरण करूँगा ।

13.हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है,
यहोवा परमेश्वर के तुल्य कौन सा देवता है ?

14.अद्भुत कार्य करनेवाला ईश्वर तू ही है,
तू ने अपनी शक्ति देश के लोगों पर प्रगट की है ।
63 मैं कान लगाकर सुनूँगाmain kaan lagaakar sunoonga
(भजन 85:8-13) 

मैं कान लगाकर सुनूँगा... यहोवा क्या कहे;(2)
शान्ति की बातें कहेगा... आपनी भक्त प्रजा से ।।(2)

1.उद्धार का समय उसके... डरवैयों के निकट है;
हमारे देश में तब महिमा...का निवास होगा ।

2.करुणा और सच्चाई भी... आपस में मिली है;
धर्म और मेल ने आपस में... चुम्बन भी किया है ।

3.सच्चाई उगती पृथ्वी से... तब सुन्दर लगती है;
धर्म जब स्वर्ग से झुकता है... तब जीवन लाता है ।

4.उत्तम पदार्थ तब यहोवा... हमको देवेगा;
तब भरपूर उपज देवेगी... हमारी भूमि भी ।

5.धार्मिकता उसके आगे आगे... चलती जाएगी;
और उसके पद-चिन्हों के ऊपर... मार्ग बनाएगी ।
64 संकट में मैंने प्रभु सेsankat mein mainne prabhu se
(भजन 120) 

संकट में मैंने प्रभु से बिनती की ।।(2)

1.और उसने मेरी सून ली...a उत्तर दिया भी जल्दी;
झूठे मूँह से तू बचा प्रभु जल्दी ।(2) संकट

2.रक्षा कर छली जीभ से... मैं क्या करुँ छली जीभ से ?
देऊँगा तेज तीर झाऊ के अंगारे ।

3.है बसना मेरा मेशेक में... केदार के तम्बुओं में;
रहना मेरा है मेल के बैरियों में ।

4.चाहता हूँ मेल मैं उन से... न बातें वे मेरी समझते;
बोलते ही मेरे वे मुझ से युद्ध करते ।
65 आँखे पर्वत की तरफ लगाऊँaankhe parvat kee taraph lagaoon
(भजन - 121)  
आँखे पर्वत की तरफ लगाऊँ,... मदद कहाँ से अपनी मैं पाऊँ ?(2)

1.मदद यहोवा से मुझे मिलती,(2)
जिसने आकाश और पृथ्वी बनाई ।(2) ... आँखे

2.तेरा पाँव कभी टलने न देगा... तेरा रक्षक कभी न ऊँघेगा ।

3.सुन इस्राएल का जो रक्षक है... वह न ऊँघेगा और न सोएगा ।

4.यहोवा ही तेरा रक्षक है... यहोवा दहिनी ओर तेरी आड है ।

5.दिन को हानि न हो तुझे धुप से... प्राण तेरे की रक्षा वह करे ।

6.यहोवा तेरे आने जाने में... अब से रक्षा सदा तेरी करे ।
66 हे यहोवा गहरे स्थानों सेhe yahova gahare sthaanon se
(भजन - 130)  

हे यहोवा गहरे स्थानों से... तुझ को मैंने पुकारा है;
प्रभुजी मेरी प्रार्थना को सुनकर... हृदय का आग्रह अब तू सुन ।।

1.हे प्रभु जी तू दोषों को, ध्यान पूर्वक यदि देखे तो;
कौन तब खड़ा रह सकेगा...

2.तू क्षमा करने वाला है, और अनुग्रह का धनी है;
ताकि तुझ से हम भय माने...

3.मैं यहोवा की बाट जोहूँ, प्राण भी मेरा राह देखे;
आशा मेरी वचन पर है...

4.जैसे पहरुए भोर के लिए, बाट वे जोहते रहते है;
उनसे अधिक मैं तेरे लिए...

5.इस्राएल अब यहोवा पर, आशा तू लगाये रह;
क्योंकि वही करुणामय है...

6.इस्राएल को यहोवा ही, सारे अधर्म के कामों से;
सम्पूर्ण छुटकारा देगा... ,
67 हे यहोवा तू ने मुझ कोhe yahova too ne mujh ko
(भजन - 130)  

हे यहोवा गहरे स्थानों से... तुझ को मैंने पुकारा है;
प्रभुजी मेरी प्रार्थना को सुनकर... हृदय का आग्रह अब तू सुन ।।

1.हे प्रभु जी तू दोषों को, ध्यान पूर्वक यदि देखे तो;
कौन तब खड़ा रह सकेगा...

2.तू क्षमा करने वाला है, और अनुग्रह का धनी है;
ताकि तुझ से हम भय माने...

3.मैं यहोवा की बाट जोहूँ, प्राण भी मेरा राह देखे;
आशा मेरी वचन पर है...

4.जैसे पहरुए भोर के लिए, बाट वे जोहते रहते है;
उनसे अधिक मैं तेरे लिए...

5.इस्राएल अब यहोवा पर, आशा तू लगाये रह;
क्योंकि वही करुणामय है...

6.इस्राएल को यहोवा ही, सारे अधर्म के कामों से;
सम्पूर्ण छुटकारा देगा... ,
68 यहोवा, तु ने मुझ कोyahova, tu ne mujh ko
(भजन 139:1-10) 

यहोवा, तु ने मुझ को, जांच परख कर जान लिया है;
तू मेरा उठना बैठना और विचार भी सब ही जानता है ।।

1.तू मेरे चलने-लेटने की पूरी छानबीन करता है,
तू मेरे चाल-चलन का पूरा भेद भी खूब जानता है ।

2.तू मेरे मूँह की बात को पहेले ही से जानता है,
तू मुझ को घेर कर अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है ।

3.ये बातें मेरे लिए है कठिन, मेरी समझ से बाहर है;
तेरी आत्मा से छिप कर तेरे सन्मुख से किधर जाऊँ मैं ?

4.यदि मैं स्वर्ग पर चढूँ तो प्रभु वहाँ भी तू है,
यदि अधोलोक में बिछौना बिछाऊँ, वहाँ भी तू है ।

5.यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़कर समुद्र पार करुँ,
फिर भी अपने दाहिने हाथ से पकड़कर मुझे चलाता प्रभु ।
69 मुबारक है जो मानता न सलाहmubaarak hai jo maanata na salaah
(भजन 1:1-6)  

1.मुबारक है जो मानता न सलाह शरीरों की,(2)
और पापियों की राहों में न खड़ा होता भी ।(2)

2.ठठोलियों की मण्डली में न बैठता कभी भी,
यहोवा की व्यवस्था में प्रसन्न्ाता है उसकी ।

3.वह उस दरख्त की मानिन्द है जो होवे नदी पास,
जो अपने वक्त पर फलता है, न कभी होता नाश ।

4.वह अपने सारे कामों में पाता सफलता भी;
पर जैसे भूसा उड़ता है, दुष्ट लोग उड़ जाते भी ।

5.अदालत में दुष्ट लोग क्या अपना मुँह दिखायेंगे ?
और धर्मियों की मण्डली में शरीर न ठहरेंगे ।

6.क्योंकि यहोवा जानता है राह धर्मी बन्दों की;
पर सत्यानाश हो जाएगी जरुर सब दुष्टों की ।
70 जाति जाति के लोगjaati jaati ke log
(भजन 2:1-9)

1.जाति जाति के लोग,
वे हुल्लड है क्यों मिलकर मचाते ?...जाति
देश देश के लोग क्यों इरादे बान्धते,
प्रभु यीशु ख््िराष्ट के विरोध ।...जाति

2.यहोवा के विरोध,
और उस के अभिषिक्त राजा के विरोध;...यहोवा
पृथ्वी के राजा खड़े होते है,
हाकिम आपस में सलाह करते ।...जाति

3कहते है... ‘‘आओ तोड़ें
उसके बन्धे हुए सब मजबूत बन्धन;...कहते है
और उसकी रस्सियों को हम फेंके,
अपने ऊपर से उतार के सब ।’’...जाति

4.स्वर्ग में विराजमान जो,
वह उन पर हँसेगा, ठठ्ठे मारेगा;...स्वर्ग
कोप वह करके बातें करेगा,
क्रोध में आकर उनको मारेगा ।...जाति

5.‘‘परन्तु मैं राजा को,
अब बैठा चूका हूँ सिय्योन पर अपने;’’...परन्तु
उसके वचन को प्रचार करुँगा,
उसने कहा, ‘‘तू बेटा है मेरा ।’’...जाति

6.उसने कहा फिर वह,
‘‘आज मैं ने तुझे है जन्म दिया भी;...उसने
मुझ से तू माँग अब जाति के लोग सब,
उनको मैं तुझे जरुर दे दूँगा ।’’...जाति

7.‘‘दूर दूर के देशों को,
मैं तेरी निज भूमि जरुर करूँगा;...दूर
लोहे के आसा से तू तोड़ेगा,
बर्तन की मानिन्द चूर चूर करेगा ।’’...जाति,
71 आओ बच्चों, सुनो, मैं सुनाऊँaao bachchon, suno, main sunaoon
(भजन 34:11-18)  

आओ बच्चों, सुनो, मैं सुनाऊँ, यहोवा-भक्ति तुम को सिखाऊँ ।।

1.है कौन इन्सान जीवन को चाहता? दीर्घायु तक भलाई देखना चाहता?

2.अपनी जीभों को दोष से बचा लो, अपने होंठों को झुठ से बचा लो ।

3.बुराई छोड़ो, भलाई तुम करो, शान्ति ढूंढ़ो, पीछा उसका करो ।

4.यहोवा दृष्टि है धर्मियों पर, कान है उसके उनकी दोहाई पर ।

5.यहोवा दुष्टों के है विरोध में, याद पृथ्वी से उनकी मिटाने ।

6.धर्मियों की वह सुनता दोहाई, सभी दुःखों से देता रिहाई ।

7.हृदय टूटे हुये होते जिन के, यहोवा रहेता है समीप उनके ।

8.पिसे हुओं का उद्धार वह करता, विपत्तियों में उनको सम्भालता ।
72 कुड़कुड़ाना न कभी... तूkudakudaana na kabhee... too
(भजन 37:1-25)  

कुड़कुड़ाना न कभी... तू... कुकर्मियों का काम देखकर,
डाह न करना कभी... तू... कुटिलता करनेवालों को देखकर;
कुड़कुड़ाना न कभी ।।

1.धास की नाई ही... वे सब... झड़ कट जाएँगे,
हरी घास की नाई ही... वे सब... मुर्झा जायेंगे ।

2.भरोसा यहोवा... पर रख... और भलाई कर,
देश में तू बसा रह... मन को... सच्चाई में कर स्थिर ।

3.यहोवा ही को तू... अपने... सुख का मूल जान,
वही पूरा करेगा... तेरे... तन के सारे अरमान ।

4.यहोवा पर ही... तू छोड़... मार्ग की चिन्ता,
भरोसा उस पर रख... वही... सफल सब करता ।

5.तेरा धर्म और तेरा... न्याय भी... प्रगट वह करेगा,
सन्मुख उसके चुप रह... धीरज से... आसरा रख उसका ।

6.जलजलाहट छोड दे... और तू... क्रोध से रह परे,
कुढ़ना नहीं जरा भी... उस से निकलेगा बुरा ।

7.धर्मी के विरोध में... दुष्ट... बुरी युक्ति करता,
प्रभु उस पर हँसेगा... क्योंकि... उसका दिन भी आता ।

8.धर्मी के पास हो... यद्यपि... माल बहुत ही कम,
दुष्टों के बहुत धन से... वही... होता है उत्तम ।

9.धर्मी जन विपत्ति के... समय... लज्जित न होंगे,
अकाल के दिनों भी... वे सब... तृप्त रहेंगे ।

10.मनुष्य की गति को... यहोवा... दृढ़ करता है,
और उसके चलन से... वह प्रसन्न रहता है ।

11.यहोवा थामे रहता... सदा... हाथ धर्मी का,
इसलिये वह गिरे... तौभी... पड़ा न रहेगा ।

12.धर्मी मनुष्य को... यहोवा... कभी नहीं त्यागा,
भीख माँगता वंश... उसका... मैं ने नहीं देखा ।
73 सब देश के निवासियोंsab desh ke nivaasiyon
(भजन 49:1-9)  

सब देश के निवासियों, तुम कान लगाकर सुनो ।।

1.संसार के सब निवासीयों, क्या ऊँच हो क्या नीच हो;
धनी हो या कंगाल हो, तुम कान लगाकर सुनो ।

2.सब बातें मेरे मुँह की बुद्धि विवेक की होगी,
हृदय की बातें समझ की, तुम कान लगाकर सुनो ।

3.नीति वचन सुनूंगा, और हाथ में लिए वीणा;
गुप्त बात प्रकाशित करुँगा, तुम कान लगाकर सुनो ।

4.बुराईयाँ दुर्जनो की, विपत्ति में मुझे घेरें;
तौभी ड़रूं क्यों उनसे, तुम कान लगाकर सुनो ।

5.सम्पति पर भरोसा, घमण्ड़ भी जो करते;
भाई को छुड़ा न सकते, तुम कान लगाकर सुनो ।

6.कोई नहीं है ऐसा, भाई को अपने छुड़ाए;
कि सदा जीवित रहे, तुम कान लगाकर सुनो ।

7.भाई के सन्ती कोई, परमेश्वर के सन्मुख में;
प्रायश्चित कर न सकते, तुम कान लगाकर सुनो ।

8.प्राण की छूड़ौती उनके, बहुत ही भारी है;
चुका कभी न सकेंगे, तुम कान लगाकर सुनो ।
76 हे यहोवा तू मेरा शरणस्थानhe yahova too mera sharanasthaan
(भजन 91)  

हे यहोवा तू मेरा शरणस्थान ठहरा है;
परम प्रधान को अपना धाम तू ने जो माना है ।।

1.इसलिए कोई विपत्ति भी तुझ पर न पडेगी;
और कोई पीड़ा डेरे के निकट न आएगी ।

2.क्योंकि वह तेरे निमित्त आज्ञा देगा दुतों को,
कि तेरे सारे मार्गो में वे तेरे रक्षक हों ।

3.वे तुझ को हाथों हाथ उठा ही लेवेंगे,
ऐसा न हो की पावों को पत्थर से ठेस लगे ।

4.तू सिंह और नाग को बिलकुल ही कुचल डालेगा,
जवान सिंह और अजगर को तू ही लताडेगा ।

5.उस ने जो मुझ से स्नेह किया उसे छुडाऊँगा,
मेरे नाम को जान लेने से ऊँचे बैठाऊँगा ।

6.जब वह मुझ को पुकारे तब मैं उन की सुनूँगा,
संकट से रक्षा करके महिमा बढ़ाऊँगा ।

7.मैं उसको लम्बी आयु से भी तृप्त करूँगा,
और अपने किए उद्धार का दर्शन दिलाऊँगा ।
77 सिय्योन की बन्धुवाई कोsiyyon kee bandhuvaee ko
(भजन 126)  

सिय्योन की बन्धुवाई को, लौटा ले आया जब प्रभु;
स्वप्न देखनेहारे से, हो गये थे हम तब प्रभु ।।

1.हमारा मूँह हँसी से, और आनन्द से भर गया;
हमारी जीभ खुशी से, जय जयकार करने लगी ।

2.जाति-जाति के बीच में, कहा जाता था यह कि;
यहोवा ने इन के साथ, बड़े बड़े काम किये है ।

3.यहोवा ने हमारे, साथ महान काम किये है;
इसलिए हम सब अभी, बहुत ही आनन्दित हुए है ।

4.दक्षिण देश के सोते की, नाई अब तू हे प्रभु;
हमारे बन्धुओं को, लौटा ले आ अब तू प्रभु ।

5.आँसू बहाते हुए, बीज जो बोते रहते हैं;
जय जयकार करते हुए, सब ही लवने वे पाएँगे ।

6.चाहे बोनेवाला बीज, लेकर रोता हुआ जाए;
परन्तु फिर पुलियाँ लिये, आनन्द से वह लोट आएगा ।
79 देख क्या ही भली बात यह हैdekh kya hee bhalee baat yah hai
(भजन 133)  

देख क्या ही भली बात यह है... और खूब मनोहर भी;(2)
जब दिल से भाई आपस में... मिलकर रहें सदा ।(2)

1.वह उत्तम तेल की नाई है... जो सिर पर पडा हो;(2)
बहकर हारुन की दाढ़ी से... कोर तक पहुँचा हो ।(2)

2.हर्मोन की ओस की नाई जो... सिय्योन पर पड़ती हो;
ऐसी ही होती है आशीष... भाईयों की संगत पर ।

3.यहोवा ही ने वहाँ पर... सदा के जीवन की;
प्रतिज्ञा उस ने भी है की... भाईयों के लिए ही ।
80 आदि और अन्त है तूaadi aur ant hai too
(भजन 127 और 128)  

यदि यहोवा घर न बनाए,
बनानेवालों का परिश्रम व्यर्थ ही सब होगा;
यहोवा नगर की रक्षा न करें,
तो रखवालों का जागना व्यर्थ ही तब होगा ।।

1.तुम जो सवेरे-सवेरे उठते हो,
देरी से सोते हो... तुम जो... देरी से सोते हो;
और दुःख भरी रोटी खाते हो,
यह सब व्यर्थ ही है... तुम्हारे लिये... यह सब व्यर्थ ही है ।

2.क्योंकि वह अपने प्रियों को यूंही, नींद है दान करता... यहोवा...
गर्भफल है प्रतिफल यहोवा का, लड़के है भाग उसका... दिए हुए...

3.वीरों के हाथ में तीर होते जैसे, जवानी के लड़के... वैसे...
क्या ही है धन्य वह पुरुष जिसने, तरकश भरा उनसे... अपना...

4.धन्य है वह जो भय माने याह का, मार्गों पर है चलता... उसके...
निश्चय धन्य तू भी होवेगा, तेरा भला होगा... सदा...

5.फलवन्त होवे दाखलता जैसे, तेरी पत्नी घर में... तेरे...
बालक भी तेरे चारों और मेज के, जलपाई पौधे से... होंगे...

6.यहोवा अपने डरवैयों को ये, देता है आशीषें... ऐसी...
यहोवा तुझको देगा आशीषें, सिय्योन नगर से... बहुत सी...

7.तेरे जीवन भर यरूशलेम का, कुशल तू देखेगा... हमेशा...
नाती-पोतों को अपने देखेगा, इस्राएल पर शान्ति... सदा...,

‘‘मैं ही अल्फा और ओमिगा हूँ ।’’ (प्रकाशित 1:8)  

1.आदि और अन्त है तू जग की ज्योति, चरणों में तेरे आते हम;(2)
हल्लेलूयाह गाते, स्तुति सुनाते सीस नवाते हम ।(2)


2.अल्फा ओमिगा और जीवन की रोटी, तुझी से जीवन पाते हम;
हल्लेलूयाह गाते, हाथ फैलाते, आशीषें पाते हम ।

3.लोहू से धो दे और कर तू पवित्र, पूरी पवित्रता चाहते हम;
हल्लेलूयाह गाते, आस हम रखते, सामने तेरे झुकते हम ।

4.पवित्र आत्मा का दान हम को दे दे, अपनी प्रतिज्ञा को पूरी कर अब;
हल्लेलूयाह गाएँ, जय ललकारें, आनन्द से भर जाएँ हम ।

5.दूल्हा हमारा है तू प्यारा यीशु, लेने को हमें जल्द आएगा;
हल्लेलूयाह गाते, खुशी मनाते, स्वर्ग को ले जाएगा ।

6.प्रेम से अब भर दे मनों को हमारे, बिनती सब तुझ ही से करते हम;
हल्लेलूयाह गाते, नींद से जगा दे, यही अब चाहते हम ।
81 यहोवा परमेश्वर महिमा तुम्हारीyahova parameshvar mahima tumhaaree
‘‘उसी को परमेश्वर ने प्रभु और उद्धारकर्ता ठहराकर सर्वोच्च कर दिया ।’’ (प्रेरित 5:31)

यहोवा परमेश्वर महिमा तुम्हारी हो,
तुम यीशु त्राता और तुम ही विधाता हो;
यहोवा परमेश्वर ।।

1.स्वर्ग में विराजमान, सब से महान हो,
सब अधिकारीयों में तुम ही प्रधान हो;
राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु हो,
स्वर्ग, भूलोक के तुम ही प्रभु हो;
जय जय करते, धन्य तुम ही हो ।

2.स्वर्ग प्रभु छोड़कर के जग में तुम आए हो,
प्राण बलिदान करके हम को बचाए हो;
जिन्दा होकर प्रभुजी जीवन दिलाए हो,
अपरम प्रेम प्रभु तुम ही दिखाए हो;
दण्डवत करते गौरव तुम्हारा हो ।

3.युग-युग मण्डली में महिमा तुम्हारी हो,
सब प्राणी कहें तुम ही यहोवा हो;
तुम प्रभु आदि और तुम प्रभु अन्त हो,
सारे जगत के तुम ही प्रभु हो;
आदर प्रशंसा युग-युग तुम्हारी हो ।
82 यहोवा महान और स्तुति के योग्यyahova mahaan aur stuti ke yogy
‘‘यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बडाई अगम है ।’’    (भजन 145:3)

यहोवा महान और स्तुति के योग्य है,
उसकी बड़ाई जो अगम है ।।

1.स्वर्गीय सेनाएँ पिता ईश्वर की महिमा,
तेरे पराक्रम के कामों को हम वर्णन करें;
पवित्र परमेश्वर के महान अद्भुत काम,
पवित्र कार्य को प्रगट करेंगे ।

2.इस्राएली वंश जो भले चंगे रहते हैं,
वे सब बहुत ही अनुपम सुन्दर है;
बिनती कर रहा है मसीह स्वर्गीय राज्य में,
तुम सब मसीह में अब सम्पूर्ण हो गए ।

3.महान प्रभु आया है हम सभों के लिए,
महिमा अपनी छोड़ के नररुप धारण किया;
आहा ! क्रूस पर उसने शैतान को हराया,
बिना मूल्य प्रभु ने उद्धार है दिया ।

4.भेड़ों की नाई हम सब भटके थे जग में,
अनगिनित पाप के लिए दण्ड के पात्र बन गए;
अच्छा रखवाला यीशु प्राण दे दिया,
महान उद्धार दे के उसने हमें सम्भाला ।

5.ईश्वर की जो महानता आदम में थी हट गयी,
अन्धेपन में आ गए, मुर्ख हम सब बन गए;
प्रभु यीशु में हम सब ज्योति पा गए,
महिमित ज्ञान, बुद्धि बहुतायत से दिया ।

6.पाप से जो भरपूर तुम पापी अब आ जाओ,
पाप की मजदूरी मृत्यु, क्या तुम अब सह सकते हो ?
उद्धारकर्ता यीशु बचाने को ठहरा है,
मान लो तुम पापों को, उद्धार देगा वह ।

7.सब प्रधानता और प्रताप अधिकारियों से भी,
बढ़कर वह सब से, राज्य करने आता है;
सब का वह प्रभु है, और शिरोमणि है,
गाएँगे हम सब हल्लेलूयाह ।
83 महान ईश्वर, अति उत्तमmahaan eeshvar, ati uttam
‘‘क्योंकि जो महान और उत्तम और सदैव स्थिर रहता है... ।’’ (यशायाह 57:15)

महान ईश्वर, अति उत्तम, पवित्र जो सदा स्थिर है,
हमारी सामर्थ, पुनरुत्थान वह, हमारा जीवन और रक्षक वह है ।

1.ऊँचे पर और पवित्र स्थान में, निवास करता, वह पवित्र है;
फिर भी वह खेदित नम्र हृदय में वास वह करता है, रहता है ।

2.प्रभु के लिए हर दिन हम, भेड़ की नाई घात होते है;
फिर भी वह प्रेम किया उसके प्रेम के कारण जयवन्त है, जय पाई है।

3.भरमाने वाले दोषी है, शोकित है और कंगाल है;
फिर भी हम सच्चाई, जीवन, आनन्द, धन, सम्पति सब कुछ पाया है ।

4.गिरी हुई हालत हमारी है, अन्धकार के हम वश में है;
फिर भी हम उठेंगे जरुर, यहोवा हमारी ज्योति है, उद्धार है ।

5.मसीह के कारण हर दिन हम, निन्दित होते रहते हैं,
फिर भी वह जय के उत्सव में, हम सबको लिए फिरता है, स्तुति हो ।
84 हे प्रभु तू महान हैhe prabhu too mahaan hai
‘‘यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है और उसकी बडाई अगम है ।’’       (भजन 145:3)

हे प्रभु तू महान है,
स्तुति के योग्य है, बड़ाई अगम है, वर्णन से बाहर है ।

1.सृष्टि जो तेरी महान और अद्भुत, संकल्प क्या ही उत्तम है;
मानव जाति के लिए प्रभु ने, सब कुछ तैयार किया है;
तेरे काम और तेरी सामर्थ जो, वर्णन से बाहर है ।...हे प्रभु

2.मनुष्य बनाया अपने स्वरुप में, सब अधिकार तू ने दे दिया;
मसीह में उसको निर्दोष बना के, खड़ा तू करना चाहता है;
तेरी दया और तेरी भलाइयाँ, वर्णन से बाहर है ।

3.सामर्थ जो दी है सृष्टि रचने में, पापी बचानें में अधिक है;
सब कुछ दिया, था जो तेरे पास, बहुमोल मोती मोला है;
तेरी धार्मिकता, तेरी महिमा, वर्णन से बाहर है ।

4.तेरी दृष्टि में मनुष्य जो अनमोल, प्यार तू उनसे करता है;
इसलिये अपना प्राण दिया है, लोहू बहाके बचाया है;
तेरा अद्भुत प्रेम, तेरी कृपा जो, वर्णन से बाहर है ।

5.नयी सृष्टि जो अद्भुत और महिमित, मनुष्य को तू ने सौंपा है;
राजा और याजक किया है उनको, प्रभु में मीरास बने है;
तेरा वह राज्य, तेरा प्रताप जो, वर्णन से बाहर है ।

6.सारी सृष्टि जो मगन और उल्लास, अद्भुत तेरे कार्यो से;
तारीफ वह करते, खुशी मनाते तू ने यह सब कुछ किया है;
तेरी प्रभुता, तेरी सच्चाई, वर्णन से बाहर है ।
85 तू ही महान प्रभु हैtoo hee mahaan prabhu hai
‘‘उसकी बड़ाई अगम है ।’’  (भजन 145:3) 

तू ही महान प्रभु है,
तेरी स्तुति, बड़ाई, हम करते है ।।

1.धर्मी, महान और न्यायी तू है... स्तुति गीतों से तुझे भजते है;
अद्भुत कार्य तू करनेवाला है... उत्तम प्रभु तेरी स्तुति करते है ।

2.पवित्र प्रभु यीशु स्वर्गीय स्थानों से, स्वर्गीय आशीषें हम को दी है;
अन्तर्यामी प्रेमी पिता तू, निरन्तर स्तुति तेरी हम करते है ।

3.क्रूस के बहे हुये अद्भुत लोहू से, हम को मोलकर मण्डली बनाया;
सिरता के आधीन लाकर चलाया, राजाओं का राजा तू ही,
स्तुति करते हैं ।

4.प्रतिज्ञा में स्थिर तू न चूकता है, वचन अपना पूरा करता है;
हम को आदर के योग्य बनाया, बहुतायत आशीष हम को दी है ।

5.प्रेमी प्रभु तू हमारे लिये, अपने आप को अर्पण किया;
सब कुछ दिया कंगाल हुआ, प्रभु यीशु तेरी हम स्तुति करते है ।
86 हे प्रभु तू ही तो धन्य हैhe prabhu too hee to dhany hai
‘‘उस ने हमें मसीह में स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आशीष दी है ।’’ (इफिसियों 1:3)

हे प्रभु तू ही तो धन्य है,
सृष्टि तेरी मगन और उल्लास, गुण तेरा वह गाती है;
आनन्द से भरपूर है, योजना तेरी अद्भुत है ।।

1.प्रसंशा होवे प्रभु यीशु की,
उसी में पिता सब कुछ करता है;
स्वर्गीय स्थानों में और सब प्रकार से,
मसीह में हम सब को आशीष दी है ।

2.जगत की उत्पत्ति से पहिले ही,
चुन लिया हम को वह मसीह में भी;
ताकि पवित्र और निर्दोष हम बनें,
मसीह में ये आशीष हम को दी है ।

3.अपनी इच्छा के संकल्प के द्वारा,
लेपालक पुत्र हो यह ठहराया;
एक दिन अधिकार सब हम को वह देगा,
यही आशीष हम को मसीह में है ।

4.महिमित अनुग्रह की अब स्तुति हो,
जिससे उसने ग्रहण किया हमको;
अपने लोहू से वह हम को छुड़ाया,
क्षमा की यह आशीष मसीह में है ।

5.अपनी इच्छा का भेद वह बताया,
और उसी मत से वह सब कुछ किया;
समय की पूर्णता में एकत्र किया,
मीरास हम बने यह आशीष दी है ।
87 ऊँचा गढ़ है प्रभु मेराooncha gadh hai prabhu mera
‘‘यहोवा मेरा छुड़ानेवाला है... और मेरा ऊँचा गढ़ है ।’’ (भजन 18:2)

ऊँचा गढ़ है प्रभु मेरा, तारणहार तू मेरा आश्रय है ।।

1.महानता यहोवा की कितनी महान है,
बहुत ही स्तुति के योग्य वही है, बड़ाई अगम है, समझ से बाहर है

2.तू मेरी चट्टान और किला है, मेरी ढ़ाल और उद्धार का सींग है;
मेरा तू आश्रय स्थान और शरण गढ़ है ।

3.मेरा प्रिय प्रभु तू गोरा है, लाल तू ही है मेरा प्रीतम भी;
दस हजारों में उत्तम, और उसे जान जाता हूँ ।

4.अनन्त जीवन बहुतायत से दिया, स्वर्गीय भोजन से तृप्त है किया;
अनुग्रह से स्थिर किया, स्तुति हो खड़ा किया ।

5.विजय गीत गाऊँ प्रभु के लिए, शत्रु के ऊपर जयवन्त बनाया;
चढ़ाया ऊँचे गढ़ पर, स्तुति तेरी सदा हो ।

6.महिमा से भरपूर तू प्रभु यीशु, शीघ्र तू ही आने वाला है;
हल्लेलूयाह गाऊँगा, हर्ष के साथ में गाऊँगा ।
88 सुन्दर रक्षक मेरे !sundar rakshak mere !
‘‘यहोवा तेरा रक्षक है ।’’    (भजन 121:5) 

1.सुन्दर रक्षक मेरे ! प्रभु... अपने लोहू से मुझ को तू धो ले;
आत्मा से अपने तू भर दे मुझे... अपना तू बिलकुल बना ले ।
सुन्दर रक्षक मेरे ।

2.सामर्थी सिरजनहारे ! प्रभु... अपने वचन के द्वारा नया जन्म दे;
पुरानी चीजें मिटा दे मुझे... नई सृष्टि बना दे ।

3.हमारे तारणहारे ! प्रभु... टूटी किश्ती को पार अब लगा दे प्रभु;
नैया डूबने से बचा दे मुझे... स्वर्ग सिय्योन तू पहुँचा दे ।

4.शारोन के नरगिस प्यारे ! प्रभु... अपनी सुगन्ध मुझे अब सुंघा दे प्रभु;
आनन्द से मन को तू भर दे मुझे... सुन्दरता अपनी दिखा दे ।

5.जय जय हम गाएँ सारे ! प्रभु... अपनी महिमा हम को दिखा दे प्रभु;
प्रेम अपना क्रूस का समझा दे हमें... छाए में सब को छिपा ले ।
89 सारे स्वर्गीय दूतगणsaare svargeey dootagan
‘‘सेनाओं का यहोवा पवित्र... ।’’ (यशायाह 6:3)  

सारे स्वर्गीय दूतगण, आराधना करते, कहते प्रभु यहोवा पवित्र;
स्वर्ग और पृथ्वी पर महिमा उसकी, है भरपूर ये ही ये गाते है ।।

1.आँखे तेरी इतनी शुद्ध और पवित्र है,
कि तू बुराई को कभी देख न सकता है;
जो दूर थे अपने समीप लाया तू हमें,
प्रभु तेरी प्रशंसा और स्तुति करते है ।

2.हृदय को तू ने मेरे, शुद्ध भी किया है,
देखने पाऊँ तुझ को प्रभु, आशा दी है;
दी है अपनी पवित्रता है प्रभु मुझे,
स्तुति करूँगा प्रभु तू आदर योग्य है ।

3.पाप से पतित इस देह को शुद्ध बनाकर,
पवित्र मंदिर मुझे तू बनाया है;
अनन्त मीरास के लिए मुझे बुलाया है,
प्रभु स्तुति करूँगा मैं तू जो महान है ।

4.अपने लोहू से प्रभु मुझे तू धोया है,
नये और जीवते मार्ग से मुझे चलाया है;
दिया हियाव प्रवेश करुँ पवित्र स्थान में,
करूँगा जीवन भर, प्रभु स्तुति तेरी मैं ।

5.हे पिता स्वर्गीय तू मेरे, संपूर्ण सिद्ध है;
अगुवाई तू प्रभु अपनी सिद्धता से दी है,
सब कुछ करने के लिए बल भी दिया है,
स्तुति तेरी हो प्रभु, तू शान्तिदाता है ।
90 पवित्र, पवित्र, पवित्र, प्रभु हैpavitr, pavitr, pavitr, prabhu hai
‘‘सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है ।’’
(यशायाह 6:3)

1.पवित्र, पवित्र, पवित्र, प्रभु है, स्वर्ग के दूतों के वर्णन के पार है ।

2.पवित्र पिता तू, परमात्मारूपी, परम प्रेमी तू, धर्मी प्रतापी ।

3.पवित्र पुत्र तू, नररूप धारक, करुणा का समुद्र, पापी का तारक ।

4.पवित्र आत्मा तू, शान्ति का सोता, स्वर्गीय आनन्द, सन्तों को देता ।

5.पिता-पुत्र पवित्रात्मा, परमेश्वर त्रिएक, प्रशंसा तेरी हो, युगानुयुग तक ।
91 करुणामय प्रभु, पवित्र है तूkarunaamay prabhu, pavitr hai too
‘‘परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है ।’’
(रोमियो 5:5)

करुणामय प्रभु, पवित्र है तू, स्तुति तेरी करते है;
प्रेम तेरा स्वर्ग से हम पर उण्डेला, अनुग्रह तेरा, हम ने पाया है ।।

1.तेरे मन्दिर की भरपूरी से हम को सन्तुष्ट तू ने है किया,
सुख की नदी के जल से पिलाया, और आनन्द प्रभु हमें दे दिया;
अनुग्रह के लिए, धन्यवाद देते, बड़ाई प्रभु तेरी, हम करते है ।

2.ईश्वर की सम्पूर्णता से प्रभुजी, हम को तू ने सन्त बनाया;
ज्ञान से बाहर जो, प्रेम प्रभु तेरा, हम में तू ने प्रकाशित किया;
आभारी होके, धन्यवाद देते, आराधना तेरी, हम करते है ।

3.प्रभु यीशु में जो ईश्वर की भरपूरी, सदा उस में वह वास करती है;
हम को उसी में भरपूर किया, सारी प्रधानता का तू शिरोमणी है;
अनुग्रह के लिए, आराधना करते, इस जग में तेरा, आदर करते है ।

4.तेरे लोहू से निर्दोष बनाया, और हम को तू शुद्ध है किया,
क्रूस पर तू ने मेल भी कराया, बीच की दिवार को तू ने तोड़ दिया;
सदा स्तुति करते, आराधना करते, इस जग में तेरी, स्तुति करते है ।

5.अनुग्रह सच्चाई के द्वारा से, हमारे बीच में ड़ेरा किया है;
संसार ने तुझ पर विश्वास किया है, एकलौता पुत्र तू ही जो हुआ है;
सदा स्तुति करते, आराधना करते, मण्डली में तेरी, स्तुति करते है ।
92 पवित्र प्रभुजी मेरे, स्तुति होpavitr prabhujee mere, stuti ho
‘‘मैं ने प्रभु को बहुत ही ऊँचे सिंहासन पर विराजमान देखा ।’’
(यशायाह 6:2)

पवित्र प्रभुजी मेरे, स्तुति हो उद्धार के लिए ।।

1.अति ऊँचे स्थान पर प्रभु, सिंहासन पर जो तू है;
महान है तेरी महिमा, वर्णन से बाहर वह है ।

2.पाप का कोढ़ी जो मैं था, तू ने की मुझ पर दया;
धोकर पाप के दागों को, पवित्र मुझे किया है ।

3.अशुद्ध होठों से मैंने, जीवन कपट से बिताया;
धोकर इस दोषी मुँह को, स्तुति का गीत दिया है ।

4.छुटकारे का दाम जो दिया, मैं तेरी स्तुति करूँगा;
हे कलवरी के प्रभु, सब से आदर के योग्य है ।

5.आदर मैं तेरा करूँगा, आनन्द से सदा प्रभु;
प्रशंसा तेरी करूँगा, सब से तू ही उत्तम है ।

6.आँखों से तुझे देखुँगा, स्वर्ग के दूतों के मघ्य में;
उद्धारकर्ता शीघ्र आ, आनन्द से बाट जोहता हूँ ।
93 पवित्र प्रभु यीशु प्रणाम हो तुझेpavitr prabhu yeeshu pranaam ho tujhe
‘‘हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर’’
(यूहन्ना 20:28)

पवित्र प्रभु यीशु प्रणाम हो तुझे,
मेरा ईश्वर ! मेरा प्रभु !! बचाया मुझे ।।

1.ईश्वर तू महान मैं ने जान लिया, (2)
पावन तेरे नाम का जब ध्यान किया ।(2)

2.स्वर्गीय पिता तू है मेरा... तारणहार मेरा अति प्यारा ।

3.मैं अविश्वास से भरा हुआ... फिर भी प्रभु मेरा सहारा हुआ ।

4.जीवित है मेरा उद्धारकर्ता... जीवन हर पल मुझ को देगा ।

5.अच्छा चरवाहा मेरा यीशु प्रभु... घटी होगी न मुझ को सम्भालेगा तू ।

6.तू स्वर्गीय प्रधान महायाजक है... कैसे करुँ तेरी आराधना मैं ?

7.दूल्हा यीशु स्वर्ग से मेेरे लिये... जल्द ही आता है हल्लेलूयाह ।
94 स्तुति, महिमा, भक्ति, आदरstuti, mahima, bhakti, aadar
‘‘जितने तूझे ढुंढ़ते है... हर्षित और आनन्दित हो ।’’(भजन 70:4)

स्तुति, महिमा, भक्ति, आदर, युग-युग तेरे है;
कितना विश्वासयोग्य ईश्वर है ।।

1.प्रभुजी हम को तू ने दिया है, कैसा आनन्द का दिन है;
हम सब आनन्दित होकर के, खुशियाँ मनाते हैं;
कितनी भलाईयाँ तू ने की है, भूल नहीं सकते है ।

2.हे प्रभु तू ही महान ईश्वर है, महान कार्य करता है;
तेरा अनुग्रह सदाकाल तक, कृपा अद्भुत है;
आनन्द के साथ हम तेरी बड़ाई, स्तुति करते है ।

3.हर दिन नई होती रहती है, करुणा तेरी महान है;
तेरे अनुपम नाम की हम सब, कीर्ति गाते है;
हे करुणामय प्रभु परमेश्वर, स्तुति करते है ।

4.तू ही हमारा परमप्रभु है, अपनी इच्छा पूरी की है;
जीवन देकर आत्मा से अपने, हम को चलाता है ।
सीधे लोगों की भूमि पर तेरी, सेवा करते है ।

5.निन्दा, वेदना, दुःख और पीड़ा, हम सब के लिए सहा है;
मृत्यु को जीतकर शैतान के बल को, प्रभु हटाया है;
फिर से प्रभु तू आनेवाला है, जय प्रभु जय तेरी है ।
95 गाएँगे हम तेरी स्तुतिgaenge ham teree stuti
‘‘वह प्रतापी राजा कौन है ? परमेश्वर जो सामर्थी और
पराक्रमी है, परमेश्वर जो युद्ध में पराक्रमी है ।’’ (भजन 24:8)

गाएँगे हम तेरी स्तुति हे प्रभु महान,
करेंगे हम तेरी भक्ति और आदरमान ।।

1.प्रभु यीशु धनी होकर, कंगाल हुआ सब कुछ देकर;
ताकि तेरी कंगाली में हम, हो जाए धनवान ।

2.ईश्वर के स्वरुप में होकर, माना नहीं जानबुझकर;
दास बना, शून्य हुआ, लिया अपमान ।

3.परखा गया सब बातों में, हमारी नाई तू प्रभु;
निर्दाष निकला प्रभु यीशु तू, हुआ जयवान ।

4.न तो तू ने पाप किया और, छल की बातें नहीं भी निकली;
गाली नहीं, धमकी नहीं, कैसा शुद्ध जीवन ।

5.तुच्छ जाना गया तू प्रभु, मनुष्यों का त्यागा हुआ तू;
दुःखी पुरुष वेदनापूर्ण, रोग से पहचान ।

6.हमारे बदले में प्रभु, धायल हुआ कुचला गया तू;
अन्तिम वचन पूरा किया तू, दे के अपना प्राण ।

7.महा पराक्रम से प्रभु, जीवित हुआ बहुत ही अद्भुत;
जय-जयकार का डंका बजाकर, हुआ विजयवान ।
96 परम पिता की हम स्तुति गाएँparam pita kee ham stuti gaen
‘‘हे मेरे प्राण, यहोवा को धन्य कह ।’’   (भजन 103:1)

परम पिता की हम स्तुति गाएँ... वही है जो बचाता हमें;
सारे पापों को करता क्षमा... सारे रोगो को करता चंगा ।।

1.धन्यवाद दे उसके आसनों में... आनन्द से आए उसके चरणों में;
संगीत गाके खुशी से... मुक्ति की चट्टान को जय ललकारे ।

2.वही हमारा है परम पिता... तरस खाता है सर्वसदा;
पूरब से पश्चिम है जितना दूर... उतने ही किए दूर हमारे गुनाह ।

3.माँ की तरह उसने दि तसल्ली... दुनिया के खतरों में छोड़ा नहीं;
निर्मल दूध है वचन का दिया... और दिया हम को अनन्त जीवन ।

4.चरवाहे की मानिन्द ढूंढ़ा उसने... पापों की कीच से निकाला हमें;
हम को बचानें को जान अपनी दी... ताकि हाथ में हम उसके रहें ।

5.घोंसले को बार-बार तोड़कर उसने... चाहा कि सीखें हम उड़ना उस से;
परों पर उठाया उकाब की तरह... ताकि हम को चोट न लगे ।
97 परम पवित्र स्वर्गीय पिताparam pavitr svargeey pita
‘‘परमेश्वर के योग्य नाम की महिमा करो ।’’ (भजन 29:2)

परम पवित्र स्वर्गीय पिता, (2)
जय जयकार, जय जयकार सर्वसदा;
तारणहार तू युग युग का,
पार किया, बेडा पार किया;(2)
जीवन का प्रभु, पापी का प्रभु, जय जयकार ।।

1.तू है प्रेम अवतार, किया है पापी से प्यार;(2)
दुःख सब तू ने हरे, प्रेम के कारण से ।(2)

2.क्रूस पर देकर जान, मेरे बचाए है प्राण;
पाप उठाए सभी, तेरी दया है बड़ी ।

3.शत्रु जो शैतान, मानी उसने तुझ से हार;
मृत्यु के द्वारा से, मुझ को छुडाया है ।

4.तू है शक्तिमान, तोड़े है मृत्यु के बाण;
जी उठकर प्रभु, पिता से मिलाया है ।

5.मेरे प्यारे प्रभु, आएगा फिर से तू;
मुझ को ले जाएगा, दुःखो से छुडाएगा ।

6.हो न क्यों मझधार, हो थपेडों की मार;
मन तब मगन रहे, संग संग तेरे रहे ।

7.जय जय गाओ ललकार, यीशु जी को बलिहार;
जय जय हल्लेलूयाह, जय जय हल्लेलूूयाह ।
98 भजने आए हैं पिताजीbhajane aae hain pitaajee
‘‘उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्चाई
से भजन करें ।’’ (यूहन्ना 4:24)

भजने आए हैं पिताजी... आत्मा और सच्चाई से तुझ को;(2)
झुकते है हम प्रणाम करतें... आए हैं हम भजने भजने ।।(2)

1.देन पुत्र की है दीनी... सर्वदा भण्डार से जो;(2)
हे पिता त्रिएक प्रभु... आए हैं हम भजने भजने ।(2)

2.पापियों का मित्र तू है... पाप को तू मिटाने आया;
तू है सच्चा मुक्तिदाता... आए हैं हम भजने भजने ।

3.सत्य, जीवन, मार्ग तू है... पिता से हम को मिलाने आया;
अच्छा चरवाहा तू ही है... आए हैं हम भजने भजने ।

4.सिर तेरा है जैसे सोना... प्रेम भरी हैं आँखें तेरी;
तू बुलाता प्रेम से है... आए हैं हम भजने भजने ।

5.जखमी हाथ है कैसे सुन्दर... तू ने जय पाई है सब पर;
अपना प्रभु जान तुझ को... आए हैं हम भजने भजने ।

6.मण्डली का प्रधान तू है,... और सिरे का पत्थर भी है;
राजाओं का राजा तू है,... आए हैं हम भजने भजने ।

7.ज्ञान है तू ही पिता का... दूत भी यह मिलकर गाते;
भक्त तेरे मिल जुल के गाते... हल्लेलूयाह आमीन, आमीन ।
99 यहोवा का भजन गाओ, गाओyahova ka bhajan gao, gao
‘‘यहोवा का भजन गाओं,
क्योंकि उसने प्रतापमय काम किये है ।’’
(यशायाह 12:5)

यहोवा का भजन गाओ, गाओ,
क्योंकि - उसने प्रतापमय काम किये हैं ।।

1.सारे पृथ्वी पर... इसे प्रचार करो;
रुकावट के बिना.... इसे प्रचार करों ।

2.सिय्योन के वासियों... जय जयकार तुम गाओं;
इस्राएल का पवित्र... तुम में महान है वह ।

3.हमारे यहोवा ने... धर्मिकता सिद्ध की है;
आओ हम काम उसके... सिय्योन में प्रचार करें ।

4.जान जायेंगे कि... मैं ही यहोवा हूँ;
क्योंकि उजाड़ नगर... मैं ही बसाया हूँ ।

5.सारे त्योहारों में... यरूशलेम को मैं;
नगरो को भी उनके... भर दूँगा लोगों से मैं ।

6.मन्दिर की भरपूरी से... तृप्त हो जायेंगे;
आनन्द नदी में तेरे... प्यास अपनी बुझायेंगे ।
100 स्तुति करें, प्रशंसा करेंstuti karen, prashansa karen
‘‘हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का
धन्यवाद हो ।’’ (इफिसियों 1:3)

स्तुति करें, प्रशंसा करें,
परम पवित्र स्वर्गीय पिता की, स्तुति करें ।।

1.तेरा नाम प्रजा में... प्रगटित हुआ है;
वर्णन के बाहर है... महिमा से भरपूर तेरा नाम है ।

2.मेरा प्रभु मेरे लिए... क्रूस के ऊपर बलि हुआ है;
मेरे उद्धार के लिये... लोहू बहाया रक्षक मेरा है ।

3.प्यारा प्रभु यीशु मसीह... प्यारा पवित्र आत्मा भी;
और प्यारे चरवाहे... हम को दिया परमेश्वर पिता है ।

4.हम को चुना यीशु में... कि निर्दोष पवित्र बनें;
लेपालक पु़त्र हमें... अनुग्रह से पिता ठहराया है ।

5.बुद्धि और सारा ज्ञान... मसीह में गुप्त धन;
मसीह का भेद पहिचान... समझने कृपा पिता दिया है ।

6.प्रभु यीशु मसीह में... स्वर्गीय स्थानों में;
उपलब्ध सब आशीषें... हम को दिया परमेश्वर पिता है;

7.जीवन का सोता तू... जीवन जल देता तू;
जीवन सब में बहाने... जीवन दिया हमें, हल्लेलूयाह ।
101 आओ भजें उसको, प्रचार करेंaao bhajen usako, prachaar karen
‘‘देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर... फिरती रहती है ।’’
(2 इतिहास 16:9)

आओ भजें उसको, प्रचार करें, प्रणाम करें,
सिरजनहार, तारणहार और पालनहार ।।

1.सहाय अब तक हमारी की... जान सलीब पर अपनी दी;
अगुवाई हम को उसने दी... आँख की पुतली की नाई;
रक्षा हमारी की... हाँ... हाँ...

2.सारे जगत के निवासियों में... सीधे मन से जो चलते है;
सामर्थ अपनी दिखाने में... दया दृष्टि प्रभु यीशु की;
फिरती रहती है... हाँ... हाँ...

3.सलाह दी है हजारों बार... आँखों से अपनी अगुवाई की;
बदल के हम अभागों को... तसल्ली हम को अपनी ही;
देकर यीशु गुरु... हाँ... हाँ...

4.आँखें जो हैं अग्नि समान... दुःखों से छुड़ाती है;
सहाय संकट में करती है... दृष्टि करता रहता है;
बच्चों के लिए... हाँ... हाँ...

5.आँखें जो देखती धर्मी को... माँ की नाई सम्भालता है;
वह जो तेज से भरी है... बल समय पर देकर हमें;
अनाथ न छोड़ेगा... हाँ... हाँ...

6.सातों आँखों से देखता है... नाथ अनाथों का बनता है;
आत्मा से हम को भरता है... रखवाले ठहराता है;
गाएँ सब हाल्लेलूयाह... हाँ... हाँ...,
102 आओ हम भजेगें प्यारें यीशु कोaao ham bhajegen pyaaren yeeshu ko
‘‘सच्चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्चाई से करेंगे ।’’
(यूहन्ना 4:23)

आओ हम भजेगें प्यारें यीशु को,
आत्मा सच्चाई से प्रेमी पिता को, परमेश्वर को ।।

1.पापों की माफी उसने दी हम को,
छुटकारा लोहू से दिया हम को;
जय-जयकार, जय-जयकार, उसकी सदा हो ।

2.आँखे उसने खोली देखें यीशु को,
और हम ने देखा उस आत्मिक भवन को;
अद्भुत है, अद्भुत है, सदा प्रभु जो ।

3.वारिस हम बनें हैं मीरास पाने को,
सदा राज्य करेंगे आदर पाने को;
होशाना, होशाना, जयवन्त राजा को ।

4.जयवन्त हमें किया जग को जीतने को,
क्रूस की शक्ति द्वारा सम्भाला हम को,
स्तुति हो, स्तुति हो, मुक्तिदाता को ।

5.मण्डली बाट जोहती है, प्रभु से मिलने को,
सदा साथ रहेंगे पायेंगे उस को;
वन्दना, वन्दना, सृष्टिकर्ता को ।
103 आओ करें साष्टांग प्रणामaao karen saashtaang pranaam
‘‘यहोवा सभों से महान है ।’’ (निर्गमन 18:11)

आओ करें साष्टांग प्रणाम,
आत्मा और सच्चाई से प्रभु यीशु को;
आऽऽ आऽऽ आऽऽ आओं करें, साष्टांग प्रणाम ।।

1.मूसा से वह श्रेष्ठ है... अनुग्रह उस से मिलता है;(2)
झूठी उपासना से घिन है... भजो प्रेम से भक्तों उसे । आ- आ- आ

2.हारुन से वह श्रेष्ठ है... वह स्वर्गीय याजक हमारा है;
पूर्ण पवित्रता वह है... भजो सीधे मन से उसे ।

3.मन्दिर से वह श्रेष्ठ है... मन्दिर में उस की महिमा है;
मन्दिर हम को बनाया है... भजो पवित्रता से उसे ।

4.योना से वह श्रेष्ठ है... पापी का ढूंढ़नेवाला है;
पापों को उस ने उठाया है...  भजो पूरे दिल से उसे ।

5.सुलेमान से श्रेष्ठ है... सर्वज्ञान की परिपूर्णता हैं;
अन्तर-वास वह करता है... भजो खराई से उसे ।

6.राजाओं से श्रेष्ठ है... स्वर्ग जग में उसकी महिमा है;
शक्तिमान परमेश्वर है... भजो नित्यानित्य उसे ।

7.सभों से वह श्रेष्ठ है... सभों को सम्भाले रहता है;
हल्लेलूयाह के योग्य वह है... भजो सारे बल से उसे ।
104 अपने प्रभु की बड़ाई करकेapane prabhu kee badaee karake
‘‘मेरा प्रेमी ... दस हजार में उत्तम है ।’’ (श्रेष्ठ गीत 5:10)

अपने प्रभु की बड़ाई करके,
वर्णन करूँगा मैं भजन गाऊँगा ।।

1.पवित्र जो है धर्मी जो है, मलिन वस्त्र मुझ से उतारा;
वस्त्र उद्धार का पहना दिया है, तारीफ करूँगा मैं शुद्ध प्रभु की ।

2.पूरब से ज्ञानी भेंटे चढ़ाये, सोना, लोबान और गन्धरस लाके;
प्रगट किये वह प्रभु की विजय को, तारीफ करूँगा मैं अमुल्य प्रभु को ।

3.जानूँगा मैं अब महिमित प्रभु को, गौरव से भरपूर ऐसे प्रभु को;
दस हजारों में तू ही है उत्तम, देखता रहूँगा तुझे गाता रहूँगा ।

4.भजूँगा तुझे मैं है प्रभु ईश्वर, आत्मा सच्चाई, स्तुति से भरकर;
वापस आता है प्रभुओं का प्रभु, आदर महिमा स्तुति हो तेरी ।
105 जीवन दिया है परमेश्वरjeevan diya hai parameshvar
‘‘यहोवा ने मेरे जितने उपकार किये है,
उनका बदला मैं उस को क्या दूँ ?’’ (भजन 116:12)

जीवन दिया है परमेश्वर,
मैं गाऊँ तेरे लिए निरन्तर, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह;
अयोग्य हूँ मैं क्या दूँ तुझे ?
स्तुति करुँ तेरी मैं बारम्बार, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह ।।

1.रोशनी दिया, रोशन है किया;
श्वासों के लिये, हवा बनाया;
भोजन जल दे, पोषण है किया;
हर दिन तू मेरी रक्षा है किया ।
अपरम्पार तेरे उपकार,
हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह गाऊँ हर बार;
स्तुति गीत तुझे, ऐ सृजनहार,
हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह ।... जीवन दिया है परमेश्वर

2.करुणा पर करुणा मुझ पर है करता,
हर घडी मेरे साथ है तू चलता;
क्रोधित न होता, धीरज है धरता,
पापों का मेरे लेखा न लेता ।... अपरम्पार ...,
106 हे जग-त्रात्रा, विश्व-विधाताhe jag-traatra, vishv-vidhaata
‘‘जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा...
वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा ।’’
(रोमियों 8:32)

हे जग-त्रात्रा, विश्व-विधाता, दिया है अनमोल दान;
सारे अनुग्रह के तुम ही हो दाता, अपने को किया बलिदान ।।

1.उद्धार हम को दिया अनुग्रह से, विश्वास के द्वारा हुआ;
हम से प्रभुजी कुछ नहीं बना, यह सब तेरा ही दान ।

2.जब प्रभु हम सब पाप में मरे थे, प्रेम से तू जग में आया;
ताकि सदा तक साथ तेरे रहे, दिया अनन्त जीवन का दान ।

3.थके माँदे हम भटक रहे थे, पाप के भार से दबे थे;
अनुग्रह से प्रभु हम को बुलाया, दिया शान्ति विश्राम का दान ।

4.हम ने सुना प्रभु सत्य वचन को, उद्धार का सुसमाचार;
विश्वास हम ने हृदय से किया, दिया तू ने आत्मा का दान ।

5.नादान हम प्रभु तू ने सिखाया, आदि से गुप्त में जो थे;
भेदों को प्रभुजी हम को बताया, दिया समझने का ज्ञान ।

6.सेवा प्रभुजी हमको दी है, युगानुयुग तक करें;
सामर्थी बनकर स्तुति हम गाएँ, दिया हमें विजय का दान ।
107 हे प्रभु तेरा अनुग्रह हैhe prabhu tera anugrah hai
‘‘अनुग्रह के धन के अनुसार ।’’ (इफिसियों 1:7)

हे प्रभु तेरा अनुग्रह है... बड़े धन से यह हुआ है ।।

1.अनुग्रह से ही पापों की माफी, यीशु में हम को मिली है;
और छुटकारा अपराधों से, लोहू के द्वारा हुआ है ।

2.अनुग्रह ही से उद्धार जो हुआ, मनुष्य की ओर से नहीं है;
न कर्मो से, घमण्ड न करें, यीशु प्रभु का दान यह है ।

3.अनुग्रह ही से हम को बुलाया, यह पवित्र बुलावा है;
सनातन मनसा के द्वारा से, हम पर प्रगट हुआ है ।

4.अनुग्रह ही से धर्मी ठहराया, योग्य हम बिलकुल थे नहीं;
सेंतमेंत हम को प्राप्त हुआ है, प्रायश्चित से ठहराया है ।

5.अनुग्रह हम पर प्रकाश हुआ है, सब कुछ हम को सिखाता है;
ताकि बचें हम अभिलाषा से, भक्ति से हम सब जीते हैं ।

6.अनुग्रह ही से बलवन्त हम बने, युद्ध हमारे सामने है;
और प्रभु में ही हम सभों को, अन्त तक बढ़ते जाना है ।

7.अनुग्रह ही से समीप आ गए, और हम उस में रहते है;
महिमा की आशा परमेश्वर में, स्तुति के गीत हम गाते है
108 हम सब मिलकरham sab milakar
‘‘आओ, हम आनन्दित और मगन हो,और उसकी स्तुति करें।’’ (इफिसियों 1:7)

हम सब मिलकर यीशुजी की स्तुति करते हैं,
तू ही महान है, और पवित्र है
प्रायश्चित और उद्धारकर्ता सारे जग का है ।

1.ज्ञान तेरा अपार जो है बुद्धि बड़ी है,
सामर्थी प्रभु तू तेरी शक्ति बड़ी है;
सारे विश्व को तू अपने वश में रखा है ।

2.सर्वशक्तिमान तू तेरे कार्य महान है,
अद्भुत तू प्रतापी राजा शान तेरी है;
सारे शत्रु तेरे पाँव के नीचे दबें है ।

3.तू प्रभु है युग की चट्टान काम में खरा है,
अपनी गति, विचार, योजना में तू पूरा है;
कुटिलता तो तुझ में नहीं, धर्मी सिद्ध है ।

4.यहोवा दयालु, अनुग्रहकारी तू है,
कोप करने में धीरजवन्त तू कृपालु है;
हजार पीढ़ियों तक तू ही करुणा करता है ।

5.पाप और अधर्म को तू ही क्षमा करता है,
अपराधी और दोषी से तू प्रेम भी करता है;
लेकिन न्यायी, अग्निस्वरूप पाप से धृणा है ।
109 तारणहार जगत का प्रभुtaaranahaar jagat ka prabhu
‘‘केवल मसीह सबकुछ और सब में है ।’’ (कुलुस्सियों 3:11)

1.तारणहार जगत का प्रभु यीशु... दूतों का परमेश्वर प्रभु यीशु;
मुझे अपना बनाने आया यीशु... गले अपने लगाने आया यीशु ।
सब कुछ यीशु... मेरा प्रभु यीशु;
सब से महान प्रभु यीशु... हल्लेलूयाह, आमीन ।।

2.चरवाहा भेडों का प्रभु यीशु... खोजने वालों को मिलता प्रभु यीशु;
मेरे भजन का अर्थ है प्रभु यीशु... पतितों का है मित्र प्रभु यीशु ।

3.मेरे पग का दीपक है प्रभु यीशु... मेरे पथ का उजियाला प्रभु यीशु;
मेरी महिमा की आशा प्रभु यीशु... मेरी दौड़ का निशाना प्रभु यीशु ।

4.मेरे जीवन की रोटी प्रभु यीशु... मेरे जीवन का जल है प्रभु यीशु;
मधुर शहद से मीठा प्रभु यीशु... मेरे जीवन का दाता प्रभु यीशु ।

5.मेरे जीवन का आदर्श प्रभु यीशु... अगुवाई करता है प्रभु यीशु;
मुझे तस्सली देता है प्रभु यीशु... मुझे ढाढ़स देता है प्रभु यीशु ।

6.मेरे हृदय में रहता प्रभु यीशु... मुझे आत्मा से भरता प्रभु यीशु;
मुझे खुशी से भरता प्रभु यीशु... मुझे प्रेम से है भरता प्रभु यीशु ।

7.सेवा करना सिखाता प्रभु यीशु... मिलके रहना सिखाता प्रभु यीशु;
मुझे साक्षी बनाता प्रभु यीशु... प्रार्थना करना सिखाता प्रभु यीशु ।
110 सर्वशक्तिमान मेरा...सब कुछ वही हैsarvashaktimaan mera...sab kuchh vahee ha
‘‘केवल मसीह सब कुछ और सब में है ।’’ (कुलुस्सियों 3:11)

1.सर्वशक्तिमान मेरा... सब कुछ वही है;
सब कुछ वही है... मेरा... सब कुछ वही है ।

2.मार्ग, सत्य, जीवन प्रभु... यीशु ख्रिस्त ही है;
मार्ग वही है... केवल... मार्ग वही है ।

3.स्वर्गीय रोटी जीवन की और... जीवन जल वह है;
जीवन जल वह है... शान्त... जीवन जल वह है ।

4.आदि--अन्त और अल्फा... ओमेगा वह है;
ओमेगा वह है... एकलौता... वही है ।

5.उद्धार, पवित्रता और... नीति वही है;
नीति वही है... ईश्वर... प्रीति वही है ।

6.पुनरुत्थान और अनन्त...जीवन वही है;
जीवन वही है... अनन्त... जीवन वही है ।

7.हल्लेलूयाह के पूर्ण... योग्य वही है;
योग्य वही है... आश्रय... दुर्ग वही है ।
111 शरण, शरण, शरण प्रभु करुणामयsharan, sharan, sharan prabhu karunaamay
‘‘वह परमसुन्दर है,... वही मेरा प्रेमी, यही मेरा मित्र है ।’’ (श्रेष्ठ गीत 5:16)

शरण, शरण, शरण प्रभु करुणामय तू है;
करुणामय तू है, हमारा शरणदाता तू है ।।

1.पाप-कोप रहित यीशु... शापवाहक है;
शापवाहक है... शापमुक्त करता है ।

2.परमेश्वर स्वरुप यीशु... मनुष्यरुप है;
मनुष्यरुप है... मनुष्यों का नाथ है ।

3.अनुग्रहकारी ख्रिस्त यीशु... दयावन्त है;
दयावन्त है... दया सब पर करता है ।

4.सर्वशक्तिमान यीशु... सर्वोपकार है;
सर्वापकारक है... सर्व जग-उद्धारक है ।

5.परम प्रेमी प्रभु यीशु... दीन मन का है;
दीन मन का है... तू चाहता सब का है ।

6.मुक्ति-निमित्त रिक्त यीशु... विजयशाली है;
विजयशाली है... तू विजयशाली है ।

7.सच्चा प्रभु तू ही यीशु... अच्छा शिक्षक है;
अच्छा शिक्षक है... सत्य, मार्ग तू ही है ।

8.सर्व सृष्टिकर्ता यीशु... तू सनातन है;
तू सनातन है... सनातन जीवन है ।

9.सब बातों में वरिष्ठ यीशु... श्रेष्ठ सब में है;
श्रेष्ठ सब में है... हल्लेलूयाह हम गाएँ ।
112 शान्तिदाता प्रभु यीशुshaantidaata prabhu yeeshu
‘‘वही हमारा मेल है... ।’’ (कुलुस्सियों 2:14)
शान्तिदाता प्रभु यीशु की शान्त मन्दिर में हो स्तुति ।।

1.शान्तिकर्ता सारे जग का, ख्रिस्त यीशु ही हुआ;
बीच की दिवार को क्रूस पर तोड़कर, मेेल हमारा वही किया ।

2.शान्ति-प्रवाह नदी समान, बढ़ता जाता नित नया;
आतंक हटाकर बीच में जाकर, खडा हुआ, हमें स्थिर किया ।

3.संसार देता वैसे नहीं, अपनी शान्ति प्रभु दिया;
अनन्त शान्ति सदा है रहती, अनन्त यीशु जो हम को दिया ।

4.न हो केवल खाना-पीना, परमेश्वर का राज्य यहाँ;
पवित्र आत्मा में धार्मिकता, शान्ति, आनन्द हम को प्रभु दिया ।

5.चाहे पर्वत हट जाए, टल भी जाए पहाडियाँ;
अनुग्रह मेरा नहीं टलेगा, शान्तिदाता वचन दिया ।

6.अद्भुत युक्ति करनेवाला, राजकुमार वह शान्ति का;
पराक्रमी प्रभु यीशु ख्रिस्त ही, सबल हमको सदा करेगा ।
113 दाऊद वंश के ख्रिस्त यीशु कीdaood vansh ke khrist yeeshu kee
‘‘दाऊद के सन्तान को होशाना, धन्य है वह जो
प्रभु के नाम से आता है ।’’ (मत्ती 21:9)

1.दाऊद वंश के ख्रिस्त यीशु की -- स्तुति प्रशंसा हो,
उद्धार देकर स्वर्ग का वारीस -- हम को बनाया वो;
होसन्ना, होसन्ना -- जग में आनन्द हो ।

2.मानव रुप धारण किया -- जग में वह आया,
जीवन अपना बलिदान कर हमें -- जीवन अपना दिया;
होसन्ना, यीशु के नाम से -- स्वर्ग भी हम को दिया ।

3.प्यारे पिता ! इस जग में -- सब महिमा तुम्हारी हो,
सूर्य, चन्द्र, सारी सृष्टि भी -- गाएँ गीतों को;
होसन्ना, होसन्ना, -- नये यरूशलेम में हो ।
114 हम सब स्तुति करेंगेham sab stuti karenge
‘‘तब यहोवा ने कहा, उठकर इस का अभिषेक कर ।’’
(1 शमूएल 16:12)

1.हम सब स्तुति करेंगे... आशीषें देता याह ही;
शाऊल को छोड़कर उसने... आशीषें दाऊद को दी ।

2.यिशै का पुत्र वह है... मुख पर लाली झलकती;
आँखें सुन्दर उस की... लीभ सीखनेवालों की ।

3.प्रभु यीशु है सुन्दर... बातें अनुग्रह से पूर;
दृष्टि जैसे कबूतर... निर्मल है वह निरन्तर ।

4.बेतलहैम का प्रसिद्ध... वीणावादक वह है;
सुमधुर गीत वह गाता... सुगुणों से भरपूर है ।

5.परमपवित्र यीशु... श्रेष्ठ गीत गाया है;
प्रवीण सब बातो में... नासरत का वासी है ।

6.नवयुवक वह वीर है... युद्ध में वह शूर है;
माता पिता से बढ़कर... याह ही उस के साथ है ।

7.भाईयों में से उसके... प्रभु ने उसको चुना है;
हर्षरुपी तेल लेकर... अभिषेक उसका किया है ।

8.मण्डली का दूल्हा वह... मसीह हमारा सिर है;
आत्माभिषेक पाकर... राज्य हम पर करता है ।
115 ख्रिस्त यीशु, दयालु प्रभुkhrist yeeshu, dayaalu prabhu
‘‘जो सब का प्रभु है ।’’ (प्रेरितों के काम 10:36)

ख्रिस्त यीशु सबका प्रभु है... परमेश्वर भी वह है;
सब का वह कर्ता था तिस पर भी... चरनी में रखा गया ।।

1.जग में आया ख्रिस्त प्रभु पापी बचाने को,
जग में फिरा चेलों के साथ सुख बलिदान करके ।

2.अनन्त जीवन सदा शान्ति, आनन्द की भरपूरी,
देने हमें ये आशीषें प्रभु बलिदान हुआ ।

3.आंधी, तूफान, लहरें आती उनसे जो डरते है,
ताको तुम अब प्रभु-ऊपर वह सब शान्त करेगा ।

4.घोर अन्धकार-रुप मृत्यु-तराई यदि जाना हो तुम्हें,
डरना नहीं निर्भय हो, प्रभु जो साथ अब है ।

5.मसीह हमारा जीवन जो है, ताकते रहें उसी को,
सन्तान हम हैं, युद्ध सामने है, जयवन्त बनेंगे हम सब ।

‘‘वह तुम्हारे लिए कंगाल बना कि उसके कंगाल हो जाने से
तुम धनी हो जाओं ।’’  (2 कुरिन्थियों 8:9)

ख्रिस्त यीशु, दयालु प्रभु... तू ही है सृजनहार;
हम सब गाते हल्लेलूयाह... तू ही है तारणहार ।।

1.जन्म तू ने जगत में लिया, कंगाल घर में जीवन बिताया;
संकट, कष्ट तू ने उठाया, किया हमारा उद्धार... यीशु प्यारे ।

2.जीवन-नैया खतरे में जब थी, आँधियों से जब डगमगाती थी;
आज्ञा देकर आँधी थमा दी, बेड़ा किया तूने पार... यीशु प्यारे ।

3.पाप का रोगी मैं जीवन भर था, यत्न भी करता पर कुछ न बना था;
यीशु तेरा जब वस्त्र छुआ था, चंगा हुआ यह बीमार... यीशु प्यारे ।
117 महिमा से तू जो भरा हुआmahima se too jo bhara hua
‘‘वह अगम्य ज्योति में रहता है ।’’ (1 तीमुथियुस 6:16)

1.महिमा से तू जो भरा हुआ... ज्योति में सदा रहनेवाला;
मनुष्यों में तू ने जन्म लिया... फिर से यीशु जग में तू आएगा ।

2.भूमि, आकाश में समा न सका... मन्दिरों में तू रह न सका;
नम्र होके चरणी में पैदा हुआ... मनों में हमारे घर तू बना ।

3.तम्बु में आकर तू बसा... लोगों को अपने लिए फिरा;
अग्नि और बादल में तू दिखा... फिर से यीशु अपनी तू महिमा दिखा ।

4.दानिएल की तू ने प्रार्थना सुनी... एज्रा की तू ने सहायता की;
बाबुल में तू ने बेदारी भेजी... अपने लोगों को फिर से दी रिहाई ।

5.तू ही हमारा राजा है... तू ही मुक्तिदाता है;
फिर से आनेवाला है... प्यारे प्रभु यीशु तू जल्दी आ ।
118 लोहू बहाके मुझे छुड़याlohoo bahaake mujhe chhudaya
‘‘और उसके वस्त्र और जांघ पर यह नाम लिखा है,
राजाओं का राजा, प्रभुओं का प्रभु ।’’ (प्रकाशित 19:16)

राजाओं का राजा, प्रभुओं का प्रभु;
सभों से उत्तम है, हल्लेलूयाह ।।

1.लोहू बहाके मुझे छुड़या, अपने लोहू से मुझे खरीदा;
स्वर्गीय कुटुम्ब में मुझ को मिलाया, स्वर्गीय गीत है मुझको सिखाया ।

2.जीवन नैया झोंको में आवे, प्रभु मुझे तब ढ़ाढस दिलावे;
किश्ती को मेरी पार लगावे, मन चाहे बन्दरस्थान में लावे ।

3.नाम लेकर मुझ को प्रेम से बुलाया, निज धन अपना मुझ को बनाया;
माता की नाई गोद में उठाया, स्वर्गीय दर्शन मुझको है दिया ।

4.मृत्यु के दण्ड से मुझ को छुड़या, दोषों का स्मरण उसने मिटाया;
प्रेम से है चुनके अपना बनाया, अपने साथ मुझ को राजा ठहराया ।

5.दुःख और परीक्षा जब मुझे घेरें, उसकी करुणा मुझ को सम्भाले;
आँखो से मेरे सब आँसू पोंछे, मेरा कटोरा खुशी से छलके ।

6.उत्तमता अपनी हर साल दिखावे, चिकनाई तेरी मार्गो में टपके;
जिस से चराईयाँ हरी हो जाएँ, पहाडियाँ सब खुशी मनाएँ ।

7.पवित्र मण्डली के साथ मिलकर, सन्मुख अपने प्रभु के आकर;
नया गीत गाएँ खुशी से भरकर, हल्लेलूयाह उसकी जय हो निरन्तर ।
119 जय जय यीशु राजाjay jay yeeshu raaja
‘‘तुम एक चुना हुआ वंश हो ।’’ (1 पतरस 2:9)

जय जय यीशु राजा, जय जय,
राजाधिराजा, की हो जय जय ।।(2)

1.पाप में मैं जो डूबा हुआ था,(2) मुझे निहारा हाथ पसारा;   (2)
सच्चे मार्ग में ले आया ।(2)

2.क्रूस के लोहू से मुझको धोकर... सब पापो को मेरे मिटाया;
मेरे पवित्र प्रभु यीशु ।

3.मैं अधर्मी था मुझ को तू ने... धर्म और त्राण का, वस्त्र दिया;
प्रेमी प्रभु जी तुझ को जय, जय ।

4.मैं मिट्टी का था जो कीडा... मुझे उठाकर स्वर्ग में लाया;
महा प्रभुजी तुझ को जय, जय ।

5.मैं जो पापी श्रापित भी था... निज धन अपना मुझे बनाया;
धनी प्रभु हो तुझ को जय, जय ।

6.माता यदि भूले तो भूले... पर मैं तुझ को न भूलूँगा;
सच्चे प्रभु तू ने ऐसा कहा ।

7.अधिक स्तुति के योग्य तू है... आदि और अन्त भी तू ही है;
युगानुयुग तक तुझ को जय, जय ।
120 जय, जय, जय, जय राजाधिराजाjay, jay, jay, jay raajaadhiraaja
‘‘वह धनी होकर तुम्हारे लिए कंगाल बना कि उसके
कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओं ।’’
(2 कुरिन्थियों 8:9)

जय, जय, जय, जय राजाधिराजा,
स्तुति के योग्य है यीशु प्यारा ।।

1.नाम महान है सब से तेरा, तू कभी न बदलनेवाला;
सब वायदों को पूरा किया, झूठ प्रभु, तू ने कभी न बोला ।

2.रखवाली चरवाहे करते थे, दूत गाके संदेश लाए;
पैदा हुआ मुक्तिदाता, आओ मिलकर खुशीयाँ मनाएँ ।

3.ज्योतिषी पूछते पूर्व से आए, ‘‘जन्म राजा का हुआ कहाँ है ?’’
पाके उस को सीस नवाए, सोना, लोबान, गन्धरस भेट चढ़ाएँ ।

4.तू महान और धनी परमेश्वर, गरीबों के लिए गरीब बनकर;
हम पापीयों को धनी बनाकर, भागीदार महिमा का बनाया ।

5.प्रभु यीशु तू ने लोहू बहाया, प्रायश्चित देकर मुझको छुडाया;
वर्णन से बाहर तेरी करुणा, स्तुति के योग्य है प्रभु हमारा ।

6.प्राण दिया तू ने क्रूस के ऊपर, जय पाई है तू ने सब पर;
युग युग महिमा होवे तेरी, हल्लेलूयाह गाएँ मिलकर ।
121 हृदय का राजा जय यीशु नामhrday ka raaja jay yeeshu naam
‘‘मेरा प्रेमी गोरा और लाल सा है,
वह दस हजारों में उत्तम है ।’’ (श्रेष्ठ गीत 4:10)

हृदय का राजा जय यीशु नाम, शान्ति कुमार मैं करुँ प्रणाम;
दस हजारों में हो अनुपम, सुगन्धित तेल से है मधुर नाम, करुँ प्रणाम ।।

1.लाखो में मीठा है यीशु नाम,... चमकीला है वह सूर्य समान;
बयान के बाहर है तेरा प्रेम,... अधर्मी मैं जो चखा वह प्रेम,
करुँ प्रणाम ।

2.तेरे वचन में हूँ मैं मगन,... तृषित हो आया प्रभु तेरे चरण;
हर्षित हो प्रभु करता प्रणाम,... मुझ अयोग्य ने पाया जीवन का दान,
करुँ प्रणाम ।

3.मुझ को बचाया दे अपना प्राण,... समझा दे मुझे स्वर्गीय ज्ञान;
भेंट मैं चढाऊँ सम्पूर्ण जीवन,... करो प्रभु अब मुझको ग्रहण,
करुँ प्रणाम ।
122 प्रशंसा गाके मैं स्तुति करुँprashansa gaake main stuti karun
‘‘विश्वास, आशा और प्रेम ये तीनों स्थाई है, पर इनमें
सब से बड़ा प्रेम है ।’’ (1 कुरिन्थियों 13:13)

प्रशंसा गाके मैं स्तुति करुँ,
राजाओं के राजा को, प्रभुओं के प्रभु को;
झुक के मैं प्रणाम करुँ ।।

1.अद्भुत है तेरा यह प्रेम... मुझ पर परमेश्वर दिखाया पवित्र प्रेम;
न बदलनेवाला यह प्रेम... रहता है मुझ में यह प्रेम ।

2.ज्योति है जग की यह प्रेम... जीवन में देकर खरीदा है मुझे यह प्रेम;
बलिदानवाला यह ख्रिस्त प्रेम... दिव्य और मधुर यह प्रेम ।

3.संसार के प्रेम में खोया... मुझ को सनातन प्रेम से प्रेम किया;
मुझे जीता है यह दिव्य प्रेम... दिल में भर आता यह प्रेम ।

4.विश्वास योग्य यह प्रेम... माता जैसे सम्भालता है हर दिन यह प्रेम;
महान और ऊँचा है प्रभु प्रेम... मुझे है खींचता यह प्रेम ।

5.शाश्वत है तेरा यह प्रेम... शान्ति देता है दिव्य वचन से यह प्रेम;
सामर्थी है यह प्रभु प्रेम... सदा स्थिर रहता यह प्रेम ।
123 आओ उस के मन्दिर मेंaao us ke mandir mein
‘‘ईश्वर के पवित्र स्थान में उसकी स्तुति करो ।’’ (भजन 150:1)

आओ उस के मन्दिर में यहोवा प्रभु की करो स्तुति,(2)
भूमि आकाश के वासियों, सब मिलकर करो स्तुति उसकी;(2)
राजा, राजा है, राजाओं के राजा की करो स्तुति,(2)
आओ उसके मन्दिर में यहोवा प्रभु की करो स्तुति ।
सर्वाधिकारी यीशु, सर्वशक्तिमान है यीशु;
सम्पूर्ण प्रेमी यीशु, उत्तम भी है नम्र यीशु;
सब पर दयालु है यीशु, आओ मिलकर करो स्तुति ।।

1.नरसिंगे और बर्बत के साथ करो स्तुति,
डफ और तबलों की आवाज पर करो स्तुति;
राजा वह राजाओं का है, आओ मिलकर करो स्तुति ।

2.तारदार साजों के साथ मिलकर करो स्तुति,
मधुर स्वर और डफ बजाकर करो स्तुति;
राजा वह अधिकारी है, आओ मिलकर करो स्तुति ।
124 स्तुति करो प्यारो स्तुति सर्वदाstuti karo pyaaro stuti sarvada
‘‘हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और उसके किसी
उपकार को न भूल ।’’       (भजन 103:1,2)

स्तुति करो प्यारो स्तुति सर्वदा, करो प्यारो स्तुति सर्वदा ।।

1.नरक से उसने मुझ को बचाया, स्वर्ग के अन्दर मुझ को लाया;
इसलिए स्तुति करो प्यारो -- करो प्यारो ।... स्तुति

2.मुझ गरीब के तारण के लिए विश्वम्भर प्रभु गरीब बनें;
इसलिए स्तुति करो प्यारो -- करो प्यारो ।... स्तुति

3.पाप के दण्ड का भय है मिटाया, जीवन की शक्ति दिल में वह लाया;
इसलिए स्तुति करो प्यारो -- करो प्यारो ।... स्तुति

4.मित्र हमारा प्रभु यीशु आएगा, महिमा की देह वह हमको देगा;
इसलिए स्तुति करो प्यारो -- करो प्यारो ।... स्तुति,
125 प्रभु जी के चरणों मेंprabhu jee ke charanon mein
‘‘आओ हम झुककर दण्डवत करें, और घुटने टेकें ।’’ (भजन 95:6)

प्रभु जी के चरणों में आस लगाओ,
सीस नवाए स्तुति गाओ ।।(2) ... प्रभुजी

1.आओ यीशु गुण हम गाएँ... उसके प्रेम का गुण बखानें;(2)
मधुर नाम की जय जयकार हो ।(2) ... प्रभुजी

2.यीशु छुड़या, यीशु बचाया... यीशुने हमसे प्रेम है किया;
महिमा उसकी और स्तुति हो ।

3.गीतें गाओं, भजन सुनाओ... यीशु नाम को नित्य उच्चारो;
सब मिल उस को धन्य कहो ।

4.विश्व जगत का सिरजक जो है... अपनों का वह कृपा निधान है;
उसके प्रेम को मत बिसरो ।

5.यीशु के चरणों में भेट चढ़ाओ... आत्मा प्राण और देह तुम सोंपो;
प्रभु अपना उसको मानो ।
126 प्यारा मसीह, प्यारा मसीह, लाखोpyaara maseeh, pyaara maseeh, laakho
‘‘वह दस हजारों में उत्तम है ।’’ (श्रेष्ठ गीत 5:10)
प्यारा मसीह, प्यारा मसीह, लाखो में प्यारा मेरा मसीह;
मेरा अकेला सहारा वही ।।(2)

1.दुनिया में कोई और नाम है नहीं, उसी ने मुझ को दि अबदी खुशी;
मुझको बचाया, गुनाह से छुड़ाया,
और मुझको है दी उसने अपनी मुक्ति ।... प्यारा

2.पुत्र ईश्वर का है मेरा मसीह, मेरे प्रायश्चित का मेम्ना है वही;
दुनिया में आया और लोहू बहाया,
और जान अपनी प्यारी सलीब पर दे दी ।

3.सूली पर चढ़कर बलिदान हुआ, वास्ते हमारे वह मारा गया;
जखमी हुआ और सताया गया,
और फिर जिन्दा हुआ वह हमारा मसीह ।
127 मसीह तू मेरा प्यारा हैmaseeh too mera pyaara hai
‘‘में यहोवा से प्रेम रखता हूँ इसलिए कि उसने मेरे
गिड़गिड़ाने को सूना है ।’’       (भजन 116:1)

मसीह तू मेरा प्यारा है... तू मेरे दिल का नूर;
तू ही मेरा कफारा है... ऐ मेरे दिल मंजूर ।।

1.जब में शैतान के बन्ध में था... गुनाह से था मामूर;
वह हालत तू न देख सका... ऐ मेरे दिल मंजूर ।

2.मैं जखमी धायल था लाचार... नालायक और मजबूर;
पर तू था मेरा मददगार... ऐ मेरे दिल मंजूर ।

3.जब सभों ने छोड़ दिया था... जब सब हो गए दूर;
तब तू ने गोद में लिया था... ऐ मेरे दिल मंजूर ।

4.पास अब मसीह मैं तेरा हूँ... मैं तेरा हूँ जरुर;
काश तेरे पास मैं नित रहूँ... ऐ मेरे दिल मंजूर ।
128 बोलो जय जय, बोलो जय जयbolo jay jay, bolo jay jay
‘‘पवित्र लोगों में उसकी मीरास की महिमा का धन कैसा है ।’’ (इफिसियों 1:18)

बोलो जय जय, बोलो जय जय, प्रभु यीशु की जय;
महान ईश्वर, विश्वविधाता, तारणहारा है ।।

1.आदि और अन्त, अल्फा ओमिगा, परमेश्वर अब है;
था वही जो, आनेवाला है, शक्तिमान वह है ।

2.यीशु प्रभु में हमें बुलाया, और वह चुन लिया;
प्रेम से हमें पवित्र किया, निर्दोष भी किया है ।

3.यीशु में तू ने लोहू के द्वारा, छुटकारा दिया है;
हमें तू धोया माफी भी दे दी, अनुग्रह किया है ।

4.प्रभु यीशु ने दण्ड को हटाया, भय अब नहीं है;
पाप, व्यवस्था, मृत्यु के बल से, स्वतंत्र किया है ।

5.मसीह में तू ने नया बनाया, पिता को जान गए;
उसी में हमें ग्रहण भी किया, कैसा अद्भुत है ।

6.उसी में आत्मा की छाप लगी है, मीरास का बयाना है;
मन की आँखे ज्योतिर्मय हुई, अद्भुत आशा है ।

7.प्रभु मसीह में मीरास हम बनें, अविनाशी जो है;
संतो में उस मीरास की महिमा, धन जो बड़ा है ।
129 तू ने कहा, अद्वैत ईश्वरtoo ne kaha, advait eeshvar
(प्रकाशित - 1)
तू ने कहा, अद्वैत ईश्वर,
‘‘मैं जो हूँ’’, स्तुति मैं करुँ तेरी ।।

1.अल्फा ओमेगा तू ही प्रभु है, वर्तमान भूत भविश्य में तू है;
पालनहारा जो तू ही मेरा है, सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ;
दिल से तुझको मैं स्तुति चढ़ाऊँ ।

2.प्रभु तू ने मुझे शुद्ध किया है, चोखे सोने की नाई किया है;
मण्डली में तू मुझे लाया है, तू फिरता सात सोने की दिवट में;
सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ ।

3.तेरे बाल जो ऊन की नाई सफेद है, तू तो मेरा सलाहकार और ज्ञान है;
तू तो अनुपम सर्वेसर्वा है, सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ;
दिल से तुझको मैं स्तुति चढ़ाऊँ ।

4.तेरा मुखडा सूरज की नाई है, आँखे जलती अग्नि समान जो है;
मेरे हृदय को तूने देखा है, भस्म कर दिया मेरे पापों को;
सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ ।

5.पाँव तेरे पीतल की नाई है, पाप-जगत का भी न्याय किया है;
क्रूस पर शैतान को हरा दिया, तू ने मुझ को जयवन्त किया है;
सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ ।

6.मुख से दोधारी तलवार निकलती, जो है मेरे शत्रु को नाश करती;
पूराने स्वभाव को वह काटती है, प्रभु तू ने यह सब कुछ किया है;
सर्वाधिकारी को मैं सराहूँ ।

7.तू तो थामे है सात सितारों को, प्रभु आदि और अन्त तू ही है;
तू ने मुझ को भरपूर भी किया है, तू तो मेरी सम्पूर्णता भी है;
दिल से गाऊँ आमीन, हल्लेलूयाह ।
130 हे करुणानिधान तू यीशु महानhe karunaanidhaan too yeeshu mahaan
‘‘वह सिंहासन पर बैठा था... ।’’  (प्रकाशित 5:7)

हे करुणानिधान तू यीशु महान, सिंहासन पर तू विराजमान ।।

1.पवित्र तू है, सत्य तू है, दाऊद की कुँजी हाथ में तेरे है;
खोले हुओं को बन्ध कोई न करता,
बन्ध किए को कोई खोल न सकता;... यह है तेरी शान ।

2.सात तारे जिसके दाहिने हाथ में है, सोने की सात दिवटों में फिरता है;
प्रथम और अन्तिम जीवित सदा है,
दोधारी तलवार हाथ में तेरे है;... यह है तेरा मान ।

3.आँखे तेरी अग्नि की ज्वाला है, पाँव उत्तम पीतल के समान है;
आत्मा ईश्वर की पास जिसके है,
पुस्तक खोलने में जयवन्त तू ही है,... धन्य धन्य प्रधान ।

4.जो आमीन और विश्वासयोग्य है, सच्चा गवाह और सृष्टि का मूल है;
भस्मकारी आग और न्यायी तू है,
धीरज धरता सामर्थी तू है,... तू है सबसे महान ।

5.भजते प्रभुजी तुझको हम मिलकर, दण्डवत करते आभारी होकर;
बड़े सामर्थी काम किए है,
समझ से बाहर प्रभु तू है,... करते हैं आदर मान ।
131 महासामर्थी ओ यीशु !mahaasaamarthee o yeeshu !
‘‘सारी वस्तुएँ उसी के द्वारा, उसी के लिए सृजी गयी है ।’’
(कुलुस्सियों 1:16)

महासामर्थी ओ यीशु ! बहुत ही विशाल है तु,
प्रतापी है, प्रेम से भरपूर, पूरे दिल से तुझ को भजूँ ।।

1.मसीह तू मेरा जीवन है, अब तो में संपूर्ण मरा हूँ;
छिप गया परमेश्वर में अब, तुझ ही मैं दृढ़ भी रहूँ;
प्रगट होगा महिमा के साथ, गौरव और स्तुति करुँ ।

2.मसीह तू तो सब में सब कुछ, हट गयी सब भिन्नता जो थी;
न रहा बडा या छोटा, और न कोई मुरख, ज्ञानी;
सब को तू ने एक कर दिया, जय-जयकार अब तेरा करुँ ।

3.मसीह तू मेरा सर्वश्रेष्ठ, सब बातों में तू प्रधान है;
प्रभुता में तेरी मैं हू, तेरी इच्छा पूरी करुँ;
तू ही शीरोमणि भी है, आदर से मैं प्रणाम करुँ ।

4.मसीह तू महिमा की आशा, कैसा अद्भुत ! मुझ मैं रहता;
मन मैं आशा बढ़ती जाती, क्योंकि शीध्र तू है आता;
मिलूँगा मैं तुझ से प्रभु, बड़ा आनन्द, धन्य कहूँ ।

5.मसीह तू मेरा विजेता, क्रूस के ऊपर जयवन्त हुआ;
प्रधानता सामर्थ, अधिकार, पाँवो तले सब को किया;
जयवन्त हूँ मैं तेरे कारण, नम्रता से भजन करुँ ।
132 प्रभु यीशु तू ही, महिमाprabhu yeeshu too hee, mahima
‘‘यहोवा का तेज निवासस्थान में भर गया ।’’
(निर्गमन 40:34)

प्रभु यीशु तू ही, महिमा स्वरुपी, पूजनीय है ।।

1.कलीसिया में तू, फिरता रहता है,(2)... सब का आधार तू ही है;(2)
पवित्र सभा का, प्रधान तू है,(2)... आदर के योग्य, तू ही है ।(2) -है

2.तेरी आज्ञा से, भक्त मूसा ने,... निवासस्थान निर्माण किया;
महिमा से अपनी, तू भर दिया,... महिमा निवासी, तू ही है ।-है

3.रुपान्तर तेरा, स्वरुप सुरज सा,... पुष्प है जैसे खिलता;
हृदय खोला, तू शिष्यो का,... प्रकाश प्रभु, तू ही है । -है

4.इच्छा ईश्वर की, तूने पूरी की,... अन्त तक तू अटल रहा;
धैर्य धर प्रभु, प्राण तू दिया,... महिमा पिता की किया है । -है

5.मिट्टी-समान हम जो, मुक्ति दी हम को,... महिमित स्वरुप जो तेरा;
हम में तूने निर्माण किया,... महिमा प्रभु तू पाया है । -है

6.आराधना और स्तुति, प्रेम से हम करते,... आभारी हम हैं तेरे;
आत्मा, प्राण, देह अर्पण करते,... है प्रभु हम खुद, तेरे हैं । -है,
133 अनोखा है तू मसीहाanokha hai too maseeha
‘‘... कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे ।’’ (कुलुस्सियों 1:18)

अनोखा है तू मसीहा, अद्वितीय ईश्वर तू है;
अल्फा और ओमेगा, तू ही प्रभु है ।।

1.जन्म तेरा अनोखा है, विश्व में आनन्द लाया है;
ढ़ाढस देकर हम को, निर्भय तू ही किया है ।

2.जीवते वचन जो तेरे है, जीवन से भरपूर वे हैं;
परम पवित्र यीशु, जग का तू आदर्श है ।

3.तू ही महान परमेश्वर है, मृत्यु पर जय पाया है;
शैतान को हरा कर, धर्मी हम को किया है ।

4.पाप और श्राप हटाया है, स्वर्गीय मार्ग दिखाया है;
शक्तिमान परमेश्वर, स्तुति तुझ को देते है ।

5.सारे जगत में हे ईश्वर, प्रेम तेरा ही सनातन है;
समझ से बाहर वह है, महान तेरा प्रेम है ।

6.कलीसिया का सिर तू ही है, अंग हम सब को किया है;
भरपूरी सब तुझ में, महिमित ईश्वर तू है ।
134 सर्वाधिकारी हे प्रभुsarvaadhikaaree he prabhu
‘‘स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है ।’’
(मत्ती 28:18)

सर्वाधिकारी हे प्रभु, तू ही;
स्वर्ग और पृथ्वी में तू ही शिरोमणि है ।।

1.हर बातों में बढ़कर विजय पाते हैं,
प्रेम किया जो हम से तू ख्रिस्त प्रभु है;
हमने देखी है तेरी विजय स्तुति करते है ।

2.उसकी सामर्थ हमारी, विश्वास जो करते है;
कितनी महान शक्ति हम जान गए है;
जो जीवित हुआ देखकर उसे हर्ष करेंगे ।

3.जो बल देता है वही बलवन्त प्रभु,
उसमें सब कुछ मैं करता जो उसको भाता है;
उसके पुनरुत्थान की शक्ति की स्तुति करते है ।

4.ख्रिस्त की मृत्यु की समानता में भागी होकर,
कष्ट, दुःख, संकट के अनुभवों में जाकर;
हम शरीर, प्राण, आत्मा में स्तुति करते है ।

5.जो बलवन्त ईश्वर हमें स्थिर किया है,
उसके पुत्र यीशु के द्वारा महिमा उसको दो;
और आदर सम्मान मिले, हल्लेलूयाह आमीन ।
135 हे प्रभु तू धन्य हैhe prabhu too dhany hai
‘‘मैं जो हूँ सो हूँ ।’’ (निर्गमन 3:14)

हे प्रभु तू धन्य है,
सिरजनहारा, तारणहारा, पालनहारा तू है ।।

1.जीवन की रोटी हमारी जो तू है, तृप्त है किया प्यारा जो तू है;
किया एक महान काम, सामर्थ्य हमारी तू है ।

2.उजियाला जग का तू ही हमारा, तूने प्रभुजी नयन है खोला;
किया एक अद्भुत काम, प्रकाश हमारा तू है ।

3.द्वार प्रभु एक ही तू है हमारा, प्रवेश कराया, उद्धार है दिया;
किया एक सम्पूर्ण काम, पूरी शान्ति तुझ में है ।

4.अच्छा चरवाहा तू ही हमारा, भेंडों के लिये जीवन है दिया;
किया छुटकरे का काम, भेडों को ले चलता है ।

5.पुनरुत्थान जीवन तू ही हमारा, मृत्यु से हमको पार है तू किया;
किया एक जयवन्त काम, सब कुछ नया किया है ।

6.मार्ग और सच्चाई तू ही है हमारा, झूठी शिक्षा से हमको बचाया;
किया एक आत्मिक काम, ऊँचे स्थान में रखा है ।

7.सच्ची दाखलत्ता तू ही प्रभुजी, डाली हम तेरे बने है तुझ में;
किया एक गहरा काम, आत्मा का फल दिया है ।
136 हे यीशु तेरा प्रेमhe yeeshu tera prem
‘‘इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं ।’’  (यूहन्ना 15:13)

हे यीशु तेरा प्रेम, कैसा महान है;
आकाश के तारे, पर्वत, समुद्र, सबसे महान है ।।(2)

1.अगम्य आनन्द से हृदय भरपूर है,(2)
प्रभु का कार्य कैसा महान है;(2)
हर एक बिहान और हर एक साँझ, स्तुति के योग्य है ।(2)

2.संकट के समय में जीवन नीरस होता,
ईश्वर पुकारता हूँ, दया मुझ पर दर्शाओ;
बिनती से पहले वह मुझ से कहता, मैं तेरे साथ हूँ ।

3.अन्धेरी घाटी से होकर मुझे जाना,
मृत्यु और जोखिम से सफर मुझे करना;
चरवाहा बनकर अगुवाई करता, सदा वह साथ रहता ।

4.घटी और कमी का मुझे नहीं डर है,
हरी चराईयों में, मुझे बिठाता है;
भोजन और जल से, तृप्त वह करता, वह मेरे साथ है ।

5.ईश्वर के भवन में, स्तुति सदा करूँगा,
सम्पूर्ण हृदय से उसको सदा भजूँगा;
स्तुति प्रशंसा के योग्य ईश्वर, हल्लेलूयाह आमीन ।
137 ऐ प्रेमी यीशु तू नेai premee yeeshu too ne
‘‘यीशु जो हम से प्रेम करता है और
जिसने अपने लोहू के द्वारा हमें पापों से छुड़ाया है ।’’
(प्रकाशित 1:5,6)

ऐ प्रेमी यीशु तू ने, जो प्यार हम से किया,
हम याद करते झुकते, मुक्ति का आनन्द दिया ।।

1.बलिदान तेरा अद्भुत, जो सब के लिए हुआ;
सब के पापों के बदले, प्रायश्चित तू ने किया ।

2.बन्धुवे थे हम मिस्र में भेजा तू ने मूसा को,
बलवन्त भुजा के द्वारा स्वतंत्र हम को किया ।

3.माफी का आनन्द देकर, आगे चलाया हम को;
यात्रा में साथ रहकर विजय का जीवन दिया ।

4.जंगल में नदी बहाई, मरुभूमि में सोता;
बंजर भूमि को फलवन्त, हरा भरा भी किया ।

5.बाबुल से तू ने छुड़ाया, हर बन्धन को है तोड़ा;
झूठी शिक्षा से हम को, प्रभु तू ने बचाया ।

6.संगति में हमें वह लाया, मण्डली का अंग बनाया;
गवाह हम को बनाके, शत्रु को लज्जित किया ।

7.ऐ महाप्रेमी यीशु, ये सब कुछ तू ने किया;
आदर प्रशंसा करते, महान उद्धार जो दिया ।
138 यीशु तू ने मेरे लिएyeeshu too ne mere lie
‘‘जो हम से प्रेम रखता है, और
अपने लोहू के द्वारा हमें पापों से छुड़ाया है ।’’ (प्रकाशित 1:5)

यीशु तू ने मेरे लिए कुर्बानी चढ़ाई ।।(2)

1.क्रूस पर यीशु तू ने अपनी जान चढ़ाई,(2)
जान चढ़ाई, जान चढ़ाई ।(2)...यीशु

2.अपने खून से तू ने मेरी जान कमाई; जान कमाई, जान कमाई ।

3.रोशनी अपनी तू ने मुझ में आ चमकाई; आ चमकाई, आ चमकाई ।

4.तेरी मुहब्बत है मुझ में आ समाई; आ समाई, आ समाई ।

5.सब गुनाह से तू ने मुझ को दी रिहाई; दी रिहाई, दी रिहाई ।

6.क्यों न गाऊँ मुंजी तेरी नित्य बड़ाई; नित्य बड़ाई, नित्य बड़ाई ।
139 प्रेमी ईश्वर प्रेम तू हैpremee eeshvar prem too hai
‘‘परमेश्वर प्रेम है ।’’ (1 यूहन्ना 4:8)

प्रेमी ईश्वर प्रेम तू है, प्रेम तेरा ही सच्चा है ।।

1.प्रेम तेरा जो सनातन का है, करुणा से हमें खींचा है;
प्रमाण किया प्राण दे के, बलिदानवाला प्रेम वह है ।

2.प्रेम किया तूने सारे जगत से, सब बचे तू चाहता है;
धन्य है तू ढ़ापा पाप, ढ़ापनेवाला प्रेम वह है ।

3.बन्धन तेरा प्रेम का दृढ़ है, हम को ख्रिस्त में बाँधा है;
ख्रिस्त के प्रेम से कोई हमें, अलग कर न सकता है ।

4.माता यदि भूले तो भूले, प्रेम तेरा न भूलता है;
कभी न बदले प्रेम तेरा, न बदलनेवाला है ।

5.प्रेम तेरा प्रभु सामर्थी है, टूटे न यह बलवन्त है;
बाढ़के द्वारा बुझे न, जयवन्तवाला प्रेम यह है ।
140 प्रेमी विश्वासयोग्य परमेश्वर पिताpremee vishvaasayogy parameshvar pita
‘‘परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना
एकलौता पुत्र दे दिया ।’’  (यूहन्ना 3:16)

प्रेमी विश्वासयोग्य परमेश्वर पिता, दिया अपने पुत्र को;
क्रूस पर बलि हो, लोहू बहाए, पाप हमारा धोने को ।।

1.बलिदान पूर्ण प्रेम ईश्वर का, भेजा अपने पुत्र यीशु को;
इसलिए जग से प्रेम करता अधिक, कारण उसकी सृष्टि जो ।

2.सनातन प्रेम से प्रेम जो किया, प्रमाण दिया क्रूस पर प्राण देके;
लोहू बहाया और प्रायश्चित किया, पाप संसार का धोने को ।

3.प्रेम में छिपी जो विश्वासयोग्यता, प्र्रगट की तुच्छ पापी जन पर;
पाप स्वीकार कर के निकट जब आते, क्षमा देता उन सब को ।

4.जीवन तू बदला, पुत्र बनाया, अनन्त जीवन हम सब को दिया;
तेरा महान प्रेम जो हमने चखा, मीरास के योग्य हम हों ।

5.स्तुति करते हैं महान प्रभु की, आत्मा प्राण और शरीर देकर;
हल्लेलूयाह स्तुति हो प्रभु की, युगानुयुग स्तुति हो ।
141 वन्दन है, वन्दन हे यीशुvandan hai, vandan he yeeshu
‘‘अद्वेत परमेश्वर हमारे उद्धारकर्ता की महिमा...
युगानुयुग रहे ।’’ (यहुदा 25)

वन्दन है, वन्दन हे यीशु;
वन्दन तुझ को हमारा, हे यह वन्दन तुझ को हमारा ।

1.आया जग में मानव देह में, मानव जाति को मुुक्ति दिलाने;
मृत्यु सहा, मृत्युंजय हुआ, महामहिमा का राजा;
तुझ को वन्दन है यह हमारा ।

2.पापी को देखा, प्रेम दिखाया, करुणा से कलवरी पास ले आया;
प्रेम से लाया, प्रेम से धोया, प्रेम से आँसू निवारा;
अनुपम, प्रेम इस जग में तेरा ।

3.तारण करने, देहधारी हुआ, क्रूस के मरण को अर्पण हुआ;
करुणा कर कंगाल को बुलाया, मार्ग दिखाया स्वर्ग का;
तुझ को, हृदयार्पण हो सबका ।

4.अनाथ था मैं, तू मेरा नाथ है, तू मेरी चट्टान, तू मेरा आश्रय;
अन्धा मैं, मेरे अन्तरंग में, ज्योति दिखाकर चलाता;
प्रभुजी, स्तुतियोग्य है तू त्राता ।

5.जग को छोड़ा, स्वर्ग में लौटा, परमपिता की प्रतिज्ञा भेजा;
पवित्र आत्मा का वरदान हम पर, प्रलय जैसे उतारा;
राजा, स्तुतियज्ञ तुझ को हमारा ।

6.आएगा स्वर्ग से साथ संतो के, स्वर्गीय पिता की पूर्ण महिमा में;
प्रमापमय प्रभु प्रगट होगा, अक्षय देह मुझे देगा;
प्रणाम, युग युग तुझ को करूँगा ।

7.स्तुति-सिंहासन पर आसीन है, परम-पावन पार वर्णन के;
तेजोमय विभव में रहता, महिमित मुक्तिदाता;
तुझ को, वन्दन है हे विधाता ।
142 वन्दना करो, प्रभु यीशु कीvandana karo, prabhu yeeshu kee
‘‘हे हमारे प्रभु, और  परमेश्वर तू ही महिमा,
और आदर, और सामर्थ के योग्य है ।’’ (प्रकाशित 4:11)

वन्दना करो, प्रभु यीशु की,(2) जय जयकार करो ।।(2)

1.मेरे जीवन में सब से प्रधान है,
मेरा मालिक, राजा वही है, युग-युग महिमा प्रभु ही की है;
गाता रहूँगा, भजता रहूँगा, जय के नारे मारो ।...वन्दना

2.मेरा आदर्श और गौरव वही है,
उसकी प्रभुता जो सब के ऊपर है, नाम उसका अद्भुत अनुपम है;
गाता रहूँगा, भजता रहूँगा, जय के नारे मारो ।

3.यहोवा महान और स्तुति के योग्य है,
सन्तों की भक्ति और पवित्रता है, महा प्रतापी वह भय योग्य है;
गाता रहूँगा, भजता रहूँगा, जय के नारे मारो ।

4.बुद्धि और सामर्थ, ज्ञान प्रभु ही है;
उसकी सच्चाई आकाश से ऊँची है,
सेनाओ का यहोवा जो संग-संग है;
गाता रहूँगा, भजता रहूँगा, जय के नारे मारो ।
143 सीस नवाए प्रभु वन्दन करतेsees navae prabhu vandan karate
‘‘और उन्होंने पास आकर और उसके पाँव पकड़ कर
उसे प्रणाम किया ।’’   (मत्ती 28:9)

सीस नवाए प्रभु वन्दन करते,
पाँव पड़े हम प्रभु कीर्तन करते ।।

1.पापी जगत का तारण करने... प्रीत पधारे प्रभु वन्दन करते ।

2.पूरे हृदय से भजें तुझे हम... सुबुद्धि दीजो प्रभु वन्दन करते ।

3.हर्षित मन है आज हमारा... भाग मिला है प्रभु वन्दव करते ।

4.दुःखी निराशी देखा हमें जब... वारे तुम आए प्रभु वन्दन करते ।

5.आज हमारे मन हैं उच्चारते... जय प्रभु जय हम वन्दन करते ।
144 चढ़ाता हूँ मैं धन्यवाद प्रभुchadhaata hoon main dhanyavaad prabhu
‘‘वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए
क्रूस पर चढ़ गया ।’’ (1 पतरस 2:24)

चढ़ाता हूँ मैं धन्यवाद प्रभु... क्रूस के उस प्रेम के लिये;
मारा गया और गाड़ा गया था... जी उठा मेरे लिये ।।(2)

1.काँटो का ताज पहिना तूने सिर पर, हाथ पाँव ठोकें क्रूस पर तेरे;
हुआ था बलि मेम्ने की नाई... सहा सब मेरे लिये ।(2) चढ़ाता

2.दुःख सहा तू ने कि शान्ति में पाऊँ... क्रूस पर चढ़ा कि मैं पाऊँ मुकुट;
मरण को सहा कि मैं जीवन पाऊँ... कैसा प्रेम मेरे लिये ।

3.देखता हूँ महिमित स्वर्ग मेरा... न पाया गुण से यह मेरे;
खुशी के आँसू के साथ भजूं मैं... यह सब दान मेरे लिये ।

4.धृणित पाप से करता हूँ धृणा... क्रूस पर वह हो गया है दूर;
लगाओ सिंहासन मेरे हृदय में... गाऊँ मैं तेरे लिये ।
145 हल्लेलूयाह ! स्तुति प्रशंसा गाऊँगाhallelooyaah ! stuti prashansa gaoonga
‘‘याह की स्तुति करो क्योंकि वह भला है ।’’ (भजन 135:3)

हल्लेलूयाह ! स्तुति प्रशंसा गाऊँगा ।।

1.क्रूस पर चढ़कर लोहू बहा के,(2) बचाया प्रभु जी ने मुझको ।(2)

2.निष्कलंक यीशु के लोहू के द्वारा, पापों का दाग मेरा धुला ।

3.क्यों न गाऊँ मैं गीत उद्धार का, गाता हूँ गुण प्रभु तेरा ।

4.धन्य प्रभु बलिदान के लिए, करता हूँ दण्ड़वत्त तुझको ।

5.गाऊँगा लेकर सुसमाचार को, करूँगा मुक्ति का प्रचार मैं ।

6.साथ रहो प्रभु हरदम मेरे, बढ़ाओ मेरे कदम को ।

7.हर्षित मन से ऊँची आवाज से, करता हूँ प्रभु की उपासना ।
146 हर समय स्तुति करता रहूँगाhar samay stuti karata rahoonga
(भजन 34:1)

हर समय स्तुति करता रहूँगा ।
सदा उसकी कीर्ति मैं गाता रहूँगा ।

1.यहोवा से प्रार्थना करते ही... मेरे भय को दूर किया;
सारे संकटों में साथ मेरे रहकर,
पास बुलाकर मुझे दिलासा दिया... आराधना सदा करूँगा ।

2.जीवन भर मैं गाता रहूँगा... तेरी भलाई के लिए प्रभु;
मेरे जीवन के अन्तिम क्षण तक,
तेरी विश्वासयोग्यता के लिए... सदा तुझे मैं भजूँगा ।

3.महान है तेरी महिमा जो... अद्भुत प्रभावशाली ईश्वर;
पूरे दिल से स्तुति करूँगा,
अनन्त तेरे कार्यो के लिए... निश्चय तुझे मैं भजूँगा ।

4.तेरी मनसा को पूरा करके... गौरव के साथ तू ने अगुवाई की;
मेरा प्रभु और चरवाहा होकर,
तू प्रभु मेरे जीवन में है... सच्चाई से तुझे भजूँगा ।
147 मैं गाऊँगा, हर समय गाऊँगाmain gaoonga, har samay gaoonga
‘‘उस ने खरे मन से उनकी चरवाही की ।’’  (भजन 78:72)

मैं गाऊँगा, हर समय गाऊँगा,
प्रभुजी स्तुति तेरी करूँगा ।।

1.उत्तम रखवाला तू जो बना है, भेडों के लिए प्रभु प्राण दिया है;
पाप का प्याला तूने पिया है, उद्धार का कटोरा मुझे दिया है;
हर्षित हो के प्रभु गाऊँगा ।

2.महान रखवाला तू अब साथ है, आवश्यकताएँ सब पूर्ण करता है;
तू मेरे जी में जी ले आता है, तराई के अनुभव में निकट रहता है;
यात्रा में गाते गाते जाऊँगा ।

3.प्राणों का रखवाला तू जो सच्चा है, रखवाली भेड़ों की न्याय से करता है;
नकली रखवालो से तुझ को धृणा है, तेरी भेडें तेरी आवाज सुनती है;
पूरे हृदय से प्रभु गाऊँगा ।

4.प्रधान रखवाला तू ही मेरा है, शीध्र ही प्रगट तू होने वाला है;
महिमा का मुकुट देनेवाला है, पवित्र नगर में रखनेवाला है;
ऊँचे स्वर से प्रभु गाऊँगा ।
148 यीशु जी तेरे महान नामyeeshu jee tere mahaan naam
‘‘वे सब यीशु के नाम पर घुटनें टेकेें ।’’  (फिलिप्पियों 2:10)

यीशु जी तेरे महान नाम की बड़ाई,
गाते गाते हृदय उमण्ड रहे है;
प्रेम से जब तेरे चरणों को ढूंढ़ते,
उतना प्रेम अधिक बढ़ता जाता है ।।

1.स्वर्ग और पृथ्वी गाएँ वह महान नाम,
प्रेम, सत्य, न बदलनेवाला तेरा महान नाम;
कष्टों से छुड़ानेवाला वह महान नाम,
सन्त जिसकी सदा बड़ाई करें वह महान नाम ।

2.बुराई को सब हटानेवाला वही महान नाम,
ढूंढनेवालों के लिए चंगाई जैसा महान नाम;
सब भलाईयाँ देनेवाला तेरा महान नाम,
इस पृथ्वी के लोग बड़ाई करें महान नाम ।

3.विरोधी को भगाने वाला तेरा महान नाम,
हमें प्रेम से ग्रहण करने वाला तेरा महान नाम;
पवित्र लोग जिसकी बडाई करते महान नाम,
सब सन्तों को स्वर्ग ले जानेवाला महान नाम ।
149 गाओ, मधुर मधुर यीशु नामgao, madhur madhur yeeshu naam
‘‘सो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो,वह तो बहुमूल्य है ।’’
(1 पतरस 2:7)

गाओ, मधुर मधुर यीशु नाम ।।

1.स्वर्ग छोड़कर जग में वह आया... पापिन कारण लोहू बहाया;(2)
जी उठकर उस ने सब को हराया...(2) पूरा किया सब काम ।

2.उसने हमारे दुःखों को मिटाया... रोगिन शोकिन चंगा भी किया;
दर्द भरे दिल को उसने भी छुआ... किया एक अद्भुत काम ।

3.यीशु ने सब के अपराधों को उठाया... उनके कारण घायल भी हुआ;
अधर्मी के कारण कुचला भी गया... आप को किया बलिदान ।

4.आओ प्यारो सब मिल गाएँ... दण्डवत करके खुशियाँ मनाएँ;
चरणों में उसके प्रशंसा चढ़ाएँ... होके अति भयमान ।
150 मधुर, मधुर, यीशु नाम प्याराmadhur, madhur, yeeshu naam pyaara
‘‘तेरा नाम ऊँडेले हुए इत्र के तुल्य है ।’’ (श्रेष्ठ गीत 1:3)

मधुर, मधुर, यीशु नाम प्यारा,
स्तुति के योग्य है प्रभु हमारा;(2)
मधुर, मधुर यीशु नाम प्यारा,
मधुर मधुर, यीशु नाम ।।

1.स्वर्ग छोड़कर जगत में आया, क्रूस पर चढ़कर लोहू बहाया ।(2)

2.शैतान को उसने क्रूस पर हराया, नरक के दण्ड से हमको बचाया ।

3.पाप से मुक्त भी उसने कराया, पिता ईश्वर से मेल कराया ।

4.लोहू से धोकर शुद्ध बनाया, ईश्वर का पुत्र हमको बनाया ।

5.आत्मा का भागीदार बनाया, ईश्वर का मन्दिर हमको बनाया ।
151 प्रभु तेरा नाम सुवन्दित गाऊँprabhu tera naam suvandit gaoon
‘‘तेरा नाम बहाया हुआ तेल सा है ।’’ (श्रेष्ठ गीत 1:3)

प्रभु तेरा नाम सुवन्दित गाऊँ, (2)
यीशु तेरा नाम सुवन्दित गाऊँ ।।

1.मैं तो था मुर्दा पाप में अपने (2)... प्रेम किया अति भारी ।(2)

2.खोया हुआ था भुला था बिसरा... ढूंढ़ने आया तू जग में ।

3.जब मेरे टूटे सारे सहारे... तू ने आन बचाया ।

4.सूली पर तू ने लोहू बहाया... पाप का भय है मिटाया ।

5.मरके तू फिर से हुआ है जिन्दा... मौत का डँक मिटाया ।

6.अब है तू बैठा बाप के दहिने... तू ही है मेरा सहारा ।

7.मुझ को तू लेने आएगा फिर से... गाऊँ मैं गुण क्यों न तेरे ।
152 गाऊँगा मैं सुबह शामgaoonga main subah shaam
‘‘हे छोटे झुण्ड, मत डर, क्योंकि तुम्हारे पिता को यह
भाया है कि तुम्हें राज्य दें ।’’ (लूका 12:32)

गाऊँगा मैं सुबह शाम
यीशु नाम, ख्रिस्त नाम ।।

1.कीड़ा जैसे मानव मुझ को, प्रभु राज्य देने को;
स्वर्ग से पृथ्वी पर आया, प्राण बलिदान किया ।

2.हे अयोग्य छोटे झुण्ड, मत डर प्रभु ने कहा;
राज्य तुझ को दे देने को, आदरयोग्य पिता को भाया ।

3.पाप-शाप के गढे में गिर के, मैं था पूरा नाश हुआ;
महान उद्धार मुझ को दिया, स्वर्ग-राज्य में ले आया ।

4.नीतिहीन था मैं प्रभु, नीतिमान मुझे ठहराया;
नीति-उद्धार का वस्त्र दिया, नीति राज्य में ले आया ।

5.परमराज्य के लिए मुझ को, नाम लेकर प्रभु बुलाया;
वारिस अपना मुझे बनाया, शैतान को शर्मिन्दा किया ।

6.स्वर्गदूत चकित हो देखते, परमेश्वर की अद्भुत किमया;
क्या है आदमी उनके लिये, राज्य प्रभु ने तय किया ।

7.दानिय्येल, शद्रक, मेशक और अबेदेनेगो को राज्य में लाया,
छोटे झुण्ड को चुन के प्रभु, राज्य में ऊँचा स्थान दिया ।

8.कैसी भी परीक्षा आये, प्रभु की स्तुति करुँगा;
महिमा आदर देकर प्रभु को, हल्लेलूयाह गाऊँगा ।
153 प्रभु यीशु तेरे पावन नाम कीprabhu yeeshu tere paavan naam kee
‘‘तेरा महिमायुक्त नाम धन्य कहा जायें
जो सब धन्यवाद और स्तुति से परे है ।’’ (नहेमायाह 9:5)

प्रभु यीशु तेरे पावन नाम की,
प्रशंसा स्तुति हो सर्वदा ।।

1.स्वर्ग और पृथ्वी पर ऊँचा तेरा नाम, प्रभावशाली है तेरा नाम;
सन्तों के प्रशंसा योग्य है तेरा नाम ।

2.शैतान और पाताल को हराया यह नाम, जयवन्त हुआ है तेरा नाम;
हमें विजयी बनाया है यह नाम ।

3.पापीयों के सब पाप मिटाने, दुनिया में आया है प्यारा नाम;
हमें स्वर्ग में ले जाता है यह नाम ।

4.उत्तम सन्तगण प्रशंसा करते है, ऊँचे परमेश्वर का है यह नाम;
सारी दुनिया में सब से महान है यह नाम ।

5.दुःख विपत्ति और परीक्षा के समय, सदा सम्भालेगा वह सच्चा नाम;
सारी रुकावटें हटाता है यह नाम ।
154 स्तुति के योग्य तूstuti ke yogy too
‘‘वही गाली सुनकर गाली नहीं देता था, और दुःख
उठाकर किसी को धमकी नहीं देता था ।’’ (1 पतरस 2:23)

स्तुति के योग्य तू ही प्रभु,
मेरे लिए निन्दित हुआ था; स्तुति के योग्य तू ही प्रभु ।।

1.तेरे अपने लोगों ने निन्दा की, और ग्रहण तुझ को नहीं किया,
मेरे लिए तू ही दोषित हुआ, तेरे प्रेम के कारण स्तुति करुँ ।

2.सत्य, मार्ग और जीवन तू ही है, अनन्त जीवन देने आया;
भरमानेवाला तुझ को कहा, पर तू दयालु यीशु प्रभु ।

3.यहूदा के गोत्र का तू सिंह है, जिस का न आदि न अन्त है;
तुझ को सामरी और नीच कहा, पर तू जगत का नाथ प्रभु ।

4.सब शत्रुओं को तू ने क्षमा किया, दोष न गिना पर आशीष दी;
‘दोषी तू है’ उन्होंने कहा, पर तू तो निर्दोष था प्रभु ।

5.दुष्टात्मा तुझे देख कर कांपे, डांटकर उन्हें तू बाहर किया;
‘दुष्टात्मा है तुझ में’ ये कहा, हे दयालु प्रिय यीशु प्रभु ।

6.तेरा नाम मधु से भी मधुर है, मधुर गीत से तुझे मैं भजूँ;
मुझ पापी के लिए बली हुआ, दण्डवत कर मैं तुझ को भजूँ ।
155 तेरी विश्वासयोग्यता प्रभु यीशुteree vishvaasayogyata prabhu yeeshu
(व्यवस्था 7:9; 1 थिस्स 5:23,24;विलाप 3:23)

तेरी विश्वासयोग्यता प्रभु यीशु,
आकाश मण्डल के पार पहुँची है ।।

1.तुझे प्रेम करके तेरी आज्ञाओं को... मानने वाले सन्तों के साथ;(2)
वाचा अपनी स्थिर तू करता(2)... सदा महिमा में रहता प्रभुजी ।(2)

2.हजार पीढ़ी तक करुणा तू करता... विभव में रहता बहुत ही अमूल्य है;
अद्भुत है कृपासागर ईश्वर... बहुतायत से स्तुति करते हैं ।

3.तेरी सच्चाई आकाश तक पहुँची... स्तुति के योग्य सदा तू ही है;
मेरे मन में तू ही प्रभु चमका... भुल नहीं सकता मधुर तेरे प्रेम को ।

4.महान तेरी विश्वासयोग्यता... बहुत ही भरोसे के योग्य तू है;
हम पर तेरा प्रेम प्रगट हुआ... हर दिन पाते नये रुप से प्रभु ।

5.हमारे आत्मा प्राण और देह को... हमारे प्रभु यीशु के आने तक;
रक्षा करेगा सम्पूर्ण रीति से... हर दिन वह निर्दोष रखेगा ।

6.पिता, पुत्र, पवित्र आत्मा का... युग युग तक हो महिमा आदर;
परिपूर्ण रुप से फैल भी जाए... भांति, भांति से प्रभु की मण्डली में
156 हे प्रभु तू विश्वासयोग्य सामर्थीhe prabhu too vishvaasayogy saamarthee
‘‘तुम्हारा बुलाने वाला विश्वासयोग्य है ।’’ (1 थिस्स 5:24)

हे प्रभु तू विश्वासयोग्य सामर्थी है,
कैसा महान, अद्भुत, सच्चा, प्रतापी तू दयालु है ।।

1.स्वर्ग और पृथ्वी पर उसके नीचे जो, तेरे ही नाम पर घुंटने टेकें;
ईश्वर की महिमा करें,
हर एक की जीभ स्वीकार करें भी, तू ही प्रभु मसीह है ।

2.काम तेरे अद्भुत सामर्थ अपार जो, प्रभुता करता और देखता भी है;
अद्भुत प्रेमी प्रभु है,
पापी बचाने जग में तू आया, महान उद्धार दिया है ।

3.चालीस बरस तक उनको चलाया, जिनको छुड़ाया मिसर से तू ने;
आँखों की पुतली समान,
दृष्टान्त वे हुए हम सब के लिए, अद्भुत तेरी योजना है ।

4.स्वर्ग तूने खोला मन्ना बरसाया, और सब को जीवन का पानी दिया;
तृप्ति बड़ी तुझ में है,
अग्नि का खंभा और बादल का भी, अगुवाई सदा करते है ।

5.मार्ग में आंधी आशा, निराशा, शत्रु के हमले और क्लेष भी जो थे;
सम्भाला हम को तूने,
अपनी प्रतिज्ञा पूरी की उसने, मीरास हमें दी है ।
157 विश्वासयोग्य मेरे प्रभुvishvaasayogy mere prabhu
‘‘परमेश्वर विश्वासयोग्य है ।’’ (1 कुरिन्थियों 10:13)

विश्वासयोग्य मेरे प्रभु... मैं तेरी स्तुति करूँगा ।।

1.करुणा से बुलाया है... और मुझे सम्भाला है;
इसलिए मैं तुझे भजूँगा... और तेरी स्तुति करूँगा ।

2.मैं तेरे प्रेम से हे प्रभु... कितनी ही बार दूर गया;
पर जब मैं तेरे पास आया... तू ने मुझे क्षमा कर दिया ।

3.कीचड़ में जब मैं गिरा... तू ने मुझे उठा लिया;
शत्रु के फन्दों से तू ने... मुझ को जयवन्त जीवन दिया ।

4.तू मेरा शरणस्थान है... और तू ही मेरा गढ़ भी है;
मेरे किलों के चारों और... मेरा रक्षक तू ही था ।

5.तू मेरा सच्चा साक्षी है... विश्वासयोग्य तू प्रभु है;
मेरा प्रभु सनातन का... मैं तेरी स्तुति करूँगा ।
158 स्तुति हो यीशु तेरीstuti ho yeeshu teree
‘‘और उसने मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारे
परमेश्वर की स्तुति का है ।’’       (भजन 40:3)

स्तुति हो यीशु तेरी, हल्लेलूयाह ! स्तुति हो यीशु तेरी;(2)
स्तुति हो तेरी कि तूने बचाया, और किया है हमको बरी ।।(2)

1.जमा हुए हैं हम अब, हल्लेलूयाह !... गाते हैं मिलकर हम सब;
तू ही हमारा है त्राता और दाता... और तू ही हमारा है सब ।

2.कीच से निकला हमें, हल्लेलूयाह ! किया है तू ने आजाद;
स्तुति अब गाए हम सब क्यों न तेरी, और हो जाए हम तेरे दास ।

3.सारे फरिश्ते एक साथ, हल्लेलूयाह ! गाते है मिलकर हरदम;
स्तुति वे करते हैं तेरी हमेशा, और करते नहीं हैं विश्राम ।

4.जाएँगे जब हम आसमान, हल्लेलूयाह ! गाएँगे मिलकर हरदम;
बरबत बजा के, आवाजें मिलाकर के, हम गाएँगे सुबह ओ शाम ।
159 हम करेंगे तारीफ खुदाham karenge taareeph khuda
‘‘उस ने मुझे सत्यनाश के गढ़े और दलदल क
कीच में से उबारा ।’’       (भजन 40:2)

1.हम करेंगे तारीफ खुदा के बेटे की मिलकर,
आज और कल, अबद तक एकसा है आदरयोग्य प्रभु ।
मुक्तिदाता यीशु है, उस में कोई दोष भी नहीं है;
वही सभों में श्रेष्ठ भी है, हल्लेलूयाह आमीन ।।

2.सत्यनाश के गढ़े और दलदल की कीच से निकाला मुझे,
बलवन्त हाथों से उठाकर रखा चट्टान पर उसने ।

3.आँख की पुतली समान मुझे रखता प्रभु यीशु,
स्वर्गीय आशीषे उण्डेलता रहता है प्यारा प्रभु ।

4.माता-पिता छोडे प्रभु नहीं छोडेगा मुझे,
दुःख तकलीफें शैतान लावे प्रभु उनसे छुडाए ।

5.आत्मिक शान्ति देता है कि पाऊँ विजय का जीवन,
उस के साथ मैं राज्य करूँगा, हल्लेलूयाह गाऊँगा ।
160 मक्तिदाता यीशु प्रभुmaktidaata yeeshu prabhu
‘‘कौन हमें मसीह के प्रेम से अलग कर सकता है ।’’
(रोमियों 8:35)

मक्तिदाता यीशु प्रभु स्तुति मैं करुँ;
शुद्ध और अनन्त प्रेम अपना मुझे दिखाया ।

1.प्रभु मेरे पक्ष हेै विरोधी कौन होवें ?
दूत भी होवें प्रधान भी होवें,
प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।

2.मनुष्य रुप धारण किया खाली हो गया,
काल भी आवे, तलवार भी आवे;
प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।

3.सर्वलोक तारण के लिए क्रूस पर तू चढ़ा,
क्लेश भी आवे, मुसीबत आवे;
प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।

4.अनगिनित मुसीबतें मसीह ने है सही,
नंगाई आवे, उवद्रव आवे;
प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।

5.मृत्यु को हराके प्रभु फिर तू जी उठा,
मौत भी आवे, जीवन भी आवे;
प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।

6.मेल कराया तूने प्रभु स्वर्गीय पिता से,
पहाड़ भी आवे, तराईयाँ आवे;
प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।

7.न बदलनेवाला यीशु संग हमारे है,
वर्तमान में, भविष्य काल में;
प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।
161 प्रभु तेरी स्तुति करुँprabhu teree stuti karun
‘‘मैं अपने सारे मन से धन्यवाद करूँगा ।’’       (भजन 138:1)

प्रभु तेरी स्तुति करुँ, तेरी महिमा गाऊँ ।।(2)

1.तेरे आसनों में प्रभु(2)... हृदय भेट चढ़ाऊँ ।(2)

2.यीशु की सुन्दरता से मैं... भरकर गुण दिखाऊँ ।

3.तेरे ही वचन के द्वारा... नया जीवन पाऊँ ।

4.प्रभु शक्ति दे मुझे तू... ताकि वचन सुनाऊँ ।

5.पवित्रात्मा की अगुवाई से... तेरी इच्छा जानूँ ।

6.प्रभु भ्रातृ प्रेम मुझे दे... कि तू प्रसन्न होवे ।

7.पूरे मन से बिनती मेरी... तेरा दर्शन पाऊँ ।
162 स्तुति करें यीशुजी कीstuti karen yeeshujee kee
‘‘यहोवा... मेरा ऊँचा गढ़ है ।’’       (भजन 18:2)

स्तुति करें यीशुजी की, अति सुन्दर और उत्तम भी है ।।

1.तेरे ऊँचे महान नाम की... स्तुति करना अति उत्तम है;
हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह ।।

2.क्रूस पर अमूल्य लोहू बहाकर... प्रभु ने धोया हम दुष्टो को ।।

3.ऐसा महान उद्धार देकर... किया उसने हमें अपनी प्रजा ।।

4.मेरी चट्टान ढ़ाल है वह मेरी... मेरा प्रभु मेरा गढ़ भी है ।।

5.ऊँचा गढ़ वह उद्धार का सींग है... प्रभु हमारा छुडानेवाला ।।

6.सभों से भी तू परम सुन्दर... रमणीय है और अति प्रिय भी ।।

7.दिन और रात हजारों स्वरों से... स्तुति करना अति उत्तम है ।।
163 यीशु तेरी दया दृष्टि अधिकyeeshu teree daya drshti adhik
‘‘तेरी सच्चाई महान है ।’’ (विलाप गीत 3:23)
यीशु तेरी दया दृष्टि अधिक है,
हाँ, अधिक है ।।

1.पिता की नाई कृपा तू करता, माता की नाई दिलासा देता;
कपट से मुझ को बचाता है तू, बचाता है तू, बचाता है ।

2.बच्चों को जैसे सम्भाले मुर्गी, वैसे ही तू ने मेरी खबर की;
स्तुति गाऊँ हर घड़ी मैं, हर घड़ी मैं, हर घड़ी ।

3.शेरनी के बच्चें भुखे मरें भी, लेकिन मुझे कुछ कमती न होगी;
हमेशा मुझ को सम्भालता तू, सम्भालता तू, सम्भालता ।

4.मृत्यु की घाटी में होकर चलूँ मैं, भयंकर बातें देखुँ जो मैं;
यीशु के बल से खुशी से भरकर, स्तुति करुँ मैं, स्तुति करुँ ।

5.दुःख की घड़ी जो मुझ पर आए, दर्द जो मेरे दिल को सताए;
तेरे वचन से शान्ति पाता, शान्ति पाता, शान्ति ।

6.तेरी सच्चाई स्वर्ग तक पहुँची, तेरी दया आसमान से है ऊँची;
मुझ नीच को दिखा दिया यह, दिखा दिया यह, दिखा दिया ।

7.पहाड़ अपनी जगह को छोडे, और समुद्र सूख भी जाए;
मेरे लिए तेरी कृपा अटल है, कृपा अटल है, यीशु हल्लेलूयाह ।
164 हृदय भेंट चढ़ाए प्रभु कोhrday bhent chadhae prabhu ko
‘‘अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को
भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओं । (रोमियों 12:1)

हृदय भेंट चढ़ाए प्रभु को... स्तुति प्रशंसा करें;
हम सब सन्त मिलकर ।।

1.पाप का भार उठाने, आया मसीह जग में;(2)
पापियों के सब पाप मिटाने(2)... जीवन सनातन दिया ।

2.संकट क्लेश उठाया, नम्र और दीन बनकर;
द्वार उद्धार का खोला प्रभुजी(2)... सनातन आशा दी ।

3.आश्चर्य स्वर्गीय प्रेम, हम पापियों के लिए;
फिर मत जाना पापी जगत में(2)... पाप में न फँसकर ।

4.अर्पण करते है तुझ को, आत्मा प्राण, देह भी;
रक्षा करो प्रभु इस जीवन की(2)... बिनती हमारी यही ।
165 स्तुति प्रशंसा हे प्रभुstuti prashansa he prabhu
‘‘मैं तेरे किए हुए उद्धार से आनन्दित हूँ ।’’ (1 शमूएल 2:1)

स्तुति प्रशंसा हे प्रभु, मैं गाऊँ बार बार;
महान उद्धार दे दिया, दिल शान्त कर दिया ।

1.संसार के फन्दे में था, पापों का दास था;
लोहू की शक्ति से प्रभु, तू ने छुडा लिया ।

2.पापों के भार से जीवन, मेरा दुःखी हुआ;
प्रभु ने बोझ उठा लिया, दुःख दर्द सब हटा ।

3.अन्धेरा मन में था मेरे, पथ से भटक गया;
उजियाला प्रभु बन गया, सत पथ से दिखा दिया ।

4.घूरे के ढेर से प्रभु, तू ने उठा लिया;
फकीर और दरिद्र को, राजा बना दिया ।
166 ओह ! मेरा मन गा रहा हैoh ! mera man ga raha hai
‘‘ताकि मेरी आत्मा तेरा भजन गाती रहे और कभी चुप न हो ।’’ (भजन 30:12)

ओह ! मेरा मन गा रहा है... गीत नया प्रभु का;
कैसी खुशी है वर्णन से बाहर(2)... प्रेम बड़ा प्रभु का ।।

1.मसीह में मुझे मीरास बनाया, संकल्प क्या ही अद्भुत तेरा था;
जगत की उत्पति से पहले ही(2)... प्रभु में चुन लिया था ।

2.मसीह में तू ने क्षमा किया है, लोहू बहाया मुझे धोया है;
छुटकारा देकर निर्दोष भी किया(2)... पवित्र तू बनाया ।

3.मसीह में मुझे निकट बुलाया, बीच की दिवार को तू ने ढा दिया;
ताकि मैं एक नया मनुष्य बन जाऊँ(2)... तू तो यही चाहता था ।

4.मसीह में दण्ड की आज्ञा नहीं है, पूरी आजादी उसमें मिली है;
स्वर्गीय स्थानों में मुझको बिठाया(2)... नयी सृष्टि बनाया ।

5.मसीह में स्वर्गीय आशीष मिली है, पूर्ण शान्ति और आनन्द पाया है;
महिमा और विजय मेें हमको बुलाया(2)... गाएँ सब हल्लेलूयाह ।
167 मेरा मन लागोmera man laago
‘‘परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है...
हमें मसीह के साथ जिलाया ।’’ (इफिसियों 2:4,5)

मेरा मन लागो,(2)
यीशु जी के ध्यान, प्रभु जी के ध्यान ।।

1.प्रेम की तेरी रीत निराली(2)... तेरी अनोखी शान ।(2)

2.पापिन कारण क्रूस उठाई... दे दी अपनी जान ।

3.जो प्रभु तेरी शरण में आवे... बच गए उस के प्राण ।

4.जिस ने तेरा दामन छुआ... पाई शिफा उसी आन ।

5.बिनती हमारी सुनिए प्रभुजी... दीजो अपना ज्ञान ।
168 नये गीत से मेरा हृदय उमण्डताnaye geet se mera hrday umandata
‘‘उसने मुझे नया गीत सिखाया ।’’       (भजन 40:3)

1.नये गीत से मेरा हृदय उमण्डता, यीशु का भजन करुँ;
सुगन्धित तेल समान मैं तेरे नाम से प्रेम करूँगा ।
हल्लेलूयाह स्तुति हल्लेलूयाह, मेरे प्रभु के बारे में गाऊँगा;
तेरा अनुग्रह नित्य मैं पाता हूँ, भजन यीशु का करूँगा ।।

2.बीते दिनों में मुझे सम्भाला, कष्ट दुःख जो भी आये;
मुझे आशीर्वादों को देकर, रक्षा भी उसने की ।

3.कभी-कभी क्षण भर के लिए, अपने मुख को ढ़ाँप लिया;
अपने क्रोध को मुझ पर से हटाया, अनुग्रह उण्डेल दिया ।

4.यद्यपि अकाल अधिक हो जाये, प्रभु आश्रय मेरा होगा;
कई स्थानों में रोग फैल भी जाये, बचाता वह रहेगा ।

5.प्रभु शीध्र आता आनन्द के साथ, ताकि स्वर्ग में इकट्ठा करें;
आशा से बाट जोहते हुए, स्वर्ग की और ताकूँगा ।
169 यीशुजी करुँ तुझ सेyeeshujee karun tujh se
‘‘मैं तुझसे सदा प्रेम रखता आया हूँ ।’’ (यिर्मयाह 31:3)

यीशुजी करुँ तुझ से ऐसा अब प्रेम,
ताकि मुझमें उमड़े तेरा ही प्रेम;
हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह ।।

1.हर दिन मैं प्रेम तेरा, चखता ही रहता हूँ;
स्वर्गीय भोजन ही से, पोषण भी पाता हूँ;
यीशुजी जीवन जल तू, मुझ को देता ।

2.चट्टान पर मुझ को तूने, खड़ा भी किया है;
मेरे पैरों में तूने, दृढ़ता समाई है;
यीशुजी आश्रय मेरा तू ही सदा ।

3.लोहू बहाया क्रूस पर, मुझ को बचाने को;
विश्व व्यापी मण्डली में, मुझ को भी लेने को;
यीशुजी दया तेरी अति महान ।

4.प्रतिज्ञाओं को अपनी पूरी तू करता है,
निरन्तर अनुग्रह तू मुझ को दिखाता है;
यीशुजी प्रेम तेरा कैसा अटल ।

5.मृत्यु पर जयवन्त होके फिर से जीवित हुआ,
तू ही महिमा का राजा, शीध्र ही आएगा;
यीशु के साथ रहना सब से प्यारा ।
170 हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाहhallelooyaah, hallelooyaah, hallelooyaah
‘‘उस धन्य आशा की... बाट जोहते रहें ।’’   (तीतुस 2:13)

हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, स्तुति;
हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, तेरा राज्य आएगा ।।

1.पापों से छुडाया मुझे आझाद किया है,
होशन्ना, होशन्ना मेरा दिल गाएँगा ।

2.मेम्ने के महा तेज से जग खूब चमकेगा,
प्रभुका महान दर्शन सारा जग पाएगा ।

3.ऐ सारे लोगों आओ करें भक्ति मसीह की,
पाक रुह से भरकर हम करें तारीफ उस की ।
171 सभी अनुग्रह का प्रभुsabhee anugrah ka prabhu
‘‘और वे... एक नया गीत गा रहे थे ।’’
(प्रकाशित 14:3)

1.सभी अनुग्रह का प्रभु... सब प्राणियों का आनन्द है;
हम स्तुति के गीत गातें है... आनन्द से तेरी स्तुति करें ।
हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह;(2)

हल्लेलूयाह मैं गाता हूँ, आनन्द से आगे मैं बढ़ता हूँ ।।

2.प्रेम से उसने ढूंढ़ा मुझे... प्रीति से उसने बचाया मुझे;
पवित्र जीवन बिताने को... मुझ पापी पर किया दया ।

3.थोडे समय के क्लेश सहने... प्रतिदिन का अनुग्रह दिया है;
पद चिन्हों पर प्रभु के... चलने को मुझे बुलाया है ।

4.नाशमान देह को बदल कर... महिमा का शरीर देने को;
महिमा की आत्मा से भरा मुझे... मृत्यु के भय से छुड़ा लिया ।

5.पृथ्वी के उत्तम फल समान... ईश्वर की अनन्त मीरास की नाई;
पृथ्वी के लोगों के बीच में हूँ... प्रेम से छुड़ोती का दाम दिया ।

6.यीशु का गीत गाने के लिए... जो दूसरे गा नहीं सकते;
योग्य न था पर प्रेम किया... यीशु को क्या दे सकता हूँ ।
172 स्तुति प्रशंसा करोstuti prashansa karo
‘‘वह उनका पूरा-पूरा उद्धार कर सकता है ।’’
(इब्रा 7:25)

स्तुति प्रशंसा करो... हल्लेलूयाह;
उसको सराहके खुशी मनाओं... हल्लेलूयाह;
आँख की पुतली की नाई पिछले समयों में,
हमें सम्भाला उसने... हल्लेलूयाह;
नित्य स्तुति प्रशंसा करो ।।

1.पापों को मिटाया तूने... हल्लेलूयाह;
और कोप से बचाया तूने... हल्लेलूयाह;
श्रापित रोगों को तूने मिटा दिया है,
शोक को मिटाने आया... हल्लेलूयाह ।... नित्य

2.माता यदि भूल भी जाये... हल्लेलूयाह;
तो भी पुत्र बनाके हमें सम्भालेगा,
मित्र हमारा मसीह माता से अधिक जो है;
उत्तम दान दिया... हल्लेलूयाह ।

3.परीक्षा के समयों में... हल्लेलूयाह;
दुःख विपत्ति कितने ही सहें... हल्लेलूयाह;
यीशु प्रभु हमारा अपने वचन के द्वारा,
हानि न होने देगा... हल्लेलूयाह ।

4.आँधी और तूफान भी आएँ... हल्लेलूयाह;
उसने जोखिम से हमें बचाया... हल्लेलूयाह;
नैय्या को यीशु जी ने मेरी सम्भाल लिया,
नाश न होने दिया... हल्लेलूयाह ।

5.सारे जगत के अन्दर... हल्लेलूयाह;
तुझे साक्षी अपना ठहराया... हल्लेलूयाह;
पीछे न हटना कभी पतरस की नाई तू;
अपनी शक्ति के द्वारा सम्भालेगा
173 हल्लेलूयाह गायेंगेhallelooyaah gaayenge
‘‘इसके बाद मैं ने स्वर्ग में मानो बड़ी भीड़ को ऊँचे
शब्द से यह कहते सुना, कि ‘हल्लेलूयाह’ ।’’
(प्रकाशित 19:1)

हल्लेलूयाह गायेंगे, हल्लेलूयाह गायेंगे;(2)
हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह;(2)
हल्लेलूयाह गायेंगे, हल्लेलूयाह गायेंगे ।

1.उद्धार मसीह ने हमारा किया, अपने लोहू से छुटकारा दिया;(2)
महान उद्धार, अनन्त उद्धार, पूरा उद्धार वह है;(2)
इसलिए हम गायेंगे ।

2.महिमा का दर्शन हम को कराया, स्वर्गीय वैभव उसने दिखाया;
आदर, प्रभुता, स्तुति, प्रधानता सब कुछ उसी का है;
इसलिए हम गायेंगे ।

3.आदर करेंगे जीवते मसीह को, अपने जीवन से दिखायेंगे उसको;
किया धनी, बड़ा प्रेमी, अनमोल बनाया है;
इसलिए हम गायेंगे ।

4.सामर्थ प्रभु की सनातन से जो है, वही सम्भाले जो उसकी शरण है;
बढ़कर विजय, साहस, विश्वास सब कुछ हमारा है;
इसलिए हम गायेंगे ।

5.यात्रिक जीवन में जो कुछ भी आए, ‘‘आमीन’’ हम कहकर सहते भी रहें;
कैसा आनन्द, अद्भुत शान्ति दुःख सहने में है;
इसलिए हम गायेंगे ।

6.तुम जो ईश्वर से डरनेवाले हो, और क्या तुम छोटे क्या तुम बड़े हो;
धन्य कहो दुल्हिन उसकी तैयार अब हुई है,
इसलिए हम गायेंगे ।
174 ईश्वर की महिमाeeshvar kee mahima
‘‘और नगर... चोखे सोने का था ।’’ (प्रकाशित 21:18)

ईश्वर की महिमा,(2)
युगानुयुग तक होती रहेगी (2)... ईश्वर की महिमा ।।(2)

1.जिस नगर का रचनेवाला ईश्वर है,
उसी नगर का हमें वारिस भी बनाया;
हम स्तुति वन्दना करते हैं ।

2.यहाँ कोई स्थिर रहनेवाला नगर नहीं है,
स्वर्ग में वह नगर प्रभु ने है स्थिर किया;
हम स्तुति प्रणाम करते हैं ।

3.ईश्वर का नगर स्वर्गीय सिय्योन है,
उस नगर में वह हम को भी ले आया;
जय-जयकार हम करते हैं ।

4.परदेशी और पराये अब हम नहीं रहे,
प्रभु ने हम सब को, घर का वारिस बनाया;
बड़ाई हम सब करते हैं ।

5.सोने का नगर वह फाटक मोती के है,
ऐसे नगर में हमें, दया से वह ले आया;
हम सदा गुण उसके गातें हैं ।
175 ख्रिस्त प्रभु जी महिमा तेरीkhrist prabhu jee mahima teree
‘‘जैसा तू ने देखा कि एक पत्थर... ।’’
(दानिय्येल 2:45)

ख्रिस्त प्रभु जी महिमा तेरी हो,
सनातन का है राज्य तेरा ।।

1.देखो प्रियों भेद यही है, जग में मनुष्य की सहायता के बिना;
पहाड़ में से उखाड़ा गया था, जो एक पत्थर ।

2.सोने और चांदी का राज्य जो जग में,
पीतल और लोहे का राज्य जो इसमें;
यही पत्थर उन सब राज्यों को चूर चूर करेगा ।

3.हे प्रियों, अद्भुत पत्थर यही है, बड़ा होकर पृथ्वी में फैल गया;
प्रभु मसीह की यही सार्वकालिक मण्डली है ।

4.उस राज्य को देखने का भाग्य, उस राज्य में पहुँचने का भाग्य भी;
अनुभव कर सकते, केवल सन्त जो जग में है ।

5.शुद्ध हृदय और पवित्रता को, देगा प्रभु मसीह तुमको प्रेम से;
ये अतुल्य शुद्धि ले लो, जब प्रभु देता ।

6.आमन्त्रण जो हमें दिया है, उस के राज्य की मीरास के लिए;
चाल उसके योग्य चलो, प्रियो वह कहता है ।
176 गीतें गाएँ सामर्थ केgeeten gaen saamarth ke
‘‘मैं यहोवा का गीत गाऊँगा
क्योंकि वह महाप्रतापी ठहरा है ।’’ (निर्गमन 15:1)

गीतें गाएँ सामर्थ के -- तेरी स्तुति करें;
मेरा तारणहार ख्रिस्त -- तेरी स्तुति करें;
ख्रिस्त मेरा पिता है देख -- उस को दिल से भजें ।।

1.यहोवा के विजय के गाएँ गीत -- काम अजूबे किये हैं;(2)
जयवन्त है यहोवा आज -- जय जय हल्लेलूयाह ।(2)

2.घोड़े सवारों को दुश्मन के -- फैंक दिया समुद्र में;
तेरे नाम की जय जय हो -- जय जय हल्लेलूयाह ।

3.यहोवा युद्ध करता है -- तेरा नाम यहोवा है;
महान नाम की जय जय हो -- जय जय हल्लेलूयाह ।

4.रथों को फिरौन के -- फेंक दिया समुद्र में;
मेरे प्रभु की जय जय हो -- जय जय हल्लेलूयाह ।

5.गीतें गाओ यहोवा के -- उसकी उत्तम महिमा के;
जय जय मेरे प्रभु की हो -- जय जय हल्लेलूयाह ।
177 दिन में बादल का छाया बनाdin mein baadal ka chhaaya bana
‘‘और यहोवा... उन के आगे आगे चला करता था ।’’
(निर्गमन 13:21)

1.दिन में बादल का छाया बना... रात में अग्नि का ज्वाला बना;
रक्षक बना हमारा - प्रभु जी... सुख शान्ति से सम्भाला ।
धन्य, धन्य, धन्य प्रभु को जिसने मुक्ति दी हमको;
शरण में अपनी लाया - प्रभु जी... दिन रात है सम्भाला ।

2.वचन का मन्ना खिलाया हमें... पानी चट्टान से पिलाया हमें;
आत्मा को तृप्त है किया - प्रभु जी... दिल मेें तू शान्ति लाया ।

3.इस सुन्दर आत्मिक जीवन में... प्राण, आत्मा, शरीर और हृदय में;
है स्वर्गीय जीवन ड़ाला - प्रभु जी... आत्मिक जागृति लाया ।

4.कनान देश में लाया मुझे... सन्तों के साथ मिलाया मुझे;
दण्डवत तुझे करुँ मैं - प्रभु जी... साष्टाँग प्रणाम करुँ मैं ।
178 आदि और अन्त रहित हैaadi aur ant rahit hai
‘‘तू वही है और तेरे वर्षो का अन्त नहीं होने का ।’’ (भजन 102:27)

आदि और अन्त रहित है, हे ईश्वर तू परिपूर्ण है;
नीति और ज्ञान तुझ में है, ज्योति-निवासस्थान तू है ।

1.इब्राहीम को तूने बुलाया, उसी वंश में जन्म लिया;
अनाथों का नाथ हुआ, अनाथ बनकर तू आया ।

2.इसहाक को तू ने छुड़ाया, बदले में बलि तू हुआ;
यहुदा से बेचा गया, पापियों के लिये मृत्यु सही ।

3.योना समान ही तीन दिन, कब्र में अपनी रहा;
मनुष्यों को उद्धार देने, फिर से जीवित तू हुआ ।

4.बारह गोत्रों से तू आया, बारह शिष्यों को बुलाया;
कन्या से पैदा हुआ, कन्या सिय्योन को विवाहा ।

5.दाऊद का पुत्र तू है, दाऊद का प्रभु भी तू है;
मुझ पापी से प्रेम करके, रक्षा मेरी करता है ।
179 गाऊँगा, तेरी स्तुतिgaoonga, teree stuti
‘‘दाऊद सब का सब लौटा लाया ।’’
(1 शमू  30:19)

गाऊँगा, तेरी स्तुति, हे प्रभु तू महान है;
तू दुःखों को हटानेवाला, पापों से बचानेवाला;
शैतान के फन्दे से छुडाता है ।।

1.जग में जब खोता हूँ, प्रेम तेरा भूलता हूँ;
शैतान को मौका देता हूँ,
चरवाहा यीशु तू बनकर, दया से मुझको ढूँढ़कर;
सच्चे मार्ग में तू लाता है,
कैसा अद्भुत वह आनन्द, वापस आने से है;
दिल मेरा आभारी हो गया है ।

2.आँधिया उठती है जब, तूफान डराता है तब;
भयभीत जब मैं होता हूँ,
उसी वक्त पास तू आकर, ढ़ाढस मुझे तू देकर;
निर्भय मुझे तू करता है,
सच्चा पिता तू मेरा, तू है सहारा मेरा;
महिमा, आदर, प्रशंसा तुझी को है ।

3.तेरा वचन जब मानता, अर्पण अपने को करता;
हाथ तेरा पकड़ लेता हूँ,
तब मेरा साथ तू देकर, शान्ति, आनन्द से भरकर;
निराशा दूर तू करता है,
जान जाता हूँ मैं तभी, प्रेम तेरा है वही;
हृदय स्तुति से भर गया है ।
180 भर दो प्रभु इस मुँह कोbhar do prabhu is munh ko
‘‘यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर... फिरती रहती है ।’’
(2 इतिहास 16:9)

भर दो प्रभु इस मुँह को, स्तुति के गीतों से;
मन्दिर हम है तेरे लिये, महिमा हो इस जीवन से ।।

1.आँखें तेरी है सारे जग में, क्या कोई छीप सकता तुझ से ?
अग्नि समान अंतर-भेदी, और ज्ञानी है सब से ।

2.सारे विश्व में तू हाजिर है, कोने कोने को छान लेता है;
हर मनुष्य की गति को तू जानता, क्योंकि ऊपर है सब से ।

3.सारे विश्व का सिर्जनहारा है, आज्ञा देकर बनाया तू उसे;
पाप के कारण बिगड़ा है यह, अब नाश होगा पूरे जड़ से ।

4.सारे विश्व का न्यायाधीश तू है, अन्याय तुझ से नहीं होता है;
खराई से न्याय करता है, कोई बचे नहीं तेरे प्रताप से ।

5.तेरा प्रेम अद्भुत सनातन का है, नहीं चाहता कोई नाश हो जाए;
आया इसलिए तू जग में, प्राण देकर बचाए दण्ड से ।

6.जय जयकार हो तेरी, हे प्रभु, तुने हम को बचाया नरक से;
सामर्थ, गौरव, प्रताप तेरा है, हल्लेलूयाह गाते आदर से ।
181 सामर्थी ईश्वर तूsaamarthee eeshvar too
‘‘उसकी सामर्थ हमारी और... कितनी महान है ।’’
(इफिसियों 1:19)

सामर्थी ईश्वर तू, तेरी सामर्थ अपार जो है ।।

1.मसीह परमेश्वर की सामर्थ जो है, शैतान की शक्ति को तोड़ा वही है;
प्रधानता, अधिकार, सामर्थ, प्रभुता, सब कुछ उसके पाँव तले है ।

2.लोहू की शक्ति जो बहुत ही अद्भुत है, पापी को पाप से छुड़ाता वह है;
जयवन्त करता, प्रतिदिन धोता, ढांपे रहता और सम्भालता है ।

3.क्रूस की शक्ति देखो बहुत ही बलवन्त है, पुराने मनुष्य को मारता वह है;
संसार और अभिलाषा खुद के जीवन को, सच्चाई से हमें थामता है ।

4.पुनरुत्थान की शक्ति बहुत ही गंभीर है, संसार के स्तर से हमें उठाता है;
ऊँचाई में रखता, स्वर्गीय बनाता, संसार जो कुड़ा है दिखाता है ।

5.आत्मा की शक्ति का कार्य बड़ा है, गवाह बनाकर सेवा लेता है;
अगुवाई करता, आत्मिक बनाता, सब कुछ हम को समझाता है ।

6.वचन की शक्ति को जानना जरुरी है, दोधारी तलवार वह काटता जरुर है;
बातें वह करता, हृदय को छूता, प्रभु की इच्छा हमें बताता है ।

7.प्रार्थना की शक्ति तो प्रभावशाली है, हररोज नई सामर्थ से भरती है;
चेहरा चमकाती, जागृत रखती, असम्भव को सम्भव करती है ।
182 मनुष्य चोला धारण करmanushy chola dhaaran kar
‘‘भक्ति का भेद बड़ा है अर्थात् परमेश्वर देह में प्रगट हुआ ।’’
(1 तीमुथियुस 3:16)

मनुष्य चोला धारण कर,
प्रभु ख्रिस्त जगत में आए ।।

1.वह दीनन के हितकारी... है प्रेम किया अति भारी;
नीचे हो कारण नीचों के ।...प्रभु

2.पापिन का पाप मिटाया... भय दण्ड को आप उठाया;
शैतान को दूर भगाया है ।

3.चढ क्रूस पर रक्त बहाया... पहलू में भाला खाया;
सब पूरा किया जिस कारण से ।

4.फिर जी कर वह दिखलाया...  है मौत को तू ने हराया;
अब मुफ्त में मुक्ति मिलती है... जो ख्रिस्त जगत में लाए ।
183 जय प्रभु यीशु सृजनहारjay prabhu yeeshu srjanahaar
‘‘वह इसलिए प्रगट हुआ की हमारे पापों को हर ले जाएँ ।’’
(1 यूहन्ना 3:5)

जय प्रभु यीशु सृजनहार,
पापी का तू ही है तारणहार ।।(2)

1.नर तन धार लियो अवतार... जग की ज्योति जीवन अपार(2)
सत, चित, आनन्द के हो द्वार... हे अनन्त जीवन देवनहार ।(2)

2.स्वर्ग को त्याग लियो अवतार... ख्रिस्त पधारे पापिन कार;
दुःख, संकट सब सहे अपार... पापी जगत के तारणहार ।

3.बहाई क्रूस पर लोहू की धार... प्रभु ने करने पापिन उद्धार;
पाप धुलाकर हो जाओ पार... प्रभु ने खोला स्वर्गीय द्वार ।

4.करो प्रभु की जय जयकार... दया है उसकी सब पर अपार;
तीनों लोक के केवल उद्धार... हम पापिन के एक ही सहारा ।
184 जय जय यीशुjay jay yeeshu
‘‘जय ने मृत्यु को निगल लिया ।’’
(1 कुरिन्थियों 15:54)

जय जय यीशु, जय जय यीशु;
जय मृत्युंजय, जय जयकार,
सृजनहार, पालनहार, तारणहार ।।

1.दीनों का दुःख हरनेवाला, हृदय में शान्ति भरनेवाला;(2)
जय जन-रंजन, जय दुःख-भंजन;
जय जयकार, सृजनहार, पालनहार, तारणहार ।

2.नरतन धार लियो अवतारा, दे निज प्राण कियो छुटकारा;
जय जय-त्राता, जय सुखदाता;
जय जयकार, सृजनहार, पालनहार, तारणहार ।

3.मृत्यु बन्धन भंजनहारा, अक्षय जीवन देवनहारा;
रोगिन, शोकिन एक आधारा;
जय जयकार, सृजनहार, पालनहार, तारणहार ।

4.जय जयकार करो सब प्यारो, नर नारी एक संग पुकारो;
नारे मारो जय ललकारो,
जय जयकार, सृजनहार, पालनहार, तारणहार ।
185 हम से वर्णनी न जाएham se varnanee na jae
‘‘अनुग्रह और सच्चाई से भरपूर,
पिता के एकलौते की महिमा ।’’ (यूहन्ना 1:14)

हम से वर्णनी न जाए -- मसीह तुम्हारी महिमा ।।(2)

1.तुम स्वर्ग छोड़कर आए, तुम मुक्ति पदार्थ लाए -- कि
पापी लिए बचाए -- मेरे भाईयों !
कि पापी लिए बचाए ।...मसीह तुम्हारी

2.अन्धों को आँखे दीना, कोढ़िन को चंगा किना -- कि
मुर्दे दिये जिलाए -- मेरे भाईयों !
कि मुर्दे दिये जिलाए ।

3.पापी पर चल दिखलाया, तू ने हवा को डाँट थमाया -- कि
चेले लिये बचाए -- मेरे भाईयों !
कि चेले लिये बचाए ।

4.मेरे पाप क्षमा सब कीना, मेरे दिल में दर्शन दीना -- कि
प्रभु से दियो मिलाए -- मेरे भाईयों !
कि प्रभु से दियो मिलाए ।

5.सूली पर बर्छी खाई, तू ने अमृत धार बहाई -- कि
दास सदा गुण गाए -- मेरे भाईयों !
कि दास सदा गुण गाए ।
186 धन्य प्रभु यीशु कोdhany prabhu yeeshu ko
‘‘परमेश्वर का पुत्र जिसने मुझ से प्रेम किया और
मेरे लिए अपने आप को दे दिया ।’’
(गलतियों 2:20)

धन्य प्रभु यीशु को -- मुक्तिदाता जिसका नाम,(2)
स्तुति करुँ बारम्बार -- प्रभु यीशु को ।(2)

1.अपार है यीशु का प्रेम -- हम पापी जन के लिए,(2)
इस छोटे जीवन को बचाने -- प्रभु यीशु आया जग में ।(2)

2.इस सारे जग में भाई -- पापों का अँधियारा है,
ज्योति बन के यीशु आया जग में -- स्वर्ग का द्वार खोला यीशु ने ।

3.अद्भुत है कार्य उसके -- भजूँ मैं कैसे उसे;
आनन्दित होकर भजूँ उसे -- साष्टाँग प्रणाम मैं करुँ उसे ।
187 स्तुति हो उद्धार के लिएstuti ho uddhaar ke lie
‘‘मैं उद्धार का कटोरा उठा कर यहोवा से प्रार्थना करुँगा ।’’
(भलन 116:13)

1.स्तुति हो उद्धार के लिए... लोहू से मैं धुल गया;
यीशु ने धोया सोते में... कलवरी से जो बहा ।

2.स्तुति हो ! मेरे बन्ध टूटे... हल्लेलूयाह ! हूँ आजाद;
ताज खुदावन्त देगा मुझे... और वहाँ सम्पूर्ण उद्धार ।

3.स्तुति हो यर्दन के लिए... जहाँ मैं दफन हुआ;
प्यारे यीशु के साथ मरके... कब्र से फिर जी उठा ।

4.स्तुति हो उस आग के लिए... पिन्तेकुस्त को जो गिरी;
पावन आत्मा ने दी मुझे... शान्ति और मुहब्बत भी ।

5.स्तुति हो प्रभु यीशु की... जल्द आसमान से आएगा;
और कलीसिया को वह अपनी... अपने साथ ले जाएगा ।
188 हे पिता परमेश्वरhe pita parameshvar
‘‘परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना
एकलौता पुत्र दिया ।’’ (यूहन्ना 3:16)

हे पिता परमेश्वर नाम तेरा पवित्र है,(2)
हम सब तेरी स्तुति करते;(2)
धन्यवाद के योग्य तू है, तू है ।।

1.कितना तू ने प्रेम किया... कि प्रिय पुत्र... दे दिया,
तू दयालु, तू कृपालु... तू है दाता, तू है त्राता;(2)
मनुष्य और दूत मिलकर गाते बजाते,
स्तुति है करते, हे प्रिय पिता ।।

2.यीशु ने लोहू बहा दिया... हमें पापों से... बचा लिया ।

3.चिन्ता को तू ने दूर किया... आनन्द से हृदय... भर दिया ।

4.मृत्यु से है निकाल दिया... और जीवन तू ने... दे दिया ।
189 व् स्वतक ! उल ळवक !v svatak ! ul lavak !
‘‘मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूँगा ।’’       (भजन 77:12)

व् स्वतक ! उल ळवक !

1.प्रभु महान विचारु कार्य तेरे... कितने अद्भुत जो तूने बनाए;
देखूं तारे, सुनूं गर्जन भयंकर... सामर्थ तेरी सारे भू मण्डल पर ।
प्रशंसा होवे प्रभु यीशु की,
कितना महान, कितना महान ।।

2.वन के बीच में तराई मध्य विचरुँ,
मधुर संगीत मैं चिड़ियों का सुनूं;
पहाड विशाल से जब मैं नीचे देखूं,
झरने बहते लगती शीतल वायु ।

3.जब सोचता हूँ कि पिता ने अपना पुत्र,
मरने भेजा, है वर्णन से अपार;
कि क्रूस पर उसने मेरे पाप सब लेकर,
रक्त बहाया कि मेरा हो उद्धार ।

4.मसीह आएगा, शब्द तुरही का होगा,
मुझे लेगा जहाँ आनन्द महान;
मैं झुकूँगा साथ आदर, भक्ति दीनता,
और गाऊँगा, प्रभु कितना महान,,
190 यीशु के नाम कोyeeshu ke naam ko
‘‘वह सब का प्रभु है ।’’ (प्रेरितों 10:36)

1.यीशु के नाम को सब भजें, दूत भी प्रणाम करें;
राज्य मुकुट भी उस को दे,
और प्रभु, प्रभु, प्रभु सभों का मानो ।

2.ईश्वर के शहीदों, तुम जो वेदी के नीचे हो;
यिशै के वंश की जय कहो,
और प्रभु, प्रभु, प्रभु सभों का मानो ।

3.इस्राएल के निर्वाचित वंश, दुर्बल और छोटे जो;
दयावन्त त्राता को भजो,
और प्रभु, प्रभु, प्रभु सभों का मानो ।

4.अन्य जाति पापियों, मत भूलो कड़वा विष पापों का;
अपने जयमाल उसे चढ़ाओं,
और प्रभु, प्रभु, प्रभु सभों का मानो ।

5.हर कुटुम्ब, कुल जाति के लोग, पृथ्वी के ऊपर जो;
सारा सन्मान उसी को दो,
और प्रभु, प्रभु, प्रभु सभों का मानो ।

6.ऊपर की जयवन्त भीड़ के साथ, चरण उसके पडें;
सनातन गान में योग भी दो,
और प्रभु, प्रभु, प्रभु सभों का मानो ।
191 मसीह में मैं ने पाया हैmaseeh mein main ne paaya hai
‘‘सो तूम्हारे लिए जो विश्वास करते हो वह बहुमूल्य है ।’’
(1 पतरस 2:7)

1.मसीह में मैं ने पाया है... एक मोती बहुमोल;
वह लाखों में पियारा है... उस जैसा किस का मोल ।

2.यहूदा का वह सिंह भी है... ईश्वर का मेम्ना पाक;
दुनिया में मेरा रक्षक है... जब राह हो भयानक ।

3.केसर वही शारोन का है... और घाटी का सोसन;
यीशु ही ज्योति दुनिया का है... उस से दिल प्रकाशमान ।

4.सलीब उठाकर कलवरी... गया मेरे लिए;
लोहू बहाया जान दे दी... कि खरीदे मुझे ।

5.लेकिन अब फिर वह जीवित है... और जीवित रहेगा ।
घोर के बन्धन को तोड़ा है... ‘‘मौत तेरा डंक कहाँ ?’’

6.ऐ यीशु अपना प्यार अद्भुत... मुझे और भी समझा;
ज्यों तेरा आना है निकट... मुझे प्रस्तुत करा ।

7.हल्लेलूयाह मैं गाऊँगा... जब जाऊँगा आसमान;
तब तुझ ही को मैं देखुुंगा... खुश रहूँगा हर क्षण,
192 यीशु नाथ के प्रेम अपार काyeeshu naath ke prem apaar ka
‘‘हे प्रभु, मेरी चट्टान और उद्धार करने वाले ।’’ (भजन 19:14)

1.यीशु नाथ के प्रेम अपार का... करूँगा मैं स्तुति गान;
उसने क्रूस पर प्राण दे अपना... मुझे मुक्ति की प्रदान ।
गाओ, गाओ, प्रेम मसीह का... जिसके रक्त से हुआ त्राण;
मेरा सारा ऋण भर दिया... उसने क्रूस पर दे के प्राण ।

2.उसके इस अनोखे प्रेम का... नित करूँगा मैं बयान;
पापियों के त्राण के लिए... प्राण दे दिया बलिदान ।

3.उसकी स्तुति क्यों न गाऊँ... जिसकी सामर्थ है अक्षय ?
मृत्यु, नरक, पाप के ऊपर... मुझ को देता कैसी जय !

4.प्रेम का प्रेरित हो मैं गाऊँ... यीशु का अनूठा प्यार;
उसने मुझे जीवन दिया... वह है मेरा प्राणधार ।
193 जो लाखों जीभें मेरी होंjo laakhon jeebhen meree hon
‘‘वे ऊँचे शब्द से कहते थे कि वध हुआ मेम्ना...
धन्यवाद के योग्य है ।’’ (प्रकाशित 5:12)

1.जो लाखों जीभें मेरी हों... जो बस नहीं होगी;
कि उचित रीति से करुँ... स्तुति त्राणकर्ता की ।

2.यीशु का नाम दूर करता डर... और शोक मिटाता है;
हर पापी उसके सुनने पर... पूरा सुख पाता है ।

3.वह तोड़ के पाप की शक्तियाँ... छुड़ाता कैदी को;
रक्त उसका मन शुद्ध करता है... शुद्ध किया है मुझ को ।

4.जब यीशु बोलता मृतक लोग... उठ जीवन पाते हैं;
निराश मन साहस पाते है... और आशा रखते हैं ।

5.हे बहरों सुनों उसकी बात... हे गूँगो स्तुति करो;
हे अन्धों देखो प्रभु को... हे लंगड़ों उछलो ।
194 कैसा मधुर यीशु का नामkaisa madhur yeeshu ka naam
‘‘उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है ।’’
(फिर्लििप्प 2:9)

1.कैसा मधुर यीशु का नाम... विश्वासीयों को है;
वह शोक और दुःख में है सुखधाम... सब डर भागता है ।

2.वह चंगा करता मनों को... और शान्ति का है धाम;
हे मन्ना भूखी आत्मा को... और थकों का विश्राम ।

3.वह प्रिय नाम, असीम भंडार... अनुग्रह से भरपूर;
हे मेरी ढाल, चट्टान, आधार... सब भय को करता दूर ।

4.यीशु तू मेरा मीत, रखवाला... प्रवक्ता, याजक है;
तू राजा, स्वामी दीनदयाल... कृपालु हर समय ।

5.मन मेरा नहीं शक्तिमान... वह प्रेम में है निर्बल;
जब देखूं तेरा रुप तेजवान... रहूँ मैं भक्त अटल ।

6.जब तक कि मुझ में रहे प्राण... प्रेम तेरा गाऊँगा;
मरते समय भी तेरा गान... मैं करता रहूँगा ।
195 गाओ, गाओ ख्रिस्त यीशु हैgao, gao khrist yeeshu hai
‘‘मैं जीवन भर परमेश्वर की स्तुति करता रहूँगा ।’’
      (भजन 146:2)

1.गाओ, गाओ ख्रिस्त यीशु है मुक्तिदाता,
करो लोगों उस के सब गुण प्रचार ।
‘‘धन्य हो, धन्य हो’’ स्वर्ग में पुकारते है दूतगण;
उस के नाम की स्तुति तू कर हर बार ।
उत्तम भेड़पाल, भेड़ो को वही छुड़ाता;
गोद में बालकों को ले करता दुलार ।
गाओ, गाओ हे यीशु महाप्रतापी,
गाओ उस का असीम, अथाह है प्यार ।

2.गाओ, गाओ ‘‘यीशु हमारा है त्राता,’’
पाप के कारण रह हुआ बलिदान ।
गाओ, गाओ जय उसकी जो देता जीवन;
तारक, रक्षक अधिपति महान ।
शरणस्थान है वही हमारा आसरा,
पाप के बल को तोड़ा, दे अपना प्राण ।
गाओ, गाओ है यीशु महाप्रतापी,
जग और स्वर्ग का प्रभु सर्वशक्तिमान ।

3.गाओ, गाओ यीशु है स्वर्गो का स्वामी;
तीनों लोकों का है वह राजाधिराज ।
गाओ, गाओ उसके जो नबी और याजक,
उसको मुकुट दो वह है अधिराज ।
मेरे पाप का सारा उठाया बोझ,
जिससे स्वर्ग जा हम भी पाएँ वह ताज ।
गाओ, गाओ है प्रभु महाप्रतापी,
गाओ उसके तेजोमय सुख का राज ।
196 हे महापवित्र! सर्वशक्तिमान परमेश्वर!he mahaapavitr ! sarvashaktimaan parameshvar
‘‘पवित्र, पवित्र, पवित्र, प्रभु परमेश्वर सर्वशक्तिमान ।’’
(प्रकाशित 4:8)

1.हे महापवित्र ! सर्वशक्तिमान परमेश्वर !
प्रातःकाल आनन्द से तेरी स्तुति गाएँगे ।
तू महापवित्र, ईश्वर, कृपासागर;
सर्वाधिकारी, योग्य प्रशंसा के ।

2.हे महापवित्र ! सन्त सब भजन करते,
तेरे सामने अपनी कीर्ति तुच्छ समझते है;
करुबीम, सराफीम तेरे सामने गिरते,
जो था और है और रहेगा सदैव ।

3.हे महापवित्र ! अंधकार के कारण,
तेरा दर्शन पापीजन को मिलता है नहीं;
केवल तू पवित्र, है अद्वेत परमेश्वर,
सामर्थी, प्रेमी और दयानिधि ।

4.हे महापवित्र ! सर्वशक्तिमान परमेश्वर !
सारी सृष्टि तेरे नाम का धन्यवाद करे,
तू महापवित्र ईश्वर, कृपासागर;
सर्वाधिकारी, योग्य प्रशंसा के ।
197 शोभित हो मुकुट सेshobhit ho mukut se
‘‘महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है ।’’
      (भजन 8:5)

1.शोभित हो मुकुट से... मेम्ना सिंहासन पर;
स्वर्गीय संगीत की आभा में... खो जाते जग के स्वर ।
उठ, मेरे प्राण अब गा... तेरे त्राता की जय;
और उसको अपना राजा मान... अभी और हर समय ।

2.शोभित हो मुकुट से... जीवन का प्रभु जो;
मृत्यु पर जयवन्त हुआ है... कि त्राण का काम सिद्ध हो ।
हम गाते, प्रशंसा... महिमा और सन्मान;
उसका, वह जो देने जीवन... खुद हुआ बलिदान ।

3.शोभित हो मुकुट से... जो प्रभु है प्रेम का;
उसकी महिमा है अपार...छिदा है तन उसका ।
स्वर्ग का कोई भी दूत... न तेज को सह सके;
वे सिर झुका सराहते हैं... महाप्रतापी को ।

4.शोभित हो मुकुट से... राजा शान्ति का जो;
कि युद्ध समाप्त हो जगत में... नित स्तुति प्रार्थना हो ।
छिदे पैरों के पास... स्वर्ग के सिंहासन पर;
सुहाने फूलों की सुगंध... फैलेगी निरंतर ।

5.शोभिज हो मुकुट से... वह प्रभु युगों का;
वचन-मात्र से किया है... निर्माण सौर मंड़ल का ।
तू पापियों का मीत !...  है त्राता जय तेरी !
महिमा, स्तुति अविरत... होती रहे तेरी ।
198 हे ईश्वर तेरे यह विचारhe eeshvar tere yah vichaar
‘‘हे ईश्वर तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य है ।’’
      (भजन 139:17)

हे ईश्वर तेरे यह विचार, मेरे लिए क्या ही अनमोल है;
तेरी करुणा मेरे लिए, सदा सर्वदा बनी रहती है ।।

1.आज चढ़ाऊँ धन्यवाद प्रभु को... मेरे हृदय से तेरे स्तुति गान;(2)
बड़ाई तारीफ तेरे गुण गाता हूँ(2)... कारण तू है मेरा तारणहार ।

2.याद पहले न की मैं प्रभु को... पर पहले से मुझे वह जाना;
ढूंढ़ा मैंने न जग में प्रभु को... मुझ दुष्ट को तू ढूंढ़ निकाला ।

3.सत्यनाश के गड़हे में जाता मैं... दया तेरी हुए बचाने मुझे;
संकट मृत्यु से मुझ को बचाने... मेरा प्रभु हुआ बलिदान ।

4.बुरे संसार में पाप मैं डूबा था... श्राप दण्ड भी मुझे सहना था;
प्रभु यीशु ने सहा दुःख क्रूस पर... मुझे नया जीवन देने को ।

5.कैसा दुःखमय था क्रूस का वह दृश्य... कोड़े मारे थूका था प्रभु पर;
असीम वेदना सहा दुःख और संकट... निर्दोष मेम्ना मुझे बचाने को ।

6.हे प्रभु मैं कैसे चुप रहूँगा... तेरी स्तुति बिना और धन्यवाद;
गाता रहूँगा पूरे जीवनभर... अथाह प्रेम तेरा है जो अपार ।
199 हे ईश्वर तेरे विचार कैसे अमुल्यhe eeshvar tere vichaar kaise amuly
‘‘हे ईश्वर तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य है ।’’ (भजन 139:17)

हे ईश्वर तेरे विचार कैसे अमुल्य है मेरे लिए,
उनकी संख्या का जोड़ मेरे लिए;
गिनके बोलूँगा कैसा बड़ा है ।

1.पातालों की रस्सियों से -- चारों ओर जकड़ा हुआ था,
और मृत्यु के मजबुत फन्दों से -- मैं उदास हो गया;
परमेश्वर से दुहाई दी, मन्दिर से बिनती सुन ली,
इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।

2.जो मेरा विरोध करते है -- और मुझे डराते भी है,
जो कहते प्रभु से मैं -- दूर हो चुका भी हूँ;
परमेश्वर से दुहाई दी, मन्दिर से बिनती सुन ली,
इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।

3.कहता था तू चरवाहा मेरा -- तेरे अधिकार में न था,
पापी था पर पाप न माना --  श्रापीत हो गया था मैं;
परमेश्वर से दुहाई दी, मन्दिर से बिनती सुन ली,
इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।

4.छीपी हुई मेरी मुर्खता -- ढ़ाँपा हुआ मेरा गुनाह,
मैं तो बहुत अयोग्य हूँ -- और सब कुछ मैं खो बैठा;
उघाड़ा पर दण्ड न किया, मुझे तूने न झिड़का,
इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।

5.मुझे जो दुःख हुआ था -- भला मेरे लिए हुआ था,
जिससे तेरी विधियों को सीखूं -- तेरे मार्गो में चलूँ;
तेरा धर्मशास्त्र मुझको प्यारा, दिन रात है घ्यान उसी पर मेरा;
इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।

6.चाहे पर्वत हट भी जाएँ -- और पहाडियाँ टल भी जाएँ,
तौभी मेरी करुणा तुझ से -- कभी वह न हटेगी;
धन्य हो तेरे वायदों के लिए, स्वीकार कर इस ध्यान को मेरे;
इसलिए मैं गाऊँगा -- मैं भजूंगा ।

7.इस समय जो तुझसे करता हूँ -- तू उसे न जानता है,
अन्त में तू इसे जानेगा -- कि है मार्ग यह सिद्ध मेरा;
आवाज सुनी मैंने तेरी, और पाया दर्शन तेरा,
हल्लेलूयाह गाऊँगा -- मैं भजूँगा ।
200 हे प्रेमी तारणहारhe premee taaranahaar
‘‘जिसने मुझ से प्रेम किया और
मेरे लिए अपने आप को दे दिया ।’’ (गलतियों 2:20)

हे प्रेमी तारणहार, दया तेरी है अपार ।।

1.हानि निन्दा करनेवाला, था भी मैं सतानेवाला;
अविश्वासी था भयंकर,(2) पाई दया तेरी मैं अपार ।

2.मेरे बदले तारणहार, दुःख सहा और दण्ड उठाया;
तृषित हुआ क्रूस पर चढ़ा,(2) प्रभु प्राण दिया तू ने ।

3.जग में जो डरते तुझ से, रक्षा उनकी करता प्रेम से;
तेरी ऐसी जो भलाई,(2) करुँ कैसे मैं बखान ।

4.पुण्य नहीं मेरे जीवन में, चढ़ाऊँ क्या प्रेम के बदले में;
धन्यवाद कटोरा लेकर,(2) धरुँ चरणों में तेरे ।

5.मेरे जीवनभर सर्वदा, तेरी करुणा और भलाई;
बनी रहती निश्चे साथ साथ,(2) तेरा घर मेरी है आश ।

6.प्रभु प्रिय प्राण पालक, मेरे आत्मा का तू रक्षक;
कमी मुझ को कभी न होगी,(2) यह है मेरा नया गीत ।

7.प्रभु लाखों में मेरा अनुपम, दस हजारों में तू उत्तम;
हल्लेलूयाह नित्य मैं गाऊँ,(2) सदा प्रफुल्लित होेकर ।
201 अमूल्य लोहू से बचे हुए जनamooly lohoo se bache hue jan
‘‘उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है ।’’ (1 यूहन्ना 1:7)

अमूल्य लोहू से बचे हुए जन,
प्रतापमय ईश्वर की है सन्तान;
प्रभु का भजन गाओं सन्तगण,
आदर, महिमा, स्तुति, जयगान;(2)
प्रभु का भजन गाओ सन्तगण ।।

1.बीत रहा था यह जीवन, कुमार्ग से मेरा यह तन;
कहता था मैं कुवचन, था नहीं मन में शान्ति और चैन ।

2.चलता था मैं चाकल पथ में, जिसके अन्त में था मरण;
नरक के दण्ड को अपनाकर, कमाई करता था पाप का धन ।

3.जीवित सत्य ईश्वर का, लेता नहीं था उसका नाम;
दुनिया के धर्म-कर्म से, जाना चाहता था स्वग-धाम ।

4.असीम करुणा के कारण, किया मानव रुप धारण;
देकर क्रूस पर अमूल्य प्राण, किया हमारा पूर्ण तारण ।

5.पवित्र लोहू की धारा में, शुद्ध हुआ मैं अब पापी जन;
खोला जो आत्मिक यह नयन, भर दिया प्रभुने स्वर्गीय ज्ञान ।

6.अधर्मी, दुष्ट मनुष्य से, किया जो अद्भुत प्रेम महान;
उस महान प्रेम के बदले में, चढ़ाता हूँ प्रभु बलिदान ।

7.करता हूँ स्तुति अब तारणहार, आशीषित होकर नम्र मन;
आत्मा, प्राण और यह शरीर, करता हूँ प्रभुजी अब अर्पण ।
202 आराधना करुँ मैं दिल से भजूँगाaaraadhana karun main dil se bhajoonga
‘‘इत्र की सुगन्ध से घर सुगन्धित हो गया ।’’ (यूहन्ना 12:3)

आराधना करुँ मैं दिल से भजूँगा,
सनातन तक तेरी स्तुति करूँगा ।।
मार्ग तू ही है, सत्य तू ही है,
जीवन तू ही, मेरे प्रभु ।।

1.क्योंकि मैंने बहुत ही कामों से, तेरी संगति को बिलकुल छोड़ा;(2)
मेरे जीवन को तू ने सुधारा,(2) सेवा करना सिखाया प्रभु ।

2.मैं ने सोचा था मेरे जीवन में काफी है तेरा वचन सुनना;
पर तू ने मेरे आँसुओं से, पावों को धोना सिखाया प्रभु ।

3.व्यर्थ मैं खोया सब कुछ अपना, स्वार्थ में जीवन मेरा बीता;
जब मैं ने तेरे बलिदान को जाना, नम्र होकर पास आया प्रभु ।

4.अपने लहु से धोया मुझे तू, और तू ने मुझ को पवित्र किया;
तेरे उद्धार के लिए भजूँगा, हरदम स्तुति करुँ मैं प्रभु ।

5.संसार में मेरा दुर्गन्ध-जीवन था, प्रेम से तू ने मुझे निकट बुलाया;
और तू ने मुझको स्वर्गीय भोजन दिया, आनन्दित मुझको किया प्रभु ।

6.भजूँगा तुझे मैं सुगन्धित इत्र से, छिपाकर रखा था वह पात्र तोड़ा;
नापा नहीं जाता प्रभु तेरे प्रेम को, मेरे जीवन में काफी तू प्रभु ।

7.प्राचीन, सन्त और आदर के दूत भी, सामने तेरे यदि खड़े भी हो;
अनगिनित लोगों के मध्य में मुझे तू, पहचान लेगा प्यारे प्रभु ।
203 प्रभु तेरी अनमोल करुणाprabhu teree anamol karuna
‘‘हे परमेश्वर तेरी करुणा कैसी अनमोल है ।’’  (भजन 36:7)

प्रभु तेरी अनमोल करुणा, नित्य मैं गाऊँगा ।।(2)

1.पीढ़ी-पीढ़ी बतलाऊँगा, अमर है तेरी दया;
कलवरी क्रूस पर लोहू बहाकर, वाचा स्थिर किया, पाप-क्षमा है किया ।

2.हर परीक्षा में तू ही मुझ को, भरपूर जय देता;
करुणा कर के मुझ को छुड़ाता, विश्वासयोग्य त्राता ।

3.हर दिन नई होती रहती है, तेरी वात्सल्यता;
सच्चाई तेरी अति महान है, तू न बदलता ।

4.तेरे आने तक तू मुझ को, निर्दोष रखेगा;
विश्वासयोग्य प्रभु तू मेरी, रक्षा करेगा ।

5.अच्छी कुश्ती मैं लडूँगा, विजय पाऊँगा;
महिमा मुकुट तुझ से लूंगा, हल्लेलूयाह गाऊँगा ।
204 ईश्वर की दया नित्य रहेगीeeshvar kee daya nity rahegee
‘‘...और उसकी करुणा सदा की है ।’’  (भजन 136:1)

ईश्वर की दया नित्य रहेगी, उसका अनुग्रह मिलता रहेगा;
धन्यवाद देके स्तुति हम गाके, हल्लेलूयाह पुकारेंगे हम ।।(2)

1.सकेती में हम मर न जाये, प्रभु ने स्वयं बचाया हमें;(2)
अच्छा है वह और बलवन्त है, उसका अनुग्रह नित्य रहेगा ।(2)

2.शत्रु सेनायें चारों और थी, दाऊद भक्त का ईश्वर संग वह;
सामने चला, वह बलवन्त है, उस का अनुग्रह नित्य रहेगा ।

3.अग्नि परीक्षा जब जीवन में आयी, सांत्वना दिया और जयवन्त भी किया;
पुकारें विजय वह साथ अब है, उसका अनुग्रह नित्य रहेगा ।

4.अन्धकार रुपी कष्ट जब आये, मेरे पैरों का दीपक तू बना;
मेरी अगुवाई उस ने जो की सदा, उस का अनुग्रह नित्य रहेगा ।

5.बाढ़ के समान जब निन्दाएँ आयी, वीर नहेमायाह को आत्मा दिया था;
दृढ़ विश्वास, धीरज और साहस मिला, उसका अनुग्रह नित्य रहेगा ।

6.अनन्त ईश्वर सच्चा और धर्मी, नित्य हमारे साथ रहता है;
इसलिए आओ स्तुति करें, उस का अनुग्रह नित्य रहेगा ।
205 दया, अनुग्रह का प्रभु हमाराdaya, anugrah ka prabhu hamaara
‘‘आनन्द, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है ।’’
(1 पतरस 1:8)

दया, अनुग्रह का प्रभु हमारा, धन्यवाद मैं अर्पण करुँ ।।

1.यहोवा की सभी भलाईयों के लिये, भला उसे मैं क्या दे सकता हूँ ?
प्याला उद्धार का लेकर, प्रभु के नाम ही से, प्रार्थना अब मैं करुँ ।

2.पूरी करूँगा मैं मन्न्ातें उसकी दास यहोवा का मैं हूँ अब जो;
तेरे लोगों के मध्य में, यरूशलेम में सदा, स्तुति प्रशंसा करुँ ।

3.रचे जाने से पहले माँ के गर्भ ही में, तू ने मुझ पर जो चित लगाया;
उत्पन्न होने से पहले तू ने मुझे जाना, और अभिषेक किया ।

4.पूरे मन से खोजो मुझे तुम निश्चय, पाओगे तू ने कहा था प्रभु;
ढूंढ़ा मुझे तू ने बड़ी करुणा से और मुझे बचाया ।

5.निन्दक मैं था, सतानेवाला भी, अन्धेरकर्ता और अधर्मी भी;
दास अपना तू मुझे बनाया, दोषों को मिटा दिया ।

6.देह मेरी ये तोड़ी गई है, प्रेमी प्रभुजी यह कहा तू ने;
लोहू जो तेरा बह गया था, पापों की क्षमा के लिए ।

7.अनुग्रह ही से बचाया मुझ को, कार्य अद्भुत यह तेरा ही था;
न मेरे कर्मो से न कोई पुण्य भी, प्रभु का वरदान यह था ।

8.वर्णन से बाहर, महिमित वह आनन्द, तू ने मुझ को दिया है प्रभु;
सदा खुश रहकर, धन्यवाद देकर, हल्लेलूयाह गाऊँगा ।
206 कृपा मेरी तेरे लियेkrpa meree tere liye
(यूहन्ना 1:7, 1 पतरस 1:10, 1 कुरिन्थियों 15:10)

कृपा मेरी तेरे लिये काफी है कहा यीशु,
कृपामय ! तेरी स्तुति करते ।।

1.पाप में थे डूबे प्रभु दोष न दिया,
पापी के लिए प्राण अर्पण किया, कृपा द्वारा उद्धार हमें दिया ।

2.अनुग्रह सच्चाई जग में है आयी,
अनुग्रहमय प्रभु यीशु द्वारा ही, अनुग्रह से हमें है सम्भालता ।

3.सारे अनुग्रह का दाता है प्रभु,
सिद्ध कर के हमें बलवन्त करता तू, स्थिर कर के शैतान से बचाता ।

4.सत्यात्मा बताता सर्व सत्य,
सदा रहेंगे हम प्रभु यीशु के साथ, सब कुछ है तुम्हारा, सिखाता ।

5.परीक्षा कितनी भी चाहे आये दुःख भी,
परीक्षा हुई थी प्रभु यीशु की भी, कृपा देकर सहायता है करता ।

6.अब न जीवित मैं प्रभु जीवित मुझ में,
अब से जीऊँगा मैं प्रभु के लिए, सब कृपा आधीन मैं करता ।

7.अनुग्रह ही से हूँ मैं जो कुछ भी हूँ,
अनुग्रह ही से मैं प्रचार अब करुँ, अनुग्रह है सिखाता, हल्लेलूयाह ।
207 यीशु की नित्य हम स्तुति करेंगेyeeshu kee nity ham stuti karenge
‘‘मैं यहोवा बदलता नहीं ।’’ (मलाकी 3:6)

1.यीशु की नित्य हम स्तुति करेंगे, भूमि, आकाश का जो सिरजनहारा;
संकल्प था उसके मन में, ताकि यीशु प्रभु को वह प्रगट करें ।
कभी न बदले यीशु, कभी न बदले;
चाहे विश्व बदल जाये, वचन न बदले ।

2.जिनको उसने पहले से जाना, उन्हें वह पहले ठहराया भी;
धर्मी ठहराकर सुन्दर बनाया, और उनको महिमा भी दी ।

3.हम को अपने रुप में बनाया, पाप का रुप उसने जो हटाया;
यीशु के रुप में वह हमको फिर लाया, रखवाली करेगा पुत्र समान ।

4.ईश्वर से प्रेम रखनेवालो को, सारी बातें भलाई की होती;
संकट-क्लेश जो इस जग में है, आनेवाली महिमा से कुछ भी नहीं ।

5.क्या कोई क्लेश, संकट, उपद्रव और अकाल, नगाई जो आये;
जोखिम, तलवार जो कुछ भी हो, प्रभु के प्रेम से न अलग करें ।

6.मृत्यु और जीवन स्वर्गदूत हो, प्रधानता और चाहे कोई हो;
अधिकार, सामर्थ और जो कुछ हो, प्रभु के प्रेम से न अलग करें ।

7.ईश्वर का संकल्प आदि में जो था, ताकि प्रभु को प्रगट वह करें;
आओ बचें बुराई से हम, यीशु को हम भी प्रचार करें ।
208 अद्भुत है तेरी आशीष प्रभुजीadbhut hai teree aasheesh prabhujee
‘‘यदि तुम अपने परमेश्वर यहोवा की इन आज्ञाओं को...
मानो तो तुम पर आशीष होगी ।’’  (व्यवस्था 11:27)

अद्भुत है तेरी आशीष प्रभुजी उण्डेली तूने,
अपरम्पार तेरा प्रेम हम पर दिखाया तू ने ।।

1.मनुष्य को बनाया तू ने अपनी समानता में,
हृदय के अनुसार तेरे, बनेंगे यदि, आशीष है ।

2.नई सृष्टि की भूमि पर, आशीष हम को मिलती है;
श्राप तब दूर करता है, सब कुछ नया होता है ।

3.जग से अलग होने पर, क्रूस पर यदि चढ़े हैं;
आशीष तब देगा प्रभु, आँखे मीरास की ओर है ।

4.पुत्रता के दर्जे में है, पिता की इच्छा में जीते;
जीवन का सोता बहाते, तब ही आशीष में हम है ।

5.आत्मिकता की ऊँचाई पर, जब तक हम सब रहते;
शारीरिकता से तो बचना, फिर आशीष हम पाते है ।

6.आशीष के वारिस होने को, बुलाए हम जो गए है;
शर्ते पूरी करें तब, प्रभु यीशु में आशीष है ।
209 प्रभु यीशु में सब प्रकार कीprabhu yeeshu mein sab prakaar kee
‘‘उस ने हमें मसीह में स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की
आशीष दी है ।’’ (इफिसियों 1:3)

प्रभु यीशु में सब प्रकार की, आशीष हमारी है ।।

1.ठहराया पहले से हमें, चुन लिया प्रेम से हम को उस ने;
और किया ग्रहण पुत्र हम बनें, हम सब अब तो धन्य हैं ।

2.अपराधों की क्षमा हम को मिली, लोहू के द्वारा छुड़ाए गए;
अनुग्रह से उद्धार हम पाए, हम सब अब तो धन्य हैं ।

3.ज्योतिर्मय हुई मन की आँखे, आदर से हम सब बुलाए गए;
सन्तों में मीरास हम पा गए, हम सब अब तो धन्य हैं ।

4.पवित्र, आदर, मीरास जो है, अविनाशी निर्मल वह है;
स्वर्ग में रखी हमारे लिए, हम सब अब तो धन्य हैं ।

5.आँखोने अब तक जो नहीं देखा, कान ने अब तक नहीं सुना;
बातें मनुष्य के चित में न चढ़ी, हम अब पाकर धन्य हैं ।
210 हे प्रभु तेरी परिपूूर्णता सेhe prabhu teree paripoooornata se
‘‘उसी चाचा के अनुसार मेरा आत्मा तुम्हारे बीच में बना है ।’’
(हाग्गै 2:5)

हे प्रभु तेरी परिपूूर्णता से, मिलती हमें आशीष भरपूरी से ।।

1.प्रभु यीशु मसीह में, स्वर्गीय स्थानों में;
सब प्रकार की आशीष, पायी है भरपूर हम ने ।

2.जिनको प्रभु तू ने चुना है, उनकी भलाई में मैं;
आनन्दित सदा रहूँ, अनुग्रह मुझ पर कर प्रभु ।

3.प्रजा जो तेरी मीरास है, उनके साथ मिलकर मैं;
आराधना तेरी करुँ, अनुग्रह मुझ पर कर प्रभु ।

4.प्रजा पर तेरी दया है, नई हर दिन होती है;
दयालु प्रभु तू, अनुग्रह मुझ पर कर प्रभु ।

5.हे प्रभु तू ही महान है, स्वरुप तेरा नित्य नया है;
दर्शन हर दिन पाऊँ, अनुग्रह मुझ पर कर प्रभु ।

6.वाचा के अनुसार मेरा आत्मा तुम्हारे बीच है;
डरो मत, कहा प्रभु, अनुग्रह मुझ पर कर प्रभु ।

7.प्रभुने कहा मैं तुझ को, अंगूठी नाई रखूँगा;
प्रेम से चुना मुझ को तू, अनुग्रह मुझ पर कर प्रभु ।

8.अनुग्रह सच्चाई से, परिपूर्ण प्रभु तू है;
हल्लेलूयाह सभी समय, महिमा तेरी हो प्रभु ।
211 आशीष के ऊपर आशीषaasheesh ke oopar aasheesh
‘‘मैं तुझे आशीष दूँगा... ।’’ (उत्पति 12:2)

आशीष के ऊपर आशीष तुझ को दूँगा,
प्रभु ने कहा मैं बढ़ाता जाऊँगा ।।

1.यहोवा ने दर्शन देकर कहा... मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ;
मेरे सन्मुख चल सिद्ध हो जा... मैं तेरे साथ वाचा बान्धूंगा ।

2.वंश को तेरे बहुत ही बढ़ाऊँगा... और तुझे मैं फुलाऊँ-फलाऊँगा;
जाति-जाति का मूल बनाऊँगा... वंश के साथ वाचा स्थिर करूँगा ।

3.युग-युग तेरा ईश्वर रहूँगा... और कनान देश तुझ को दूँगा;
सदा के लिए तेरा करूँगा... तुझ में महिमा पाऊँगा ।

4.मैं तुझ से बड़ी जाति बनाऊँगा... आशीष तुझ को निश्चय दूँगा;
तेरा नाम मैं बड़ा बनाऊँगा... आशीष का कारण भी करूँगा ।

5.जो तुझ को आशीष अब देंगे... उनको मैं आशीष भी दूँगा;
जो तुझे श्रापे, श्राप उन्हें दूँगा... आशीष सब पायें तुझ से, मैं करूँगा ।
212 प्रभु यीशु तू सब में सब कुछ हैprabhu yeeshu too sab mein sab kuchh hai
‘‘वे तेरे भवन के चिकने भोजन से तृप्त होंगे ।’’       (भजन 36:8)

प्रभु यीशु तू सब में सब कुछ है,
मित्रता हमारी जग में सदा है ।।

1.तृप्ति तेरे मन्दिर में जो सदा है,
आनन्द का प्रवाह चमका जो उस में;
अद्भुत जीवन का सोता है जो तुझ में,
आराधना के योग्य है, तू ही ।

2.बहुतायत का प्रेम तेरा मैं जो पाकर भी,
पहिले प्रेम को प्रभु मैंने जो छोड़ा;
भले प्रभु, कर क्षमा, दे पहिला प्रेम,
स्तुति के योग्य सदा तू है, प्रभु ।

3.मेरे विचार, दृष्टि, शब्द और चलन;
चाहे बैठूँ या उठूँ और जो देखुँ;
सब बातों में मसीह को प्रसन्न करूँगा,
रहूँ जहाँ, किसी हालत में, कहीं भी ।

4.पवित्र है, ईश्वरीय स्वभाव,
पवित्र जीवन ही हमारा भाग है;
पुत्र की तरह सुधारता वह हमें,
राज्य तू कर, हम पर प्रभु, राजा ।

5.भाईचारे कि प्रीति और एकता के साथ,
दीनता, आनन्द, भक्ति और नम्रता से;
अद्भुत हमारे सुगन्धित स्तुति से,
नम्र होकर स्तुति तेरी करेंगे ।
213 यीशु प्रभु तेरे चहेरे को देखकरyeeshu prabhu tere chahere ko dekhakar
(भजन 36:8, 16:11; यूहन्ना 6:35)

यीशु प्रभु तेरे चहेरे को देखकर,
अरमान मेरा करूँगा पूरा ।।

1.तू ही है मेरी जीवन की रोटी, जो तेरे पास आते, मुड़ के न जाएँगे;
भूखे न होंगे कभी, प्रभु तू आदर्श मेरा ।

2.तेरे मन्दिर की भरपूरी से, और तेरे भवन के चिकने भोजन से;
जीवन जल तू है, और तृप्ति है तू मेरी ।

3.तू ही मेरा है जीवन का मार्ग, तेरी उपस्थिति में पूरा आनन्द;
इसलिए करूँगा मैं बहुत ही आदर तेरा ।

4.अभिलाषी जीव को संतुष्ट तू करता,
भूखा जो मैं अपनी आत्मा में, उत्तम से उत्तम पदार्थ तू है मेरा ।

5.मैंने ये बातें कहीं है तुम से, मुझ में बने रहो, कहा यीशु ने;
पूरा हो जाए तुम में आनन्द अब मेरा ।

6.सारे जीवन भर रहूँगा में मैं, घर है यहोवा का मेरा आदर्श-स्थान;
हल्लेलूयाह गीत गाऊँगा प्रभु तेरा ।
214 प्यार से तू लेकर आयाpyaar se too lekar aaya
(1 इतिहास 28:20, नहे 6:16, गिनती 13:24)

प्यार से तू लेकर आया,
ये विश्राम स्थान में लाया प्रभुजी ।।

1.सकेती में हम जब पड़े थे, तुझ से प्रार्थना की;
चौड़े स्थान में लाया हमें तू, स्तुति हो अनुग्रह किया ।

2.बल दिया तू और हियाव भी, निर्भय हमें किया;
इस संसार में मन्दिर बनानें, लोगों को इकट्ठा किया ।

3.अपने लिए जो घर है बनाया, उस का वह आदर;
संसार में यह फैल भी जाए, तू ने संकल्प किया ।

4.मेरा आत्मा तुम्हारे बीच में, प्रभु यीशु ने कहा;
प्रभुजी हमारे साथ तू रहकर, अद्भुत यह कार्य किया ।

5.बहुतायत की आशीष की जगह में, लेकर हमें आया;
एश्कोल की अंगूर की नाई तू, फलदार बनें यह चाहा ।

6.जाति-जाति के लोग जितने थे, बहुत चकित हुए;
क्योंकि प्रभु तू ने आश्चर्य काम किया, धन्य तू सब में हुआ ।

7.चाँदी-सोना जो सब कुछ तेरा, बहुतायत से हम को देगा;
सारी भलाईयों के लिए प्रभुजी, गाता हूँ हल्लेलूयाह ।
215 यीशु तु ने किया प्यारyeeshu tu ne kiya pyaar
‘‘उसे देखकर प्रभु को तरस आया ।’’ (लूका 7:13)

यीशु तु ने किया प्यार, कोई न था तारणहार,
तुझ से न देखा गया, मेरे गुनाहों का भार ।।

1.तुझ से मैं दूर हो गया, ईश्वर रहित जग में था;
बिलकुल मैं समझा नहीं, तेरे हृदय का वह प्यार ।

2.मैं ने न सोचा कभी, अन्त मेरा क्या कुछ होगा;
अपने ही पापों में मैं, करता था तुझ को बेजार ।

3.देखा जब अपने को मैं, धृणा हुई इस जीवन पर;
पश्चाताप बहुत किया मैं, माना मैं तू तारणहार ।

4.उद्धार मुझे मिल गया, लोहू से मैं धुल गया;
भटके को लाया निकट, धोया तू पाप बेशुमार ।

5.मण्डली में लाया मुझे, मीरास बनाया मुझे;
दिया बड़ा अधिकार, खोला तू ने स्वर्ग का द्वार ।
216 मुझ से प्रेम कियाmujh se prem kiya
‘‘जिसने मुझ से प्रेम किया, और
मेरे लिये अपने आपको दे दिया ।’’ (गलतियों 2:20)

मुझ से प्रेम किया,
मेरा प्रेमी मसीह, हाँ, प्रेम किया;
अपने आप को दे दिया ।।

1.प्रेम किया, हाँ प्रेम किया, सुखदायक सुगन्ध प्रभु हो गया;
यहोवा के आगे प्रभु भेंट बन गया, महान बलिदान दे दिया ।

2.सनातन प्रेम प्रभु स्मरण किया, कलीसिया से मसीह प्रेम किया;
और उस के लिए, प्रभु सब कुछ दिया, अपना प्राण वह दे दिया ।

3.पहले उसने मुझ से प्रेम किया, फिर मुझे प्रेम करना वही सिखाया;
परमेश्वर प्रेम है, वह दिखाया, प्रेम से प्रायश्चित कर दिया ।

4.जगत से ऐसा ही प्रेम किया, पापियों के लिए मसीह लहु बहाया;
उसी लहु से प्रभु मुझ को धोया, मेरे लिए मृत्यु सह लिया ।

5.तुझ से प्रभु अब मैं प्रेम करता, और तेरे नाम से प्रीति रखता;
तेरा उद्धार मुझे बहुत ही भाता, तेरा निवासस्थान प्रिय हुआ ।
217 मैंने है पाया तुझ से प्रभुजीmainne hai paaya tujh se prabhujee
‘‘परमेश्वर को उस के उस दान के लिये,
जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो ।’’ (2 कुरिन्थियों 9:15)

मैंने है पाया तुझ से प्रभुजी,
सब कुछ है उत्तम जो मुझे दिया ।।

1.जीवन की यात्रा में आज तक चला मैं,
पूरे समय मेरा साथ है दिया;
एबेनेजेर बनकर तू ही तो प्रभुजी,
मेरा सहायक और रक्षक हुआ ।

2.आन्धी तूफानों के बीच से मैं आया,
अन्धकार की शक्तियाँ प्रबल जो थी;
पंखो में मुझ को छिपाकर प्रभुजी,
उत्तम सहारा तू मुझे दिया ।

3.दुःख की घड़ी जब मुझ पर आयी,
पास रहकर अपना वह आनन्द दिया;
भय और निराशा के समय में प्रभुजी,
तू ही मुझे बड़ा हियाव दिया ।

4.मेरे शरीर में काँटा एक आया,
शैतान का दूत मुझे घूँसे मारे;
निर्बलता, निन्दा और व्याधि, धटी में,
तेरा अनुग्रह मुझे दिया ।

5.हूँ मैं आभारी, धन्य मैं हुआ,
क्योंकि अनुपम प्रेम तेरा पाया;
हरेक परीक्षा और कठिन समय मैं,
जयवन्त होना कैसे तू सिखाया ।
218 मेरे लिए प्यारा यीशुmere lie pyaara yeeshu
‘‘यहोवा मेरे लिए सब कुछ पूरा करेगा...।’’
      (भजन 138:8)

मेरे लिए प्यारा यीशु सब कुछ किया है,
डर मेरा इस दुनिया से हटा दिया है;
मेरे लिए क्रूस पर सब कुछ किया इसलिए,
सदा -- उद्धार का कटोरा लेकर स्तुति करुँ मैं ।

1.अकाल में भी एलियाह का पोषण किया है,
अकाल के बाद एलियाह को आशीष दिया है;
अकाल जाने तक उसी विधवा के घर में,
कभी -- तेल की या आटे की न घटी हुई है ।

2.आकाश के सब पक्षियों को ध्यान से देखो,
बोंते हैं न जोतते हैं वे, न चिन्ता उनको;
पोषण उनका परमेश्वर ही करता है निश्चय,
हमें -- अद्भुत रीति से सम्भालेगा प्रतिदिन निश्चय ।

3.क्या पहिनेंगे चिन्ता इस की जरा न करों,
जंगल में के सोसनों को जरा निहारो;
जंगल के पुष्पों को प्रभु शोभित करता है,
वही -- महिमा के वस्त्र हम को निश्चित देता है ।

4.आनेवाले कल की चिन्ता कभी न करो,
प्रभु यीशु साथ है सदा, कभी न डरो;
कल की चिन्ता कल का दिन ही आप कर लेगा,
जग में --आज का दुःख आज के लिए ही काफी है ।

5.प्रभु यीशु ने जंगल में आशीषें दी है,
पाँच हजार लोगों को वह भोजन दिया है;
प्रति आवश्यकता प्रभु पूरी करता है,
हम से -- प्रेम करके अपने आप को अर्पण किया है।
219 प्रभुजी तेरे बारेे में अबprabhujee tere baaree mein ab
‘‘मेरा हृदय उमण्ड रहा है... ।’’
      (भजन 45:1)

प्रभुजी तेरे बारेे में अब... मेरा हृदय उमण्ड रहा है ।।

1.तेरे नाम को मैं आदर देकर... और तुझ को मैं भजूँगा;
और बड़ाई करूँगा मैं अब... अनुग्रह मुझे दिया है ।

2.निर्जल भूमि में अंकुर की नाई... बहुत क्लेष तू ने उठाया;
और दुःखी पुरुष तू हुआ है... मेरा दण्ड तू ने उठाया है ।

3.गोरा तू है और लाल भी है... मेरा प्रीतम तू प्रभुजी;
दस हजारों में उत्तम है तू... मेरा परम पिता तू है ।

4.मेम्ने की शादी के भोज के समय... राजाओं के राजा के रुप को;
हमेशा देखने के लिए अब...  बाट जोहता रहूँगा मैं ।
220 चखकर मैं ने जाना हैchakhakar main ne jaana hai
‘‘परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है ।’’
      (भजन 34:8)

चखकर मैं ने जाना है, यहोवा कैसा है भला,
उद्धारकर्ता की शरण में, आकर मैं धन्य हुआ ।।

1.तू ही महान परमेश्वर, स्तुति के योग्य है तू ही,
कि तू ही दयालु है, निश्चय ही मैं भजूँगा ।

2.अति उत्तम तू है ईश्वर, प्रभावशाली परमेश्वर,
काम तेरे जो अद्भुत है, मैं पूरे दिल से भजूँगा ।

3.भलाई से भरे परमेश्वर, अति श्रेष्ठ भी तू ही है,
तू ही अति सुन्दर है, सम्पूर्ण मन से भजूँगा ।

4.मेरे जीवन भर तुझ को, यहोवा सदा मैं भजूँगा,
मेरी आखिरी सांस तक भी, गुण तेरा मैं गाऊँगा ।

5.दुःख और संकट में भी, आनन्दित सदा रहूँगा,
अपने उद्धारकर्ता में, तसल्ली पाऊँगा ।

6.लगातार प्रार्थना करूँगा, प्रभु की उपस्थिति में,
जो कुछ भी मैं मांगूँगा, बहुतायत से पाऊँगा ।

7.धन्यवाद मैं चढ़ाऊँगा, हरेक बात के लिए,
मसीह में तृप्त होकर, मैं मगन होऊँगा ।
221 प्रति दिन मेरे बोझ कोprati din mere bojh ko
‘‘धन्य है प्रभु, जो प्रतिदिन हमारा बोझ उठाता है ।’’
      (भजन 68:19)

प्रति दिन मेरे बोझ को, उठाता है प्रभु;
सदा अपनी भलाई से, भरता है प्रभु ।।

1.धन्य कह सर्वदा तू, मेरे प्राण यीशु को,
पवित्र नाम की, प्रशंसा सदा हो;
आशीषों के ऊपर आशीष हम पर लादी है ।

2.काँटा जो शरीर में आया, दुःख बहुत ही मैं पाया;
वेदना से मैं ने पुकारा, धीरज तब दिया;
मेरा अनुग्रह तुझ को काफी है कहा ।

3.पाप के फन्दे में जब मैं, जकड़ा हुआ रोता था;
अपने लोहू से मुझे, स्वतंत्र तू किया;
तेरे अनुग्रह के बड़े धन के अनुसार ।

4.सभी बातों में सदा, सारी भरपूरी से भी;
बहुतायत से मुझ को तू ने, पाला पोसा है,
प्रति पल अनुग्रह तेरा मुझ को दिया है ।

5.सभी समय संतुष्ठ रहना, मुझको सिखलाया भी है;
सब कुछ करने के लिए बल भी दिया है,
तुझ में शक्ति सदा पाऊँ, बलवन्त हे ईश्वर ।
222 हे प्रभु, भुला भटका दूर मैंhe prabhu, bhula bhataka door main
‘‘मसीह का लहू,... तुम्हारे विवेक को,... क्यों न शुद्ध करेगा ।’’ (इब्रानियों 9:14)

हे प्रभु, भुला भटका दूर मैं,
तेरी शरण में आया,
तुझ से प्रेम मैं पाया ।।

1.जब मैंने अपना पाप मान लिया,
और पश्चाताप मैंने किया, पाप क्षमा मैं पाया ।

2.प्रभु यीशु तू ने लोहू बहाया,
पाप का प्रायश्चित किया, लोहू से मैं धुल गया ।

3.तेरा लोहू मेरे विवेक को धोया,
पाप का कर्जा मिटाया, और मुझे स्वतंत्र किया ।

4.लोहू के द्वारा दण्ड को हटाया,
हरेक बन्धन खोला, निर्दोष मुझ को बनाया ।

5.लोहू के द्वारा पाप से छुटकारा,
और उद्धार मैं पाया, पाप के दागों को मिटाया ।

6.लोहू के द्वारा संगति मैं पाया,
सिद्धता की ओर बढ़ाया और जयवन्त मुझे किया ।
223 यीशु तू ने किया निहालyeeshu too ne kiya nihaal
‘‘और सब खाकर तृप्त हो गए ।’’
(मत्ती 14:20)

यीशु तू ने किया निहाल,
जब मैं शरण में तेरी आया ।।

1.यीशु आकर तेरे द्वार... बरकत पाई बेशुमार;(2)
कृपा तेरी हुई अपार... मेरे दिल का मैल मिटाया ।(2)... यीशु

2.तू ने बचाए मेरे प्राण... दीनी क्रूस पर अपनी जान;
तुझ से हार गया शैतान... मेरे मन में तू ही समाया ।

3.तेरी सिफते है अजब निराली... देखी सूरत खूब जलाली;
मेरे दिल में है खुशहाली... मैंने जीवन का सुख पाया ।

4.जो कोई तेरी शरण में आवे... वह पापों से बच जावे;
मन में धर्म आत्मा पावे... इस को मैं ने है अजमाया ।

5.हे दास तेरा, विश्वासी... काटी तू ने काल की फाँसी;
धन धन अमर लोग के वासी... दर्शन तेरा मैं ने पाया ।
224 सून ऐ मेरी जानsoon ai meree jaan
‘‘हे मेरे प्राण यहोवा को धन्य कह और
उसके किसी उपकार को न भूलना ।’’       (भजन 103:2)

सून ऐ मेरी जान, प्रभु के कामों को न भुल;(2)
ऐ मेरी जान, प्रभु के कामों को न भूल ।।(2)

1.अपने पापों में था तू मुर्दा... बचाने आया वह;
तुझ अभागे को स्वर्ग में पहुँचाने को... जान अपनी दी;
उसको सारे दिल से भजले... कामों को उसके न भूल...तू

2.प्रेम बिना बैचैन था तू... और परदेशी;
पिता की नाई यीशु ने आके... ढ़ाढस तुझ को दी;
अपने आपको दे दे तू उसको,... कामों को उसके न भूल...तू

3.अन्न और वस्त्र दिया है तुझ को... आशीषें स्वर्ग की;
स्वर्गीय पिता का वायदा है सच्चा... बेटों के लिये ही;
स्तुति हो मन में प्रेम के लिये... कामों को उसके न भूल...तू

4.गतसमनी की प्रार्थना को... क्या कभी जाना ?
कल्पना को यीशुजी की... क्या कभी समझा ?
प्रेम हो दिल में यीशुजी का... कामों को उसके न भूल...तू,
225 आनन्द है, आनन्द है, आनन्द सेaanand hai, aanand hai, aanand se
‘‘हे छोटे झुण्ड, मत डर ।’’
(लूका 12:32)

आनन्द है, आनन्द है, आनन्द से मैं स्तुति करुँ;
ख्रिस्त प्रभु ने लाया मुझे अपने छोटे झुण्ड में ।।

1.भयंकर पापी मैं था, मार्ग से भटका भी था;
चरवाहा यीशु, दया दिखा के, मार्ग में ले चला ।

2.अक्षय और निर्मल मीरास, उसी ने मुझे दी है;
अविनाशी और अजर अधिकार, त्राता यीशु दिया ।

3.हे छोटे झुण्ड प्रभु के, तुम्हें अब क्या डर है ?
दया, कृपा से राज्य देने को, पिता को भाया है ।

4.स्वर्गीय राज्य देने, मुझ कीड़े को चुन लिया;
इस लिए प्रभु ने स्वर्ग से आकर, प्राण बलिदान किया ।

5.हे प्रभु, तेरा विचार मुझे बड़ा प्रिय है;
कैसा वह अद्भुत, गम्भीर और अगम्य, वर्णन से बाहर है ।

6.एकलौता पुत्र यीशु, पिता ने दे दिया;
रख न छोडेगा कोई वस्तु भी, राज्य के साथ देगा ।

7.महिमित राज्य के लिए, यीशु बुलाता है;
राज्य के योग्य चाल तुम चल के, जीवन अब बिताओ ।

8.राजाओं का राजा वह है, प्रभुओं का प्रभु भी है;
स्वर्गीय दूत और इस जग के लोग सब, गाओ तुम हल्लेलूयाह ।
226 आनन्द, आनन्द, आनन्द हैaanand, aanand, aanand hai
‘‘वह उछलकर खड़ा हो गया,... और परमेश्वर की स्तुति
करता हुआ उनके साथ मन्दिर में गया ।’’ (प्रेरितों 3:8)

आनन्द, आनन्द, आनन्द है, आनन्द, आनन्द है ।।

1.मेरा प्रिय यीशु महान उद्धार देने क्रूस पर बलि हुआ है ।

2.मेरा प्रिय यीशु पाप के बिछौने से मुझ को उठाया  है ।

3.मेरा प्रिय यीशु अपने लोहू से मुझे प्रेम से धोया है ।

4.मेरा प्रिय यीशु बप्तिस्मा में हमें साथ बन्धाया है ।

5.मेरा प्रिय यीशु धार्मिकता का वस्त्र मुझको पहिनाया है ।

6.मेरा प्रिय यीशु महान उद्धार देता निश्चिन्त क्यों रहूँ मैं ।

7.मेरा प्रिय यीशु स्तुति के योग्य है, हल्लेलूयाह गाऊँगा मैं ।
227 तेरे सेव वृक्ष की छाया में मैंtere sev vrksh kee chhaaya mein main
‘‘उसकी छाया में हर्षित होकर बैठ गई ।’’
(श्रेष्ठ गीत 2:3)

तेरे सेव वृक्ष की छाया में मैं, अब आनन्द से परिपूर्ण हो गया;
कीलों से धायल जो हाथ तेरे, उसी प्रेमी हाथ से सम्भाला प्रभु ।।

1.मेरे हृदय के द्वारकों खोलो कहकर,
बहुत दिन तू ओस में खड़ा रहा;(2)
सिर तेरा बूँदों से भिगा था,(2) मुझे बचाने के लिए धीरज धरा ।

2.हे ! प्रिय मेरे तू अति सुन्दर,
गोरा और अति प्रीतम है;
दुःखी पुरुष हुआ तू मेरे लिये, मनोहरता अपनी देने के लिए ।

3.तेरे फूल की मधुर सुगन्ध ने,
मेरे गन्दे दिल को भर दिया;
दाखरस की धाराओं से भी बढ़कर, तेरा प्रेम तो अति स्वादिष्ट है ।

4.पर्वत की चोटी से पार होकर,
देखो वह चला आ रहा है;
अपने मन के द्वार को खोल कर मैं, अपने प्रिय के लिए बाट जोहूँ ।

5.तेरे भोज के घर में ला करके,
राजा और याजकों से मिलाया;
जीवन की रोटी मुझे देकर, स्वर्गीय गीतोें को सिखाया प्रभु ।
228 प्रभु यीशु में आनन्दprabhu yeeshu mein aanand
‘‘दाऊद सब कुछ वापस लौटा लाया ।’’
(1 शमूएल 30:19)

1.प्रभु यीशु में आनन्द हम करते हैं,
सब कुछ उसके नाम से वापस पाते है;
जो कुछ आदम ने अदन में खोया था, हम को यीशु में मिल गया ।
घटी हानि हमें जो हुई थी, प्रभु यीशु में वह हम ने पाई;
गातें रहेंगे आनन्दित होकर, हल्लेलूयाह, सारे जीवन भर ।।

2.दाऊद के समान सब हम ने खोया था,
दुःखित होकर हम ने रोदन किया था;
प्रार्थना में जब हम ने उसे खोजा, फिर से यीशु में पा लिया ।

3.इस से पूर्व प्रभु से एकता नहीं थी,
जीवन में हमारे कंगाली थी;
अपने आपको जब हमने किया खाली, फिर से सब भरपूरी पा ली ।

4.प्रथम प्रेम प्रभु के लिए नहीं था,
मैं संसार के प्रेम में जकड़ा हुआ था;
साहस, प्रेम और सामर्थ सब जो खोया था, प्रभु यीशु में पा लिया ।

5.एक समय पापों में मरा हुआ था,
जीवन अपना मैंने खोया हुआ था;
मैं पिता के घर से भटका हुआ था, यीशु में वापस आ गया ।

6.आशा रहित पहले प्रभु से मैं था,
मैं नरक की ओर भी जा रहा था;
प्रभु यीशु को जब मैंने अपनाया, आनन्द पूर्वक प्रायश्चित पाया ।

7.पापों के द्वारा जो हानि हुई थी,
प्रभु यीशु में वह हम ने पाई;
पाप की गठरी भारी जो हमारी थी, प्रभु यीशु ने उठाई ।
229 भजो मीठा नाम, प्रभु यीशु नामbhajo meetha naam, prabhu yeeshu naam
‘‘उसका फल मुझे खाने में मीठा लगा ।’’ (श्रेष्ठ गीत 2:3)

भजो मीठा नाम, प्रभु यीशु नाम;
प्यारे प्रभु यीशु का करो आदरमान;
भजो मीठा नाम ।।

1.महिमा अपनी छोड़के आया जग में,
जन्म उसने पाया कुँवारी मरियम से;
गरीब बनके रहा सारे जीवन में,
मेरी जान का प्यारा प्रभु यीशु है ।... आ...आ...आ...

2.पाप और श्राप के सारे धृणित रोगों को,
दिल के गन्दें दागों को मिटाने को;
यीशु ने बलिदान किया अपने को,
मेरी जान का प्यारा प्रभु यीशु है ।... आ...आ...आ...

3.पाप और श्राप और दुष्ट की सारी चालों पर,
देता है विजय वह, माँगो उस से वर;
हृदय में वह शान्ति देता सरासर,
मेरी जान का प्यारा प्रभु यीशु है ।... आ...आ...आ...

4.आएगा फिर से अपने लोगों के लिए,
अपने साथ आसमान पर ले जाने के लिए;
आनन्द, हर्ष पिता का देने के लिए,
मेरी जान का प्यारा प्रभु यीशु है ।... आ...आ...आ...

5.जय जय जय जय मिलके गाओ भाईयों,
खुशी का समाचार सबको जाके दो;
हो जाओ तैयार सब उस से मिलने को,
मेरी जान का प्यारा प्रभु यीशु है ।... आ...आ...आ... ,
230 आओ प्यारो शरण मसीह कीaao pyaaro sharan maseeh kee
‘‘यह परमेश्वर सदा सर्वदा हमारा परमेश्वर है ।’’
      (भजन 48:14)

आओ प्यारो शरण मसीह की,(2)
वही हमारा परमेश्वर है ।।(2)

1.वही सब का सृजनहारा... पालनहारा, तारणहारा;
स्वर्ग, भूलोक, पाताल के प्रभु... वही हमारा परमेश्वर है ।

2.आत्मा, प्रेम, दया, पवित्र... शक्ति, जीवन, ज्योति, शान्ति;
और भी गुण, महिमा दिखलाते... वही हमारा परमेश्वर है ।

3.स्वर्ग में महिमा इच्छा पूर्ण... होवे इस भूलोक के अन्दर;
सीस नवाएँ, जय ललकारें... वही हमारा परमेश्वर है ।

4.दीन के बन्धु, हीन के सिंधु... हर के प्रभु, लाचार के प्रेमी;
महिमा, शान्ति, बुद्धि से बाहर...  वही हमारा परमेश्वर है ।
231 दर्शन को आए हैं पिताजीdarshan ko aae hain pitaajee
‘‘हम उसको प्रणाम करने आए है ।’’
(मत्ती 2:2)

1.दर्शन को आए हैं पिताजी... बिनती हमारी यह सुन लो;
हम सीस नवाए खड़े है... महिमा अपनी दिखा दो ।
भजो नाम, यीशु नाम, नाम है मधुर यीशु नाम;
जय जय जय प्रभु जय हो;
जय हो, जय हो, जय प्रभु जय जय हो,
जय जय जय प्रभु जय हो ।

2.यीशु नाम से मिलती है माफी... वह कुल दुनिया का है शाफी;
जपो नाम उसी का भाई... वह करता दिल की सफाई ।

3.यीशु नाम है देता रिहाई... आओ देवें उसकी दुहाई;
शैतान की सब चालों पर... जय हम ने उसी से है पाई ।

4.यीशु नाम हमारे संग है... दुश्मन हमारा तंग है;
यहोवा की यह जंग है...  शैतान की फौजें दंग हैं ।

5.आओ आपे को अपने नकारो... और क्रूस को अपने उठाओ;
तुम दुनिया पर जय पाओ... और अन्त समय फल पाओ ।
232 स्तुति ईश्वर की हम करेंstuti eeshvar kee ham karen
‘‘यहाँ तक यहोवा ने हमारी सहायता की... है ।’’
(1 शमूएल 7:12)

स्तुति ईश्वर की हम करें... बीते वर्ष में सम्भाला हमें;
पास न आयी बुराई कोई,
कई हानियों से है बचाया हमें । आओ, स्तुति ईश्वर की हम...

1.लाखों-करोड़ों गुजर गये हैं... प्राण हमारे जतन है किया;
भार हमारे दूर है किया,
इस जग में जीवित हम को रखा ।...आओ

2.की हैं हमने कितनी बुराईयाँ... बदले में आशीष ही दिया;
रक्षा हमारी हमेशा किया,
प्रभु प्रेम से हम को सम्भाले रहा ।...आओ

3.कितनी भलाइयाँ प्रभु ने की हैं... हर्षित हो मिलकर गाएँ
जीवित बलिदान शरीरों का,
प्रभु यीशु को अर्पण हम करें ।...आओ

4.आरम्भ में इस नुतन वर्ष के... आराधना एक होके करें;
अनुग्रह से प्रभु यीशु के,
हम जीवन भर उसे भजते रहें ।...आओ

5.मुक्त हम होवे माया मोह से... शैतान के सब फन्दों से;
राज्य हम पर प्रभु ही करें,
ताकि आत्मा से भरके सेवा करें ।...आओ

6.छाए में अपने हमको छिपाएगा... हर वर्ष हमारी सुधि लेगा;
यात्रा में जब तक हम रहते,
प्रभु साथ रहकर हमें ढ़ाढस देगा ।...आओ

7.हर तरह की आशीष पाई... आओ प्रभुको दण्डवत करें;
हर रुकावट दूर करके,
सदा प्रेम से प्रभु के साथ हम रहें ।...आओ,
233 प्रभु -- वर्ष पर तूprabhu -- varsh par too
‘‘देखो मैं जगत के अन्त तक सदैव तुम्हारे संग हूँ ।’’
(मत्ती 28:20)

प्रभु -- वर्ष पर तू -- भलाई मुकुट -- धर दिया है,
प्रभु -- तेरे मार्गो में -- उत्तम पदार्थ भी -- पाये जाते है ।।

1.तेरे ऊपर -- दृष्टि रखकर,
तुझको सम्मति--दिया करूँगा--महान प्रभु तू कहा ।

2.सदा तेरे -- साथ रहूँगा,
कहा मेरे -- प्रभु यीशुने -- अभय मुझ को दिया ।

3.तेरे सिर के -- बाल पकने तक,
तुझ को उठाए -- मैं रहूँगा -- सम्भालूँगा तू कहा ।

4.प्रेम किया तुझ से -- सनातन प्रेम से,
नाम ले बुलाया -- तू मेरा है -- प्रेमी प्रभु तू कहा ।

5.मेरा चरवाहा -- प्रभु मेरा,
जीवन जल के -- पास ले चलता -- ले चलूँगा, कहा ।

6.सब बातों में -- परखा गया,
लहु बहाया -- प्राण है दिया -- रक्षक मेरा हुआ ।

7.महिमा हो तेरी -- यीशु प्यारे,
नाम को तेरे -- गाऊँ सदा मैं -- हल्लेलूयाह, आमीन ।
234 स्तुति हो स्तुति प्रभुstuti ho stuti prabhu
‘‘अपनी भलाई से भरे वर्ष पर तूने मानो मुकुट धर दिया है ।’’
      (भजन 65:11)

स्तुति हो स्तुति प्रभु, आ आ
तेरी स्तुति हो स्तुति प्रभु;
पुतली की नाई बीते वर्ष में तू,
मित्र सा मुझ को सम्भाला तू, स्तुति हो स्तुति प्रभु ।

1.कितनी बड़ी विपत्ति, मेरे डेरे के निकट आए तौभी;
पास मेरे वह न आएगी कभी, सम्भाला मुझ को तू ही ।
स्तुति हो स्तुति प्रभु ।

2.जब भी कभी मैं गिरा, हर समय मुझ को उठाया;
पूरे वर्ष में सम्भाला मुझे तू, सम्भालेगा नये वर्ष में भी तू ।

3.आनन्द ही आनन्द है, आरम्भ में इस नये वर्ष के;
उद्धार करने तू आया जगत में, आएगा फिर से प्रभु तू ।

4.नूतन वर्ष में मेरी, जरुरतें तू, जानता सारी;
कृपा मुझ पर प्रभु सदा है तेरी, अद्भुत तू ही है प्रभु ।

5.संसार में जब तक मैं हूँ, तेरे आनन्द से भरपूर रहूँ;
साथ तेरे रहूँ, पीछे तेरे चलूँ, प्रेमानुग्रहकारी तू है प्रभु ।

6.रहूँ मैं जिस देश में, देखूँ प्रभु निर्दोष उसे मैं;
होशन्ना सब के साथ गाऊँ प्रभु मैं, दासों को अपनी कृपा दे तू ।

7.हल्लेलूयाह मैं गाऊँ, सदा सन्तों के साथ मैं हर्षित रहूँ;
सुसमाचार चारों तरफ फैलाऊँ, ऐसी ही आशीष मुझे दे तू ।
235 स्तुति, प्रशंसा करें, प्रभुstuti, prashansa karen, prabhu
‘‘मैं यहोवा की सारी करुणा के विषय सदा गाता रहूँगा ।’’
      (भजन 89:1)

स्तुति, प्रशंसा करें, प्रभु यीशु की, आज तक है सम्भाला हमें ।।

1.बीतें दिनों में हमें सम्भाला, बहुतायत से सब कुछ दिया;
अपने जनों को इकट्ठा किया, साथ मिलकर गायेंगे हम ।

2.शुभ समाचार प्रजा को दिया, पृथ्वी पर शत्रु का काम रोका;
वचन जो माना, अलग किया, साथ मिलकर गायेंगे हम ।

3.कलीसिया सन्तों की बनाया, सत्य का मर्म है सिखाया;
सच्ची गवाही स्थापित किया, साथ मिलकर गायेंगे हम ।

4.बहुतेरे सेवक है दिया, रक्षा प्रभु हमारी किया;
सहकर्मी हम को है किया, साथ मिलकर गायेंगे हम ।

5.भारत देश के इस नगर को, अन्ताकिया समान बनाया;
भागीदार अपना बनाया, साथ मिलकर गायेंगे हम ।

6.स्वर्गीय दर्शन हम को दिया, दीन बनाकर वश में किया;
हाथ लेकर हमें चलाया, साथ मिलकर गायेंगे हम ।

7.कलीसिया का मर्म दिखाया, शीध्र शुभ वार्ता फैलाया;
कई पापियों को बचाया, साथ मिलकर गायेंगे हम ।
236 यहोवा का आनन्द हीyahova ka aanand hee
‘‘यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है ।’’ (नहेमायाह 8:10)

यहोवा का आनन्द ही दृढ़ गढ़ तुम्हारा है;
यही वह दिन, आनन्द का दिन, भक्तजनों यही शुभदिन है ।।

1.सींची हुई तू बारी होगा -- जलभरा सोता तू बनेगा ।

2.यहोवा तुझको तृप्त करेगा -- हड्डियों में वह बल भरेगा ।

3.स्वर्ग में तेरा नाम है लिखा -- यही है कारण आनन्द का ।

4.यहोवा मूल है तेरे सुख का -- मनोरथ तेरा करता पूरा ।

5.ईश्वर की इच्छा करें पूरी -- प्रसन्नता है इस में खरी ।

6.तेरे आनन्द के सारे सोते -- प्रभु यीशु में ही पाये जाते ।

7.माँगो तो आज ही प्रभु देगा -- आनन्द तेरा पूरा होगा ।

8.प्रभु ही मुझ को ले चलेगा -- जीवन के जल से पिलाएगा ।

9.परमेश्वर तेरा पिता होगा -- आँखो से सब आँसु पोंछेगा ।
237 आज के दिन सेaaj ke din se
‘‘आज के दिन से मैं तुम को आशीषें देता रहूँगा ।’’
(हाग्गै 2:19)

आज के दिन से आशीष मैं दूँगा,
जाओं, आशीष में देता रहूँगा;
वचन है प्रभु तेरा सच्चा ।।

1.मेरे मन्दिर की पिछली महिमा का,
तेज पहिली महिमा से बढ़कर होगा;
इस स्थान में मैं शान्ति दूँगा, वचन है अद्भुत प्रभु तेरा ।

2.अन्य-जातियों को कंपकंपाऊँगा, मनभावनी वस्तुएँ ले आऊँगा;
चाँदी और सोना, सब कुछ है मेरा, बहुतायत से मैं यह सब दूँगा ।

3.जैसे प्रभु तू आज्ञा दिया था, वैसे ही मन्दिर की नेव डाला;
नौवेें महिने के चौविसवें दिन को, लोगों को तू ने वचन दिया ।

4.इब्राहीम तेरी प्रतिज्ञा पाया, आज्ञा का पूरा पालन किया;
हेब्रोन में वह डेरा तब डाला, प्रभु यहोवा की वेदी बनाया ।

5.कालेब तेरी आज्ञा अनुसार, सम्पूर्ण मन से चलता रहा;
हेब्रोन को उसे मीरास में दिया, आशीष का दाता तू ही हुआ ।

6.दाऊद राजा तेरे पास आया, और नम्र मन से बिनती किया;
हेब्रोन को जा, तू ने बताया, महिमा प्रभु तेरी हो सदा ।

7.सभी सिवानों को तू बढ़ाया, प्रेम प्रभु अपना प्रगट किया;
अपनी शक्ति को तू है दिखाया, हल्लेलूयाह, यीशु को सदा ।
238 यहोवा ने कैसे काम बड़ेyahova ne kaise kaam bade
‘‘यहोवा ने हमारे साथ बड़े-बड़े काम किए है ।’’
      (भजन 126:3)

यहोवा ने कैसे काम बड़े किए हैं,
इसलिए हम सब आनन्द से गाएँगे ।।

1.यह वो दिन है प्रभु ने जो ठहराया,
हमारी दृष्टि में कैसा अद्भुत है;
आओ हम गाएँ और आनन्द करें... सर्वदा आनन्द करें ।

2.जब मेरे दासों ने तुझको पुकारा,
प्रभु ने ये स्थान उनको है दिया;
आओ एक हो कर महिमा अब करें... और हम प्रचार करें ।

3.याकूब में कोई अन्याय की बातें भी,
इस्राएल में कोई अनर्थ है नहीं;
प्रभु ने कुछ भी दोष नहीं पाया... आओ उसकी स्तुति करें ।

4.प्रभु यीशु है कोने का पत्थर,
नबियों के द्वारा प्रचार हुआ;
उस पर हम सभी बनाए गए हैं... मुक्ति अब प्रगट करें ।

5.हर एक घर जो उस में है बना,
एक साथ बनाए गए हैं हम सब;
यह घर उस का खूब सुन्दर है... स्तुति और सेवा करें ।

6.प्रभु मसीह में एक पवित्र मन्दिर,
हम सब मिलकर उसमें बनें है;
इस जग में हम उसके अब घर हैं... आओ हम दण्डवत करें ।

7.महिमा के प्रभु अब आदर हो तेरा,
तू ने यह सब कुछ उत्तम है किया;
स्तुति महिमा, हल्लेलूयाह,... तुझी को सर्वदा हो ।
239 यहोवा ने हमारे साथyahova ne hamaare saath
‘‘यहोवा ने हमारे साथ बड़े काम किये है ।’’
      (भजन 126:3)

यहोवा ने हमारे साथ महान काम किये हैं,
जाति जातियों के बीच में यह बात अब कही जाती है ।।

1.यहोवा ने हमारे साथ महान काम किये है,
इस से हम सब आनन्दित है, कि सहकर्मी बनाया हमें ।

2.प्रारंभ के दिन के कामों को, बिगाड़नेवाला है कौन अब ?
छोटे से छोटा होगा हजार, परमेश्वर काम करेगा जब ।

3.प्रभु का सन्देश फैलाते समय, बहुत कुछ सहा है हम ने;
प्रभु का वचन फैल गया, फैलाया कृपा से हम ने ।

4.गलतियाँ बहुत की हम ने, प्रभु क्षमा किया कृपा से;
शत्रु का मन्त्र और भावी कहना, इस्राएल में चल न सके ।

5.भूमि के घास की ओस समान, विजय प्रभु हम को दिया है;
समुद्र में भी सूखी भूमि, समान हमको चलाया है ।

6.पहली दशा से बढ़कर हमारी, अन्तदशा महिमित होगी;
इस भवन की महिमा भी पहली, महिमा से बढकर होगी ।

7.महिमा, भक्ति और आदर से, आभारी स्तुति गीतों से;
सिंहासन पर बैठे हुये, सिय्योन के राजा को हल्लेलूयाह ।
240 प्रभु महान कार्य किया हैprabhu mahaan kaary kiya hai
‘‘हे मेरे मन यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी
उपकार को न भूलना ।’’       (भजन 103:2)

प्रभु महान कार्य किया है, हम मिल के प्रशंसा करे;
प्रभु अनुग्रह वर्षा बरसाया है, स्तुति हम गाएँ ।।
आहा ! स्तुति हो, स्तुति प्रभु,
अब तक है सम्भाला हमें;
सेवा करें योग्य बन के ।

1.प्रभु के काम लोगों के मध्य में आओ प्रसिद्ध करें,
यहोवा के आश्चर्य काम हम घ्यान करके गाएँ ।

2.संगीत और गीतों के साथ हम प्रभु की स्तुति करें,
सितार वीणा बजाकर ऊँचे स्वर से गाएँ ।

3.यहोवा ने है भार हमारे दूर किसे हम से,
महान इस काम के कारण निशदिन उसको गाएँ ।

4.नूतन अद्भुत काम करता है प्रभु आश्चर्यकारी है,
प्रतापी काम वही करता है, धीर धर के गाएँ ।

5.प्रेम, सौंदर्य, पवित्र है रक्षक परमेश्वर में;
महिमा, ऐश्वर्य गुण प्रभु के, जग में हम गाएँ ।

6.वायदे पूरे किये कितने, किया अनुभव हमने;
आदर, महिमा, स्तुति प्रभु को, हल्लेलूयाह आमीन ।
241 यहोवा ने हम लोगों काyahova ne ham logon ka
‘‘जितना उपकार यहोवा ने हम लोगों का किया है ।’’
(यशायाह 63:7)

यहोवा ने हम लोगों का जितना उपकार किया है,
करुणा भलाई सब उसकी, याद कर उसको भजते है ।।

1.हम हैं उसकी प्रजा, और सन्तान भी है,
क्रूस की मृत्यु के द्वारा से हम को,
अपना जीवन दिया है, कैसा अद्भुत त्राता है ।

2.जो कुछ हम ने मांगा था, बढ़कर हमें दिया है,
अपनी वाचा पूरी की उसने,
वचन भी पूरा किया है, न बदलने वाला है ।

3.संकट दुःख में गए जब, वह भी दुःख उठाया,
प्रेम कोमलता कर के प्रभु ने,
सदा हमें लिए फिरा, अब भी साथ वही रहता है ।

4.कई बार हम सब गिरे थे, प्रभु का दिल दुःखाया,
तिस पर हम को तू ने सम्भाला,
और क्षमा तू ने किया, प्रेमी अद्भुत पिता है ।

5.अब हमारा ऊँचा गढ़ और हमारी है ढाल,
हम सब तुझ पर भरोसा रखते,
सब कुछ तू हमारा है, हम सदा तेरे है ।
242 तुम याद करो सब भक्तोtum yaad karo sab bhakto
‘‘उसने जो कुछ किया सब अच्छा किया है ।’’ (मरकुस 7:37)

तुम याद करो सब भक्तो, प्रभु ने क्या-क्या किया;
मांगने से बढ़कर समझ से बाहर, सब कुछ उत्तम है किया ।।

1.यीशु हमारा शिरोमणी है, और कैसा प्रतापी;
उसके हाथ से सब कुछ पाया, दया का धनी वह हुआ ।

2.आँधी तूफान को रोक दिया वह, बाधा सब जो हटाया;
दुःख के समय वह साथ दिया जो, जयवन्त वही है हुआ ।

3.जीवन सोता उसने बहाया, देखो सारे जगत में;
अनगिनित आत्मा प्रभु ने बचाया, धन्य-धन्य वह हुआ ।

4.प्रेरित नबी, सुवार्तिक और, पालक, शिक्षक दिया;
मण्डली प्रभु की बनती गई जो, स्थिरता भी वह लाया ।

5.पक्ष में हमारे लडता रहा वह, शैतान को हराया;
आज तक हमको उसने सम्भाला, काम बड़ा है किया ।

6.जब तक जीवन है हमारा, जीएँ प्रभु के लिए,
आओ करें अर्पण अपने को, यही आज्ञा वह दिया ।

7.चलते हैं राहों में उसकी, वही निशान है हमारा;
थोडा समय अब बाकी रहा है, मिलने प्रभु से दिन आया ।
243 आओ भक्त लोगों हमaao bhakt logon ham
(इब्रानियों 2:18, 7:25, यहूदा 24 पद)

आओ भक्त लोगों हम सब मिलकर,
नित्य यीशु की स्तुति करेंगे ।।

1.बीते दिनों में प्यारे यीशु ने, आशीषें दी हैं भरपूरी से;
नवीनता से, हम को उसने, (2) स्तुति करें यीशु की; (2)
नूतन अनुभवों से आनन्द से सर्वशक्तिमान की ।

2.शक्तिमान है हमारा प्रभुजी, नित्य अगुवाई वह देता है;
रक्षा करता है हमारी, (2) चरवाही वह करता है; (2)
सच्चा वो प्रभु है हमारा, वचन से कभी न मुड़ता ।

3.परीक्षा कितनी इस जग में रहे, वही छुटकारा देगा हमें;
परीक्षा हुई थी यीशु की, (2) सहायता वही करेगा; (2)
आँखों की पुतली समान वह, रक्षा हमारी करेगा ।

4.सामर्थी है हमारा यीशु जी, ठोकरों से बचाता वह है;
निर्दोष करके हमें प्रभु जी, (2) खड़ा वही करता है; (2)
स्मरण करो अनुग्रह को, कभी हमें न छोड़ेगा ।

5.दबे हुये निराशा में तुम जो, विभेद जो करता उस शत्रु पर;
विजय प्रगट तुम अब करो, (2) जय हो, जय हो प्रभु की; (2)
युगानुयुग प्रभु की, हल्लेल्ूयाह गीतों से ।
244 साष्टांग प्रणाम करकेsaashtaang pranaam karake
‘‘उन्होंने,... मुँह के बल गिरकर उसे प्रणाम किया ।’’
(मत्ती 2:11)

साष्टांग प्रणाम करके भजें हम,
सत्य और आत्मा से प्रभु यीशु को ।।

1.दूतों ने स्तुतिगीत गाया देखो, स्वर्ग में महिमा परमेश्वर को;
शान्ति हो भू पर भक्तजनों को, पावन यीशु को आओ भजें हम ।

2.चरवाहोंने चरणी में देखा, चरवाहा यीशु प्रमुख सभों का;
सन्देश सुनाया सब को खुशी का, आओ आनन्द से उस को भजें हम ।

3.ज्योतिषियों ने देखा तारा, आये देखने बालक न्यारा;
सोना, लोबान, गंधरस भेंट निहसारा, आओ राजा को अपने भजें हम ।

4.मरियम ने प्रभु अनुग्रह पाया, प्रभु दर्शन पा प्रणाम किया;
प्रभु यीशु ख््िराष्ट है पुत्र पवित्र का, पूरे दिल से उसको भजें हम ।

5.शमौन धर्मी भक्त पुरुष था, देखा उसने जग का त्राता;
निर्मल ज्योति, निर्मल महिमा, आओ सन्तों, उसको भजें हम ।

6.हन्नाह विधवा ने प्रभु को देखा, छुटकारा यही प्यासे जनों का;
विश्वासी और सन्तगणों का, आओ जग में उसको भजें हम ।

7.प्रभु यीशु ही स्तुति के योग्य है, राजाओं का राजा, प्रभुओं का प्रभु है;
राज्य दिया हमें राजा बनाया, विजयी यीशु की स्तुति करें हम ।
245 यीशु सुलीवाला हैyeeshu suleevaala hai
‘‘परमेश्वर का पुत्र,... उसकी महिमा का प्रकाश ।’’
(इब्रानियों 1:3)

यीशु सुलीवाला है, सोने मुखडेवाला है,
नुरी चोगेवाला है, यीशु सुलीवाला है ।।

1.मरियम पास फिरिश्ता आया, आ के उसने सलाम किया,
सिर मरियम ने झुका दिया ।...यीशु सुलीवाला

2.मरियम देख फिरिश्ता डर गई, क्षण में अनुग्रह से भर गई,
पवित्रात्मा पा लिया ।

3.बैतलहेम में आया तू, चरणी में था सोया तू,
यीशु नाम रखा लिया ।

4.दुनिया में था आया तू, आके ज्योति लाया तू,
मेरा दीप जला दिया ।

5.पाँच रोटी दो मछली ले के, उन पर तू ने आशीष चाह के,
पाँच हजार खिला दिया ।

6.लाजर था जो कबर में मुर्दा, कबर पे उस की जाके तू रोया,
दे आवाज जिला दिया ।

7.द्वार तेरे पे आया जो, मुड खाली न गया वह,
जो मांगा सो पा लिया ।
246 महाराजा यीशु तेरी होवे जयmahaaraaja yeeshu teree hove jay
‘‘ हे प्रभु तू ही योग्य है ।’’ (प्रकाशित 4:11)

महाराजा यीशु तेरी होवे जय - जयकारी,(2)
होवे जय - जयकारी तेरी होवे जय - जयकारी ।।(2)

1.अपने जन्म की खातिर तू ने चुन ली मरियम कुंवारी,(2)
पापिन कारण तू नेे यीशु स्वर्ग से देह है धारी ।(2)

2.क्रूस के ऊपर संकट सह के देखी मौत नियारी,
जान देके यीशु आशा पूरी की हमारी ।

3.गठरी थी गुनाह की भारी यीशु जी ने उतारी,
हमारा कर्जा आप चुकाकर चढ़ गया स्वर्ग अपारी ।

4.यीशु कहता रुह में कर जो तौबा, नर और नारी;
माफी का यह वक्त है प्यारा रुह-उल-कुद्स है जारी ।
247 सुनते हैं हम तेरी आवाजsunate hain ham teree aavaaj
‘‘बादल में से यह शब्द निकला... इसकी सुनो । उन्होंने ...
यीशु को छोड़ और किसी को न देखा ।’’ (मत्ती 17:5, 8)

सुनते हैं हम तेरी आवाज, ताकतें हैं हम तेरे रुप को;
प्यारे यीशु तेरे सिवाय, न सुनते न देखते और किसी को ।।

1.भक्ति का भेद जो बड़ा गम्भीर है,
ईश्वर तू शरीर में प्रगट हुआ है;
दूतो ने देखा, प्रचार हुआ, जग विश्वास किया, महिमा हो तुझी को ।

2.दूतो ने कहा, डरना नहीं तुम,
बड़े आनन्द का समाचार सुनाऊँ;
उद्धारकर्ता जन्मा मसीह, आकाश में महिमा, मनुष्यों में शान्ति हो ।

3.मनुष्य के रुप में ईश्वर तू ही है,
इसलिए अद्भुत कार्य किया है;
आज तक कोई कर न सका, अद्भुत है तू ही तो आदर तुझी को ।

4.अन्धों को आँखे, गूंगों को बोली,
लंगडों को टांगें, शुद्ध हुए कोढी;
मृतकों को जीवन दिया, बड़ा प्रतापी, सब गौरव तुझी को ।

5.अपनी इच्छा से, तू ने प्राण दिया;
इच्छा से अपनी, फिर वापस लिया;
कब्र तुझ को, रख न सकी; मृत्यु के डंक को, अब तोडा तू ही तो ।

6.जी उठा तू ही, स्वर्ग को गया भी;
वापस तू आता, लेने हमें भी;
आनन्द करते, जागते रहते; आशा है मन में, अब स्तुति तेरी हो ।
248 चरनी में चमका चमकीलाcharanee mein chamaka chamakeela
‘‘याकुब में से एक तारा उदय होगा ।’’
(गिनती 24:17)

चरनी में चमका चमकीला सितारा,
यीशु जब पैदा हुआ ।
सब से गरीब जो चरनी में सोता,
बालक मरियम का बच्चा आज पैदा हुआ ।

1.कहा जिब्राईलने ख्वाब में, ‘‘ऐ युसुफ,
मरियम को ला अपने घर में;
बच्चे का नाम तू यीशु रखना, देगा वही नजात ।’’(2)

2.बोले फिरिश्ते चौपानों से उस रात,
एक पैगाम आसमान से लाए;
‘‘बेतलहम में आया मुंजी, जाओ देखने को ।’’

3.मरियम की गोद में था छोटा यीशु,
सिजदा करने आया मजूसी;
साथ में अपने लाए डिब्बे, सोना, मुर, लोबान ।

4.जैसे कहा था यशायाह नबी ने,
नवें बाब की छट्ठी आयत में;
‘‘है मसीह प्रभु सामर्थी, राजा सुलह का ।’’

5.आओ बच्चों, खुशी मनाएँ;
यीशुजी से मिलने जाएँ,
उस को पूजे जो है राजा, सारी दुनियाँ का ।
249 बेथलेहैम के ऐ छोटे कस्बेbethalehaim ke ai chhote kasbe
‘‘जो लोग अन्धकार में बैठे थे उन्होंने बड़ी ज्योति देखी ।’’
(मत्ती 4:16)

बेथलेहैम के ऐ छोटे कस्बे, खामोश और सुनसान होते देखा;
अन्धेरी गलियों में तेरी, लेकिन, जलाल-ए-अबदी चमकते देखा ।।

1.सुबह के तारे यह कह रहे थे, कि यीशु जब तू जमीन पर आया;
तमाम आलम को खुरम्मी और, खुशी से लबरेज होते देखा ।

2.तू बादशाहत-ए-आसमान से, जमीन पर आया हकीम बनकर;
हर एक इन्सान के दर्द औ गम को, लम्हें में मादुम होते देखा ।

3.दिली तमन्ना है यह हमारी, कि हम से मर्जी हो पूरी तेरी;
कि जिस तरह इन्तिजाम रब्ब का, तेरी विलादत में होते देखा ।

4.अजब खामोशी के चन्द लम्हों में, खुदा की बख्सीश आती हुयी है;
दिलों में दाखिल उसी तरह पर, यीशु मसीह को भी होते देखा ।

5.गुजर गई है शब्ब तारीकों की, चमक उठा नूर आसमान का;
फिर एक दफा हम ने आसमान से, यीशु मसीह को आते देखा ।
250 अब आओ विश्वासियोंab aao vishvaasiyon
‘‘उस बालक को ... देखा, और मुँह के बल गिरकर
उसे प्रणाम किया ।’’ (मत्ती 2:11)

1.अब आओ विश्वासियों, जय जय करते गाओ;
अब आओ हम चलें बैथलहैम को,
चरनी में देखो महिमा का राजा ।
अब आओ हम सराहें, अब आओ हम सराहें;
अब आओ हम सराहें, ख्रिस्त यीशु को ।

2.वह ईश्वर से ईश्वर, ज्योत का ज्योत सनातन;
धिन उसने न किया, गर्भ कुंवारी से;
सच्चा परमेश्वर, न सृजा, पर जन्मा ।

3.हे सारे दूतगणों, जय-जयकार तुम करो;
हाँ स्वर्गो के स्वर्ग में तुम गाते रहो,
महिमा और स्तुति सर्वप्रधान को ।

4.आमीन ! प्रभु धन्य हो, त्राण के लिए जन्मा;
हेे यीशु, हो तेरी अनन्त महिमा,
पिता का वचन अब देहधारी हुआ ।
251 सुनो ! दूतगण गातें हैsuno ! dootagan gaaten hai
‘‘आकाश में परमेश्वर की महिमा और मनुष्यों में शान्ति हो ।’’
(लूका 2:14)

1.सुनो ! दूतगण गातें है: ‘‘बालक राजा ख्रिस्त की जय,
जग में कुशल और मिलाप, ईश्वर क्षमा करता पाप ।’’
हे सब लोगों खुशी से, गाओ साथ इन दूतों के,
‘‘बेथलहैम में जन्मा है, ख्रिस्त जो सबका त्राता है ।’’
सुनो दूतगण गाते हैं: ‘‘बालक राजा ख्रिस्त की जय’’ ।।

2.दूतों से वह पूजित है, ख्रिस्त सनातन प्रभु है;
वह जो अद्भुत रीति से, जन्मा है कुंवारी से ।
यीशु ख्रिस्त इम्मानुएल, ने किया है हम से मेल;
ईश्वर ने देह धारण की, गाए जय हम यीशु की ।

3.सब का त्राता बना दीन, हम न रहे पाप-आधीन;
मानव के उठाने को, नया जन्म देने को ।
ले आया हमारे पास, जीवनज्योति, सुख की आस;
जय-जय शान्ति के प्रधान ! केवल तू ही है योग्य सम्मान ।
252 जीवन पथ की ज्योति तूjeevan path kee jyoti too
‘‘और वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्थान तक बाहर गया ।’’
(यूहन्ना 19:17)

जीवन पथ की ज्योति तू क्रूसधारी यीशु,
मह महिमा से तू भरपूर क्रूसधारी यीशु ।।

1.तू देहधारी हुआ है, अपना प्रेम दिखाया है;
दीनों को उठाया है, क्रूसधारी यीशु ।(2)

2.जीवन मार्ग तू ही है, और सत्य कहाया है;
अनन्त जीवन का दाता तू, पुनरुत्थान तू ही है ।

3.तू हुआ है बलिदान, देके क्रूस पर अपनी जान;
अनमोल रक्त से धोया है, क्रूसधारी यीशु ।

4.हम अयोग्य और लाचार, आये सब है तेरे द्वार;
महिमा हमसे तेरी हो, क्रूसधारी यीशु ।

5.कलवरी पथ के यात्री हम, गाते जय-जय तेरी हम;
तेरी हम्दसिताईश हो, क्रूसधारी यीशु ।
253 देख, जरा देख, तेरे लियेdekh, jara dekh, tere liye
‘‘वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया,
वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया ।’’
(यशायाह 53:5)

देख, जरा देख, तेरे लिये,
क्रूस पर लटका है प्रिय यीशु तारणहार ।।

1.धायल हुआ वह तेरे लिये, तिस पर भी उसने मुँह न खोला;
सिर से लोहू की धार बही, सारे बदन में वेदना थी;
छिदे जो थे पाँव उसके, बेधी पसली कुचल दिया, पाप जो तेरे ।

2.लोहू लुहान मुखडा जो था, लाली झलक वह क्रूस पर थी;
पीठ पर उसके हल चले, पाप तेरे उसको नम्र किया,
प्रभु का लोहु नाले की नाई, बहा जो था, तेरे लिये क्रूस पर ।

3.छिदे हाथ वह पसार के सारा दिन कहता ओ पापी !
आँसू बहे तेरे लिये, प्रेम से वह तुझ को निहारता है;
कृपा से वह, भेंट करेगा, पापी तुझे से, निकट तू आ, अभी तू आ ।

4.कब तक रुलाएगा उसे, बाहर खड़ा कब तक रहेगा वह;
हृदय-द्वार अब तू खोल, अभी पश्चाताप तू तो कर;
आज ही वही, पाप को तेरे, क्षमा कर के, तुझे देगा महान उद्धार ।
254 देखो, कलवरी पर यीशुdekho, kalavaree par yeeshu
‘‘और वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्थान तक बाहर गया ।’’
(यूहन्ना 19:17)

देखो, कलवरी पर यीशु देता अपना प्राण;
वेदना सहता वहाँ मेरा नाथ ।।

1.महिमा अपनी उसने त्यागी... क्रूर मृत्यु क्रूस पर उठाई;
मुझ पापी को बचाने को... मेरा प्यारा प्रभु हुआ घायल । ... देखो,

2.सुन्दरता अपनी उसने त्यागी... कि बच जाऊँ मैं पापी, अभागी;
निन्दा सहने पर, दुःख उठाने पर... मेरा यीशु सब में है सुन्दर ।

3.मुकुट काँटो का सिर पर धरके... क्रूस पर हाथ पाँव कीलों से जडें;
खून की धारा बही वहाँ से... मृतको को बचाने के लिए ।

4.बलिदान अद्भुत यीशु का है...  क्रूस की प्रार्थना उससे अधिक है;
क्रूस के आश्चर्य कामों पर मैं... ध्यान धर के चलता रहूँगा ।

5.प्रभु की सेवा करता रहूँगा... क्रूस का दर्शन सामने रखूँगा;
उसने कहा था ‘लेने आऊँगा’... मैं उसके साथ सदा रहूँगा ।
255 ऊपर सूली केoopar soolee ke
‘‘वह ऊँचे पर चढ़ा, और बन्धुवाई को बान्ध ले गया,
और मनुष्यों को दान दिये ।’’ (इफिसियों 4:8)

ऊपर सूली के, ऊपर सूली के, मसीहा जान देता;
कैदी पापों के हैं, देखो यीशु खोलता ।।

1.देखो पापियों(2) -- ने ठट्ठों में उड़ाया भी,
कोड़े मारे और सलीब पर चढ़ाया भी;
दुःख सहता(2) -- तौभी वह मुँह न खोलता ।कैदी(2)

2.ताज काँटो का -- बना के सिर पर रखा भी,
मुँह पर थूंक के सिरका उसे चुसाया भी;
बिन्ती करता -- बैरियों को क्षमा करता ।

3.ईश्वर आत्मा -- सलीब पर प्रगट हुआ भी,
सूरज छिप गया अन्धेरा देखो छाया भी;
आकाश हिल गया -- और देखो पृथ्वी कांपी भी ।

4.कफन बान्ध के -- फिर यीशु को दफनाया भी,
दिन तीसरे कब्र से प्रभु निकला भी;
बन्धन मौत के -- है देखो यीशु खोलता ।

5.मुझ पापों और -- गुनाहों से छुड़ाया भी,
दया, अनुग्रह और प्रेम से बचाया भी;
हृदय धोके -- मुझे अपना बनाया भी ।
256 ईश्वर का ओ मेम्नाeeshvar ka o memna
(यशायाह 53)

ईश्वर का ओ मेम्ना, तू चढ़ा था क्रूस के ऊपर;
मैं बखानूं तेरी प्रीत, मेरा प्यारा यीशु प्रभु ।।

1.मैं ने सोचा यहूदियों ने, उस युग के मारा तुझे;
लेकिन तू मारा गया, मेरे पापों की माफी के लिए ।

2.अपराधों से छेदा गया, ओ मेरे ख्रिस्त यीशु प्रभु;
मेरे सारे पापों के कारण, तू कुचला गया प्रभु ।

3.कोमल था तेरा वह सिर, काँटों से वह छेदा गया;
घायल हुआ मेरा प्रीतम, बना कुरुप तू काँटों से ।

4.घीरज से, प्रभु मेरे, रोगों को उठाता था;
अपने को नकारा प्रभु, अर्पण किया जीवन तू ।

5.दुःखी पुरुष तू बना, दर्द भरे जो दिल के थे;
शान्त तू रहकर हे प्रभु, मरते समय मुँह न खोला ।

6.मैं जग में जब मुर्दा था, अपराधों और पापों से;
बदले में मरा तू प्रभु, ताकि जीवन मैं पाऊँ ।

7.वापस गया स्वर्ग में प्रभु, बाट तेरी मैं जोहता हूँ;
तेरे आने की बाट जोहके, गाता रहूँगा हल्लेलूयाह ।
257 पुकारा क्रूस पर सेpukaara kroos par se
‘‘ हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर,
तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया ।’’
      (भजन 22:1)

‘‘मेरे ईश्वर तू ने मुझे क्यों छोड़ा,’’ पुकारा क्रूस पर से प्रभु मरे;
दुःख सहा, प्राण दिया, त्राता मेरे ।।

1.‘‘हे मेरे पिता जो यह हो सके, यह प्याला मुझ से अब तू हटा दे,’’
मेरे प्रभु तू ने यह बिनती की, पाप के भारी बोज को मेरे प्रभु;
तुझे छोड़ कौन उठाएगा मेरे ?

2.छोड़कर सब चेले तुझे चल दिए, चंगे जो हुए थे कहाँ गए ?
तेरे पिताने भी तुझे छोड़ा, मेरे अपराधों को तुझ पर डाला;
कुचला गया था हे प्रभु मेरे ।

3.निन्दा का पात्र तू बना प्रभु, दोष तेरे क्या थे जो ऐसा हुआ ?
क्या कभी ऐसा जग में हुआ था, परमेश्वर को कोई घात कर सके ?
मरण के दुःख को तू सहा मेरे ।

4.शारोन के फूल के समान सुन्दर जो, अपनी सुन्दरता प्रभु ने खो दी;
दुःखी पुरुष मेरे लिए हुआ, घात हुआ बलि-पशु के समान;
उठाया सारे रोगों को मेरे ।
258 घायल हुआghaayal hua
‘‘वह आप ही हमारे पापों को अपने देह पर लिए हुए
क्रूस पर चढ़ गया ।’’ (1 पतरस 2:24)

घायल हुआ, घायल हुआ, मेरे लिए मसीह घायल हुआ ।।

1.न कोई रुप और न कोई सुन्दरता, दुःखी पुरुष वह हुआ;
रोगी बना और शोकित हुआ था, जो देखा, मुँह फेर लिया ।

2.दुःख को उठाया और रोग जो हमारे, अपने ऊपर ले लिया;
ईश्वर का मारा और कूटा हुआ था, दुर्दशा में वह पड़ा ।

3.मेरे अधर्म के कामों के हेतु, सम्पूर्ण कुचला गया;
शान्ति मैं पाऊँ ताड़ना वह सहा, कोड़े से जख्मी हुआ ।

4.न पाप किया था, न छल मुँह से निकला, चुपचाप वह सब सह लिया;
आप ही हमारे सब पापों को लिए, क्रूस पर प्राण दे दिया ।

5.भूल न सकूं मैं प्रेम जो मसीह का, जो मुझ से उसने किया;
क्रूस की तरफ मैं ध्यान से जब देखा, छुटकारा मेरा हुआ ।
259 यीशु प्रभु तू नेyeeshu prabhu too ne
‘‘जिस ने मुझ से प्रेम किया,
और मेरे लिए अपने आप को दे दिया ।’’ (गलतियों 2:20)

यीशु प्रभु तू ने सब कुछ मेरे लिए दिया,
प्रेम की खातिर अपने आपको दे दिया ।।

1.सिर दिया तू ने कि काँटों का मुकुट, पहिने मेरे पाप के लिए;
वेदना बड़ी थी - सहने से बाहर, प्रेम से यह सब कुछ सहा ।

2.आँखे दी तू ने कि आँसू बहाए, देखकर मेरी दशा को;
कैसा दुःख था - तेरे हृदय में, मेरे लिए ही तू रोया ।

3.कोडे खाए तू ने सारे बदन में, मांस तेरा बाहर निकला था;
लोहू लूहान था - सारा शरीर भी, हल चलने का दाग हुआ ।

4.हाथ पाँव में तेरे कीलें ठोकी थी, पसली में भाला वह मारा;
कैसे बताऊँ - तुझ पर जो हुआ, चुपचाप यह सब तू ने सहा ।

5.कैसा यह प्रायश्चित मेरे लिए हुआ, मुझ को पाप से छुड़ाने को;
पाया प्रभु मैं - महान उद्धार को, पश्चाताप के द्वारा यह हुआ ।

6.कैसा अद्भुत यह प्रेम प्रभु तेरा, क्यों मुझ से प्रेम इतना किया ?
आभारी मैं हूँ - चरणों में तेरे, अपना मुझे तू बनाया ।

7.योजना जो तेरी मेरे लिए थी, मीरास को मैं प्रभु पाऊँ;
सदा मैं तेरे - साथ जो रहूँगा, यह अधिकार तू ने दिया ।
260 यीशु ने सब के लिएyeeshu ne sab ke lie
(यशायाह 53)

यीशु ने सब के लिए... जीवन बलिदान किया,
जी उठकर हम को उसने... अनन्त जीवन दिया ।

1.वह तुच्छ जाना गया... लोगों का त्यागा हुआ,
वह दुःखी पुरुष हुआ... और रोगी सरासर हुआ ।

2.निश्चय वह हम सब के... रोगों को उठाता है,
तौभी हम सभों ने... प्रभु को तुच्छ जाना ।

3.अपराधों के कारण से... वह घायल किया गया,
अधर्म के कारण से... वह कुचला भी गया ।

4.भेडों की नाई सब... हम भटके हुए थे,
अच्छे चरवाहे समान... प्राण अपना उसने दिया ।

5.अंधेर उस पर हुआ... पर सहता वह रहा,
मुंह उसने न खोला... प्रायश्चित हमारा हुआ ।

6.न पाप किया उसने... न छल निकला मुंह से,
तो भी परमेश्वर ने... अपराध उस पर डाले ।

7.वह क्रूस पर टांगा गया... और कबर में रखा गया,
जय के साथ जीवित हुआ... आओ, गाएँ हम हल्लेलूयाह ।
261 तेरा लोहू मुझे शुद्ध करता हैtera lohoo mujhe shuddh karata hai
‘‘उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है ।’’
(1 यूहन्ना 1:7)

तेरा लोहू, तेरा लोहू, मुझे शुद्ध करता है;
तेरा लोहू मेरी शक्ति है ।।(2)

1.तेरे लोहू की धार में... पापी को आसरा मिलता है;(2)
पवित्र पिता मुझ पापी को... धोकर पवित्र करता है ।(2)

2.नाश होने वालों के लिए... क्रूस की कथा एक मूर्खता है;
उद्धार पाए हुओं के लिए...  परमेश्वर की सामर्थ है ।

3.तेरे क्रूस का पवित्र खून... मुझे वह शुद्ध करता है;
मुक्ति पापों से देता है... धर्मी मुझे ठहराता है ।

4.सुअर की नाई कीचड में लोटता... कुत्ते की नाई घूमता फिरता था;
प्रेम से खींचा तू ने मुझे... ऐ प्रेमी तेरी स्तुति हो ।

5.मेरे पीछे शैतान है... मुझे डराता शैतान है;
तेरा लोहू दूर हटाता है... तेरा लोहू भस्म करता है ।

6.स्तुति महिमा और इज्जत... यूगानुयुग तेरी है;
तू ही स्तुति के योग्य है... हे पिता तुझे नमस्कार हो ।
262 यीशु के लोहू की जयyeeshu ke lohoo kee jay
‘‘और वे मेम्ने के लोहू के द्वारा उस पर जयवन्त हुए ।’’
(प्रकाशित 12:11)

यीशु के लोहू की जय, जय, जय;
यीशु के लोहू की जय ।।

1.यीशु ने किया प्रेम मुझ से... लोहू बहा दिया मेरे बदले ।

2.यीशु का लोहू मुझे शुद्ध है करता... आत्मा-शान्ति मुझे दिल में देता ।

3.यीशु का लोहू मुझे प्रेम है देता... प्रेम से भरा हुआ जीवन देता ।

4.यीशु का लोहू सच्ची भक्ति देता... दर्शन पिता का है मुझे देता ।

5.यीशु का लोहू सच्ची शान्ति देता... बोझ गुनाह का है दूर वह करता ।

6.यीशु ने मुझ को कीच से खींचा... जीवन के पौधे को जल से सींचा ।

7.यीशु ने मुझे अपनी शान्ति दे दी... मन में मेरे अपनी खुशी भर दी ।

8.भाईयों और बहिनों, सब बोलो मिलकर,
लड़को और बच्चों सब गाओ मिलकर ।
263 जय बोलो सारे लोगोंjay bolo saare logon
‘‘वे नया गीत गाने लगे, कि... तू योग्य है ।’’
(प्रकाशित 5:9)

जय बोलो सारे लोगों, यीशुु मुक्तिदाता की;
भाईयों, बहिनों, लड़को, बच्चों जय बोलो प्रभु यीशु की,... जय !!

1.क्रूस पर जिस का लोहू बहा... पापों को जिस ने क्षमा किया ।

2.यीशु के लोहू से धर्मी बना... अग्नि के दण्ड से प्राण बचा ।

3.लोहू ने आश्चर्य काम किया... पाप का बन्धन तोड दिया ।

4.लोहू के दाम से मुक्त किया... प्रभु का मैं अब दास हुआ ।
265 प्रभु यीशु की है जयprabhu yeeshu kee hai jay
‘‘जो मसीह यीशु के है, उन्होंने शरीर को उसकी लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है ।’’
(गलतियों 5:24)

प्रभु यीशु की है जय, क्रूस की शक्ति से है जय;
जय, जय, जय, जय, जय, जय, जय, जय ।।

1.यीशु के लोहू से मिलती जय, शैतान और सेना पर जय ।

2.क्रूस से हम को मिलती जय, पुराने स्वभाव पर मिलती जय ।

3.पुर्नजीवित प्रभु देता जय, पाप और मृत्यु पर देता जय ।

4.जग पर देता प्रभु जय, जीवन से अपने देता जय ।

5.आत्मा के द्वारा होती जय, शरीर के कामों पर होती जय ।

6.प्रभु के प्रेम से मिलती जय, दुःख संकट में मिलती जय ।

7.राजाओं का राजा देता जय, सब शत्रुओं पर उसकी जय ।
266 बोलो जय मिलकर जयbolo jay milakar jay
‘‘हरेक जीभ मान ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है ।’’
(फिलिपियों 2:11)

बोलो जय मिलकर जय, बोलो जय यीशु की जय;
बोलो जय मिलकर जय, बोलो जय प्रभु की जय;
बोलो जय जय जय ।।

1.नये जन्म की यही रीत, मन में भर दे अपनी प्रीत;(2)
तेरे प्रेम के गाएँ गीत ।(2) बोलो...

2.क्रूस पर अपना खून बहाया, मुझ पापी को दी शिफा;
मन मेरे तू बोल सदा ।

3.तेरे सामर्थ की यह शान, खुद ही दाता खुद ही दान;
पूरे कर दिल के अरमान ।

4.खिदमत अपनी ले मुझ से, इस मन्दिर में तू बसे;
जग में तेरा नाम रहे ।
267 आह! वह प्यारी सलीबaah! vah pyaaree saleeb
‘‘ऐसा न हो, कि मैं हमारे प्रभु यीशु मसीह के
क्रूस को छोड़कर और किसी बात का घमण्ड करुँ ।’’
(गलतियों 6:14)

1.आह ! वह प्यारी सलीब, मुझ को दिख पडती है,
एक पहाडी पर जो खड़ी थी;
कि क्रूस धातित मसीह ने भी निन्दा सही,
पापीयों के कारण जान दे दी ।
पस न छोडूंगा प्यारी सलीब,
जब तक दुनिया में मैं रहूँगा;
लिपट रहूँगा मैं उसी से,
है क्रूस घातित में नित्य आराम ।।

2.आह ! वह प्यारी सलीब जिस की निन्दा होती,
वह मुझे बहुत ही है भाती;
कि खुदा के प्यारे और प्रतापी मसीह,
ने पहुँचाया उसे कलवरी ।

3.मुझे प्यारी सलीब में जो लोहूलुहान,
नजर आती है खूबसूरती;
कि खुदा के मसीह ने प्रायश्चित किया,
ताकि मिले मुझे जीवन भी ।

4.मैं उस प्यारी सलीब का रहूँ वफादार,
सिपाही मैं हमेशा जरुर;
जब तक मेरा मसीह न करेगा मुझे,
अपने अब्दी जलाल में मंजूर ।
268 जिस क्रूस पर यीशु मराjis kroos par yeeshu mara
‘‘केवल प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का... ’’ (गलतियों 6:14)

1.जिस क्रूस पर यीशु मरा था, उस क्रूस पर ध्यान जब करता हूँ;
संसारी लाभ को माटी-सा, और यश को निन्दा जानता हूँ ।

2.मत फूल जा, मेरे मूरख मन ! इस लोक के सुख और संपत पर;
हो ख्रिस्त की मृत्यु से प्रसन्न, और सारी आशा रख उस पर ।

3.देख, उसके सिर, हाथ, पाँव के घाव, यह कैसा दुःख, यह कैसा प्यार!
अनूठा है यह प्रेम-स्वभाव, अनूप यह जग का तारणहार ।

4.गर तीनों लोक दे सकता मैं इस प्रेम के योग्य न होता दान;
हे यीशु प्रिय आप को मैं समर्पित करता हूँ देह, प्राण ।
269 कनान देश के एक नगरkanaan desh ke ek nagar
‘‘तुम ने जीवन के कर्ता को मार डाला ।’’
(प्रेरितो 3:15)

1.कनान देश के एक नगर पास... एक पर्वत खड़ा था;
बचाने सभी को वहाँ... ख्रिस्त यीशु मरा था ।

2.बता न सकते हैं वह दुःख... जो उसने सहा था;
पर जानते हैं कि हमारे हेतु... वह क्रूस पर टंगा था ।

3.वह मरा कि हम क्षमा पाएँ... और भले बन जाएँ;
कि उस रक्त से पा उद्धार... हम अन्त को स्वर्ग जाएँ  ।

4.श्रेष्ठ ऐसा कोई नहीं था... कि पाप का ऋण भरें;
स्वर्ग द्वार वह केवल खोल सका... कि हम प्रवेश करें ।

5.हाँ उसने किया अत्यंत प्रेम... प्रेम उससे हम रखें;
रक्त पर उसके करें विश्वास... और इच्छा पर चलें ।
270 गाओ, गाओ, जय गीतgao, gao, jay geet
‘‘और शीध्र आकर उसके चेलों से कहो कि वह मरे हूओं
में से जी उठा है ।’’ (मत्ती 28:7)

गाओ, गाओ, जय गीत गाओ,
ताली बजाके तुम गाओ;(2)
यीशु राजा जिन्दा उठा हल्लेलूयाह,
खुशी से यह सब को सुनाओ ।।(2)

1.कब्र पर था एक बड़ा पत्थर,
देखो कैसा हट गया वह;(2)
रोमी राज्य की मोहर बन्ध न रख सकी,
कभी भी ईश्वर के पुत्र को ।(2)

2.रो मत, रो मत, विलाप करो मत,
गालील में जाकर कहो यह बात;
कि वह वचन अनुसार कब्र से निकला,
जाओ सुनाओं समाचार ।

3.हन्ना, कायफा, पुरनियों की सभा,
खतरे से हुई परेशान;
अन्धकार की सामर्थ खतम होने पर,
बहुत घबराया शैतान ।

4.ऊँचे करो सिर दरवाजो,
आता है बड़ा बादशाह;
नरसिंगे, सितार और तबले बजाकर,
गाओ तुम हल्लेलूयाह ।
271 ओ! हल्लेलूयाह बोलोo ! hallelooyaah bolo
‘‘उस के चेलों से कहो कि वह मरे हुओ में से जी उठा ।’’
(मत्ती 28:7)

ओ ! हल्लेलूयाह बोलो यीशु जीवित हो गया,(2)
कुल दुनिया का उद्धारकर्Ÿाा वही हो गया ।।(2)

1.वह पापों से बचाने यीशु आया जग में,
और आके उठाए उसने पाप सबके ।

2.हाँ कोडे खाके ताज काँटो का पहिना भी,
और सूली लगते चोर को उसने बचाया भी ।

3.फिर बरछी पसली में उन्होंने उसको छेदा भी,
तो पाप धोनेवाला वहाँ से सोता निकला भी ।

4.वह जिन्दा हुआ मौत से कबर को जीत के,
और चढ़ गया आसमान बैठा दहिने हाथ पे ।

5.जय जय बोलो विश्वासियों, मनाओ खुशी भी;
और अपने मुक्तिदाता को सराहो तुम सभी ।
272 आनन्द ही आनन्द हैaanand hee aanand hai
‘‘यीशु ने उनसे कहा, तुम्हे शान्ति मिले ।’’ (यूहन्ना 20:19)

आनन्द ही आनन्द है, आहा !हमें...
क्योंकि प्रभु यीशु जी उठा, आहा  !
हमें आनन्द ही आनन्द है ।।

1.पापियों का मित्र पाप रहित है,(2)
पाप निमिŸा वह श्रापित हुआ;
भारी श्राप को पीठ पर उठाए,(2)
पाप के कर्ज चुकाए ।हमें ...

2.पेन्तुस पिलातुस, शास्त्री, याजक खडा हुआ वह उनके सन्मुख;
मृत्यु पर जयवन्त, स्तुति के योग्य वह, शैतान हुआ पराजित ।

3.मृत्यु के भय से निर्भय होके, जयवन्त यीशु के समीप आके;
अवसर को बहुमूल्य जानके, स्वर्गीय प्रभु को प्रचारें ।

4.जी उठे प्रभु ने प्रियों को देखा, ढ़ाढस बंधाया, रक्षा करेगा;
दूर किया चिन्ता को हमारी, त्यागें अब हम इस जग को ।

5.आत्मा को अपने भेजा स्वर्ग से, शिष्यगण सब परवश हो गए;
अपार शक्ति से सब भर गए, साहस से तब प्रचारे ।

6.मिलने दुल्हे से जो प्रभु है, क्या जागते हो और तैयार हो ?
पाओगे तब तुम महिमा का मुकुट, राज्य करेंगे सदा तक ।

7.यीशु हमारा आता फिर से, पल भर में ही बदलेंगे हम सब;
मगन होके, सम्पूर्ण मन से, गाएगें हम हल्लेलूयाह ।
273 जयवन्त मसीहा, जयवन्त हुआ हैjayavant maseeha, jayavant hua hai
‘‘हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्त करता है ।’’
(1 कुरिन्थियों 15:57)

जयवन्त मसीहा, जयवन्त हुआ है, जयवन्त सदा रहेगा,
शैतान के सिर को कुचला उसी ने, राज्य सदा वह करेगा ।।

1.मृत्यु तेरा अब डंक कहाँ है ?
कब्र तेरी जय कहाँ रही है ?
तोडा प्रभु ने क्रूस की शक्ति से, जयवन्त वह सब में होगा ।

2.यहुदा के गोत्र का सिंह भी वही है,
पुस्तक को खोलने जयवन्त हुआ है;
सातों मुहरों को तोडनेवाला है, सब बातों में योग्य होगा ।

3.मण्डली का सिर वही जो उसकी देह है,
जी उठनेवालों में पहलौठा वह है;
मृत्यु को उसने निगल लिया है, प्रधान वह सब का होगा ।

4.सिंहासन के चारों और मेघधनुष्य है,
यशब, माणिक, मरकत का सा चमक है;
बीच में महान प्रभु विराजमान भी है, जय-जयकार उसका होगा ।

5.चौबीस प्राचीन जिस के आगे झुके हैं,
चारों प्राणी सदा आमीन कहते हैं;
स्वर्ग में पृथ्वी पर और उसके नीचे, सबका मालिक वह होगा ।

6.ईश्वर की स्तुति हो प्रभु यीशु से,
विजय हम को देता अपनी इच्छा से;
जयवन्त से बढ़कर हम उसके द्वारा है, सब से अद्भुत वह होगा ।
274 प्रभु यीशु शैतान के बल कोprabhu yeeshu shaitaan ke bal ko
‘‘मृत्यु के द्वारा शैतान को निकम्मा कर दे ।’’
(इब्रानियों 2:14)

प्रभु यीशु शैतान के बल को जीत लिया है,
हम सब मिलकर विजय के गीत खूब गायेंगे ।।

1.दाऊद के वंश का मूल तू ही है, यहुदा के गोत्र का सिंह भी तू है;
पुस्तक को खोेलने के लिये तू, जयवन्त हुआ, स्तुति हम करेंगे ।

2.हमको विजय देता सब दुःखों से, अपने राज्य में लाया बड़े प्यार से;
महान विजय लाया देने, प्रभु हमारा जय, हर्ष करेंगे ।

3.हम से बहुत प्यार किया है, सन्तान की नाई हम जय पाये हैं;
हर बातों में जय दी हमें, सर्व शक्तिमान तेरी जय गायेंगे ।

4.मण्डली की नाई हमें प्रभुजी, अपने लहु से इकट्ठा किया;
कलीसिया का सिर तू ही है, साष्टांग प्रणाम हम तुझ को करेंगे ।

5.आदर के योग्य तू ही हे ईश्वर, महिमित राजा हमको विजय दी है;
मृत्यु पर जय पाके जी उठा, ललकार के साथ जय-जयकार करेंगे ।
275 ईश्वर की स्तुति होeeshvar kee stuti ho
‘‘परमेश्वर का धन्यवाद करो,
जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्त करता है ।’’
(1 कुरिन्थियों 15:57)

ईश्वर की स्तुति हो, मृत्यु पर जयवन्त है;
प्रभु यीशु ही के द्वारा जयवन्त करता है ,
हमें जयवन्त करता है ।।

1.मृत्यु तेरा डंक कहाँ है, ओ कब्र विजय कहाँ ?
जय ने मृत्यु को निगल कर वचन पूरा किया है,
जय-जयकार, जय-जयकार, जयवन्त हैं, जयवन्त हैं । ... प्रभु

2.ईश्वर से जो जन्मा है वह संसार पर जयवन्त भी है,
विश्वास ही के द्वारा हमें, विजय उससे मिलती है ।
जय-जयकार, जय-जयकार,...

3.क्या क्लेश, संकट, उपद्रव और अकाल, नंगाई, जोखिम, तलवार,
मसीह के प्रेम से अलग भी, कोई न हमें करता है ।
जय-जयकार, जय-जयकार,...

4.इन सब बातों में हम उसके द्वारा ही से जयवन्त हैं,
जिसने हमसे प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर है ।
जय-जयकार, जय-जयकार,...

5.जय जो पाये वही उसके राज्य में वारिस होता है,
ईश्वर उसका पिता है और वही उसका पुत्र है ।
जय-जयकार, जय-जयकार,...,
276 हे प्रभु तू ही जयवन्त सदा हैhe prabhu too hee jayavant sada hai
‘‘परमेश्वर का धन्यवाद हो जो मसीह में
हमें सदा जय के उत्सव में लिए फिरता है ।’’
(2 कुरिन्थियों 2:14)

हे प्रभु तू ही जयवन्त सदा है, जयगीत हम गाते हैं ।

1.पापों के कारण बिगड़े हुए हम, उद्धार हमारा किया है;
कृतज्ञता से हृदय भरा है, स्तुति तेरी करते हैं ।

2.अधर्म से भरा जीवन हमारा तुझ ही में स्थिर वह हुआ है,
हम पर प्रकाशित हुआ प्रभु तू, सुरज धार्मिकता का है ।

3.अवज्ञाकारी, अज्ञानी हम हैं, आशीषें खोई बहुत हैं;
ऐश्वर्य, महिमा, ज्ञान दे के अपना हम पर दया किया है ।

4.शत्रु के फन्दे में, हम जो फंसे थे, निजधन होने चुन लिया है;
डर-भय की हालत से हम को छुड़ाया, निर्भय हमें किया है ।

5.युद्ध मेरा है, चुप हो और देखो, छुटकारा दूँगा तुम्हें मैं;
ऐसा ही कह के पक्ष में हमारे युद्ध तू ही किया है ।

6.मसीह यीशु में हरेक जगह में विजय के उत्सव में हमें,
लिए तू फिरता, सुगन्ध फैलाता, महिमा प्रभु तेरी है ।

7.विश्वासयोग्यता प्रगट तू किया, हम पर कृपा तू किया है;
अनाथों का तू घर है बसाया, हल्लेलूयाह हम गाएँगे ।
277 जय प्रभु यीशु जयjay prabhu yeeshu jay
(इब्रानियों 2:3)

जय प्रभु यीशु जय मुक्तिदाता,
जय प्रभु जय जय राजा ।।(2)

1.पाप के गढ़े में नाश हुआ था मैं,
महान उद्धार प्रभु तू ने दिया... देकर तू ने पार किया ।

2.अमूल्य लोहू क्रूस पर बहाकर,
मलिन आत्मा को धो दिया... धोकर तू ने शुद्ध किया ।

3.चट्टान बनकर ढ़ाढस देता है,
प्रभु यीशु मेरा रक्षक है... क्या कोई परीक्षा जय पाएगी ?

4.आँधी तूफान जब मार्ग में आएँ,
आड़ में रख के अपनी मुझे... ले चला लगातार जय देके ।

5.बालकपन से बुढ़ापे तक,
मुझ को लिए फिरता रहा... उठाता भी रहेगा ।

6.प्रभु यीशु सहायक मेरा,
क्या कोई कमी मुझे होगी?... कमी मुझे नहीं होगी ।

7.मृत्यु पर जयवन्त, प्रभु यीशु संग है,
भय समाधि का फिर क्या है ?... अक्षय जीवन मेरा है ।
278 वह कब्र मेें पड़ाvah kabr mein pada
‘‘वह जी उठा है ।’’ ( मरकुस 16:6)

स्वू पद जीम हतंअम भ्म संल

1.वह कब्र मेें पड़ा...  ख्रिस्त मेरा त्राता;
कि वचन हो पूरा...  परमेश्वर का ।
बन्ध मृत्यु के तोड़ उठा,
वह विजेता सब से है बड़ा ।
वह महापराक्रमी विजेता है,
अब हो जीवित राज्य स्वर्ग में है करता;
जी उठा ! जी उठा ! हल्लेलूयाह जी उठा ।।

2.व्यर्थ पहरेदार वहाँ... बैठे वह जहाँ,
व्यर्थ ही लगी मुहर...  खाली कबर ।

3.मृत्यु की हुई हार... तेज उसका अपार,
शैतान का सारा बल... हुआ विफल ।
279 यीशु ख्रिस्त जी उठा हैyeeshu khrist jee utha hai
‘‘तीसरे दिन जी भी उठा ।’’ (1 कुरिन्थियों 15:4)

1.यीशु ख्रिस्त जी उठा है, हल्लेलूयाह !
दूतों साथ हम गाएँ जय, हल्लेलूयाह !
उसने क्रूस पर दिया प्राण, हल्लेलूयाह !
कि हमारा करे त्राण, हल्लेलूयाह !

2.गाएँ धन्यवाद के साथ, हल्लेलूयाह !
धन्य हो यीशु स्वर्गीय नाथ, हल्लेलूयाह !
उसने सहा क्रूस का दुःख, हल्लेलूयाह !
हम को देने परम सुख, हल्लेलूयाह !

3.जिसने भोगा दुःख और क्लेश, हल्लेलूयाह !
वह बना है जग का नरेश, हल्लेलूयाह !
गाएँ जय हम धन्य मान, हल्लेलूयाह !
दूत भी करते यही गान, हल्लेलूयाह !

4.ईश्वर पिता धन्य हो, हल्लेलूयाह !
तुम जयवन्त धन्य हो, हल्लेलूयाह !
धन्य पवित्र आत्मा हो, हल्लेलूयाह !
एक ही त्रिएक परमेश्वर को, हल्लेलूयाह ।
280 अनन्त यीशु की हम स्तुति करेंanant yeeshu kee ham stuti karen
‘‘तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक है ।’’
      (भजन संहिता 108:4)

अनन्त यीशु की हम स्तुति करें, उसकी सच्चाई के लिए;
बिचवई बना जो चारों दिशाओं में है, सभी सन्तों के लिये ।।

1.आकाशमण्डल तक पहुँच रही है, प्यास मेरी वह बुझा रही है;
तुुरन्त मनुष्यों को बदलती है, हाँ वह बदलती है ।

2.छुटकारा देती वही पापों सेे, छुडाती है वह घोर अन्धकार से,
संकट और क्लेश वह सब सह लेती, हाँ वही सब सह लेती है ।

3.संसार की सारी चीजें बदलती, सत्य कभी भी नहीं बदलेगा ।
अनन्त यीशु सारे संसार में, सत्य वह बन गया है ।

4.तलवार की नाई वही काटेगा, दुष्टों को वही नीचे गिरायेगा;
शीध्र ही उसका काम वह करेगा, और पूरा भी वह करेगा ।

5.पानी के जैसे धोता वही है, आइने के जैसे दिखाता वह है;
कुन्दन के समान अनमोल वही है, अनमोल भी वही है ।

6.दीपक वह होकर अन्धेरा वह हटाए, क्रोध को भी वह दूर भगाए;
संकट को भी दूर है वही करता, दूर है वही करता ।

7.हथौड़े जैसे तोड़ता वही है, नम्र वह करता और कायल भी करता;
मधु समान वह स्वाद भी देता है, स्वाद भी वही देता है ।
281 प्रभुजी, तू ने हैं कीprabhujee, too ne hain kee
‘‘गर्भ में रचने से पहिले ही मैं ने तुझ पर चित लगाया ।’’
(यिर्मेयाह 1:5)

प्रभुजी, तू ने हैं की, प्रतिज्ञाएँ हम से;
पूरी की हैं, सामर्थ के साथ, हम तुझे सराहते हैं ।।

1.ढूंढा मुझे तू ने वचन से अपने,
समय पर तेरे... पास आने... तुझ से मिलने,
दौलत और पुत्र मुझे बनाने... धोया मुझे तेरे... लोहू से ।

2.‘बालक मैं हूँ, मत कह’, कहा तू;
राज्यों के लिए...गवाह तुझे... ठहराया है,
जन्म से पहलें मुझे चुना प्रभु... गरीब मैं तुझ को... भजूँगा ।

3.भय-भीति में तू ही मेरा अभय है,
शत्रुओं पर... तू मुझे... जय दिया है;
गिराऊँ, नाश करुँ, बनाऊँ, रोपूं... अधिकार दिया तू ।

4.मन्दिर-महिमा महिमित रखने,
सैन्याधिपति... तूने दी... अपनी शान्ति;
इस जग में भी शान्ति भर दी... शालेम राजा तेरी... स्तुति हो ।

5.मूसा से तू ने किये थे वायदे,
जिस जगह पर... पैर रखो... दूँगा तुम को;
पवित्र आत्मा की शक्ति दी हमको, बहुतायत से तेरी... स्तुति हो ।

6.‘स्वर्ग और पृथ्वी का अधिकार मेरा,
आज्ञा दिया तू... जाओ करो... शुभ प्रचारा;
अन्त तक हूँ मैं साथ सहारा’... वायदे के लिए प्रभु... स्तुति हो ।

7.सफल न होगा हथियार कोई,
तेरे विरोध में... बने यदि... प्रतिज्ञा यह दी;
मुदई तुझ पर नालीश करे गर, मुजरिम ठहरे वही... हल्लेलूयाह ।
282 पवित्र सिय्योन के वासीpavitr siyyon ke vaasee
‘‘यहोवा जो सिय्योन में विराजमान है, उसका भजन गाओ ।’’
      (भजन 9:11)

पवित्र सिय्योन के वासी, सर्वाधिकारी की महिमा है बड़ी;
वर्तमान, भूत, भविष्यत् काल-वासी;
अल्फा, ओमेगा वही, आदि और अन्त है वही ।।

1.मैंने सब लोगों के सामने वाचा बाँधी है, आश्चर्य कामों की;(2)
मैं यहोवा असंख्य आश्चर्य काम करता,(2)
समझ से जो बाहर है, (2) यह सब मेरे कार्य हैं ।(2)

2.जय जय कारी गाते हुए सिय्योन नगर में, शान्ति से हम पहुँचे;
सदा का आनन्द हमारे दिलों में अब है,
शोक और दुःख अब नहीं है, हर्ष, आनन्द, और शान्ति है ।

3.तेरी नेव में मैं नीलम मणि डालूँगा, यशब, पुखराज, मणि;
तेरे फाटकों को लालडियों के बनाऊँगा,
और मैं सब सिवानों को, रत्नों के बनाऊँगा ।

4.यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिए, मुझे अभिषेक किया;
शोक विलाप का वस्त्र उतारा, यश का वस्त्र दिया;
सुन्दर पगड़ी पहनाकर, सेवक अपना बनाया ।

5.जल में होकर जब तू गुजरे बल तेरा हूँगा, संग तेरे रहूँगा;
नदियों में जो होकर गुजरे तू न डूबेगा,
अग्नि पर जब चलेगा, बाल तेरा न झुलसेगा ।

6.आगे-आगे तेरे चल के पीतल के किवाड़, तेरे आगे तोडूँगा;
अन्धकार में छिपा हुआ धन तुझ को दूँगा,
गुप्त स्थानों का धन भी, यह सब तुझ को मैं दूँगा ।

7.हे याकुब के घर के लोगों बचे हुए जो, मैंने पाला है तुम को;
बूढ़ापे तक सम्भालूँगा सिर सफेद जब हो,
तुम को लिए फिरुँगा, छुड़ाता भी रहूँगा ।
283 देखो मैं एक नया कामdekho main ek naya kaam
‘‘देखो मैं एक नयी बात करता हूँ ।’’
(यशायाह 43:19)

देखो मैं एक नया काम अब करूँगा जरुर,(2)
और निश्चय जान लोगे तुम इसको भी जरुर ।।(2)

1.जंगल में मार्ग खोलूँगा, निर्जल देश में नदियाँ भी;(2)
जंगल के सींचने को, बहाऊँगा उनको ।(2)

2.नदियाँ जल से होगी भरपूर, पानी उनमें होगा पूर;
प्रजा तुम जो प्रभु की, अब आके पियो खूब ।

3.शतुरमुर्ग और गीदड़ भी, महिमा मेरी करेंगे;
बनैले सब जन्तु भी, स्तुति करेंगे ।

4.नई सृष्टि सिरजूँगा, शान्ति अपनी मैं दूँगा;
नया गीत मैं मुँह में, तुम्हारे डालूँगा ।

5.स्वर्गीय दर्शन पाओगे, मुझ को प्रभु जानोगे;
आरम्भ से अधिक मैं, भलाई करूँगा ।

6.नया सब कुछ करूँगा, उस को भी मैं परखूँगा;
गुप्त मन्ना, श्वेत पत्थर, और नया नाम दूँगा ।

7.भूमि पर स्वर्गीय आनन्द, आओ गाएँ मिलकर सब;
उसकी है प्रतिज्ञा, सब गाएँ हल्लेलूयाह ।
284 हे आकाश, कान लगा अबhe aakaash, kaan laga ab
‘‘यहोवा अकेला ही उसकी अगुवाई करता रहा ।’’
(व्यवस्था 32:12)

हे आकाश, कान लगा अब तू... कि मैं बोलूँगा;
यहोवा का वंश उसकी प्रजा है सभी,
याकूब है उसका निज भाग ।।

1.जंगल में उसने पाया था खोज के,
सूनसान और गरजने वाले से भरी हुई मरुभुमि में;
लिए फिरा अपने साथ और रक्षा की, आँख की पुतली की नाई ।

2.यहोवा ही ने उनकी अगुवाई की,
पृथ्वी के ऊँचे ऊँचे स्थानों पर, सवार भी उसने कराया;
और पराया देवता कोई भी उसके साथ, कोई भी उसके साथ न था ।

3.परमेश्वर ने जब याकूब से यह कहा,
‘बेतेल जा और वहाँ रहकर, मेरे लिए एक वेदी बना’;
तब याकूब ने धर के लोगों से कहाँ, ‘फेंको देवताओं को’ ।

4.दर्शन प्रभु ने बेतेल में फिर दिया,
आशीष दे कहा कि तेरा नाम, सदा इस्राएल रहेगा;
उसके घर में आनेवालों के लिए ऐसी ही आशीषें है ।

5.प्रभु का आगमन निकट देख कर,
एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न भूलें और न छोड़े;
तुम प्रभु के घर की सारी आशीषें, निश्चय जानो, पाओगे ।
285 आनन्दित, आनन्दित हूँ मैंaanandit, aanandit hoon main
‘‘यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं प्रसन्न हूँ; उसकी सुनो ।’’
(मत्ती 17:5)

आनन्दित, आनन्दित हूँ मैं, मेरे प्रिय पुत्र में प्रसन्न मैं... अहा
मेरे पुत्र की तुम सुनोें बातें, आवाज सुनी एक बादल में से,
एक शब्द हुआ महा-अद्भुत है... अहा ।आनन्दित...

1.प्रेम करता है तू ही धर्म से, और द्वेष करता है तू अधर्म से;... प्रभु
पिता ने पुत्र को इसलिए, अनुग्रह किया है अधिक सब से;
अभिषेक किया है हर्ष के तेल से । अहा ।आनन्दित...

2.अन्त-दिनों में यहोवा ने, पुत्र के द्वारा बातें की हम से;... इन
सारी वस्तुओं का वारिस उसे, ठहराया और उसके द्वारा ही से;
सारी सृष्टि की रचना की है ।

3.उसकी महिमा का प्रकाश है, और उसके तत्वों की वह छाप है;... प्रभु
वह अपने सामर्थ के वचन ही से, सभी वस्तुओं को सम्भालता है;
सारी सृष्टि में वह श्रेष्ठ है ।

4.तू ही मेरा प्रिय पुत्र है, आज तू मुझ से उत्पन्न हुआ है;... कि
आओ, पुत्र को हम चुम्बन करें, उस पर ही भरोसा पूरा रखें;
आओ, आओ हम आशीष पाएँ ।

5.ज्ञान, सम्पति, परिपूर्णता, सब ज्ञानी पुत्र में गुप्त है;... सर्व
आनन्द, शान्ति और पवित्रता, छुटकारा, नीति और धार्मिकता;
प्रभु यीशु में सब कुछ है ।

6.परम-सुन्दर तू है, सभी मनुष्यों की सन्तानों में;... प्रभु
अनुग्रह भरा होठों में तेरे, इसलिए पिता ने भी तुझे;
सदा के लिए आशीष दी है ।

7.महिमित महान राज-पुत्र, राज्य करेगा हजार साल तक;... प्रभु
राज्य उसी का युगानुयुग है, परीक्षाओं में जो जयवन्त अब है;
राज्य करेंगे तब साथ उसके वे ।
286 उन दिनों में प्रभुun dinon mein prabhu
‘‘उन दिनों में यहोवा का वचन दुर्लभ था ।’’
(1 शमूएल 3:1)

उन दिनों में प्रभु का वचन,... दुर्लभ था यहोवा दर्शन;
प्रभु के वचन का दर्शन,... मिलता था बहुत ही कम ।।

1.उन दिनों में इस्राएल में,... कोई राजा नहीं था;
जिसको जो, ठीक लगता था,... वही काम वह करता था ।

2.परमेश्वर का,सन्दूक तब,... प्रजा से छीन लिया था;
इस्राएल में से महिमा,... इस कारण उठ गया था ।

3.दाऊद जब राजा हुआ,... हर दिन वह बढ़ता गया;
सेनाओं का यहोवा,... संग सदा उसके रहा ।

4.सुलेमान के बलिदानों पर,... जब अग्नि स्वर्ग से गिरा;
यहोवा का मन्दिर तब,... यहोवा-तेज से भरा ।

5.उठ, उठ अब प्रकाशमान हो,... प्रकाश है तेरा आया;
यहोवा का तेज तुझ पर,.. अब देख उदय है हुआ ।

6.इस्राएल के ईश्वर का,... पवित्र नगर तू होगा;
परमेश्वर का सिय्योन यह,... नाम तेरा युग युग होगा ।
287 वचन जो प्रभु से दियाvachan jo prabhu se diya
‘‘और उसकी सामर्थ हमारी ओर जो विश्वास करते है,
कितनी महान है ।’’ (इफिसियों 1:19)

वचन जो प्रभु से दिया गया उसके द्वारा,
आओ हम ढूंढ़े भीतरी आँखो का प्रकाश ।
जिनको उद्धार मिला उनको ईश्वर ने,
जो शक्ति दी उस को जानकर हम जीएँगे ।।

1.जो उद्धार अनुग्रह से मिलता वह प्रभु का है,
हम धमण्ड नहीं करें सब कुछ अनुग्रह है;
जो खाली थे प्रभु उनको भर दिया,
प्रभु के अमूल्य क्रूस की शक्ति के द्वारा से ।

2.पाप में जो मरे थे प्रभु ने उनको जिलाया,
प्रभु यीशु के साथ हमें भी जिलाया;
वह हमको स्वर्गीय स्थान में बैठाया,
ये उसके जी उठने की शक्ति के द्वारा हुआ ।

3.उसके साथ जी उठने कि समानता में,
नाना प्रकार की शक्ति हम पाते हैं;
विश्वास करने वालों में जो शक्ति दिखती है,
उसकी समानता को हम सब जानेंगे ।

4.सब प्रकार की प्रधानता और अधिकार जो,
सामर्थ और प्रभुता को हमने जो देखा;
हरेक नाम के ऊपर जो इस लोक में,
वही नाम जो सब से अधिक ऊँचा है ।

5.ईश्वर अपनी शक्ति को प्रगट करने,
चुन लिया सब दुर्बल, शक्तिहीनों को;
और जो हैं उनको लज्जित करने,
ऐसे नीचों को पहले से जाना ।

6.हमारे लड़ाई के हथियार जो आत्मिक हैं,
प्रभु की आज्ञा मानने से हमारे ताबे में हैं;
वह तोड़ता है सब दुष्ट के गढ़ों को,
यह धन्यता जो प्रभु ने हम को दी है ।
288 आवाज प्रभु की सुनूँगाaavaaj prabhu kee sunoonga
‘‘यहोवा की वाणी,... ।’’       (भजन संहिता 29)

आवाज प्रभु की सुनूँगा, जब वह मुझ से कहे;(2)
मधुर आवाज से कहे, धीमी आवाज से कहे ।।(2)

1.तेरी अजीब वाणी, जो ”मेधों के ऊपर है“;
प्रतापी प्रभु गरजता, (2) मेघों के ऊपर वह रहे ।

2.तेरी भयंकर वाणी, ”प्रतापमय और सामर्थी है“;
लबानोन के देवदार को तोड़े, (2) आग की लपटों को चीरे ।

3.”बन को हिलाती है, हरणी का जो गर्भ गिरे“;
जंगल में पतझड़ है, (2) यह वाणी सदा जो रहे ।

4.मन्दिर में सब कहे, महिमा तेरी जो है;
तू शान्ति आशीष देगा, (2) जो तेरी वाणी को सुने ।

5.तेरी मीठी वाणी, जो वचन से सुनता मैं;
प्रार्थना के द्वारा से, (2) वह हर दिन मुझ से कहे ।

6.तेरी मीठी वाणी, जिस में है इच्छा तेरी;
जीवन के हर पल में, (2) समझूं मैं जो तू कहे ।

7.तेरी धीमी वाणी, जो मार्ग दिखाती है;
जब दहिने बायें फिरुँ, (2) पीछे से वह मुझ से कहे ।

8.आँधियां जब चलें, डर भय मुझ में आए;
तब तेरी जो प्यारी आवाज, (2) ”मत डर“ मुझ से कहे ।

9.जब अन्धकार रूपी, मृत्यु की तराई में हूँ;
”मैं तेरे साथ जो हूँ“, (2) यह वाणी मुझे सुन पडे ।

10.हे प्रभु तू अब कह, तेरा दास जो सुनता है;
नम्र और दीन बनकर, (2) मानूँगा जो तू कहे ।
289 बोल यहोवा सुनता तेरा दासbol yahova sunata tera daas
‘‘हे प्रभु, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है ।’’
(1 शमूएल 3:10)

बोल यहोवा सुनता तेरा दास, वाणी अब तू सुना दे;
वचन अब तेरा सिखा दे, उस पर चलना मुझको दिखा दे ।।

1.भोर को मैं उठता, तेरी वाणी सुनता, क्या ही मधुर उत्तम है;
दिन भर के लिये तैयार मुझे करती, हर ठोकर से तू बचा दे ।

2.वचन जब पढ़ता, आवाज तेरी सुनता, अपने आप को मैं जाँचता;
तब मैं जान जाता, मार्ग यही है, अब मुझे चलना सिखा दे ।

3.आन्धियाँ उठती जब डर मन में आता, तू मुझ से प्रेम से कहता;
मत डर मेरे दास, मैं तेरे संग हूँ, अब यह भेद मुझे बता दे ।

4.आवाज जब तेरी स्पष्टता से सुनता, मेरे लिए तू कहता;
करुँ सब ठीक-ठाक, मनुष्य और तुझ से, वचन मानना तू समझा दे ।

5.तेरा वचन जो हथौड़ा और अग्नि, तेज तलवार की नाई है;
दर्पण वह अद्भुत मेरे लिये है, असली रूप मेरा दिखा दे ।

6.दुःख मुझ पर आया, वचन तब मैं सीखा, और उससे जीवन पाया;
रख मुझे विश्वस्त, मानूं आज्ञा सब, वचन में रहना सिखा दे ।

7.तेरा वचन मुझे कांटता और छांटता, मनुष्य बनाता वह है;
अपनी शक्ल में मुझ को तू ढालकर, महिमा तू अपनी करा दे ।
290 उसकी प्रतिज्ञाओं कोusakee pratigyaon ko
(यूहन्ना 16:24, मलाकी 3:10, भजन 34:8)
उसकी प्रतिज्ञाओं को विश्वास और धीरज से,
तुम में से हरेक जन हंमेशा प्राप्त करो ।।

1.तुम में से किसी ने बोझ से अब तक,
यीशु के नाम से कुछ नहीं माँगा;
माँगो तो उससे अनन्त आनन्द, तुम को निश्चय मिलेगा ।

2.यीशु मसीह देना चाहता तुम को,
अपनी महिमा के धन के अनुसार;
अपनी आँखो को ऊपर उठाकर, माँगो तुम प्राप्त करोंगे ।

3.भंडार में दसवाँ अंश तुम सब ले आओ,
ताकि भवन में भोजन वस्तु रहे;
अपरम्पार आशीष वह तुम को देगा, परखो प्रभु को तुम अब ।

4.दीर्घायु शक्ति और स्वास्थ्य, सम्पति,
क्या यह ईश्वर की मुफ्त कृपा नहीं ?
जो कुछ तुम में है अर्पण करके, परमेश्वर को तुम परखो ।

5.यहोवा की शरण लेनेवाले को,
घटी, कमी उन्हें नहीं होती;
यहोवा भला है विश्वास करो तुम, उसे तुम चखकर देखो ।

6.दीन होकर तुम ने पुकारा उसे,
सब कष्टों से तब वह छुड़ा लिया;
उस के नाम पर विश्वास करो आज, उसे तुम चखकर देखो ।

7.ईश्वर की आज्ञाओं पर चलोगे,
तुम्हारी कुशलता बड़ी होगी;
समुद्र के तरंगो के समान वह उसकी, धार्मिकता होगी बड़ी ।
291 खुदा के वायदे नहीं टल सकतेkhuda ke vaayade nahin tal sakate
‘‘जितनी प्रतिज्ञाएँ है वे सब उसी में हाँ के साथ है,
इसलिए उसके द्वारा आमीन भी हुई ।’’ (2 कुरिन्थियों 1:20)

1.खुदा के वायदे नहीं टल सकते, पर कायम वे रहते चट्टान की तरह;
और जब दुनिया के सहारे गिरते, ये वायदे हिलते नहीं ।
खुदा के वायदे नहीं टलेंगे, जो कुछ भी गिरे वे रहेंगे;
अगर बुझ जाएँ आसमान के तारे, तौभी ये वायदे रहेंगे ।।

2.खुदा के वायदे न कभी हिलते, जब हम पर आती है सख्त मुसीबत;
जब हम इस जंग में थक जाके गिरते, ये वायदे हिलते नहीं ।

3.खुदा के वायदे न कभी हिलते, जब तेज बुखार है या मौत नजदीक है;
तब बाप के हाथ से रिहाई पाते, ये वायदे हिलते नहीं ।

4.खुदा के वायदे वे कायम रहेंगे, जब मैं कयामत में फिर उठूंगा;
खुदावन्त मुझ को एक ताज तब देगा, तब वायदे काबिल होंगे ।
292 रखता हूँ मसीह के वायदों परrakhata hoon maseeh ke vaayadon par
‘‘उसने अविश्वासी होकर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर सन्देह न किया, पर विश्वास में दृढ़ रहा ।’’
(रोमियों 4:20, 21)

1.रखता हूँ मसीह के वायदों पर ईमान,
हर जमाने में हो, उसकी इम्द हर आन;
उसकी होवे सना, करूँगा यह गान;
है खुदा के वायदों पर ईमान ।
रखता, रखता,... रखता हूँ खुदा के वायदों पर भरोसा;
रखता, रखता,... मैं रखता उसके वायदों पर ईमान ।।

2.है ईमान उन वायदों पर जो है चट्टान,
जब कि शक और डर का होवे सख्त तूफान;
जीतूंगा कलाम-इ-रब्ब से बेगुमान,
है खुदा के वायदों पर ईमान ।

3.है ईमान उन वायदों पर और देखता हूँ,
सब गुनाह से धोता है मसीह का खून;
किया यीशु ने आझाद मैं हूँ ममनून,
है खुदा के वायदों पर ईमान ।

4.है ईमान मसीह के वायदों पर हर बार,
रहूँगा तो अबद बीच मसीह के प्यार;
जय देती हर वक्त वह रुह की तेज तलवार,
है खुदा के वायदों पर ईमान ।

5.है ईमान और तब मैं फिर न गिरूँगा,
रुह की अगुवाई नित जब सुनूँगा;
और आनन्दित यीशु में मैं रहूँगा,
है खुदा के वायदों पर ईमान ।
293 आओ, आओ यीशु पास आओaao, aao yeeshu paas aao
‘‘हे सब थके और बोझ से दबे हुए लोगों, मेरे पास आओ,
मैं तुम्हें विश्राम दूँगा ।’’ (मत्ती 11:28)

आओ, आओ यीशु पास आओ, वही बुलाता अभी;
थके और मांदे जो बोझ से दबे हो, मुक्तिदाता यीशु पास आओ ।।

1.यीशु मसीह की पुकार को सुनके, ध्यान क्यों देते नहीं;
जग में कितनी मुसीबत उठाते, मेहनत करते चैन नहीं पाते ।

2.अब भी जगह है भाई पुकारते, मौका फिर मिलता नहीं;
दिन है भाइयों गुजरा जाता, दुनिया पर अंधेरा छाता ।

3.काल और मरी और लड़ाई देखते, तौबा क्यों करते नहीं;
भविष्यवाणी पूरी होती, वापस आते है सारे यहूदी ।

4.यीशु मसीह ने तुम्हारे लिए, अपनी जान दे दी;
क्रूस पर चढ़कर लोहू बहाया, ताकि होवे प्रायश्चित हमारा ।

5.यीशु मसीह के नाम के सिवाय, मुक्ति मिलती नहीं;
उसी में है पाप से रिहाई, वही देता है खुशी भाई ।
294 आओ जग के लोग सब हीaao jag ke log sab hee
‘‘आकर दाख-मधु और दूध बिना रुपया और
बिना दाम ले लो ।’’ (यशायाह 55:1)

आओ जग के लोग सब ही, यीशु राजा बुलाता है ।।(2)

1.जग में जिस का स्थान नहीं है, जग में जिसका मान नहीं है;(2)
राज्य तुम्हें देने के लिए, (2) यीशु राजा बुलाता है ।(2)

2.जग में तुम हो भुखे मरते, जग में तुम हो प्यासे मरते;
भोजन, जल अब मुफ्त में देने, यीशु राजा बुलाता है ।

3.सिर पर काँटो का ताज निशानी, छाप है उसकी बहती पसली;
छिदे हाथ पसारे हुए, यीशु राजा बुलाता है ।

4.आओ भाइयों, आओ बहिनों, आकर उसको परखो देखो;
सारा भार उठाने के लिए, यीशु राजा बुलाता है ।
295 प्रेम से यीशु बुलावेprem se yeeshu bulaave
‘‘गुरु,... तुझे बुलाता है ।’’ (यूहन्ना 11:28)

प्रेम से यीशु बुलावे... जल्दी आओ,
पाओ मुक्ति पूरी आनन्द से... भरते जाओ ।।

1.पापरहित प्रभु तेरे लिए, पाप बना प्रभु सब के लिए;
श्रापित हुआ क्रूस के ऊपर,(2) जल्दी आओ ।प्रेम से...

2.ताज काँटो का सिर पर लेकर, मुँह पर भी अपने थुकवाकर;
दिया अपना प्राण भी क्रूस पर ।

3.बिनती की थी तेरे लिए, क्रूस पर उसने प्यासा होके;
प्राण दिया पुकार के उसने ।

4.भटकता पापी क्यों जग में ? चरवाहा अब तुझ को ढूंढ़े,
यीशु की आवाज अब सुन ले ।

5.समय तू खोये क्यों अपना ? देख, आज है दिन मुक्ति का,
यीशु को बनाले अपना ।

6.धोएगा लोहू से तुझ को, पिता की नाई सब पापों को;
बेटा बनाएगा अपना ।

7.प्यारों, अब यीशु पास आओ, प्रेम का सन्देश अब सुन लो;
अनुग्रह का दिन यह जानो ।
296 ख्रिस्त के पास आओ भाईkhrist ke paas aao bhaee
‘‘यीशु ने उससे कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूँ ।’’
(यूहन्ना 14:6)

ख्रिस्त के पास आओ भाई, यीशु के पास आओ भाई;
जीवन का पानी लेने, अपनी प्यास मिटाने ।।

1.जीवन का जल वही है, युगानुयुग तृप्ति देने;
उसको यदि पीओ भाई, प्यासे कभी न होगें तुम;
युगानुयुग तक भी ।

2.जीवन का मार्ग वही है, स्वर्ग राज्य में प्रवेश करने;
प्रभु यदि तुम्हें चुना है, पिता के पास निश्चय जाओगे;
युग युग राज्य करने को ।

3.जीवन की रोटी वही है, भुखो को तृप्ति देने;
उसको यदि तुम खाओगे, भूखे कभी न होंगे तुम;
युगानुयुग तक भी ।

4.एक मात्र द्वार वही है, स्वर्ग राज्य में प्रवेश करने;
इसी मार्ग में जाओगे यदि, निश्चय स्वर्ग में प्रवेश करोगे;
असीम सुख के भागी होगे ।

5.एक मात्र सत्य यीशु है, सारे जग के उद्धार के लिए;
यदि उसे अपनाओगे, अनन्त दण्ड से बच जाओगे;
उसके साथ सदा रहोगे । ,
297 सब लोगो जल्दी आओsab logo jaldee aao
‘‘पूछो, कि अच्छा मार्ग कौनसा है, और उसी में चलो ।’’
(यिर्मेयाह 6:16)

सब लोगो जल्दी आओ, सच्चे प्रभु को जान लो;
स्वर्ग पहुँचाना चाहो, सन्देश यीशु का सुन लो ।।

1.पापों को अपने जो मानता, पाप-मार उसका हटाता;
प्रभु यीशु मार्ग दिखाता, परलोक वह पहुँचाता ।

2.होवे किसी जाति का, या हो किसी भी देश का;
भेदभाव यहाँ नहीं होता, यीशु ही सब को बचाता ।

3.पापी को पुत्र बनाता, प्रभु यीशु मित्र बनाता;
हर पाप को वह हटाता, छुटकारा भी वह देता ।

4.परिश्रम करनेवाले, बोझ से दबे हुए लोगो;
प्रभु यीशु पास अब आओ, विश्राम, शान्ति पाओ ।

5.दूजा नहीं कोई देखो, यीशु ही रक्षक परखो;
कुकर्मो से धूल जाओ, उद्धार और आशीष पाओ ।
298 यीशु तुझे बुलाता है आजyeeshu tujhe bulaata hai aaj
‘‘गुरु यही है, और तुझे बुलाता है ।’’ (यूहन्ना 11:28)
यीशु तुझे बुलाता है आज, सुन ले घ्यान से मधुर आवाज ।।

1.लोहू कलवरी पर बहाया,... सब संकट दुःख वह सहा;
प्रेम किया जग के लिए वह,... करुणा से हाथ फैलाया;
ग्रहण करने को ।

2.मसीह प्रेम को जान लो तुम, स्थिर मन को कर लो भी तुम;
उसकी लम्बाई, चौड़ाई, गहराई,... कितनी ऊँची समझो आज तुम;
निकट आ जाओ ।

3.प्रीति से ही यीशु प्रभु ने,... प्राण दिया तेरे लिए;
जिसके द्वारा प्रेम मैं जाना,... आज अनुभव कर लो उसको;
पाप मान लो ।

4.भाले से वह छेदा गया था,... प्रेम से सब वेदना सहा था;
समाप्त करके सिर झुकाया,... सब का वह सृष्टिकर्ता;
शरण उसकी लो ।

5.मनुष्य सारे जगत को पाए,... और प्राण की हानि उठाए;
लाभ क्या है आज तुम सोचो,... उसके चरणों में तुम आकर;
विश्राम पा जाओ ।
299 प्रभु यीशु बुलाता आजprabhu yeeshu bulaata aaj
‘‘जो कोई मेरे पास आएगा उसे मैं कभी न निकालूँगा ।’’
(यूहन्ना 6:37)

प्रभु यीशु बुलाता आज पापियों को सभी,
आते जो हैं उन को प्रभु विश्राम देता है ।।

1.दुनिया के लोगों ने तो महा पाप कर के,
ईश्वर की महिमा से दूर वे सब हो गए;
मनुष्य के धर्म के काम गन्दें चिथड़े है ।

2.प्रभु यीशु में अब कोई पाप दोष है भी नहीं,
काठ पर टांगा गया हमारे पाप के लिए;
मृत्यु पर जयवन्त होकर धर्मी ठहराया है ।

3.जितने विश्वास लायेगें प्रभु यीशु मसीह पर,
वे ही पायेगें उस से अनन्तकाल का वह उद्धार;
आज ही है प्रसन्नता का दिन, उद्धार का दिन है ।

4.स्वर्गीय पिता के पुत्र वे हैं जो विश्वास किये,
न्याय और मृत्यु नहीं है, जीवन वे पायेंगे;
सिद्ध बनो यीशु के लोहू से धुलकर साफ हो जाओ ।

5.पापों की क्षमा करने का अधिकार यीशु को है,
जिन के पाप क्षमा होंगे वे ही तो धन्य है;
धन्य वे हैं स्वर्ग में सदा, धन्य वे ही है ।
300 सुन ले पुकार !sun le pukaar !
‘‘यदि आज तुम उसका शब्द सुनो... ।’’ (इब्रानियों 3:7)

सुन ले पुकार ! तुझ से प्रभु कहता है, (2)
बच जाएगा, तुझे बुलाता है ।।(2)

1.धर्मियों को नहीं पापी को बुलाता,(2)
सारे संसार का वह मुक्तिदाता; (2)
तुझ से वह पूरे दिल से प्रेम करता है ।(2)

2.खोए हुओं को ढूँढ़ने वह आया, तुझ को वह ढूँढ़ता, ध्यान जरा दे;
तुझ को बचाने को पास खड़ा है ।

3.जीवन बन कर प्रभु यीशु आया, बहुतायत का जीवन तुझ को मिले;
इसलिए प्रभु आज पास आया है ।

4.ज्योति खुद होकर जग में वह आया, अन्धकार तेरा, देख तू सके;
पाप अन्धियारे का दूर करता है ।

5.आया हटाने पहिले का जो है, दूसरे को वह तो स्थिर करता है,
सोच जरा अभी तू कहाँ पर है ।
301 सुन लो मेरे भाइयोंsun lo mere bhaiyon
‘‘वह बहिरों को सुनने की और गूंगों को
बोलने की शक्ति देता है ।’’ (मरकुस 7:37)

सुन लो मेरे भाइयों,
मसीहजी मेरा दुनिया में आया ।।(2)

1.दुनिया में आया, मुक्ति को लाया,(2)
पापी को आन बचाया, बचाने यीशु दुनिया में आया ।(2)

2.स्वर्गीय पिता का एकलौता बेटा,
मनुष्य का पुत्र कहलाया, कहलाने यीशु दुनिया में आया ।

3.अन्धों को आँखे, गूंगों को बोली;
बहिरांे को शब्द सुनाया, सुनाने यीशु दुनिया में आया ।

4.कोढ़ी अपाहिज चंगे किये हैं,
मुर्दो को आन जिलाया, जिलाने यीशु दुनिया में आया ।

5.हम जब गुनाह में पड़े हुए थे,
अद्भुत प्रेम दिखाया, दिखाने यीशु दुनिया में आया ।

6.दुनिया के खातिर क्रूस पर चढ़कर,
अपना रक्त बहाया, बहाने यीशु दुनिया में आया ।

7.जो कोई उस पर विश्वास लाया,
उसको मसीह ने बचाया, बचाने यीशु दुनिया में आया ।

8.धन्य धन्य यीशु प्रभु हमारे,
हम को पिता से मिलाया, मिलाने यीशु दुनिया में आया ।
302 सब यीशु की जय जय बोलोsab yeeshu kee jay jay bolo
‘‘हर एक जीभ अँगीकार करले कि यीशु मसीह ही प्रभु है ।’’
(फिलिप्पियों 2:11)

सब यीशु की जय जय बोलो, सब पाप से हाथ को धो लो ।।

1.यीशु हमारा प्यारा है,... सब का तारणहारा है;(2)
मन का वह उजियाला है,... मन की घुंडी खोलो ।(2)

2.हमारे खातिर दुःख उठाया,... जग में अपना खून बहाया;
चलने को सीधा रास्ता बताया,... पाप में अब मत भूलो ।

3.समय नहीं है दुनिया में तेरा,... पाप के भँवर में क्यों है घिरा?
यीशु मन को लगा दो फेरा,... मन की आँखें खोलो ।
303 भजो-भजो प्रभु यीशु नामbhajo-bhajo prabhu yeeshu naam
‘‘यहोवा का धन्यवाद करो, कयोंकि वह भला है ।’’
      (भजन 118:1)

भजो-भजो प्रभु यीशु नाम,(2)
जपो-जपो मीठा यीशु नाम ।।(2)

1.यीशु नाम से मिलती है मुक्ति,(2)
और नाम से उस के है शुद्धि ।(2)... भजो

2.यीशु नाम है कितना प्यारा, वह दुखियों का असली सहारा ।

3.यीशु नाम है कितना सुन्दर, देता शान्ति है मन के अन्दर ।

4.यीशु नाम है शक्तिवाला, जिस नाम से भूत निकाला ।

5.यीशु नाम है सब से ऊँचा, सब स्वर्ग और पृथ्वी में ऊँचा ।
304 भजता क्यों नही रेbhajata kyon nahin re
‘‘वे उसे नाव पर चढ़ा लेने को तैयार हुए और तुरन्त वह नाव
उस स्थान पर जा पहुँची जहाँ वे जाते थे ।’’
(यूहन्ना 6:21)

भजता क्यों नही रे मन मूरख,... यीशु नाम सच्चा नाम;(2)
पार करेगा जीवन नैया,... यीशु नाम सच्चा नाम ।।(2)

1.भव सागर से है यदि तरना,... दुःख संकट से नहीं कुछ डरना;(2)
पार करेगा जीवन नैया,... यीशु नाम, सच्चा नाम ।(2)

2.दुनिया के यह गोरख धन्धे,... जीवन के है सारे फन्दे;
यीशु नाम को भज ले रे बन्दे,... यीशु नाम, सच्चा नाम ।

3.दुनिया में तू ने पाप कमाया,... पाप में सारा वक्त गँवाया;
यीशु नाम को क्यों नहीं भजता,... यीशु नाम, सच्चा नाम ।

4.टूटे-फूटें हौज बनाए,... जिन में पूरी शान्ति न पाए;
तुझ को पूरी शान्ति देगा,... यीशु नाम, सच्चा नाम ।

5.दुनिया से तुझे हो कहीं जाना, फिर माया में क्यों फंस जाना;
जीना है तो जब लग भजले, यीशु नाम, सच्चा नाम ।
305 भज ले, यीशु का नामbhaj le, yeeshu ka naam
‘‘वह तेरा प्रभु है, तू उसे दण्डवत कर ।’’       (भजन 45:11)

भज ले, भज ले, भज ले, यीशु का नाम;
तेरे सब ही बनेेंगे काम ।।

1.जो तू चाहे मुक्ति पाना,... और बचाना प्राण;
शरण में आ जा यीशु मसीह की,... होगा तेरा कल्याण ।

2.माया मोह बिसार दे बन्दे,... छोड जगत की प्रीत;
आया है सो जाएगा वह,... यही जगत की रीत ।

3.दिन बीते छिन-छिन में जाते,... अभी कर ले चेत;
पीछे पछताएगा क्या ?... जब चिड़ियाँ चुग गई खेत ।

4.क्रूस पर चढ़ के संकट सह के,... प्राण किया बलिदान;
स्वर्ग की हम को राह बताई,... और सिखाया ज्ञान ।

5.जब लग तेरा बन्दे प्यारे,... है इस जग में वास;
यीशु मसीह को तू अपना ले,... हो जा उसका दास ।
306 यीशु को तू भज लेyeeshu ko too bhaj le
‘‘वह तेरा प्रभु है, तू उसे दण्ड़वत कर ।’’
      (भजन 45:11)

यीशु को तू भज ले, जाने कौन घड़ी आ जाए,... भजले
यीशु को तू भजले ।।

1.स्वर्ग लोक से आया यीशु,(2)
मुक्ति संदेशा लाया यीशु;(2)
उठ जा खुश हो तौबा करले,(2)
धोले पाप घनेरे,... भजले,... यीशु को ।

2.आ... आ... वह तुझे बुलाता पापी, आ...
आ वह तुझ को देगा मुक्ति,
खड़ा खड़ा वह खट खट करता,
खोल दे मूरख मन का द्वार;
यीशु मसीह भीतर आ जाए... भजले... यीशु को ।
307 भाई, बहनो, पाप की माफीbhaee, bahan, paap kee maaphee
‘‘मन फिराओ सुसमाचार पर विश्वास करो ।’’
( मरकुस 1:15)

भाई, बहनो, पाप की माफी माँग लो, प्रभु यीशु से ।।(2)

1.समय अब तो आ गया है,... यीशु जी के राज्य का;(2)
मुक्ति उद्धार पाओगे तुम,...  यदि विश्वास लाओगे ।(2)

2.मनुष्य चोला लेकर के,... स्वर्ग से उतर आए;
अपना लोहू बहाके,... पाप का बन्धन खोल दिए ।

3.कलवरी के क्रूस पर,... प्राण अपना उस ने दिया;
सभों के पापों के लिए,... लोहू उसने बहाया ।

4.समय नहीं है भाई,...  जल्दी करके आ जाओ;
शुभ सन्देश पर विश्वास करो,... उद्धार मुक्ति पा जाओ ।

5.पाप के भवसागर में,... कब तक फँसे रहोगे ?
प्रभु यीशु मांझी है,... उद्धार उससे पाओगे ।
308 तेरे दिल के द्वार परtere dil ke dvaar par
‘‘हे मेरे पुत्र, अपना हृदय मुझे दे ।’’ (नीतिवचन 23:26)

तेरे दिल के द्वार पर यीशु खटखटाता,
खोलो तुम दरवाजा, वह है आना चाहता ।।

1.बनना चाहता है वह,... हाँ हाँ, तेरा ही मेहमान आज;(2)
तेरा रंज ओ फिक्र,... वह उठाना चाहता ।(2)

2.खुशी अपनी देता,... हाँ हाँ, होवे तू प्रतापी;
रात दिन तेरे साथ ही,... वह है रहना चाहता ।

3.नम्र आवाज से बोलता,... हाँ हाँ, मुआ वास्ते तेरे;
‘छोडो तुम ढिठाई,...  खोलो द्वार मैं आता ।’

4.‘तेरे खातिर मैंने,... हाँ हाँ, पहिना ताज कँटीला;
तुझ को अब प्रतापी,... ताज हूँ मैं पहिनाता ।’

5.‘बेवफा न हो तू,... हाँ हाँ, मेरे खून खरीदे;
कर मेरा इकरार तू,... मुझ से क्यूं शर्माता ।’

6.खोलता हूँ दरवाजा,... हाँ हाँ, दिल का ऐ मसीहा;
आ और इस मैं रह तू,... मैं हूँ दिल से चाहता ।

7.यीशु प्यारे कहता,... हाँ हाँ, कीमती वक्त है जाता;
वक्त गया जो प्यारो,... वापस फिर नहीं आता ।
309 हृदय तुम खोलोhrday tum kholo
‘‘उस उद्धार को जो मसीह यीशु में है,
अनन्त महिमा के साथ पाएँ ।’’ (2 तीमुथि 2:10)

हृदय तुम खोलो, आओ यीशु पास;
है मुक्ति केवल प्रभु यीशु में,
कब तक तुम निश्चित बैठे रहोगे;
प्रस्तुत हो जाओ अब न्याय के लिए,
प्रस्तुत हो जाओ अब स्वर्ग के लिए ।।  हृदय तुम खोलो...

1.गर्भ ही से मनुष्य पापी वह होता, धर्मी कोई नहीं है;
लोभ, डाह, धृणा, कपट, अभिमान, पाप के दाग ये सब हैं ।

2.धर्म-कर्म के चादर से ढांपकर, पाप कभी नहीं छुपता;
ये पाप के दाग जो हटाना चाहो, कोई दवा है नहीं ।

3.लापरवाह बनकर संसार में फँसे, मृत्यु आकर पकड़ेगी;
पाप की मजदुरी नरक में जाना, बचाएगा कौन तुम को ?

4.पाप में तुम जीते आत्मा नाश करते, इससे क्या लाभ अब होगा;
रोना, तडपना, सहने से बाहर, जलन तुम पाओगे ।

5.पाप तुम्हारे थे सजा तुम्हारी, तिस पर प्रेम ख्रिस्त ने किया ।
क्रूस पर प्रभु ने लोहू बहाया, तुम्हें धोने के लिए ।

6.पाप अपना मानो, प्रभु को पुकारो, कि मैं पापी एक हूँ;
लोहू से धोकर क्षमा वह देगा, और उद्धार तुम पाओगे ।
310 यीशु को ग्रहण करोyeeshu ko grahan karo
‘‘जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के
सन्तान होने का अधिकार दिया,... ।’’
(यूहन्ना 1:12)

यीशु को ग्रहण करो, ख्रिस्त यीशु को ग्रहण करो,
अब हृदय के द्वार आज खोलो तुम, वह शीघ्र प्रवेश करेगा ।।

1.दया करने में वह धनी है, तुम्हें ममता करके वह छुड़ायेगा;
पाप की भयंकरता से वह तुम को, छुटकारा देने ढूंढने आया ।

2.सारे पापों को माफ करेगा, वह सब रोगों को चंगा करेगा;
करुणा करके मुकुट पहना कर, तुम को बहुत ही आदर देगा ।

3.अंधों को उसने आँखे दी, और लंगड़ो को उसने चलाया भी,
नाना प्रकार के रोगी जो आये, तुरन्त उनको चंगाई भी दी ।

4.पाप का भार उठाने को, और रोगों को सब हटाने को;
कोड़े खाये और दुःख सहा भी, जयवन्त हुआ परीक्षाओं पर ।

5.कलवरी क्रूस पर टंगाया गया, और लोहू की धार उससे फूट निकली;
हाथों में कीलें, पावों में कीलें, काँटों का ताज सिर पर पहना ।

6.जीवन देने हमें प्राण दिया, और सब परीक्षा में वह जयवन्त हुआ
मारा गया और फिर जी उठा, योग्य है वही बचाने को ।
311 अनुग्रह का समय अब हैanugrah ka samay ab hai
‘‘देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है,
देखो अभी वह उद्धार का दिन है ।’’ (2 कुरिन्थियों 6:2)
अनुग्रह का समय अब है, प्रभु यीशु को ग्रहण करो ।।

1.सारे संसार को प्राप्त अगर करो, आत्मा की हानि उठाओ यदि;
लाभ कुछ न होगा मित्र यह जानो, यह जीवन पाए भी;
प्रेमी आवाज तुम ख्रिस्त की आज सुनकर, हृदय अपना खोलो;
प्रभु यीशु के चरणों में आकर अनन्त मुक्ति ले लो ।

2.धर्म कर्म और संस्कार के द्वारा, पवित्र कदापि न बनोगे;
भक्ति का रूप चाहे जितना भी धरो, स्वर्ग में न जा सकोगे;
इसलिए मित्र सारा पाप अपना, यीशु पास आज मान लो;
महान प्रभु के चरणों में गिरकर, जीवन अर्पण करो ।

3.सच्ची मुक्ति का एक ही मार्ग, प्रभु यीशु ख्रिस्त को तुम समझो;
पाप मार्ग को छोडो पश्चाताप अब करो, प्रभु की शरण में आओ;
मान लो सब पाप को खेदित हृदय से, लोहू से उसके धूल जाओ;
स्वर्गीय आशीष, अनन्त जीवन, प्रभु के पास से ले लो ।

4.ख्रिस्त में केवल है अद्भुत जीवन, स्वर्गीय आशीष की भरपूरी;
मृत्यु की वहाँ प्रभुता नहीं, कैवल है यीशु में जय;
दण्ड़ की आज्ञा अब नहीं है, श्राप सब दूर गया;
नरक का द्वार अब बन्द हो गया, उसकी सामर्थ में
312 द्वार अनुग्रह का खुला अब हैdvaar anugrah ka khula ab hai
‘‘दूल्हा आ पहुँचा, और जो तैयार थी,
वे उसके साथ ब्याह के घर में चली गई ।’’
(मत्ती 25:10)

शीघ्र आओ यीशु बुलाता है ।।

1.नाश कोई न हो, प्रभु चाहता है;
सब उद्धार पाए प्रभु धीरज धरता है,
मन परिवर्तन का अवसर यह है, इसलिये प्रभु अब बुलाता है ।

2.जब तक यह द्वार खुला हुआ है,
प्यार से प्रभु तुम्हें यह कहता है;
प्रवेश करो मेरी यह इच्छा है, जो माने वह खूब आशीष पाता है ।

3.रात बहुत अब बीती, दिन निकलता है;
पाप के कामों को तजो प्रभु कहता है,
धार्मिकता का सूरज उदय होता है;
हो जाओ तैयार अब प्रभु आता है ।

4.आधी रात को धूम मची, ‘‘दूल्हा आता है’’;
भेंट करने के लिए तुम्हें जाना है;
चल देंगे वे ही जो तैयार अब हैं,
बाद में प्रभु द्वार बन्द करता है ।

5.जाना चाहते हो यदि, तैयार होना है;
यीशु के लोहू से तुम्हें क्षमा लेनी है;
आदर के साथ तुम्हें प्रवेश करना है,
प्रेमी पिता की यही मनसा है ।
313 ईश्वर ने जगत सेeeshvar ne jagat se
‘‘ईश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया ।’’
(यूहन्ना 3:16)

ईश्वर ने जगत से प्रेम ऐसा किया,
एकलौता पुत्र उसने दे दिया ।।

1.जो कोई उस पर विश्वास लाया,
नाश न हुआ पर अनन्त जीवन पाया ।

2.प्रेम उसका अद्भुत और सनातन है,
प्राण अपना दिया लोहू बहाया ।

3.प्रभु बुलाता पापी मनुष्य को,
जो कोई आया लहु से धुल गया ।

4.खोए हुओं को प्रभु अब ढूँढ़ता,
जो कोई आया मुक्ति वह पाया ।

5.पाप में मरे हो तौभी प्रभु चाहता,
जो कोई आया जीवन बहुत पाया ।

6.खेदित हृदय से जो पछताया,
महान उद्धार उसी क्षण पाया ।

7.नया जन्म जो कोई न पाया,
ईश्वर का राज्य बन्द उसने पाया ।
314 प्रेमी मसीह के प्रेम बराबरpremee maseeh ke prem baraabar
‘‘इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं ।’’ (यूहन्ना 15:13)

1.प्रेमी मसीह के प्रेम बराबर, प्रेम है कोई नहीं;
प्रेम हुआ अवतारण, प्रेम से जान दी अपनी;
प्रेम से दी है तसल्ली, (2) प्रेम नगर में बिराजा ।

2.प्रेमी मसीह के प्रेम के लिए, दिल में जगह है नहीं;
प्रेम के जो है बैरी, प्रेम से आँख चुरानी;
कब लग दूर रहेगा ? सुन्दर समय खोएगा ।

3.होवे कैसा पापी ऐ भाई, प्रेम वह करता तुझे;
पापों का भार तू लाकर, चरणों में सीस नवादे;
मुक्तिदाता है यीशु, सच है बचाता यीशु ।

4.गफलत में क्यों भुला फिरे है, मुक्ति से ऐसी बड़ी;
आज है दिन मुक्ति का, अनुभव करले तू उसका;
देन खुदा की यही है, आ इसे तू अपना ले ।

5.संकट में वह साथ भी देता, मित्र है सच्चा वही;
दुःख में वही है सम्भाले, जब कोई काम न आवे;
यीशु ही मुझको सुहावे, और कोई याद न आवे ।

6.उसके प्रेम का हूँ मैं पुजारी, भक्ति है सच्ची यही;
क्रूस का प्रेम लुभावे, दुनिया मुझे न भावे;
पीछे मैं उसके चलूँगा, बेड़ा पार लगावे ।
315 कौन है यीशु जानते हो?kaun hai yeeshu jaanate ho?
‘‘पर यह व्यक्ति पापों के लिये एक ही बलिदान
सर्वदा के लिए चढ़ाकर,... ।’’ (इब्रानियों 10:12, 13)

कौन है यीशु जानते हो ? आज मैं बताता हूँ सुन लो,
ध्यान अपना दो, जल्दी आओ, उद्धार पा जाओ ।।

1.प्रभुओं का प्रभु यीशु है, मानव जन्म में आया जग में;
मारा गया और फिर जी उठा, सब को पाप से छुड़ाने को ।

2.प्रभु यीशु ही धनवान है, दरिद्र बन कर आया जग में;
रुप-स्वरुप अपना वह खोया, सब को पाप से छुड़ाने को ।

3.पापी का तारक यीशु ही है, क्रूस पर खून वह बहाया है;
पाप जो मानते, पश्चाताप करते, धोता लोहू से उन सब को ।

4.जान लो यीशु है परमेश्वर, आयेगा राजाओं का राजा होकर;
जो मानेेंगे स्वर्ग में रखेगा, नरक ही उनको माने न जो ।

5.यीशु का मैं प्रतिनिधी बनकर, ईश्वर के प्रेम की गवाही देकर;
बिनती करता हूँ विनय से तुम से, आज ही मानो प्रभु यीशु को ।
316 देखो, देखो जरा कलवरी परdekho, dekho jara kalavaree par
‘‘जब वे उस जगह जिसे कलवरी कहते है पहूँचे... ।’’
(लूका 23:33)

देखो, देखो जरा कलवरी पर, प्रेम का अद्भुत चिन्ह खड़ा वहाँ;
लटका है उस में सब का तारणहार, देने तुम्हें आज महान उद्धार ।।

1.मनुष्य आज कितने नाशवान हैं, सोचते कभी न हम मरेंगे;
पर यह जानों कि मृत्यु निश्चय, उसके बाद युग-युग रहोगे कहाँ ?

2.जीते जी सब कुछ चाहिए हमें, मरते समय न कुछ ले जायेंगे;
मृत्यु के बाद हमें फिर जीना है, अन्त में सब का एक दिन न्याय होना है ।

3.प्रभु गरीब सब के लिए बना, सब कुछ पापियों के लिए दिया;
अपनाओ उसे आज त्राजा बना, जीना अब से तुम उसके लिए ।

4.क्रूस धातित मसीह पर नजर उठाओ, अब उसे तुम सब न नकारो;
उस प्रेम के बदले में अपने को दो, हृदय में उसे आज प्रभु मानो ।
317 यीशु सलीब पर मुआyeeshu saleeb par mua
‘‘वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए
क्रूस पर चढ़ गया... ।’’ (1 पतरस 2:24)

यीशु सलीब पर मुआ, तेरे लिए, मेरे लिए;
कैसा महान दुःख सहा, तेरे लिए, मेरे लिए ।।

1.धारा वह कैसी खून की, ख्रिस्त के क्रूस से बह गई;
धुल गए पाप मिट गए दाग, यीशु मसीह के लोहू से ।

2.धो डालो आज पापों को, दिल से मिटा लो दागों को,
हो जाओ साफ तन मन से आज, यीशु मसीह के लोहू से ।

3.मारा गया था क्रूस पर, छेदा गया था क्रूस पर;
मैं भी बचा और तुम भी बचो, यहोवा की सजाओं से ।
318 अन्धकार में खोए हुओं कोandhakaar mein khoe huon ko
‘‘मनुष्य का पुत्र (यीशु) खोए हुओं को ढूंढ़ने और उनका
उद्धार करने आया है ।’’ (लूका 19:10)

अन्धकार में खोए हुओं को, आया प्रभु ज्योति दिखाने;
स्तुति, महिमा हो प्रभु को, अन्धकार में खोए हुओं को, ।।

1.निष्कलंक बलिदान निदोष प्रभु का,
अमूल्य लोहू मुक्ति का उपाय बना;
उसके बदले में तुझे क्या चढ़ाऊँ ? स्तुति, महिमा हो प्रभु को ।

2.मृत्यु पर विजयी होके प्यारे प्रभु ने,
जा बेठा दहिने पिता के बिनती करने;
उसके बदले में तुझे क्या चढ़ाऊँ ? स्तुति, महिमा हो प्रभु को ।

3.जीवन, ज्योति, रक्षक, प्रतिफल जो तुम ही हो;
निःस्वार्थ प्रेम, सत्य, आनन्द, धीरज हो;
विश्वासयोग्य, शान्ति, आशा, सर्वेसर्वा हो, स्तुति, महिमा हो प्रभु को ।
319 जगत में आया है तारणहारjagat mein aaya hai taaranahaar
‘‘परमेश्वर ने अपने लोगों पर कृपा-दृष्टि की है ।’’
(लूका 7:16)

जगत में आया है तारणहार, (2)
सुनकर हम पतितन की पुकार;(2)
जगत में आया है तारणहार ।।(2)

1.गिरते हुऔ को पल में उठाकर,
पाप कारण का नाम मिटाकर, कर दिया बेड़ा पार ।

2.पाप-प्याला उसने पीया है,
मरके मरण को जीत लिया है, खोला स्वर्ग का द्वार ।

3.उठो, और उठकर सब मिल गाओ;
यीशु मसीह का नाम जगाओ, कर दो प्रेम का प्रचार ।
320 मनुष्य रुप घारण करकेmanushy roop dhaaran karake
‘‘कि यही सचमुच में जगत का उद्धारकर्त्ता है ।’’
(यूहन्ना 4:42)

मनुष्य रुप घारण करके, आया यीशु जगत में;
तारणहारा वही है भाई, इस पापी संसार का ।।(2)

1.चढ़ा क्रूर क्रूस पर सहा दुःख और पीड़ा,
बहा दिया सारे शरीर से, अमूल्य लोहू की धारा;
देखो प्रिय क्रुस के ऊपर, और नहीं है सहारा ।   ...तारणहारा

2.परमेश्वर ने अपना प्रेम कैसा प्रगट किया,
धृणित पापियों के लिए, क्रूस पर उसने प्राण दिया;
अपना लो आज यीशु को भाई, मुक्तिदाता के रुप में ।

3.अशान्ति में कुडकुड़ाकर, पाप के भार से दब जा कर,
रहते भाई, दुर क्यों तुम, आँसु के घूंट को पी कर;
यीशु तुम को आज बुलाता, आओ उसके चरणों में
321 पापी के लिए प्रभुजीpaapee ke lie prabhujee
‘‘हम को उसमें उसके लोहू के द्वारा छुटकारा मिला है ।’’
(इफिसियों 1:7)

पापी के लिए प्रभुजी, (2) क्रूस पर बलि हुआ;
निष्कलंक लोहू बहाके पापी को मुक्त है किया ।।

1.फँसे हुए हो दुष्ट इस जगत में, भाइयों;
डूब रहे हो प्रतिदिन पाप में
पापों को अब भी अपने छिपा करके,
अनन्त जीवन कैसे तुम पाओगे ।पापी के...

2.पापों के बोझ से दबे हुए भाइयों, आओ;
यीशु पास आके विश्राम प्राप्त करों,
नम्र जन को मन में विश्राम देगा;
अपनी प्रतिज्ञा पूरी वह करेगा ।

3.चौड़ा है मार्ग जो पहुँचाता नरक को, भाईयो;
सकरा है मार्ग जो पहुँचाता स्वर्ग को,
यीशु है वही, एक ही, सत्य मार्ग;
वही केवल स्वर्ग ले जाएगा ।

4.बिता रहे हो छाया सा यह जीवन, भाइयों;
कब है जाना, क्या कह सकते हो ?
दीन होकर पहले खून में पाप धो लो,
विश्वास के द्वारा मुक्ति-दान प्राप्त कर लो ।
322 बिन यीशु नहीं होbin yeeshu nahin ho
‘‘और किसी दूसरे से उद्धार नहीं ।’’ (प्रेरितो 4:12)

बिन यीशु नहीं हो, निस्तारा,(2)... बिन यीशु नहीं हो ।

1.पूरब ढूंढ़ा पश्चिम ढूंढ़ा,(2)... ढूंढा फिरा जग सारा ।

2.बाइबल पढ़कर राह जो पाई,... खोज लियो जग सारा ।

3.खेस कुटुम्ब कोई काम न आवे,... मतलब का संसारा ।

4.भूले अब तुम काहे फिरत हो,... आए पड़ो सत्य द्वारा ।

5.वाही यीशु के मैं बलि जाऊँ,... जातन होई उद्धारा ।

6.पापन भारी नाव हमारी,... डूबत है मझधारा ।

7.वा बिन अब कुछ बन न पड़त है,... लाख जतन करि हारा ।

8.रे मत मन अब वाहि तू भूले,... वा बिन नहीं गुजारा ।
323 यीशु बिन पापीyeeshu bin paapee
‘‘उस समय में मसीह से अलग... आशाहीन... थे,
पर अब... मसीह के लोहू के द्वारा निकट किए गए हो ।’’
(इफिसियों 2:12, 13)

यीशु बिन पापी का नहीं है ठिकाना ।।(2)

1.दुनिया है दो दिन का ठिकाना,
सदा किसे नहीं रहना, आ... आ...
भूला फिरे फिर क्यों तू जगत में,(2)
सोच जरा कहाँ जाना;
फिर आखिर तुझ को जाना ।

2.तू ने जगत में पाप कमाया, पाप में वक्त गंवाया, आ... आ...
ईश्वर को बिसराया तू ने,
शक्ल को अपनी बिगाडा, फिर आखिर तुझ को जाना ।

3.ख्रिस्त यीशु ने सूली चढ़ के, पापी को आन बचाया, आ... आ...
संकट सह के लोहू बहाया,
पाप का डंक मिटाया, फिर आखिर तुझ को जाना ।

4.ख्रिस्त सदा मन में है मोरे, पापी प्यारे आ जा, आ... आ...
लावे जो विश्वास तू उस पर,
होगा वह तेरा सहारा, फिर आखिर तुझ को जाना ।
324 यह प्रेम का डंका आलमyah prem ka danka aalam
‘‘यदि मैं पृथ्वी से ऊँचे पर चढ़ाया जाऊँ तो सब लोगों को
अपने पास खीचूंगा ।’’ (यूहन्ना 12:32)

यह प्रेम का डंका आलम में, बजवा दिया सूलीवाले ने ।।(2)

1.इन मुर्दे दिलों में जान डाली, उम्मीद हमारी हरी कर दी;(2)
यह करके करिश्मा लोगों को, दिखला दिया सूलीवाले ने ।(2)

2.जान सूली पर प्यारी अपनी दी, रंजों से तसल्ली हम को दी;
यह प्रीत का प्याला लोगों को, पिलवा दिया सूलीवाले ने ।

3.अन्धों को आँखे उसने दी, लंगड़ो को टांगे उसने दी;
यह आश्चर्य करके लोगों को, दिखला दिया सूलीवाले ने ।

4.गफलत की नींद हम सोये थे, नाहक उमर को खोते थे;
इस गहरी नींद से लोगों को, जगा दिया सूलीवाले ने ।

5.वह प्रेम से सब को बुलाता है, भटकों को रास्ता दिखाता है;
यह प्रेम का पाठ, सब लोगों को, पढ़वा दिया सूलीवाले ने ।
325 गुरु कौन पूरा, गुरु कौन पूराguru kaun poora, guru kaun poora
‘‘हे प्रभु हम किस के पास जाएँ ? अनन्त जीवन की बातें
तो तेरे ही पास हैं ।’’ (यूहन्ना 6:68)

गुरु कौन पूरा, गुरु कौन पूरा,... जिस के मन में प्रेम भरा ।।

1.जग के गुरु नहीं पाप निवारे,... लोभ है रखते मन में;
तन, मन, धन वह अर्पण मांगे,... दास कहे चेता के ।

2.सच्चा सत् गुरु वा को कहिए,... जो है जग से न्यारा;
कलंक, कपट वा में मिले नहीं,... शुद्ध बुद्ध में हो पूरा ।

3.वैसा सत् गुरु हम ने देखा,... यीशु मसीह भरपूरा;
आत्मा शान्ति दिल में देता,...  मन में प्रेम है भरता ।

4.क्रूस पर उसने पाप उठाए,... लोभ, स्वार्थ हटाए;
पापी जन के पाप उठाए,...  और करे उद्धारा ।
326 ख्रिस्त है सर्वाधिकारीkhrist hai sarvaadhikaaree
‘‘जो सर्वशक्तिमान है
यह कहता है कि मैं ही अल्फा और ओमिगा हूँ ।’’ (प्रकाशितवाक्य 1:8)

ख्रिस्त है सर्वाधिकारी,... ख्रिस्त है अल्फा ओमिगा;
आदि और अन्त भी ख्रिस्त है,... युगानुयुग भी ख्रिस्त है;
ख्रिस्त है सर्वाधिकारी ।।

1.वास्ते हमें बचाने,... प्राण क्रूस पर उसने दिए;
नम्र और दीन बनकर,... पापी उसने बचाए ।

2.तारण तुम्हारा करने,... समय वह दे रहा है;
दिन आज है अनुग्रह का,... अभी उसे अपना ले ।

3.अपनी महिमा के साथ,... प्रभु फिर आ रहा है;
जो उसकी बाट जोहें,... उन्हीं को वह ले जाए ।

4.वे जिन के वस्त्र शुद्ध है,... दीप उन के भी जलते है;
प्रभु के आने पर वे,... दिल से खुशी मनाएँ ।

5.प्रभु कि सेवा में जो,... दुःख, संकट और क्लेश आएँ;
प्रकाशित मुकुट इनाम,... बन जाएँगे बदल कर ।

6.खुशी के आँसू के साथ,... स्तुति के गीतो के साथ;
करेंगे प्रभु की महिमा,... गायेंगे हल्लेलूयाह ।
327 जब प्रभु का मेम्ना पाकjab prabhu ka memna paak
‘‘हमें उस के लोहू के द्वारा छुटकारा मिला है ।’’
(दफिसियों 1:7)

1जब प्रभु का मेम्ना पाक, क्रूस पर बलि हो गया;
तब वहाँ से निकला था खून का सोता,
क्या वह तेरा है सदा, जिस में खुश तू है रहता;
पाप के बन्धन से आजाद, खून के द्वारा ?

2.जो तू है बहुत अशुद्ध तेरे हृदय में है दुःख,
तौभी हुआ तू है शुद्ध उस के खून से;
तेरा सारा पाप अपराध, खून के द्वारा होता दूर;
छुटकारा तू ग्रहण कर, उसके खून से ।

3.जल्द सुन यीशु की आवाज, ‘लूंगा दुल्हिन अपने पास;’
क्या है साफ तेरा लिबास, खून के द्वारा ?
वाचा में क्या रहता है, हर दिन स्थिर ऐ प्यारे भाई ?
दिन दिन जय तू पाता है, खून के द्वारा ?

4.यीशु हो तेरा सन्मान, मैं अब हूँ तेरा सन्तान;
दिल से धन्य मैं मानता हूँ, खून के लिए;
जब हो दुःख और शोक तमाम, और मैं जाऊँगा आसमान;
तब वहाँ पर गाऊँगा, खून के लिए ।
328 प्रभुजी तुम कोprabhujee tum ko
‘‘प्रभु तू योग्य है ।’’ (प्रकाशित 5:9)

प्रभुजी तुम को,
प्रभुजी तुम को, जय-जयकार, तुम ही सृष्टि के सिरजनहार;
सारे जगत के पालनहार, प्रभुजी तुमको, (2) जय-जयकार ।

1.प्रेम तुम्हारा मनोहर लागे, जीवन ज्योति दिल में जलाए;
पापी मनुष्य सब, आएँ शरण तब, संगत में तेरी सुख है अपार ।

2.जखमी यीशुजी सब को बुलावे, स्वर्ग नगर का मार्ग बताये;
आओ तृषित जन पियो जीवन-जल, ऐसे हटेगा पापों का भार ।

3.बालक तुम्हारे गुण गीत गाएँ, सीस नवाएँ सब दिन गाए;
तुझ में हूँ मगन प्रभु निरंजन, जय प्रभु यीशु जय-जयकार ।
329 जग में मसीह की हो जयकारjag mein maseeh kee ho jayakaar
‘‘सारी जातियाँ उसको भाग्यवान कहेगी ।’’
      (भजन 72:17)

जग में मसीह की हो जयकार,
सब प्राणी करें जय-जयकार ।।

1.जग के लिए प्रभु ने अपनी जान क्रूस पर दी,
जग के लोगों तुम सब सुन लो, (2) वह है तारणहार ।

2.पापी का वह कैसा प्रेमी जब वह निकट आए,
उस को लेकर प्यारा मसीहजी करता है उद्धार ।

3.यीशु हमारा प्रभु ही है, राजाओं का राजा है;
तुम सब मिलकर गाओ प्रभु के नाम की जय-जयकार ।

4.बोलो जय-जय प्रभु यीशु की, वह जो जीता है;
जग के लोगों तुम सब बोलो, वह है त्राणाधार ।
330 पाप सहित आ तू अबpaap sahit aa too ab
‘‘उसी समय पाप और मलिनता धोने के निमित्त,
एक बहता हुआ सोता होगा ।’’ (जकर्याह 13:1)

1.पाप सहित आ तू अब सोते पास, भार दुःख का लेकर के आ;
डुबो तू दे उसके जल में, सुख निश्चय वहाँ पावेगा ।
शीघ्र तू कर - कर तू न देर,
प्राण अपने विलम्ब कर के मत खो;
ख्रिस्त यीशु दया से आज ही,
चाहता बचाना तुझ को ।।

2.जैसा तू है आ इस सोते पास, यीशु ने पाप निहारे;
यद्यपि पाप तेरे हो लाल, होंगे सफेद बरफ से ।

3.आ और निरोग हो इस सोते पास, सुनो वचन शान्ति का;
पाप से जब पापी पलटते, करते दूत गान आनन्द का ।

4.करेंगे जो पश्चताप अब, है उनके लिये वचन;
विश्वास के द्वारा से वे तब, पायेंगे उससे जीवन ।
331 यीशु का लोहू अनुपमyeeshu ka lohoo anupam
‘‘और उसके पुत्र यीशु का लोहू
हमें सब पापों से शुद्ध करता है ।’’(1 यूहन्ना 1:7)

यीशु का लोहू अनुपम है जो,
पाप सब धोने को... भाइयों,... पाप सब धोने को ।

1.देखो जरा भाई, ईश्वर ने कैसा,
प्रेम किया जगत से... भाइयों,... प्रेम किया जगत से,
भेजा था उसने यीशु मसीह को,
प्राण क्रूस पर देने को... भाइयों,... प्राण क्रूस पर देने को ।

2.यीशु मसीह ने जगत में आकर,
प्राण किया बलिदान... भाइयों,... प्राण किया बलिदान,
पापी जगत का पाप उठाकर,
क्रूस पर दिया प्राण... भाइयों,... क्रूस पर दिया प्राण ।

3.सुनो जरा भाई, यीशु मसीह का;
स्वर्गीय समाचार... भाइयों,... स्वर्गीय समाचार,
पवित्र और स्वर्गीय प्रेम का,
करते हैं हम प्रचार,... भाइयों... करते हैं हम प्रचार ।

4.सरल विश्वास और टूटे हृदय से,
मांगो क्षमा उस से... भाइयों,... मांगो क्षमा उस से,
यीशु के अनमोल लोहू की धारा,
धोती है पापों को... भाइयों,... धोती है पापों को ।

5.पाप का भार लेकर भाई,
जाओगे कहाँ तक... भाइयों,... जाओगे कहाँ तक,
यीशु मसीह की शरण में आओ,
पाप अपना मानकर... भाइयों,... पाप अपना मानकर ।

6.बीत रहा है यह छोटा जीवन,
शीध्र ही आ जाओ,... भाइयों... शीध्र ही आ जाओं,
विश्वास लाकर यीशु प्रभु पर,
उद्धार पा जाओं,... भाइयों,... उद्धार पा जाओं ।

7.शांति और आनन्द पवित्र प्रेम के,
हो जाओ भागीदार... भाइयों,... हो जाओ भागीदार,
पाप-सागर से पार कराने,
यीशु है तारणहार... भाइयों,... यीशु है तारणहार ।
332 जीवन किस के लिएjeevan kis ke lie
‘‘जो कुछ तूने इकट्ठा किया है, वह किस का होगा ?’’
(लूका 12:20)

जीवन किस के लिए, तेरा जीवन किस के लिए ?
जब तक तू इस संसार में जीएगा,
जीवन किस के लिए, तेरा जीवन किस के लिए ?

1.शरीर की लालसाओं में जीते है जो, इस संसार में, इस संसार में;
सुखाभिलाष में रहते है जो, इस संसार में, इस संसार में;
इन सब की चिन्ता निरन्तर बुरी है,
और इनका जीवन पापी और श्रापित है ।तेरा जीवन...

2.घन के लोभी जो बहुत ही है, इस संसार में, इस संसार में;
सांसारिक मनवाले बहुत ही है, इस संसार में, इस संसार में;
इन सब की चिन्ता निरन्तर घन है,
और इनका जीवन सुखा और हीन है ।

3.अपने ज्ञान पर जो मान करते हैं, इस संसार में, इस संसार में;
ऐसे लोग ही घमंडी होते है, इस संसार में, इस संसार में;
इन सबके मन बहुत ही संकुचित है,
और इनका जीवन लज्जा से भरा है ।

4.टूटे मनवाले भी बहुत हैं, इस संसार में, इस संसार में;
नमक की नाई जो पिघल जाते हैं, इस संसार में, इस संसार में;
वे सब मसीह में छिपे और दृढ़ हैं,
शुद्ध वे होकर सेवा करेंगे ।
333 यह जीवन तेरा दो दिन काyah jeevan tera do din ka
‘‘सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या ?’’
( याकूब 4:14)

यह जीवन तेरा दो दिन का है, एक दिन तुझे मिट जाना है ।।

1.पानी के बुन्दके क्षण ही भर में, जैसे बिलकुल मिटते हैं,
छाया जैसे पलकों में ढलती, वैसा ही तेरा जीवन है ।

2.धन, सम्पत और खेस कुटुम्ब सब, जो इस जग में तेरे अपने है,
व्यर्थ ही है इन सब की माया, सब को यहीं छोड़ जाना है ।

3.क्यों तू भूला है ऐसे जगत में, क्यों जान पापों में खोता है,
आ जा पास तू प्यारे यीशु के, जिसने खून बहाया है;
जो तुझ को पास बुलाता है ।
334 संसार को छोड़करsansaar ko chhodakar
‘‘यहाँ हमारा कोई स्थिर रहनेवाला नगर नहीं, वरन्... ।’’
(इब्रानियों 13:14)

संसार को छोड़कर जाना पडेगा,
सब कुछ यहाँ पर रह जाएगा, रह जाएगा ।।

1.यात्री है हम सब इस दुष्ट जगत में,
कुछ न हमारा है बुरे संसार में;
न करें धमण्ड और मान-अभिमान, मान-अभिमान;
सचेत होकर अब चलना पड़ेगा ।

2.दुःखी, निराशी, वेदना से परिपूर्ण,
आँसु बहता जीवन कितना ही बेचैन;
भरोसा उस पर और साहस रखें, साहस रखें;
दृष्टि मसीह पर रखना पड़ेगा ।

3.जब तक इस जग में हम सब रहेंगे,
शैतान से हरदम लड़ते रहेंगे;
उसकी युक्तियों को हम जानते हैं, जानते हैं;
हिम्मत से आगे बढ़ना पड़ेगा ।

4.पिछली बातों को अब आओ हम भूलकर,
दौड़े आनन्द से सब निशाने की ओर;
जो भी मार्ग में आए, झेलें मिलकर, झेलें मिलकर;
इनाम लेने योग्य होना पड़ेगा ।

5.आपस में झगड़ा, कपट, ईर्ष्या जो है;
आओ हम छोड़े, अब प्रेम से सब रहें;
निष्कलंक, पवित्र, निर्दोष रहकर, निर्दोष रहकर;
सिद्धता को थामे रहना पड़ेगा ।

6.जीवित प्रभु यीशु हम को बचाया,
पाप से छुड़ाकर नया जन्म दिया;
इसलिए आता है ले जाने को, ले जाने को;
अब तो हमें तैयार होना पड़ेगा ।

7.आत्मिक दृष्टि से देखते वह नगर,
कितना ही अद्भुत, पवित्र और सुन्दर;
पहुँचेंगे शीघ्र ही देर नहीं है, देर नहीं है;
आदर से प्रवेश करना पड़ेगा ।
335 व्यर्थ ही व्यर्थ हैvyarth hee vyarth hai
‘‘व्यर्थ ही व्यर्थ, व्यर्थ ही व्यर्थ ! सब कुछ व्यर्थ है ।’’
(सभोपदेशक 1:2)

व्यर्थ ही व्यर्थ है, सब कुछ व्यर्थ है;
नाशमान यह दुनिया, नाश के लिए है ।।

1.बुरे संसार में सब कुछ बुरा है,
रंग इसका फीका होता जाता है ।

2.देखो तो कैसा वह भ्रष्ट भी हुआ है,
पाप का घड़ा अब तो पूरा भरा है ।

3.चारों तरफ देखों पाप अशुद्धता है,
लड़ाई और हिंसा से बिलकुल भरा है ।

4.संसार में सब कुछ मिटता जाता है,
यह संसार सचमुच अयोग्य ठहरा है ।

5.व्यर्थ के संसार में न कोई है अपना,
स्वार्थ, विरोध और ईर्ष्या से पूर्ण है ।

6.एक दिन परमेश्वर ही, जलाएगा इस को,
नाश होगा सब कुछ हमेशा के लिए ।

7.एक राज्य तैयार, धार्मिकता जिस में है,
प्रभु की महिमा सदा वास करती है ।

8.जाओगे क्या तुम, उस अद्भुत राज्य में ?
पश्चताप करो, मुक्ति यीशु में है ।
336 क्यों भूला है नादानkyon bhoola hai naadaan
‘‘ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो ।’’ (इफिसियों 5:15)

क्यों भूला है नादान,
कर बुरे-भले का घ्यान ।।

1.क्या कभी जाना पाप में जन्मा है ?
हृदय और काम में पाप ही पाप है,... अभी तू है अनजान ।

2.पाप की मजदूरी भयानक मृत्यु है,
और नरकदण्ड सदा की आग है,... तोड़ दे सब अभिमान ।

3.सुन ले आज तू प्रभु के वचन को,
कहता है प्रेमी यीशु आज तुझ को,... इच्छा उस की तू जान ।

4.प्रभु नहीं चाहता पाप में तू नाश हो,
अवसर देता पश्चातापी हो,... अपने को पहिचान ।

5.आज्ञा प्रभु की यह हर कोई जाने,
मन फिरा आज उद्धार पाने,... पश्चाताप कर, तू मान ।

6.कह दे प्रभु से, मुझ पापी पर;
करुणा कर प्रभु पाप क्षमा कर,... पायेगा क्षमा का दान ।

7.सच्चे हृदय से यदि तू माँगा है,
निश्चय जान ले प्रभु से पाया है,... यह है उद्धार महान ।
337 माया मोह और लोभ मेंmaaya moh aur lobh mein
‘‘व्यर्थ ही व्यर्थ, सब कुछ व्यर्थ है ।’’
(सभोपदेशक 1:2)

1.माया मोह और लोभ में भाई भूला क्यों फिरे ?
धास की नाई ये जवानी एक दिन मिट जाये ।
मृत्यु आती ! मृत्यु आती !सब के जीवन में,
अनुग्रह के दिन ऐ भाई घटते है जाते ।।

2.देख, समाधि मुंह पसारे है तेरे लिए;
लेकिन यीशु अब बुलाता ऐ भाई तुझे ।

3.परमेश्वर के वचन के चिन्ह पूरे सब होते,
प्याले उसके कोप के दुनिया पर डाले जाते ।

4.बलाओं को देखते-देखते दिल हैं हिल जाते,
उसके सन्त उससे मिलने को तैयार हो जाते ।

5.‘सत्य और जीवन, मार्ग मैं हूँ’, कहा यीशु ने;
दूसरी कोई राह नहीं है, देखो तुम खोज के ।

6.मुक्तिदाता है बुलाता तू उसकी सुन ले,
छोड़ के पापों को पियारे अपना ले उसे ।
338 माया मोह में धोखाmaaya moh mein dhokha
‘‘व्यर्थ ही व्यर्थ, व्यर्थ ही व्यर्थ ! सब कुछ व्यर्थ है ।’’
(सभोपदेशक 1:2)

माया मोह में धोखा न खाओ तुम,
प्रभु यीशु में उद्धार मिलता है ।।

1.खेस कुटुम्ब और बीबी बच्चे सब, धन दौलत और मान सुन्दरता;
ये सब चीजें भाप के समान है, कबर में ही सब अन्त हो जाएँ ।

2.फन खोले सांप जैसे भयंकर, वैसे ही पाप तेरे पीछे पड़ेगा;
पाप की मजदूरी क्या मृत्यु नहीं ? इसका अन्त है अनन्त नरक ।

3.तुझ को बचाने के लिए प्रभु, स्वर्ग छोड़ कर दुनिया में आया;
तेरे बदले में दुःख वह उठाया, क्रूस पर यीशु बलि हो गया ।

4.अभी तो अपना पाप सब मान ले, पापमय जीवन जो तेरा है;
अनुग्रह से वह तुझ को बचाएगा, आज ही है देखो उद्धार का दिन ।

5.सारा बदन जो धायल हुआ था, पवित्र लोहू उसने बहाया;
अनन्त जीवन तुझे देने को, मृत्यु पर जयवन्त हो के जी उठा ।
339 न्याय का सिंहासन सामनेnyaay ka sinhaasan saamane
‘‘हम सब का हाल मसीह के न्यायासन के
सामने खुल जाएगा... ।’’ (2 कुरिन्थियों 5:10)

न्याय का सिंहासन सामने रखा है,
ध्यान से जरा देख कोई बैठा है ।।

1.क्या प्रभु चाहता है कि कोई नाश हो ?
धीरज धरता है तेरे लिए वह, अवसर देता वह मन को फिरा ले;
नहीं जो नरक दण्ड तेेरे लिए है ।

2.जाँच तू आज अपने को मौका जब मिलता,
क्या पाया मुक्ति लोहू में जो है, यदि तू नकारे और मन कठिन हो;
याद रख तराजु प्रभु के हाथ में है ।

3.चुप-चुप करके पाप किया है, अन्धकार में भी देखा प्रभु है;
बच न सकेगा उसकी आँखो से, न्याय का हंसुआ हाथ में उसके है ।

4.खुलेंगी किताबें सब के लिए है, लिखा जो हुआ है अपने बारे में;
न्याय तब करेगा वध हुआ मेम्ना, न्याय का वो सूप प्रभु लिया है ।

5.मसीह में अब जो हैं दण्ड की आज्ञा नहीं, आशीष पाएँगे और आदर भी;
सदा प्रभु के साथ वे रहेंगे, जीवन मुकुट देने खड़ा है ।
340 गुनाह की सजा जहन्नमgunaah kee saja jahannam
‘‘पाप की मजदूरी तो मृत्यु है... ।’’
(रोमियो 6:23)

1.गुनाह की सजा जहन्नम, जहन्नम (3), ऐ गुनाहगार तू समझ ले;
ये चीजें सारी फानी है, फानी है (3), अनदेखी चीजें अब्दी हैं ।
यीशु राजा आएगा, बहुत जल्द आएगा;
आसमान पर ले जाने को हम को,
यीशु राजा आएगा, बहुत जल्द आएगा;
आसमान पर ले जाने को हम को ।।

2.अब छोड़ दुनिया के सुखों को, सुखों को, कि उसकी खुशी फानी है;
होगी तमाम जब जिन्दगी, जिन्दगी, कोई कौड़ी साथ न जाएगी ।

3.दिन तेरे बीते जातें है, जातें है, दुनिया के बे-अर्थ सोचों में;
पेश्तर खुदा के गजब से, गजब से, तू आ कदमों पर यीशु के ।

4.यीशु के खून के चश्मे को, चश्मे को, देख बहता कलवरी से;
गुनाह सब होंगे तेरे दूर, तेरे दूर, उसमेें जल्द गोता खाने से ।

5.मैं तो था बहुत गुुनाहगार, गुनाहगार, यीशु ने मुझ को किया साफ;
क्यों नहीं जाता उसके पास, उसके पास, ताकि तू भी हो बिलकुल पाक ।
341 दुनिया है धोखा सरासरduniya hai dhokha saraasar
‘‘देख मैं शीध्र आनेवाला हूँ ।’’
(प्रकाशित 22:12)

1.दुनिया है धोखा सरासर, सरासर(3), पर देख तू बैबल, गुनाहगार;
जो आँख से देखता क्षणिक है, क्षणिक है(3), अविनाशी प्यारा यीशु है ।
प्यारा यीशु आता है,
वक्त गुजरता जाता है, हम मिलेंगे उस से हवा में ।।(2)

2.मैं था कमजोर, लाचार और हेच गुनाहगार, बचाया मुझे यीशु ने;
तू भी जो है कमजोर, हेच गुनाहगार, ईश्वरीय दान तू मुफ्त में ले ।

3.मन फिरा दिल से कर स्वीकार यीशु का, वह देगा तुझे जिन्दगी;
सेवा भी कर और अपने क्रूस को उठा, अविनाशी मुकुट पाएगा ।
342 मन फिराओ, मन फिराओman phirao, man phirao
‘‘मन फिराओ, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है ।’’
(मत्ती 4:17)

मन फिराओ, मन फिराओ; परमेश्वर का राज्य निकट है ।।

1.यहोवा का वह राज्य जो है, सब जातियों पर उसकी प्रभुता है;
उस राज्य की महिमा की चर्चा करे,
उसके राज्य के प्रताप में गौरव है ।

2.उसका राज्य सदाकाल का है, अटल और स्थिर रहता, दृढ़ है;
जो मन के दीन, उन्हीं का यह है,
वे धन्य है, स्तुति करते हैं ।

3.नये जन्म के अनुभव के द्वारा, उस राज्य को देखने पाओगे;
आत्मा के द्वारा जो जन्म लिया,
उस राज्य में प्रवेश करने का हक है ।

4.कोई मांस और लोहू न पाएगा, अधिकार उस अद्भुत राज्य में;
पापी की कोई मीरास नहीं है,
न दुष्टों का उस में भाग कोई है ।

5.आओ ! राज्य के योग्य हम सब बने,
अन्धकार के वश से छुड़ाया हमें;
अपने पुत्र के राज्य में वह लाया हमें,
स्तुति प्रशंसा हम सब करते है ।
343 प्रभु ओर आँख उठाओprabhu or aankh uthao
‘‘यीशु की ओर ताकते रहें ।’’
(इब्रानियों 12:2)

प्रभु ओर आँख उठाओ,... यीशु ओर आँख उठाओ;
जहाँ है प्रेम शांति, आनन्द,... आशा, धीरज की सम्पूर्णता ।।

1.बीते दिनों को याद न करो,... पाप अधर्म जो हुए;
भूल दिखाकर, हमें सुधारता,... दयालु मुक्तिदाता ।

2.भविष्य क्या है ? कहाँ रहूँ मैं ?... चिन्ता इसकी न करना,
संकट दुःख में हम सभों का,... प्रभु यीशु है सहारा ।

3.चारों तरफ अन्धकार जो छाया,... दुःख लड़ाई घनेरे;
भयभीत होता कहाँ मैं जाऊँ ?... यीशु तू साथ हो मेरे ।

4.भरोसा जग में कहीं नहीं है,... व्यर्थ ही सारा व्यर्थ है;
प्रभु के चरण में है शरण,... दया के सागर यीशु ।
344 कलवरी के सहारेkalavaree ke sahaare
‘‘क्रूस,... परमेश्वर की सामर्थ है ।’’  (1 कुरिन्थियों 1:18)

कलवरी के सहारे,... बच जाएगा प्यारे ।।

1.सूली ऊपर चढ़के,... दुःख हमारे उठाए;
प्राण देके प्यारे,...  आया दिल में हमारे ।कलवरी के...

2.क्यों न गुण गाऊँ उसके,... अपने सारे दिल से;
उसके पीछे-पीछे चलके,...  देखूं प्रेम के कार्य ।

3.उसका खून प्यारा,... बनके जीन्दगी की धारा;
सारे धब्बे मिटाए,... धोके पाप हमारे ।

4.उसकी कदर वह जाने,... जो कि जखम पहचाने;
लहू जिन के निकल के,... आया दिल में हमारे ।

5.सुवार्ता को लेके,... जाएँ लोगों पास सारे;
तौबा पापों से करके,... बच जाएँ बिचारे ।

6.प्रभु शक्ति मुझे दे,... हिम्मत मेरी बढ़ा दे;
मझधार में जाके,... लाऊँ सब को किनारे ।
345 यीशु के पथ को छोड़करyeeshu ke path ko chhodakar
‘‘सच्चा परमेश्वर और अनन्त जीवन यही है ।’’
(1 यूहन्ना 5:20)

यीशु के पथ को छोड़कर कहीं जावे मतिना,
कहीं जावे मतिना, तू घबरावे मतिना ।।

1.जो देखा है सत इस में, मुक्ति मिलती है इस पथ में;
बाइबल से अपने दिल को हटावे मतिना ।

2.चाहे अपने को धर्मी दिखाओ, मुक्ति की खोज न पाओ;
झूठी शिक्षा के धोखे में कभी फँसो ना ।

3.हम तो मसीह के धोरे आते, अपने पापों को धुलवाते;
चला जावे जन्नत को तू घबरावे मतिना ।

4.भाई यीशु-यीशु गा ले, अपने पापों से जी हटा ले;
इस पापी के तू दिल को डुबावे मतिना ।
346 यीशु प्रभु है तेरा तारणहाराyeeshu prabhu hai tera taaranahaara
‘‘ऐसा महान उद्धार... ।’’ (इब्रानियों 2:3)

यीशु प्रभु है तेरा तारणहारा,
ऐसे महान तारण से निश्चिन्त न रहना;
यीशु प्रभु है तेरा तारणहारा ।।

1.पाप की मजदूरी मृत्यु है, प्रभु का वरदान जीवन है;
करेगा यदि विश्वास तू पायेगा उस जीवन को,
प्राण देकर क्रूस पर, उसने खरीदा खून देकर;
भूलेगा क्या यीशु को ? प्रेम उसका न भूल जा ।

2.आँखोने जो नहीं देखा, कानों ने जो नहीं सुना;
बातें जो चित्त में नहीं चढ़ी, प्रभु ने वे सब तैयार की;
प्राण देकर क्रूस पर, उसने खरीदा खून देकर;
बहरा न बन, ध्यान दे, उसकी मधुर वाणी पर ।

3.जिसे मृत्यु पर शक्ति थी, नाश प्रभु ने कर दिया;
मृत्यु के भय में सब जो थे, यीशु ने उन्हें छुड़ा लिया;
प्राण देेकर क्रूस पर, उसने खरीदा खून देकर;
खोलेगा क्या मन का द्वार ? यदि खोले, वह आएगा ।

4.क्रूस के लोहू से ढ़ा दिया बीच की दिवार को,
सब जो थे ईश्वर रहित, मेल पिता से हो गया;
प्राण देकर क्रूस पर, उसने खरीदा खून देकर;
देर न कर, करले मिलाप, यीशु से आज ही ।

5.ईश्वरीय स्वभाव में और पवित्र आत्मा में,
स्वर्गीय बुलावे में, भागीदार हम हो गए;
प्राण देकर क्रूस पर, उसने खरीदा खून देकर;
सन्तों की मीरास में, भागीदार तू हो जा ।

6.ईश्वरीय पवित्रता, आनेवाली महिमा;
प्रभु यीशु मसीह में भागीदार हम हो गए,
प्राण देकर क्रूस पर, उसने खरीदा खून देकर;
अपना भाग लेने को, फूर्ति से तू आ जा ।

7.वस्त्र सफेद पहने हुए खजूर कि ड़ालियाँ लिए,
जाति-जाति के लोग सब स्वर्ग में दिखाई देते है;
ईश्वर और मेम्ने कि सेनाएँ मिलकर गाते है,
गाएगा क्या तू भी मिल ? गाता जा हल्लेलूयाह ।
347 महान उद्धार, अनन्त उद्धारmahaan uddhaar, anant uddhaar
‘‘ऐसा महान उद्धार... ।’’ (इब्रानियों 2:3)

महान उद्धार, अनन्त उद्धार, पूरा उद्धार वह है;
निश्चिन्त रहोंगे, कैसे बचोगे ? ले लो मसीह देता है ।

1.प्रभु हमारा उद्धार कर सींग जो है,
शत्रु हराने को सामर्थी वह है,... विजय हम को देता है ।

2.प्रभु हमारा उद्धार की चट्टान है,
स्थिर भी हम को उसने किया है,... पैरों को दृढ़ रखा है ।

3.प्रभु हमारा उद्धार का गढ़ भी है,
सम्पूर्ण सुरक्षित उसी में हम है,... हमको सम्भालता वह है ।

4.प्रभु हमारा उद्धार की ढ़ाल भी है,
दुष्टों के हमलों को सदा रोकता है,... और हमें बचाता है ।

5.प्रभु हमारा उद्धार का टोप भी है,
ताकि मुक्ति सब जीवन से देखें,... आशा में हम जागते है ।

6.मुक्ति का प्याला खुब छलकता है,
उद्धार के सोते से तृप्त किया है,... भरपूरी सब तुझ में है ।

7.उद्धार का वस्त्र हमें पहनाया वह है,
धार्मिकता का चोगा हमें दिया है,... आनन्द हमने पाया है ।
348 गाओ सना, गाओ सनाgao sana, gao sana
‘‘वह प्रभुओं का प्रभु और राजाओं का राजा है ।’’
(प्रकाशित 17:14, इफिसियों 2:22)

गाओ सना, गाओ सना, प्रभु यीशु महान राजा बना ।।

1.हे यरूशलेम फाटक अब खोलो, राजा अन्दर आयेगा;
रोको न उस को अभी जगह दो, प्रभु यीशु आज राजा बना ।

2.क्यों तुम भूले हो अपने पापों में, त्राता तुम को बुलाता है;
दूर न रहो अब और न नकारो, मानो उस को वह राजा बना ।

3.यीशु ने कहा नया जन्म लो, राज्य में उसके तुम जाओगे;
कर लो ग्रहण अब यीशु राजा को, हृदय का राजा वही बना ।

4.राजा यीशु अब घर है बनाता, सनातन अद्भुत सुन्दर है;
नक्शे के अनुसार वही जो करता, प्रभु और राजा वही बना ।

5.जीवते पत्थर से घर है बनाता, आत्मा के द्वारा बनाता है;
याजक हम बन कर सेवा करें अब, राजा स्तुति के योग्य बना ।

6.ईश्वर का निवास-स्थान होने के लिए, एक साथ बनते जाते हैं;
रचना है अद्भुत यीशु राजा की, सम्पूर्ण उसका घर है बना ।
349 जी हमने यीशु सेjee hamane yeeshu se
‘‘हम मसीह की ओर से बिनती करते है, कि परमेश्वर के
साथ मेल मिलाप कर लो ।’’ (2 कुरिन्थियों 5:20)

जी हमने यीशु से कर ली प्रीत ।।

1.अपना बेगाना सब तज दीना, मुक्ति की कर ली चेत । ... जी हम

2.मूरत मन्दिर देवी देवता,... ये सब है बालू की भीत ।

3.ईश्वर सत्य यीशु जग में आया,... पापीयों का हो गया मीत ।

4.यीशु बिना वे कैसे बचेंगे,... जिन को नहीं परतीत ।

5.जो जन पाप से न पछतावे,... पड़ेगा नरक के बीच ।

6.शैतान और दुनिया, जिस्म के बल पर,... होगी तेरी कुल जीत ।

7.यीशु के पीछे हो ले रे भाई,... स्वर्ग में गाएगा गीत ।
350 जीवन मेरा बदल गयाjeevan mera badal gaya
‘‘मैं अन्धा था और अब देखता हूँ ।’’ (यूहन्ना 6:25)
1.जीवन मेरा बदल गया है,(3) जब से दिल में यीशु आया है ।
शान्ति आनन्द,(3) कैसा अद्भुत वह आनन्द है ।।

2.मन की आँखे अब खुल गई हैं ? जब से यीशु ने स्पर्श किया है ।

3.क्या तू चाहता है भरपूर आनन्द ? आज यीशु के पास जल्द आ ।

4.क्या तू चाहता है सच्ची शान्ति ? आज यीशु के पास जल्द आ ।

5.क्या तू चाहता है अनन्त जीवन ? आज यीशु के पास जल्द आ ।

6.क्या तू चाहता है स्वर्गीय आशीष ? आज यीशु के पास जल्द आ ।

7.यदि तू ग्रहण करे आज यीशु को ? वह दिल में तेरे आयेगा ।
351 किस खोज में हो सब तुमkis khoj mein ho sab tum
‘‘तुम किस की खोज में हो ?’’ (यूहन्ना 1:38)

किस खोज में हो सब तुम,... इस पापी दुनिया में ?
सुनो यीशु की वाणी तुम ।।(2)

1.सूरज के नीचे क्या अब, ढूंढ़ते हो बुद्धि ज्ञान को ?
या मौज मजा, धन-मान, सब पाना चाहते हो तुम ?
जानों यह व्यर्थ है सब, दुःख से भरा यह जग,
एक दिन पछताओगे तुम ।

2.ईश्वर के राज्य को ढूंढ़ो, और उसकी धार्मीकता को;
निकट है वह बहुत ही, मन फिराओ तुम आज ही;
नया जन्म लेकर, प्रवेश करो उस में;
ग्रहण करो उसको तुम ।

3.पाओगे अनन्त राज्य को, चाहिए गुण उसके लिए;
धन्य है जो मन के दीन, स्वर्ग राज्य उन्ही का है;
जो शोक करते हैं, और नम्र मन के हैं;
शान्ति आनन्द पाओ तुम ।

4.दयावन्त हो जो तुम, और मन शुद्ध जिन के हैं;
मेल जो कराते हैं, उसके पुत्र कहलाओगे तुम;
सताये जाओ यदि, और धीरज धरो तब ही;
उस राज्य में रहोगे तुम ।
352 यीशु ने तेरे वास्तेyeeshu ne tere vaaste
‘‘परमेश्वर का पुत्र जिसने मुझ से प्रेम किया और
अपने आप को मेरे लिए दे दिया ।’’ (गलतियों 2:20)

यीशु ने तेरे वास्ते, अपना लोहू बहा दिया,(2)
उसके बदले पापी मनुष्य, यीशु को तू ने क्या दिया ?(2)

1.पापो से मन फिराओं तुम, दिल से विश्वास लाओ तुम;
सूली पर चढ़ के यीशुने अपना लोहू बहा दिया ।

2.पापो का भार हमारा था, लेकिन उठाया यीशु ने;
सूली पर चढ़के खुद-ब-खुद अपना लोहू बहा दिया ।

3.प्राण जब उसने दे दिया, रखा समाघि में उसे;
तीसरे दिन वह जी उठा, जिसने लोहू बहा दिया ।

4.स्वर्ग पर विराजमान है, पापी का वह सहारा है;
लेने को आएगा हमें, जिसने लोहू बहा दिया ।

5.सब जातियों के लोगों को, सुसमाचार जाके दो;
यीशु को प्रभु मान लो, जिस ने लोहू बहा दिया ।
353 यीशु पर ला विश्वासyeeshu par la vishvaas
‘‘हर एक विश्वास करनेवाला उसके द्वारा
निर्दोष ठहरता है ।’’ (प्रेरितों 13:39)

यीशु पर ला विश्वास लोग धर्मी बन जाते है ।।

1.जो विश्वास मसीह पर लाते, पाप दिलो से है धुल जाते;(2)
वे पाते दिल में चैन, (2) नरक से वे बच जाते हैं ।(2)

2.नया जन्म ईश्वर से पाते, धर्म आत्मा से भर जाते;
और पाते जीवन मुक्त, ईश्वर के पुत्र कहाते हैं ।

3.दया, धर्म और नेक कमाई, करते हैं, ईश्वर की चाही;
तब सब खुशी आनन्द, प्रेम से दिल भर जाते हैं ।

4.यीशु की जो आए शरण हैं, दास कहें वे लोग मगन हैं;
हर हालत में खुशहाल, सदा गुण उसके गाते हैं ।
354 गर विश्वास तू लाएगाgar vishvaas too laega
‘‘देखो परमेश्वर का मेम्ना तो जगत का पाप
उठा ले जाता है ।’’(यूहन्ना 1:29)

1.गर विश्वास तू लाएगा अभी मेम्ने पर ईश्वर के,
और स्वीकार करेगा पापों का;
अपनी देह, और प्राण, आत्मा उसको देवेगा अभी;
यीशु देगा तुझ को आज उद्धार ।
यीशु देगा तुझ को आज उद्धार,
गर विश्वास तू लाएगा और स्वीकार भी करेगा;
यीशु देगा तुझ को आज उद्धार ।।

2.यीशु गिरने से बचाएगा और थामे रहेगा,
मदद करेगा परीक्षा में;
सब पापों पर तुझे पूरी तरह जयवन्त करेगा,
यीशु देगा तुझ को आज उद्धार ।

3.अगर धीरज से तू दौडेगा और उस को ताकेगा,
तब तू स्वर्गीय मुकुट पाएगा;
अपने आपको नकार के युद्ध विश्वास का करेगा,
यीशु देगा तुझ को आज उद्धार ।
355 साधु वेष में फिरनेवालेsaadhu vesh mein phiranevaale
‘‘धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता... ।’’
(गलतियों 6:7)

साधु वेष में फिरनेवाले, साध ले पापी मन को मन को;(2)
दो दिन की यह दुनिया फानी, (2) आत्मा अपनी बचा ले ।।(2)

1.दुनिया में तू ने पाप कमाया, यीशु के खून में नहा ले । ... साधु

2.यीशु बिना कहीं मुक्ति नहीं है, आ के मुक्ति पा ले ।

3.प्यारे यीशु के चरणो में आ जा, आ के जीवन पा ले ।
356 खुदा को भुलकर मसरुफkhuda ko bhulakar masaruph
‘‘हे जवान, अपनी जवानी में आनन्द कर... पर यह जान
रख कि परमेश्वर तेरा न्याय करेगा ।’’ (सभोपदेशक 11:9)

खुदा को भुलकर मसरुफ क्यों है खुद परस्ती में,
तू शबनम की तरह मेहमान शब मर बाग-ए-हस्ती में ।।

1.उठाकर सिर न चल गाफिल, (गरूरे जोश मस्ती में, 2)(2)
तुझे सोना पड़ेगा एक दिन, तुरबत की बस्ती में ।(2)

2.तेरे मरने का दिन हर दिन, (करीब आता ही जाता है, 2)
मगर तू मस्त है अब तक, शराबे-खुद-परस्ती में ।

3.अगर तू चाहता पार होना, (कहीं उस बहरे आसियाँ से, 2)
तो सब कुछ तर्क करके बैठ जा यीशु के कदमों में
357 कयों मन भूला है यह संसाराkyon man bhool hai yah sansaar
‘‘उन में से कोई अपने भाई को किसी भाँति छुड़ा नहीं
सकता है; क्योंकि उनके प्राण की छुड़ोती भारी है ।’’
      (भजन 49:7,8)

कयों मन भूला है यह संसारा,(2)
मन मत दे टुक कर ले गुजारा ।। (2)

1.इस जग में सुख नित नहीं भाई,(2)
यह तो है जैसे पानी की धारा ।(2)

2.माता पिता और खेस कुटुम्ब सब,
संग नहीं कोई जीवन-हारा ।

3.अन्त समय सब देखन आई हैं,
क्षण भर में सब होई हैं नियारा ।

4.जो कुछ अंग में होगा तुम्हारा,
वह भी सब मिल लेई हैं उतारा ।

5.नरक अग्नि में जब तुम पड़ियों,
तब नहीं कोई बचावन-हारा ।

6.भाई मुक्ति की खोज करो तुम,
यीशु मसीह प्रभु तारणहारा ।

7.आसी तो प्रभु दास तुम्हारा,
तुम बिन नाहीं और कोई हमारा ।
358 कुछ न भरोसा इस जीवन काkuchh na bharosa is jeevan ka
‘‘तुम इन व्यर्थ वस्तुओं से अलग होकर जीवते
परमेश्वर की और फिरो ।’’ (प्रेरितों 14:15)

कुछ न भरोसा इस जीवन का,(2)
करो भजन अब प्रभु यीशु का ।।(2)

1.बालकपन में तो खेल पहेली, जवानी बीती सब पापों में भूली; (2)
व्यर्थ ही व्यर्थ है रोनक जवानी, (2)
करो भजन अब प्रभु यीशु का । (2)

2.धन भी न देता है मन में शान्ति, साथ न जाती है सम्पति, भूमि;
व्यर्थ ही व्यर्थ है धन और भूमि,
करो भजन अब प्रभु यीशु का ।

3.संसार में जब मेरी दृष्टि है पड़ती, उपद्रव से भरी दिखती यह पृथ्वी;
व्यर्थ ही व्यर्थ है यह पापी पृथ्वी,
करो भजन अब प्रभु यीशु का ।

4.जब तेरा मन कहता है ”तू पापी,“ यीशु के लोहू से मिलती है मुक्ति;
आनन्द ही आनन्द है और मन में शान्ति,
करो भजन अब प्रभु यीशु का ।
359 भरोसा जीवन का नहीं हैbharosa jeevan ka nahin hai
‘‘तुम्हारा जीवन है ही क्या ।’’ (याकूब 4:14)

भरोसा जीवन का नहीं है, बादल जैसा यह जीवन है;
एक दिन सबको जाना है, सन्मुख मसीह के आना है ।।

1.ईश्वर का पुत्र यीशु है, मनुष्य रुप में आया है;
पाप से मुक्ति देता है, मार्ग और सत्य, जीवन है;
स्वर्ग के नीचे नाम और कोई न, मुक्ति देवनहार ।... भरोसा

2.धर्म और कर्म कर के जग में तू क्यों भूला है,
समय नहीं तुम नष्ट करो, वापस फिर न आता है;
यीशु मसीह अब निकट है, मुक्ति देवनहार ।

3.सच्चा हृदय लेकर मैं, हे प्रभु यीशु अब आता हूँ,
मैं पापी, हे यीशु चरणों में तेरे अब पड़ता हूँ;
लोहू क्रूस का लेता हूँ, करो मुक्तिदान ।
360 आया यीशु पापीयों के पासaaya yeeshu paapeeyon ke paas
‘‘वचन देहधारी हुआ और अनुग्रह और सच्चाई से
भरपूर होकर हमारे बीच में डेरा किया ।’’ (यूहन्ना 1:14)
आया यीशु पापीयों के पास, अपना रुप बदल के;
आया यीशु पापीयों के पास ।।

1.जन्म यीशु ने जगत में लिया, उद्धार का मार्ग उसने खोल दिया;
शैतान के राज्य को तोड़ दिया, चरनी में आप आके ।

2.मरियम के पास एक दूत आया, जिसने कहा-”तेरा एक पुत्र होगा;
नाम उसका मसीह प्रभु होगा, पुत्र परमेश्वर का कहलाके ।“

3.ज्योतिषियों ने एक तारा देखा, बालक के घर तक वह उनको लाया;
आकर उन्होंने प्रणाम किया, सोना, लोबान, गन्धरस लाके ।

4.उठो मसीहियों अब एक होकर, आगे बढ़ो सब यीशु नाम लेकर;
स्तुति और जय के नारे लगाकर, यीशु का झण्डा उठाकर ।
361 आओ मिलकर चलेंaao milakar chalen
‘‘हमें तो मसीह अर्थात् ख्रिस्त मिल गया है ।’’
(यूहन्ना 1:41)

आओ मिलकर चलें प्यारे यीशु के पास ।।

1.यीशु के पास है जिन्दगी अब्दी, यीशु के पास है मिठास ।

2.यीशु के पास है वह मीठा पानी, बुझती है जिस से प्यास ।

3.यीशु के पास आत्मा की भरपूरी, उसी पर सब रखो आस ।

4.यीशु के चरणों में जाने से अपना, उड़ता है डर और त्रास ।

5.यीशु की गोद में जो कोई बैठे, होता नहीं फिर उदास ।
362 मुहब्बत खुदा की दिखानेmuhabbat khuda kee dikhaane
‘‘जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ... ।’’
(1 यूहन्ना  4:9,10)

1.मुहब्बत खुदा की दिखाने के लिये,
सलीब पर चढ़ गया यीशु;
पहिना काँटो का था ताज कि बच जाएँ गुनाहगार,
यीशु ने दी सलीब पर अपनी जान ।
यीशु ने दी सलीब पर अपनी जान, अपनी जान;
यीशु ने दी सलीब पर अपनी जान,
कि बच जाऊँ मैं बदकार, पाऊँ शिफा मैं लाचार;
यीशु ने दी सलीब पर अपनी जान ।।

2.यह सच है कि यीशु गुनाहगारांे के लिये,
अपना कीमती खून बहाने आया था;
उसने खाई कोड़ों की मार कि बच जाएँ गुनाहगार,
यीशु ने दी सलीब पर अपनी जान ।
यीशु ने दी सलीब पर अपनी जान, अपनी जान...

3.क्रूस पर से उतार कर दफ़न कर दिया,
और कब्र पर बैठा दिया पहरा;
यीशु फतहमन्द है आज क्योंकि मौत की हुई हार,
यीशु फिर अब विभव में आएगा ।
यीशु फिर अब विभव में आएगा, आएगा;
यीशु फिर अब विभव में आएगा,
देखो यीशु का पियार, और हो जाओ तुम तैयार;
यीशु फिर अब विभव में आएगा ।
363 देखो खुदा ने पापी जगत सेdekho khuda ne paapee jagat se
‘‘परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई
इस रीति से प्रगट करता है... ।’’
(रोमियों 5:8)

देखो खुदा ने पापी जगत से कैसा किया है प्यार,
भेजा था यीशु मसीह को जगत में, क्रूस पर देने को दान ।।

1.यीशु मसीह ने आन जगत में प्राण किया बलिदान;
पापी जगत के पाप उठाए क्रूस पर देके जान ।

2.पाप का भय हो जिसके मन में, आए वह यीशु पास;
जीवन मुक्ति देवेगा, भाई, बेड़ा करेगा पार ।

3.लाया है विश्वास जो उस पर, नाश हुआ है न वह;
पापी जगत के पापों से भाई, पार लगा है वह ।
364 प्यारा है, प्यारा हैpyaara hai, pyaara hai
‘‘तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह बहुमूल्य है ।’’
(1 पतरस 2:7)

प्यारा है, प्यारा है, प्यारा है, प्यारा है;
कुल जग का मुक्तिदाता यीशु प्यारा है ।।

1.पैदा आदम से हुए थे सारे नबी,(2)
हुआ कुँवारी से पैदा, हमारा मसीह ।(2)

2.अन्धों, लंगड़ों और कोढ़ियों को बख्शी शिफ़ा;
चला पानी पर, प्यारा हमारा मसीह ।

3.कोड़े खाए मसीह ने मुसीबत सही,
चढ़ा सूली पर, प्यारा हमारा मसीह ।

4.जितने पैदा हुए थे सभी मर गये,
निकला कबर से जिन्दा हमारा मसीह ।
365 खुदा के प्यार की गहरी धारkhuda ke pyaar kee gaharee dhaar
‘‘ मनुष्य का पुत्र इस लिए आया कि
बहुतों की  छुड़ौती के लिए अपना प्राण दे ।’’ (मत्ती 20:28)

1.आसमान को छोड़कर दुनिया में आया,
दुःख और तकलीफों को उसने उठाया;
तिस पर भी दुनिया ने उसको न चाहा,
काँटो का ताज रखकर थूका मारा ।
प्यारा यीशु, प्यारा यीशु,... प्यारा, प्यारा, प्यारा यीशु ।।

2.कीलों से ठोंका और किया मसलूब,
अपनों ने किया यह उस से सलूक;
फिर भी मुहब्बत का देखो यह हाल,
मरते भी दम तक किया सब का ख्याल ।

3.आज तक उस क्रूस से है एक चश्मा जारी,
बचना गर चाहता है कर ले तैयारी;
आकर नहा ले और हो जा तू साफ,
कल जो कुछ करना है, कर ले तू आज ।

‘‘मसीह का प्रेम विवश कर लेता है ।’’
(2 कुरिन्थियों 5:14)

1.खुदा के प्यार की गहरी धार वह बहती है, वह बहती है;
जैसा बाहर वह है अपार, वह बहती है, वह बहती है;
वह मुझे देती है उम्मीद, कि मैं हरएक परीक्षा में;
अब फतह पाऊँगा उसी में, यह प्यार की धार, वह बहती है ।
हल्लेलूयाह ! वह बहती है, यह प्यार की धार, वह बहती है;
ऐ रब्ब मैं करता हूँ कबुल, यह प्यार की धार जो बहती है ।।

2.वह सब घमण्ड़ निकालती है, वह बहती...
और दिल की जंग बन्ध करती है, वह बहती...
मुहब्बत देती है मुझे, कि मैं अपने पड़ोसी से;
मुहब्बत रखूं दिल ही से, यह प्यार की धार, वह बहती है ।

3.अब अपनी खिदमत में खुदा, वह बहती...
मुझे बिलकुल सरगर्म बना, वह बहती...
और तू मेरे वसीले से, सब शोकितों को शान्ति दे;
ताकि वे जान लेवें तुझे, और प्यार की धार जो बहती है ।
367 दिल के दाग को धोवे कौन?dil ke daag ko dhove kaun?
‘‘क्योंकी वह वाचा का मेरा लोहू है
जो बहुतों के लिए बहाया जाता है ।’’(मत्ती 26:28)

1.दिल के दाग को धोवे कौन ? लोहू जो कि क्रूस से जारी;
मेरे मर्ज को धोवे कौन ? लोहू जो कि क्रूस से जारी ।
यह चश्मा है मामूर, दाग दिल के करता दूर;
है मुझ को दिल मंजूर, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।।

2.मेरे मर्ज का शाफी है, लोहू जो कि क्रूस से जारी;
माफी को वह काफी है, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।

3.वह है मेरे कर्ज का दाम, लोहू जो कि क्रूस से जारी;
वह है मेरा खास इनाम, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।

4.मेरी वह उम्मीद है खास, लोहू जो कि क्रूस से जारी;
रास्ती का है खुश लिबास, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।

5.दुःख तकलीफ में है पनाह, लोहू जो कि क्रूस से जारी;
वह है मेरे घर की राह, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।

6.मेरे गीत का है मजमून, लोहू जो कि क्रूस से जारी;
मुझ को करता है ममनून, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।
368 इम्मानुएल के लोहू सेimmaanuel ke lohoo se
‘‘मसीह का लोहू... तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से
क्यों न शुद्ध करेगा ।’’ (इब्रानियों 9:14)

1.इम्मानुएल के लोहू से एक सोता भरा है,
जो पापी उस में लेवे स्नान रंग पाप का छूटता है ।
हल्लेलूयाह मेम्ने को, मेरे लिए जान दे दी;
फिर जी उठा, फिर जी उठा, हल्लेलूयाह आमीन ।।

2.वह डाकू उसे क्रूस पर देख आनन्दित हुआ तब,
हम वैसे पापी उसी में पाप अपना धोवें सब ।

3.विश्वास से जब मैं देखता हूँ उस दोष-हीन रुधिर को;
मैं तेरी दया का बखान नित करुँ मरने लों ।

4.हे मेम्ने, तेरे रक्त का गुण कभी न मिटेगा;
और तेरी मण्डली का बखान सदा लों रहेगा ।

5.और जब ये लड़खड़ाती जीभ कब्र में चुप रहे,
तब तेरी स्तुति करूँगा और मीठे रागों से ।
369 जान मैं ने अपनी दीjaan main ne apanee dee
‘‘उसने हमारे लिए अपना प्राण दिया और
हमें भी भाइयों के लिए प्राण देना चाहिए ।’’
(1 यूहन्ना 3:16)

1.जान मैं ने अपनी दी,... खून दिया बेश बहा;
कि पावे जिन्दगी,... और मौत से हो रिहा;
यह जान, यह जान, यूँ दी तुझे,... क्या देता तू मुझे ?

2.मैं छोड़कर खास जलाल,... जमीन पर आया था;
हुआ गरीब तंग हाल,... सदमा उठाया था;
यूँ मैंने, मैंने छोड़ा सब,... क्या छोड़ता है तू अब ?

3.मुसीबत बेबयान,... मैं ने गँवारा की;
कि बचे तेरी जान,... और पावे मखलसी;
यूं दुःख, यूं दुःख में मैं रहा,... क्या तू ने कुछ सहा ?

4.मैं लाया हूँ नजात,... और माफी का इनाम;
मैं लाया हूँ नजात,... और सुलह का पैगाम;
यह सब कुछ लाया मैं,... अब तू क्या लाया है ।
370 क्रूसित यीशु की ओरkroosit yeeshu kee or
‘‘जो बातें मेरे लाभ की थी उन्हीं को मैंने मसीह के कारण
हानि समझ लिया,... ।’’ (फिलिप्पियों 3:7)

1.क्रूसित यीशु की ओर देख और ले ले जीवन;
वही तेरे लिए जीवन-दान;
अपनी दृष्टि उठा और समीप क्रूस के आ,
क्योंकि वही तू पाएगा त्राण ।
देख ! देख ! देख और जी,
क्रूसित यीशु की ओर देख और ले ले जीवन;
क्योंकि वहीं तू पाएगा त्राण ।

2.उसी ने है उठाया है तेरे पाप का बोझ,
अपना सारा ही बोझ उसे दे;
उसके पंजर से लहु था बहता रहा,
कि भरेे जाएँ ऋण सब तेरे ।

3.न तो प्रार्थना, न तो शोक से ही छूटता है पाप,
केवल उसके लहु से बचाव;
उसी पर छोड़ दे अपने सब पापों का बोझ,
दृष्टि कर, उसके बह रहे घाव ।

4.प्रभु के आमंत्रण पर तू शंका न कर,
न रहा अब तेरे लिए काम;
क्योंकि आ गया वह ही तुझे बचाने,
साथ ही देने के लिए विश्राम ।

5.अब ले उसके ही हाथों से जीवन का दान,
जिसे आज वह तुझे दे रहा;
अब तू मृत्यु का भय भी हृदय से निकाल,
क्योंकि प्रभु है जीवन तेरा ।
371 यह सुनाओं कि यीशुyah sunaon ki yeeshu
‘वैद्य चंगों को नहीं पर बीमारों को आवश्यक है ।’’
(मत्ती 9:12)

1.यह सुनाओं कि यीशु ख्रिस्त पापी को बचाता है,
ग्रहण करता हर एक को, उसके पास जो आता है ।
जा के यह सुनाओ फिर, यीशु ख्रिस्त ही त्राता है;
सभी को यह बात बताओ पापी को बचाता है ।।

2.तुम को देगा ख्रिस्त विश्राम, आओ कर उस पर विश्वास;
धोर हो चाहे कैसा पाप, रखेगा तुम्हें वह पास ।

3.अब मेरा हृदय मुझ में कोई दोष न पाता है,
मैं खड़ा सिंहासन पास, त्राता मेरा न्यायी है ।

4.जीवित हुआ मृत्यु से, मुझ को देता जीवन-दान;
कर के शुद्ध प्रभु मुझे, स्वर्ग में देता है एक स्थान ।
372 सुना हम ने सुख काsuna ham ne sukh ka
‘‘मसीह पर विश्वास कर तो तू... उद्धार पाएगा ।’’
(प्रेरितों 16:31)

1.सुना हम ने सुख का बोल, यीशु ख्रिस्त है तारणहार;
दूर फैलावें बात अनमोल, यीशु ख्रिस्त है तारणहार;
जल्दी पहुँचे हम हर देश, पर्वत पार और दरिया पार;
यीशु कहता दो संदेश, यीशु ख्रिस्त है तारणहार ।

2.मर के जीता अब सदा, यीशु ख्रिस्त है तारणहार;
गाएँ यह ही सर्वदा, यीशु ख्रिस्त है तारणहार;
धीमे गाएँ शोक समय, मन में जब हो दुःख अपार;
ख्रिस्त उठा है पाके जय, यीशु ख्रिस्त है तारणहार ।

3.आंधी, लहरें भी कहें, यीशु ख्रिस्त है तारणहार;
कहो दूर के पापी को, यीशु ख्रिस्त है तारणहार;
टापु, सागर, प्रतिगाँव, जाके करो तुम प्रचार;
बिना मुल्य है उद्धार, यीशु ख्रिस्त है तारणहार ।
373 संसार का सब से बड़ाsansaar ka sabase bada
‘‘मैं तुम्हारा चंगा करनेवाला यहोवा हूँ ।’’
(निर्गमन 15:26)

1.संसार का सब से बड़ा बैद्य,... वह है हमारा यीशु;
उनको जो पाप में हुए कैद,... है प्यार से बुलाता यीशु ।
सब संसार में मीठा नाम, पृथ्वी-स्वर्ग में मीठा नाम;
सब से प्रिय मीठा नाम: यीशु, यीशु, यीशु ।

2.तुम्हारा सब से बड़ा पाप,... है क्षमा करता यीशु;
तुम स्वर्ग में जाओ साथ मिलाप,... कि मुकुट देता यीशु ।

3.यीशु का नाम बचाता है,... हर पाप और दुःख से यीशु;
वह प्यार से अब बुलाता है,... कौन और है जैसा यीशु ?

4.हे भाइयों उसकी स्तुति गाओं,... है इसी योग्य यीशु;
और बहनो तुम भी गीत उठाओं,... है सदा धन्य यीशु ।

5.हे लड़को तुम भी राग मिलाओ,... तुम्हारा भी है यीशु;
खजूर की डाल आनन्द से लाओ,... तुमको बचाता यीशु ।

6.स्वर्ग को जब हम सब जाएँगे,... देखेंगे सामने यीशु;
कभी न मृत्यु देखेंगे,... साथ अनन्त आनन्द यीशु ।
374 आनन्द, महान आनन्द हैaanand, mahaan aanand hai
‘‘मेरा आनन्द तुम में रहे, और
तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए ।’’ (यूहन्ना 15:11)

आनन्द, महान आनन्द है, प्रभु का वह आनन्द है;
हम में बना वह रहता है, स्वर्गीय वह आनन्द है ।।

1.दूतों ने दिया था समाचार, यह कैसा बड़ा आनन्द है;
हृदय में उण्ड़ेलता स्वर्ग से प्रभु, जब पापी खेदित होते हैं ।

2.आनन्दित हो कहा प्रभु ने, नाम स्वर्ग में तुम्हारे जो हैं;
मेम्ने के जीवन की पुस्तक में, वह नाम लिखा हुआ हैं ।

3.तेरी उपस्थिति में जो है, आनन्द की भरपूरी भी है;
इच्छा तेरी जो पूरी करते, आनन्दित सदा रहते है ।

4.माँगो जो प्रभु के नाम से, पाता सब कुछ मसीह से;
ताकि आनन्द उनका पूरा हो, प्रभु यीशु ने यह कहा है ।

5.यहोवा के छुड़ाए हुए हैं, सिय्योन में आते विजय से;
उनके पास सदा का आनन्द होगा, और हर्ष आनन्द पाते है ।

6.निरादर उसके लिये हैं, निन्दित और शोकित है;
आनन्दित वे हैं कहा यीशु नेे, तेरा वचन जिनके मन में हैं ।

7.जब आत्मा बचती हैं जगत में, तब आनन्द बड़ा होता हैं;
हर दशाओं में आनन्दित हैं, हम हल्लेलूयाह गाते हैं ।
375 यीशु को ग्रहण कियाyeeshu ko grahan kiya
‘‘परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया,
उसने उन्हें परमेश्वर के संतान होने का अधिकार दिया ।’’
(यूहन्ना 1:12)

1.यीशु को ग्रहण किया, मैं, ईश्वर का पुत्र हुआ;
स्वर्गीय आनन्द और सच्ची शान्ति भी, बढ़कर विजय मैं पाया ।
धन्यवाद देता हूँ, अनुग्रह पाया;
राज्य में उसके मैं अब आया ।।

2.पिता का प्रेम मैं पाया, और मिलन भी उस से हुआ;
हाथ में अंगूठी, पाँव में जूतियाँ और नया वस्त्र दिया ।

3.अपराध क्षमा हो गया, और पाप मेरा ढ़ांपा गया;
अधर्म का मेरा लेखा न ले प्रभु, निर्दोष आत्मा में किया ।

4.यीशु में दण्ड़ हट गया, और नई सृष्टि मैं हुआ;
राजा और याजक मुझको बनाया, गाऊँ मैं हल्लेलूयाह ।

5.जग को मैं छोड़ जाऊँगा, प्रभु से मैं जा मिलूंगा;
वह दिन आता है देखो अभी है, जागृत अब मुझ को किया ।
376 मैंने जब अपने त्राता कोmainne jab apane traata ko
‘‘क्योंकि जो प्रभु का नाम लेेगा वह उद्धार पाएगा,... ।’’
(रोमियों 10:13)

मैंने जब अपने त्राता को मेरे हृदय में अपनाया,
कैसी शान्ति, अद्भुत आनन्द, मैं ने है अजमाया ।।

1.प्रभु का वचन मेरे पाप दर्शाया, आत्मा ने मेरा हृदय तोड़ा;
खेदित हुआ मैं पाप मान लिया, लोहू को हृदय में लिया ।

2.जब मैं ने अपना पाप प्रगट किया, कुछ न छिपाया सब मान लिया;
आँसुओं के साथ सच्चे विश्वास से, तब तू ने पाप क्षमा किया ।

3.पूरब से पश्चिम जितना दूर है, उतने ही दूर मेरे पापों को किया;
सागर जैसा गहरा और क्या है, उस गहरे में पाप डाला ।

4.शान्ति के लिये कडुवाहट मिली, स्नेह करके मुझे खड्डे से निकाला;
पापों को मेरे तूने उठाया, पीठ के पीछे फेंक दिया ।

5.मैं यहोवा, तेरे पापों को मिटाऊँ, स्मरण न करुँ भूल जाऊँगा;
काली धटा और बादल की नाई अपराधों को मिटा दिया ।
377 तेरे द्वार को छोड़tere dvaar ko chhod
‘‘हे प्रभु हम किस के पास जाएँ ?
अनन्त जीवन की बातें तो तेरे ही पास है ।’’
(यूहन्ना 6:68)

तेरे द्वार को छोड़ यीशु जाऊँ किधर;(2)
कहीं पाप के रोग की दवा ही नहीं ।(2)

1.तू ने कितने मरीजों को चंगा किया,
और चलने के उनको योग्य भी किया;
मैं भी पाप का रोगी हूँ कर तू दया,(2)
कि सिवा तेरे कहीं तो ईलाज ही नहीं ।(2)

2.तू ने कोढ़ियों के कोढ़ को चंगा किया,
सब दागों को उनके भी मिटा दिया;
मैं भी पाप का कोढ़ी हूँ कर तू दया,
अब सिवा तेरे लोहू के शिफ़ा ही नहीं ।

3.तू ने जैरस की बेटी को जिला दिया,
और लाजर मूर्दे को उठा दिया;
मैं भी पाप में अपने हूँ मरा हुआ,
बस सिवा तेरे लोहू के जीवन नहीं ।

4.यीशु अन्धे के पास से बढ़ने लगा,
तू दया कर, यीशु वह चिल्ला उठा;
आज तेरे निकट है वह, तू भी चिल्ला;
यदि चूप रहा मन की बिनाई नहीं
378 मैं हूँ पापी जग मेंmain hoon paapee jag mein
‘‘हे प्रभु मुझे बचा ।’’ (मत्ती 14:30)

मैं हूँ पापी जग में खोया, मुझ को कौन बचाये;
हे प्रभु यीशु, आशा रहित हूँ, तुझसे आस लगाये ।।

1.प्रभु यीशु तू जग में आया, पापी को पाप से बचाने;
मैं हूँ अभागा, तेरी शरण हूँ, और कोई काम न आये ।

2.जीवन बनकर जग में तू आया, पाप में मुर्दा मैं हूँ;
मृत्यु के बंधन में जो बन्धा हूँ, इस से कौन अब छुड़ाये ?

3.जन्म से पापी मैं जो मलिन हूँ, पापी स्वभाव में मैं जन्मा;
कर्म से पाप और बात-विचार से, तेरे विरुद्ध है पाप किया ।

4.धर्म के काम और यत्न भी करता, दान और पुण्य भी कितने;
रीति-नीति से मैं जो फंसा हूँ, कौन अब पार कराये ?

5.पाप और श्राप का दण्ड़ उठाया, मेरे बदले में प्राण दिया;
लोहू बहाया सब कुछ दिया, ताकि मैं पापी बच जाऊँ ।

6.हे प्रभु यीशु तू जो दयालु, टूटे हृदय से अब आता;
पाप क्षमा कर मेरे प्रभु तू, तू है महान मुक्तिदाता ।
379 मैं एक अधम पापी हूँmain ek adham paapee hoon
‘‘मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिए
जगत में आया जिन में सब से बड़ा मैं हूँ ।’’
(1 तीमुथियुस 1:15)

मैं एक अधम पापी हूँ,
बिनती करता हूँ प्रभु, तू क्षमा कर ।।(2)

1.अदन की बारी का गुनाह, आदम हव्वा से मुझे मिला;(2)
आदि पाप जो मुझ में आ गया था, उसी को निर्मूल कर प्रभु;
क्षमा करो यीशु प्रभु... ।

2.अपनी माता के गर्भ से, उत्पन्न हुआ मैं पाप में;
ऐसी भयंकर परिस्थिति से प्रभु मुझे तू स्वतन्त्र कर;
क्षमा करो यीशु प्रभु... ।

3.मेरे ही अपराधों के लिये, पापों के कारण जो मैं ने किये;
सत्य रहित हूँ मृतक समान, मुझे जिला दे हे प्रभु;
क्षमा करो यीशु प्रभु... ।

4.पापों को मैं ने छिपाया था, श्राप भारी मैं ने कमाया था;
खतरे से निश्चिन्त जीवन बिताया, यीशु तू तारण दे मुझे;
क्षमा करो यीशु प्रभु... ।

5.नख से सिर तक न कहीं भी, कुछ आरोग्यता नहीं थी,
चोट और सड़े हुए घावों साथ आया हूँ, हे प्रभु चंगाई दे मुझे;
क्षमा करो यीशु प्रभु... ।

6.माया-मोह से हृदय मोहित हो, देखने चला संसार को;
दाऊद की नाई जाल में फँस गया हूँ, प्रभु तू छुटकारा दे मुझे;
क्षमा करो यीशु प्रभु... ।

7.कितनी ही बार मैं दूर गया, प्रभु तेरी उपस्थिति से;
योना की नाई हूँ पेट में मछली के, हे यीशु, तू मुझे खींच ले;
क्षमा करो यीशु प्रभु... ।
380 यीशु तू मुझे पाप से बचाyeeshu too mujhe paap se bacha
‘‘हे परमेश्वर, मुझ पापी पर दया कर ।’’ (लूका 18:13)

यीशु तू मुझे पाप से बचा कर दया... ।।(2)

1.पाप में मैं ने जन्म लिया,... पाप में जीवन नाश है किया ।

2.बातों से मैं ने पाप है किया,... विचारों से भी पाप ही किया ।

3.घमण्ड में अपना यह जीवन बिताया,... मन को भी मैंने किया हठीला ।

4.प्रभु यीशु, तू ने कष्ट उठाया,... मेरे लिए तू ने लोहू बहाया ।

5.विश्वास से मैं ने मन है खोला,... यीशु, लोहू तेरा हृदय में लिया ।
लोहू से तेरे यीशु मैं अब मुक्ति पा गया ।
381 तारण दे पापी कोtaaran de paapee ko
‘‘हे प्रभु, मुझे बचा ।’’ (मत्ती 14:30)

तारण दे पापी को, प्रभु मुझे, तारण दे पापी को ।।

1.पुण्य नहीं प्रभु मैं ने कमाया(2)... पाप किया है जीवन खो ।(2)

2.तड़पता हूँ प्रभु पाप रोग में,... चलता हूँ मृत्यु के पथ में ।

3.वैद्य नहीं प्रभु तुझ बिन ऐसा,... चंगा करे पापी को ।

4.महासामर्थी तू यदि चाहे,... याद कर मुझ पापी को ।

5.क्या करुँ प्रभु मुझे बता तू,... सुख हो इस जीवन को ?

6.पापियों का तू मित्र बना है,... सुन पापिन की विनय को ।
382 दयालु यीशु, पापी का आश्रयdayaalu yeeshu, paapee ka aashray
‘‘मैंने स्वर्ग के विरोध में
और तेरी दृष्टि में पाप किया है ।’’
(लूका 15:18)

दयालु यीशु, पापी का आश्रय;
द्रोही हूँ, मुझ पर दया तू कर ।।

1.हे प्रभु मैं ने तेरा विरोध किया, पाप किया और दुष्टता भी किया;
नीच होकर मैं तुझे दुखित किया,
हे नाथ ! मैं पापी हूँ, माफ अब तू कर ।

2.संसार का लालच मुझे ललचाया, मेरा शरीर ऐसा भ्रष्ट हो गया;
मेरा आश्रय तू ही है प्रभुजी,
हे नाथ ! मैं पापी हूँ, माफ अब तू कर ।

3.मेरा धन, दौलत और आदर जो कुछ, हे प्रभु पाप में सब मैं खो दिया;
हे प्रभु, मैं बिलकुल खाली अब हूँ,
मेरे अपराधों को क्षमा तू कर ।

4.पराए जो थे वह बन गए अपना, और मित्रताई तो सब ने किया;
आड़े समय में ये मुझ को छोड़े,
हे पिता ! आश्रय दे सहायता अब कर ।

5.छुपे हुए मेरे पाप के लिए, नरक के योग्य मैं अब सचमुच बना;
तेरे लोहू से तू धो दे मुझे,
यीशुजी ! तेरे बिना मेरा कौन ?

6.अब से तेरी आज्ञा मैं मानूंगा, और तुझ को कभी भी न छोडूंगा;
मेरा नाम जीवन की पुस्तक मैं लिख,
सम्पूर्ण रीति से निश्चयता दे ।
383 जीवन दाता होjeevan daata ho
‘‘यीशु ने कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूँ ।’’
(यूहन्ना 11:25)

जीवन दाता हो, मन में आ जाओ;
नयी ज्योति और नया अनुभव, सब को दे जाओ ।।

1.नई सृष्टि हम सब को बनाकर, नया जन्म प्रभु दीजो;
नया हृदय और आत्मा देकर, अपनी स्तुति कराओ ।

2.नया मनुष्य प्रभु हम को बनाओ, दुनिया हम को निहारे;
नया भोजन और वस्त्र देकर, सुन्दर हम को बनाओ ।

3.नई बोली प्रभु हम को देओ, नया गीत सिखलाओ;
नया राग प्रभु हम को देकर, अपना मान बढ़ाओ ।

4.नई शक्ति हम सब को देओ, नया मार्ग दिखलाओ;
नई चाल प्रभु हम को देकर, अपना मान बढ़ाओ ।

5.नया पात्र प्रभु हम को बनाओ, जिस में धन तेरा होवे;
नया हथियार प्रभु हम को बनाकर, शैतान को तुम हराओ ।
384 दिल मेरा ले ले प्यारे यीशुdil mera le le pyaare yeeshu
‘‘हे परमेश्वर, मेरा अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर ।’’
      (भजन 51:10)

दिल मेरा ले ले प्यारे यीशु, तूने इसे बनाया है;
इस में तू अपना घर बना ले, जिस के लिए बनाया है ।। (2)

1.दुनिया की सब चीजें निकालकर, इसे पाक और साफ कर;(2)
गंदगी गुनाहों की तू धोकर, उस खून से जो बहाया है ।(2)

2.बहुत साल मैं रहा तुझ से दूर, लापरवाही ने किया दूर;
अनुग्रह, दया और प्रेम की आशीष, धीरज धर मुझे दिखाया है ।

3.जब ध्यान से पढ़ता हूँ वचन, जो राज-मार्ग प्रभु ही का है;
मार्ग, सत्य, जीवन अनन्त और विश्वास, आशा उसने बढ़ाई है ।

4.पवित्रात्मा का हो भवन, जीवन की भरपूरी से;
हर वक्त हर जगह दूँ गवाही, जैसा उसने सिखाया है ।
385 मन मन्दिर में आ मसीहाman mandir mein aa maseeha
‘‘विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे ।’’
(इफिसियों 3:17)

मन मन्दिर में आ मसीहा, मन मन्दिर में आ;(2)
मुझे तू शुद्ध बना ।।(2)

1.जीवन भरा पाप से मेरा, सूझता जिस से नहीं किनारा;(2)
कौन दिखाए मार्ग अब मेरा, तू ही मुझे अब बचा ।(2)

2.जग अन्धेरा और अशुद्ध सारा, जहाँ जाऊँ प्रभु पाप अन्धेरा;
न कोई मिला बचावनहारा, तू ही मुझे अब बचा ।

3.द्वार अब तेरे मैं यीशु आया, सारा संसार प्रभु मैं खोज लिया;
तू ही है मेरा प्राण-अधारा, मुझे तू अपना बना ।

4.प्रेम के कारण लोहू बहाया, त्राण देकर तू ने पिता से मिलाया;
स्वर्गीय भवन में मुझे तू लाया, जीवन सनातन दिया ।
386 नहीं छोडे तू कभी भीnahin chhode too kabhee bhee
‘‘यहोवा सब गिरते हुओं को सम्भालता है ।’’
      (भजन 145:14)

नहीं छोडे तू कभी भी मुझ को, गिरने से सम्भाल तारणहारा,
गिरते हुए सब लोगों को, उठानेवाला तू है प्रभु ।।

1.प्रभु तेरी आज्ञा न मानकर कितनी बार गिरने के समय,
प्रेमी, धीमी, मीठी आवाज से, तू ने प्रभु मुझे उठा लिया ।

2.आदम हव्वा ने अदन की बारी में लालसा से जब आज्ञा तोड़ी,
बलिदान किया क्रूस की छाया जो, प्रिय जान कर वह छुड़ा लिया ।

3.अपनी प्रजा की अगुवाई करने मूसा को दर्शन दिया,
बहाने बताने पर भी न छोड़ा, उसी को अगुवा प्रभु ने किया ।

4.अपनी इच्छा और विचार से जब दाऊद सन्दूक को लाया,
उज्जा की मृत्यु से दाऊद का हृदय प्रभु तू ने हिला दिया ।

5.योना तेरी बातें न सुनी जब तारशीश को वह भाग चला,
मछली के पेट से उसने पुकारा, तू ने प्रभु उसे छुड़ा लिया ।

6.पतरस ने दृढ़ता से कहा, मैं तुझे कभी न नकारूँगा,
तीन बार उस ने नकारा तुझको, प्रेम से तू ने उसे क्षमा किया ।

7.हे प्रभु इस जग में जीने को शक्ति हमारी काफी नहीं,
तू ने भरपूर आत्मा उण्ड़ेला, हल्लेलूयाह मैं गाऊँगा ।
387 मैं गुनाह के सबब सेmain gunaah ke sabab se
‘‘तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हो,
तो भी वे हिम की नाई उजले हो जाएँगे ।’’ (यशायाह 1:18)

1.मैं गुनाह के सबब से हो गया था खुदा से दूर,
दुनिया में मैं ढूंढ़ता चैन और आराम;
बुरे-बुरे कामों में उड़ाया अपना सारा माल,
खून मसीह का मेरी एक ही पनाह ।
खून मसीह का मुझ को धोता,(3)
मुझे धोता बर्फ से ज्यादा वह सफेद ।।

2.चाहे अर्गवानी, किरमिजी हो तेरे सब गुनाह,
जब दीनताई से तू आता क्रूस के पास;
खून का सोता वहाँ बहता ताकि तू हो जावे शुद्ध,
खून मसीह का तेरी एक ही है पनाह ।

3.यही खून मसीह का है जो दिल में देता इतमिनान,
पूरी खुशी देता और कामिल उम्मेद;
और शैतान के हमलों पर भी देता है फतह हर आन,
मुझे धोता बर्फ से ज्यादा वह सफेद ।
388 पाप का बन्धन तोड़ा गयाpaap ka bandhan toda gaya
‘‘यदि पुत्र तुम्हें स्वतंत्र करेगा,
तो सचमुच तुम स्वतंत्र हो जाओगे ।’’ (यूहन्ना 8:36)

1.पाप का बन्धन तोड़ा गया, मैं आजाद हूँ, हाँ आजाद;
सब अपराध भी दूर हो गया, मैं आजाद हूँ, हाँ आजाद ।।
हल्लेलूयाह, यीशु मुआ, मेरे बदले में मुआ;
हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, मैं आजाद हूँ, हाँ आजाद ।।

2.जब से अपना पाप मान लिया, मैं आजाद...
तब से दिल में आग भी आई, मैं आजाद...

3.कोई बन्धन अब नहीं है, मैं आजाद...
कोई डर भी अब नहीं है, मैं आजाद...

4.उसकी स्तुति मैं गाऊँगा, मैं आजाद...
उसकी सेवा भी करूँगा, मैं आजाद...,
389 यीशु ने किया आजाद मुझेyeeshu ne kiya aajaad mujhe
‘‘परमेश्वर का पुत्र जिस ने मुझ से प्रेम किया और मेरे लिए
अपने आप को दे दिया ।’’ (गलतियों 2:20)

1.यीशु ने किया आजाद मुझे,... पाप और सारी बुराई से;
धोया अपने पाक लोहू से,... बहा जो मेेरे ही लिए;
धन्य मैं मानता हूँ उसकी,... स्तुति प्रसंशा हो सदा;
यीशु ने क्रूस पर अपने ऊपर,... लिए सब गुनाह ।
वह धायल हुआ,... और मारा गया;
वह दफन हुआ,... और फिर जी उठा;
वह ऊपर गया,... और जल्द आएगा;
खुदावन्त यीशु,... शहंशाह ।।

2.हर समय वह बल देता है,... मेरी इस कठिन यात्रा में;
ठोकर से वह बचाता है,... मुझे इस सकरे रास्ते में;
उसका आत्मा मेरे लिए,... रक्षक अन्धेरी दुनिया में;
उसके क्रूस के द्वारा ही से हैं ये,... सब आशीष ।

3.तुझे यीशु बुलाता है,... तेरे इस दिल को चाहता है;
तेरे सब पाप को धोवेगा,... शान्ति वह पूरी देवेगा;
कर सब अपराधों का स्वीकार,... उसे तू राजा अपना मान;
तेरे लिए सलीब पर उसने सब कुछ,... पूरा किया ।
390 यीशु प्रभु मेरो अनुपम सुन्दरyeeshu prabhu mero anupam sundar
‘‘मेरा प्रेमी दस हजार में उत्तम है ।’’  (श्रेष्ठ गीत 5:10)

यीशु प्रभु मेरो अनुपम सुन्दर,
सीस नवाते है, तुम ही हो ईश्वर ।।

1.तुम ही हो त्राता, तुम हो विधाता;
रक्षा करो अब, रक्षा करो अब;
पार करो अब यह भवसागर,
तुम ही हो ईश्वर, अनुपम सुन्दर ।

2.तुम प्रभु ज्योति हो, तुम प्रभु जीवन;
हाथ पकड़ लो, हाथ पकड़ लो;
ले चलो अपनी ज्योति के पथ पर,
तुम ही हो ईश्वर, अनुपम सुन्दर ।

3.तुम ही हो पालक, तुम ही हो सिरजक;
दया करो अब, दया करो अब;
स्थिर रखो हमें अपने जीवन भर,
तुम ही हो ईश्वर, अनुपम सुन्दर ।

4.तुम प्रभु प्रेमी हो, अन्तरयामी हो;
स्तुति सुनाते, दण्ड़वत करते;
आनन्द कर के जय ललकारो,
तुम ही हो ईश्वर, अनुपम सुन्दर ।
391 तू ही है यीशु मांझीtoo hee hai yeeshu maanjhee
‘‘वह उनको मन-चाहे बन्दरस्थान पर पहुँचा देता है ।’’
      (भजन 107:30)

तू ही है यीशु मांझी नैया का मोरी,
पार करेगा जीवन-नैया तू मोरी ।।

1.गहरा है सागर और आते हैं भंवर,
नैया चलाता वह उन से बचाकर;
छिपी चट्टाने हैं जल के अन्दर,
नैया बचाता वह उन से हटाकर ।

2.आँधियां उठती तो आता मुझे डर,
मालूम होता है जीवन पल भर;
तब यीशु उन को आज्ञा देकर,
बन्ध कर देता है आगे बढ़कर ।

3.निकट अब आता जाता है बन्दर,
बढ़ता जाता है विश्वास अन्दर;
पहुँचूंगा अपने पिता के मैं घर,
स्तुति करूँगा मैं अपने जीवन भर ।
392 नैया पार लगाnaiya paar laga
‘‘हे गुरु क्या तुझे चिन्ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते है ?’’
(मरकुस 4:38)

नैया पार लगा, मेरी,... नैया पार लगा, यीशुजी;
बीच भँवर के हूँ, मेरी,... आप मदद को आ, यीशुजी ।(2)

1.अन्धों को दीनी आँखे तू ने,... कोढ़ी को चंगा किना;(2)
तेरे हुकम से फौरन मुर्दे (2),... बाहर कबर से आये ।(2)

2.पानी के मटके, मय बन गये,... आप ने जब फरमाया;
पानी पर खुश्की की मानिन्द,... आप ने चल दिखलाया ।

3.पाँच हजार को सेर किया था,... पाँच रोटियाँ लेकर;
मुझ पापी की जान बचाई,... जान सलीब पर देकर ।

4.ऐसे काम किये प्रभु यीशु,... जो कोई कर नहीं सकता;
तेरे नाम से मरने वाला,... हरगिज नहीं मर सकता ।
393 काल-पाताल के जीतन-हाराkaal-paataal ke jeetan-haara
‘‘मृत्यु और अधोलोक की कुँजियां मेरे पास है ।’’
(प्रकाशित 1:18)

काल-पाताल के जीतन-हारा,... बेड़ा पार लगाओ हमारा ।।(2)

1.भूल गये पथ से जो पंन्थी,... पन्थ बताओ प्रभु प्रचारा;
मैं बलहीन, बली तू यीशु,... मार्ग में हो तू साथ सहारा ।

2.मुक्ति के है हम अति भूखे,... देओ हमें तुम स्वर्ग आहारा;
कुंड बिलोरी खोल तू देवे,... निकले जिस से जीवनधारा ।

3.आग और मेघ का खम्भ साथ दे,... यात्रा भर मेरा हो तू सहारा;
हे प्रभु तू ही ढाल हमारा,... तुझ पर है भरोसा हमारा ।

4.मृत्यु नदी के तीर जो आऊँ,... भय खटका तू मिटा दे सारा;
हे प्रभु तू ही सहायक मेरा,... बिनती करूँ मैं हर्ष से तुम्हारा ।
394 मेरा मन धो देना प्रभुmera man dho dena prabhu
‘‘मुझे धो और मैं हिम से अधिक श्वेत बनूँगा ।’’
      (भजन 51:7)

मेरा मन धो देना प्रभु,... बिनती करूँ बारम्बार ।(2)

1.मन मेरा हो गया पापों से मैला,(2)
मैं धोते-धोते हुआ लाचार,... प्रभु (2) बिनती करूँ बारम्बार ।

2.मैंने भूल करी बड़ी भारी,
आया नहीं मैं तुम्हारे द्वार,... प्रभु, बिनती करूँ बारम्बार ।

3.मैं ने बहुत परिश्रम कीना,
सब कुछ हुआ आखिर बेकार,... प्रभु, बिनती करूँ बारम्बार ।

4.बाइबल भीतर मैं ने पाया,
तुम ही हो दिल के धोवनहार,... प्रभु, बिनती करूँ बारम्बार ।

5.दास कहें इस पापी मन को,
कृपा कर तुम दीजो निस्तार,... प्रभु, बिनती करूँ बारम्बार ।
395 मेरे पापों को माफmere paapon ko maaph
‘‘क्योंकि प्राण के कारण लोहू से प्रायश्चित होता है ।’’
(लैव्यवस्था 17:11)

मेरे पापों को माफ तू कर दे,
लोहू से, लोहू से, यीशु के लोहू से ।।

1.मेरे पापों के दाग मिटा दे, लोहू से...

2.पूरी शान्ति मेरे दिल में दे, लोहू से...

3.मुझे विजय शैतान पर तू दे, लोहू से...

4.साहस प्रार्थना करने को तू दे, लोहू से...

5.ज्योति के राज्य में मुझे ले ले, लोहू से...,
396 मैं कमबख्त आवाराmain kamabakht aavaara
‘‘क्रूस की कथा हम उद्धार पानेवालों के निकट
परमेश्वर की सामर्थ है ।’’ (1 कुरिन्थियों 1:18)

1.मैं कमबख्त आवारा और गुमराह, नहीें जानता था कि है नजात;
इसलिए कि यीशु ने सही,... सलीबी मौत ।
मेरे लिए है वहाँ नजात,... फजल से माफी और हयात;
तेरा पूरा भेद कब समझूंगा,... ओ कलवरी ?

2.कलाम को पढ़कर डर गया,...  सख्त रंजीदा था और परेशान;
लेकिन मुझे मिली अब पनाह,... पास कलवरी ।

3.मैं ने दे दी अपनी जिन्दगी,... यीशु, को जो बादशाह अब्दी;
है और रहेगा, यह मेरा गीत,... जय कलवरी ।
397 यीशु मेरे शरण स्थानyeeshu mere sharan sthaan
‘‘प्रभु यहोवा सनातन चट्टान है ।’’ (यशायाह 26:4)

1.यीशु मेरे शरण स्थान,... तुझ में मेरा है कल्याण;
तेरे छिदे पंजर से,... लहु-जल जो बहे थे;
मेरे पाप को धोते है,... हर कलंक को खोते है ।

2.भला जो मैं करता हूँ,... आँसु जो मैं भरता हूँ;
धर्म का कर्म जो मेरा हो,... मेरे पाप छुटाने को;
तनिक काम न आता है,... केवल तू छुटाता है ।

3.छूछे हाथ मैं आता हूँ,... तेरा क्रूस मैं पकड़ा हूँ;
मेरी सब मलिनता को,... अपने लोहू से तू धो;
नंगा हूँ, अधम लाचार,... धर्म से मुझे तू संवार ।

4.सांस जब तक चलती हो,... या जब सांस निकलती हो;
जब मैं उडूं लोकों पार,... होगा मेरा तब विचार;
यीशु ! मेरा शरण स्थान,... तुझ में मेरा है कल्याण ।
398 यीशु पास मैं आऊँyeeshu paas main aaoon
‘‘और शमुएल बालक यहोवा के
संग रहता हुआ बढ़ता गया ।’’(1 शमूएल 2:21)

1.यीशु पास मैं आऊँ, खुश वह करेगा;
और जब शोकित होऊँ, आनन्द देवेगा ।
यीशु पास मैं आऊँ, खुश मैं होऊँगा;
प्रेम से वह बुलाता, बालक मुझ जैसा ।।

2.यीशु पास मैं आऊँ, बिनती सुनेगा;
दिल से प्यार करेगा, पाप उठाया था ।

3.यीशु पास मैं आऊँ, हाथ मेरा पकड़ के;
उत्तम देश को अपने ले चलता मुझे ।

4.हर्षित बालको संग मैं, श्वेत वस्त्र में सज के;
त्राता को देखूंगा, स्वर्गीय नगर में
399 जैसा मैं हूँ, बिना योग्यताjaisa main hoon, bina yogyata
‘‘देखो परमेश्वर का मेम्ना ।’’ (यूहन्ना 1:29)

1.जैसा मैं हूँ, बिना योग्यता,... पर लेकर आसरा लहु का;
और सुन के आमंत्रण तेरा,... ईश्वर के मेम्ने ! आता हूँ ।

2.जैसा मैं हूँ, निज पापों का,... एक दाग न दूर कर सकूंगा;
पाप तेरे रक्त से मिटेगा,... ईश्वर के मेम्ने ! आता हूँ ।

3.जैसा मैं हूँ, मन शंकामय,... हे ईर्ष्या दुविधा और भय;
हैं घेरे रहते हर समय,... ईश्वर के मेम्ने । आता हूँ ।

4.जैसा मैं हूँ, अभागी जन,...  कैसे यह चंगा होगा मन;
और कैसे पाऊँ दृष्टि-धन,... ईश्वर के मेम्ने ! आता हूँ ।

5.जैसा मैं हूँ, तू ही देगा,... छुटकारा, क्षमा, शुद्धता;
और मुझे ग्रहण करेगा,...  ईश्वर के मेम्ने ! आता हूँ ।

6.जैसा मैं हूँ रूकावटें,... हटा के मुझे शरण दे;
अब तेरा होने के लिए,... ईश्वर के मेम्ने ! आता हूँ ।
400 उस मीठी वाणी कोus meethee vaanee ko
‘‘मेरे पास आओ, मैं तुम्हें विश्राम दूँगा ।’’
(मत्ती 11:28)

1.उस मीठी वाणी को मैं सुनता हूँ तेरी,
बुलाती पास उस सोते के, जो बहता क्रूस से ही ।
आता तेरे पास, आता हूँ मसीह !
धोके शुद्ध कर लहु से, जो बहता क्रूस से ही ।।

2.आता अशुद्ध, निर्बल, देख मेरी दशा को;
मलिनता से कर मुझे साफ, कि एक भी दाग न हो ।

3.तू पूरा प्यार, विश्वास देता हम को मसीह;
पूरी आशा, आराम, शान्ति, इस जग और स्वर्ग में भी ।

4.तू मेरे मन में आ, अपने निज आत्मा से;
सब अच्छे गुणों को उपजा और सिद्ध बना मुझे ।

5.तू अपने भक्तों को विश्वास दिलाता है;
कि अपनी हर प्रतिज्ञा को तू पूरी करता है ।

6.धन्य पावन लहु को, धन्य हो अनुग्रह हो;
हमारे प्यारे यीशु की जय अब सर्वदा हो ।
401 मेरे बाद मिलकर दुआ करतेmere baad milakar dua karate
‘‘और वे प्रार्थना करने में लौलीन रहे ।’’
(प्रेरितों 2:42)

मेरे बाद मिलकर दुआ करते रहना,
तिलावत-कलाम-ए-खुदा करते रहना, मेरे बाद मिलकर ।।

1.कलाम-ए-खुदा जिन्दगी है तुम्हारी,(2)
हंमेशा पढ़ो तो सना करते रहना ।(2)... मेरे

2.जहाँ चार मिल करके बैठो हे प्यारो,
मेरी याद शाम-औ-सुबह करते रहना ।

3.न घबराना हरगिज पड़े कोई मुश्किल,
मेरे नाम से प्रार्थना करते रहना ।

4.सताए जो तुम को, सताना न हरगिज;
बुराई के बदले भलाई करते रहना ।

5.मैं आऊँगा फिर तुम को लेने हे प्यारो,
चर्चा मेरे आने का तुम करते रहना ।

6.प्रेम से जान अपनी मैंने बलिदान की;
इस प्रेम की चर्चा सदा करते रहना ।
402 सर्व शक्तिमान मेरे सच्चे प्रभुजीsarv shaktimaan mere sachche prabhujee
‘‘मुझ से प्रार्थना कर... और मैं तुझे उत्तर दूंगा ।’’
(यिर्मयाह 33:3,   यशायाह 65:24,   इफिसियों 3:20)

1.सर्व शक्तिमान मेरे सच्चे प्रभुजी,
सर्वसदा स्तुति करुँ मैं तेरी ।
आनन्द है महा आनन्द है,
आश्चर्यकारी यीशु ने;
मेरे पापों को है क्षमा कर दिया ।।

2.बन्दीगृह से मैं ने पुकारा, स्वर्ग से तू ने उत्तर दिया ।

3.माँगने से बढ़कर प्रभु देता है, समझ से बाहर कार्य करता है ।

4.प्रार्थना से पहले उत्तर देता है, माँगते ही वह मेरी सुन लेता है ।

5.पहिले से अधिक आशीष देता है, भलाई अपनी प्रगट करता है ।

6.इस्राएल का रक्षक है प्रभु, न ऊँघेगा और न सोएगा वह ।

7.प्रार्थना के सारे प्रतिफल, प्यारा प्रभु देता है, हल्लेलूयाह ।
403 परमपिता हम हाथ उठाकरparamapita ham haath uthaakar
‘‘जो यहोवाह की वाट जोहते है,
वे नया बल प्राप्त करते जायेंगे ।’’ (यशायाह 40:31)

परमपिता हम हाथ उठाकर स्तुति करते हैं,
सिर उठाकर हे प्रभुजी वाट हम जोहते हैं;
जागृति आत्मा दे, प्रभु की गवाही खड़ी हो ।।

1.पाप और श्राप और पतित दशा में, हम जो पड़े थे;
हे प्रभु तू निकट आकर, हम सब को उठाया;
कैसा प्रेमी, करुणामय तू, स्तुति हम करते हैं ।

2.हर दिन तुझ को परखा हम ने, और दुखित किया;
आखिर हम मनुष्य ही है, तू करुणा दिखाया;
क्षमा किया और धोया हम को, स्तुति हम करते है ।

3.निन्दा, वेदना क्लेश और संकट, बहुत ही निराशा है;
धीरज दे कि सेवा हम करें, न हम कुडकुडाएं;
पवित्र आत्मा दे कि हम सब, तेरी स्तुति करें ।

4.सूरज, चाँद, तारों में जब अद्भुत चिन्ह देखते हैं;
मनुष्य डरते, घबराकर बहुत ही व्याकुल होते है;
पर हम तुझ को देखकर के बल सब पाते है ।

5.इकट्ठा करो मण्डली में हम को, ताकि न भटके हम;
प्रार्थना और संगति में रखकर हमें अब स्थिर करो;
बाट जोहकर हम सब तेरी स्तुति करते हैं ।

6.शत्रु के फन्दों को तोड़कर जीवन हमें दिया,
उस के बदले में तुझे क्या हम दे सकते है ?
उद्धार का कटोरा लेकर, स्तुति हम करते है ।

7.बीते दिनों में हमें सम्भाला पुत्र की नाई,
आशीष देकर आज तक हम को तू ने चलाया;
प्रार्थना है, शक्ति दे ताकि आगे हम बढ़ते जाएँ ।
404 आशीष तुझ से चाहते हैंaasheesh tujh se chaahate hain
‘‘हेे प्रभु सुन ले, ध्यान देकर जो करना है कर,
विलम्ब न कर; अपने नाम के निमित्त ऐसा ही कर ।’’
(दानिय्येल 9:19)

आशीष तुझ से चाहते हैं,
हे स्वर्गीय पिता हम आते हैं ।।

1.कोई खूबी न हे लियाकत,... बख्षो हम को अपनी ताकत;(2)
खाली दिलों को लाते है,(2)...हे स्वर्गीय पिता हम आते हैं ।(2)

2.हम ने बहुत खताएँ की हैं,... रहे निकम्मे जफाएँ की हैं;
शर्म से सिर झुक जाते हैं,...  हे स्वर्गीय पिता हम आते हैं ।

3.तुम हो शक्तिमान प्रभुजी,... कुदरत तुम्हारी शान यीशुजी;
हम्द-ओ-सना हम गाते हैं,... हे स्वर्गीय पिता हम आते हैं ।

4.बन्दे को तू कभी न भूले,... दुःख सहे दुनिया में तू ने;
उसी प्यार को चाहते हैं,... हे स्वर्गीय पिता हम आते हैं ।
405 परिशुद्ध, परिशुद्ध प्रभु यीशुparishuddh, parishuddh prabhu yeeshu
‘‘तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु
मसीह के आने तक पूरे-पूरे और निर्दोष बने रहे ।’’
(1 थिस्सलु  5:23)

परिशुद्ध, परिशुद्ध प्रभु यीशु आ जा,
हमको अब आशीषें तू दे जा ।।

1.सारे दिल से तेरी स्तुति गाने के लिए हमें,(2)
कृपा चाहिए, कृपा चाहिए ।(2)

2.बिनती करते हैं तुझ से ऐ प्रभु यीशु जल्दी आ,
प्रभु, आ जा, प्रभु आ जा ।

3.हृदयों को हमारे अपने लोहू से पवित्र कर,
प्रभु, शुद्ध कर, प्रभु शुद्ध कर ।

4.अपने आत्मा से हमारे मनों को अब तू भर दे,
प्रभु, भर दे, प्रभु, भर दे ।
406 प्रार्थना सुननेवालाpraarthana sunanevaala
‘‘माँगो तो पाओगे ।’’ (यूहन्ना 16:24)

प्रार्थना सुननेवाला, प्रार्थना करो तू ने कहा;
स्वार्थहीन होके आये हैं, हम पर दृष्टि तू लगा ।

1.तेरी भलाईयाँ सब भूल के, घर की भरपूरी सब छोड़ के;
इस संसार में हम ने, दुःख और निन्दा को लाया ।

2.जैसे हमारे पुरखाओं ने, तेरे निकट सब माना;
वैसे हम सब मानते, दोषी होकर क्रोधित किया ।

3.जब हम सकेती में आये, औरों ने हमको निहारा;
मौका सब हम से पाकर, ठट्ठा और हँसी किया ।

4.सनातन के ईश्वर दयालु, आशा हम तुझ पर रखे हैं;
पास तेरे हम आये हैं, इनकार तू न करेगा ।

5.प्रभुजी मुँह न छिपाना, अपना मार्ग दिखाना;
अपने आत्मा से भर के, हम को सम्पूर्ण करना ।
407 धर्मी लोगों की प्रार्थनाdharmee logon kee praarthana
‘‘धर्मी लोग खजूर की नाई फूले फलेंगे ।’’
      (भजन 92:12)

धर्मी लोगों की प्रार्थना परमेश्वर निश्चय सुनेगा,
और खजूर की नाई उनको फलवन्त करेगा ।।

1.पुकारो परमेश्वर तुम्हारी सुनकर, बातें बताएगा;
बड़ी और कठिन जिन्हें तुम अभी नहीं समझते ।

2.अभी तक तुम ने, यीशु के नाम से, कुछ नहीं माँगा;
माँगो तो उससे, अनन्त-आनन्द निश्चय मिलेगा ।

3.जोहते रहो बाट यहोवा की सामर्थ पाओगे,
उकाबों की नाई इस जगत में उड़ते फिरोगे ।

4.महान कार्य, वर्णन से बाहर, प्रभु ख्रिस्त करेगा;
जो हे सामर्थी, समझ से अधिक कार्य कर सकेगा ।

5.वह तुझे कभी, नहीं छोड़ेगा और न त्यागेगा;
विश्वास करो, मनुष्य तुम से कुछ कर न सकेगा ।

6.परमेश्वर अपने धन के अनुसार, जो मसीह में है;
करेगा पूरी घटी तुम्हारी, रक्षा भी करेगा ।

7.सचमुच वह तुझ को, आशीषें देगा, प्रतिज्ञा है उसकी;
सन्तान को तुम्हारी बढ़ाता जाएगा, इच्छा है उसकी ।
408 आओ चलें हम हियावaao chalen ham hiyaav
‘‘आओ हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट
हियाव बाँधकर चले ।’’ (इब्रानियों 4:16)

आओ चलें हम हियाव बान्धकर, अनुग्रह सिंहासन निकट;
हम पर दया हो और अनुग्रह हो, सहायता प्रभु करेगा ।।

1.बिनती हमारी प्रभु सुनेगा, माँगने से बढ़कर वह करेगा;
जागते रहो और प्रार्थना करो, आशीष तुमको देगा ।

2.माँगो उससे ताकि आत्मा बचे, चुन ले प्रभु उसे समीप लाये;
आंगन में बसे वह भवन में रहे, प्रभु उसे तृप्त करेगा ।

3.सब मनुष्यों का उद्धार अब हो, अधिकारी राजाओं का भी हो;
सारे संसार में अब जागृति हो, प्रभु उसे करेगा ।

4.सेवक प्रभु के अभिषेक पायें, आत्मा से भर के सेवा करें;
वचन अब फैले और बढ़ता जाए, शत्रु का राज्य तूटेगा ।

5.आत्मा के द्वारा प्रभु का घर बनें, महिमा प्रभुकी अब उस में भरे;
गौरव प्रभुता सब जो मानें प्रभु का मान बढ़ेगा ।

6.जीवते पत्थर से घर तू बना, अधिकार तेरा हो उस में सदा;
आत्मिक मनुष्य ‘‘तेरे हृदय का हो,’’ उस में तू वास करेगा ।
409 हियाव न छोड़ो कभीhiyaav na chhodo kabhee
‘‘नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए ।’’
(लूका 18:1)

हियाव न छोड़ो कभी, प्रार्थना तुम करो;
यीशु ने कहा था, हियाव न छोड़ो कभी ।।

1.इस जग में तुम दो, एक होकर माँगो, पिता तुम्हें निश्चय देगा;
स्वर्ग से वह पूरा करेगा, कहा था महान प्रभु ।

2.आरम्भ के प्रेरित एक चित्त होकर, निरन्तर प्रार्थना करते थे;
उनकी प्रार्थना तू ने सुनी, हमारी प्रार्थना अब सुन ।

3.पतरस जब बन्दीगृह में पड़ा था, मण्डली ने बोझ से प्रार्थना की;
एक महान कार्य तब हुआ, सभों ने आश्चर्य माना ।

4.यदि तुम मुझ में सदा बने रहो, मेरा वचन तुम में रहे;
जो चाहे माँगो मिलेगा, कहा था प्यारे प्रभु ने ।

5.जहाँ दो तीन मेरे नाम में इकट्ठे, आनन्द से हुआ करते हैं;
उनके मध्य में रहने वाले, मध्य में हमारे आ जाओ ।
410 माँगो उस से, प्रभु तुम्हें देगाmaango us se, prabhu tumhen dega
‘‘माँगो तो पाओगे ।’’ (मत्ती 7:7)

माँगो उस से, प्रभु तुम्हें देगा, निश्चय वह देगा, माँगो प्रत्येक पाओंगे ।।

1.विश्वास के साथ सब सन्त, प्रार्थना कर के पाये;(2)
तुम अपने जीवन को परखा करो अब,(2)
अपने लिए तुम, माँगो और पाओ ।(2)

2.ऐसा सामर्थी है वह, बिनती सुनता है वह;
समझ से बाहर कार्य जो करता,
अपने लिये तुम माँगो और पाओ ।

3.हमारी प्रार्थना वह सुनकर सन्तुष्ट होता,
महिमा उसी को देने के लिये,
अपने लिए तुम, माँगो और पाओ ।

4.अब तक तुमने मुझ से कुछ नहीं माँगा,
ताकि मेरा आनन्द पूरा हो तुम में;
अपने लिये तुम, माँगो और पाओ ।

5.परमेश्वर के लिए असम्भव कुछ नहीं,
शक्तिमान वह है जानो तुम इस को;
अपने लिये माँगो और पाओ ।
411 झुण्ड़ में कई भेड़ेjhund mein kaee bhede
‘‘मेरी और भी भेड़ें है जो इस भेड़शाला की नहीं ।’’
(यूहन्ना 10:16)

झुण्ड़ में कई भेड़े आई नहीं, करोड़ों दुनिया में जो हैं;
आत्माओं के लिए वेदना से, आओ कलीसियाँ बढ़ते जायें;
झुण्ड़ में कई भेड़े आयी नहीं;
यीशु बुलाता, प्रार्थना करो, ले चलेगा ।।

1.जंगलो में और कई स्थानों में, मेरी प्रजा वहाँ क्यों मरे ?
उन के लिये मैंने दुःख उठाया अब, उन को खोजने वाला है कौन ?

2.बिना प्रचार हुये स्थान बहुत हैं, मुझे प्रचार करने वाले इधर हैं ?
तुम सब जो बुलाये गये हो, आओ, प्रभु की आज्ञा अब मानो ।

3.मेरे लिए बोलने वाली जीभ, मेरे लिए चलने वाले पैर;
मुझे प्रेम करने वाले हृदय की, आवश्यकता है क्या सब दोगे ?,
412 हे पवित्र आत्मा समर्थ प्रभुhe pavitr aatma samarth prabhu
‘‘आत्मा से भरपूर होते जाओ ।’’ (इफिसियों 5:18)

1.हे पवित्र आत्मा समर्थ प्रभु,
शक्ति देने के लिये हम को भरपूर कर तू ।

2.पिन्तेकुस्त के दिन जैसे आया शिष्यों पर,
हमारे आत्मा में रहकर पूरी शुद्धि कर ।

3.भूखी प्यासी आत्माओं को भरने के लिए,
पापियों में से हर एक से मिलने के लिए ।

4.जंग में लड़ने के लिए अब बखतर तू पहना,
किलों को शैतान के हमारे द्वारा गिरा ।

5.अन्धकार की ताकतों को ढाने के लिए;
प्रार्थना करने की आत्मा से दिलों को भर दे ।

6.मुर्दा दिलों में से हमारे सुस्ती निकाल,
स्तुति गाने के लिये तू खुशी दिल में डाल ।

7.आत्माएँ जो खोई हुई है जल्द बच जाएँ,
हमारे खाली प्याले बोज से भर जाएँ ।

8.प्रेम और आनन्द दिल में भरकर बढ़ना तू सिखा,
यीशु की महिमा हम को हर रोज तू दिखा ।
413 स्वर्ग से उण्डेल प्रभुsvarg se undel prabhu
‘‘मैं इसलिए आया कि वे जीवन पाएँ, और
बहुतायत से पाएँ ।’’
(यूहन्ना 10:10)

स्वर्ग से उण्डेल प्रभु अग्नि सा जीवन,
मुझ को तू दे प्रभु भरपूर जीवन;
आत्मा की आग लगा मेरे अन्दर,
मन में भर दे प्रभु परिशुद्ध जीवन ।।

1.अग्नि जला प्रभु प्रेम की मन में,(2)
प्रेम करुँ तुझे पूरे लगन से;(2)
तन, मन, धन सब देता तुझे मैं,(2)
बिनती करुँ प्रभु दे स्वर्गीय जीवन ।(2)

2.आत्मा की प्यास मेरे मन में लगा दे,
स्तुति गाना मुझको तू सिखा दे;
जीवन के जल से पीऊँ मैं आके,
मुझ से बहा प्रभु नदियों सा जीवन ।

3.यीशु के लोहू से कर तू पवित्र,
पाप और मृत्यु से कर तू स्वतंत्र;
मेरे लिए पूरी कर अब प्रतिज्ञा,
मन में लगा प्रभु अपना सिंहासन ।
414 सुन ले पुकार हमारीsun le pukaar hamaaree
‘‘हे मेरे परमेश्वर जब में पुकारुँ, मुझे उत्तर दे ।’’       (भजन 4:1)

सुन ले पुकार हमारी, महान शक्तिवाले;
कोप अपने में क्यों झिड़के मीठी जुबान वाले ?

1.नकारूँ तुझे कैसे ऐ मेरे मित्र प्यारे,(2)
झिझका न तू सूली से, न डर गया तू दुःख से;(2)
निकले न तेरे मुँह से कलमें इन्कार वाले ।(2)... सुन ले

2.आया स्वर्ग छोड़ करके, पापी मनुष्य के बदले,
हुआ मसलूब प्यारे सारे जहान बदले;
बलिहारी जाऊँ तुझ पे ऐसे प्यार बदले ।

3.सारे जहान बदले, लोहू बहाया तू ने;
बन्द थे जो दरवाजे, खोले बहिश्त वाले;
गुण गाऊँ क्यों न तेरे, यीशु दिलदारवाले ।

4.उम्मेद में थी दुनिया, तेरे आने के लिए;
आया समय पर अपने, व्यवस्था पूरी करने;
वायदे को पूरा किया, मुक्ति दिलाने वाले ।

5.पापों के दण्ड से यीशु, पापियों को बचाले;
जिन्दगी हमेशा वाली, अब मृतको को तू दे;
बेटे खुदा के प्यारे, पूरे इख्तियार वाले ।
415 हम आते तेरे पास प्रभुham aate tere paas prabhu
‘‘उन्होंने एक चित होकर ऊँचे शब्द से परमेश्वर से कहा ।’’
(प्रेरितों 4:24)

हम आते तेरे पास प्रभु, प्रार्थना सुन ले आज,
आते तेरे पास, प्रभु, आते तेरे पास ।।

1.बोझ को लेकर आए प्रभुजी, पूरे विश्वास से आए यीशुजी;
मनकी बातें जो जानने वाला है, सुनले बिनती आज ।
आते तेरे पास...

2.आत्मा के द्वारा प्रार्थना करें हम, तेरी ईच्छा से बिनती करें हम;
माँगने से पहले सुन लेता जो, सुन ले बिनती आज ।

3.मध्य में हमारे प्रभुजी तु आ जा, लोहू छिडका के शुद्ध तु कर जा;
शैतान की शक्ति को बाँध दे प्रभुजी, सुनले बिनती आज ।

4.आशा बड़ी है आशीष पाने की, आत्मा बचें आज इच्छा हमारी;
संत तेरे सब दृढ़ बन जाएँ, सुनले बिनती आज ।
416 ईश्वर तेरे सन्मुख आतेeeshvar tere sanmukh aate
‘‘हे मेरे परमेश्वर ! मेरे हित के लिये मुझे स्मरण कर ।’’
(नहेमायाह 13:31)

ईश्वर तेरे सन्मुख आते,
नम्र होके पुकारते हम, हाँ, नम्र होके पुकारते हम ।।

1.अपराधी जो तेरी प्रजा हम, अपराधों को हमारे मिटा;
अनुग्रहकारी यीशु प्रभु तू, दया दिखाकर हम को बचा ।

2.कई बार हमने गलती की थी, भूल गए सब तेरी भलाई;
धोखे में आकर हम गिर गये, यीशु प्रभु जयवन्त बना ।

3.रीति-नीति में हम फँस गये, और संसार की बातें सुनी;
तेरे नियम को हम सब भूले, तेरे वचन से दृढ़ तू बना ।

4.निस्वार्थ तेरे दास जो जग में, और विश्वास में जो जिते है;
विश्वास में ही चलने के लिये, सनातन प्रेम से तू भर दे ।

5.संगति में हम को बनाए रखकर, धीरज धरना हम को सिखा;
महिमा से भरपूर प्यारे यीशुजी, प्रचार करना हमको सिखा ।
417 मैं भूखा हूँ और प्यासाmain bhookha hoon aur pyaasa
‘‘उसने कहा, मुझे अपना तेज दिखा दे ।’’
(निर्गमन 33:18)

1.मैं भूखा हूँ और प्यासा तेरी भरपूरी का,
कि तुझ ही को मैं जानूँ ऐ अब्दी खुदा;
सब तेरे वायदों पर अब मैं लाता हूँ ईमान,
अकेला तू मिटा सकता मेरी भूख तमाम ।
बाढ़ के समान, बाढ़ के समान;
है खुदा का फजल यीशु में हर आन,
वह मेरे लिए है शिफा और दिल सफाई,
अबद तक मैं गाऊँगा, ‘‘मसीह की जय ।।’’

2.अब आशीषों के बादल जमा हो जाते है,
और यह आसमानी बारिश सब प्यास बुझाती है;
अब हम को मालूम हुआ कि क्या है रब्ब के पास,
और इसके सम्मुख रह के सदा खुश रहेंगे ।

3.देख अनुग्रह का सागर और यह आसमानी मेह,
अब मेरे दिलको भरते आसमानी खुशी से;
उद्धार की लहर तोड़ती हर बन्ध जो रोकता है,
और दिल से हल्लेलूयाह बराबर गाता मैं ।

4.उद्धार की लहर आती वह आ रही है अब,
ऐ मुंजी, हर एक मुल्क में तू उसे अभी भेज;
कि लाखो प्राणी उसमें पवित्र हो जाए,
और शोकितों को मिल भी शान्ति और विश्राम ।

5.उद्धार की लहर आती बढ़ती रहती है,
और मेरा हर एक पाप उसमें दफन होता है;
वह मुझको अब उठाती शान्त दिल को करती है,
जय यीशु हल्लेलूयाह, क्या अद्भुत आनन्द है ।
418 तेरे चरणों में झुकता हूँtere charanon mein jhukata hoon
‘‘इसलिए आओ हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट
हियावबान्धकर चलें ।’’ (इब्रानियों 4:16)

तेरे चरणों में झुकता हूँ, अनुग्रहकारी यीशु;
प्रेम तेरा याद मैं करते, परमेश्वर आता हूँ ।।

1.विश्राम का दाता ईश्वर सब संकट तू दूर कर,
क्रूस ही मेरा आश्रय है नम्रता से वहाँ मैं रहूँ ।

2.प्रार्थना करो कहा प्रभु, संकट के समय में;
दया दिखाकर मुझ पर प्रेम से शान्ति मुझे दे ।

3.प्रभु तू मनुष्य नहीं है पुकार को तू सुन ले,
पूर्ण मन से प्रार्थना करते प्रभु तेरे पास मैं आऊँ ।

4.मुझे छोड़ न तू प्रभुजी चाहे निन्दा आये फिर भी;
सहूँगा मैं तेरे लिये बल तेरा मुझे अब दे ।

5.आशा से तेरे चेहरे को उत्साह से देखता हूँ,
लज्जित नहीं होता मैं प्रकाश तेरा अब हो ।

6.शत्रु हराने के लिए सामर्थ प्रगट कर तू,
मुझे सान्त्वना देके तू घेरे रख और तू सम्भाल ।

7.आत्मिक जीवन में बढ़ने जयवन्त जीवन मुझे दे,
फलवन्त होकर फल मैं दूँ अनुग्रह तेरा मुझे दे ।

8.सिय्योन से राजा आता वह मेरा प्रभु है,
व्याकुल हुए बिना मैं तेरे लिए बाट जोहूँ ।
419 मेरे यीशु करुणा तू करmere yeeshu karuna too kar
‘‘जो रात दिन उसकी दूहाई देते रहेते;
और क्या वह उनके विषयमें देर करेगा ।’’
(लूका 18:7)

मेरे यीशु करुणा तू कर, तू करुणा का धनी है;
दिन और रात मैं तुझ को पुकारूँ बिनती मेरी तू सुन ले ।।

1.मित्र ऐसा तू हमारा जो है दिन रात है बिनती करता,
बिनती हमारी कृपा से सुन जो सन्मुख पिता के करते ।

2.जितने हमारे खेस कुटुम्ब सब है नाश वे हो न देखें हम,
आँसुओं के साथ प्रार्थना हम करते कृपा कर के तू सुन ।

3.प्रेमी परमेश्वर तू करुणा से योना को निनवे भेजा,
उस की प्रार्थना से दया दिखाई, ऐसी प्रार्थना तू सुन ।

4.जितना दुःख तू ने सहा क्या वे सब व्यर्थ ही हो जायेंगे,
अंजीर पेड़ पर दया की तू ने, प्रार्थना हमारी तू सुन ।

5.सदोम के न्याय से भक्त को तू कैसा बचाया था,
इब्राहीम की प्रार्थना जैसे सुनी थी, वैसे हमारी अब सुन ।
420 करुणा से प्रभुजीkaruna se prabhujee
‘‘दाऊद सब का सब लौटा लाया ।’’
(1 शमुएल 30:19)

करुणा से प्रभुजी, वापस दे जो खोया मैं;
क्षमा तुझ से, दिल से चाहता हूँ मैं ।।

1.दाऊद राजा ने नम्र होकर माँगा,
हानि के लिए, जो हुई थी इस जग में;
प्रभु तू ने, उसे पूरा किया है ।

2.शत्रुओं की सब कुयुक्तियों से,
बहुत ही मुझे प्रभु हानि हुई थी;
हे पिता, यीशु में हानि पूरी कर ।

3.टिड्डी, अर्बे, एलेक, हासिल के द्वारा,
हानि हुई प्रभु, वापिस मुझे दे;
यीशु प्रभु तुझ से बिनती करता मैं ।

4.प्रेम, शान्ति, आनन्द सब कुछ खोया,
हे महायाजक, प्रेम करुणा से;
वापस उन्हें दे, प्रार्थना करता मैं ।

5.मेरा कटोरा पाप से जो भरा,
मैदा प्रभु तू, जीवन से भरा;
उसको मिला के, तू मृत्यु हटा दे ।

6.आत्मिक आलसीपन मुझ में आ गया,
इसलिए प्रभुजी, सब कुछ खोया मैं;
हे पिता, मुझे तू सब कुछ वापस दे ।

7.जहाँ पर प्रभुजी पाप में गिरा मैं,
ठीक उसी स्थान में, दया तू दिखा दे;
क्रोध न कर प्रभु, मुझ पर दया कर ।

8.जो पाप मैंने तेरे विरुद्ध किए,
नहीं छिपाऊँगा, मैं मान लूँगा;
यीशु के लोहू से, शुद्ध मुझे कर ।
421 हे प्रभु भेज अब तूhe prabhu bhej ab too
‘‘क्या तू हम को फिर न जिलाएगा ।’’       (भजन 84:6)

हे प्रभु भेज अब तू जागृति,
टूटे मन से है यह मेरी बिनती ।।

1.प्रथम प्रेम से हूँ मैं अब गिरा,
हो गया ठण्डा प्रेम मुझ में तेरा;
भर दे प्रेम अब मुझ में तू अपना ।

2.तू गिरतों को है देता सहारा,
जिनका नहीं कोई रहता चारा;
घायल हाथों से प्रभु तू उठाता ।

3.शत्रुओं के फंदों में मैं फँस गया,
खोल दे प्रभु अब बन्धन मेरा;
वापस दे प्रभु आनन्द मेरा ।

4.तेरा और भाइयों का दोषी मैं बना,
तुझसे और उनसे मैं चाहता हूँ क्षमा;
अपने लोहू से धो दे हृदय अब मेरा ।

5.एकता से रहना प्रभु मैं हूँ चाहता,
बैरता को प्रभु जब मुझ से निकालता;
शत्रु की शक्ति को प्रभु तब हराता ।

6.गिरी गवाही को प्रभु फिर उठाता,
तब जागृति की अग्नि लगाता;
भस्म हो जाए जिस से पाप का भूसा ।

7.आत्मिक जागृति का बन जाए सोता,
जगत तक जाए तब प्रभाव उसका;
हृदयों को कर दे हरा और भरा ।
422 प्रभु नदियाँ बहायेगाprabhu nadiyaan bahaayega
‘‘मैं मुण्डे टीलों से भी नदियाँ बहाऊँगा ।’’
(यशायाह 41:18)

प्रभु नदियाँ बहायेगा, निर्जल, ऊँचे पर्वतों से;
प्रभु नदियाँ बहायेगा ।।

1.मरुभूमि करे घना जंगल सा, प्यासी भूमि को अदन सा;
महान प्रभु तू बनाने वाला, बदल दे प्रभु हृदय मेरा ।(2)

2.सुखि धाटियों को भी तू ने, भर दिया प्रभु जीवन-जल से;
प्रभु, तू है सनातन-चट्टान, भर दे मुझे भी उसी जल से ।

3.नदी के तीर के जीवन-वृक्ष सा, जिसके पत्ते है चंगा करते;
रख सम्भालकर दाहिने हाथ से, जाति-जाति के बीच में मुझे ।

4.शान्ति रहित हूँ, सामर्थ्यहीन भी, पर तू है प्रभु अनन्त उत्साह का;
बहा दे नदी पीशोन और गीहोन, उजाड़ मेरे इस जीवन से ।

5.हूँ प्रभु मैं नालायक, फलहीन, जर्जर, संकीर्ण हूँ दिल का;
बहा दे नदी हिद्दकेल, फरात, निरर्थक मेरे जीवन से ।

6.हूँ निकम्मा योग्य मृत्यु के, तौभी उस वृक्ष की नाई बना;
जो हर महीने फलता रहता, अपने सीमाहीन कृपानुसार ।
423 भर दे मेरे प्रभु मुझे तूbhar de mere prabhu mujhe too
‘‘तुम परमेश्वर के सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ ।’’
(इफिसियों 3:19)

भर दे मेरे प्रभु मुझे तू(2)... सारी भरपूरी से अपनी मुझे तू ।(2)

1.अपने आत्मा से मुझे भर दे,(2)... सारी शक्ति से मुझे भर दे ।(2)

2.स्वर्गीय आनन्द से भर दे मुझे,... आत्मिक शान्ति से भर दे मुझे ।

3.महिमा से अपनी मुझे भर दे,... फलों से जीवन मेरा भर दे ।

4.जीवन से भर दे प्रभु तू मेरे,... प्रेम से तू भर दे ईश्वर तू मेरे ।

5.सत्य से भर दे मेरा हृदय,... दया से भर दे मेरा हृदय ।

6.विश्वास से प्रभु मुझे भर दे,... ज्ञान से अपने मुझे भर दे ।

7.स्रोतों और झरनों का अनुभव दे,... नदियाँ और नाले मुझसे बहा दे ।
424 हे प्रभु तू भर देhe prabhu too bhar de
‘‘तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ ।’’
(इफिसियों 3:19)

हे प्रभु तू भर दे, सारी भरपूरी से;(2)
ताकि हम भी भर जाएँ, (2) परिपूर्ण हो जाएँ ।।(4)

1.माफी का दान दे कर के, जीवन से भर दे हमें;(2)
आत्मा का दान हमें दे, शक्ति से भर जाएँ ।(2)

2.स्वर्गीय आनन्द से भर दे, शान्ति अपनी हमें दे;
महिमा अपनी दिखा दे, प्रकाश से भर जाएँ ।

3.आत्मिक फलों से भर दे, प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज हो;
कृपा, भलाई और विश्वास, संयम से भर जाएँ ।

4.सत्य से भर दे हमको, दर्शन में बने भी रहें;
ज्ञान अपना दे तू सबको, स्तुति से भर जाएँ ।

5.स्वर्गीय आशीष से भर दे, संसार से हमें तू बचा;
उस राज्य के योग्य बना दे, आशा से भरपूर हैं ।
425 यरूशलेम के फाटकोyarooshalem ke phaatako
‘‘जब उसने यरूशलेम में प्रवेश किया,... ।’’
(मत्ती 21:10)

यरूशलेम के फाटको, राजा को अन्दर आने दो;
हँसमुख मण्डल से प्रभु का, स्वागत उसका तुम करो ।।

1.वह आता देखो विजय से, शत्रु पर जयवन्त होके,
खजूर की डाली, वस्त्र क्या है, हृदय अपना बिछाए दो ।

2.रोको न इन बच्चों को, न वृद्ध और जवानों को;
प्रभु की विजय में उनको, सना सना गाने दो ।

3.ठुकराते दया प्रभु की, अपने ओछे कामों से,
स्वर्गीय राजा प्रभु को आज, मन मन्दिर में आने दो ।

4.देखो प्रभु निकट अब आया, तुमसे वह भेट करेगा;
छिदे हाथ पसार के कहता, दिल में मुझको जगह दो ।

5.पश्चताप तुम आज ही कर लो, पापों को दिल से मान लो;
जीवन, मुक्ति, शान्ति देगा, प्रभु है वही आदर दो ।
426 यीशु, यीशु मन में आ जाyeeshu, yeeshu man mein aa ja
‘‘प्रभु ने उसका मन खोला, जो उसने बिनती की,
कि चलकर मेरे घर में रहो ।’’ (प्रेरितों 16:14,15)

यीशु, यीशु मन में आ जा,(2) इस दुनिया का तू मुक्तिदाता;(2)
हमको बचा जा, पाक बना जा ।।(2)

1.पानी पर तू चलने वाला,(2) दो मछली पाँच रोटी लेकर;(2)
पाँच हजार को मुफ्त खिलाया ।(2)यीषु

2.काना की शादी में जाकर, सादे पानी को मय बनाकर;
कुदरत अपनी का जलवा दिखाया ।

3.दुःखियों का तू ही मददगार है, विधवा और अनाथों का है;
तू ही अकेला है रखवाला ।

4.मेरे लिए जग में आकर, ताज काँटों का सिर पर लेकर;
क्रूस पर चढ़कर खून बहाया ।

5.बादशाही करने को तू आ जा, अब्दी जिन्दगी खुशी देकर;
इस दुनिया के दुःख से बचा जा ।
427 जीवन दीप जलाओंjeevan deep jalaon
‘‘तू उनकी आँखे खोले, कि
वे अन्धकार से ज्योति की और फिरे ।’’ (प्रेरितों 26:18)

जीवन दीप जलाओं, (2) प्रभुजी मेरे, प्रभुजी मेरे;(2)
जीवन दीप जलाओं ।।(2)

1.घोर अन्धेरा पथ न सूझे, (2) सत्य नगरी को पाऊँ कैसे;(2)
हाथ पकड़कर तुम यीशुजी, प्रेम की राह दिखाओं प्रभुजी ।(2)

2.बास करो मेरे जीवन में, बस जाओ मेरे नयनों में;
सब की तुम ने लाज रखी है, मेरे भी बन जाओ प्रभुजी ।

3.प्राण दियो तुम पापिन कारण, मेरे भी तुम कष्ट निवारण;
धार बही जो क्रूस से तेरी, उस में मुझे नहलाओ प्रभुजी ।
428 ज्योति दिखा दोjyoti dikha do
‘‘उसमें जीवन था; और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति थी ।’’
(यूहन्ना 1:4)

ज्योति दिखा दो, मार्ग बता दो;
प्यारे मसीह मन में दीप जला दो ।।

1.दुनिया की मैं इस यात्रा में,... चलता रहूँगा तेरी ज्योति में;
ताकि पहुँचूं मैं बन्दरगाह,... प्रभु, अब पहुँचा दो ।

2.घोर अन्धेरा जब छा जाए,... तुफान मेरे मार्ग में आए;
तुम प्रभु उठकर ड़ाँट दो,...  प्रभु, अब बचा लो ।

3.आशा मन में जाग रही है,... प्रभु से मिलूँगा, साथ रहूँगा;
अब प्रभु मुझ को थाम लो,... प्रभु, अब सम्भालो ।
429 जीवन की यह प्यास मेरेjeevan kee yah pyaas mere
‘‘हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊँ ।’’
(यूहन्ना 4:15)

जीवन की यह प्यास मेरे,... अब बुझा प्रभु यीशु प्यारे ।।

1.तू जीवन का सोता है,... जीवन जल तुझ से बहता है;
इस बहते हुए जीवन को,... भर दे जीवन में मेरे ।

2.तू शान्ति का निर्झर है,... शान्ति प्रभु तुझ से झरती है;
इस झरती हुई शान्ति को,... भर दे जीवन में मेरे ।

3.सत् आनन्द की तू धारा है,... तेरा आनन्द जग में न्यारा है;
इस न्यारे मनोहर आनन्द को,... जीचन में तू दे मेरे ।

4.शुद्ध जीवन आनन्द तेरा,... यह निकले जीवन से मेेरे;
और पाए मेरे इस जीवन से,... जग आशीषें प्रभु तेरे ।
430 आसी की यीशु प्यारेaasee kee yeeshu pyaare
‘‘हे मेरे परमेश्वर, कान लगाकर... आँखे खोलकर हमारी
उजड़ी हुई दशा को अपनी बड़ी दया के अनुसार देख ।’’
(दानिय्येल 1:18)

आसी की यीशु प्यारे, बिगड़ी बनाते जाना;
पाप के सागर से किश्ती पार लगाते जाना ।।

1.पहलू से खून-ए-अमृत अपने बहाते जाना,
हक ओ जीवन का रास्ता सब को बताते जाना ।

2.नासरी यीशु प्यारे, सूरत दिखाते जाना;
चंगे मरीज करना, मुर्दे जिलाते जाना ।

3.जलवा होरेब वाला, सबको दिखाते जाना;
पर्दा तारीकी वाला, दिल से उठाते जाना ।

4.आसी की मिन्नत ऊपर, कान लगाते जाना;
सब को प्रकाशित करना, कामिल बनाते जाना ।
431 प्रभुजी भेजो वर्षा कोprabhujee bhejo varsha koo
‘‘क्योंकि भारी वर्षा की सनसनाहट सुन पड़ती है ।’’
(1 राजा 18:41)

प्रभुजी भेजो वर्षा को, पूरी करने प्रतिज्ञा को;
गर्जन के साथ आने दो ।।

1.एलियाह ने जब पुकारा, आकाश तब हो गया काला;
भारी वह वर्षा, भूमि पर बरसी, वैसे ही प्रार्थना सुन लो ।

2.आखरी वर्षा के समय में, वर्षा को पृथ्वी पर भेजो;
प्रत्येक खेत पर फसल अब उगे, गरजन के साथ आने दो ।

3.प्रभुजी अपनी मीरास पर, बड़ी आशीषें उण्ड़ेलो;
प्यास के कारण थके हुए हम, बल दो हमें स्थिर करो ।

4.होंठों पर रखो अंगारे, दूर करो दोष हमारे;
भेजो प्रभु अब सेवा के लिए, हियाव से प्रचार हम करें ।
432 प्रभु बरसा दोprabhu barasa do
‘‘क्योंकि मैं प्यासी भूमि पर जल और सूखी भूमि पर
धाराएँ बहाऊँगा ।’’ (यशायाह 44:3)

प्रभु बरसा दो,(2)
आशीषें बारिष बरसा दो;
प्रभु बरसा दो ।।(2)

1.हे यीशु आज बिनती हमारी, मध्य में तुम प्रभु आज आओ;(2)
आए है हम द्वार तुम्हारे,(2) खाली है प्रभु तुम भर दो ।(2)

2.प्यासी भूमि पर जल बरसाओ, सुखी भूमि पर धाराएँ;
सन्तान है हम आत्मा उण्ड़ेलो, और आशीष से भर देओ ।

3.स्वर्ग तुम खोलो आज हम देखंे, पिता के दाहिने खड़ा यीशु को;
अपना तेज प्रभु निवास स्थान में, बहुतायत से तुम भर दो ।

4.दोनों करुबो के मध्य में से आज, हमें सुनाओ मीठी आवाज;
यीशु को छोड़ और किसी की न सुनें, आत्मा में तृप्ति दे जाओ।

5.स्वर्ग खुला है हम सब देखते, दूत भी चढ़ते उतरते हैं;
अभिषेक दे दो घर यह तुम्हारा, एक महान कार्य कर जाओ ।
433 तुम तो आत्मा के युद्ध कोtum to aatma ke yuddh ko
‘‘विश्वास की अच्छी कुश्ती लड़ ।’’ (1 तीमुथियुस 6:12)

तुम तो आत्मा के युद्ध को जीत लो रे,
मेरे भाईयो हटो न पीछे रे;
मेरी बहनों हटो न पीछे ।।

1.प्रभु यीशु ने क्रूस को उठाया,(2)
शैतान की फौज को बिलकुल हराया,... रे(2)
तुम उसी के पीछे अब हो लो रे ।...मेरे भाइयो

2.काँटो का मुकुट सिर पर पहिना के,
सिपाहियों ने सिरकंड़े मारे,... रे
ऐसे तुम भी सिरों को दे दो रे ।

3.कलवरी के रास्ते चढ़ा था,
साथ न कोई उस के गया था,... रे
तो तुम भी अकेले चढ़े चलो रे ।

4.दुनिया के लोग सब नींद में सोते,
यीशु पहाड़ पर टेकते थे घुटने,... रे
ऐसे प्रार्थना से तुम भी बल ले लो रे ।

5.मण्डली प्रभु की सोई हुई है,
शैतान की बेड़ी से वह बंधी है,... रे
तुम रूह की तलवार लो बढ़ जाओ रे ।
434 हे पहरुआ जागता रहhe paharua jaagata rah
‘‘हे पहरुए रात का क्या समाचार है ?
हे पहरुए रात की क्या खबर है ?’’ (यशायाह 21:11)

हे पहरुआ जागता रह,... तू है सिपाही यीशु का;
लड़ना पड़ेगा तुझ को,... बढ़ जा बल से प्रभु के ।।

1.शत्रु बहुत तेरे हैं, आगे पीछे घेरे हैं;(2)
बचेगा कैसे उनसे ?(2) आज्ञा मान तू प्रभु के ।... हे पहरुआ

2.हथियार तुझे लेना है, शक्ति तुझे पाना है;
खड़ा तुझे रहना है, सन्मुख सारे दुश्मन के ।

3.इसलिए हो अब तैयार, सारे हथियार तू सम्भाल;
आत्मिक लड़ाई तेरी है, डरना नही किसी से ।

4.सत्य का कमरबन्ध बान्ध, झुठ से तुझे बचना है;
झिलम धार्मिकता की ले, आत्मा तेरी बच जाए ।

5.जूते पाँव में अब तू ले, मेल की सुवार्ता को दे;
विश्वास की ढाल लेकर तू, बच जा तीरों से दुष्ट के ।

6.उद्धार का टोप पहने रह, मुक्ति तेरी दीख पड़े;
आत्मा की तलवार को ले, वचन जो है प्रभु के ।

7.प्रार्थना सदा करता रह, हथियार ये श्रेष्ठ सब में है;
चूकेगा नहीं हरगिज, यदि सदा जागता रहे ।
435 जागते रहना, जागते रहनाjaagate rahana, jaagate rahana
‘‘इसलिए जागते रहो... ।’’ (मत्ती 24:42)

जागते रहना, जागते रहना, यीशु ने कहा है प्रियों !
जागते रहना, जागते रहना ।

1.ध्यान से जरा तो समझो, इच्छा प्रभु की अब क्या है ?
समय को अमूल्य समझना, जागते रहना ।

2.भरोसा जग में नहीं है, जीवन का ठिकाना क्या है ?
व्यर्थ ही व्यर्थ सब है, प्रार्थना करना ।

3.जग से अलग तुम रहना, झूठी शिक्षा से तो बचना;
प्रभु को जो भाये करना, नम्र तुम रहना ।

4.दिखावटी बातें न आए, जोश बहुत भयंकर तो है;
झूठे घमंड़ से तो बचना, सावधान रहना ।

5.प्रभु यीशु शीघ्र आएगा, सदा तुम बाट जोहना,
आनन्द के साथ ले जाएगा, तैयार तुम रहना ।
436 जागते रहो, जागते रहोjaagate raho, jaagate raho
‘‘हे सोनेवाले जाग और मरे हुओं में से जी उठ, और
मसीह की ज्योति तुझ पर चमकेगी ।’’ (इफिसियों 5:14)

जागते रहो, जागते रहो, नूर चमकेगा, जरुर चमकेगा;
तुम पर चमकेगा, मुझ पर चमकेगा ।।

1.जागते रहो, दुआ करो,... कि आजमाइश में न पड़ों;
यीशु की आवाज अब सुनों,... सब मसीही भाइयों ।

2.जागते रहो और न डरो,... कमर कसो, खबरदार हो;
यीशु की आवाज अब सुनों,... सब मसीही भाइयों ।

3.जागते रहो, ईमान रखो,... होश में आओ, नूर चमकओ;
यीशु की आवाज अब सुनो,... सब मसीही भाइयों ।

4.जागते रहो, हिम्मत बाँधो,... जहाँ जाओ क्रूस उठाओ;
यीशु की आवाज अब सुनो,... सब मसीही भाइयों ।
437 यीशुजी, प्रभुजी दोyeeshu jee, prabhu jee do
‘‘हे भाइयों परमेश्वर से मेरी प्रार्थना है कि वे उद्धार पाएँ ।’’
(रोमियों 10:1)

यीशुजी, प्रभुजी दो वरदान अब तो,
जागे देश हमारा, हाँ, हाँ, फैले नाम तुम्हारा ।।

1.जीवन के हर कदम-कदम पर, तुमको रोज निहारें;(2)
और कौन है जग में अपना, जिस को नित हम पुकारें;
तुम ही हो तारणहार यीशुजी, जागे देश हमारा ।

2.शक्ति दो हर आन हम को सब के मन चमका दो,
खोल दो खिड़की आसमान की, हम पर मेंह बरसा दो;
तुम ही हो चट्टान यीशुजी, जागे देश हमारा ।
438 हे पिता स्वर्गीय हमारेhe pita svargeey hamaare
‘‘हे प्रभु, प्रार्थना करना हमें सिखा दे ।’’ (लूका 11:1)

हे पिता स्वर्गीय हमारे, आप ही का ध्यान हो;
मन में हमारे प्रेम सागर, आप ही का ज्ञान हो ।।

1.जल में थल में फैल जावे, कीर्ति उज्जवल आप की;
आप की बजे दुन्दुभी, आप का सम्मान हो ।

2.राज्य होवे आप का, और आप के फरमान हों;
हम प्रजा है आप की, हम आप पर बलिदान हो ।

3.स्वर्ग में जैसे कि इच्छा, पूरी होती आप की;
भूलोक में भी स्वर्ग का सा, राग हो और तान हो ।

4.हे अन्नदाता विश्व-पालक, नित्य भोजन दीजिए;
तृप्त कर दो आत्मा को देह का कल्याण हो ।

5.क्षमा जैसे कर रहे हैं, बैरियों को शत्रु जो;
हम पतित हैं, हे प्रभु, हम को क्षमा का दान हो ।

6.दुष्ट से हमको बचा कर, पाप पर जय दीजिए;
हम तो है निर्बल बालक, आप शक्तिमान हो ।

7.राज्य तो है आपका, सामर्थ्य, महिमा सर्वदा;
आप हैं त्रिलोक प्रभु, आप ही का मान हो ।
439 हमें यीशु के दरवाजे परhamen yeeshu ke daravaaje par
‘‘परमेश्वर,... दया का धनी है... ।’’ (इफिसियों 2:4)

हमें यीशु के दरवाजे पर रहना, वह रहमतों का बानी है;
सिर झुकाए सेवा में लगे रहना, वह रहमतों का बानी है ।।(2)

1.जग में यीशुजी ने आके भलाइयाँ कीनी हैं,(2)
सारे पापियों को पाप से रिहाई दीनी है,(2)
तेरे दर से अब हट के नहीं जाना, वह रहमतो का बानी है ।(2)

2.बिनती यीशुजी तू सुन ले इस दुखिया औरत की,
लड़की मेरी बीमार रुह बच जाए बिचारी की;
मूँह माँगी मुराद तुझ से पाना, वह रहमतों का बानी है ।

3.सुन ले यीशुजी ने कहा, मैं आया इसलिए;
इन इस्राएली भेड़ों को बचाने के लिए,
खाना बच्चों का देऊँ तुझे कैसे, वह रहमतों का बानी है ।

4.कहा औरत ने यीशु से मैं जाऊँ किस तरह,
मेज तेरी पर के टुकड़ो को मैं खाऊँगी जरा;
तेरे टुकड़ों को खाके सेर होना, वह रहमतों का बानी है ।

5.कहा यीशु ने ऐ औरत ईमान तेरा बड़ा,
जो कुछ माँगा तू ने मुझ से मैं करूँगा पूरा;
जाके देख तेरी बेटी हो गई चंगी, वह रहमतों का बानी है ।
440 यीशु प्यारे! तेरे सिवाyeeshu pyaare! tere siva
‘‘मैं आप ही अपनी भेड़ बकरियों का चरवाहा हूँगा,
परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है ।’’ (यहेजकेल 34:15)

यीशु प्यारे ! तेरे सिवा मेरा कोई नहीं,
यीशु प्यारे ! मेरा और कोई नहीं ।

1.अपने कलाम की चरागाहों में,
मुझ को ले चल मेरे प्यारे चौपान;
राहत के चश्मों पास मुझको बैठा, आराम और कही नहीं । ...यीषु

2.जब मैं भटक जाऊँ इस दुनिया में,
मुझ को बहाल कर, ऐ प्यारे चौपान;
कन्धों पर ले, सच्ची राह पर चला, मेरा और राहबर नहीं ।

3.मौत के साये की वादी से जब मैं,
जाऊँ तो साथ रह, ऐ प्यारे चौपान;
आशा और लाठी से दे तसल्ली, मुझ को फिर खतरा नहीं ।

4.जंगली दरिन्दों से रख तू महफूज,
मुझको चरा उनको रू-ब-रू;
तेल मेरे सिर पर इफरात से उण्ड़ेल, प्याला मेरा छलके भी ।

5.अपने पाक घर में मुझे रख सदा,
रहमत और फजल मुझे कर अता;
मेरा हो सब कुछ ऐ प्यारे चौपान, मेरा और कोई नहीं
441 इस से गहरा यीशु तेरेis se gahara yeeshu tere
‘‘मैं यह प्रार्थना करता हूँ, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान
और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए ।’’
(फिलिप्पियों 1:9)

1.इस से गहरा यीशु तेरे प्यार में, जाना चाहता हूँ;
मदद दे कि तेरे ज्ञान के स्कूल में, उन्नति करूँ ।
हाँ, इस से गहरा अब, और इस से ऊँचा भी;
मुझे चला ऐ रब्ब, यही दुआ है मेरी ।।

2.इस से गहरा, आत्मा से तू भर के,... खींच, हाँ, खींच मुझे;
ताकि मेरी जिन्दगी मसीह में,... बिलकुल छीप जाएँ ।

3.इस से गहरा, शायद वह मुझे होगा,... दुःखो में जब हूँ;
ताकि उसके प्यार में स्थिर मैं होकर,... उसको फल देऊँ ।

4.इस से गहरा रोज-ब-रोज मसीह में,... उसकी इच्छा में;
मेरी जिन्दगी, तभी बदलेगी,... उसकी सूरत में
442 ऐ यीशु मेरा दिल छिपाai yeeshu mera dil chhipa
‘‘उसी समय दाऊद के घराने और यरूशलेम के निवासियों के
लिए पाप और मलिनता घोने के निमित्त एक बहता हुआ
सोता होगा ।’’(जकर्याह 13:1)

1.ऐ यीशु मेरा दिल छिपा,... उस सोते में,(2)
सब पाप और डर दिल से निकाल,... लोहू के सोते में ।
लोहू के सोते में, ऐ रब्ब,... मुझको छिपा और कर बेऐब;
रोज-ब-रोज मुझ को उसमें रख,... लोहू के सोते में ।।

2.सब पापी पाते हैं पनाह,... उस सोते में;
और उनको मिलती है नजात,... लोहू के सोते में ।

3.अब अपने आप से मुझ को तू भर,... उस सोते में;
और मुझ को भी पवित्र कर,... लोहू के सोते में ।

4.यीशु की शान्ति दिल में है,... उस सोते में;
और आनन्द भी वह देता है,... लोहू के सोते मेें ।

5.पवित्र आत्मा रोज-ब-रोज,... उस सोते में;
दिखाता है यीशु मुझ को,... लोहू के सोते में
443 दिल मेरा ले रब्बdil mera le rabb
‘‘मैं ने सारे मन से प्रार्थना की है, हे यहोवा मेरी सुन लेना !
मैं तेरी विधीयों को पकड़े रहूँगा ।’’
      (भजन 119:145)

1.दिल मेरा ले रब्ब, दिल मेरा ले, हो तेरी मर्जी पूरी मुझ से;
तुझ को मैं ताकूं, कि तेरा हूँ, अब से हमेशा तेरा रहूँ ।

2.दिल मेरा ले, रब्ब, दिल मेरा ले, अब उसको जाँच और शक्ति तू दे;
कर मेरे दिल को निर्मल और साफ, कलवरी के खून से होऊँ साफ ।

3.दिल मेरा ले, रब्ब, दिल मेरा ले, साफ मेरा दिल हो हर बदी से;
शक्ति आत्मा की अब दिल में दे, प्यारे खुदावन्त, पवित्र कर दे ।

4.दिल मेरा ले, रब्ब, दिल मेरा ले, यह तेरा मन्दिर प्रेम से भर दे;
प्यारे मसीहा अब दिल में आ, जो कुछ तू कहे मैं करूँगा ।
444 हे प्रभु, तू उपस्थित हैhe prabhu, too upasthit hai
‘‘जो यहोवा की बाट जोहते हैं और उसके पास जाते हैं
उनके लिए यहोवा भला है ।’’ (विलापगीत  3:25)

1.हे प्रभु, तू उपस्थित है,... आशीष हम को देने को;
बादल हम को अभी घेरते,... तेरी इच्छा पूरी हो ।
हम आसमानी वर्षा माँगते,... पूरी तौर से अभी आ;
हम अब ठहरते प्यारे यीशु,... दिल हमारा तू जिला ।।

2.तू उपस्थित है हम जानते,... यह पवित्र भूमि है;
लेकिन हम अब ज्यादा माँगते,... वास तू कर यह बिनती है ।

3.तू उपस्थित है हम बिनती,... करते हैं विश्वास के साथ;
दिल में आग जला आत्मा की,... अब बढ़ा तू अपना हाथ ।

4.तू जो दिल की लालसा देखता,... अभी खोल अपना भंडार;
और एक वर्षा के मुआफिक,... आशीष भेज, ऐ प्यारे यार ।
445 होगी आशीषों की बारिशhogee aasheeshon kee baarish
‘‘बरसात के अन्त में यहोवा से बारिश माँगो ।’’
(जकर्याह 10:1)

1.”होगी आशीषों की बारिश,“... है यह प्रेम की प्रतिज्ञा;
आएँगे मौसम सुहाने,... स्वर्ग से त्राता भेजेगा ।
बारिस आशीष की,... बारिश आशीषों की भेज;
दया की बुंदे टपकती,... पर, बारिश आशीषों की भेज ।।

2.होगी आशीषों की बारिश,... तब धन्य नवजीवन आ;
आत्मा के पवित्र फल सब,... हम में उत्पन्न करेगा ।

3.होगी आशीषों की बारिश,... वह अब हम पर भी तू भेज;
हम को नवजीवन दान दे,... भेज अपने वचन का तेज ।

4.होगी आशीषों की बारिश,... आज से ही आरंभ वह हो;
हम अपने पाप हैं स्वीकारते,... जब हम पुकारते ख्रिस्त को ।
446 राह बता, महान परमेश्वरraah bata, mahaan parameshvar
‘‘तू सम्मति देता हुआ मेरी अगुवाई करेगा और
मुझ को अपने पास रखेगा ।’’       (भजन 73:24)

1.राह बता, महान परमेश्वर,... राही मैं निर्जन पथ का;
शक्तिमान है तू, मैं निर्बल,... दे सहारा हाथों का;
स्वर्गीय भोजन, स्वर्गीय भोजन,...  दे मुझ त्राण के भुखे को ।

2.खोल दे वह सोता बिल्लौरी,... बहती जिस से जीवन धार;
खम्भा आग और बादल का बन,... कर इस राह से मुझे पार;
प्रबल ईश्वर, प्रबल ईश्वर ! हो तू मेरी ढाल तलवार ।

3.मृत्यु नदी पास जब पहुँचू,...  मेरी चिंता, भय मिटा;
मृत्युंजय, है नरक नाशक !... थाम के मुझे पार लगा;
तेरी स्तुति, तेरी स्तुति,... करूँगा मैं सर्वदा ।
447 छोड़ न मुझे, प्यारे यीशु!chhod na mujhe, pyaare yeeshu!
‘‘हे यहोवा, मैं तेरा शरणागत हूँ ।’’       (भजन 71:1)

1.छोड़ न मुझे, प्यारे यीशु ! बिनती सुन मेरी,
औरों पर तू दया करता, कर तू मुझ पर भी ।
यीशु, यीशु ! बिनती सुन मेरी;
औरों पर तू दया करता, कर तू मुझ पर भी ।।

2.तेरे पास, हे दयासिंधु, शान्ति पाऊँगा;
तेरे सामने झुका हूँ मैं, अब विश्वास दिला ।

3.तुझ पर पूरी आस मैं रखता, अपना मुख दिखला;
चंगा कर इस घायल मन को, इसे ले बचा ।

4.तू है शान्ति का चिर सोता, प्यारा प्राण से भी;
तुझे छोड़ अब कौन है मेरा, जग या स्वर्ग में भी ।
448 यीशु कैसा मित्र प्यारा!yeeshu kaisa mitr pyaara!
‘‘मैंने तुम्हें मित्र कहा है,... ।’’ (यूहन्ना 15:15)

1.यीशु कैसा मित्र प्यारा !... पाप और दुःख उठाने को;
उस की शरण हम ले सकते,... हम पर दुःख का भार जब हो ।
दुःख कितने हम व्यर्थ उठाते,... व्यर्थ ही शान्ति हैं खोते;
यह सब केवल इसलिए कि,... ख्रिस्त को नहीं बतलाते ।

2.आती हम पर क्या परीक्षा,... चिन्ता, व्याकुलता घेरें ?
साहस अपना हम न छोड़ें,... प्रार्थना में उस से कहें;
सच्चा मित्र ऐसा कौन है,... जो सम्भाले दुःखों में;
सारी निर्बलता वह जानता,... प्रार्थना में उस से कहें ।

3.क्या दबें हैं भारी बोझ से,... सारा बल जाता रहा ?
प्यारा ख्रिस्त ही है सहारा,... प्रार्थना में उस से कहें;
क्या मित्रों ने तुझ को छोड़ा ?... प्रार्थना में उस से कहें;
अपनी गोद में तब छिपा के,... शान्ति वह देगा हमें ।
449 पवित्र समय प्रार्थना काpavitr samay praarthana ka
‘‘संध्या, प्रातः और दोपहर मैं प्रार्थना करूँगा... ।’’
      (भजन 55:17)

1.पवित्र समय प्रार्थना का,... सांसारिक बातें छोडूँगा;
और स्वर्गीय पिता के सन्मुख,... हृदय अपना उण्डेलूँगा;
कठिन विपत्ति के समय,... वही तो एक सहायक है;
शैतान के जाल से बचता हूँ,... जब प्रार्थना करके जागता हूँ ।

2.पवित्र समय प्रार्थना का,... जब जान के उसकी सत्यता;
पिता से बिनती करता हूँ,... आशीष की आशा करता हूँ;
मुझे प्रभु बुलाता है,... समझाने, क्या अनुग्रह है;
चिंताए सारी प्रार्थना कर,... डाल देता हूँ मैं उसी पर ।

3.पवित्र समय प्रार्थना का,... भरोसा उस पर सदा का;
है मेरा, जब तक कर विश्वास,... मैं न जा पाऊँ तेरे पास;
इस देह को छोड़ मैं जाऊँगा,... कि स्वर्ग में मुकुट पाऊँगा;
फिर देख सामने ईश्वर को,... पाऊँगा प्रार्थना के फल को ।
450 रह मेरे पास सदाrah mere paas sada
‘‘हे यहोवा कान लगाकर मेरी सुन ले, मैं दीन और दरिद्र हूँ ।’’
      (भजन 86:1)

1.रह मेरे पास सदा,... प्रभु दयाल;
तू अपने वचन से,... मुझे सम्भाल ।
हे यीशु ! प्यारे रक्षक,... तू है अति आवश्यक;
मैं आता हूँ पास तेरे,... तू आशीष दे ।।

2.रह मेरे पास सदा,... और शक्ति दे;
परीक्षा के समय,... कर स्थिर मुझे ।

3.आनन्द या पीड़ा हो,... रह मेरे पास;
सिद्ध हो जिस से जीवन,... कर मुझ में वास ।

4.तू अपनी इच्छा पूर्ण,... मुझ से करा;
और वचन का प्रताप,... मुझ से दिखला ।

5.महा पवित्र तू !... रह मेरे पास,
ईश्वर का बेटा तू,... मैं तेरा दास ।
451 प्रभु यीशु, मेरे प्रियprabhu yeeshu, mere priy
‘‘हे इस्राएल के चरवाहे,... कान लगा ।’’       (भजन 80:1)

1.प्रभु यीशु, मेरे प्रिय,... लोगों का बचानेहार;
अपने प्राण को तू ने दिया,... कि हमारा हो उद्धार;
प्रभु यीशु ! प्रभु यीशु ! ... सब का तुझ से हो उद्धार ।

2.बिना तेरे मैं हूँ निर्बल,...  मेरी तू सहायता कर;
जब तू साथ है, मैं निश्चित हूँ,... हर विषमता में निडर;
प्रभु यीशु ! प्रभु यीशु ! मेरे साथ रह जीवन भर ।

3.जब हो मेरा मृत्यु समय,... जब उड़ जाए मेरे प्राण;
तब तू आ, हो मेरी शरण,...  मेरी आत्मा को दे स्थान;
प्रभु यीशु ! प्रभु यीशु ! ... तू है मृत्यु पर जयवान ।
452 दिव्य प्रेम, सर्वोत्तम सब सेdivy prem, sarvottam sab se
‘‘मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है ।’’
(इफिसियों 3:19)

1.दिव्य प्रेम, सर्वोत्तम सब से,... स्वर्गीय आनन्द आ उतर;
हम को अपना मन्दिर कर ले,... इस में अपनी महिमा भर;
यीशु तू दया का सागर,... प्रेम असीम और शुद्ध तू है;
आकर हम को भी मुक्ति दे,... थाम ये हाथ जो कांपते हैं।

2.आत्मा हम पर उण्डेल दे,... सब घबराए दिलों में;
शान्ति तेरी जो अमिट है,... तुझ से हम को भी मिले;
पाप से काले मन को शुद्ध कर,... आदि और अन्त तू हो;
आदि, अन्त विश्वास का तू ही,...  हम को मुक्त कर दे अभी ।

3.आ, हे सामर्थी उद्धारक !... तेरा अनुग्रह पाएं;
शीध्र आ और फिर कभी भी,... छोड़ न, पास तू रह सदा;
तुझ को ही सदा सराहें,...  सेवा तेरी ही करें;
प्रार्थना, भक्ति करते हुए,... तेरे सिद्ध प्रेम में बढ़ें ।

4.अन्त तक यह जीवन हमारा,... शुद्ध निर्दोष बना रहें;
तुझ से हम सब त्राण को पाके,... तेरे ही बने रहें;
तेज पर तेज पा, रूप बदलते,... जब तक स्वर्ग में न मिलें;
तब तेरे चरणों में झुक कर,... स्तुति-प्रार्थना करें ।
453 जीवन की रोटी अबjeevan kee rotee ab
‘‘जीवन की रोटी मैं हूँ ।’’ (यूहन्ना 6:48)

1.जीवन की रोटी अब प्रभु खिला,... जैसे समुद्र पास खिलाता था;
बाइबल में खोजूँगा दर्शन तेरे,... मैं तेरा भूखा हूँ, तू तृप्त कर दे ।

2.जीवन की रोटी तू है सर्वदा,... वचन के द्वारा तू मुझे बचा;
तब हर एक बन्धन से छूट जाऊँगा,... मैं पूरी शान्ति तुझ से पाऊँगा ।

3.सामर्थी आत्मा दे, प्रभु मुझे,... तू मेरी आँखे छू के दृष्टि दे;
जो बातें छिपी हैं उन्हें दिखा,... तब जीवनदाता तुझे देखूँगा ।

4.सत्य रोटी, प्रभु ! मुझे खिला,... जैसे गलील में तू खिलाता था;
बन्धन को मेरे खोल, छुटकारा दे,... तब पाऊँगा विश्राम पूर्ण आनन्द से ।
454 बोल मुझ से, कि मैंbol mujh se, ki main
‘‘वह स्वामी के काम आएगा,... ।’’
(2 तिमुथियुस 2:21)

1.बोल मुझ से, कि मैं बोल सकुं,... हे प्रभु, तेरी वाणी से;
तू खोजता था वैसे खोजूँ,... उनको, जो दूर हुए तूझ से ।

2.मुझ को चला, प्रभु, कि मैं,... चलाऊँ भटके हुओं को;
मुझे खिला, कि प्रभु मैं,... खिलाऊँ तेरे भूखों को ।

3.मुझे सिखा, कि औरों को,... सिखाऊँ तेरी बातों को;
और मेरा बोलना ऐसा हो,... कि सब हृदय प्रभावित हों ।

4.अपने आत्मा से भर मुझे,... कि शान्तिदायक बातों को;
मैं बोलूँ, सुन के तुझ ही से,... सब श्रमित-व्यथित लोगों से ।

5.मुझे भी प्रभु काम में ला,... जहाँ भी तेरी इच्छा हो;
जब तक कि आमने-सामने आ,... मैं देखूँगा, त्राता तुझ को ।
455 मण्डली एक ही हैmandalee ek hee hai
‘‘जो मुझ पर... विश्वास करेंगे... वे सब एक हो ।’’
(यूहन्ना 17:20)

मण्डली एक ही है,
सार्वत्रिक, सार्वत्रिक मण्डली कहलाये;
मण्डली एक ही है,
सिर एक ही है, शरीर एक ही है;
नित्य शक्तियुक्त यह है, मण्डली एक ही है ।।

1.बनी नहीं किसी आदमी के नाम पर ये,
और न स्थापित किसी सिद्धान्तों पर है;
जगह के नाम से, न दिन के आधार पर;
बनी नहीं किसी ऐसे नाम पर यह ।

2.न कोई यहूदी, न कोई यूनानी;
न खतना है और न खतनारहित ही,
न देशवासी है और न परदेशी;
स्वतन्त्र-दास, स्त्री-पुरुष भेद नहीं है ।

3.बन्धन है आत्मा का सात धागों का,
आत्मिक जीवन है धागा मण्डली का;
दुनिया में रहकर, दुनिया से न्यारी;
स्वर्गीय जीवन बितानेवाली है ।

4.मण्डली देह है, देह है मण्डली;
दिव्य-दृष्टांत है वचन में बहुत ही,
निवासस्थान और प्रभु का घर है यह;
नूतन मनुष्य और राजनगर है ।

5.जैसे नेव होती है आधार भवन का,
जैसे दाखलता से जुड़ती है शाखा;
मानव-शरीर में जैसे सिर होता है,
पति हो स्त्री का, ख्रिस्त वैसे मण्डली का है ।

6.सार्वत्रिक मण्डली को, देख न सकता है;
शैतान है परेशान इस के कारण से,
स्थानिक मण्डली द्वारा, प्रगट होती है;
सार्वत्रिक मण्डली मर्म प्रभु का यह ।

7.नया जन्म पाये वे ही यह मण्डली है,
यीशु ख्रिस्त अनोखा मण्डली का सिर है;
योग्यता से करें पाँचों सेवाएँ,
मिलकर हम प्रभु को हल्लेलूयाह गाएँ ।
456 प्रभु यीशु अपनी मण्डलीprabhu yeeshu apanee mandalee
‘‘मैं अपनी कलीसिया बनाऊँगा... ।’’ (मत्ती 16:18)

प्रभु यीशु अपनी मण्डली बनाता,(2)
शैतान उस पर प्रबल न होता;(2)
प्रभु यीशु अपनी मण्डली बनाता ।।(2)

1.नकशे के अनुसार मन्दिर बना था,(2)
मनुष्य की बुद्धि से कुछ न बना था;(2)
नयी वाचा में नक्शा दिया था,
प्रभु का घर भी वैसे बना था ।

2.जीवता प्रभु जीवते पत्थरों को गढ़ के,
चट्टान पर दृढ़ नेव वह डालेे;
बालू की नेव पर घर जो डाले,
आंधी से वह सब नाश हो जावे ।

3.आत्मिक राजों को प्रभु है चुनता,
आत्मिक ज्ञान से वह उनको है भरता;
जब मनुष्य सांसारिक लोगों को चुनता,
आत्मिक घर फिर न बन सकता ।

4.घर यह प्रभु के लिए बनता,
पवित्रता से यह धर है बनता;
भरपूरी अपनी उस में वह भरता,
महिमा से उस का घर भर जाता ।

5.प्रगट महिमा हो प्रभु के घर से,
जाके जगत में फिर वह चमके;
जीवन का जल भी घर से निकले,
जहाँ जाए वहीं जीवन भर दे ।
457 भक्तों की मण्डलीbhakton kee mandalee
‘‘कलीसिया जो उसकी देह है और उस की परिपूर्णता है,
जो सब में सब कुछ पूर्ण करता है ।’’
(इफिसियों 1:22,23)

भक्तों की मण्डली है प्रभु की देह,(2)
भरपूरी अपनी जिस में वह भर दे ।।(2)

1.एक देह के बहुत सिर नहीं होते,(2)
देह के प्रभुजी सिर है अकेले ।(2) भक्तों

2.खयाल प्रभु के सिर से निकलते,
देह में वे आके प्रगट होते ।

3.इस देह में कोई यहुदी न होते,
दास न होते, स्वतन्त्र न होते ।

4.इस देह के भिन्न-भिन्न अंग चाहे होते,
एक साथ गठ के साथ ही रहते ।

5.हाथ तो पांव से कह नहीं सकते,
‘‘तुम बिन हम तो कार्य कर सकते ।’’

6.आत्मिक एकता अंग जब रखते,
आत्मिक उन्न्ाति देह में वे लाते ।

7.आधीन सिर के अंग जब रहते,
भरपूरी प्रभु की सेवा में पाते ।
458 कलीसिया ख्रिस्त यीषुkaleesiya khrist yeeshu
‘‘... यह उस की देह है ।’’ (इफिसियों 1:23)

कलीसिया ख्रिस्त यीषु का शरीर है,
उस में जुटते जो उस के वे अंग है ।।

1.आत्मा के द्वारा ईश्वर का जो मन्दिर,
बनता जा रहा है पवित्र आत्मा से;
स्थिर वे रहेंगे सदा, उस में बने रहते हैं।

2.छिपा हुआ था परमेश्वर का संकल्प जो,
कलीसिया के द्वारा प्रगट किया;
जो कोई विश्वास करें धन्य वे ही होते है ।

3.परमेश्वर को ख्रिस्त यीशु ही के द्वारा से,
महिमा होती रहे पीढ़ी पीढ़ी तक;
महिमा उसकी जो करें, वे ही मीरास होते हैं ।

4.ख्रिस्त यीशु जब मण्डली बनाता है,
न होंगे प्रबल, अधोलोक के द्वार;
जो जय पाते हैं, साथ उस के रहेंगे ।

5.अपनी दुल्हिन को लेने मसीह आता है,
जो शुद्ध हैं उन को उठा ले जाएगा;
उठाए वे जाएँगे, जो तैयार अब है ।
459 ख्रिस्त यीशु प्रभु जिसkhrist yeeshu prabhu jis
‘‘वे प्रेरितों से शिक्षा पाने और संगति रखने में और
रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे ।’’
(प्रेरितों 2:42)

ख्रिस्त यीशु प्रभु जिस मण्डली को अपने लोहू से मोला,
उस में जो आते, धन्य वे ही हैं, स्वर्ग उन्हीं का है ।।

1.जो प्रेरितों की शिक्षा को मानकर स्थिर हो चुके हैं,
आत्मा की शक्ति के द्वारा मण्डली में सदा स्थिर रहते हैं ।

2.जो कोई सन्तों के साथ संगति सदा वह रखते हैं,
ये ही हैं प्रभु मसीह में उन्नति करते जाते हैं ।

3.जो प्रभु की देह को खाते उसका लहु पीते उस में स्थिर हैं,
ये ही मसीह की मृत्यु और उठने का प्रचार करते हैं ।

4.जो लगन के साथ मण्डली में बोझ से प्रार्थना सदा करते हैं;
ये ही प्रार्थना के द्वारा शैतान को बाँध भी सकते हैं ।

5.जो प्रभु यीशु के दूसरे आगमन की बाट जोहते हैं,
ये ही सनातन आनन्द से साक्षी देेंगे सारे जगत में
460 आत्मिक घर हैaatmik ghar hai
‘‘तुम भी आप जीवते पत्थरों की नाई आत्मिक घर
बनते जाते हो ।’’ (1 पतरस 2:5)

आत्मिक घर है, प्रभु जो बनाता, आत्मिक नियम से है बनता ।।

1.मन्दिर का दर्शन आत्मा को देकर, आत्मा के द्वारा प्रगट करता ।

2.आत्मा और जीवन से घर है बनता, भरपूर जीवन से दृढ़ करता ।

3.आत्मिक एकता से घर है बनाता, आत्मा से जब वो है भरता ।

4.आत्मिक सेवक और आत्मिक सेवा, आत्मा मन्दिर में प्रभु चाहता ।

5.आत्मिक बलिदान अर्पण होता, तब प्रभु का मन तृप्त होता ।

6.आत्मिक घर में देह और संसार, इन के कामों को स्थान नहीं ।

7.आत्मिक घर में जब ये सब रहता, जगत जीवन से भर जाता ।
461 हम ईश्वर के घर कीham eeshvar ke ghar kee
‘‘तुम ईश्वर का निवास-स्थान होने के लिए एक साथ
बनाये जाते हो ।’’ (इफिसियों 2:12)

हम ईश्वर के घर की नाई बनाये गये हैं,
उस के अनुग्रह से हम स्थिर भी हुये है ।।

1.लोहू बहाया यीशु ने मण्डली हम बने,
वन्दना करते हम उसकी यीशु प्रभु है ।

2.सन्तों की संगत मिली और स्वर्ग भी मिला है,
पूरे दिल से भक्ति करते वही योग्य है ।

3.परदेशी जो थे हम जग में घर वह लाया है,
भक्तों के पालनहार की हम स्तुति करते हैं ।

4.प्रभु अपना कार्य किया हम सेवक बने हैं,
नम्र बनकर दीनताई से स्तुति करते हैं ।

5.प्रभु यीशु सिर मण्डली का शिरोमणि है,
जय-जयकार सदा हो उसकी नारे मारते हैं ।
462 हम हैं प्रभु का स्वर्गीय घरानाham hain prabhu ka svargeey gharaana
‘‘तुम अब... परमेश्वर के घराने के हो गए ।’’ (इफिसियों 2:19)

हम हैं प्रभु का स्वर्गीय घराना,
जिस में प्रभु खुद रहेता है ।।

1.कैसा सुन्दर है प्रभु का घराना, चारों दिशाओं से बुलाया है;
एक देह बने हैं नाता है लोहू का, चाहे हजारों भाषा से हैं ।

2.एक नया मनुष्य हम को बनाया, स्वर्गीय कुटुम्ब के तो हम सब हैं;
एक साथ मिलकर गठकर रहते, ईश्वर कर डेरा हम बनते हैं ।

3.न कोई काला, गोरा, धनी है, और न गरीब कोई बड़ा भी है;
न कोई छोटा, अनपढ़ और ज्ञानी, यीशु प्रभु ही तो सब कुछ हैं ।

4.प्रभु का घराना उस में न झगड़ा, न कोई ईर्ष्या, कपट भेद है;
शान्ति, आनन्द और सच्चा प्रेम उस में, प्रभु ही उन को चलाता है ।

5.प्रभु का घराना इस जग में है, सेवक को अधिकार सौंपा है;
हरेक को उस का काम दिया है, द्वारपाल हर घड़ी जागता है ।

6.मन में विश्वास और दृढ़ता, आशा है, यात्रा में जयवन्त उत्साही हैं;
जग के लिए हम आदर्श बनें हैं, शत्रु की हार पूरी इसी में है ।

7.वह दिन निकट है प्रितम आएगा, जागते रहो ! उसने कहा है;
सच्चा, विश्वासयोग्य बनकर रहते, धीरज से बाट उसकी जोहते हैं ।
463 सारी चीजें है तुम्हारीsaaree cheejen hai tumhaaree
‘‘सब कुछ तुम्हारा है ।’’ (1 कुरिन्थियों 3:21)

सारी चीजें है तुम्हारी,
प्रभु की प्रतिज्ञा है ।।

1.होवे पौलुस या अपुल्लोस,... चाहे कैफा हो;
दुनिया की सारी भरपूरी,... सब तुम्हारी है ।

2.जिन्दगी हो मौत भी हो,... वर्तमान भी हो;
भविष्य की सारी चीजें,... सब तुम्हारी है ।

3.हम सहकर्मी है प्रभु के,... खेती उस की तुम;
परमेश्वर की रचना हो तुम,... सब तुम्हारा है ।

4.सब प्रकार की प्रधानता,... अधिकार, सामर्थ;
भरपूरी सब यीशुजी की,... सब तुम्हारी है ।

5.सींची हुई बारी की नाई,... सोते के समान,
जल कभी जिसका न घटता,...  ऐसे होंगे तुम ।

6.सारी चीजों पर जय पाके... वारिस होना है;
बेटा होना भी खुदा का,... भाग तुम्हारा है ।

7.नई सृष्टि की आशीषें,... सब तुम्हारी है;
पवित्र सभा की आशीषें,... सब तुम्हारी है ।
464 प्रभु की महिमाprabhu kee mahima
‘‘यहोवा का तेज यहोवा के भवन में भर गया था ।’’
( 2 इतिहास 7:2)

प्रभु की महिमा प्रभु के घर को,
भर दिया वह भर दिया ।।

1.पाप और अधर्म के कारण जो सब ही,
ईश्वर की महिमा से रहित हुये;
ताकि फिर महिमा मनुष्य को मिले,
प्रभु यीशु ने प्रायश्चित किया ।

2.अनुग्रह सच्चाई से परिपूर्ण होकर,
हमारे बीच में डेरा किया;
जैसे पिता के एकलौते की,
हम ने देखी उस की महिमा ।
3.इसलिए प्रभु एक घर है बनाता,

बहुमूल्य जीवते पत्थरों के द्वारा;
उसका ही नमुना और संकल्प से,
ताकि भरे उस में उस की महिमा ।

4.शान्ति का राजा घर जब बनाता,
मनुष्य का गड़बड़ उस में न हो;
मूल्य के द्वारा स्थान वह खरीदा,
पसन्द जो उस ने खुद ही किया ।

5.पूरी अलायदगी में घर को बनाता,
आत्मिक ऊँचाई पर नेव डाली;
उद्धार और स्वर्गीय-जीवन साक्षी के,
द्वारा प्रभु ने सब कुछ किया ।

6.प्रभु यीशु आज सिंहासन-आरुढ़,
शैतान को पाँव तले कर दिया;
जयवन्त वह होकर पूरे विभव में,
घर को ज्योति से भर दिया ।

7.घर जब उस का बन जाता है,
आग ऊपर से गिरती है;
सारी मलिनता को भस्म वह कर के,
घर को महिमा से भर दिया ।
465 हे सिय्योन नगर तूhe siyyon nagar too
‘‘हे सिय्योन, बहुत ही मगन हो ।’’ (जकर्याह 9:9)

1.हे सिय्योन नगर तू सोने का नगर है,
महिमित नगर तेरा बड़ा भाग्य है;
बहुत ही सुन्दर तू राजा का नगर है ।

2.सिय्योन के उत्तम लोग, सोने के समान है;
उन की शोभा बहुमोल पत्थर सी है,
उन का तेज चमकीले मणि से अधिक है ।

3.प्रभु ने तुझे चाहा और प्रेम भी किया है,
महासामर्थी तुझे स्थिर किया है;
सनातन निवास-स्थान तुझे बनाया है ।

4.माता भी भूलती है अपने बच्चों को,
पर तुझ को मैं कभी न भूलूंगा;
तेरा चित्र मेरी हथेली पर है ।

5.हे सिय्योन ! डरता क्यूं, अपना बल धारण कर;
एक संग उमंग से तू जय-जयकार कर,
आया प्रभु तुझ में, वास करेगा वह ।

6.दुल्हिन को देखकर दूल्हा हर्षित होता है,
वैसे ही परमेश्वर तुझे देखकर भी;
हे सिय्योन तुझ से प्रभु प्रसन्न होगा ।

7.सिय्योन के शत्रु सब लज्जित होवेंगे,
सतानेवाले जो बैरी सब हैं;
तेरे चरणों में आकर वे गिरेंगे ।

8.जब तक तेरी धार्मिकता, प्रकाश की नाई;
उद्धार तेरा जलते दिपक समान,
न दिखाई दे मैं चुप न रहूँगा ।
466 हे सिय्योन नगरhe siyyon nagar
‘‘सिय्योन पर्वत ऊँचाई में सुन्दर... है ।’’       (भजन 48:2)

हे सिय्योन नगर,
तू राजाधिराज का राजनगर है, हे सिय्योन नगर;
सनातन संकल्प,... बना तू ईश्वर का;
स्वर्णिम श्रृंगार सिय्योन तेरा,
शाश्वत गौरव है ये तेरा, है सिय्योन नगर ।।

1.शालेम का राजा,
आनन्द से तेरे पास था आया, शालेम का राजा;
बेटा इब्राहीम का,... अर्पण था तुझ में हुआ;
स्वर्णिम श्रृंगार सिय्योन तेरा,
नगर है दाऊद का कहलाता, हे सिय्योन नगर ।

2.उत्तर में स्थित है,
सर्वाेच्च सुन्दर राजनगर है, उत्तर में स्थित है;
सारी पृथ्वी के,... आनन्द का कारण है;
स्वर्णिम श्रृंगार सिय्योन तेरा,
सुन्दर रमणिय दर्शन तेरा, हे सिय्योन नगर ।

3.महलो में तेरे,
निवास प्रभु तेरा करता सदा है, महलों में तेरे;
राजा लोग आये,... देख तुझ को विस्मित हुए;
स्वर्णिम श्रृंगार सिय्योन तेरा,
भागें सब वे देख तेज तेरा, हे सिय्योन नगर ।

4.सनातन ईश्वर,
रचने-बनानेवाला तेरा है, सनातन ईश्वर;
श्रृंगारी दुल्हन तू,... प्रभु यीशु दूल्हा है;
स्वर्णिम श्रृंगार सिय्योन तेरा,
वैवाहिक आनन्द नित्य तेरा, हे सिय्योन नगर ।

5.शुभ सन्देश तुझ में,
घोषित होता रहता सदा है, शुभ सन्देश तुझ में;
आत्मिक जन्म तुझ में,... सब का ही होता है;
स्वर्णिम श्रृंगार सिय्योन तेरा,
जग की माता है कहलाता, हे सिय्योन नगर ।

6.स्वर्गीय कामों का,
धाम तुझ को प्रभु ठहराया है, स्वर्गीय कामों का;
महान काम अपना,... प्रभु तुझ में किया है;
स्वर्णिम श्रृंगार सिय्योन तेरा,
वर्णन के पार विभव है तेरा, हे सिय्योन नगर ।

7.आनन्द से गाएँ,
हर्ष और उल्लास से गीत सिय्योन का, आनन्द से गाएँ;
गौरव यीशु का,... तुझ में युग युग होगा;
स्वर्णिम श्रृंगार सिय्योन तेरा,
हल्लेलूयाह, आदर यह तेरा, हे सिय्योन नगर ।
467 जाग जाग अब हे सिय्योनjaag jaag ab he siyyon
(यशायाह 52:1, 60:1; यहेजकेल 36:11)

जाग जाग अब हे सिय्योन,... अपना बल कर धारण;
कर परिधान वस्त्र शोभायमान,... हे पवित्र यरूशलेम ।।

1.हे पवित्र यरूशलेम,... तेरे बीच में फिर कभी भी;
खतना रहित और अशुद्ध लोग,... पाएँगे न प्रवेश भी ।

2.उठ प्रकाशमान हो जा अब तू,... तेरा प्रकाश आ गया है;
यहोवा का तेज तुझ पर,... देख अब उदय हुआ है ।

3.मनुष्यों और पशुओं को भी,... दोनों को मैं बढ़ाऊँगा;
वे बढ़ेंगे, फूले-फलेंगे, पहिले समान ही करूँगा ।

4.पहिले से अब अधिक बढ़कर,... बड़ी भलाई करूँगा तेरी;
तब ही तुम सब जान लोगे,... यहोवा हूँ मैं ही ।

5.इस कारण से यह कहता है,... सोनेवालों जागो अभी;
मुर्दो में से जी उठो तो,... ज्योति देगा यीशु ही ।
468 कलीसिया तेरे लिएkaleesiya tere lie
‘‘इन बातों की आस देखते हो तो यत्न करो कि,...
निष्कलंक और निर्दोष ठहरो ।’’
(2 पतरस 3:14)

1.कलीसिया तेरे लिए खुष खबरी,... यीशु जल्द आता है;
उस से मुलाकात की कर तू तैयारी,... कि वक्त अब जाता है ।
अब ऊपर देख, अब ऊपर देख,...  तेरा दूल्हा आता है;
तुझ को लेने के लिए,...  प्यारा यीशु आता है ।।

2.दुनिया में आकर प्यारे यीशु ने,... लोहू बहाया था;
और उसने बहुत बड़ी कीमत से,... तुझ को खरीदा था ।

3.यह सारी दुनिया बिलकुल फानी है,... गुनाह से भरी है;
यह तेरे लिए एक सराय है,... यहाँ से जाना है ।

4.बादशाहत होगी हजार सालों की,... जब यीशु आयेगा;
लोहू में जिस ने जामा धोया नहीं,... वहाँ जाने न पाएगा ।
469 खुशी मनाओkhushee manao
‘‘आओ हम आनन्दित और मगन हों और उसकी स्तुति करें;
क्योंकि मेम्ने का विवाह आ पहुँचा ।’’
(प्रकाशित 19:7)

खुशी मनाओ, मेम्ने का विवाह-उत्सव आया है,... आओ ।।

1.सर्वाधिकारी है,... सर्वोच्च महान भी;
आदर पिता का करते,... प्रणाम करें सब ही ।

2.दुल्हिन तैयार हुई,...  श्वेत वस्त्रों से;
निर्मल शुद्ध और सुन्दर,... सुसज्जित हुई ।

3.वे सुन्दर वस्त्र है,... भले काम सन्तों के;
जो हुए शुद्ध विश्वास से,... मेम्ने के लोहू में ।

4.श्वेत घोड़े पर,... सवारी करता जो;
विश्वासयोग्य यीशु,... प्रभु ही दूल्हा है ।

5.उसी का नाम है,... ‘‘परमेश्वर का वचन’’
लोहू से छिड़के हुए,... वस्त्र वह पहिने है ।

6.स्वर्गीय सेनाएँ,... श्वेत वस्त्र पहिने हुए;
श्वेत घोड़ों पर सवार,... पीछे उसके चलती है ।

7.प्रेम किया मण्डली से,... प्रभु ने प्राण दे दिया;
पवित्र करने के लिए,... बलिदान वह है हुआ ।

8.प्रभु यीशु ख्रिस्त ही सिर है,... वह मण्डली का;
अपने वचन रूपी जल से,... शुद्ध उसको करता है ।

9.यहोवा के राज्य में,... पृथ्वी के निवासी;
आनन्दित हृदयों से,... प्रकाशित होवेंगे ।

10.हे प्रभु तू ने किया,... इस अद्भुत कार्य को;
नित्य तेरी महिमा करते,... गाएँगे हल्लेलूयाह ।
471 पवित्र नगर नये यरुशलेमpavitr nagar naye yarushalem
‘‘फिर मैंने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से
परमेश्वर के पास से उतरते देखा ।’’
(प्रकाशित 21:1-7)

पवित्र नगर नये यरुशलेम को, स्वर्ग पर से उतरते हम ने देखा;
पति के लिये सिंगारी हुई जो, दुल्हिन समान हम ने उस को देखा ।।

1.सिंहासन में से कोई ऊँचे शब्द से, कह रहा था बड़े सामर्थ से;
ईश्वर का डेरा मनुष्यों में है, वह उन के साथ सदा वास करेगा ।

2.परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा, वे उस के लोग और ईश्वर वह होगा;
आँसु आँखों से वह सब पोंछेगा, इस के बाद मृत्यु न शोक दुःख होगा ।

3.पहली बातें अब तो जाती रही, परखो देखो वे सब नयी हुई;
सिंहासन पर से प्रभु ने कहा, निहारो मैं सब कुछ नया किया ।

4.ये वचन विश्वास के योग्य जो ठहरा, सत्य और न मिटनेवाला खरा;
आदि और अन्त, अल्फा-ओमिगा, प्यासे को जीवन का सोता देगा ।

5.जय जो पाये वही इन वस्तुओं का, वारिस होगा पवित्र नगर का;
प्रभु उस का ईश्वर पिता होगा, पुत्र वह होवेगा परमेश्वर का ।
472 नया यरुशलेम, जोnaya yarushalem, jo
‘‘फिर मैंने पवित्र नगर नये यरूशलेम को,... देखा ।’’
(प्रकाशित 21:2)

नया यरुशलेम, जो अद्भुत है, पवित्र नगर वही है;
ऐसे नगर के योग्य हमें किया, हम प्रभु यीशु की वन्दना करते हैं ।।

1.अगम्य शान्ति और स्वर्गीय आनन्द, सब कुछ वहाँ भरपूरी से है;
शान्तिदाता यीशु प्रभुजी, राजाओं का राजा राज्य करता है;
उस राज्य के हम को भागीदार किया है, प्रभुओं के प्रभु की
स्तुति करते हैं ।

2.पाप को हमारे क्षमा कर दिया, कलवरी क्रूस के लहु के द्वारा से;
उसकी पवित्रता में भी हम को, भागीदार उस ने हमें किया है;
महिमा से परिपूर्ण हमारे ईश्वर की, दिल भर के स्तुति गाते हैं ।

3.पवित्र नगर नया यरूशलेम, सुन्दरता से भरपूर वह है;
अपने पति के लिए जो तैयार, सिंगारी हुई दुल्हिन समान है;
तू ने हम को दुल्हिन बनाया, प्रभु तेरी स्तुति हम करते हैं ।

4.ईश्वर हमारे साथ वास करेगा, उस का डेरा हम में होगा;
प्रभु हमारे साथ रहकर, साथ ले जायेगा स्वर्ग की ओर;
तू ने हम से प्रेम किया है, प्रणाम तुझ को हम करते हैं ।

5.वह उनका परमेश्वर होगा, और उनकी आँखों से आँसू पोंछेगा;
मृत्यु, शोक, विलाप और पीड़ा उस नगर में बिलकुल नहीं;
मृत्यु, संसार, शैतान को जीता, आराधना तेरी हम करते है ।
473 दिव्य दर्शन परमेश्वर काdivy darshan parameshvar ka
‘‘उस ने उस स्थान का नाम बेतेल रखा ।’’
(उत्पति 28:19)

1.दिव्य दर्शन परमेश्वर का,... याकूब ने जब देखा;
दर्शन पाकर उस जगह का,... बेतेल नाम वह रखा;
नित्य हमारे परमेश्वर का,... निवास-स्थान यह होगा ।

2.परमेश्वर की सीढ़ी सादृश्य,... हे प्रभु यीशु ख््िरास्त का;
परमेश्वर के दूत भी उस पर,... चढ़ते उतरते देखा;
परमेश्वर का भवन यही है,... और दूजा न होगा ।

3.निश्चय यही स्थान है,... जिस में प्रभु यहोवा रहता;
स्वर्गलोक का द्वार देखता,... उद्धार पाने जो आता;
परमेश्वर तब शान्ति पाता,... पापी थरथराता ।

4.ऊँचे स्थान पर वही चढ़ाता,... आनन्दित है करता;
ऐसे अनुभव में याकूब को,... मीरास भी वह देता;
मिस्र देश के अवमानों को,... वही है भुलाता ।

5.चाहे पहाड़ टल भी जाए,... वचन न उस का टलेगा;
अनुग्रह अपना देकर तुझ को,... सदा ले चलेगा;
पूर्वकाल के संकल्प अपने,... तुझ में वह पूरे करेगा ।
474 शक्तिशाली, राजा शालेम काshaktishaalee, raaja shaalem ka
‘‘मैं... अपनी कलीसिया बनाऊँगा ।’’ (मत्ती 16:18)
शक्तिशाली, राजा शालेम का, गुलाब शारोन का;
महिमा हो नित्य यीशु को ।।

1.पूर्वकाल में जो वचन, दिये प्रभु तू ने;
शान और सामर्थ्य से पूरे किये तू ने, पूरे किये तू ने;
पूर्वकाल के जो दर्शन सारे पूरे किये,
प्रभु यीशु तेरे समान और कोई नहीं, और कोई नहीं है ।

2.पर्वत पर जैसे तू ने, दिखाया था नमूना;
वैसी ही सामर्थ्य से, निवासस्थान बना;
निवासस्थान बनाया दास मूसा द्वारा;
महिमा से उसे भरा, तेरा प्रताप सारा ।

3.शालेम-यरूशलेम में जो मन्दिर बना,
सुलेमान को भी उसका, दिया था तू नमूना;
मन्दिर तू ने, अपने लिये, बनवाया पूरा
महिमा से उसे भरा, तेरा प्रताप सारा ।

4.समय जब पूरा हुआ प्रभु यीशु आया,
कुंवारी के द्वारा प्रभु, जन्म तू ने लिया;
बनाऊँगा मण्डली मैं, प्रभु तू ने कहा;
मण्डली में लाके हमें मन्दिर तू बनाया ।

5.हाथ से बनाये हुये, घर में तू न रहा;
आश्चर्य तू हमारे, मघ्य में रहना चाहा;
तेजोमय प्रभु अपनी प्रजा को बुलाया,
महिमा अपनी उन्हें देने, संकल्प तू किया ।

6.एक इधर से एक उधर से सब को तू ने चुन लिया,
अद्भुत रीति चुन के उन्हें एक तू ने किया;
नूतन दम्पति को, तू ही आशीष अपनी देता;
रक्षा उनकी कर के उन्हें तू ही है बढ़ाता ।

7.व्यक्तियों को परिवारो में तू ही है बदलता,
शक्तिमान मण्डली को, दुल्हन सा बनाता;
अद्भुत ऐसी दुल्हन का तू दूल्हा खुद ही बनता,
अन्त नहीं प्रभु तेरे, महिमित राज्य का ।
475 योजनाएँ जो है यीशु कीyojanaen jo hai yeeshu kee
‘‘इस प्रकार मूसा ने सब काम को पूरा कर समाप्त किया ।’’
(निर्गमन 40:33)

योजनाएँ जो है यीशु की, बदलती न कभी
;
युग-युग एकसा है यीशु, शान यह है उसकी ।।

1.अपनी प्रजा को मिस्र से छुड़ाने मुसा को चुन लिया,
अद्भुत अपने काम कितने उनके लिए है किया;
अगुवाई मुसा की माने नहीं पर अगुवा उसी को किया ।

2.पर्वत पर के नमूने अनुसार निवासस्थान खड़ा किया,
परदे बना के आंगन के, जग से अलग है किया;
परमेश्वर का कार्य पूरा मुसा ने है किया ।

3.सम्पूर्ण हुआ निवासस्थान का काम बादल तब आया,
सुन्दर मेघस्तंभ बनकर वह तम्बू पर छाया;
सारा निवास-स्थान तेज से भरा महिमा प्रभु पाया ।

4.मेरा जो कुछ सब तुम्हारा है, ये प्रभु यीशु ने कहा;
महिमामय प्रभु सब कुछ दिया, अनुग्रह हम पर किया;
महिमा प्रभु की करते रहें, अपने जीवन में सदा ।

5.आओ, सन्तगण हम गाएँ गुणगान ख्रिस्त प्रभु का ही,
आओ, इस जग में पूरी करें इच्छा ईश्वर की;
आदर महिमा देते रहे प्रभु यीशु को ही ।
476 मन्दिर बनाओ मेरे लिएmandir banao mere lie
‘‘और वे मेरे लिए एक पवित्रस्थान बनाएँ... ।’’
(निर्गमन 25:8)

मन्दिर बनाओ मेरे लिए, प्रभु परमेश्वर तू ने कहा है;
हे इस्राएल, निवास-स्थान एक; बनाओ तुम मेरे लिए ।।

1.बबुल की लकड़ी का सन्दुक बनाओ, शुद्ध सोना उस पर मढ़ लो;
बबूल तुम हो, तू ने कहा है ।

2.प्रायश्चित का ढ़कना बनाओ, प्रायश्चित मैं ही हूँ, देखो;
प्रायश्चित में प्राण दिया है ।

3.वेदी बनाओ फिर तू कहा है, वेदी मेरा क्रूस बना है;
लोहू बहाके बलिदान किया है ।

4.द्वार बनाया आँगन में है, कार्य अपना पूरा किया है;
आदर महिमा प्रभु तेरा है ।

5.मेरा जो कुछ, प्रभु, तेरा है, तेरा ही सब मुझ को दिया है;
प्रेम, अनुग्रह प्रभु मुझ पर किया है ।

6.प्रभु अपने पवित्र नगर में, रहने को स्थान मुझ को दिया है;
युग-युग रहूँगा साथ तेरे मैं ।
477 कितना सुन्दर नगर वह हैkitana sundar nagar vah hai
‘‘... पवित्र नगर... ।’’
(मत्ती 27:53)

कितना सुन्दर नगर वह है,
अद्भुत है, ज्योतिर्मय, प्रताप से भरा है;
पवित्र, पवित्र, पवित्र सब कुछ है ।।

1.पवित्र जन वहाँ साथ उस के रहेंगे,
प्रभु ने जिन को लहु से खरीदा है;
नगर में जायेंगे, जयवन्त जो बने हैं;
जयवन्त है, जयवन्त है, बढ़कर जयवन्त है ।

2.यह बातें मनुष्य के समझ के परे हैं,
प्रभु के आत्मिक जन सब जान जाते हैं;
यह आत्मिक बाते हैं, आत्मा समझाता है,
आत्मिक है, आत्मिक है, सब बातें आत्मिक हैं ।

3.आत्मिक जन जानते हैं वह नगर कैसा है,
स्वाद उस का धरती पर प्रभु ने चखाया है;
आनन्द से स्थिर रहकर ऊपर को देखते हैं,
आनन्द है, आनन्द है, स्वर्गीय आनन्द है ।
478 स्वर्गीय यरूशलेम पवित्र नगरsvargeey yarooshalem pavitr nagar
‘‘फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरुशलेम को... देखा ।’’
(प्रकाशित 21:2)

स्वर्गीय यरूशलेम पवित्र नगर वह है,
बारह फाटक उस के हैं, बहुत ही प्रज्ज्वलीत वह है ।।

1.शहरपनाह उस नगर की जो बारह नेंव पर बनी है,
बारह प्रेरितों के नाम भी उसके ऊपर लिखे है;
प्रेरितों की नेंव पर जो हैं प्रवेश नगर में पाते हैं ।

2.बारह फाटक उसके हैं, और सब मोती के बने हैं;
प्रभु यीशु के लहु के द्वारा, प्रवेश उस में मिलता है;
जीवन की पुस्तक में नाम जिसका, नगर में वह आता है ।

3.प्रभु यीशु प्रकाशमान पवित्र नगर में है,
प्रभु में जो बने हैं वे ही चमकते रहते हैं;
पवित्र जन स्वर्गीय प्रकाश में सदा चलते रहते है ।

4.पवित्र नगर के मध्य में प्रभु सिंहासन पर है,
जो प्रभु का नाम रखते हैं पवित्र होकर आते हैं;
प्रभु का दर्शन करते हुए पवित्र आनन्द पाते है ।

5.स्वर्ग में प्रवेश के लिए निरन्तर बाट जो देखते हैं,
पवित्र, पवित्र कहकर प्रणाम उस को करते हैं;
प्रभु यीशु के आगमन के लिए तैयार अब वे हो जाएँ ।
479 कलीसिया करती इंतजारkaleesiya karatee intajaar
‘‘हाँ मैं शीध्र आनेवाला हूँ, आमीन । हे प्रभु यीशु आ ।’’
(प्रकाशित 22:20)

कलीसिया करती इंतजार,(3)
आपने वायदे के मुताबिक यीशु आ;
यीशु आ, यीशु आ;
अपने वायदे के मुजाबिक यीशु आ ।।

1.रात अन्धेरी गुजरी जाती है,
पौ फटती है, खुदावन्त यीशु आ ।

2.अपने लोगों के लिए अब आ,
ऐ सुबह के सितारे, यीशु आ ।

3.गुनाह दुनिया से होगा दूर,
ऐ सुलह के शाहजादे जल्दी आ ।
480 सारी कलीसिया काsaaree kaleesiya ka
‘‘मसीह कलीसिया का सिर है ।’’ (इफिसियों 5:23)

1.सारी कलीसिया का एक यीशु ही है आधार,
वचन और जल से उस ने दिया इस को आकार;
वह उस को खोजने आया कि उस की दुल्हिन हो,
और अपना खून बहाया उसे मोल लेने को ।

2.सब देशो से मिल बनी, कलीसिया एक ही है;
एक ध्वजा उसके त्राण की, प्रभु एक आश्रय है;
एक नाम की स्तुति करती, भोज एक ही वह खाती;
एक ही आशा में जीती जो है शोभा उस की ।

3.हो चिंतित लोग देखते हैं कलीसिया का पतन,
वह कैसी व्यथित देख के ये झगड़े, फूट, अनबन;
पर तौभी संतगण देख यह पुकारते, ‘‘कब तक और ?’’
रात दुःख की बीती जाती, आती सुहानि भोर ।

4.विषमता और विरोध की पीड़ा में पडी हुई,
छुटकारे की राह देखती, जब शान्ति पूर्ण होगी;
वह धन्य दृश्य देख के दुःख सारे भूलेगी,
जयवन्त कलीसिया में फिर शान्ति रहेगी ।

5.त्रिएक परमेश्वर के संग उस की संगति है,
और उन के साथ जो स्वर्ग में विश्राम अब करते हैं;
वे धन्य और पवित्र, हम भी वैसे बनें;
और ख्रिस्त के साथ दीनता से युगानुयुग रहें ।
481 कैसी खुशी हैkaisee khushee hai
‘‘ऐसे आनन्दित और मगन होते हो जो वर्णन से बाहर और
महिमा से भरा है ।’’ (1 पतरस 1:8)

कैसी खुशी है, कैसी खुशी है, बयान से बाहर है;
यीशु ने मेरे सब ही गुनाहों को,... बिलकुल मिटा दिया है ।।

1.जमा हो जाओ और स्तुति मनाओं,... खुशी से सारे भर जाओ;
अधर्मियों के त्राता-ओ-दाता,... यीशु की स्तुति तुम गाओ ।

2.यीशु मसीह इस दुनिया में आया,... कि करे मुझ को मंजूर;
पाप, श्राप और क्रोध प्रभु का,... मुझ पर से हो गया दूर ।

3.यीशु के लोहू के द्वारा मुझ को,... मिला पापों से उद्धार;
प्यारे मसीह का अब दुनिया में जाकर,... मैं क्यों न करुँ स्वीकार ।

4.वस्त्र सफेद पहिने जीवन का ताज लेके,... जब हम आसमान जाएँगे;
बर्बत बजा के और सब के साथ मिल के,... हल्लेलूयाह गाएँगे ।
483 मेरे पापों की क्षमाmere paapon kee kshama
(भजन 116; भजन 65)

मेरे पापों की क्षमा तू ने की, प्रभु मेरी आँखें तू ने खोल दी;
प्रभु यीशु ने प्यार है किया, मेरे लिए प्राण है दिया ।।

1.वस्त्र मलीन है निकट आता हूँ, (2) गन्दा हृदय है तुझ को पुकारूँ,
कलवरी क्रूस पास आया ।  प्रभु...

2.मृत्यु से तू ने मेरे जीवन को, आँसुओं से मेरी आँखों को,
मेरे पिता ने बचाया ।

3.मेरे जीवन के पूरे समय तक, हर दिन तुझ को प्रभु मैं पुकारूँ;
बिनती मेरी तू सुनेगा ।

4.हेे यहोवा तू अति दयालु, धर्मी है न्यायी परमेश्वर;
नम्र जनों को सम्भालता ।

5.मैं मन्दिर के आँगनों में, यरुशलेम ! मैं तेरे मध्य में;
तेरी स्तुति करूँगा ।

6.प्रभु ने मुझ को मीरास बनाया, महिमा मुझ से प्रगट कराया;
प्रेम से हे वह बुलाया ।
484 प्रेम, प्रेमprem, prem
‘‘प्रेम... सिद्धता का बन्ध है ।’’ (कुलुस्सियों 3:14)

प्रेम, प्रेम(2)
प्रेम है मेरे दिल में,
आनन्द ही आनन्द है ।।(2)

1.एक दिन तेरा दर्शन पाया,... आपे को अपने मैं ने नकारा;
तेरी दया है बड़ी, यीशुजी,... तेरी दया है बड़ी ।

2.स्वर्ग में सब का प्यारा तू है,... मुझ नीच से प्यार किया क्यों ?
क्या कभी तेरे प्रेम को,...  हे प्रभु मैं समझूँ ।

3.तेरे बिना मैं भटक गया था,... मैं अभागा आवारा बना था;
अपनाया तू ने, यीशुजी,... अपनाया तू ने ।

4.इस संसार की माया सारी,... घास के फूल की नाई है झड़ती;
लेकिन तू है अटल, यीशुजी,... लेकिन तू है अटल ।
486 अरमान मेरा मिट गयाaramaan mera mit gaya
‘‘सब खाकर तृप्त हो गए ।’’  ( मत्ती 14:20)

अरमान मेरा मिट गया है, प्यारे यीशु में,
मिटता ही जा रहा है, मेरे प्यारे यीशु में ।।

1.जब दुनिया को मैं देखता कुड़ा समान वह है,
दिल मेरा दौड़ा जाता है, प्रभु को पाने में ।

2.भूखा जब मैं होता हूँ मिटती है भूख मेरी,
खुब तृप्ति मुझ को देता, सब शान्ति उसी में ।

3.प्यासा मैं जब होता हूँ देता जीवन पानी,
जीवन को नदी बनाया, बढ़ता हूँ उसी में ।

4.शक्ति जब मेरी घटती सामर्थ है वह मेरी,
जय उस ने मुझ को दी है, बल पाता हूँ उसी में ।

5.जय उस से मैं ने पाई और सब मीरास भी,
खुदा का बेटा बनकर, आनन्द है उसी में ।

6.दर्शन वह मुझे देता, ज्योति है आत्मिकी,
कीमती मैं उस नगर को, देखता हूँ उसी में
487 संकट और दुःख क्लेशsankat aur duhkh klesh
‘‘मैं उस लोहू को देखकर तुम को छोड़ जाऊँगा ।’’
(निर्गमन 12:13)

संकट और दुःख क्लेश मेरा मिट गया है,
वह नाशकारी दूत मुझ से पार गया है ।।

1.उस मेम्ने के बहुमूल्य लोहू के द्वारा,
अब मैं छिप गया, जो मेरा उद्धार है ।

2.अब मैं फिरौन का गुलाम नहीं हूँ,
न तो मैं सिय्योन का पराया ही हूँ ।

3.मारा जो मेरा था वह मीठा बना है,
चट्टान से बहा पानी, पीना बना है ।

4.सुन्दरता से भरा स्वर्गीय कनान है,
मीरास सनातन की, वह मेरी है ।

5.आनन्द ही आनन्द महा आनन्द है,
कनान का जीवन जो, मुझे सानन्द है ।

6.मरुभूमि में वही मेरा प्रभु है,
मन्ना जो देता प्रभु, वही काफी है ।

7.प्रभु यीशु मेरा ही बल और गीत है,
वही मेरा उद्धार है, हल्लेलूयाह ।
488 जीवित है, यीशु जीवित हैjeevit hai, yeeshu jeevit hai
‘‘मैं युगानुयुग जीवित हूँ ।’’ ( प्रकाशित 1:18)

जीवित है, यीशु जीवित है,
हृदय में मेरे वह जीवित है;
संकट में मेरे साथ वह रहता है,
जीवित है वह सदा काल ।।

1.लाल समुद्र को उस ने चीरा है,
यरीहो की दिवालों को ढ़ा दिया है;
अन्धों की आँखों को उसने खोला है,
कोढ़ियों को भी उसने चंगा किया है ।

2.मुझ को न छोड़ तू सम्भाल ले, प्रभु;
मैं तेरे पीछे-पीछे चलूँगा, प्रभु;
मरते समय मुझे स्वर्ग में तू ले,
महिमा अपनी दिखा दे, प्रभु ।
489 प्रभु यीशु की ज्योतिprabhu yeeshu kee jyoti
‘‘तुम आनन्द पूर्वक उद्धार के सोतों से जल भरोगे ।’’
(यशायाह 12:3)

1.प्रभु यीशु की ज्योति यदि कहूँ वह कैसी महान,
कलवरी पर अद्भुत मुक्ति सब जातियाँ पा सकती ।
यीशु मुक्ति का कुआँ है, जो बहुत गहरा है;
जो सूखता कभी नहीं है, सदा पानी दे सकता है ।।

2.जल बिना क्लेष होता है, पर सोचता कोई नहीं है;
वचन जो जीवन जल है, ग्रहण अब करना है ।

3.कुओं का खारा पानी, जिस से प्यास है नहीं बुझती;
फेंक दे सब गन्दगी, और तब है भरपूरी ।

4.छोड़ दे सब टंटे, और दूर हटा झगड़े;
आनन्द से जल भर ले, अपनी प्यास बुझा तू ले ।

5.जीवन जो पाप से भरा, यीशु के लोहू से धूला;
उमड़ता कुआँ बन के, दुनिया को तृप्त कर दे ।
490 हे सब प्यासे जनhe sab pyaase jan
‘‘प्रभु की नदी पानी से भरी है ।’’
      (भजन 65:9)

हे सब प्यासे जन नदी के पास,
आके पीओ जीवन-जल ।।

1.प्रभु की नदी पानी से भरी,
भूमि को तैयार करके लोगों को अन्न देती;
प्रभु की आशीषें तुझ को भरपूरी से तृप्त करती ।

2.सुख की नदी से पिलाएगा,
भवन के चिकने भोजन से वह खिलाएगा;
क्योंकि सोता जीवन अनन्त का केवल तेरे ही पास में है ।

3.भलाई से तू ने वर्ष पर,
मानो अपना मुकुट रख भी दिया है;
सर्व उत्तम पदार्थ तेरे मार्गो में पाए जाते हैं ।

4.हे सब परिश्रम करनेवालों,
लेकर आओ बोझ को यीशु पास तुम;
बोझ को हटा के दूँगा शान्ति और दूँगा अपना विश्राम ।

5.आओ सब चीजें तैयार है,
शक्तिमान यीशु के भोजन से खाओ तुम;
संगति में लाएगा तुम को खोलो यदि अपना मन ।

6.सच्चाई को खोला प्रभु ने,
शुद्धता से जीवन अपना बिताओ तुम;
यीशु प्रभु के पद-चिन्हों पर जीवन अपना बनाओ तुम ।

7.जीवन-जल से प्रभु की नदी,
ऊपर से नीचे स्थानों में वह बहती है;
वैसे ही दीन लोगों के मन में आत्मा आ के रहता है ।
491 यीशु के प्यार के दरिया कोyeeshu ke pyaar ke dariya ko
‘‘हाँ मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ ।’’
(यिर्मेयाह 31:3)

1.यीशु के प्यार के दरिया को,... हैरत से मैं ने देखा;
और अपने इस बेचैन दिल में,... पूरा इतमिनान पाया ।
यीशु मसीह के पाक खून से,... गुनाह मेरे हुए सब दूर;
उसने मुझे मुफ्त नजात दी,... और खुशी से किया भरपूर ।

2.इस से पहिले मैं जहान में,... मुसीबत में मारा फिरा;
लेकिन जब यीशु पास आया,... आराम उसने मुझे दिया ।

3.सिर पर मेरे हाथ को रखकर,... कहा कि जा, चंगा हो जा;
शिफा मैं ने उसी दम पा ली,... जब उस की पोशाक को छुआ ।

4.यीशु मसीह प्यारा मुंजी,... दहिने हाथ पर छायामान;
उसके मुख का प्रकाश मुझ पर,... चमकता रहता है आन ।
492 आनन्द करूँ, आनन्द करूँaanand karoon, aanand karoon
(हबक्कूक 3:17-19)

आनन्द करूँ, आनन्द करूँ;
मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर में ।।

1.चाहे अंजीर के वृक्षो में फूल न लगें, दाखलताओं में फल न लगें ।

2.जलपाई के वृक्ष केवल धोखा देवें, और खेतों में अन्न न उपजे ।

3.भेड़शालाओं में भेड़ बकरियाँ न रहें, और न थानों में गाय-बैल रहें ।

4.मेरे पाँव हरिणों समान बना देता है, ऊँचे स्थानों पर चलाता मुझे ।

5.मेरा गढ़ मेरा बल, मेरा यहोवा है, सदा यहोवा में मगन रहूँ मैं ।
493 आनन्द से भरकर जाएँगेaanand se bharakar jaenge
‘‘और यहोवा के छुड़ाए हुए लोग लौट कर जय जयकार
करते हुए सिय्योन में आएँगे ।’’ (यशायाह 35:10)

आनन्द से भरकर जाएँगे हम सब,
गाते हुए सिय्योन की तरफ ।।

1.सारे जगत में कोई आनन्द नहीं - मेरे
प्यारे प्रभुने बताया सही,
दुःख और मुसीबत उठाओंगे प्यारो ,
थोड़ी देर और अब बाकी रही ।

2.मिसर को छोड़कर भाइयों पार अब चलो - और
बंजर जमीन में सिर्फ डेरा करो,
कनानी देश पर नजर उठाओ - क्योंकि
हमें यहाँ सदा रहना नहीं ।

3.मारा रफीदीम में आओगे - लेकिन,
यीशु पर पूरा भरोसा धरो;
वही ले जाएगा वही बचाएगा,
वायदा कभी उस का टलता नहीं ।

4.यीशु के साथ-साथ आगे बढ़ो - और,
मिसर की इच्छाओं को छोड़ो सभी;
तबेरा के बेदिनों के पापों में
भाइयों तुम हरगिज मिलो ही नहीं ।

5.स्वर्ग पर हमारा वतन है एक ही - जहाँ,
से आएगा प्यारा यीशु मसीह;
सिय्योन के गाने गाएँगे मिलकर,
दुःख और तकलीफ वहाँ होगी नहीं
494 हर्षित हम होंगे यहोवा मेंharshit ham honge yahova mein
‘‘प्रभु यहोवा सब जातियों के सामने धार्मिकता
और धन्यवाद बढ़ाएगा ।’’
(यशायाह 61:11)

हर्षित हम होंगे यहोवा में,
मगन होंगे हम आत्मा में;
उद्धार के वस्त्र पहनाया यहोवा हमें,
धर्म की चादर ओढ़ा दी उस ने ।।हर्षित...

1.परमेश्वर के सेवक तुम हो,... याजक भी हो लोग कहेंगे;
अन्य जाति की धन-सम्पŸिा पा,... आनन्द करोगे, कहा प्रभु तु ने ।

2.नामधराई हुई तुम्हारी,... बदले मे दूना मान मिलेगा;
अनादर की सन्ती अधिकारी होंगे,... हर्षित रहोंगे, कहा प्रभु तू ने ।

3.देश में अपने तुम सब रहोंगे,... दूने भाग के अधिकारी होंगे;
आनन्द सदा का अनुभव करोंगे,... साथ रहूँगा, कहा प्रभु तू ने ।

4.न्याय से प्रिती मैं हूँ करता,... अन्याय से मैं धृणा करता;
प्रतिफल इसका सच्चाई दूँगा,... वाचा बान्धूँगा कहा प्रभु तू ने ।

5.लोगों के बीच में वंश तुम्हारा,... प्रसिद्ध होगा सब देखेंगे;
परमेश्वर का आशीषित वंश,... तुम ठहरोगे कहा प्रभु तू ने ।

6.खेत है जैसे उपज उगाता,... बारी में बोया बीज जैसे बढ़ता;
धार्मिकता और धन्यवाद वैसे,... प्रभु बढ़ाएगा सब के सामने ।

7.आशीषें ऐसी ख््िरास्त में ही है,... आभारी हम हैं इस कारण से;
आदर हो तेरा, तू ही महान है,... हल्लेलूयाह स्तुति गीत हम गाएँगे ।
495 हम यीशु प्रभु के हैंham yeeshu prabhu ke hain
‘‘हम ने उसकी महिमा देखी ।’’
(यूहन्ना 1:14)

हम यीशु प्रभु के हैं, और उस के ही रहेंगे;
उस ने जो बचाया है, गुण उस के गाएँगे ।।

1.अनुग्रह सच्चाई से वचन जो देहधारी हुआ,
हम ने उसकी महिमा देखी पिता के एकलौते की;
प्रेम उस का जो अद्भुत है, आओ मिलकर गाएँगे ।

2.जितनों ने उस की ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई,
हम सभों को प्रकाशित किया अपने वचन के द्वारा;
आओ परखो प्रभु भला है, उस की स्तुति हम करेंगे ।

3.जीवते पत्थर से घर जो बनाता, वही प्रभु राजा है;
तेज प्रभु का भवन में आया महिमा से भर गया,
उस के मन्दिर में हम मिलकर, महिमा अब गाएँगे ।

4.क्योंकि जिन्हें उस ने पहले से जाना, उन्हें ठहराया भी;
उन को बुलाकर धर्मी ठहराया, महिमा अपनी दे दी;
उस के पुत्र के रूप में ढ़ाला, हम खुशियाँ मनाएँगे ।

5.महिमा से भरपूर, प्रभु हमारा दूतों के साथ आता है;
बाट जो जोहते उन्हीं को वह लेगा, और महिमा देगा;
उस राज्य के योग्य हमें बनाया, हल्लेलूयाह हम गाएँगे ।

6.महिमित वह राज्य, महिमा वास करती, महिमा से भरपूर है;
प्रभु हमारा दीपक बनेगा, तेज उस का प्रगट होगा;
युगानुयुग तक हम सब, प्रभु के साथ रहेंगे ।
496 प्रभु में तेरा हूँprabhu mein tera hoon
‘‘वे आगे को अपने लिए न जीएँ, परन्तु उस के लिए...’’
(2 कुरिन्थियों 5:15)

प्रभु में तेरा हूँ, मसीह मैं तेरा हूँ;
और तेरा ही सदा रहूँगा,
तेरे लिए अब प्रभु बाकी जीवन मैं जीऊँगा ।।(2)

1.देखा है जग को प्रभु, धोखा और निराशा यहाँ;(2)
दिखाया तू ने मुझे है वह शान्ति आशा वहाँ,(2)
आभारी हूँ मैं प्रभु (2), अब न दृष्टि मैं फेरूँगा;
रहूँगा तुझ में सदा आज्ञा तेरी मैं मानूँगा ।

2.चलूँगा पीछे तेरे क्योंकि आगे तू जो चला,
तू ही जो साथ अब मेरे शोक और दुःख को सब भूलूँगा;
तसल्ली तुझ सेे पाता, आँसु अब न बहाऊँगा;
तू ही जो सब कुछ मेरा तुझी से में बल पाऊँगा ।

3.दृष्टि है क्रूस के ऊपर जयवन्त प्रभु मैं बनूँगा,
जो कुछ भी मार्ग में आए आनन्द से मैं सब सहूँगा;
भरोसा तुझ पर मेरा, हर्ष से मैं आगे बढूँगा;
पंखो में मुझ को छिपा अब किसी से न डरूँगा ।

4.मृत्यु नदी के निकट आनन्द से जब में आऊँगा,
प्रभु तब मृत्यु से जीवन के अन्दर ले जाएगा;
देखूँगा त्राता को, तब स्वागत मेरा वह करेगा;
क्षण भर में मैं प्रभु के रुप में बदल जाऊँगा ।

5.अगम्य ज्योति में तब विजय से प्रवेश करूँगा,
पवित्र जनों से और सब दूतों से तब जा मिलूँगा;
सदा का आनन्द होगा, साथ प्रभु के मैं रहूँगा;
यही है आशा मेेेरी प्रभु को तब मैं पाऊँगा ।
497 अपने प्रभु को पहिचानने वालेapane prabhu ko pahichaanane vaale
‘‘परन्तु जो लोग अपने परमेश्वर का ज्ञान रखेंगे,
वे हियाव बाँधकर बड़े काम करेंगे ।’’
(दानियेल 11:32)

अपने प्रभु को पहिचानने वाले,
शक्ति पाके काम करेंगे ।।

1.कोई उन्हें न भरमाएगा,(2) प्रभु से न हटाएगा ।(2)
कोई उन्हें झुठी शिक्षा से, न भटकाएगा ।(2)

2.वे पीछे न हटेंगे,... प्रभु में दृढ़ रहेंगे;
अतालिया को वे मिलकर,... मार ही ड़ालेंगे ।

3.मनुष्य से न डरेंगे,... अटल बने रहेंगे;
अपने दृढ़ विश्वास से वे न,... कभी हटेंगे ।

4.मूरतों को न पूजेंगे,... प्राण अपने दे देंगे;
कठिनाई से न वे सब,... कभी डरेंगे ।

5.अग्नि से न झिझकेंगे,...  शेरों से भय न खाएँगे;
चाहे जो भी सिर पर आए,... उस को झेलेंगे ।

6.परीक्षा पर जय पाएँगे,...  संकट सभी सह लेंगे;
अपने प्रभु के ज्ञान से,...  जयवन्त होवेंगे ।

7.वे ज्ञान से ज्ञान तक बढ़ेगे,... ज्ञान सहित चलते रहेंगे;
ज्ञान सहित वे प्रभु सेवा,... करते रहेंगे ।
498 जिन्होंने उस की ओरjinhonne us kee or
‘‘जिन्होंने उस की ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई ।’’
      (भजन 34:5)

जिन्होंने उस की ओर दृष्टि की,
उन्होंने प्रभु से ज्योति पाई ।।

1.कृपा, सच्चाई, सम्पूर्णता का प्रभु,
सब परीक्षा से वह हम को रक्षा करेगा;
महिमा अपनी सदा हम को वह दिखायेगा,
हम को अपना राज्य और पुत्र ठहरायेगा ।

2.ईश्वर की जो महिमा, आपने क्या देखी ?
प्रभु यीशु में उस ने जो प्रगट है की,
अपने लोगों को मसीह, छुड़ाने के लिए;
पुत्र होकर इस जग में वह जन्मा इसलिए ।

3.अन्त का दिन आ रहा है, तुम सब अब देखो;
जग में पापी दुःखित होंगे और व्याकुल भी,
पश्चाताप के साथ तुम प्रभु के पास आज आओ,
अद्भुत उद्धार पाके तुम सब आनन्दित हो जाओ ।

4.यहोवा के तेज और शक्ति से भरपूर,
महिमा से मन्दिर उस का है परिपूर्ण;
महाप्रतापी प्रभु के चरणों में गिर जाओ,
महिमा और आनन्द पाकर उल्लासित हो जाओ ।

5.मसीह के जो लोग इस दुनिया में है,
धार्मिकता का सूरज उदय होगा उन पर;
पंखों से उस के चंगाई देगा सब को,
सदा खुशी के गीत सब गाते रहेंगे ।

6.प्रभु के जो उद्धार पाये हुए तुम सब,
उद्धारकर्ता के ही तुम सब निज धन;
लोहू से खरीदी हुई उस की मण्डली,
मुक्तिदाता की बड़ाई, स्तुति तुम करो ।
499 जो प्यासा है उस परjo pyaasa hai us par
‘‘क्योंकि मैं प्यासी भूमि पर जल और
सूखी भूमि पर धाराएँ बहाऊँगा ।’’ (यशायाह 44:3)

जो प्यासा है उस पर प्रभु पानी उँड़ेलेगा,
सूखी भूमि पर वही धारा बहाने वाला ।।

1.प्रचंड धारा में प्रभु मार्ग को वो खोलता है,
जंगल में राजमार्ग प्रभु वो तैयार करता है ।

2.हमारे वंश के ऊपर वो आत्मा को उँड़ेलता है,
आत्मा से भर के उन को यह मण्डली बनाता है ।

3.मजनू कि नाई बढ़ेंगे और फलवन्त वे होंगे,
जो धाराओं के पास होते और धास के बीच होते हैं ।

4.प्रायश्चित के ढकने ऊपर से ईश्वर ने बातें की है,
आकाशी स्थानों से उस ने हम से बातें की हैं ।

5.आकाश जब खुल गया था प्रभु ने बातें की है,
एक शब्द से उस ने कहा और पुत्र की महिमा की है ।

6.वाचा के सन्दुक को लाके मन्दिर में उस को रखा,
मन्दिर प्रभु की महिमा की भरपूरी से भर गया ।

7.प्रभु की प्रजा हैं उस की हर्ष से स्तुति करते हैं,
भजते हैं सदा हम उस को हल्लेलूयाह गाते हैं ।
500 यीशु पर विश्वास जो लातेyeeshu par vishvaas jo laate
(भजन 92)

यीशु पर विश्वास जो लाते, उसी के अनुग्रह द्वारा;
वे धर्मी है बन जाते ।।

1.खजूर के वृक्ष के समान वे,... फूलते और फलते रहेंगे;
खजूर की ड़ालियाँ लेके,... उद्धार के नारे मारेंगे ।

2.लबानोन और देवदार के,... वृक्ष के समान वे बढ़ेगे;
प्रभु के अनुग्रह और ज्ञान में,... बढ़ते ही वे रहेंगे ।

3.यहोवा के भवन में,... रोपे जाकर स्थिर रहेंगे;
दुःखों में सहते रहेंगे,... फलवन्त सदा वे रहेंगे ।

4.परमेश्वर के आँगनों में,... सफल होते भी जाएँगे;
प्रभु की सेवा करेंगे,... सदा सराहते रहेंगे ।

5.फल देवेंगे बूढ़ापे में,... हरे भरे वे रहेंगे;
विश्वास योग्यता प्रभु की,... प्रगट करते रहेंगे ।

6.बहती नदियों के किनारे,... वृक्ष जो हैं लगे हुए;
पत्ते जिन के न मुरझाते,... हरे सदा वे रहेंगे ।

7.हल्लेलूयाह गीतों के साथ,... बलवन्त प्रभु को सराहेंगे;
प्रभु के आने के लिए,... सदा वे वाट जोहेंगे ।
501 धन्य हैं वे जोdhany hain ve jo
‘‘धन्य है वे जो मन के दीन है, क्योंकि स्वर्ग का राज्य
उन्हीं का है ।’’ (मत्ती 5:1-12)

1.धन्य हैं वे जो,... मन के दीन हैं;
क्योंकि स्वर्ग का राज्य,... उन्हीं का हैं;
धन्य हैं वे जो,... शोक करते हैं;
क्योंकि वे शान्ति भी,... पाएँगे ।

2.धन्य हैं वे जो,... नम्र हैं;
क्योंकि वे पृथ्वी के,... अधिकारी होंगे;
धन्य हैं जो धर्म के,... भूखे प्यासे हैं;
क्योंकि वे तृप्त,... किये जायेंगे ।

3.धन्य हैं वे जो... दयावन्त हैं;
क्योंकि उन पर दया,...  की जायेगी;
धन्य हैं जिन के,... मन शुद्ध हैं;
क्योंकि वे परमेश्वर,... को देखेंगे ।

4.धन्य हैं वे जो,... मेल कराते हैं;
क्योंकि वे प्रभु के,... पुत्र ठहरेंगे;
धन्य है धर्म के कारण,... सताए जाते जो;
क्योंकि स्वर्ग का राज्य,... उन्हीं का है ।

5.धन्य हो मेरे नाम की,... निन्दा सहते जो;
स्वर्ग में तुम्हारा,... फल बड़ा है;
इसीलिए उन्होंने,...इन नबियों को जो;
तुम से पहले सताया था ।
502 धन्य तू है, सदा धन्यdhany too hai, sada dhany
‘‘हे इस्राएल, तू क्या ही धन्य है ।’’
(व्यवस्थाविवरण 33:29)

धन्य तू है, सदा धन्य तू है;
हे इस्राएल क्या ही धन्य तू है,
यहोवा ने तुझे छुड़ाया है;
उसकी प्रजा तू तो अनुपम है ।।

1.धन्य तू है तेरे पाप ढँप गए,
अपराधों की माफी दाग मिट गए;
यहोवा उस का अब लेखा न ले,
आत्मा में जिस की कपट नहीं है ।

2.धन्य तू है, तू तो चुना गया है;
चुनकर प्रभुजी तुझे निकट लाया है,
आँगन में आए, उस के भवन में रहे;
मन्दिर के पदार्थो से तृप्त वह है ।

3.धन्य तू है न चले दुष्टों में,
पापीयों के मार्ग में न खड़ा रहे;
बैठता नहीं ठट्ठा करने वालों में,
प्रभु के वचन में प्रसन्न होता है ।

4.धन्य तू है, शक्ति उस में पाता है;
हृदय में सिय्योन का मार्ग जो बना हैै,
यात्रा में तराईयाँ जब आएँ;
जीवन का सोता जो बन जाता है ।

5.धन्य तू है उस की शरण लेता है,
चखकर देखो प्रभु कैसा भला है;
झुक जा प्रभुजी के चरणों में,
अन्त तक सम्भाले वह विश्वासयोग्य है ।
503 तुम बहुत सा फल लाओगेtum bahut sa phal laoge
‘‘तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे ।’’
(यूहन्ना 15:8)

तुम बहुत सा फल लाओगे, पिता की महिमा होगी;
इस रीति से तुम फलते जाओ, तब ही चेले ठहरोगे ।।

1.सींची हुई जो बारी समान, होंगे पानी के झरने समान;
काल के समय तृप्ति देकर, लगातार तुम्हें वह ले चलेगा;
हड्डी होगी हरीभरी, बहुत ही फलवन्त बनो ।

2.मरुभूमि और मुन्डे टीले, नदियां बहाएगा प्रभु इन से;
सुखि भूमि, तराइयों से, पानी के झरने तब बह निकलेंगे;
हमारे ही यीशुजी में, बहुत ही फलवन्त बनो ।

3.तेजी से बहती नदी जैसी, शान्ति अपनी प्रभु ने दे दी;
अपने धन से तुम्हें भरे, बुढ़ापे तक वह उठाए रहे;
हमारे ही यीशुजी में, बहुत ही फलवन्त बनो ।

4.गूंगे थे जो गाते है गीत, कूदते है अब जो लंगड़े थे कभी;
असी के कारण सारी प्रजा, प्रसंशा करती अब इन कामों की;
महिमा आदर करते हुए, हल्लेलूयाह गाएँ सदा ।
504 तुम को भरा वहtum ko bhara vah
‘‘प्रभु अपनी भलाई से हमें लाद देता है,... ।’’
      (भजन 68:11)

तुम को भरा वह सारी भलाई से, स्वर्गीय आशीष है वह ।।

1.प्रभु के मन्दिर में ही सब कुछ भरपूर,
आशीष बहुत ही तुम को मिलेगी;
उस के मन्दिर में की बहुतायत से,
जीवन का पानी पीओ ।

2.तुम्हारे पापों का वह प्रायश्चित करेगा,
तुम को छुटकारा उसी में है;
सत्य की कृपा उस के महान धन से,
आओ हम खुशियाँ मनाएँ ।

3.उस के लोहू के द्वारा छुटकारा पाए जो,
उस को प्रभु मीरास देता है;
पवित्र लोगों की मीरास में भागीदार,
बनाए गए हैं हम ।

4.जो कोई प्रभु का स्वीेकार करता,
अनन्त जीवन उसका है;
पवित्र आत्मा को दान में पाके,
आत्मा में आनन्द करेंगे ।

5.तुम को प्रभु जो स्थिर करेगा,
पहिले की स्थिति से अधिक देगा;
साथ हमेशा रहने की इच्छा की,
उस की आशीष को ग्रहण करो ।

6.यदि तुम उस के अनुग्रह में बढ़ो,
तुम को वह हर दिन आशीष देगा;
सदा अनुग्रह से घेरे रखेगा,
अनुग्रह में आनन्द करो ।

7.जयवन्त जीवन पाए हुए लोग,
मीरास उस की वह सब पाएँगे;
विश्वास से विजय प्राप्त अब करके;
गाओ हल्लेलूयाह उस की ।
505 मीरास दे दी प्रभु ने उन्हेंmeeraas de dee prabhu ne unhen
‘‘एक अविनाशी, निर्मल और अजर मीरास के लिए,...
हमें नया जन्म दिया ।’’ (1 पतरस 1:4)

मीरास दे दी प्रभु ने उन्हें, जो कोई जयवन्त हुए ।।

1.तू ही हमारा ईश्वर पिता प्रेमी, हम सब तेरे पुत्र हुए है;
अपने लोहू से खरीदा, निज धन अपना बनाया ।

2.जितनों ने तुझ को ग्रहण किया मन से, नाम पर तेरे विश्वास किए हैं;
अपनी सन्तान तू बनाया, और अधिकार दे दिया ।

3.तेरे साथ महिमा पाने वालों को वह, तेरे दुःखों में भागी होते जो;
संगी मीरास वह बनेंगे, गिने गए हैं वह सब ।

4.अविनाशी और निर्मल वही जो है, अजर अमर मीरास के लिए;
नया जन्म उस ने दे दिया, स्थिर हमें वह बनाया ।

5.तेरी प्रतिज्ञा हर्ष है वह हृदय का, ये सब हमारी अनन्त मीरास है;
माने और उस पर रहें, हल्लेलूयाह गीतों से ।
506 यीशु हमारी है मीरासyeeshu hamaaree hai meeraas
‘‘उन का भाग मैं ही हूँ ।’’ (यहेजकेल 44:28)

यीशु हमारी है मीरास, दुसरी मीरास अब है ही नहीं ।।

1.अक्षय, निर्मल, अविनाशी जो मीरास है हमारे लिए;
करुणा से ईश्वर ने दिया, आनन्द से स्तुति करेंगे ।

2.हम मसीह के सम्बन्ध में हैं, प्रतिज्ञा के वारिस भी हम हैं;
स्थिर किए गए हैं हम, साष्टांग प्रणाम करते हैं ।

3.ईश्वर के संकल्प के अनुसार, पहिले से वह चुन लिया है;
मीरास की योजना उस ने की, हृदय से हम सब गाएँगे ।

4.सन्तों की मीरास में हमें भाग पाने के योग्य है बनाया,
परम पिता की स्तुति हम सदा करते रहेंगे ।

5.सुरक्षा, उन्नति, बढ़ती, शक्तिवान है देने के लिए;
जिस ने मीरास दी उस प्रभु की, हल्लेलूयाह हम गाएँगे ।
507 मसीह हमारी महिमाmaseeh hamaaree mahima
‘‘वह आशा हमारे प्राण के लिए,... लंगर है ।’’
(इब्रानियों 6:19)

मसीह हमारी महिमा की आशा, वह जो हम में है;(2)
जय जय करते खुशी मनाते (2), यीशु ही आशा है ।।(2)

1.उसी आशा में उद्धार जो हुआ, हम को छुड़ाया है;(2)
नया जन्म जो दिया है हम को, जीवित आशा के लिए ।(2)

2.जिसने हम से, प्रेम किया है, उत्तम वह आशा दी है;
अनन्त शान्ति और अनुग्रह से, स्थिर भी वह किया है ।

3.मसीह हमारा अधिकारी है, उस का घर हम है;
अन्त तक यदि हम, साहस में रहें, आशा का आनन्द मनाएँ ।

4.जो कोई उस पर, आशा रखता हैं, खुद को शुद्ध करता है;
आओ जाँचे हम, अपने आपको, उस के समान होना है ।

5.आशा जो हम को प्रभु ने दी है, प्राण का वह लंगर है;
बहुत ही दृढ़ और, ऐसी निश्चित है, प्रभु तक पहुँचाती है ।

6.प्रगट वह होगा, महिमा में अपनी, हम को साथ ले जाएगा;
धन्य आशा, दी है हमको, बाट उस की जोह रहे हैं ।
508 महान उद्धार जो हैmahaan uddhaar jo hai
‘‘मैं तुझे देश के ऊँचे स्थानों पर चलने दूँगा ।’’
(यशायाह 58:14)

महान उद्धार जो है, प्रगट किया प्रभु ने;
पर्वत की चोटी से ऊँचा महान;
और स्थिर भी किया है ।।

1.हम चिथड़ों समान सब थे,... और निन्दा के पात्र भी थे;
पिता की नाई ढूंढ़ने आया,... और प्रेम से बचा लिया । ... महान

2.जंगल में उस ने पाया,... सुनसान और मरुभूमि में;
लिए फिरा और सम्भाला हमें,... आँख की पुतली की नाई ।

3.याकूब की नाई हम थे,... इस्राएल हम को बनाया;
उस की मीरास हुए, अपना भाग बनाया,... और प्रजा हमें किया ।

4.पर्वत प्रभु ने बनाया,... हर चीजें वहाँ उत्तम हैं;
इब्राहीम, मूसा, एलिय्याह, मसीह,... चढ़े थे पर्वत पर;

5.उकाब की तरह प्रभु,... अपने बच्चों की रक्षा किया;
सम्भाला उन्हें गिरने से नीचे,... ऊँचाई पर उठाता रहा ।

6.यीशु का सिद्धांत जो है,... तुलना है पर्वत से;
ये सारी बातें बताती हमें,... उस मुक्ति के बारे में ।

7.यशायाह की जो नबूवत है,... मुक्ति का वर्णन हैं;
यदि जानना चाहो, समझना चाहो,... आओ चलें चढ़कर देखें ।
509 ऊँचे स्थानों में प्रभुoonche sthaanon mein prabhu
‘‘उस ने उस को पृथ्वी के ऊँचे ऊँचे स्थानों पर
सवार कराया ।’’ (व्यवस्थाविवरण 32:7-14)

ऊँचे स्थानों में प्रभु,
सवार भी कराया मुझे;
क्या ही सुन्दर हैं वे उद्धार की चोटियाँ,
रहेगा अनन्तकाल ।।(2)

1.मृत्यु सदा के लिए, नाश प्रभु ने कर दिया;(2)
मृत्यु के डंक को तोड़ा प्रभु ने,
जयवन्त हमें बनाया ।(2)

2.जिसका मन तुझ में है, धीरज भी धरे हैं;
पूर्ण शान्ति के साथ तू सम्भालता,... भरोसा तुझ पर है ।

3.आश्चर्यकारी प्रभु और महाबुद्धिमान है,
निश्चय वह हम को बुद्धि विवेक से,... अगुवाई करेगा ।

4.जिस का मन, भटका हो, और कुडकुड़ाता हो;
अपने वचन के द्वारा से उन को,... नम्र बनाएगा ।

5.जब तुम दाहिने मुड़ो, या बाएँ और फिरो,
पीछे से धीमी आवाज सुनोंगे,... ‘‘यह है मार्ग चलो’’ ।

6.घोंसले को तोड़ा उस ने, ताकि हम उड़ना सीखें;
परों पर उठाया उकाब की तरह वह,... ताकि हमें सम्भाले ।

7.तू अपने राजा को शोभा सहित देखेगा,
स्वर्गीय देश जो विशाल और अद्भुत,... दृष्टि करेगा ।
510 प्रेमी यीशु मसीह काpremee yeeshu maseeh ka
‘‘प्रेम कभी टलता नहीं ।’’ (1 कुरिन्थियों 13:8)

1.प्रेमी यीशु मसीह का, हाँ प्रेम ही सबसे अटल है;(2)
सिद्ध प्रेम भय को दूर है करता, क्योंकि भय से कष्ट है होता;(2)
प्रेम में भय नहीं होता ।

2.प्रेम धीरजवन्त है बनाता, हाँ प्रेम कृपा करना सिखाता;
प्रेम ईर्ष्याहीन और प्रेम दम्भहीन है, प्रेम अधर्म से खुश नहीं होता;
प्रेम कभी फूल नहीं जाता ।

3.अपस्वार्थी नहीं होता, न प्रेम कभी झुंझलाता;
कटुवचन से चिढ़ नहीं जाता, सत्य वचन से आनन्दित होता;
सब कुछ है सह लेता ।

4.विश्वास करना सिखाता, सब बातों की आशा रखता;
सब बातों में धीरज धरता, प्रेम कदापि टल नहीं सकता;
प्रेम अटल है रहता ।

5.प्रेम क्या मुझ से तू करता ? प्रिय प्रभु यीशु कहता;
प्रेम अधिक क्या तू इन से करता ? मेरी सेवा में खुश रहता ?
अपना क्रूस उठाता ?

6.प्रेम में जड़ तुम पकड़ो, हाँ प्रेम में नेव डालो;
प्रेम के बन्धन से बन्ध जाओ, प्रेम के सम्बन्ध में जुट जाओ;
प्रेम में सब गठ जाओ ।
511 आओ विश्वासीयोंaao vishvaaseeyon
‘‘विश्वास में दृढ़ होते जाओ ।’’
(कुलुस्सियों 2:7)

आओ विश्वासीयों, विश्वास करते हुए,
उसे सराहो तुम, जय जय गाते हुए ।।

1.मसीह पर विश्वास लाओगे, मुक्ति जीवन में पाओगे,
मसीह का यह है दान तुम जानोगे,
महिमा देखोगे स्तुति करते हुए ।

2.विश्वास आत्मिक जीवन में जरूरी है सब के लिए,
विश्वास रखो प्रियो हर समय में,
विश्वास में बढ़ो उस को देखते हुए ।

3.विश्वास किया सब हम ने, हम को सम्भाला उस ने,
शत्रु के फन्दों से बचाया हमें,
आनन्द से गाते उस विश्वास के लिए ।

4.विश्वास कि कुश्ती हम लड़े, अनन्त जीवन थामे रहें,
जयवन्त जीवन में हम बने रहें,
पायेंगे इनाम जय जय करते हुए ।

5.विश्वास का दाता हे ईश्वर, विश्वास हमारा तू बढ़ा,
विश्वास में जीवीत रहें, पीछे न हटें,
तैयार रहे सदा उस राज्य के लिए ।
512 मेरे बदलें में मरने कोmere badalen mein marane ko
‘‘वह आप हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर
चढ़ गया ।’’ (1 पतरस 2:24)

1.मेरे बदलें में मरने को एक था तैयार,
कि मैं पापी स्वतंत्र हो जाऊँ;
अपने ऊपर लिया मेरे पापों का भार,
यीशु ने आप दे दी अपनी जान ।
देख सलीब पर वह किलों से जड़ा हुआ,
कितना भारी था पापों का भार;
पीड़ा थी तिस पर भी ख्रिस्त गया कलवरी,
और वहाँ किया मेरा उद्धार ।।

2.उस का प्रेम है अजीब जब वह धीरज के साथ,
मेरे दिल से निकालता सब मैल;
मैं खुश हूँ इसलिए कि यीशु मेरा नाथ,
मुझ को करता है बर्फ सा सफेद ।

3.मैं मसीह पास रहूँगा और अनन्द के साथ,
कदम बढ़ाऊँगा आगे हर आन;
तेरी स्तुति हो यीशु यह मेरा राग,
तू ने दूर किए मेरे गुनाह ।
513 यीशु है मेरी पनाहyeeshu hai meree panaah
‘‘वह आशा हमारे प्राण के लिए मानों लंगर है ।’’
(इब्रानियों 6:19)

यीशु है मेरी पनाह,... वही है मेरी चट्टान,
लंगर मैं ड़ालता उसमें,... जिस वक्त आ घेरते तूफान ।।

1.दुनिया के इस सफर में,... फिक्रों का होता जब शोर,
यीशु एक ही झिड़की से,... तोड़ता सब आंधी का जोर ।

2.दुःख से जब हूँ परेशान,... जब जाना चाहता हूँ पार,
तब उसका उमदा कलाम,... रोशनी का होता मीनार ।

3.मुझे है पूरा यकीन,... पहुँचूँगा एक दिन किनार,
सुनहरे साहिल पर और,... पाऊँगा उसका दिदार ।
514 मैं इन बातों के बारे मेंmain in baaton ke baare mein
‘‘कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा ।’’
(रोमियों 8:35)

मैं इन बातों के बारे में, बताओ,... क्या करूँ चर्चा ?(2)
खुदावन्द हादी है मेरा, विरोधी,... कौन हो सकता ?(2)

1.वह मुझ को मौत की धाटी (से होकर... आप ले जाता),(2)
और अपने नाम के खातिर वह मुझ पर... है दया करता ।

2.खुदा ने बेटे को अपने (न अपने... पास रख छोड़ा)
हवाले कर दिया खातिर गुनाहों... के लिए मेरे ।

3.खुदा के चुने हुओं पर (है नालिश... कौन कर सकता)
खुदा वह है जो अपनों को हमेशा... धर्मी ठहराता ।

4.तो मुजरिम कौन ठहराए (मसीह यीशु... के दासों को)
मरा और जी उठा खातिर मसीह यीशु... हमारा है ।

5.है दाहिनी ओर जा बैठा (मेरा शाफी... मसीह यीशु)
खुदा के प्यार से कोई करेगा क्या... जुदा मुझ को ।
515 मैं कैसे कह दूँmain kaise kah doon
‘‘इसलिए हमारे प्रभु की गवाही से तू लज्जित न हो ।’’
(2 तीमुथियुस 1:8)

मैं कैसे कह दूँ, यीशु दुनिया का नहीं है मुंजी ।।(2)

1.उसने मुझे खींचा गढ़े से निकाला,(2)
धोए और किए साफ मेरे दाग और धब्बे ।... कैसे कह दूँ

2.उस का रूह अब दिल में देता यह गवाही,
कि खुदा उस में है मेरा बाप आसमानी ।

3.मिलती उस से ताकत तो मैं गालिब आऊँ,
दुनिया और बदी पर पूरी फतह पाऊँ ।

4.उस के पाक कलाम से दिल में है मुहब्बत,
दुआ में मिलती है खुशी और रिफाकत ।
516 ऐ मसीह मेरे गुनाहों कोai maseeh mere gunaahon ko
‘‘तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया ।’’
      (भजन 32:5)

ऐ मसीह मेरे गुनाहों को मिटाया तू ने,
दी नजात हम को गिरने से बचाया तू ने ।

1.दूर जब होता हूँ, शैतान फँसाता है मुझे,(2)
शान दुनिया की दिखाके वह लुभाता है मुझे;(2)
बढ़ गए अब तो कदम, तय करूँ में अब यह सफर,(2)
ऐ मेरे मुंजी (मालिक) बता कैसे ? ऐ मसीह...

2.काफिला कैसे चले जब तू मेहरबान न रहे,
रुक रुक जाऊँ अगर तेरा सहारा न मिले;
बढ़ गए अब तो कदम, तय करूँ मैं अब यह सफर,
ऐ मेरे मुंजी (मालिक) बता कैसे ?

3.आधियाँ उठती है तूफान डराता है मुझे,
डगमग किश्ती है क्या करना नहीं मालुम मुझे;
मांझी बनकर हे प्रभु पूरा करा दे यह सफर,
ताकि मैं पहुँचू किनारे खुश होकर ।

4.दौड़ता जब हूँ तो कुछ बोझ दबाता है मुझे,
पाप भी चुपके से फंदे में फँसाता है मुझे;
आँख जब तुझ पे लगाता हूँ तो अन्त होवे सफर,
गाऊँगा तेरी स्तुति जीवन भर ।
517 फजल अजीब मसीह काphajal ajeeb maseeh ka
‘‘उस की भरपूरी से हम सब ने पाया
वरना अनुग्रह पर अनुग्रह ।’’  (यूहन्ना 1:16)

1.फजल अजीब मसीह का,... आया इस दुनिया में;
मेरा सब बोझ उठाया,... किया आजाद मुझे ।

2.यीशु का प्रेम अद्भुत है,... गया वह कलवरी;
दुःख और गुनाह उठा के,... सही वह पीड़ा भी ।

3.शक्ति अद्भुत यीशु की,... जी उठा फिर से वह;
शैतान, गुनाह पर उस ने,... पाई अद्भुत फतह ।

4.कैसी अद्भुत पुकार है,... ऐ गुनाहगार, पास आ;
बोझों को क्यों उठाता ? उद्धार मैं देऊँगा ।’’

5.लोहू अद्भुत यीशु का,... धोता है सब गुनाह;
कैसा अद्भुत है आत्मा,...रखता भरपूर सदा ।
518 हे तुम जो माता का प्रेमhe tum jo maata ka prem
‘‘स्वर्ग में मेरा कौन है ? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर
भी कुछ नहीं चाहता ।’’       (भजन 73:25)

1.हे तुम जो माता का प्रेम जानते हो,
उस से भी अधिक है यीशु का प्रेम;
क्रूस पर वह मुआ अब हो उस की जय,
प्रीतम है मेरा मसीह ।
लाखो में प्रिय, मेरा मसीह;
तू मेरा राजा, मैं तेरा दास;
तुझ ही पर मेरा है पूरा विश्वास,
लाखो में प्रिय, तू मेरी है आस ।।

2.यीशु अब प्रेम से बुलाता है आज,
आओ और थामो तुम अब उस का हाथ;
तुम को वह देगा आनन्द और स्वर्ग राज्य,
प्रीतम है मेरा मसीह ।

3.दुनिया के माल और सब धन दौलत से,
यीशु मसीह सब से उत्तम प्रधान;
स्वर्ग की वह ज्योति और पृथ्वी की जय,
प्रीतम है मेरा मसीह ।
519 मुझ को मसीहा पाक नेmujh ko maseeha paak ne
‘‘जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे,
तो हमें मसीह के साथ जिलाया ।’’ (इफिसियों 2:5)

मुझ को मसीहा पाक ने, मुर्दो में से जिला दिया;
गफलत में सो रहा था मैं, उस ने मुझे जगा दिया ।।

1.शैतान का मैं गुलाम था, करता मैं उस का काम था;
फन्दें में जब था उस के मैं उस ने मुझे छुड़ा लिया ।

2.बोझ गुनाह का सिर पर था, दिल भी गुनाह से मैला था;
मसीह ने अपने खून से, मेरे इस दिल को धो दिया ।

3.यीशु मसीह की खूबियां, किस तरह में बयान करूँ;
देना हमें जो लाजिम था, यीशु ने सब कुछ दे दिया ।

4.कर ले मसीह की बन्दगी, जब तक है तेरी जिन्दगी;
पापों में जब था मैं डूबा, उस ने मुझे बचा लिया ।

5.लाजिम था कि सजा मिले, मुझ को मेरे पापों की;
सह ली मसीह ने खुद सजा, लेकिन मुझे बचा लिया ।
520 प्रभु यीशु तु नेprabhu yeeshu tu ne
‘‘परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा ।’’ ( यूहन्ना 3:16)

प्रभु यीशु तु ने जग में आकर,
अद्भुत प्रेम दिखाया तू मुझ पर ।।

1.जब मैं अपने पाप में पड़ा था,
हर रोज उन में डुबा रहता था;
लेकिन वह मेरा हाथ पकड़ कर,
लाया वह मुझे अपने घायल चरण पर ।

2.प्रेम से वह मुझको नजदीक बुलाकर,
पाप और गन्दगी गुनाह को हटाकर;
घोया उस ने मुझ को पाक लोहू से,
अनन्त नरक और मौत से बचाकर ।

3.उस को प्रशंसा और स्तुति देकर,
गाता हूँ मैं यह सब को सुनाकर;
पापों से मुक्ति मुझ को वह देकर,
शैतान की हार कैसी दिखाई जगत पर ।

4.प्रेम से वह सब को निकट है बुलाता,
कैसा है अद्भुत वह मुक्तिदाता;
अपने लोहू से छुटकारा वह देकर,
ले चला अपने जीवन के पथ पर ।
521 मैं हूँ मसीहीmain hoon maseehee
‘‘सुसमाचार से नहीं लजाता ।’’
(रोमियों 1:16)

1.मैं हूँ मसीही, और रहूँगा भी;
जब तक न सूरज और चाँद टले,
मैं हूँ मसीही, दूँगा गवाही;
दुनिया तब मुझ पर अगर हँसे ।
मैं हूँ मसीही, छाप मुझ पर उसकी;
उसी ने क्रूस पर बहाया खून,
मैं हूँ मसीही, यह मेरी खुशी;
खरीदा उसने मैं उसका हूँ ।

2.मैं हूँ मसीही, कैसा अजीब है;
एक गुनाहगार हूँ, जो बच गया;
मैं हूँ मसीही, सामने सलीब है;
यीशु के पीछे मैं चलूँगा,
गर झगड़े होवे, लोग उसको छोड़े;
सब शक और डर से मैं लडूँगा,
रूह के कलाम से, मसीह के खून से;
गुनाहों पर फतह पाऊँगा ।

3.मैं हूँ मसीही यहाँ मुसाफिर,
यह दुनिया मेरा घर है नहीं;
सफर यह मेरा जल्द होगा आखिर,
रहेंगे दुःख और तकलीफ नहीं;
मैं हूँ मसीही, कैसी उम्मीद है;
कि यीशु फिर से जल्द आएगा,
लोग चाहे हँसे यह बड़ा भेद है;
हमें अपने साथ ले जाएगा ।

4.मैं हूँ मसीही, यह कैसा गीत है;
जो मेरे दिल में आज उठता है,
यह भ्रम नहीं है, न रस्म ओ रीत है;
रूह उस का मुझ में अब बसता है,
मैं हूँ मसीही, मौत से क्यों डरूँ,
जब मेरा वक्त यहाँ आ पहुँचे;
गाते हुए मैं यह दुनिया छोडूँ,
और यीशु मुझे कबूल करे ।
522 एक अजीब, नया कामek ajeeb, naya kaam
‘‘तूने मेरे लिए विलाप को नृत्य में बदल दिया ।’’
      (भजन 30:11)

1.एक अजीब, नया काम मेरे अन्दर हुआ;
दिल में आया है जब से मसीह,
मेरे दिल में है रोशनी जिस को ढूंढता था;
दिल में आया है जब से मसीह ।
दिल में आया है जब से मसीह,
मुझे अपना बनाया सही;
बहते पानी समान मेरी जान है शादमान,
दिल में आया है जब से मसीह ।।

2.मेरा भूलना, भटकना, सब हुआ तमाम;
दिल में आया है जब से मसीह,
मेरे पाप भी धुल गए जो थे बेशुमार;
दिल में आया है जब से मसीह ।

3.मौत की घाटी में ज्योति है मेरे लिए,
दिल में आया है जब से मसीह;
मुझे फाटक सुनहरे भी दिखने लगे,
दिल में आया है जब से मसीह ।

4.मेरी राह में है नूर, मन आनन्द से भरपूर;
दिल में आया है जब से मसीह,
हूँ स्वर्गीय महिमा की आशा से मैं भरपूर,
दिल में आया है जब से मसीह ।
523 उत्तम और शान्तिदायक बातuttam aur shaantidaayak baat
‘‘मैं दाहिना हाथ पकड़कर तेरी सहायता करूँगा ।’’
(यशायाह 41:13)

1.उत्तम और शान्तिदायक बात,... कि ईश्वर थामे मेरा हाथ;
हर काम हर स्थान में हर समय,... मुझ यात्री को ले चलता है ।
ले चलता है, ले चलता है,
वह मुझको साथ ले चलता है ।
विश्वास से चलूँगा मैं साथ,
कि ईश्वर थामता मेरा हाथ ।।

2.कभी वह बीच अन्धेरे में,... कभी तो सुन्दर बारी में;
सुखदाई जल या आंधी में,... ले चलता है हाथ वह थाम के ।

3.तू थामे रह नित मेरा हाथ,... न डर न रँज है तेरे साथ;
जो दशा हो, संतुष्ट मैं हूँ,...  कि तेरे संग चलता रहूँ ।

4.मेरा समय सब पूरा हो,... जब छोडूँगा इस जगत को;
गर तू चलेगा लेे मुझे,... मैं न डरुँगा मृत्यु से ।
524 ईश्वर तेरे समीपeeshvar tere sameep
‘‘परमेश्वर के पास आओ, तो वह भी तुम्हारे पास आएगा ।’’
(याकूब 4:8)

1.ईश्वर तेरे समीप, मैं पहुँचूं;
और क्रूस से मुझको भी सामर्थ मिले ।
यह गीत मैं गाऊँगा, ”तेरे समीप सदा;
तेरे समीप सदा, और भी समीप ।“

2.यात्रा जब मैं करूँ, डूब जाए दिन;
अन्धकार में हो मेरा बिस्तर चट्टान।
निंद में भी पाऊँगा दर्शन मैं ईश्वर का,
तेरे समीप सदा, और भी समीप ।

3.तू मुझे मार्ग दिखा स्वर्ग जाने का,
और थाम कर मेरा हाथ मुझे चला;
दूतगण सहायक बन ले जाएँ तेरे पास,
तेरे समीप सदा, और भी समीप ।

4.उठकर स्तुति तेरी मैं करूँगा,
सारे ही दुःखो पर जय पाऊँगा ।
तू ही प्रभु मुझे नित नई सामर्थ दे,
तेरे समीप सदा, और भी समीप ।
525 यीशु, मेरे प्राण के मीतyeeshu, mere praan ke meet
‘‘यहोवा संकट के समय में ऊँचा गढ़ है ।’’ ( भजन 9:9)

1.यीशु, मेरे प्राण के मीत,... जब तक जग में रहता हूँ;
दुःख निरन्तर आते है,... तेरी शरण आता हूँ ।
जब तक आंधी चलती हो,... मुझ को अपने में छिपा;
अन्त में मेरी आत्मा को,... अपने पास विश्राम दिला ।

2.और कोई शरण नहीं,... प्राणों का तू ही आधार;
मुझको तू कभी न छोड़,... दे सहारा, ले उबार;
तुझ पर ही मेरा विश्वास,... तू ही एक सहायक है;
अपने पंखो में छिपा,... मैं निर्बल, तू बलवन्त है ।

3.केवल तुझको चाहता हूँ,... तुझ में ही सब पाया है;
मैं पतित ठूकराया हुआ हूँ,... तू ही शुद्ध कर सकता है ।
नाम तेरा पवित्र है,... मैं निरा अधर्मी हूँ;
तू अनुग्रह-सागर है,... मैं पापों से घिरा हूँ ।

4.मेरे पाप को ढ़ापने का,...  तू अनुग्रह सागर है;
निर्मल धारा बहने दे,...  जीस से मन शुद्ध होता है ।
तू ही सोता जीवन का,...  मेरे हृदय में तू बह;
कि कभी न प्यास लगे,...  तू सदा यूँ बहता रह ।
526 यीशु चरवाहा मेरा हैyeeshu charavaaha mera hai
‘‘यहोवा मेरा चरवाहा है ।’’       (भजन 23:1)

1.यीशु चरवाहा मेरा है,... मैं उसकी दया पाता;
न कोई आवश्यकता है,... जब वह प्रभु है मेरा ।

2.मुझको वह अमृत जल के पास,... कुशल से ले चलता;
और होती जहाँ हरित घास,... वह स्वर्गीय भोज खिलाता ।

3.हठीली भेड़, मैं फिरता था,... वह प्रेम से खोजने आया;
जब पाया काँधे पर रखा,... आनन्द से धर ले आया ।

4.छाया में मौत की गर वह साथ,... न हो मुझे कोई भय;
कि साहस देते उस के हाथ,... जब पथदर्शक प्रभु है ।

5.तू मेरे लिए मेज लगा,... भोजन स्वर्गीय खिलाता;
कटोरे में है आशीष के,... तू मेरी प्यास बुझाता ।

6.हे प्रभु मैं इस जीवन भर,... तेरी ही दया चाहता;
सच्चे चरवाहे तुझ ही पर,...  मन मेरा लगा रहता ।
527 परमेश्वर ही दया सेparameshvar hee daya se
‘‘यहोवा ने हमारे लिए महान कार्य किए है ।’’
      (भजन 126:3)

भ्ंचचल क्ंल

1.परमेश्वर ही दया से,... सभी सुरक्षित हैं उसमें;
हे परमेश्वर यह वर तू दे,... इस दिन को पवित्र मानें ।
भक्ति से, स्तुति से,... इस दिन को पवित्र मानें;
ख्रिस्त यीशु के द्वारा मेरे,... पापों को तू माफ किया है;
भक्ति से, स्तुति से,... इस दिन को पवित्र मानें ।।

2.आनन्द से आएं तेरे घर,... आराधना हो सच्चाई से;
हमारी भक्ति ऐसी हो,...  कि भाई वह स्वर्ग में तुझे ।

3.हम सभों का तू शिक्षक हो,... और वचन को प्रकाशित कर;
जो निश्चित हो जगा उनको,... तू प्रकट हो हम सभों पर ।
528 अब जागिए नींद विसारिये जीab jaagie neend visaariye jee
‘‘अब निंद से जाग उठने की घड़ी आ पहुँची है ।’’
(रोमियों 13:11)

अब वक्त सलीब उठाने का,
दुनिया में धूम मचाने का ।।

1.अब जागिए नींद विसारिये जी,... यीशु नाम के नारे मारिये जी;(2)
अब सुस्त पड़े जो सोते है,... यह वक्त है उनको जगाने का ।(2)

2.यीशु बेटा बनके आया है,... इस दुनिया को आन बचाया है;
ज्योति दिलों में हमारे लाया है,... यह वक्त है ज्योति चमकाने का ।

3.आत्मा के लो हथियार भाई,... कमर कस के हो जाओ तैयार भाई;
हर गली कूचे में जा जा के,... यह वक्त है वचन सुनाने का ।

4.अब छोड़िये नींद पुरानी को,... जो पापी को नरक पहुँचाती है;
अब सीखिए क्रूस कहानि को,... यह वक्त नहीं सुस्ताने का ।

5.करो तौबा जो मुक्ति पानी है,... और सोचो, जो जान बचानी है;
पापी बन्दे गुनाहों से कर तौबा,... अब वक्त कयामत आने का ।
529 प्रभु का दर्शन, यीशु का दर्शनprabhu ka darshan, yeeshu ka darshan
‘‘मैंने सेनाओं के यहोवा राजाधिराज को अपनी
आँखों से देखा है,... तब मैं ने कहा, मैं हाजिर हूँ, मुझे भेज ।’’
(यशायाह 6:5,8)

प्रभु का दर्शन, यीशु का दर्शन;
पाके भाई लग जा सेवा में ।(2)

1.पापी जगत बुलाए तुझको,... ”आ बचा मुझको“,(2)
आत्माएँ मरती(2),... देखो हजारो पाप के सागर में ।(2)

2.क्रूस पर अपनी जान प्रभुने,... जग के लिए दी;
जगह है देखो(2),... सभी के लिए उसके हृदय में ।

3.बैठे-बैठे साल गवाएँ,... नवजवानी के;
अभी भी करले(2),... प्रभु की सेवा बाकी जीवन में ।

4.चारों और अन्धेरा छाया,... रात अब आ पहुँची;
जो कुछ है करना(2),... अभी तू करले दिन की ज्योति में ।

5.प्रभु के लिए आत्मा बचाने,... मैं तू जल्दी कर;
फसल है पक्की(2),... पूले जमा कर उसके खत्ते में
530 हम यीशु मसीह के चेले हैham yeeshu maseeh ke chele hai
‘‘तुम पृथ्वी के छोर तक मेरे गवाह होेगे ।’’
(प्रेरितों 1:8)

हम यीशु मसीह के चेले है, दुनिया में धूम मचा देंगे;
जो नींद में गाफिल सोते है, उपदेश से उनको जगा देंगे ।।(2)

1.हम मन की घुण्डी खोलेंगे (2), और ज्ञान के मोती रोलेंगे;(2)
इंजील मुकद्दस पढ़ पढ़ कर, हृदयों को शान्त बना देंगे । (2)

2.बन्दे है एक खुदा के हम, मिल झुल के क्यों न रहे अब हम ?
इंजील मुकद्दस को दुनिया के, हर कोने में पहुँचा देंगे ।

3.हम दुःख के सहनेवाले हैं, उफ तक नहीं करनेवाले है;
और पीछे प्यारे यीशु के, चलने की राह बता देंगे ।

4.दुःख और तकलीफ उठाएँगे, और प्रेम का राग सुनाएँगे;
हम दूर करेंगे रंज-ओ-आलम, और प्रेम का झण्ड़ा जमा देंगे ।
531 यीशु मसीह के अच्छे चेलोंyeeshu maseeh ke achchhe chelon
‘‘यीशु ने कहा, मेरे पीछे हो ले ।’’ (मत्ती 9:9)

1.यीशु मसीह के अच्छे चेलों के समान,
विश्वास से हम आगे बढ़ें;
हम सब आनन्द के साथ और हियाव के साथ,
उसकी सेवा एक होकर करें ।
प्रभु यीशु हमारा शीध्र ही आएगा,
हम शीघ्रता से सेवा करें ।
यीशु मसीह के अच्छे चेलों के समान,
विश्वास से हम आगे बढ़ें ।।

2.सब को प्रभु प्रेम हम दिखायें,
और यीशु के पास लाएँ;
अति शीघ्रता से और उत्साह से,
राजमार्ग सब को दिखायें ।

3.शेतान के गढ़ को आओ गिराकर,
अब यीशु के लिए जीएँ;
सारे संसार में हम प्रभु यीशु का नाम,
सभी समय में प्रचार करें ।

4.प्राण, आत्मा, देह प्रभु को हम सौंपे,
और जीएँ प्रभु के लिए;
ऐसा निश्चिय करके इस पर खड़े होकर,
प्रभु दिन में हम आनन्द करें ।
532 जिल्लत उठा के तुमjillat utha ke tum
‘‘सो आओ, उसकी निन्दा अपने ऊपर लिए हुए छावनी के बाहर
उसके पास निकल चलें ।’’ (इब्रानियों 13:13)

जिल्लत उठा के तुम,
वीरों आओ चलें खैमे पार ।।

1.सम्बल्लत, तोबिया छेड़ें तुम्हें जब, और सब मिलकर ठट्ठे उड़ाएँ;
अपने यीशु की सेवा में वीरों, आओ चले खैमे पार ।

2.स्तिफनुस से संगसार पे सोचो, पतरस की बेड़ी को न भूलो;
संकट में करो प्रेम से सेवा, आओ चले खैमे पार ।

3.झुठे मित्र जो तुम्हें छोड़े, झूठे-झूठे दोष लगाएँ;
प्रभु यीशु की आज्ञा पे चल के, आओ चले खैमे पार ।

4.चाहे तुम्हें कोई कोड़े से मारे, चाहे तुम्हें कोई आरे से चीरे;
संगी साथी मिल कर मारें, आओ चले खैमे पार ।

5.जब तुम्हें सारे लोग सताएँ, अभिमानी तुमको भरमाएँ;
ढ़ाढस रख के क्रूस उठाएँ, आओ चले खैमे पार ।

6.अग्नि में होवे परीक्षा तुम्हारी, जोखिम जान पे आवे तुम्हारी;
यीशु के लहू में शक्ति पा के, आओ चले खैमे पार ।

7.शान्त रहो उसे प्रभु जानो, जंग है यहोवा की यह मानों;
होठो से अपने स्तुति करो, गाएँ हम हल्लेलूयाह ।
533 उठो आओ महान प्रभुutho aao mahaan prabhu
‘‘मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है ।’’
(कुलुस्सियों 1:27)

उठो आओ महान प्रभु के भावी गवाहो, उठो ।।

1.युग से पाप में जो बंधे थे, उनकी जंजीर टूट गई;
और शत्रु की युक्ति में दबे थे,
क्रूस के लहू से लुढ़क गया है ।

2.महिमा के धन के द्वारा हमको प्रभु ने बुलाया है,
जो हमें अपने राज्य में बुलाया,
उसके योग्य अब हम चलेंगे ।

3.मसीह हम में जो है, महिमा की आशा है,
लज्जित न करनेवाली जो आशा,
आत्मा के द्वारा हम में बसती है ।

4.यह आशा स्थिर है, वह प्राण की लंगर है,
हम ने जो उसमें शरण ली है,
उस आशा से स्थिर और दृढ़ है ।

5.संसार की लालसाओें को, छोड़ें धन्य आशा रखे,
मसीह के प्रगट होने के लिए,
बाट हम जोहते सदा रहेंगे ।
534 उठ, ज्योतिमान तू हो जाuth, jyotimaan too ho ja
‘‘उठ, प्रकाशमान हो ।’’
(यशायाह 60:1)

उठ, ज्योतिमान तू हो जा,... तेरी ज्योति है तुझ पर चमकी;(2)
यहोवा का तेजोदय हुआ,... प्रकाशमान तू हो जा ।।(2)

1.और अन्य जातियाँ तेरे,... प्रकाश की और चलेगी;(2)
और राजा सारे तेरी,... चमक की और चलेंगे ।(2)

2.समुन्दर का सारा धन,... अन्य जातियों का धन सम्पत;
तुझको यह सब मिलेगा,... हृदय आनन्द से भरेगा ।

3.देवदार, तिधार, सनौवर,...  मिलकर मेरे घर में आएँगे;
और में अपने चरणों के,... उस स्थान को महिमा दूँगा ।

4.मैं तुझे सदा की उत्तमता,... का कारण ठहराऊँगा;
और पीढ़ी-पीढ़ी के हर्ष का,... कारण तुझे ठहराऊँगा ।

5.छोटा हजार बनेगा,... थोड़ा सामर्थी जाति बनेगा;
इस कार्य को मैं यहोवा,... समय पर पूरा करूँगा ।
535 जागो, जागो, जागो, जागोjaago, jaago, jaago, jaago
‘‘जब मैं जानूँगा तब तेरे स्वरुप से सन्तुष्ट रहूँगा ।’’
      (भजन 17:15)

जागो, जागो, जागो, जागो, हे मेरे प्राण;
करले तू ध्यान, कहना तू मान;
पाएगा अब सब कुछ तू जान ।।

1.यीशु के चरणों में आ जा अब तू,
करले अर्पण अब जीवन तू;
यह जो जरा(2), जान जा अब तू;
पाएगा उस से तू ज्ञान ।

2.जीवन की रोटी खा ले अब तू,
भीतरी मनुष्य में शक्ति पा अब तू;
यह तो जरा(2), जान जा अब तू;
बढ़ेगी तेरी अब शान ।

3.प्रभु में सब कुछ आरम्भ तू अब कर,
उसी में सब कुछ भी अन्त तू कर;
यह तो जरा(2), जान जा अब तू;
जानेगा प्रभु महान ।

4.प्रभु की सेवा जो करता रहेगा,
उसी के साथ-साथ जो चलता रहेगा;
यह तो जरा(2), जान जा अब तू;
पाएगा उससे इनाम ।

5.आँधी तूफानों के बीच में से होकर,
जाना पड़ेगा धीरज धर कर;
यह तो जरा(2), जान जा अब तू;
पाएगा मन में विश्राम ।

6.जितनों ने सोया कुछ न पाया,
जो कुछ कमाया यह सब कुछ है खोया;
यह तो जरा(2), जान जा अब तू;
जागेगा, पाएगा मान ।

7.अन्त तक स्थिर यदी रहेगा तू,
प्रभु से आदर पायेगा तू;
जीवन मुकुट(2), तेरा ही है;
पाएगा बड़ा सम्मान ।
536 हे भाईयों बहिनोंhe bhaeeyon bahinon
‘‘आत्मिक उन्माद में भरे रहो, प्रभु की सेवा करते रहो ।’’
(रोमियों 12:11)

हे भाईयों बहिनों, अब जाग उठो;
प्रभु यीशु की सेवा करने ।।

1.आत्मा सच्चाई से भजन करो,... समीप आके उसके चरणों में;
आश्चर्य काम करने वाला,... कर्ता बलवन्त है प्रभु यीशु ।

2.मसीह महान, खोजा शाऊल को,... और गवाह बनाया अपना उसे;
पुनरुत्थान की शक्ति मेें भरपूर हो,... तुम सब मिलकर अब साक्षी दो ।

3.स्वर्गदूतो से महान है वह,... प्रेम माता से बढ़कर करता है वह;
करो प्यार तुम भी पापियों से,... सुसंदेश यीशु का दो ।

4.राजाधिराज है प्रभु यीशु,... राज्य देने हमें आता प्रभु;
राजा यीशु की विजय लेकर,... क्रूस विजय का करो प्रचार ।

5.शद्रक, मेशक, अबदनेगो ने,... पीड़ाएँ सही उत्साहित हो;
अब काल मरी जो भी आवे,... प्रभु करता करुणा साथ चलो ।

6.स्तिफनुस और प्रथम प्रेरितों ने,... अपवित्र लोगो के मध्य में;
कृपालु यीशु का किया प्रचार,... अनुगहित होके तुम भी करो प्रचार ।

7.करो तुम अर्पण हृदयों को,... प्रभु इच्छा पूरी करने को;
उठो प्रभु-सेवा करने को,... दाऊद समान वीर बनों ।

8.यौवन की अभिलाषा त्यागो,... पवित्र प्रभु यीशु के लिए;
प्राण अपने देने से न झिझको,... क्योकि तुम को खरीदा लोहू से ।

9.न कहना कि मैं अब जीवित हूँ,... पर जीवित है यीशु मुझमें;
करो पूर्ण कार्य प्रभु का जग में,... बिताओ जीवन उसके लिए ।

10.हल्लेलूयाह गाते हम साथ उठें,... आश्चर्यकारी प्रभु यीशु के;
आनन्द मगन हो गाते हुए,... समर्पण करे हल्लेलूयाह ।
537 भाईयों और बहिनों अब जागोbhaeeyon aur bahinon ab jaago
‘‘नींद से जाग उठ ।’’ (इफिसियों 5:14)

भाईयों और बहिनों अब जागो सभी,
प्रभु की सेवा का वक्त है अभी ।।

1.नींद से जाग उठने की घड़ी है यही,
विरोधी तुम पर न आएँ कहीं, जागृत हो सेवा करो प्रभु की ।

2.नीच कामों से बरबाद हुए सभी,
सहारा दिया है यीशु ने ही, साथ रहता वही छाया की नाई ।

3.आज्ञा मानों सदा परमेश्वर की,
सेवा करो केवल यीशु ही की, पूरी करो तुम इच्छा प्रभु की ।

4.प्रभु से मुँह मोड़ न रहो कभी,
समय को व्यर्थ न करो कभी, अवसर है बहुमुल्य जानो यह भी ।

5.”जाओ, प्रचारो“ कहा प्रभु ही,
रुकने का कारण फिर क्या है अभी ? पर्वत-समुद्र हट जाते सभी ।

6.‘‘मत डर, मैं हूँ’’ कहा है यीशु ही,
प्रतिज्ञाएँ सारी करता पूरी, आँखों की पुतली सा सम्भालता भी ।

7.पवित्र बुलाहट तुम को है दी,
पवित्र बनों भी तुम सब अभी, दृष्टि रखो नित्य यीशु पर ही ।

8.हल्लेलूयाह गीत गाओ सभी,
यीशु का नाम प्रगट करो अभी, प्रतापी यीशु आता शीघ्र ही ।
538 घोर अन्धकार अब आ रहाghor andhakaar ab aa raha
‘‘हमें उसके काम दिन ही में करना आवश्यक है:
वह रात आने वाली है जिसमें कोई काम नहीं कर सकता ।’’
( यूहन्ना 9:4)

1.घोर अन्धकार अब आ रहा है, अनुग्रह-दिन उपयोग अब तुम करो;
द्वार अनुग्रह का खुला जो है, नम्र मन से तुम आगे बढ़ो ।
द्वार अनुग्रह का खुला जो है, नम्र मन से तुम आगे बढ़ो;
दिन तो बहुत ही भयंकर है, समय को तुम बहुमूल्य जानो ।

2.बंजर भूमी तो बहुत है, देखो जरा तुम अब ध्यान तो दो;
जाओ वहाँ यीशु को दिखाओ, प्रेम का समाचार जाके दो ।

3.कितने आज ऐसे राज्य है, सुवार्ता के जहाँ द्वार बन्द हैं;
द्वार जो अब भी खुले हैं, ज्ञानी तुम बनकर प्रवेश करो ।

4.विश्वासीयों की संगति में, प्रेम, शान्ति और एकता है;
वह दिन बहुत ही शीघ्र आये, ताकि लोग यह गवाही दे ।

5.आनेवाली जो जिम्मेदारी, यह तो बहुत है, जानो प्रियो;
नम्र बनकर पूरी करो, जिससे हम जयवन्त बनें ।

6.हृदयों को हमारे तू भर, प्रेम से अपने है प्रभु;
ताकि वचन सुनाते जाएँ, मसीह का नाम फैलाते जाएँ ।
539 तुम ही, तुम ही, इस जग कीtum hee, tum hee, is jag kee
‘‘तुम जगत की ज्योति हो,
उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके ।’’
(मत्ती 5:14, 16)

तुम ही, तुम ही, इस जग की हो ज्योति;
हो नमक भी तुम पृथ्वी के ।।

1.मनुष्य तुम्हारे भले काम देखकर,... महिमा करें स्वर्गीय पिता की;
तुम इस जगमें चमकते रहो,... दिनता पूर्वक ज्योति फैलाओ ।

2.नगर जो है पहाड़ के ऊपर,... बसा हुआ वह छिप नहीं सकता;
पिता का रूप सम्पूर्णता से,... रख अपने में चमकते रहो ।

3.वचन ईश्वर का तुम्हारी ज्योति,... उस में चल के जीवन बिताओ;
पावन संगति में रह के,... आत्मा से तुम बढ़ते जाओ ।

4.जब तुम मृत्यु की छाया में थे,... स्वर्गीय ज्योति तुम पर चमकी;
तब अंधियारा दूर हो गया,... पवित्र ज्योेति में चलते जाओ ।

5.परदेशी तुम अब नहीं हो,... और मुसाफिर न विदेशी;
पवित्र लोगो के संगी स्वदेशी,... परमेश्वर के घराने के हो गए ।

6.न दिन होगा न कोई रात्रि,... सूरज, चन्दा की न कोई रोशन;,
प्रकाश स्वयं ही प्रभु होगा,... राज्य अपने में युगानुयुग ।

7.प्रभु यीशु ने तुम को तारा,... शान्ति, आनन्द, जीवनदाता;
शक्ति में उसकी बढ़ते जाओ,... गाते जाओ, हल्लेलूयाह ।
540 इस जग का मैं दिपक हूँis jag ka main dipak hoon
‘‘यीशुने कहा, जगत की ज्योति मैं हूँ ।’’ (यूहन्ना 8:12)
‘‘अब (तुम) प्रभु में ज्योति हो ।’’ (इफिसियों 5:8)

इस जग का मैं दिपक हूँ,... जीवन-ज्योत जला दूँगा ।।

1.दीपक हूँ मैं अपने घर का,... मैं रोज जला ही करता हूँ;
मैं जल जलकर अपने घर का,... अन्धियारा दूर भगा दूँगा;
जीवन-ज्योत जला दूँगा ।

2.समाज, नगर भी ख्रिस्त बिना,... सोए से है अंधियारे में;
मैं यीशु मसीह की ज्योति को,... हर कोने में जला दूँगा;
जीवन-ज्योत जला दूँगा ।

3.जो ज्योति मिली प्रभु से मुझ को,... वह त्याग, प्रेम, सत सेवा की;
मैं खुश होकर इस जीवन को,... बलिदान उसे चढ़ा दूँगा;
जीवन-ज्योत जला दूँगा ।
541 इस जग के लिए तू नेis jag ke lie too ne
‘‘तुम पृथ्वी के नमक हो ।’’
(मत्ती 5:13)

इस जग के लिए तू ने,
ईश्वर मेरे, नमक बनाया मुझे;
अद्भुत ईश्वर मेरे, नमक बनाया मुझे ।।

1.नर रूपधारी स्वर्गीय नमक,
घोर पापी मैं था प्रभु,... शुद्ध बनाया मुझे;(2)
अद्भुत ईश्वर मेरे, नमक बनाया मुझे ।(2)

2.यरीहो के जल की नाई था जीवन,
कड़वा जो था मृत्यु की मानिन्द,... स्वादिष्ट बनाया मुझे ।

3.मलिन यह दिल को नया बनाया,
प्रभु मेरे स्वर्गीय नमक से,... भद दिया तू ने मुझे ।

4.औरों के लिए सदा इस जग में,
स्वाद मसीह का चखाने के लिए,... उण्डेल दे तू मुझे ।

5.अनन्त जीवन, शान्ति और आनन्द;
तू ने देकर हे मेरे ईश्वर,... सुरक्षित रखा मुझे ।

6.दीन होकर मैं जो शोकित हुआ था,
त्यागा नहीं परिणित किया,... उत्तम नमक में मुझे ।

7.भुखा मैं तेरी धार्मिकता का था,
तृप्त कर के स्वादिष्ट नमक में,... बदल दिया तू ने मुझे ।

8.लोग जब मिलकर मुझको सताएँ,
अन्धेर कर के गालियाँ देवे,... हल्लेलूयाह गाऊँगा ।
542 दिल में आग जब जलती हैdil mein aag jab jalatee hai
‘‘जीवन के आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की
और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया ।’’ (रोमियों 8:2)

1.दिल में आग जब जलती है,... रुह की आग पवित्र;
रोज-ब-रोज वह बढ़ती है,... करती है परिपूर्ण;
मेरा दिल ओ मन ओ जान,... मैं मसीह का हुआ;
यह सदा का जीवन है,... जय जय हल्लेलूयाह ।

2.दूर हो गया हर एक बन्ध,... यीशु ख्रिस्त के द्वारा;
मैं अब हूँ उसकी सन्तान,... वारिस हूँ खुदा का;
सचमुच अब मैं हूँ आजाद,...  मैं स्वतंत्र हुआ;
था गुलाम पर हूँ आजाद,...  जय जय हल्लेलूयाह ।

3.कुल जहान में अब सुना,... यीशु की खुश खबरी;
जिसने मौत को मार ड़ाला,... अब्दी फतह पाई;
कर ग्रहण अब जीवन को,... जीवन है जो अद्भुत;
देख मुझ को मिल गया,... जय जय हल्लेलूयाह ।

4.अब खुदा की स्तुति हो,... पिता पुत्र आत्मा की;
जिस ने मुक्ति दी हमको,...  और पाप से आजादी;
स्तुति करे हर जबान,... जिस को अनुभव हुआ;
अब पुकारे हर इन्सान,... जय जय हल्लेलूयाह ।
543 जय जय जय जय यीशु प्रभुjay jay jay jay yeeshu prabhu
‘‘प्रभु परमेश्वर वह जो है, और जो था, औे आनेवाला है ।’’
(प्रकाशित 1:8)

जय जय जय जय यीशु प्रभु,
आएगा फिरसे जल्दी तू;
जय जय जय जय यीशु प्रभु ।।

1.पवित्र आत्मा की शक्ति से भर के,
इस दुनिया के छोर-छोर तक,... मेरे गवाह तुम बनोंगे ।

2.आन्द्रियास ने शमौन को बताया,
मसीह हम को मिल गया,... यीशु पास उसे लाया ।

3.फिलिप्पुस सामरिया में जाकर,
वचन प्रभु का देने लगा,... सारे नगर में आनन्द हुआ ।

4.बच्चे हैं हम परमेश्वर के,
दुनिया वश में शैतान के,... प्रेम पिता से करते हैं ।

5.प्रेम के कारण वचन सुनाते,
हिम्मत और दिलेरी है,... यीशु को सब जानेंगे ।

6.क्योंकि वचन ईश्वर का जो है,
मन में हमारे बसता है,... विश्वास प्रेम में हम बढ़ते हैं ।

7.प्रभु यीशु पर विश्वास लाके,
उद्धार हम को मिल गया,... हल्लेलूयाह हम गाते हैं ।
544 जयवन्त बनो तुम भीjayavant bano tum bhee
‘‘जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है ।’’
(1 यूहन्ना 4:4)

1.यीशु मसीह दिलावर है, शैतान से जोरावर है ।(2)
उस के जोर से जितेंगे हम ( जीतेंगे 5),
हम हारेंगे न शैतान से, हम जीतेंगे ।।

2.फौज हमारी थोड़ी है, पर हम में दिलेरी है ।उसके...

3.रुह-ऊल-कुदुस की तेज तलवार, खाली नहीं जिस का वार ।

4.शाह हमारा यीशु है, जिस के खून में कुदरत है ।

‘‘ जो जय पाए वही इन वस्तुओं का वारिस होगा ।’’
( प्रकाशित 21:7)

जयवन्त बनो तुम भी यीशुने कहा,
जय जो पाए वही, मीरास पाएगा ।।

1.जय जो पाए वही, ईश्वर के स्वर्ग से ही;
जीवन के पेड़ में से फल खायेगा,
दूसरी मृत्यु से वह तो बच जाएगा ।

2.गुप्त मान्ना से वह देगा, और एक श्वेत पत्थर;
एक नया नाम उस पर लिखा होगा,
पाने वाले सिवाय कोई न जानेगा ।

3.अन्त तक स्थिर रहकर, काम मेरा जो करेगा;
जाति जाति के ऊपर अधिकार देगा,
राजदण्ड लिए वही राज्य करेगा ।

4.श्वेत वस्त्र पहनाएगा, नाम उस का कभी भी वह;
जीवन की पुस्तक से न काटेगा,
दूत और पिता के सामने मान भी लेगा ।

5.ईश्वर के मन्दिर में भी खम्भा एक वह बनेगा,
बाहर कभी भी फिर से न निकलेगा;
यरूशलेम और ईश्वर का नाम लिखेगा ।

6.साथ अपने उस को मैं सिंहासन पर बैठाऊँगा,
राजमुकुट दूँगा उसे, वारिस होगा;
युग-युग साथ मेरे वह रहेगा ।
545 प्रिय यीशु मसीह के दलवालेpriy yeeshu maseeh ke dalavaale
‘‘यह तो परमेश्वर का दल है ।’’ (उत्पति 32:2)

प्रिय यीशु मसीह के दलवाले, हम सैनिक है, हम सैनिक हैं;
क्रूस कान्धे पर रखनेवाले, हम सैनिक हैं, हम सैनिक हैं ।।

1.बस शान्तिदाता हमारा है,... नम्रता कवच दृढ़ धारा है;
रूहानि शस्त्र हमारा है,... हम सैनिक हैं ।

2.हम नित यीशु पर ध्यान करें,... जीवन अपना बलिदान करें;
मसीह प्रेम पे है मिटनेवाले ।

3.मसीह प्रेम पे वारी जाएँगे,... हम सूखे चने चबाएँगे;
पीछे नहीं पैर हटाएँगे ।

4.दुनिया से नाता तोड़ दिया,... माया का हमने छोड़ दिया;
मन मसीह से अपना जोड़ लिया ।

5.मुक्ति का यही मार्ग माना,... हृदय में प्रण यही ठाना;
आजाद रहें या मर जाना ।
546 त्रिएक प्रभु के नाम परtriek prabhu ke naam par
‘‘जो कोई मेरे पीछे आना चाहे, वह अपने आप से इनकार करे
और अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे हो ले ।’’ (मार्क 8:34)

त्रिएक प्रभु के नाम पर जान अपनी देनी होगी,
सलीब उठाके अपनी खुदी मिटानी होगी ।।

1.भूमि पर गिर के, मर के, दाना फलदार होता... 3(2)
तुम को भी अपनी जिन्दगी ऐसी बनानी होगी ।

2.बन के नम्र तुम रहना, अब्दी जलाल बदले;
अपने यीशु की नाई जिन्दगी बितानी होगी ।

3.यीशु का प्रेम प्याला पी के तू बेखुद हो जा,
शैतान से तुझ को अपनी यारी हटानी होगी ।

4.पीछे मुड़ के न देखो हाथ अपना हल पर धर के;
दुनिया में रह के तुम को दुनिया भुलानी होगी ।

5.जाए तो जान जाए पर न ईमान जाए,
उजडी हुई यह दुनिया मर के बसानी होगी ।
547 प्यारो हिम्मत बान्धोpyaaro himmat baandho
‘‘शान्ति का परमेश्वर शैतान को तुम्हारे पाँवों से
शीघ्र कुचलवा देगा ।’’ (रोमियों 16:20)

प्यारो हिम्मत बान्धो आगे बढ़ो,
क्रूस का लो निशान;
जीतेंगे हम यारो हारेगा शैतान ।।(2)

1.लड़ो, लड़ो फूर्ती करो यीशु है कप्तान,(2)
हिम्मत बाँधो आशा रखो, भागेगा शैतान ।(2)

2.पाप और दुःख में चारों तरफ मरते हैं इन्सान,
दया करो जगत पर वह हुआ परेशान ।

3.घर घर जाकर करो प्यारो यीशु का बयान,
वह है राजा मुक्तिदाता, सब पर मेहरबान ।

4.जल्दी करो सुनाओ सब को यीशु का फरमान,
पापी बचते जाते, लाते जो उस पर इमान ।

5.वचन कहे बैरी शर्माते सुन यीशु का ज्ञान,
लोग मसीह को मानते जाते, हारता है शैतान ।
549 प्रभु को सब मिलकर सराहोprabhu ko sab milakar saraaho
(योएल 2:23-27)

प्रभु को सब मिलकर सराहो,(2)
आओ, प्रभु को सब मिलकर सराहो;(2)
क्योंकि प्रभुने हम से प्रतिज्ञा की है ।।(2)

1.सिय्योनियो यहोवा के कारण मगन हो,
पहली पिछली वर्षा प्रभु से हो ।

2.पृथ्वी तुझ को होगी कभी न निराशा,
क्योंकि यहोवा का महान कार्य होगा ।

3.पेड़ भी अपना मिल कर फल देवेंगे,
अंजीर और दाख अपना फल देवेंगे ।

4.गेहूँ खलिहान में परिपूर्ण होगा,
रसकुण्ड दाखरस टटके तेल से उमड़ेगा ।

5.जिन वर्षो को टिड्डियों ने है खाया,
मैं प्रभु उन हानियों को भर दूँगा ।

6.मुझ यहोवा सिवा परमेश्वर ही नहीं,
आशा मेरी प्रजा की कभी न टूटेगी ।
555 विश्वास सहित आओvishvaas sahit aao
‘‘मसीह यीशु के अच्छे योद्धा की नाई मेरे साथ दुःख उठा ।’’
(2 तीमुथियुस 2:3)

विश्वास सहित आओ... प्रचारें यीशु को ।।

1.अनन्त जीवन पाके... बाईबल हो हाथों में,
पवित्र हृदय से... विजय की कुश्ती लड़ें ।

2.लालसा धार्मिकता की... प्रभु भय हो विश्वासी का,
प्रेम, धीरज धर कर के... विजय की कुश्ती लड़ें ।

3.मुझ अधम पापी से... प्रभु ने है प्यार किया,
प्रभु कृपा पा कर के... विजय की कुश्ती लड़ें ।

4.अंधियारे हृदय को... प्रभु ने प्रकाशित किया,
प्रकाशमान हो कर के... विजय की कुश्ती लड़ें ।

5.स्वर्गीय दर्शन पा के... लिपटे रहें प्रभु से,
विश्वास में दृढ़ होकर... विजय की कुश्ती लड़ें ।

6.अन्यजातियों के मध्य में... और राजाओं के सामने,
ले के नाम मसीह का... विजय की कुश्ती लड़ें ।

7.लेकर मसीह का स्वभाव... सुकर्मो से सजकर,
शूरवीर सूरमा बनकर... विजय की कुश्ती लड़ें ।

8.आत्माओं के उद्धार के लिए... अर्पण करो जीवनों को,
दृढ़ अन्त तक रह कर के... विजय की कुश्ती लड़ें ।

9.पथ पर चलें यीशु के... संकटों को सहते,
आनन्द मग्न हो के... विजय की कुश्ती लड़ें ।
556 नीले गगन में चमकते तारेneele gagan mein chamakate taare
‘‘तुम्हारी ज्योति मनुष्यों के आगे सामने चमके ।’’
(मत्ती 5:16)

नीले गगन में चमकते तारे,
दुनिया में वैसे ही चमके हम;
मीठे सुरो से गाते है पंछी,
यीशु की सनाए गाए हम ।

1.फूलों की खुशबू जैसे कि सारे,... गुलशन को महकाती है;
अपने असर से इस दुनिया के,... गुलसन को महकाएँ हम ।

2.चाँद और सुरज जब जब चमके,... अन्धियारा मिट जाता है;
कर दे उजाला जीवन से अपने,... पापों की रातें मिटाएँ हम ।

3.जलती है बत्ती जब तक कि उसमें,...  तेल दिये का बाकी है;
जब तक हमारी है जिन्दगानी,...  नाम मसीह का फैलाएँ हम ।
557 आओ चलें, हम मिलकर चलेंaao chalen, ham milakar chalen
‘‘हम एक नया आकाश और नयी पृथ्वी की आस देखते है,
जिन में धार्मिकता वास करेगी ।’’ (2 पतरस 3:13)

आओ चलें, हम मिलकर चलें,
उत्तम उस देश में हमें जाना है;
जहाँ धार्मिकता वास करती है ।।

1.आओ हमें अब डरना है, यात्री हैं यह हमें जानना है;
विश्राम में हम को प्रवेश करना है, यदि भूलें तब रहित होना है ।

2.आओ हमें परिश्रम करना है, आज्ञाएँ प्रभु की सब मानना है;
विश्वासयोग्य अन्त तक हमें रहना है, अविश्वासी होकर न गिरें ।

3.आओ दृढ़ता से हम थामे रहें, जो कुछ प्रभु ने हमें सोंपा है;
दुष्ट के हथियार से हमें बचना है, कोई मुकुट हमारा न ले ।

4.आओ हरेक बाधा को हटाएँ, उलझाने वाले पाप को दूर करें;
दौड़ना है हम को धीरज से दौड़े, क्योंकि हमें वहाँ जाना है ।

5.आओ अब सिद्धता की ओर हम बढ़े, पूरा बलिदान हमें करना है;
शोक, दुःख, निन्दा, झूठा दोष सहना है, फल अन्त में पाना है ।
558 ईश्वर के साथ सहकर्मी औरeeshvar ke saath sahakarmee aur
‘‘हम परमेश्वर के सहकर्मी है ।’’
(1 कुरिन्थियों 3:9)

ईश्वर के साथ सहकर्मी और, भागीदार हम को किया;
संगी वारिस हम बनें, यीशु ने यह सब है किया ।।

1.संसार की सड़ाहट से वह, अद्भुत रीति से छुडाया;
कीमती प्रतिज्ञाएँ देकर, स्वर्गीय-स्वभाव का भागी किया ।

2.एक बार हम ने ज्योति पायी, आत्मा का भागीदार बनाया;
दान और वचन हम को देकर, स्वर्ग का वह स्वाद चखाया ।

3.ताकि पवित्रता का हम, भागीदार उस की बने;
कई बार दुःख में गए, परखा और ताड़ना भी दिया ।

4.स्वर्गीय बुलाहट में हमें, भागीदार प्रभु ने किया;
ताकि प्रभु का घर बने, इसलिए प्रभुने चुना ।

5.पिता की हम स्तुति करें, जिस ने हमें योग्य बनाया;
पवित्र लोगों के साथ वह, मीरास में सम्भागी किया ।

6.मसीह के सम्भागी हुए, गुण अपना वह हम को दिया;
दृढ़ता से वह स्थिर रहें, थामें रहें जो कुछ वह दिया ।

7.प्रगट होगी जो महिमा, उस में सम्भागी हम को किया;
जागृत करें सब प्रियों को, क्योंकि प्रभु ने यह कहा ।
559 क्या तू पहिला प्रेमkya too pahila prem
‘‘क्या तू इन से बढ़कर मुझसे प्रेम रखता है ।’’ ( यूहन्ना 21:15)

क्या तू पहिला प्रेम अब छोड़ा है ?
हे प्रिय भाई, आदर्श बनना क्या तू छोड़ा है ?

1.तू ही मेरा उद्धारकर्ता, परमेश्वर का मसीह तू है;
एक दिन यह सब जानता तो था, लेकिन अब देख तू कहाँ है ।

2.यीशु का क्रूस मैं उठाकर करूँगा सेवा, तू कहता था;
साक्षी दूँगा सब के सामने, यही तू तो कहता भी था ।

3.मनुष्य की बातों में तू आया, शरीर की इच्छा पर तू चला;
शक तू किया प्रभु यीशु पर, धन के लालच में तू फँसा ।

4.क्या मैं खाऊँ क्या मैं पीऊँ, क्या में पहनूँ यह तू सोचकर;
गिर गया तू अब विश्वास से, क्या प्रभु को बेच भी ड़ाला ।

5.महल-मकान, जमीन और दौलत, मान और इज्जत, जग की चीजें;
ये सब देखकर मौका लिया, प्रभु से मुँह मोड़कर तू गया ।

6.सेवा में क्या कमी-घटी थी, जिस के कारण पिछे हटा;
जानता क्या तू तेरी दशा पर, प्रभु यीशु रोता रहा ।

7.ज्योति तेरी बुझ न जाए, इस से पहिले सोच-विचार कर;
नम्र होकर प्रार्थना कर, प्रथम प्रेम से सेवा तू कर ।
560 ऐ छोटे झुण्ड़ तुai chhote jhund tu
‘‘हे छोटे झुण्ड़, मत डर, क्योंकि तुम्हारे पिता को
यह भाया है कि तुम्हें राज्य दे ।’’ (लूका 12:32)

ऐ छोटे झुण्ड़ तु कभी भी मत डर,
दयालु पिता बुला रहा है ।।

1.इच्छा है उस की तुम्हें वह राज्य दे,
इसलिए धोया खून से खरीदा;
ऊँचे बुलावे में तुम्हें बुलाया ।

2.राज्य और महिमा स्वर्गीय पिता की,
देने के लिए प्रेम से बुलाया;
चलन इसी के योग्य बनाओ ।

3.सन्तों की मण्डली में तुम को मिलाया,
स्वर्गीय बुलावे में तुम को बुलाया;
अपनी मीरास का भागी बनाया ।

4.अक्षय और निर्मल, अविनाशी है,
तुम्हारे उद्धार की मीरास यही है;
उस ने तुम्हें निश्चय बुलाया है ।

5.ममता न किया पुत्र देने में,
क्या कोई वस्तु रख छोड़ेगा वह ?
देगा वह सब कुछ भरपूरी के साथ ।

6.आत्मा के द्वारा तुम्हें शुद्ध किया,
आँखों को उस ने तुम्हारी है खोला;
ताकि पाओ तुम मीरास सन्तों में ।

7.क्रूस घातित यीशु फिर जी उठा है,
कब्र को जीता सामर्थ देने में;
गाते रहो तुम जय हल्लेलूयाह ।
561 डरना नहीं मैं हूँ कहा हैdarana nahin main hoon kaha hai
‘‘जिसने हमें अपनी महिमा,... के अनुसार बुलाया है ।’’
(2 पतरस 1:3)

डरना नहीं मैं हूँ कहा है,
उद्धारकर्ता यीशु प्रभु ।।

1.अपनी शान्ति वह तुझे देकर, भलाई अपनी दिखाया भी;
उस की दया, प्रेम के लिए, तृप्त होकर स्तुति तू कर ।

2.अनन्त की करुणा अब दिखाकर, अनन्त का उद्धार वह दिया;
विश्वास से खड़ा होेने से, राज्य अनन्त भी वह देगा ।

3.वह मनुष्य नहीं परमेश्वर है, तेरे लिए मनुष्य वह बना;
करुणा से उद्धार के लिए, प्रभु यीशु ने सब कुछ दिया ।

4.तेरे लिए प्रभु मारा गया है, जी उठा सम्भालने को;
शीघ्र प्रभु आ रहा है, बाट जोह रहने साथ सदा ।

5.कैसा भी पाप क्यों न हो, चिन्ता नहीं है विश्वास तू कर;
अद्भुत उद्धारकर्ता यीशुजी, अपना प्राण अर्पण किया ।

6.तेरी यात्रा में बल देने को, अपनी देह से लोहू दिया;
ऐसे प्रेमी के लिए, गाओ तुम सब हल्लेलूयाह ।
562 भय अब नहीं हैbhay ab nahin hai
(अय्यूब 5:19; यशायाह 27:3)

भय अब नहीं है, हमें भय अब नहीं है;
दयालु ईश्वर साथ हमारे, भय अब नहीं है ।।

1.काल, मृत्यु, युद्ध, तलवार इन की शक्ति से;
पृथ्वी पर्वत कांपे, समुद्र भी फेन उठाएँ;
धर्मी यीशु नित्य ही रक्षा करता रहेगा ।

2.शैतान की सब युक्ति पर वह विजय देता है,
निश्चयता में रखकर हमें सांत्वना देता है;
अक्षय यीशु नित्य ही, रक्षा करता रहेगा ।

3.दिन और रात ईश्वर हम को हिम्मत देता है,
इस समय के जीवन को, महिमा में बदलता है;
अविनाशी यीशु नित्य ही, रक्षा करता रहेगा ।

4.क्लेष, संकट, पीड़ा यदि हम पर आ गिरे;
कोई हानि छूने से, वह खुद बचाएगा;
शक्तिमान यीशु नित्य ही, रक्षा करता रहेगा ।

5.गाएँ हम प्रभु के लिए, एक नया गीत;
महिमा राजा हम सभों के लिए आएगा,
प्रभु यीशु नित्य ही, रक्षा करता रहेगा ।
563 हम में डर है नहींham mein dar hai nahin
(अय्यूब 5:19, यशायाह 27:3)

हम में डर है नहीं, अब से हम में डर है नहीं;
हानि अब है नहीं, यीशु ने कहा सही ।।

1.ईश्वर रहित हम थे, महान उद्धार दिया है;
दिन रात हम को ईश्वर बचाएगा ।

2.चाहे शत्रु घेरें, धरती निगलने पर हो;
अनन्त यीशु सदा बचाएगा ।

3.अग्नि परीक्षा जब आएं, साथ रहूँ प्रतिज्ञा की है;
कभी न छोड़े, वही बचाएगा ।

4.बलवन्त प्रभु की भुजाएँ, घेरे मुझे रहती है;
हर दशा में हमें बचाएगा ।

5.ईश्वर कभी न ऊँघेगा, और न वह सोएगा;
आँख की पुतली सा सदा बचाएगा ।

6.जीवन के दुःख संकटो ने, आकर जब हमें घेरा;
ईश्वर की दया तब याद जो आई ।

7.इस जग में जो दुःख है, महिमा में बदलेगा प्रभु;
महिमा दो उस को प्रणाम भी करो ।
564 सन्तों, नहीं डरनाsanton, nahin darana
‘‘उन सभों से जीत जाएगा ।’’ (यशायाह 54:17)

सन्तों, नहीं डरना,... युद्ध है यहोवा का;
निश्चय विजय हमारी,... सन्तों कभी न डरना ।।

1.गरजते सिंह की नाई विरोधी,... तुम्हें फाड़ खाने की खोज में है;
नदी जैसा तुम पर आए तौभी,... युद्ध है यहोवा का, नहीं डरना ।

2.दूध और शहद बहता हुआ,... कनान देश तेरे सामने है;
शत्रु खोजते तुझे मार डालने,... युद्ध है यहोवा का, नहीं डरना ।

3.हथियार चाहे कितने भी बनें,... हानि न तेरी कर सकते वे;
नालिश चाहे कोई तुझ पर करे,... युद्ध है यहोवा का, नहीं डरना ।

4.पृथ्वी और स्वर्ग का सब अधिकार,... प्रभु यीशु ख्रिस्त ही पाया है;
प्रभु है अन्त तक साथ तेरे,... युद्ध है यहोवा का, नहीं डरना ।

5.हियाव बान्धकर स्थिर रह तू,... लडने की तुझे जरुरत नहीं है;
उद्धारकर्ता पर विश्वास रख,... विजय प्रभु की है, नहीं डरना ।
565 पवित्र तुम बनें रहनाpavitr tum banen rahana
‘‘पवित्र बनों, क्योंकि मैं पवित्र हूँ ।’’ (1 पतरस 1:16)

पवित्र तुम बनें रहना, खराई से सदा चलना;
पवित्रता में तुम बढ़ना ।।

1.चाल चलन में, पहिरावे में, ठोकर का कारण नहीं बनना;
प्रश्न चाहे हजार कोई पूछे, हर बात में तुम सदा, पवित्र रहना ।

2.हर जगह में, हरेक काम में, पवित्रता को आदर्श समझना;
हर तरह और हर समय में, हर काम में तुम सदा, पवित्र रहना ।

3.मेल-मिलाप तुम, सब से रखना, एकता और प्रेम को बढ़ाना;
कड़वी जड़ कोई कष्ट अगर देवें, प्रेम से दूर कर के तुम, पवित्र रहना ।

4.स्वर्गीय जीवन है पवित्र, पवित्रता जीवन में दिखाना;
भेषधारी जीवन व्यर्थ है, भेष को दूर रख के तुम सदा, पवित्र रहना ।

5.शुद्ध गवाही सुरक्षित रखती, सिद्ध करती जग में, यह जानना;
शुद्ध विवेक से शुद्ध गवाही, दे कर के तुम सदा, पवित्र रहना ।

6.नीति-ज्योति साथ हो तो, क्षति कभी न होगी, परखना;
धर्मी लोग यह देते गवाही, सच है यही इसलिए, पवित्र रहना ।

7.आत्मा प्राण और देह को, अपने निर्दाष और सुरक्षित रखना;
पाप-दाग या दोष यदि दिखता, क्रूस के लहु से धुल जाना, पवित्र रहना ।
566 यीशु प्रभु साथ अब हैyeeshu prabhu saath ab hai
‘‘जब उन्होंने पतरस और यूहन्ना का हियाव देखा,...
फिर उन को पहचाना कि ये यीशु के साथ रहे है ।’’
(प्रेरितों 4:13)

यीशु प्रभु साथ अब है, हिम्मत से हम बढ़ेंगे;
मार्ग कैसा भी कठिन हो, पीछे नहीं हटेंगे ।।

1.जो चीजें पुरानी थी वो सब कब से बीत गई,
यीशु में नया बनकर नयी बातें कहेंगे;
आज्ञा प्रभु की हमें अद्भुत रीति से मिली,
स्वर्गीय दर्शन जो पाया हम उस को न टालेंगे ।

2.शैतान, संसार, शरीर से सदा हम तो लड़ेंगे,
जो कुछ कीमत देनी हो आनन्द से हम देवेंगे;
युद्ध में जयवन्त होवेंगे शक्ति प्रभु से लेंगे,
विजय के अनुभव में राज्य शैतान का तोड़ेंगे ।

3.चाहे दुःख और रोग भी आए चिन्ता हम न करेंगे,
यीशु नासरी के नाम से तन्दुरुस्ती पायेंगे;
थोड़े दिन की यात्रा में हम न कुडकुड़ायेंगे,
जैसा भी प्रभु रखें सदा सन्तुष्ट रहेंगे ।

4.प्रभु यीशु का जो मन वही हम भी रखेंगे,
ईर्ष्या, क्रोध, विरोध को छोड़ प्रेम से सब को देखेंगे;
हल पर हाथ रखकर हम पीछे नहीं मुडेंगे,
यीशु प्रभु है निशान उसी की ओर चलेंगे ।

5.ये पुराना मनुष्य को क्रूस के द्वारा मारेंगे,
भीतरी मनुष्यत्व में  हम रोज-ब-रोज बल पायेंगे,
आत्मिक ऊँचाई में हम ऊपर की ओर बढेंगे,
शारीरिकता को हम सब मिलकर पाँव से कुचलेंगे ।

6.इस संसार को छोड़ेगें यात्रा पूरी करेंगे,
ऊपर जो हमारा घर पवित्र नगर में पहुँचेंगे ;
प्रभु से हम मिलेेंगे आनन्द से भर जाएँगे,
इनाम उस से पायेंगे सदा साथ रहेंगे ।
567 तंग दरवाजे हो कर कोईtang daravaaje ho kar koee
‘‘सकेत फाटक से प्रवेश करो ।’’
(मत्ती 7:13)

तंग दरवाजे हो कर कोई कोई चलता,(2)
खून-ए-यीशु से दिल अपना कोई कोई रंगता ।।(2)

1.दुनिया का आराम और मजा सारे लोग ढूंढते,(2)
दुःखो में सहभागी होना कोई कोई जानता ।(2)

2.समय पाप में बिताया, जीवन नाश किया भी;
यीशु के पास आ के भाई पापों को धुलवा ले तू ।

3.इबलीस से लड़ाई करना हर दिन मुझे पड़ता,
यीशु के पास आ के ले ले तू सामान युद्ध का ।

4.यीशु की सेवा के लिए जीवन अपना दे दे भाई,
जल जल कर दुनिया में ज्योति यीशु की चमका दे तू ।
568 मैं यीशु के नूर मेंmain yeeshu ke noor mein
‘‘जब तक ज्योति तुम्हारे साथ है तब तक चले चलो ।’’
(यूहन्ना 12:35)

1.मैं यीशु के नूर में साथ चलूँगा,
दिन ओ रात उस के पीछे मैं चलूँगा;
नूर में चलूँगा, पीछे चलूँगा;
यीशु मेरा मुंजी मसलूब ।
चलते चलते नूर में यीशु के साथ,... हल्लेलूयाह;
चलते चलते थामता यीशु के हाथ,
नूर में मैं रहूँगा फतह पाऊँगा;
मैं नूर में चलता चलूँगा ।

2.मैं यीशु के नूर में साथ चलूँगा,
हो अन्धेरी रात मैं न डरुँगा;
पैर उठाऊँगा, दिल से गाऊँगा;
यीशु मेरा मुंजी मसलूब ।

3.मैं यीशु के नूर में साथ चलूँगा,
जब कभी आवाज उस की सुनूँगा;
उस से कहूँगा तुझे सब दूँगा,
यीशु मेरा मुंजी मसलूब ।

4.मैं यीशु के नूर में साथ चलूँगा,
थकते थकते रोज मदद पाऊँगा;
रंज या खुशी हो या नजदीक हो मौत,
यीशु मेरा मुंजी मसलूब ।

5.मैं यीशु के नूर में साथ चलूँगा,
अपनी आँख उस की तरफ लगाऊँगा;
हाथ में है सलीब-झण्डा है अजीब,
यीशु मेरा मुंजी मसलूब ।
569 यीशु के पीछे पीछेyeeshu ke peechhe peechhe
‘‘देख, हम तो सब कुछ छोड़ कर तेरे पीछे हो लिए है ।’’
(मरकुस 10:28)
यीशु के पीछे पीछे चला जा रहा हूँ मैं,

दुनिया को छोड दुनिया से भी जा रहा हूँ मैं ।।(2)

1.जा ते हुए यीशु ने दी थी तसल्ली यह,(2)
आऊँगा तुम को लेने अभी जा रहा हूँ मैं ।(2)

2.यहूदा ने भी की थी साथ तेरे बेवफाई,
पर तेरे साथ बफाई किये जा रहा हूँ मैं ।

3.सूली पर प्यारे यीशु ने की जान कुर्बान अपनी,
जान अपनी भी निसार किए जा रहा हूँ मैं ।

4.जिन्दा होकर मसीह ने गवाह बनाया मुझ को,
पाक रुह से भर कर खिदमत किए जा रहा हूँ मैं ।
570 मैं तो यीशु के पीछे-पीछेmain to yeeshu ke peechhe-peechhe
‘‘ये वे ही है कि जहाँ कहीं मेम्ना जाता है
वे उस के पीछे हो लेते है।’’ (प्रकाशित 14:4)

मैं तो यीशु के पीछे-पीछे चलूँगा,(2)
जहाँ-जहाँ वह जाए वही चलूँगा ।।(2)

1.संसार को छोड़ कर क्रूस उठाकर,(2)
हर रोज उस के मैं पीछे चलूँगा ।

2.यीशु गड़रिए का शब्द सुनकर,
जिधर बुलाए मैं उधर चलूँगा ।

3.अंधेरे नगर के गढ़े से बचकर,
वचन की ज्योति के पीछे चलूँगा ।

4.संसार के चौडे मार्ग को छोड़कर,
जीवन मार्ग में मैं दौड़ा जाऊँगा ।

5.वचन में अन्त तक स्थिर मैं रहकर,
यीशु के राज्य में मैं मुकट पाऊँगा ।
571 है तेरे क्रूस में मेरी शरणhai tere kroos mein meree sharan
‘‘ऐसा न हो कि मैं और किसी बात का घण्मड करूँ,
केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का ।’’ (गलतियों 6:14)

है तेरे क्रूस में मेरी शरण, यीशु प्रभु ।।(2)

1.तुझ निर्दोष के पास जब मैं आया,(2)
पाप और श्रापों को तू ने धोया;(2)
कृपा से निकट तू है लाया ।(2)

2.मेरे हृदय का भार है उठाया,
क्रूस को देखते ही बोझ हट गया;
कृपा से आशीषित मैं हुआ ।

3.मेरे बदले में ताड़ना भी सही,
कि मुझे देवे नित्य शान्ति;
कृपा से उद्धार मेरा हुआ ।

4.निन्दा का पात्र मैं जो बना था,
क्रूस पर तू ने निन्दा को सहा;
कृपा से पवित्र बनाया ।

5.लोहू बहाके मरण को हराके,
शत्रु शैतान पर पूरी जय पाके;
कृपा से विजय में है लाया ।

6.क्रूस को उठा के मैं प्रभु यीशु,
प्रतिदिन तेरे पीछे चलूँगा;
कृपा से बलवन्त है बनाया ।

7.अनुग्रह पर अनुग्रह तुझ से मैं पाके,
बाट जोहूँगा आने की तेरे;
हल्लेलूयाह गाता रहूँगा ।
572 यहोवा ने आश्चर्य काम किएyahova ne aashchary kaam kie
‘‘यहोवा के पराक्रम के कामों का वर्णन कौन कर सकता है ?
उसका पूरा गुणानुवाद कौन सुना सकता है ।’’
( भजन 106:2)

यहोवा ने आश्चर्य काम किए हमारे लिए,
हम अपने सारे दिल से प्रभु की स्तुति करते ।।

1.यहोवा अनुग्रह से मेरी ओर दृष्टि कर ले,
क्षमा कर पाप हमारे तू अपनी दया से सारे ।

2.स्वर्गीय दर्शन यीशु जो तेरा मैं ने पाया,
भूलूँगा मैं न उस को अनुग्रह अपना दे जा ।

3.शत्रु सतानेवाला अधिक मुझे सताता,
हिम्मत न मैं हारूँगा, बलवन्त अपने में बना जा ।

4.मैं तेरा साक्षी बन के गवाही दूँगा जग में,
पवित्रता अपनी तू उदारता से मुझे दे ।

5.महिमा तेरे नाम की प्रगट करूँगा जग में,
स्पष्ट रीति से हे प्रभु शक्ति मुझे दिखा दे ।

6.तुझ मेें बना रहकर मैं फलवन्त सदा रहूँगा,
हे सत्यता के आत्मा, जीवन भरपूर दे अपना ।

7.मुझ मूढ़ को हे प्रभु आत्मा की आग से भर दे,
हल्लेलूयाह सर्वज्ञानि ज्ञान अपना तू मुझे दे ।
573 हल्लेलूयाह! होशन्ना!hallelooyaah ! hoshanna !
‘‘जो बातें पीछे रह गई है उन को भूलकर आगे की बातों की
ओर बढ़ता हुआ... ।’’ ( फिलिप्पियों 3:13)

हल्लेलूयाह ! होशन्ना !
स्तुति प्रशंसा प्रभु की करें ।।

1.शरीर को जीवित बलिदान कर के,
क्रूस की जो दौड़ है पूरी कर के;
प्रभु की सेवा निःस्वार्थ प्रेम के साथ,
आत्मा सच्चाई से पूरी करें ।

2.विश्वासयोग्य हम रहें सदा,
प्रभु के प्रेम में बने रहें;
आशा से भरपूर और निर्निमेष आँखों से,
ख्रिस्त के उस दिन को देखते रहें ।

3.जागते रहें हम जो सन्त हैं यहाँ,
प्रार्थना में सदा लगे रहें;
प्रयत्न करने में सुस्ती न करें,
आत्मिक जोश से हम भरे रहें ।

4.बीती हुई बातों को आओ भूलें,
नया प्रकाश और उत्साह ले;
स्वर्गीय इनाम को लेने के लिए,
निशाना देख कर आगे बढ़ें ।
574 पीछे यीशु के चलूँगाpeechhe yeeshu ke chaloonga
‘‘इसलिए हम स्तुतिरुपी बलिदान परमेश्वर के लिए
सर्वदा चढ़ाया करें ।’’ (इब्रानियों 13:15)

उपकार की भेटें अपनी,
प्रभु को चढ़ाना है ।।(3)

1.जो भी हमारा प्रभु का सारा(2), जिस का उस को देना है;(2)
भंड़ारी हम प्रभु के जग में, दसवां ही लौटाना है ।(2) ... प्रभु

2.ख्रिस्त प्रभुने स्वर्ग को त्यागा, हम को प्रेम दिखाना है;
हिस्सा दो प्रभु को जो कुछ हो, निज भेंटें भी लाना है ।

3.ईश्वर की है कृपा भारी, हम को धन्य मनाना है;
सारा जीवन दे दो प्रभु को, तब आशीषें पाना है ।

‘‘जब वह बूलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया
जिसे मीरास में लेने वाला था और यह न जानता था कि
मैं किधर जाता हूँ ।’’ (इब्रानियों 11:8)

1.पीछे यीशु के चलूँगा,... चाहे दुःख में रास्ता हो;
घाटी और पहाड, मैदान में,... अगर मुझे जाना हो;
दिली खुशी से चलूँगा,... जहाँ गए उस के कदम;
जानता हूँ कि यही रास्ता,... जाएगा यरूशलेम ।

2.इसलिए मैं पूछता नहीं,... ”रब्ब कहाँ ले जाता है ?“
झिझकँूगा न यहाँ कभी,... यीशु राह दिखाता है;
हुकुम मानकर उस के पीछे... चलूँगा दीनताई से;
क्योंकि उस की सिद्ध इच्छा,... भली है मेरे लिए ।

3.दुनिया गर मुझे लुभाए,...  फानी चीजों से यहाँ;
और गुनाहों में उलझाए,...  दे तकलीफ मुझे हर आन;
कर आजाद मुझे खुदा,... आत्मा, प्राण और बदन में;
ताकि तेरी सेवा करूँ,... रहूँ तेरी इच्छा में ।

4.ले खुदावन्द इच्छा मेरी,... अपनी इच्छा में छिपा;
जब मैं दौड़ में थकुं कभी,... मेरी हिम्मत को बढ़ा;
उमर भर मैं तेरे पीछे,... चलूँगा धार्मिकता से;
तब खुश रहूँगा जलाल में,... तेरी पाक संगति में
575 यदि यीशु पीछे जाता हैyadi yeeshu peechhe jaata hai
‘‘अपने शरीरों को जीवित, पवित्र और परमेश्वर को भावता
हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ ।’’ (रोमियों 12:1)

तुम प्यारे प्रभु की सेवा में अपने को दान करो,
तुम हो प्रभु की पवित्र प्रजा, उस की तुम सेवा करो ।।

1.अन्धकार से जीवन में, वह रोशनी ले आया;
उस रोशनी में हम ने, एक मार्ग नया पाया;
जीवन तुम्हारा उस के लिए जीवन बलिदान करो ।

2.कल तुम जो भटकते थे अनजान-सी राहों में,
वह तुम को बचा लाया, उस प्यार की बाहों में;
प्यार उस का है कितना अद्भुत, उस को तुम याद करो ।

3.है याद तुम्हें प्यारो, तुम जन्में पापों में;
पापों की माफी दे दी, उस के पवित्र लोहू से;
अब मन तो प्रभु का मन्दिर है, नित्य उस को ध्यान करो ।

4.सेवा जो करे उस की, फल पाएगा वह अन्त में;
यह कैसा बड़ा मान है, न औरों ने पाया है;
आभारी होकर चरणों में, उस की बड़ाई करो ।

‘‘और उस के कारण मैं ने सब वस्तुओं की हानि उठाई और
उन्हें कूड़ा सा समझता हूँ कि मैं मसीह को पाऊँ ।’’
(फिलिप्पियों 3:8)

यदि यीशु पीछे जाता है तो प्राण जाने दे,
झूठी दोस्ती संसार की, जवान जाने दे ।।(2)

1.यीशु मुर्दे जिलाए शब्द बोल-बोल कर,(2)
ऐसे प्रभु का न मन से प्रेम जाने दे । (2)

2.यीशु कष्ट उठाने आया स्वर्ग छोड़कर,
ऐसे प्रेमी का न मन से प्रेम जाने दे ।

3.उस के क्रूसवाले दुःख में सहभागी होकर,
ऐसे यीशु पीछे प्राण बलिदान जाने दे ।
576 यीशु के पीछे कौनyeeshu ke peechhe kauna
577 जाओ, करो प्रचार जग मेंjao, karo prachaar jag mein
‘‘मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है ।’’
(2 कुरिन्थियों 5:14)

आभारी हूँ सिर मैं झुकाऊँ, जीवन अर्पण मैं करता हूँ;
अमूल्य भेट इससे अधिक क्या ? सम्पूर्ण जीवन मैं सौंपता हूँ ।।

1.दूर जब जाता हूँ प्रभु के प्रेम से, घायल होता प्रभु का मन;
अब न जाऊँगा छोड़ तुझ को दूर मैं, सदा तेरे पास रहूँगा मैं ।

2.मन मेरा खिंचता जग के विभव से, अभिलाषा जो बाधा मेरा;
मसीह के अद्भुत प्रेम के लिए ही, सब बाधा को छोड़ता हूँ मैं ।

3.प्रेम है अगाध, प्रभु जो तेरा, सामर्थ हीन हूँ वर्णन के मैं;
सदा तक मैं सेवा करूँगा, ऋणी अब हूँ तेरा जो मैं ।

4.जग के लिए जीऊँ न मैं अब, न जीऊँगा अपने लिए;
तुझे मैं छोड़ जाऊँ कहाँ अब, ये छोटा जीवन देता हूँ मैं ।

5.दुखित होकर पछताता हूँ मैं, बीतें दिनों के सब पापो से;
बाकी जीवन आभारी होकर, अर्पण करता हूँ सेवा में मैं ।

‘‘तुम सारे जगत में जाकर,... प्रचार करो ।’’ (मरकुस 16:15)

जाओ, करो प्रचार जग में,
ख्रिस्त की जय जयकार जगत में ।।

1.नगर-नगर और घर-घर जाकर,... गाओ मसीह का प्यार जगत में ।

2.यीशु बिना उद्धार नहीं है,... कह दो यह ललकार जगत में ।

3.चेले हैं यदि यीशु मसीह के,... उस का करें स्वीकर जगत में ।

4.क्रूस के अनुपम प्रेम बराबर,... और नहीं हैं प्यार जगत में ।

5.निश्चय यह मानो तुम प्यारो,... मिलता है उद्धार मसीह में
578 मुल्क तो है मसीहmulk to hai maseeh
‘‘अपने भण्डारीपन का लेखा दे... ।’’ (लूका 16:2)

भूल न जाना तू, न्याय के उस दिन को;
आता है मालिक हिसाब सब लेने को ।।

1.कितना लाभ हुआ और कितनी हानि,
देख ले हिसाब तू कर के सावधानी;
सब कुछ देखेगा वह न्याय की आँखो से,
तैयार रख सब उस को देने को ।

2.जो तोड़ा उस ने तुझ को सोंपा था,
क्या कुछ बढ़ाया या गाड़ के रखा;
लेगा लेखा तुझ से बहुत ही खराई से,
बहाना कोई नहीं खुद को बचाने को ।

3.एक हाथ ईश्वर का दीवार पर कुछ लिखा,
मने, मने तकेल, ऊपर्सीन ये शब्द था;
तौला गया तू तो लेकिन कम हुआ,
अचानक विनाश आएगा तुझ को फंसाने को ।

4.देख पेड़ की जड़ में कुल्हाडा लगा है,
काट के गिराएगा वह यदि फल न पाए;
बिनती मसीह करता और थोड़ा जीए,
ताकि तू फले, आनन्द हो पिता को ।

5.क्या तू मूर्ख कुँवारियों की नाई जीता ?
कहेगा प्रभु तुझ से मैं नहीं जानता,
द्वार बन्ध हो जाएगा हमेशा के लिए;
जाग जा नींद से, क्षमा माँग प्रभु से ।

6.इन सब बातों से आज खुद को परख ले,
सच्चे हृदय से अब पश्चाताप कर ले;
अर्पण तू कर दे सब यीशुजी के हाथ में,
प्रेम से वह थामेगा, उठाएगा तुझ को ।

‘‘अपने भाईयो, बेटो, बेटियो, स्त्रियो और घरों के लिए लड़ना ।’’
(नहेमायाह 4:14)

1.मुल्क तो है मसीह उठो हो तैयार,
हे कप्तान मसीह, वह सिपाह सालार;
वायदा है सही सुनो यह पुकार,
फतह है यहोवा की ।
जगत को मसीह के लिए जीतेंगे, हल्लेलूयाह;
उठो ऐ जवानों ! लो हथियार सम्भालो !
फतह अब यीशु में ।

2.रूहें हो आजाद मौत की ताकत से,
और मिले नजात सब गुनाहों से;
खत्म हो फसाद सब के दिलों में,
फतह है यहोवा की ।

3.आ रही है रात, दिन हुआ तमाम;
मिलकर दो एक साथ सुलह का पैगाम,
यह यकीनी बात, हारेगा शैतान;
फतह है यहोवा की ।
579 यीशु के सिपाहीyeeshu ke sipaahee
‘‘अब तुम्हारे लिए नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुँची ।’’
(रोमियों 13:11)

उठो, जागो मसीहियो सुबह हो गई;
निश्चित सोने से जानें तबाह हो गई ।।

1.सुबह हुई आराधना को जाने लगे,
अनन्त जीवन मसीह से पाने लगे;
जब से यीशु के चरणों में आने लगे ।

2.सच्चे वचन के मोती बिथराए जाते है,
हम तो जाते हैं, तुम को जगाए जाते हैं;
लोग शैतान शत्रु के आधीन होने लगे ।

3.ऐ पापी तू फिरता रहा उमर भर,
करता रहा तू दुनिया में बुरे करतब;
इसलिए तू प्रभु से अलग हो गया ।

4.सुबह हो गई तू अब तक क्यों सोता है ?
निश्चिन्त नींद में क्यों वक्त खोता है ?
इस सुस्ती में जानें तबाह हो गई ।

‘‘सिपाही लड़ाई पर जाता है,...
कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे ।’’
(2 तिमुथियुस 2:4)

यीशु के सिपाही कदम तू बढ़ाए जा,
आगे बढ़, इंजील को दुनिया में फैलाए जा;
रोशनी चमकाए जा,... यीशु के सिपाही ।।

1.इबलिस से यह जंग है, वक्त तेरा तंग है;
यीशु तेरे संग है, सलीब को उठाए जा;
फतह उस से पाए जा ।... यीशु के

2.मुश्किलें हजार हो, पहाड़ हो या गार हो;
हर किस्म के भार को, यीशु को बताए जा;
ताकत उस से पाए जा ।

3.बन्दा एक सिपाही है, जिन्दगी भी पाई है;
यीशु की गवाही है, फतह उस से पाए जा;
गीत उस के गाए जा ।

4.शैतान को शिकस्त हो, हौसला न पस्त हो;
अपनी जिन्दगी से तू, यीशु को दिखाए जा;
रोशनी फैलाए जा ।
580 हम सिपाही बादशाह केham sipaahee baadashaah ke
‘‘तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को
सुसमाचार प्रचार करो ।’’ (मरकुस 16:15)

जाओ ! जाओ ! हे मेरे चेलों करो प्रेम प्रचार ।।(2)

1.जब मेरी इंजील सुनाओ, कुछ न लीजो साथ;(2)
प्रेम रहे हृदय में हरदम, प्रेम ही है दरकार ।(2)

2.गाँव, बस्ती, शहर-ब-शहर, जीतने हैं दुनिया में;
जंगल, पर्वत, नदी और नाले जाइयो सब के पार ।

3.‘पिता-पुत्र का प्रेम दिखाओ’, भरसागर के बीच;
‘प्रेम की नैया प्रेम खिवैया’, प्रेम करेगा पार ।

4.जब तुम से मुकाबिल आए, दुनिया का सरदार;
‘प्रेम का ही हथियार उठाना’, प्रेम का करना वार ।

5.खौफ न करना, कभी न डरना, मैं हूँ हरदम साथ;
प्रेम का बन्दा, प्रेम बना है, प्रेम ही प्रेम पुकार ।

‘‘जब तू अपने शत्रुओं से युद्ध करने को जाए,
तब उन से न डरना, तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग है ।’’
( व्यवस्था 20:1)

1.हम सिपाही बादशाह के सब ही,... फतह पाते बढ़ते आगे;
यीशु साथ है वायदा है सही,... कलाम से देता जोर;
दुश्मन के खिलाफ हम बढ़ें,... झण्डा हो उस की सलीब;
जोर दिलेरी देने के लिए,... खुदावन्द है करीब ।

2.जो सिपाही वफादार रहे,... अब आराम वे सब हैं पाते;
इतमिनान के मुल्क में वे पहुँचे,... और करते इन्तिजार;
फूँकता है जंग का नरसिंगा,... उठो ! सुनो ! हो तैयार;
जी से लड़ो ! थोड़ा वक्त रहा,... फिर कामिल इतमिनान !

3.रुहों को गुनाह से तुम बचाओ,... दो रिहाई की खुश खबरी;
उन को जो गिरते है अब उठाओं,... और लाओ रब्ब के पास;
अबदी सब्त का आराम है,... जंग यहाँ तमाम हो;
जल्द हम जमा हर जगह से हों,... तब देखें यीशु को ।
581 हम हैं सिपाही यीशु केham hain sipaahee yeeshu ke
‘‘यही परम धन्य परमेश्वर की महिमा का सुसमाचार है,
जो मुझे सौंपा गया था ।’’ (1 तीमुथियुस 1:11)

तुम यीशु के एलची हो, दुनिया को खुश खबरी दो ।।

1.हाथों में इंजील मुकद्दस, लेकर आगे बढ़ना है;
बहर-ओ-बर को चीर के सैना के सिरों पर चढ़ना है,
खोफ न हरगिज हो ।(2)

2.याद है तुम को हुक्म खुदा का, किस हद तक माना तुम ने;
दुनिया की हदों तक उस के नाम को ले जाना तुम ने,
सुन लो, फिर सुन लो ।

3.नूर हो तुम नूर के फरजन्द, दुनिया में लहराओ तुम;
चरणी के मासूम मसीह को दुनिया में चमकाओ तुम,
हर दिन रोशन हो ।

‘‘मसीह यीशु के अच्छे सिपाही की नाई मेरे साथ दुःख उठा ।’’
(2 तीमुथियुस 2:3)

1.हम हैं सिपाही यीशु के,... फतह में बढ़ते हैं आगे;
हाथ में रुह की तेज तलवार,... जिस से है दुश्मन की हार;
लड़ने से हम को रोके कौन ?... कि यीशु है सरदार, कप्तान;
उस के नाम में बढ़ेंगे,... और हमेशा जीतेंगे ।
जल्द दुनिया को छोड़ेंगे,... और जंग होगी बन्ध;
तब आसमान मैं पहुँचेंगे,... होकर फतहमन्द;
जितने जंग में रहेंगे,... यहाँ वफादार;
बाप के हाथ से पाएँगे,... फतह का इनाम ।

2.ढ़ाल हम विश्वास की लेकर के,... शैतान का सामना हम करते;
बाँधते रब्ब के सब हथियार,... जिन में मिलती एक तलवार;
उस के कलाम के हुक्मों को,... मान कर बढ़ते निडर हो;
यीशु देता है फतह,... हाँ, हर रोज हल्लेलूयाह ।

3.क्या तुम लड़ाई में हो हारते,... या कभी पीछे हो हटते ?
यीशु सामर्थ देवेगा,... और एक प्रतापी फतह;
तब खुशी तारीफ हम्द के साथ,... अन्धकार को तुम करो नाश;
खोए हुओं को बचाओ,... सनातन ज्योति में ले आओ ।
582 ताक मसीह की ओरtaak maseeh kee or
‘‘क्योंकी यह तो हम से हो नहीं सकता कि जो हम ने देखा
और सुना है वह न कहें ।’’ (प्रेरितों 4:20)

इंजील मुकद्दस को दुनिया में फैला देंगे,
हर दिल में मसीहत की एक आग लगा देंगे ।।(2)

1.रहबर जो मसीहा है फिर जान का डर क्यों हो ?(2)
मसीहा के बन्दों को शैतान का डर क्यों हो (2)
हम प्यार मसीहा का हर दिल मेें बसा देंगे ।(2)

2.ताकत से मसीहा की इबलीस को मारेंगे,
और जोश भरे दिल से हम नारे मारेंगे;
हर कदम-कदम पर हम मसीह को पुकारेेंगे ।

3.यीशु मसीह, लोगों जब दुनिया में आएगा,
शैतान ताबे जालिम इस दुनिया से जाएगा;
मसीह-नाम का हम झण्डा दुनिया में लहरा देंगे ।

4.अखतर वह प्रीतम भी गुण उस के गाते हैं,
और जोश भरे दिल से पैगाम सुनाते हैं;
अब जाग उठे हैं हम कुछ कर के दिखा देंगे ।

5.हो जाएगी जब दुनिया आबाद मसीहियों की,
गूंजेगी जमाने में आवाज मसीहियों की;
हरदर्द भरे दिल को दिल शाद बना देंगे ।

‘‘मसीह की ओर ताकते रहें ।’’ ( इब्रानियों 12:2)

1.ताक मसीह की ओर तू दुःख से जो उदास,
दुःखी वह भी हुआ, आ तू उस के पास;
तेरा दुःख उठाया उस ने अपने पर,
ताकि मसीह की ओर तू, उस पर आसरा धर ।

2.ताक मसीह की ओर, तू युद्ध में लड़नेहार;
कठीन हो लड़ाई, झिलम है तैयार;
बैरी बहुत होवें, कुछ न हो सहाय;
ताक मसीह की ओर तू, वही देगा जय ।

3.ताक मसीह की ओर तू कुशल के समय,
जागता रह कि सुख में जोखिम बड़ा है;
कुशल इस संसार का मिटने वाला है,
ताक मसीह की ओर तू, अटल वही है ।

4.ताक मसीह की ओर तू थका माँदा,
मिलेगी मसीह पास शान्ति तुझ को;
जेवनार तैयार है, शुद्ध कर अपने को,
ताक मसीह की ओर तू, अनुगामी हो ।
583 यीशु को मैं सब कुछ देताyeeshu ko maim saba kuchha detaa
584 क्या मैं खाली हाथ से जाऊँkya main khaalee haath se jaoon
‘‘हे प्रभु हम किस के पास जाएँ अनन्त जीवन की बातें तो
तेरे ही पास हैं ।’’ (यूहन्ना 6:68)

प्रभु यीशु के चरणों से भटककर मैं किधर जाऊँ ?(2)

1.मैं हर्षित मन से आता हूँ, हृदय की भेंट लाता हूँ;(2)
बीते दिनों में हे प्रभु(2), तू ने मुझ को सम्भाला है ।(2)

2.अनुग्रह का वचन देकर, प्रभु तू ने सम्भाला है;
संकट क्लेश में साथी बनकर, प्रभु तू ही ले आया है ।

3.अनुग्रह के सिंहासन से, बिनती प्रभु मेरी सुन ले;
हर एक घड़ी और हर पल में, प्रभु भय मानूं तेरा मैं ।

4.प्रभु यीशु मैं आता हूँ, जीवन अर्पण मैं करता हूँ;
मेरे जीवन से है प्रभु, सेवा अपनी करा ले तू ।

‘‘मुझ को कोई छुछे हाथ अपना मुँह न दिखाए ।’’
(निर्गमन  23:15)

1.क्या मैं खाली हाथ से जाऊँ, अपने प्यारे यीशु पास ?
उस की सेवा मैं न करुँ, तो मैं रहूँगा उदास ।
क्या मैं खाली हाथ से जाऊँ,
अपने प्यारे यीशु पास ?
एक भी आत्मा ले न जाऊँ,
उस का सेवक हो के खास ?

2.मौत गर भी, मुझ पर आवे, उस से मैं न डरूँगा;
लेकिन खाली हाथ गर जाऊँ, ठण्ड़ी साँस मैं भरूँगा ।

3.जितने दिन गंवाया पाप में, अफसोस हूँ, अफसोस कमाल;
अब मैं मुंजी के कदम पर, रखता हूँ ये जान-ओ-माल ।

4.ऐ मसीह के विश्वासीयों, ऐ मसीही भाईयो;
इस से पहिले मृत्यु आवे, प्राणों को बचाइयो ।
585 प्रभु तेरा हूँ तेरे वचन सेprabhu tera hoon tere vachan se
‘‘हम सच्चे मन से परमेश्वर के समीप जाए ।’’
(इब्रानियों 10:22)

1.प्रभु तेरा हूँ तेरे वचन से,... तेरा प्रेम पहचानता हूँ;
मेरी कामना है कि विश्वास से मै जा के तेरे पास रहूँ ।
रख तू मुऽऽऽझ को, मुऽऽऽऽझ को, मुझ को हे मसीह;
अपने क्रूस के सोते पास,
रख तू मुऽऽऽझ को, मुऽऽऽऽझ को, मुझ को हे मसीह;
अपने घायल पांजर पास ।।

2.आत्मा भेज, कर शुद्ध, सेवा योग्य बना, मुझ को सेवा में लगा;
मेरा मन कर स्थिर, मेरी इच्छा को अपनी इच्छा में मिला ।

3.अपनी प्रार्थना में जैसे मित्र से, वैसे तुझ से बात करुँ;
एक घड़ी भी जो तेरा साथ मिले, तो महा-आनन्दित हूँ ।

4.सब से गहरा प्रेम मैं न जानूँगा, जब तक स्वर्ग न पहुँचुंगा;
सब से श्रेष्ठ आनन्द तब मिलेगा, जब तुझ को साक्षात देखूँगा ।
586 प्रभु मेरा जीवन लेprabhu mera jeevan le
1.प्रभु मेरा जीवन ले,... तेरा हो यह अभी से;
ले समय कि वह भी तो,...  तेरी स्तुति करने को ।

2.ग्रहण कर इन हाथों को,... इन से तेरी सेवा हो;
मेरे पाँव भी योग्य कर,...  काम करे वे जीवन भर ।

3.वाणी ले, कि तेरी ही,... गाऊँ स्तुति, प्रभुजी;
ले होठों को भर संदेश,... कि सुनाऊँ देश विदेश ।

4.मेरा सोना-चाँदी ले,... कुछ न रख छोडूं तुझ से;
बुद्धि-ज्ञान जो हो मेरे,... अब तू अपने वश में ले ।

5.इच्छा को भी वश में कर,... तेरी रहे जीवन भर;
ले तू मेरा मन मलीन,... कि तुझ में ही हो लौलीन ।

6.मेरा हृदय का सारा,... प्रेम, हे प्रभु हो तेरा;
ग्रहण कर, मैं रहूँगा,...  तेरा, सदा सर्वदा ।
587 क्रूस के पास तू मुझे रखkroos ke paas too mujhe rakh
‘‘लोहू के द्वारा निकट हो गए हो ।’’
(इफिसियो 2:13)

1.क्रूस के पास तू मुझे रख,... यीशु प्यारे त्राता;
पापी वहाँ सोते से,... मुफ्त में मुक्ति पाता ।
क्रूस की मैं, क्रूस की मैं,... नित बढ़ाई करूँगा;
जब तक मैं आनन्दित हो,... पार न पहुँचूंगा ।।

2.क्रूस के पास जब आया मैं,... प्रेम और कृपा पाई;
वहाँ किरण सूर्य की,... मेरे दिल में आई ।

3.तेरी दया क्रूस के पास,... सदा मुझे रख;
और सदा मेरे ऊपर,... क्रूस की छाया रहे ।

4.क्रूस के पास मैं ठहरुँगा,... नित भरोसा रख के;
जब तक मैं न देखूँगा,... हर्ष को तेरे घर के ।
588 उठो ! मसीह के लिएutho ! maseeh ke lie
1.उठो ! मसीह के लिए,... हे क्रूस के योद्धाओ;
झण्डे को रखो ऊँचा,... न उसे झुकने दो;
ख्रिस्त जय पर जय दिलाता,... सेना बढ़ाएगा;
जब तक सारे शत्रु वह,... आधीन न कर लेगा ।

2.उठो ! मसीह के लिए,... प्रहरी चिताता है;
निश्चिन्तता से है हानि,...  उठ, छोड़ आलस और भय;
बुराईया हटा दो,... मनों से और आसपास;
लड़ो प्रभु के नाम में,... कि शत्रु हो सब नाश ।

3.उठो ! मसीह के लिए,... तुरही के शब्द को सुन;
चलो इस महायुद्ध में,... आ जय दिवस को चुन;
आज्ञाँए उस की मानों,...  कि शत्रु है अनेक;
जोखिम में साहस पाओ,... और लड़ो वीरता से ।

4.उठो ! मसीह के लिए,... और उस में हो सबल;
मनुष्य की सारी शक्ति,... सामने उस के निर्बल;
आत्मा के शस्त्र बाँधो,... सब कुछ हो प्रार्थना से;
अब चलो हो उपस्थित,... युद्ध जहाँ ही बढ़े ।

5.उठो ! मसीह के लिए,... युद्ध थोड़ी देर का है;
संग्राम का शब्द आज सुनते,... कल जयनाद सुनेंगे;
जो अन्त में जय पाएगा,... वह मुकुट पाएगा;
वह संग सनातन राजा,... सदा राज करेगा ।
589 लड़ो तुम शैतान सेlado tum shaitaan se
‘‘जो जय पाए मैं उसे उस जीवन के पेड़ में से ...
फल खाने को दूँगा ।’’ (प्रकाशित 2:7)

1.लड़ो तुम शैतान से,... कि हारता है पाप;
जय पाने से तेरा,... बढ़ेगा प्रताप;
बल से बढ़ते जाओ,... सारे उस के दास;
ताकते उस को रहो,... वह रहेगा पास ।
अब मसीह से तुम माँग लो,
शान्ति, रक्षा और बल को;
उस पर आशा तुम रखो,
वह रहेगा पास ।।

2.दुष्टों की मित्रता,... से दूर ही रहो;
परमेश्वर के नाम को,... व्यर्थ कभी न लो;
प्रेम, सत्य का तुम में,...  हो सदा निवास;
ताकते उस को रहो,... वह रहेगा पास ।

3.तब मिलेगा मुकुट,... जो पाएँ विजय;
विश्वास ही के द्वारा,... जय होगी निश्चय;
तब हमारा त्राता,... देगा एक मीरास;
ताकते उस को रहो,... वह रहेगा पास ।
590 सेवा में सेवा में हमseva mein seva mein ham
‘‘काम करो क्योंकि मैं तुम्हारे संग हूँ ।’’
( हाग्गै 2:4)

1.सेवा में सेवा में हम नित तत्पर रहें,
और यों ख्रिस्त के आदेशों को पूरा करे;
लेके शक्ति उस से और यों हो के बलवान,
सारे जग में प्रचारें कि, मुफ्त मिलता त्राण ।
करो काम शक्ति भर, करो काम धीरज धर;
रख के आस और विश्वास, तन-मन से काम कर यीशु का ।।

2.सेवा में, सेवा में, भूखों को तू खिला,
और सब प्यासों को जीवन के सोते पर ला;
लेके क्रूस ही को हम करें ख्रिस्त का बयान,
सारे जग में प्रचारें कि, मुफ्त मिलता त्राण ।

3.सेवा में, सेवा में, हम सभी हो बलवान;
कि अन्धेरे की शक्ति पर हों हम जयवान;
ले के यीशु का नाम जो है श्रेष्ठ सर्वप्रधान,
ऊँचे शब्द से पुकारें कि, मुफ्त मिलता त्राण ।

4.सेवा में, सेवा में, रहे विश्वासी हम;
तो प्रभु सेे मिलेगा मुकुट अनुपम;
सारे सन्तों के संग जा के रहेेंगे हम,
यहाँ गाएँगे हर्ष से कि, मुफ्त मिलता त्राण ।
591 भोर के समय बोतेbhor ke samay bote
1.भोर के समय बोते,... दया-रूपी बीज हम;
धूप में, संध्या तक भी,... करते परिश्रम;
पर धीरज से कर के,... फल की राह हम देखते;
कटनी में आनन्द से,... फल बटोरेंगे ।
श्रम का पूरा फल,
श्रम का पूरा फल;
लाएँगे आनन्द से,
श्रम का पूरा फल ।।

2.धूप में बीज हम बोते,... छाया में भी बोते;
बादल से न ठंड से,... साहस छोड़ेंगे;
कटनी के समय फिर,... फल पका मिलेगा;
कटनी में आनन्द से,... फल बटोरेंगे ।

3.स्वामी के लिए हम... रोते हुए बोएँ;
यदि हानि देख के,... चिन्ता हम करें;
दुःख समाप्त जब होगा,... प्रतिफल वह देगा;
तब आनन्द से श्रम का,... फल हम पाएँगे ।
592 इंजील को फैलानाinjeel ko phailaana
‘‘परमेश्वर ने हमें उन्हें सुसमाचार सुनाने के लिए बुलाया है ।’’
(प्रेरितो 16:10)

इंजील को फैलाना,... यह काम हमारा है;(2)
मुंजी के जमाने में,... यह नाम पियारा है ।।(2)

1.छेड़ेंगे वही नगमें (2),... कि जिन के इशारें पर;(2)
तकलीफों का क्या कहना (2),... मरना ही गंवारा है ।(2)

2.कान्धों पर सलीबें हो,... इंजील हो हाथों में;
दुनिया को बता देंगे,... यीशु ही कफ़ारा है ।

3.त्रिएक के नारे फिर,... गूंजेंगे आकाशों में;
इबलीस हुआ हैरान,... इस जोश से मारा है ।

4.नबियों में तेरी इज्जत,... और मान फिरिश्तों में;
आँखों का वह तारा है,... सुबह का सितारा है ।

5.हम खून का हर कतरा,... हँस हँस के बहा देंगे;
दिल इस से रोशन है,... एहसान यह भारी है ।
593 अनादि ईश्वर आश्रय हैanaadi eeshvar aashray hai
‘‘अनादि परमेश्वर तेरा गृहधाम है और नीचे
सनातन भुजाएँ है ।’’ (व्यवस्था 33:27)

अनादि ईश्वर आश्रय है,
भुजाएँ उसकी तेरा आधार है;
अनन्त और सच्चा परमेश्वर,
सदा तक वह हमारा ईश्वर;
मृत्यु तक वह अगुवाई करेगा ।।

1.करुणा से वह मुझ को खींचा, पवित्र स्वर्गीय प्रेम;
इस जंगल में मोहित करके, तुम्हें बिनती कर बुलाया । अनन्त...

2.अन्धकार के मार्ग में वह शुद्ध स्वर्गीय ज्योति,
दुःख से भरपूर तराईयों को सोतों में वह बदल दिया ।
3.कृपा से तेरा हृदय जो पिघला पवित्र स्वर्गीय प्रेम,
तेरी शान्ति की वाचा जो बंधी, प्रभु निश्चय रक्षा करेगा ।

4.इस संसार में यात्रा बिताएगा प्रभु की दया से,
घने जंगल में भी प्रभु की गोद में तुम्हें शान्ति मिलेगी ।

5.सूखा जीवन अंकुर जो आया शुद्ध प्रभु की कृपा से,
सिर पर सदा का आनन्द होगा दुःख शोक सब जाता रहेगा ।

6.जय जयकार तुम करते हुए प्रभु के पास लौट आओ,
सिय्योन पर्वत के पास आकर शान्ति, आनन्द पाओ ।
594 धार्मिकता का सूरजdhaarmikata ka sooraj
‘‘धार्मिकता का सूर्य उदय होगा ।’’ (मलाकी 4:2)

धार्मिकता का सूरज उदय अब होगा,
पंखो में चंगाई तुम को देगा ।।

1.पाप के अन्धकार में तुम जो थे, श्राप और दण्ड के पात्र भी थे;
धार्मिकता के सूरज के पास आओगे, नित्य तुम्हारे ऊपर चमकेगा ।

2.कृपा और सच्चाई यीशु से आयी, शीघ्र आओ और अनुग्रह पाओ;
बहुतायत कृपा से अब तुम, अनुग्रह पर अनुग्रह पाओ ।

3.जितनों ने उस की तरफ देखा, चेहरे उन के भी प्रकाशित हुए;
स्वर्गीय प्रभु की ओर यदि देखोगे, किरणों से प्रकाशित तुम होगे ।

4.यहोवा के तेज से भवन भरा है, सभों ने देखी है महिमा उस की;
दण्डवत करो उसी प्रभु को, मसीह के तेज से भरपूर हो के ।

5.राज्य के लिए प्रभु ने योग्य बनाया, उस प्रभु के तुम अब आधीन हो जाओ;
नम्रतापूर्वक आज्ञाकारी हो, चलते जाओ अन्त तक यीशु-साथ ।
595 धार्मिकता का सूरज उदयdhaarmikata ka sooraj uday
‘‘धार्मिकता का सूर्य उदय होगा ।’’ ( मलाकी 4:2)

धार्मिकता का सूरज उदय अब होगा,
किरणों से उस की चंगाई देगा;
पंखो में सब को ढ़ाँपे रहेगा ।।

1.क्योंकि देखो वह धधकते भट्टे का,
दिन आता है, दिन आता है;
सब अभिमानी और दुष्टों का भाग,
आग में होगा और दण्ड भी वह देगा ।

2.सेनाओं का प्रभु वह यों कहता है,
नाश का वह दिन है, नाश का वह दिन है;
न्याय का वह दिन है और भयानक है,
भस्म सब होगा और पता न रहेगा ।

3.यहोवा का भय यदि तुम सब मानोगे,
पश्चाताप करोगे, पश्चाताप करोगे;
बहुतायत जीवन वह तुम को देगा,
रक्षा करेगा और थामें रहेगा ।

4.प्रभु ने ठहराया है, उस की प्रजा जो;
निज भाग होंगे, निज भाग होंगे;
कोमलता करेगा वह पुत्र समान,
मीरास भी बनाएगा, अधिकार देगा ।

5.प्रेम उस का अनमोल, सनातन और आत्मिक;
कैसा महान है, कैसा महान है;
प्राण उस ने दिया है पापी के लिए,
छुटकारा देगा और क्षमा भी करेगा ।

6.प्रभु के जो तुम हो, दुष्ट को लताड़ोगे;
जयवन्त बनोंगे, जयवन्त बनोंगे;
शत्रु बनेंगे राख, पाँव के नीचे;
विजय का आनन्द तुम को स्वर्ग से वह देगा ।

7.न भुलो तुम अब प्रभु के वचन को,
तैयार रहो, तैयार रहो;
आयेगा प्रभु महिमा के साथ,
तुुम को ले जाएगा साथ रखेगा ।
596 यात्री हूँ मैं जग में प्रभुजीyaatree hoon main jag mein prabhujee
‘‘मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री की नाई रहता हूँ... ।’’
      (भजन 39:12)

यात्री हूँ मैं जग में प्रभुजी, चलता हूँ मार्ग मैं तेरा;
वह निशान ! तू है यीशुजी, बन्दरगाह तू मेरा ।।

1.सोचा था मैं यह जग मेरा, खेस कुटुम्ब सब है प्यारा;
धोखा सब ! कोई न सहारा, व्यर्थ ही व्यर्थ है सारा ।

2.धन दौलत सब मान और इज्जत, यहीं रहेगा जल जाएगा;
यह जगत ! पाप से जो भरा, श्राप ही श्राप है सारा ।

3.ऐसा कर प्रभु अन्त मैं जानूँ, और जानूँ मेरी आयु के दिन को;
अब बता ! कैसा अनित्य हूँ, खेदित हूँ मैं पूरा ।

4.जान गया मैं उस दिन प्रभुजी, बदला जीवन लोहू से मेरा;
बड़ा आनन्द ! तू ने कहा था, पाप क्षमा हुआ तेरा ।

5.इस जग में अब मैं हूँ मुसाफिर, क्रूस उठाकर चलता रहूँगा;
पाया मैं ! अनमोल धन को, है जो यीशु से भरा ।

6.आँख जब मेरी बन्ध हो जाए, यात्रा मेरी पूरी हो जाए;
पहुँचूं मैं ! स्वर्गीय वतन में, यह है गीत अब मेरा ।
597 दुनिया के इस सफर मेंduniya ke is saphar mein
‘‘निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूँ ।’’ (फिलिप्पियों 3:14)

दुनिया के इस सफर में जब रहता,
कभी मैं रोता, कभी मैं हँसता;
लेकीन मसीह मेरे साथ साथ चलता ।।

1.जीवन की यात्रा कितनी कठिन है,
घोर अन्धकार और भारी तुफान है;
पग पग में ठोकर आता ही रहता,
कौन है सम्भाले ? और कौन है बचाता ?

2.हृदय की शुद्धता से जब मैं चलता हूँ,
हाथ मेरे शुद्ध और विवेक में निर्दोष हूँ;
अचानक कहाँ से दुश्मन आ पड़ता,
जीवन को दुःख से, निराशा से भरता ।

3.एक ही सहारा मेरा तू मसीह है,
हर समय मुझ को तू थामे रहता है;
प्रेम और मधुर आवाज से तू कहता,
भुल न जाना तू, साथ जो मैं रहता ।

4.इसी अनुभव से मैं चलता रहूँगा,
प्यारे मसीह की और ताकता रहूँगा;
पिछली बातों को मैं दिल से अब भूलता,
प्रेमी प्रभु मेरे आँसू सब पांेछता ।

5.अन्तिम समय तक साथ भी तू देता,
जब सब छोड़े, कभी न तू छोड़ता;
हमेशा उठाता और नये बल से भरता,
ताकि मैं स्थिर रहूँ यही तू चाहता ।
598 मसीह को देख करmaseeh ko dekh kar
(इब्रानियों 12:1, 2)

1.मसीह को देख कर, आगे बढूं मैं, सिय्योन की यात्रा में;
संसार को पीछे छोड़कर मैं पहुँचू महिमित उस देश में,
यीशु के अनुग्रह में रहूँ, सुरक्षित उस के हाथों में;
आनन्दित हृदय से प्रशंसा करते, पहुँचूं उस देश में ।
कितना सुन्दर जीवन यह, महिमा से भरपूर है;
सदा सर्वदा ख्रिस्त के साथ रहकर,
महिमा करूँगा मैं, महिमा गाऊँगा मैं ।।

2.संसार में रहते, दुःख और संकट में उसकी शरण में रहूँ;
आए विपत्ति, परीक्षा जब जब, विजयी मैं बनूँ;
प्रभु के लिए ही जीऊँ मैं, उसी के पद-चिन्हों पर चलूँ;
आत्मा, प्राण, शरीर भी, प्रभु को सौंप कर, सेवा मैं उस की करुँ ।

3.यह संसार मेरा घर नहीं है, हूँ मैं विदेशी यहाँ;
छाया सा जीवन बिताकर मैं जाऊँ, महिमित देश में;
मेरे लिए बिनती करने, महायाजक यीशु है वहाँ;
ख्रिस्त का संगी-वारिस होकर मैं भी, रहूँगा उस के साथ में
599 क्रूस पर से अपनी नजरkroos par se apanee najar
‘‘तुम्हारी... आँखों के सामने यीशु मसीह क्रूस पर
दिखाया गया ।’’ (गलतियों 3:1)

क्रूस पर से अपनी नजर न हटाएँ,
ख्रिस्त के अनुग्रह में रहें;(2)
बढ़े मुक्तिदाता के पद चिन्हों पर,
महिमित उज्जवल मुकुट स्वर्ग में पहनने ।(2)
क्रूस पर से अपनी नजर न हटाएँ ...

1.स्वर्ग है एक अद्भुत शान्ति का देश,
सारी आशीषों से भरपूर वह है;
संसार की शान्ति तो क्षण भर की है,
श्राप और दण्ड़ भी छिपा है उस में ।

2.ख्रिस्त से अलग करने संसार हमें,
बहुत ही आकर्षित कर रहा है;
क्रूस पर से नजर हम हटाएँ यदि,
तब फंदा आके फँसाता हमें ।

3.प्रभु मसीह के संगत में रह कर,
शैतान को जरा भी, मौका न दे;
ख्रिस्त से हमें अलग करता है जो,
हटाएँ और रक्त से शुद्ध हम बनें ।

4.स्वर्गीय आश्ीाष का स्वाद चखने की,
लालसा रखें हम वहाँ जाने की;
संसार से अलग रखें अपने को,
आत्मिक जीवन को सम्भाल के रखें ।
600 यर्दन नदी के पारyardan nadee ke paar
‘‘ये ही वे हैं जो पहीले महीने में जब यर्दन नदी
सब कड़ाडों के ऊपर बहती थी तब उस के पार उतरे ।’’
(1 इतिहास 12:15)

यर्दन नदी के पार चल ऐ मन मेरे,
फिक्रो से अपने आप को न घबरा दे ।।

1.कदम उठाते ही,... हट जाएगी नदी;
मिट नहीं सकते,... यीशु के वायदे ।

2.दूध और शहद वहाँ,... कसरत से हैं खाँ;
भूल जा मिस्र की,... मछलियाँ और गन्दने ।

3.अमीम और अनाकीम,... है वहाँ जमजमीम;
यीशु के जोर से उन,... सब को तू हरा दे ।

4.वायदों में शक न ला,... आगे कदम बढ़ा;
दो दिलों को बातों को,... मन से तू भुला दे ।

5.ऊपर को नजर उठा,... यीशु पर रख निगाह;
उलझाने वाले गुनाह,... को तू हटा दे ।
601 चलो यर्दन पार मुसाफिरchalo yardan paar musaaphir

Joshua 1:2

v:"सो अब तू उठ, कमर बान्ध, और इस सारी प्रजा समेत यर्दन पार होकर उस देश को जा |" यहोशू Joshua 1:2

c:चलो यर्दन पार मुसाफिर,
c:चार घड़ी के मेहमान ||

s1.इस जग में तो कुछ भी नहीं है,
s1.जीवन घास के समान |चलो ...

s2.छाया जैसे पलहों में ढलती,
s2.यह भांप के समान |

s3.व्यर्थ ही व्यर्थ है जग की माया,
s3.सब कुछ कूड़ा समान |

s4.आँख उठा कर ताक मसीह को,
s4.वह है सब से महान |

s5.क्रूस उठा कर चलना होगा,
s5.पाएगा देश तू कनान |

s6.बैबल तेरा है पथ-दर्शक,
s6.ख्रीष्ट है तेरा निशान |
602 उठो, जागो हे मसीहियोutho, jaago he maseehiyo

romans 13:11

v:"अब तुम्हारे लिए जग उठने की घड़ी आ पहुँची है |" रोमियों Romans 13:11

c:उठो, जागो हे मसीहियो, यर्दन पास जाने को,
c:छोड़ो, छोड़ो, मिस्र का सब सुख विलास और माया को ||

s1.शंका न रखो जरा भी तुम, यीशु की प्रतिज्ञा पर,
s1.आगे बढ़ो, उदासी छोड़ो, साथ विश्वास प्रभु का हो |

s2.समुद्र गरजे, पर्वत कांपे, बाढ़ यदि हो यात्रा में,
s2.सदोम की ओर न देखो फिर के, चलो सिय्योन नगर को |

s3.नजर उठा कर कलवरी में, देखो ख्रीष्ट निशाने को,
s3.किया है दूर सब बाधा बन्धन, नाश किया मृत्य को |
603 हम उस स्थिर नेववाले नगर कीham us sthir nevavaale nagar kee

Hebrews 11:10

"वह उस स्थिर नेववाले नगर की बाट जोहता था |" इब्रानियों Hebrews 11:10

हम उस स्थिर नेववाले नगर की, बाट अब जोहते हैं,
जिसका रचनेवाला ईश्वर है, खुशियाँ मनाते हैं ||

1.उस नगर में यहोवा महान है, और स्तुति के योग्य ही है,
परमेश्वर उस नगर के बीच में टलता नहीं है |

2.प्रभु का नगर जो दृढ़ सदा है, घेरा हुआ वही है,
उस का सिंहासन उसमें धरा है, राजाधिराज वही है |

3.प्रभु के नगर में सदा का आनन्द है, और शान्ति, विजय भी है,
धर्मी सदा गुण के गाते हैं, क्योंकि प्रभु साथ है |

4.उस नगर में प्रभु के जो बलवन्त, वे ही सदा ही रहेंगे,
उन के लिए प्रभु आदि से पहले, तैयार भी किया है |

5.प्रभु का नगर जो बहुत ही प्रिय है, सदा पवित्र रहता है,
जाना चाहो यदि पश्चाताप करो, यीशु को ग्रहण करना है |
604 एक नगर तैयार है हमारे लिएek nagar taiyaar hai hamaare lie
"वह उस स्थिर नेववाले नगर की बाट जोहता था |" (इब्रानियों  11:10)

एक नगर तैयार है हमारे लिए,
रचनेवाला खुद ही परमेश्वर है,
हम जाऍंगे, जरूर जाऍंगे ||

1.ऐसा अद्‍भुत नगर चोखे सोने का वह है,
नेव उस की बहुमोल पत्थर से डाली है,
लहू से हम धुले हैं, पाप क्षमा पाया है,
हम जाऍंगे, जरूर जाऍंगे, जरूर जाऍंगे |

2.शहरपनाह उस नगर की बहुत ही ऊँची है,
जुड़ाई उसकी यशब की, वह नापा गया है,
प्रभु ने छुड़ाया है, और हक भी दिया है,
हम जाऍंगे, जरूर जाऍंगे, जरूर जाऍंगे |

3.बारह पाटक उसके मोती के बने हैं,
बारह स्वर्गीय वहाँ सदा पहरा देते हैं,
वस्त्र धोना लहू से प्रभु ने सिखाया है,
हम जाऍंगे, जरूर जाऍंगे, जरूर जाऍंगे |

4.उस नगर की सड़क स्वच्छ सोने की जो है,
फाटक उसके कभी न बन्द होते हैं,
सड़क में हम चलेंगे, फाटक से प्रवेश करेंगे,
हम जाऍंगे, जरूर जाऍंगे, जरूर जाऍंगे |

5.मेम्ना उसके मध्य में सिम्हासन-आरूढ़ है,
दीपक वही खुद हि है, मन्दिर भी,
क्योंकि नाम हमारा देखो, जीवन की पुस्तक में,
हम जाऍंगे, जरूर जाऍंगे, जरूर जाऍंगे |

6.जयवन्तों के लिए वह नगर तैयार हैम
पापी अधर्मी का कोई स्थान नहीं है,
विजयी प्रभु के द्वारा जयवन्त हम बनते हैं,
हम जाऍंगे, जरूर जाऍंगे, जरूर जाऍंगे |
605 फिर मैंने देखा नये आकाशphir mainne dekha naye aakaash
"फिर मैंने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा |" (प्रकाशित 21:1)

फिर मैंने देखा नये आकाश और नयी पृथ्वी भी,
जिस में शान्ति, आनन्द, ज्योति महिमा तेज भी,

पहली पृथ्वी तो जाती रही और आकाश भी,
समुद्र अब तो चल बसा और सारी वस्तु भी ||

1.वह राज्य परमेश्वर का कैसा अद्‍भुत भी,
अगम्य ज्योति जिसमें है और मेम्ने का तेज भी,
चारों तरफ जो शहरपनाह है बहुत सुरक्षित भी,
मेम्ने की स्तुति युग-युग होगी और आराधना भी |

2.पवित्र नगर, नये यरूशलेम को स्वर्ग से,
उतरते देखा, परमेश्वर के पास से आते भी,
सिंगारी हुई दुल्हिन समान कैसी सुन्दर भी,
जो अपने पति के लिए बिलकुल तैयार भी |

3.सिंहासन में से ऊँचे शब्द से कोई कहता भी,
कि देखो परमेश्वर का डेरा मनुष्य मध्य में भी,
वह उन के साथ निवास करेगा साथ रहेगा भी,
और वे सब उसके लोग होंगे और वह प्रभु भी |

4.आँखों से उन की आँसू वह सब पोंछेगा तब ही,
और उसके बाद मृत्यु न होगी और न शोक भी,
न विलाप और न पीड़ा होगी और न श्राप भी,
रात्रि तो वहाँ है नहीं दीपक है मेम्ना ही है |

5.सिंहासन पर जो बैठा था उसने कहा यह फिर,
देखो सब मैंने नया किया सब कुछ नया भी,
पुरानी बातों बीत गयी हैं सब अनुपम भी,
.और पहिली बातों याद न होंगी सोच विचार न भी |

6.इस राज्य की जो शहर पनाह बहुत ही ऊँची है,
बारह जो उसके फाटक हैं और नेवें मोती की,
जुड़ाई उसकी यशब की बहुत ही स्वच्छ है,
नगर है चौखे सोने का और काँच के समान भी |

7.और उस नगर की नेवें है बहुमोल पत्थर की,
यशब नीलमणि और लालड़ी और मरकत भी,
और गोमेदक, माणिक्य, पीतमणि और पेरोज भी,
पोखराज, लशम, ध्रम्र्कान्त और याकुत भी |

8.वह धन्य है जो जय पाए और वस्त्र सफेद भी,
वही इन सब वस्तुओं का वारिस होवे भी,
प्रभु उनका ईश्वर होगा और वे पुत्र भी,
आनन्द के साथ वे राज्य करेंगे युगानुयुग भी |

9.हे ईश्वर से सब डरनेवालों, हो तैयार भी,
उस के अद्‍भुत राज्य में रहो उसकी इच्छा थी,
मेम्ने के जीवन पुस्तक में नाम जिनके लिखे हैं,
कहे उन को तुम आदर के साथ प्रवेश करो भी |
606 प्रभु तेरा राज्य अटल हैprabhu tera raajy atal hai
"राज्य ... जो हिलने का नहीं |" (इब्रानियों 12:28)

प्रभु तेरा राज्य अटल है, नहीं टले सदा रहेगा ||

1.टल रहा है, जो कुछ जग में है ... हिल रहा है, पृथ्वी पर जो है,
तेरा वचन नहीं टलेगा ... तेरा वचन अटल रहेगा |

2.जातियाँ सारी, अब जो हिलती हैं ... चारों दिशाओं में अशान्ति जो है,
प्रभु का जन नहीं टलेगा ... प्रभु का जन अटल रहेगा |

3.समुद्र और स्थल आकाश भी कांपता ... मनुष्य का कार्य है डगमगाता,
प्रभु का घर नहीं टलेगा ... प्रभु का घर अटल रहेगा |

4.राज्य ऐसा एक उदय होवेगा ... दूसरे राज्यों को चूर चूर करेगा,
वही राज्य नहीं टलेगा ... बही राज्य अटल रहेगा |

5.प्रेमी पिता को यही भाया है ... अपने लोगों को राज्य देने को,
प्रेम प्रभु का नहीं टलेगा ... प्रेम प्रभु का अटल रहेगा |
607 यीशु का राज्य अटल हैyeeshu ka raajy atal hai

Hebrews 12:28

"इस राज्य को पाकर जो हिलने का नहीं |" (इब्रानियों Hebrews 12:28)

यीशु का राज्य अटल है, वह हिलने का नहीं,
प्रकाशमान राज्य जो, युगानुयुग रहेगा, राज्य प्रभु का ||

1.मसीह के राज्य का सिंहासन अति महान है,
चोखे सोने से भी अधिक प्रकाशित वह है,
उसके चारों और परमेश्वर की महिमा है,
जय जो पाए, वही उससे निश्चय पाएगा |

2.राज्य प्रभु यीशु का जो, नाशमान नहीं है,
अनन्त प्रेमी पिता उसे स्थिर किया है,
राज्य अनन्त प्रभु यीशु मसीह का जो है,
युगानुयुग राज्य वही निश्चय करेगा |

3.यीशु के लोहू के द्वारा धोए जाते जो,
पाप की शुद्धि इस संसार में निश्चय पाते वो,
स्वर्ग का राज्य में प्रवेश करेंगे ऐसे ही लोग,
आनन्दित वे होंगे देखकर उसके चेहरे को |

4.अपने राज्य की महिमा में बुलाया है तुम्हें,
नम्रता और भक्ति से सब स्थिर वे रहें,
यदि अन्त तक विश्वास में बने रहोगे,
धार्मिकता का मुकुट मसीह देगा, तब तुम्हें |

5.जितने राज्य इस जगत के नाश होंगे सभी,
राज्य प्रभु का युगानुयुग रहेगा वहीं स्थिर,
धार्मिकता और शान्ति से, राज्य करेगा प्रभु,
आज ही क्या तुम प्रभु के राज्य में प्रवेश करोगे ?
608 स्वर्ग मेरा देश, स्वर्ग मेरा घरsvarg mera desh, svarg mera ghar
"हर एक नए आकाश और नयी पृथ्वी की आस देखते हैं |" (2 पतरस Peter 3:13)

स्वर्ग मेरा देश, स्वर्ग मेरा घर,
यहाँ परदेशी हूँ, सराय में रहता हूँ,
मैं अब यात्रा में हूँ ||

1.कैसा शोभायमान है वह ... स्वर्ग मेरा देश,
सुन्दर भी अनुपम है ... स्वर्ग मेरा घर,
चलते चलते इस जग में मैं, विश्वास ही से देखता हूँ |

2.सदा दूत मधुर गाते ... स्वर्ग में रहते,
बिना विश्राम लिए वे ... स्वर्ग में गाते,
देखूँगा वहाँ उन को भी, निश्चय मैं यह जानता हूँ |

3.कब मैं जाऊँ, कब जाऊँ ... त्राता के निकट,
उस को मैं कब देखूँ ... मेरा प्रीतम वह,
सदा उसके साथ मैं रहूँ, यही दिल से चाहता हूँ |

4.अब मैं जल्दी जाऊँ उस पार ... जहाँ मेरा घर,
यात्रा का अन्त दिखता है ... स्थान वह मनोहर,
मुझ से पहले जो पहुँचे हैं, मिलने को मैं जाता हूँ |

5.आनन्द है सदा वहाँ ... यह है स्वर्ग धाम,
आदर शान्ति अद्‍भुत सुख ... जहाँ विराजमान,
शोक और क्लेश, दुःख होगा सब दूर, अपने काम से विश्राम पाऊँ |
609 प्रकाशमय जो अद्‍भुतprakaashamay jo ad‍bhut

Philippians 3:20

"हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है |"( फिलिप्पियों Philippians 3:20)

प्रकाशमय जो अद्‍भुत देश हव,
प्रिय देश है वह, और मनोहर है वह ||

1.पाप रहित देश वह है और श्राप वहाँ, देख न पड़े,
सदा का आनन्द सदा का गीत वहाँ आकाश में होशाना, हल्लेलूयाह |

2.सूरज-चाँद है नही, फिर भी अन्धकार है नहीं,
ईश्वर का पुत्र, ज्योति वही है, हर दिन ज्योति देगा, सदा दिन |

3.झूठी शिक्षा है नहीं, कोई दल या झुण्ड भी नहीं,
एक कुटुम्ब और एक ही मालिक है, प्रेम से भरा देश वह है, हम जाऍंगे |

4.प्रश्न वहाँ नहीं है, न गड़बड़ कोई भी है,
जाति, कुल और भाषा और रंग भी, कोई वहाँ नहीं है, केवल प्रेम |

5.योजना कोई है नहीं, न विधि-विधान वहाँ है,
न कोई कैद और न कोई दण्ड है, मनुष्य की प्रभुता वहाँ, नहीं है |

6.बाजार वहाँ है नहीं, न दफ्तर-कारखाना है,
धनी न गरीब, छोटे न बड़े, विभेद वहाँ नहीं है, हम एक हैं |

7.यीशु के लोहू से यदि पाप धोए तो वहाँ जाओगे,
खोना नहीं तुम ऐसी आशीष को बहुत धन्य जो है, जल्दी आओ |
610 जाऍंगे उत्तम एक देशjaainge uttam ek desh

Hebrews 11:10

"वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था जिसका रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है |” (इब्रानियों Hebrews 11:10)

जाऍंगे उत्तम एक देश में जरूर, रहेंगे प्रभु के साथ हम जरूर,		(2)
स्वर्गीय देश उत्तम भी वह है, हमारा वह देश जो अद्‍भुत है ||		(2)

1.पिता को भाया है, हमें एक राज्य दे,
दुनिया की सृष्टि से पहले बनाया है | (2)

2.अद्‍भुत नगर वह है, ईश्वर की रचना है,
दृढ़ता से नेव डाली, स्थिर भी किया है |

3.पवित्र नगर वह है, धार्मिकता रहती है,
स्वर्गीय स्वभाव से, तैयार भी किया है |

4.सनातन राज्य वह है, युगानुयुग वह रहे,
रहेंगे सदा उसमें, जिनको उसने चुना है |

5.प्रभु को देखेंगे, आनन्द से भर जाऍंगे,
उसके समान होंगे हमारा जीवन वह है |
611 स्वर्गीय नगर सिय्योनsvargeey nagar siyyon

Philippians 3:20

"हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है |" (फिलिप्पियों Philippians 3:20)

स्वर्गीय नगर सिय्योन, स्वदेश हमारा है,
कनान देश वतन, प्रभु यीशु से पाया है ||

1.स्वर में तुरही के ... उत्सव में विजय के,
आएगा स्वर्ग से ... प्रभु साथ सब सन्तों के,
मिलेंगे हवा में हम ... हल्लेलूयाह गाएँगे |

2.जीवन जल की नदी ... बहती है सिंहासन से,
दोनों किनारों पर ... जीवन वृक्ष होंगे,
महीने-हर-महीने ... फल अपना वे देंगे |

3.नयी पृथ्वी में ... नये यरूशलेम में,
नये प्रकाश में हम ... नये लोग सब होंगे,
ईश्वर मेम्ना ही ... नया मन्दिर तब होंगे |

4.महिमित प्रभु के साथ ... महिमित लोग होंगे,
महिमा के राज्य में हम ... महिमा तब पायेंगे,
जीवते ईश्वर की ... निज-सन्तान हम होंगे |

5.शीघ्र हम अपने ... स्वदेश स्वर्ग पहुँचेंगे,
मृत्यु, शोक, विलाप ... पीड़ा वहाँ न होंगे,
महिमा में हरदम हम ... प्रभु यीशु के साथ रहेंगे |
612 जगत, जीवन, मरणjagat, jeevan, maran
"... सब कुछ तुम्हारा है |" (1 कुरिन्थियों Corinthians 3:22)

जगत, जीवन, मरण, भविष्य, सब कुछ तुम्हारा है,
स्थिर होकर विश्वास रखो ||

1.वर्तमान की सारी चीजों भी, भविष्यत् काल में और भी जो कुछ है,
सच्चाई से, सब कुछ तुम्हारा, तुम सब मसीह के हो |

2.ईश्वर के जो प्रेमी सब हैं, उन के लिए वह तैयार भी की है,
आँखों ने अब तक जिन को न देखा, कान ने नहीं सुना |

3.जो बातें चित्त में न चढ़ी थीं, ज्ञानियों से यह बाते छिपी थी,
प्रभु की सहायता से इस भेद को, तुम सब समझ जाओ |

4.अक्षय, निर्मल, अविनाशी और अजर-अमर मीरास जो है,
तारणहारा यीशु प्रभुजी, स्वर्ग में वह रखा है |

5.अनुपम शक्ति से सदा सम्भाले, वही प्रभु रखवाली भी करे,
यीशु ही छुटकारा अन्त में देगा, विश्वास उसी पर रखो |

6.आत्मा आप ही देता गवाही, परमेश्वर के पुत्र तुम हो,
वारिस तुम हो, दुख भी उठाओ, महिमा पाओगे |

7.जो जय पाये, इन वस्तुओं को प्रभु से वह प्राप्त करेगा,
पिता वह होगा, पुत्र तुम होगे, कैसा बड़ा अधिकार |
613 यीशु तुझ को भूल न जाऊँyeeshu tujh ko bhool na jaoon

Matthew 14:27

"यीशु ने तुरन्त उन से बातें ही और कहा, ढाढ़स बान्धो, मैं हूँ, डरो मत |" (मत्ती Matthew 14:27)

यीशु तुझ को भूल न जाऊँ, याद करूँ मैं पल-पल में,
क्लेष की आँधी आए तौभी, रहूँ तेरी शरण में ||

1.द्वेष, ईर्ष्या के संसार में तू ही परम मित्र है,
अन्धकार के संसार में तू ही अगम्य ज्योति है,
अन्धकार और पाप के बीच में तू ही सत्य मार्ग है,
अन्धकार रोग और मृत्यु के बीच में तू ही अनन्त जीवन है |

2.चल न सकूँ जब डगमगाऊँ तू ही मेरा सहायक है,
चिन्ता में जब डूब जाऊँ सम्भाले तू ही पिता जो है,
हर दिन मेरी कमी घटी में तू ही मेरा दाता है,
इसलिए क्लेष आँधियों में भी मन मेरा खुश रहता है |

3.जग में केवल लड़ाई है शान्ति जरा भी नहीं है,
केवल तुझ में शान्ति है हृदय आनन्द से भरता है,
भय निराशा की आँधी जब आए हृदय आनन्द से भरता है,
"मत डर" यीशु तेरी आवाज से तूफान शान्त होता है |
614 जीवन दिया मेरे लिएjeevan diya mere lie

Romans 5:8

"मसीह हमारे लिए मरा |" (रोमियों Romans 5:8)

1.जीवन दिया मेरे लिए, जी उठा साथ रहने के लिए,
सदा वह मुझ को ले चलता है, फिर से आता वह ले जाने के लिए |

यीशु काफी है, यीशु काफी है,
हर दशा में, और परिस्थित में,
मेरे जीवन में यीशु काफी है ||

2.शैतान की नाना परीक्षाओं में, कभी न मैं पीछे हटूँगा,
संसार और शरीर मुझे खींचते हैं, उन की न सुनूँ मैं आगे बढूंगा |

3.हरी चराइयों मैं बैठता है, निर्मल सोते के पास ले चलता है,
हर पल वह मुझ को तृप्त करता, मृत्यु की तराई में संभालता है |

4.चाहे मुझे सब छोड़ें, त्यागें, शरीर मेरा यदि सड़ भी जाएँ,
धन-सम्पत्ति सब यदि दूर जाएँ, चाहे मेरे वे शत्रु बन जाएँ |
615 हर समय और हर हालhar samay aur har haal
(भजन Psalm 34)

हर समय और हर हाल, सब परिस्थितियों में,
भजूँगा अपने यीशु को मैं,
मेरे जीवन का एक ही सहारा वह है,
गाऊँगा गुण सदा यीशु के ||

1.प्रायश्चित वह मेरा है, उद्धार वह करता है,
वह मुक्तिदाता है, उद्धार भी ठहरा है |

2.हे बालकों, सब आओ, प्रभु का दर्शन पाओ,
और सीखते तुम जाओ, सेवा में लग जाओ |

3.दृष्टि प्रभु तेरी, धर्मी पर है लगी,
सुनता है प्रभु तू, धर्मी की विनती भी |

4.नम्र और खेदित जन, के पास वह रहता है,
सुन के दुआओं को, छुटकारा देता है |

5.धर्मी की छावनी की, दूत रक्षा है करता,
उन को छुड़ाता, जोखिम से बचाता |

6.जिसने तुझे देखा, प्रकाशित हो गया,
लज्जित वह न हुआ, आनन्द से भर गया |

7.आओ स्तुति करें, हम उसको सराहें,
आओ दण्डवत भी करें, साष्टांग प्रणाम करें |
616 सभी समय, सभी समयsabhee samay, sabhee samay
"सदा आनन्दित रहो |" (1 थिस्सलुनिकियों Thessalonians 5:19)

सभी समय, सभी समय, सभी समय आनन्द है,
क्योंकि प्रभु यीशु साथ मेरे है ||

1.संसार की हर वस्तु कूड़ा समान हे है, हरेक मनुष्य को मिट्टी होना है,
प्रिय प्रभु यीशु ही मित्र जब मेरा है, घटी नहीं मुझे आनन्द ही है |

2.माता-पिता मेरे चाहे गुजर जाएँ, मित्र भी सब चाहे दूर हो जाएँ,
राजा यीशु ख्रिस्त सदा का मित्र है, घटी नहीं मुझे, न चिन्ता है |

3.रक्षक मेरा वह, न सोता, न ऊँघता, प्रेम और धीरज्से रक्षा करता,
दस हजार चाहे मेरे पड़ोस में गिरे, चिन्ता नही मुझे, डर नहीं है |

4.रहता हूँ संसार में, जैसे सराय में मैं, स्वर्ग ही मेरा ---- निवास-स्थान है,
अनन्तकाल तक वहाँ ही रहूँगा मैं, कैसे कहूँ ये जग मेरा घर है |

5.मनुष्य चाहे मुझे दोषी भी ठहराएँ, मेरा नाम मिट्टी में चाहे मिलाएँ,
बदले में न बोलूं, चुप ही रहूँगा मैं, यीशु जैसे क्षमा करूँगा मैं |

6.कितनी परीक्षा, विपत्ती या दुख आए, दुष्ट शैतान मुझ से लड़ने आए,
न डरूँगा उस से हानि नहीं मुझे, जयवन्त प्रभु यीशु साथ मेरे हैं |

7.शान्ति देनेवाले, चाहे मुझे छोड़ जाएँ, सारे सहायक भी मुँह मोड़ लेंवे,
स्वर्गीय शान्ति का कर्ता यीशु ही है, उसी के पीछे-पीछे चलूँ मैं |

8.यीशु के हाथ के सहारे खड़ा रहूँ, प्रभु-शक्ति से शत्रु पर जय पाऊँ,
वचन की तलवार और धनुष लेकर मैं, जयवन्त बनूँगा अब, योद्धा जो हूँ |
617 प्रैय यीशु राजा कोpraiy yeeshu raaja ko

Psalm 17:15

"मैं तो धर्मी होकर तेरे मुख का दर्शन करूँगा |" (भजन Psalm 17:15)

प्रैय यीशु राजा को मैं देखूँ, काफी है,
उसके साथ महिमा पाऊँ, यही काफी है,
स्वर्गीय अनन्त के धाम में मैं पहुँचकर,
संतों के झुंड में रहूँ, यह काफी है ||

1.यीशु के लोहू से मैं अब धुलकर,
वचन के घेरे में मैं सुरक्षित रहकर,
निष्कलंक संतों में एक गरीब हूँ मैं,
लेकिन सोने के पथ में चलूँगा मैं |

2.वीणा जब दूत मिलकर सब बजाएँगे,
गंभीर जय ध्वनि का शब्द अद्‍भुत होगा,
हल्लेलूयाह का गीत तब गाया जाएगा,
प्रिय यीशु के साथ हर्षित होऊँगा मैं |

3.देखूंगा वह सिर जहाँ काटों का ताज था,
सोने का मुकुट पहनाऊँगा आनन्द के साथ,
पीठ जो कोड़ो से घायल उसको देखकर,
हरेक घाव को चुम्बन करूँगा मैं |

4.हृदय स्तुति और धन्यवाद से भरा है,
स्मरण करता हूँ मेरा स्वर्गीय भवन है,
हल्लेलूयाह ! आमीन, हल्लेलूयाह !
वर्णन से बाहर मेरी जीभ के वह है |

5.आहा ! कब आखिरी तुरही फूंकी जाएगी,
आहा ! मुझ गरीब की लालसा पूरी होगी,
पिता मेरे आँसू को तब ही पोछेगा,
हृदय मेरा आशा से बाट जोहता है |
618 ख्रीष्ट है इस जीवन काkhreesht hai is jeevan ka

John 10:11

"यीशु ने कहा, अच्छा चरवाहा मैं हूँ |" (यूहन्ना John 10:11)

ख्रीष्ट है इस जीवन का एक उत्तम रखवाला,
होता सहारा दुःख सुख में भी, प्रेमी प्रभु वह सदा ||

1.क्लेष संकट जब घेरेगा तुम को,
तब प्रभु अधिक नजदीक होग,
आंधी तूफान हटाते हुए, प्रभु संग यात्रा करेगा |

2.तैरते समय इस भव सागर में,
लहरें आती विश्वास को हिलाऍं,
डूबते समय पुकारो ख्रीष्ट को, निश्चय तुमको बचाएगा |

3.बाधा सतावट शैतान सब लाकर,
जीवन की नाव पर हमला करता,
साथ है मसीह न डरना कभी, रक्षा तुम्हारी करेगा |

4.आशा निराशा जीवन में आती,
हिम्मत न हारना प्रभु ने कहा,
विजय का इनाम जीवन का मुकुट, प्रभु निश्चय देगा |

5.यीशु हमारा महान दृढ़ गढ़ है,
सुरक्षित जब हम उसमें होते,
जयवन्त बनेंगे हम तब जरूर, शैतान का हमला न होगा |
619 जलाल के बादशाहjalaal ke baadashaah

Revelation 19:1

"मैंने स्वर्ग में मानो बड़ी भीड़ का बड़ा शब्द सुना, कि हल्लेलूयाह |" (प्रकाशित Revelation 19:1)

1.जलाल के बादशाह के सामने ... ताज पहिने हुए,
आराम और जिन्दगी मुदाम ... हम सब पाएँगे |

हल्लेलूयाह गाएँ, हल्लेलूयाह (2)
गाएँ हम सब, गाएँ हम सब,
हल्लेलूयाह गाएँ ||

2.अजीज मसीह के तख्त के पास ... जब हम पहुँचेंगे,
दुःख तकलीफ के बदले में ... चैन हम, पाएँगे |

3.आँसू आँखों से यीशु ... सब के पोछेंगा,
चौपान अजीज तब भेड़ों के ... आप चराएगा |

4.खुश आवाज फिरश्ते तब ... आसमान पर जाएँगे,
वीणा और बर्बत लेकर हम ... सब बजाएँगे |

5.शैतान से डरते हो तुम क्यों ... खुदा के वारिसों ?
यीशु की तरीफ अब करो ... सब उठो और जागो |

6.सुनो आवाज नरसिंगे की ... फिरश्ता फूंकता है,
दूल्हा दुल्हिन लेने को ... आसमान से आता है |

7.लिबास यीशु के लोहू में ... करो पाक ओ साफ,
बिना सुफेद पोषाक वहाँ ... कोई न जाएगा |
620 जब दुःख मुसीबत हैंjab duhkh museebat hain
"परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिसने हमें अपनी अनन्त महिमा के लिए बुलाया, तुम्हें थोड़ी देर 	तक दुःख उठाने के पीछे आप ही स्थिर करेगा |" 	(1 पतरस Peter 5:10)

When All May Labours

1.जब दुःख मुसीबत हैं मेरे तमाम, और मुझको मिला आसमान में आराम,
और मैं ने पाया मसीह का कलाम, अबदी जमानों में होगा जलाल |

होगा जलाल, पूरा जलाल, पूरा जलाल, पूरा जलाल,
यीशु को देखकर मैं हूँगा खुशहाल, उसके हुजूर में है पूरा जलाल ||

2.जब उसके फजल में पाऊँ इनाम, मिले आसमान पर जलाली मुकाम,
मुंजी के पास होगी खुशी तमाम, अबदी जमानों में होगा जलाल |

3.देखेंगे उस पर हम अपने हबीब, रहेंगे सदा मसीह के करीब,
पाएँगे दिल में हम उलफत अजीब, अबदी जमानों में पूरा जलाल |
621 सूर्य जहाँ अस्त-उदयsoory jahaan ast-uday

Psalm 72:8

"वह समुद्र ... पृथ्वी की छोर तक प्रभुता करेगा ... |" (भजन Psalm 72:8)

Jesus Shall Reign

1.सूर्य जहाँ अस्त-उदय ... ख्रिस्त राज्य वहाँ करेगा,
जब तक कि चाँद उजाला दे ... वह राज्य बढ़ता जाएगा |

2.देश देश के लोग हर भाषा में ... यीशु के प्रेम को गाते हैं,
बालक भी ले के उसका नाम ... आनन्दित रेहेंगे |

3.जहाँ कहीं वह राज करें ... सब लोग आशीषित रहेंगे,
कैदी भी छूटकर बन्धन से ... आनन्दित हो के उछलेंगे |

4.हे सारी सृष्टि उठ और गा ... सन्मानित कर ख्रिस्त यीशु को,
स्वर्गदूत उतर के गाएँ गीत ... और पृथ्वी सुन अल्हादित हो |
622 जीबन में जब आंधी तुम परjeeban mein jab aandhee tum par

Ephesians 1:3

"उसने हम को सब प्रकार की आशीषें दी हैं |" (इफिसियों Ephesians 1:3)

When upon life’s billows

1.जीबन में जब आंधी तुम पर चलती है, और निराशा आ घेरे जब, सब हो क्षय,
अपनी सारी आशीषें गिनों ले नाम, और तुम विस्मित होंगे देख के ख्रिस्त के काम |

आशीष गिनो, ले, ले, उनके नाम, आशीष गिनो, देखो ख्रिस्त के काम,
आशीष गिनो, ले, ले, उनके नाम, और तुम विस्मित होंगे देख के ख्रिस्त के काम |

2.चिंता का जब तुम पर भारी बोझ पड़े, और जब क्रूस का बोझ असह्य-सा लगे,
तब तुम गिनों आशीषें वे कितनी हैं, और तुम आनंद करते रहोगे निर्भय |

3.औरों के तुम खेत और धन क्यों देखते हो, पास तुम्हारे धन मसीह का सदा को,
गिनो सारी आशीषें जो बेबयान, अन्त आनन्दमय होगा, साथ दूतों के गान |

4.स्मरण रखो इस युद्ध में यह हर समय, साहस तुम न छोड़ना, ईश्वर सब का है,
सब आशीषें गिनो सदा दूत है पास, यात्रा भर सहायक हैं और देते आस |
623 आशा का मेरी दृढ़ आधारaasha ka meree drdh aadhaar
My hope is built on nothing less

1.आशा का मेरी दृढ़ आधार, ख्रिस्त का लहू और धर्म आपार,
न किसी और का है विश्वास केवल वह मेरी आस |

ख्रिस्त, दृढ़ चट्टान मेरा आधार, अन्य सब रास्ते निराधार ||

2.अंधेरा जब छा जाता है, और उसका मुख छुप जाता है,
तब उसके अनुग्रह द्वारा दूर होता है यह अंधेरा |

3.जब बल से आती है बयार, उसका वचन मानो पहाड़,
सब कुछ जब मेरा होता नाश, उस पर ही रखता मैं विश्वास |

4.वैभव के साथ वह आएगा, साथ उसके मैं भी जाऊँगा,
उसकी धार्मिकता को पहने, स्वर्ग के सिंहासन के दाहिने |
624 मसीह का रक्त और धर्मmaseeh ka rakt aur dharm

Jeremiah 23:6

"परमेश्वर उसका नाम हमारी धार्मिकता रखेगा |" (यिर्मियाह Jeremiah 23:6)

Jesus, Thy blood and righteousness

1.मसीह का रक्त और धर्म अपार है मेरा सुन्दर धर्म-सिंगार,
जिससे जब उस पर जाना हो, मैं प्रसन्न करूँ ईश्वर को |

2.जो मैं ने किए कर्म अशुद्ध और किया आज्ञा के विरुद्ध,
वे क्रूस पर मर के यीशु ने मिटाए अपने लहू से |

3.ईश्वर का मेम्ना सर्वप्रधान जो क्रूस पर हुआ बलिदान,
वह पापी को बचाता है और मेरा मुक्तिदाता है |

4.मसीह ने दुख जो सहा था और उस का रक्त जो बहा था,
देता वही मुझको उद्धार, है मेरी आशा का आधार |

5.अब मेरी आशा जीवन भर है प्यारे प्रभु यीशु पर,
स्वर्ग में भी उसका धर्म अपार है मेरा सुन्दर धर्म-सिंगार |
625 रक्षित मसीह की गोद मेंrakshit maseeh kee god mein

Deuteronomy 33:27

"नीचे सनातन भुजाएँ हैं |" (व्यवस्थाविवरण Deuteronomy 33:27)

Safe, in the arms of Jesus

1.रक्षित मसीह की गोद में, रक्षित मसीह के पास,
मैं खुश हूँ उसके प्यार में, है उस पर मेरी आस,
दुनो ! हैं दूतगण गाते गीत मधुर निरन्तर,
स्वर्ग के अपार वैभव में चमकीले सोतों पर |

रक्षित मसीह की गोद में, रक्षित हूँ दुखों से,
मैं खुश हूँ उसके प्यार में, है उस पर मेरी आस ||

2.रक्षित मसीह की गोद में, रक्षित मसीह के पास,
रक्षित संसार के जाल से, फन्दों से शत्रु के,
दूर सारे शोक और चिन्ता, डर और संदेह है नष्ट,
है केवल थोड़ा ही दुख, थोड़ा ही शेष है कष्ट |

3.यीशु है प्यारा रक्षक, दिया है उसने प्राण,
उस पर है दृढ़ भरोसा, है वह मेरी चट्टान,
और थोड़ा धीरज रखूं, जब तक है रात यहाँ,
जब तक कि मैं न देखूं स्वर्ग का अनन्त बिहान |
626 यीशु है मेरा, धन्य निश्चयyeeshu hai mera, dhany nishchay

John 3:2

"प्रियो, हम परमेश्वर की संतान हैं |" (1 यूहन्ना John 3:2)

Blessed assurance, Jesus is mine

1.यीशु है मेरा, धन्य निश्चय ! मन में है देता आनन्द, विजय,
उद्धार का वारिस, ईश्वर का दास, आत्मा से जन्मा, खून खरीदा |

यह कथा मेरी, यह मेरा गान,
उसीका यश मैं करता बयान ||

2.पूरा भरोसा, आनन्द और सुख, मुझे न कोई चिन्ता, न दुख,
ख्रिस्त से ही हुआ दया का ज्ञान, दूत भी सुनाते प्रेम का बयान |

3.ख्रिस्त पर है मेरा पूरा विश्वास, अब मैं सुरक्षित हूँ उसके पास,
प्रेम उसका देता मन को आराम, साथ उसके होगा स्वर्ग मेरा धाम |
627 बादलों पर यिशु राजा जल्दी आता हैbaadalon par yishu raaja jaldee aata hai

Matthew 25:6

"दिखो, दूल्हा आ रहा है, उससे भेंट करने को निकलो |" (मत्ती Matthew 25:6)

बादलों पर यिशु राजा जल्दी आता है,	(2)
दूतों के साथ प्रभुओं का प्रभु आता है || (2)

1.रात अब गुजरी जाती, भऐयो, दिन निकलता है, (2)
तड़का होता, सुबह का सितारा आता है |	(2)	बादलों ...

2.उठो, जागो कि नरसिंगा फूंका जाता है,
दीयों को तुम अब सम्भालो दूल्हा आता है |

3.सुस्ती छोड़ो जागो, भऐयों वक्त अब जाता है,
पाक पोशाक को अब सब पहिनो, राजा आता है |

4.क्या तू यीशु राजा के साथ स्वर्ग को जाएगा ?
क्या तू अपने सब दुःखों से आराम पाएगा ?

5.अनुग्रह का वक्त जया, दरवाजा बन्द हुआ,
इस से पहिले मन फिरा के यीशु पास जल्द आ |

6.यीशु के लोहू में अपने आप को तू धो ले,
उस के आत्मा का दान अपने आत्मा में तू ले |

7.हल्लेलूयाह ! उसके सन्तों के साथ मिलकर गा,
उस की महिमा, उस की स्तुति तू सुनाता जा |
628 बादल की सवारी कर केbaadal kee savaaree kar ke
"आनेवाला आएगा और देर न करेगा |" (इब्रानियों 10:37)

बादल की सवारी कर के किसी दिन यीशु जरूर आएगा (2)
आएगा ... आएगा ... आसमान से अचानक किसी दिन
यीशु जरूर आएगा  ||

1.हर एक जो है सत विश्वासी (2) ... मिलने हवा में चलेगा, (2)
जब यीशु मसीह आएगा | (2)	बादल ...

2.जिनका मन जंजीर से जकड़ा ... यीशु खुद ही छुड़ाएगा,
बिन यीशु कुछ न बनेगा |

3.क्या तू जाएगा साथ मसीह के ? ... पाप धुला अब सारे,
और लोहू से उस के नहा ले |

4.अनन्त जीवन देवेगा तुझ को ... मेल पिता से कराएगा,
और तुझ को भी ले जाएगा |
629 महिमा के साथ यीशु राजाmahima ke saath yeeshu raaja
"राज्य और प्रभुता और धरती पर के राज्य की महिमा, परमप्रधान ही की प्रजा अर्थात उसके पवित्र लोगों को दी जाए्गी |" (दान्नियेल 7:27)

महिमा के साथ यीशु राजा,
दूतों की सेनाएँ लेकर, जल्दी आता,
आ-आ-आ-आ आनन्द हम पाएँगे || (2)

1.भूमि पर हैरत होगी, आकाश पर खुशी होगी, (2)
दूतों के साथ यीशु बादलों पर आता, (2)
उस के लोग सारे यीशु से तब मिलकर,
आ-आ-आ-आ आनन्द हम पाएँगे |

2.नरसिंगा जब फूंकेगा, सारा दुख  दूर होवेगा,
परमेश्वर के भक्तों के साथ जमा होकर,
यिशु की स्तुति सबके साथ जाकर,
आ-आ-आ-आ आनन्द हम पाएँगे |

3.भूमि की सारी कौमें, देशों के राजा सारे,
इम्मानुएल राजा सबका न्याय करेगा,
लेकिन यिशु के साथ खड़े तब होकर,
आ-आ-आ-आ आनन्द हम पाएँगे |

4.राज्य करेंगे हजार साल, भूमि पर यीशु के साथ,
उस के बाद हमेशा यीशु के साथ रहकर,
नित्य जीवन और नित्य आराधना,
आ-आ-आ-आ आनन्द हम पाएँगे |
630 बोलो जय, जय, जयbolo jay, jay, jay

Matthew 21:9

"धन्य वह है जो प्रभु के नाम से आता है, आकाश में होशाना |" (मत्ती Matthew 21:9)

बोलो जय, जय, जय, प्रभु यीशु की जय
होशाना जय, प्रभु आता है, कैसी खुशी है,
हवा में मिलेंगे, हम उसके हैं ||

1.हम बदल जाएँगे, यह तो भेद बड़ा है,
पिछली तुरही फूंकते ही होगा, हम उठाए जाएँगे,
प्यारे प्रभु से मिलेंगे, हम जो उसके हैं |

2.उस के समान होंगे, हम जो संतान हैं,
प्रभु के प्रगट होने हम सब, अविनाशी पहनेंगे,
प्यारे प्रभु पाएँगे, हम जो उसके हैं |

3.प्रभु को देखेंगे, ये है आशा सारी,
आश मिटेगी, तृप्त हम होंगे, प्रभु में भर जाएँगे,
प्यारे प्रभु को चखेंगे, हम जो उसके हैं |

4.प्रभु के साथ रहेंगे, यह थी योजना उस की,
प्रभु का घर आनन्द से भरेगा, महिमा हम पाएँगे,
प्यारा प्रभु हमारा है, हम तो उसके हैं |
631 यीशु राजा आएगाyeeshu raaja aaega
"यह उस दिन होगा, जब वह अपने पवित्र लोगों में महिमा पाने आएगा |" (2 थिस्सलुनीकियों 1:10)

1.यीशु राजा आएगा, फिरिश्तों के साथ आएगा,
हम सब आसमान पर जाएँगे ... मैं
उसके चेहरे का जब जलवा देखूंगा ... और
उसकी जय गाकर खुशी से भर जाऊँगा |

2.उस के साथ दुल्हिन होगा, जब आसमान पर
खुशी मनाएँगे, सब लोग, ... तब
उस के जलाल के गीत हम गाऍंगे ... और
उस की मुहब्बत की गहराई चखेंगे |

3.सफेद जामे पहिनकर, जिन पर मोहर रुह की,
यीशु के सामने जो होंगे, ... उनमें
मैं भी मिलकर तब तारीफ गाऊँगा ... और
ताज सोने का पहिनकर खुशी मनाऊँगा |

4.दुनिया का प्यार छोड़कर यीशु से मन जोड़कर,
हर वक्त उसी के साथ रहूँगा, ... वहाँ
दूल्हे का घर खुशी से भर जाएगा ... फिर
हर एक यीशु से जल्दी से अब्दी आराम पाएगा |

5.जब प्रधान दूत अपना फूंकेगा नरसिंगा,
सारे विश्वासी उठाए जाऍंगे, ... वहाँ
हम अपने दूल्हे से मिलने जाएँगे ... और
उसके सनातन राज्य में प्रवेश करेंगे |
632 प्रभु यीशु के आने के समयprabhu yeeshu ke aane ke samay

Matthew 17:8

"उन्होंने ... यीशु को छेड़ किसी को न देखा |" (मत्ती Matthew 17:8)

प्रभु यीशु के आने के समय,
मन हमारे आनन्द से भर जाऍंगे ||

1.जगत के छोर तक रहनेवाले सब, यीशु प्रभु को ध्यान से देख कर,
आनन्द से फिर उद्धार पाओ |

2.जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की, उन्होंने उस की ज्योति पायी,
उनका मुँह कभी लज्जित न हुआ |

3.हमारे विश्वास का कर्ता वही है, सिद्ध करनेवाले यीशु को देखकर,
नम्रता से इस दौड़ में दौड़ें |

4.चलें जब आँस उठा कर देखे, यीशु ही दिखा अद्‍भुत रीति से,
मूसा और एलिय्याह छिप गए |

5.प्रभु यीशु तू ही अनुपम प्रिय, आनन्द करें हमारे प्रभु में,
तेजामय महिमा ही भाग है |

6.अच्छा चरवाहा यीशु हमारा, हमारे लिए प्राण अपना दिया,
मुक्तिदाता की बुलाहट को सुन लो |

7.आनन्द से और ललकार ध्वनि से, सुन्दर यीशु को आते देखकर,
आओ हल्लेलूयाह हम गाऍं |
633 मसीह के उस दिन मेंmaseeh ke us din mein
(विलापगीत 3:22, 1 कुरिन्थियों 1:9, 2 शमुएल 24:14)

मसीह के उस दिन में प्यारे विश्वासी,
निर्भय और निर्दोष तुम सब होंगे ||

1.स्थिर वह रखेगा अन्त तक तुमको,
विश्वास योग्यता कैसी महान है, स्तुति के योग्य है |

2.परीक्षा के कारण तुम जो उदास हो,
दुःख के समय शान्ति देने वाला, तसल्ली का दाता |

3.चूके हम कई बार दिनों में,
आसीम करुणा प्रभु की जो थी, कभी न मिटेगी |

4.आज्ञा न मानी प्रभु को दुःह दिया,
ईश्वर की दया कितनी महान है, कभी दूर न होगी |

5.तुम्हारे जीवन में प्रतिज्ञा जब उसकी,
जीवित विश्वास और धीरज धरकर, तुम दावा करो |
634 जब देखो निशानतjab dekho nishaanat

Matthew 24:33

"जब तुम इन सब बातों को देखो तो जान लो, कि वह निकट, वरन् द्वार ही पर है |" (मत्ती Matthew 24:33)

जब देखो निशानत भाइयो सब जग जाओ,
कुप्पियों में तुम तेल भरो, मशालें लो सम्भाल ||

1.आधी रात अब हो चुकी और है आवाज "वह आ गया !"
छोड़ दो अब सुस्ती,
कमर अपनी कसकर रहो तुम तैयार |

2.हर जगह लड़ाई झगड़े, सुनो सब अफवाहें,
आँखें अपनी खोलो,
काल मरी सब देखो, भाइयो, आते हैं भूचाल |

3.जातियों को तकलीफ अब होती, आती है मुसीबत,
शक्तियाँ भी हिलती,
आफतों के डर से, देखो, हुआ बुरा हाल |

4.यहूदी भी वापस आते, जातियों से निकलकर,
संकट क्लेश उठा के,
खबर देते हैं कि आया रब्ब का साल |

5.दरवाजा बन्द हो जाएगा, फिर मौका न पाओगे,
मनों को फिराओ,
यीशु पर निर्धार हो और हो जाओ तैयार |
635 देखो, देखो, उठो जागोdekho, dekho, utho jaago

Matthew 25:6

"देखो दूल्हा आ रहा है |" (मत्ती Matthew 25:6)

देखो, देखो, उठो जागो, यीशु राजा आता है,
अन्धकार-रूप राज्य में वह महिमा सहित आता है ||

1.खोलो तुम आ मन का द्वार (2), यीशु आना चाहता है,
क्यों तुम उस से दूर रहते हो (2), तुम को आज बुलाता है |

2.सुन लो आज तुम सुभ समाचार, महान मुक्ति पाने को,
फिर तुम समय नहीं पाओगे, मृत्यु लेने आती है |

3.छोड़ो अन्धकार का मार्ग, क्रोध, लोभ और व्यभिचार,
मुक्तिदाता यीशु को भाइ, ग्रहण करने को तैयार |

4.घृणित पाप और अभिलाषा, पाप के दाग जो बेशुमार,
निर्दोष यीशु का लोहू जो, पाप के दाग सब धोता है |

5.देखो कलवरी के क्रूस पर, मुक्तिदाता प्रभु को,
स्वर्गीय अमर जीवन ले लो, उठो गाओ हल्लेलूयाह |
636 सजा पाऍंगे, हाँ जीsaja paainge, haan jee
"प्रभु यीशु ... धधकती आग में प्रगट होगा | और जो ... हमारे प्रभु यीशु के सुसमचार को नहीं मानते उनसे पलटा लेगा |" (2 थिस्सलुनिकियों 1:7,8)

सजा पाऍंगे, हाँ जी, मार खाऍंगे, कुल गुनाहगार,
मस्सेह जब आऍंगे ||

1.पिछला नरसिंगा जब फूंकेगा,
जागेगा कुल संसार, ओ हाँ जी, प्यारो ...
जागेगा कुल संसार ... मसीहा जब आऍंगे |

2.भेड़ों को अपने दहिने करेगा,
बकरियों को बाई कतार, ओ हाँ जी, प्यारो ...

3.लोगों को अपने जुदा करेगा,
उन को करेगा प्यार, ओ हाँ जी, प्यारो ...

4.विभव के साथ जब प्रभु यीशु आएगा,
हो बादलों पर सवार, ओ हाँ जी प्यारो ... |
637 दुनिया के विश्वासी उठाएduniya ke vishvaasee uthae
"हम जो जीते और बचे रहेंगे, उनके साथ बादलों पर उठा लिए जाऍंगे |" (मत्ती 25:6)

1.दुनिया के विश्वासी उठाए जाएँगे,
जब यीशु मसीह फिर जाहिर होगा,
हम भी खुशी से उससे तब मिलेंगे,
क्या तू वहाँ होगा (२) ए भाई मेरे ?

2.पौलुस पतरस, याकूब, यूहन्ना होंगे
हर कौम और उम्मत से मुकद्दस सारे,
सब जमा वहाँ होंगे गाते हुए,
क्या तू वहाँ होगा, ए भाई मेरे ?

3.यूरोप, एसिया, हिन्द और आफ्रीक से भी,
अमरिका, आस्ट्रेलिया के सब ही,
सब मिलाकर करेंगे तारीफ मेम्ने की,
क्या तू वहाँ होगा, ए भाई मेरे ?

4.कुल दुनिया में होती यही तैतारी,
विश्वासी सब छोड़ते हैं दुनियादारी,
और उन में होती है बड़ी बेदारी,
ताकि उस से मिलें, ए भाई मेरे ?
638 देखो, देखो, कोई आ रहा हैdekho, dekho, koee aa raha hai

Luke 21:28

"जब ये बातें होने लगें तो सीधे होकर अपने सिर ऊपर उठाना |" (लूका Luke 21:28)

देखो, देखो, कोई आ रहा है, कैसी महिमा मसीह आ रहा है,
आँखें अपनी उठाकर तो देखो, कैसी शान से मसीह आ रहा है ||

1.वह भी कैसी सवारी है देखो, आसमान की बेदारी तो देखो,
बाजे बजते, दूत गाते हैं (3), क्योंकि दूल्हा चला आ रहा है |

2.वहाँ सूरज और चाँद है न कोई, अब तो मुर्दे पड़े हैं न कोई,
हम सब डरते हैं, और कांपते हैं, न्याय करने मसीह का आ रहा है |

3.यह दुनिया हमारी मिटेगी, एक नयी दुनिया फिर से बनेगी,
सब नया होगा, जग नया होगा, राज्य करने मसीह आ रहा है |

4.अब नहीं है वह काँतों का मुकुट, वह तो पहिने है महिमा का मुकुट,
कैसी प्यारी दुल्हिन, जो सिंगारी हुई, जिस को लेने मसीह आ रहा है |
639 यीशु शीघ्र ही फिर आएगाyeeshu sheeghr hee phir aaega

Matthew 25:6

इसी रीति से जब तुम बातों को देखो, जान लो कि वह निकट है, वरन् द्वार ही पर है | (मत्ती Matthew 25:6)

यीशु शीघ्र ही फिर आएगा, सत्य ईश्वर की यह वाणी है,
उस की आमद और अन्त के चिह्न, एक-एक करके पूरे हो रहे हैं,
यीशु शीघ्र ही फिर आएगा |

1.पाप, दुःख और संकट बढ़ रहे हैं, युद्ध हलचल जगत में हो रहे हैं,
जाति, जाति के विरोध में उठेंगी, राज्य पर राज्य चढ़ाई करेंगे |

2.नाशक भूकंप होंगे जगत में, मरी, अकाल पड़ेंगे जगह-जगह में,
आकाश में भयानक लक्षण होवेंगे, और बड़े-बड़े चिह्न प्रगट होंगे |

3.मेघों पर बिजली सी महिमा के साथ, ले जाने को हमें ख्रीष्ट उतरेंगे,
तब हम खून-खरीदे उस के साथ रह के, राज्य करेंगे महिमा में हजार साल |

4.पापों की राहों से फिरकर आओ, उद्धार के लिए अब क्रूस पर देखो,
जहाँ यीशु ने सहा दुःख तुम्हारे लिए, तैयार हो जाओ प्रभु के राज्य के लिए |
640 देखो निश्चय आता हूँ मैंdekho nishchay aata hoon main

Revelation 22:12

"देख, मैं आनेवाला हूँ |" (प्रकाशित Revelation 22:12)

देखो निश्चय आता हूँ मैं, शीघ्र आ रहा हूँ मैं,
हर एक के कामों के प्रतोफल लेकर आ रहा हूँ मैं ||

1.बादलों पर सवार होकर जल्दी आ रहा हूँ मैं,
देखेंगे मुझ को जो हैं तैयार, शुद्धता से तैयार हो तुम |

2.शीघ्र ही आनेवाला हूँ मैं, थामे रख जो तेरे पास,
कि तेरा मुकुट तुझ से छीन न ले जो है तेरे पास |

3.सारी चीजों प्रभु यीशु ही, नयी बना रहा है,
उस के प्रगट होने को जो प्रिय जानते वे धन्य हैं |

4.हे प्रभु यीशु, जल्दी तू आ, बाट जोहते हैं हम तेरी,
दूतों के साथ हम सब मिलकर, हल्लेलूयाह गाऍंगे |
641 मसीह लेने उन्हीं कोmaseeh lene unheen ko
(1 थिस्सलोनिकियों 4:12-18)

मसीह लेने उन्हीं को आता है, जो जयवन्त विश्वासी हैं,
होंगे वारिस सब वस्तु का, सम्पूर्ण उसी के हैं ||

1.बाट जो उसकी जोहते हैं, तैयार अब सब जो हैं,
आना उसका जो प्रिय जानते लेने उन्हीं को आता है |

2.यीशु ने चेलों से कहा था, आऊँगा फिर से मैं,
तैयार कर के जगह में तुम को, ले जाऊँगा जहाँ हूँ मैं |

3.जो मसीह के साथ चलते, जग से अलग जो हैं,
जागते जो रहते और विश्वासयोग्य ऐसों को लेने आता है |

4.पल भर में रूपान्तर होंगे, बादल में पहुँचेंगे,
मिलेंगे प्यारे यीशु से, जो हमको तैयार करता है |

5.सिद्ध, पवित्र, निर्दोष बनाकर, सन्मुख हमें लाएगा,
इनाम तब हम सब प्रभु से लेंगे, यीशु की यह इच्छा है |

6.सदा उसको हम सब भजेंगे, और साथ रेहेंगे,
कैसे अद्‍भुत दिन तब होंगे, हम सब याद करते हैं |
642 अब वह दिन निकट हैab vah din nikat hai
जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा | (1 कुरिन्थियों 3:14)

अब वह दिन निकट है, प्रभु आएगा, (2)
विश्वासयोग्य दास जो मजदूरी पाएगा, (2)
आनन्द से भर जाएगा | (4)

1.हर एक काम तब प्रगट होवेगा, काठ या घास या फूस का रद्दा हो,
सोना, चाँदी या बहुमोल पत्थर हो, आग परखेगी (2), तब तू जान जाएगा |

2.दौड़ने वालों में क्या तू शामिल है ? याद रख एक ही इनाम ले लोग,
लड़नेहार होकर संयमी बन जा, नहीं मरझाएगा, ऐसे मुकुट को पाएगा |

3.आत्माऍं मरती, क्या तुझे बोझ है ? ———————————— है ?
प्रभु जब आएगा, सन्मुख उस के वह, आनन्द बड़ाई ————— बन जाएगा |

4.तू जो प्राचीन है, कलीसिया में, झुंड को सम्भाल और प्रेम से अपना ले,
आदर्श तू बनकर, रखवाली भी कर, महिमा का मुकुट, तुझ को दिया जाएगा |

5.अच्छी कुश्ती क्या तू लड़ चुका है ? दौड़ पूरी की, विश्वास थामा है ?
उस का प्रगट होना प्रिय तुझे है ? धार्मिकता का वह, मुकुट तुझे मिलेगा |

6.भक्ति से यदि तू जीवन बिताएगा, क्लेश और संकट सहना पड़ेगा,
प्राण देने तक विश्वास योग्य रह तू, जीवन का मुकुट, जान रख तू पाएगा |

7.उत्तम आशीष से प्रभु मिलेगा, बिनती तेरी अब प्रभु सुनेगा,
सदा जागता रह प्रार्थना करता रह, कुन्दन का मुकुट, तुझ को वह पहनाएगा |
643 स्वर्गीय महिमा मेंsvargeey mahima mein
"पृथ्वी के सब कुलों के लोग . . . मनुष्य के पुत्र को बड़ी सामर्थ और ऐश्वर्य के साथ आकाश बादलों पर आते देखेंगे |" (मत्ती 24:30)

स्वर्गीय महिमा में, तेजोमय वस्त्र में,
प्रभु आता है संसार में बादल की सवारी में ||

1.अंत के दिनों के चिह्न सब देखो पूरे हो रहे हैं,
दुःख लड़ाई अकाल और मरी, सब होते संसार में,
पाप शोक अब ज्यादा बढ़ रहा है सारे विश्व में,
निश्चय अब प्रभु आता है, तुरही के शब्द में |

2.माता के गर्भ से मनुष्य पाप में वह जन्मा है,
दुष्ट, छल, कपट और अभिमान, इन में सब भरा है,
हृदय का रोग और उन में है, चोरी, हत्या, व्यभिचार,
कुदृष्टि, निन्दा, दुष्टता, लोभ, डाह, कुविचार |

3.घृणित पापों को लेकर तुम स्वर्ग जा नहीम सकते,
दान, पुण्य और धर्म कर्म से शुद्ध हो नहीं सकते,
यीशु ने अपना प्राण दिया, पापी बचाने को,
लोहू बहाया क्रूस पर, घृणित पाप धोने को |

4.मनुष्य का जीवन क्या ही है, क्षण भर में मिटता है,
धन, सम्पत्ति, कुटुम्ब सब छोड़ नरक को जाना है,
क्यों नरक में तुम जाओगे, यीशु बचाएगा तुम्हें,
पाप मार्ग से तुम फिर जाओ, विश्वास से मुक्ति पाओ |
644 राजाओं का राजाraajaon ka raaja
"उसके वस्त्र और जाँघ पर वह नाम लिखा है, राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु |" (प्रकाशित 19:16)

राजाओं का राजा, प्रभुओं का प्रभु,
जग में वह आता सब का वह प्रभु ||

1.सामर्थी दूतों के साथ प्रभु आता, धधकती हुई आग में स्वर्ग से वह आता,
उस दिन यह होगा पवित्र लोगों में, महिमा और आश्चर्य बनेगा प्रभु |

2.प्रभु यीशु आप ही स्वर्ग से उतरेगा, ललकार करेगा, पुकारेगा तब ही,
मरे हो या जीवित, प्रभु के जो होंगे, पल भर में पास बुलाएगा प्रभु |

3.धन्य वे हैं जो बाट जोहते हैं, प्रभु से मिलेंगे साथ जाएँगे,
हरेक जो है सत विश्वासी, स्वागत करेगा प्यार से प्रभु |

4.अनन्त राज्य देगा वह तुझ्को, आदर महिमा देगा वह तुझ्को,
मेल पिता से कराएगा तेरा, जीवन मुकुट देगा तब प्रभु |
645 हो तैयार, सन्तों सबho taiyaar, santon sab

Matthew 25:6

"आधी रात को धूम मची कि देखो दूल्हा आ रहा है |" (मत्ती Matthew 25:6)

हो तैयार, सन्तों सब, है पुकार,
प्रभु यीशु जल्द आता है,
वन्दना, होशाना, राजाओं का राजा आता है,
सुन लो ललकार आज, तुरही का शब्द भी,
दूत प्रधान का शब्द होता है ||

1.रात अब बहुत ही बीत गयी है, देखो, देखो अब दिन निकलता है,
छोड़ो कामों को अन्धकार के जो, ज्योति के हथियार बांधना |

2.चिह्न सब अब तो पूरे हुए हैं, नूह के जमाने को याद रखना है,
लूत की जो स्त्री थी, भूलना नहीं है, जागने का अब समय आया है |

3.दिन सब हमारे गिने हुए हैं, जागनेवालों को क्या डर है ?
आदर के साथ वे ऊपर उठेंगे, जो प्रभु के साथ चलते हैं |

4.हवा में मिलेंगे, प्रभु के जो हैं, मसीह में मरे हैं, सब जीयेंगे,
इकट्ठा होंगे बादल में वे सब, जहाँ पर हमारा प्रभु हाजिर है |

5.मजदूरी देगा वह काम के अनुसार, जयवन्त विश्वासयोग्य जो, वही पाऍंगे,
प्यार के साथ उन से प्रभु कहेगा, मेरा जो कुछ सब रुम्हारा है |
646 देख तेरा राजा आता हैdekh tera raaja aata hai
"तेरा राजा तेरे पास आएगा |" (जकर्याह 9:9)

देख तेरा राजा आता है,
सिय्योन की बेटी खुशी मना,
यरूशलेम की बेटी मगन हो गा ||

1.क्योंकि वह ही धर्मी है, (2)
कामों में निर्दोष भी है (2)
पाप रहित तेरा प्रभु आता है |	(2)

2.मुक्ति लेके आता है,
वह सनातन राजा है,
प्रेम सहित यरूशलेम आता है |

3.नम्र वही दीन भी,
वह दयालु प्रेमी भी,
मनुष्यों में महाराजा आता है |

4.राजकुमार वह शान्ति का,
दया से भरा हुआ,
महिमा सहित यीशु राजा आता है |

5.बादल पर हुआ सवार,
हम सभों का तारणहार,
स्तुति के सिंहासन पर आता है |

6.दाऊद का वह पुत्र है,
पापियों का तारक है,
जय गीत सहित यीशु आता है |

7.भाई-बहिनों, आओ सब,
होशाना तुम गाओ सब,
हल्लेलूयाह यीशु राजा आता है |
647 सिय्योन से राजा आ रहाsiyyon se raaja aa raha
"हे सिय्योन बहुत ही मगन हो . . . |" (जकर्याह 9:9)

सिय्योन से राजा आ रहा, मन को सुधार लो,
तुम अपने राजा के लिए, तन भी संवार लो ||

1.दुनिया के लोग पूछेंगे, तुम्हारा राजा कौन है ?
सामर्थ को उसकी जो सुने, दर्शन न चाहे कौन है ?
मसीह हमारा राजा है, विजय पुकार लो |

2.सवारी उसकी है नहीं, गधे पर सवार है,
वह जिस के घर उतरेगा, उसके लिए उद्धार है,
उस को परखने के लिए, दिल में उतार लो |

3.मसीह को राजा माने जो, वह साथ उसके जाएगा,
इंकार उस का जो करे, बरबाद वह हो जाएगा,
बहुत बड़ा सवाल है, फिर से विचार लो |

4.वह राजाओं का राजा है, और प्रभुओं का प्रभु भी,
महानता उसकी है अपार, वह सब का न्यायी ईश्वर भी,
सदा का राज्य उसका है, आनन्द पुकार लो |
648 यीशु शीघ्र आएगाyeeshu sheeghr aaega
"प्रभु ललकार के साथ उतरेगा |" (1 थिस्सलुनीकियों 4:16)

यीशु शीघ्र आएगा, स्वर्ग से वो उतरेगा,
दूल्हा अपनी दुल्हिन लेने वह पधारेगा || (2)

1.प्रभु उतरेगा ललकार के साथ, (2)
शब्द दूप का होगा फूंकी जाएगी तुरही, (2)
ख्रीष्ट में मरे हुए पहिले जी उठेंगे, (2)
तुम भी क्या, उसके साथ, सम्मुख उस के जाओगे ? (2)

2.उन के कामों के अनुसार प्रभु ने,
जो तैयार किया प्रतिफल पाओगे,
शीघ्र आएगा वो, मिलने तैयार रहो,
चुकोगे, तुम यदि, शर्मिन्दातुम होगे |

3.न घबराना कभी तुम मन में,
मसीह प्रबु पर विश्वास तुम अब करो,
तुम सिद्ध बनो, और तैयार मन से,
प्रार्थना, तुम करो, और जागते रहो |

4.बहुतों के पाप प्रभुजी उठाने,
मसीह अपनी इच्छा से बलि हुआ था,
जो बाट जोहते हैं, केवल उन के लिए,
पाप रहित, यीशु जी, फिर से प्रगट होगा |

5.सूरज डूबते या उगते समय वो,
आधी रात हो या तड़के सुबह शाम हो,
चाहे सोते रहो प्रभु आ जाएगा,
प्रभु में सर्वदा, जागृत अब तुम रहो |
649 अब तुम सब तैयार रहोab tum sab taiyaar raho

Revelation 22:12

"दिख मैं शीघ्र आने वाला हूँ |" (प्रकाशित Revelation 22:12)

अब तुम सब तैयार रहो, ख्रीष्ट यीशु आएगा,
चिह्न सब अब तो दिखते हैं, इसलिए तुम अब बाट देखो ||

1.अविनाशी यीशु आएगा, पूरा करेगा अपना उद्धार,
उठाए जाऍंगे क्षण भर में, ही हो पाए हैं उसका उद्धार |

2.महिमा पाने वो सन्तों में स्वर्गीय यीशु आएगा,
सन्तों को चकित करने के लिए, प्रभु यीशु शीघ्र आएगा |

3.प्रगट करेगा जो गुप्त में हैं, दूल्हा यीशु तो आएगा,
हृदय के विचारों को प्रभु, प्रगट करने शीघ्र आएगा |

4.राज्य करने हजार साल यहाँ, प्रभु यीशु शीघ्र आएगा,
संसार का राज्य जो भी हो, प्रभु का सब हो जाएगा |

5.सब का न्याय करने के लिए राजा यीशु शीघ्र आएगा,
सर्वदा हमें वो साथ रखने, बलवन्त यीशु आएगा |
650 तुरही का शब्द जोturahee ka shabd jo
"तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे उन के साथ बादलों पर उठा लिए जाऍंगे |" (1 थिस्सलुनीकियों 4:17)

1.तुरही का शब्द जो आकाश में होता, सामने यीशु को हम देखेंगे,
धीरज से हम सब बाट जो जोहते थे, सोने वाले यहाँ रह जाऍंगे |

प्रीतम हमारे, प्रीतम हमारे, आओ तुम यीशु हम गाऍं,
हल्लेलूयाह, कैसा आनन्द है, उड़ जाऍं हम सब गाते गाते ||

2.भक्तों के लिए आता चोर की नाई, पवित्र जन ही बदल जाऍंगे,
दूत सब आकाश में इकट्ठा होकर, गीत के वे तूरही फूकेंगे साथ |

3.सुबह के तारे प्रकाश के समान, सुन्दरता पूर्ण मधुरता,
स्वर्ग में अत्यन्त ही बड़ा हुआ वह, मेरे लिए वह दुःख उठाया |

4.पलक मारते ही पवित्र जन सब, उस के साथ रहने वे जाऍंगे,
प्रभु के झुण्ड बादल में पहुँचेंगे, यीशु से वहाँ तब वे मिलेंगे |

5.स्वर्ग में पवित्र जन मुकुट पाऍंगे, स्वर्गदूत देखेंगे खड़े रहेंगे,
दुल्हिन कलीसिया श्वेत वस्त्र पहिनकर, आदर पाएगी प्रभु से वह |

6.हल्लेलूयाह, आनन्द अब करें, हल्लेलूयाह, अब पुकारें,
हल्लेलूयाह, धन्य हो गए, हल्लेलूयाह, आमीन-आमीन |
651 समय अब थोड़ा बाकीsamay ab thoda baakee
"अब बहुत थोड़ा समय रह गया है जब कि आनेवाला आएगा और देर न करेगा |" (इब्रानियों 10:37)

समय अब थोड़ा बाकी रहा, आनेवाला यीशु शीघ्र आएगा,
जरा भी देर न करेगा |

1.प्रभु के आने तक धीरज धरें, अचानक निश्चय वह आएगा,
उस के आने को जो प्रिय जानते हैं, उन को प्रभु साथ ले जाएगा |

2.उसका आना अब नजदीक जानकर, संगति में हम बने रहें,
उस के वचन का पालन करें हम, उस की हम करते हैं प्रतीक्षा |

3.आत्मिक पतन अब हम देखते हैं, प्रेम सब का ठण्डा हो रहा है,
आँखें खोलें और जाग उठें सब, यदि छुट जाऍंगे, क्या हाल होगा ?

4.विश्वासी सब अपनी धुन में आज है, कोई जागते और कोई सोते हैं,
उठाए जाऍंगे जगनेवाले, तब रहनेवालों का क्या हाल होगा ?

5.नूह का जमाना हम स्मरण करें, पश्चाताप के द्वारा सब ठीक-ठाक करें,
छुटकारे का दिन अब तो नजदीक है, उस के बाद अनन्त विश्राम होगा |
652 यीशु आएगा, नरसिंगाyeeshu aaega, narasinga

John 2:28

"उस में बने रहो, कि जब वह प्रगट हो, तो हमें हियाव हो, और हम उसके आने पर उसके सामने लज्जित न हों |” (1 यूहन्ना John 2:28)

1.यीशु आएगा, नरसिंगा ... जल्दी फूंका जाएगा,
तब जलाल के साथ और कुदरत ... यीशु जाहिर होएगा |

काश कि सभोम की मशाले, तेल से हो मामूर,
कि जब यीशु आएगा, हम, जा सकें उसके हुजूर ||

2.क्या तू है तैयार मैं पूछता ... यीशु के लिए तैयार ?
क्या तू उस के लिए जीता ? ... क्या तू उस को करता प्यार ?

3.दुनिया में हम न फँस जाऍं ... न गुनाह में गिर पड़े,
कि हमें अब्दी तारीकी ... बदले में नहीं मिले |

4.तू जो नाम "मसीही रखता" ... पर उसमें न है शरीक,
याद रख यीशु सब कुछ जानता ... और अदालत है नजदीक |

5.वह मुबारक है जो जागता ... दुआ करता है हर आन,
एक जलाली ताज उसी को ... मिलेगा ऊपर वहाँ |

6.यीशु कर मेरी हिदायत ... कि जब सफर हो तमाम,
तब जलाल की बन्दरगाह में ... मुझ को मिल जाए आराम |
653 क्या तैयार हो जब किkya taiyaar ho jab ki

Luke 1:17

"प्रभु के लिए योग्य प्रजा तैयार करे |" (लूका Luke 1:17)

1.क्या तैयार हो जब कि दूल्हा, आएगा, आएगा ? (2)
अब देख वह आता ! अब देख वह आता !
अब जल्द हो हाजिर दूल्हा आता है | (2)

अब देख दूल्हा आता है, (2)
अब देख वह आता ! (2)
अब जल्द हो हाजिर दूल्हा आता है || (2)

2.क्या मशालें जलती होंगी, जब वह आए, जब वह आए ?
वह जल्दी आता ! वह जल्दी आता !
अब जल्द हो हाजिर दूल्हा आता है |

3.दर्शन हम करेंगे, जब वह आए, जब वह आए,
वह देखो आता ! वह देखो आता !
अब जल्द हो हाजिर दूल्हा आता है |
654 यह है मेरी उम्मीदyah hai meree ummeed
"आओ हर एक रोकनेवाली वस्तु और उलझाने वाले पाप को दूर कर के वह दौड़ जिसमें हमें दौड़ना है धीरज से दौड़ें |" (इब्रानियों 12:1)

1.यह है मेरी उम्मीद खुदावन्त आएगा,
वह हम सभों को अपना साथ जरूर ले जाएगा,
वह आएगा, जल्द आए्गा,
देख दुनिया में निशान वह जाहिर होते हैं,
और उसकी दूसरी आमद की वह खबर देते हैं,
वह आएगा वह आएगा |

अब हो बेदार ऐ मेरी जान,
खुदावन्त आता सो हो तैयार,
अपनी मशाल तू ले सम्भाल,
खुदावन्त आता कर इस्तकबाल ||

2.मुसीबतें और काल और मरी और तूफान,
इन सब ने लोगों को किया है बिलकुल परेशान,
वह आएगा, जल्द आएगा,
बरगसतगी फरेब और बढ़ता है गुनाह,
और उसके अपने लोगों में ढ़ूँढ़ा, है ईमान कहाँ,
वह आएगा, जल्द आएगा |

3.पर खुशी की एक बात कि आखिरी बरसात,
हर जगह खूब बरसती है और बख्शती है नजात,
वह आएगा, जल्द आएगा,
देख दुल्हिन करती है दूल्हे का इंतजार,
महिन कतानी कपड़ा पहनकर होती है तैयार,
वह आएगा, जल्द आएगा |

4.गुनाहों को तू छोड़, दुनिया में मुँह अब मोड़,
और अब उलझानेवाली चीजों से तू नाता तोड़,
वह आएगा, जल्द आएगा,
यीशु के लोहू में अब धो अपने कसूर,
तब तू खुदा की नजर में हो जएगा मंजूर,
वह आएगा, जल्द आएगा |
655 एक जलाली मुल्क तैयारek jalaalee mulk taiyaar

John 14:2

"मैं तुम्हारे लिए जगह तैयार करने जता हूँ, यदि मैं जाकर तुम्हारे लिए जगह तैयार करूँ तो फिर आऊँगा |" (यूहन्ना John 14:2,3)

1.एक जलाली मुल्क तैयार है दूर वहाँ आसमान की ओर,
जहाँ मुकद्दस लोग सब हैं खुदा के पास,
जो समय का परदा बीच में है वह जल्द होवेगा दूर,
औरझम देखेंगे दीनदारों की मीरास |

देख बादशाहत जल्दी आनेवाली है (2)
इसलिए ऐ प्यारे दोस्त अब तैयार हो रोज-ब-रोज,
तेरा बादशाह जल्दी आनेवाला है ||

2.देख मसीही लोग थक जाते, उनका बादशाह है कहाँ ?
अब बेहिम्मती में उनकी मदद कर,
नबूबतें पूरी होती देख यहूदी लोग अब सब,
अपने देश को जाते उनके अनुसार |

3.जल्दी बादशाह जाहिर होगा और लड़ाई होई बन्द,
लिखा है वह बादलों पर आएगा,
हल्लेलूयाह उसकी जय हो, वह सदा है फतहमन्द,
और दुश्मन को वह तलवार से मारेगा |
656 आमद देखो, आई मस्सेह कीaamad dekho, aaee masseh kee

Matthew 24:33

"इसी रीति से जब तुम इन बातों को देखो तो जान लो कि वह निकट है वरन द्वार ही पर है |" (मत्ती Matthew 24:33)

आमद देखो, आई मस्सेह की, आमद देखो आई,
बन जाओ असली ईसाई, मसीह की आमद देखो आई ||

1.यीशु मस्सेह के आओ द्वारे ... पापों को धुलवाओ सारे,
होवे खूब सफाई ... मसीह की आमद |

2.सब ने मिलकर माथे पकाए ... बादशाहों ने जंग रचाए,
करते खूब लड़ाई ... मसीह की आमद |

3.काल, भूचाल हैं बढ़ते जाते ... सोते लोगों को हैं जागते,
होश करो तुम भाई ... मसीह की आमद |

4.भाई, भाई पे जुल्म हैं करते ... खौफ खुदा का है न करते,
करते खूद बुराई ... मसीह की आमद |

5.पापों न बहुत सताया ... गल्बा है शैतान ने पाया,
बन जा फिर से शौदाई ... मसीह की आमद |

6.दानिय्येल नबी न फरमाया ... देख जमाना आखिर आया,
दानिश बढ़ती जाती ... मसीह की आमद |

7.यीशु मस्सेह के आओ द्वारे ... आमद में शरीक हो सारे,
बन के असली ईसाई ... मसीह की आमद |

8.आमद की अब करो तैयारी ... क्यों गुनाह ने पत है मारी,
होश करो मेरे भाई ... मसीह की आमद |

9.जय जयकार के मारो नारे ... यीशु मस्सेह है हमारा कफारा,
देओ उसकी गवाही ... मसीह की आमद |

10.जो ईमान मसीह पे लाते ... पापों से वे हैं धुल जाते,
धोखा फिर न खाते ... मसीह की आमद |
657 हमारा जीवन और तारणहारhamaara jeevan aur taaranahaarn
"मसीह जो हमारा जीवन है |" (कुलुस्सियों 3:4)

हमारा जीवन और तारणहार यीशु || (2)

1.प्रभु की आशीषें पाने के लिए, (2)
आ जाओ नवजवानों यीशु के चरणों में, (2)
ईश्वर के पुत्र, पवित्र यीशु का जीवन पा के बढते चलो | (2)

2.यीशु के जो हैं ग्रहण करते,
उनके नाम जीवन की पुस्तक में लिखे जाते हैं,
विश्वासयोग्य पवित्र यीशु का जीवन पा के बढते चलो |

3.परमेश्वर का प्रतिरूप होकर,
यीशु प्रभु अवतारा मनुष्य रूप लेकर के,
मृत्य पर जयवन्त पवित्र यीशु का जीवन पा के बढते चलो |

4.यीशु के लोहू से शुद्ध होकर,
श्वेत वस्त्र लेने को नवजवानों आ जाओ,
महान कृपालु, पवित्र यीशु का जीवन पा के बढते चलो |

5.प्रभु यीशु के नवजवानो,
प्राणों को उसके लिए देने को तैयार रहो,
सच्चे प्रभु और पवित्र यीशु का जीवन पा के बढते चलो |

6.राजाओं का राजा, प्रभुओं का प्रभु,
यही नाम उसकी जाँघ और वस्त्र पर लिखा हुआ है,
सर्वशक्तिमान पवित्र यीशु का जीवन पा के बढते चलो |

7.प्रभु का बुलावा जिन्होंने पाया,
नवजवानों, विजय को विश्वास से पाते जाओ,
शत्रु को यीशु के नाम से हराकर हल्लेलूयाह गीत गाते जाओ |
658 ऐ जवानों अपनी जवानीai javaanon apanee javaanee
"हे जवान ... परमेश्वर तेरा न्याय करेगा |" (सभोपदेशक 11:9)

ऐ जवानों ! अपनी जवानी में आनन्द करो,
क्योंकि तुम्हारे कामों के अनुसार न्याय होगा ||

1.बुराई के लिए दौड़ने से रोककर पैरों को,
ख्रीष्ट यीशु जो चट्टान है पैर रखकर,
तैयार मन से तुम जूते को अब पहनकर,
उद्धार का समाचार अब प्रचार तुम करो |

2.अपवित्रता से तुम्हारे हाथों को अब तुम,
प्रभु यीशु के लोहू से अब तुम धोकर,
पवित्र हाथोम को प्रभु की ओर उठाकर,
पवित्र स्थान में आकर अब प्रार्थना तुम करो |

3.नरक कुंड की आग से यह जलती हुई जीभ,
इस जीभ को सम्मालकर, काबू में लाकर,
स्तुति बड़ाई करो तुम प्रभु यीशु की,
बड़े प्रेम से अपनी जॉभों से सदा |

4.ठोकर देनेवाली अपनी आँखों को,
शरणगढ् जो मसीह है ध्यान देकर,
महिमा की आत्मा से जो मुक्तिदाता है,
महिमा को दिखाने में उपयोग तुम करो |

5.खरा उपदेश सह न सकनेवाले जो तुम
कथा कहानियों पर तुम अब मन न लगाना,
मीठी, धीमी प्रभु यीशु की ऐसी आवाज को,
जो सच्चाई है, सुनने को तुम कान अपना दो |
659 अपने परमेश्वर के स्समनेapane parameshvar ke ssamane
"हे जवान ... |" (सभोपदेशक 11:9)

अपने परमेश्वर के स्समने,
आने के लिए तैयार जो ||

1.अपनी जवानी के दिनों में ... हृदय की लालसा पुरी कर,
परन्तु इन बातोम के लिए ... परमेश्वर तेरा न्याय करेगा |

2.इस से पहिले कि विपत्ति आए ... वे वर्ष आए जब तू कहे,
मेरा मन इस में नहीं लगता ... अपने सृजनहार को स्मरण कर |

3.ऐसा न हो कोई तेरी जवानी ... तुच्छ जाने और निन्दा करे,
प्रभु के पद-चिह्नों पर चल के ... आदर्श जीवन अपना बना |

4.आज्ञाकारी दिनताई से ... आदर करो एक दूसरे का,
दूसरों का कार्य अपना समझकर ... प्रेम अपना दिखलाते जाओ |

5.प्रेम, आनन्द, प्रेम, धीरज, करूणा ... भलाई, विश्वास और नम्रता,
आत्मा के इन सारे फलों को ... अपने जीवन में दिखाते जाओ |

6.सेवा प्रभु की सहनशीलता से ... यदि करते जाओगे,
अपने भले कामों के प्रतिफल ... निश्चय जानो, तुम पाओगे |

7.देखो प्रभु जल्दी आता है ... चिह्न सब पुरे होते हैं,
ह्र्दय में आशा रख के उसकी ... गाते जाओ तुम हल्लेलूयाह |
660 क्रूस ही तेरा निशान आगेkroos hee tera nishaan aage
क्रूस ही तेरा निशान आगे बढ् ऐ जवान,
पीछे न हटना कभी, यिशु है तेरी चट्टान ||

1.नैय्या तेरी मझधार में डूबी, कौन लगाएगा पार ?
केवल यीशु हो सकता है, तेरी नैय्या की पतवार |

2.तेरे ही खातिर आया जगत में, तुझ को बचाने को,
तेरे ही लिए यीशु ने खोला, मुक्ति के द्वारा को |

3.सब के लिए है सुसन्देश, उसी के प्यार का,
सबके दिलों का प्यारा मसीहा, राजा है शान्ति का |
661 तुझ को पहचाने दयालुtujh ko pahachaane dayaalu
"उसके मृत्युंजय की सामर्थ को जानूँ |" (फिलिप्पियों 3:10)

तुझ को पहचाने दयालु यीशुजी,
अनुग्रह अब हम पर कर,
तेरी जी उठने की शक्ति को,
सारे लोग समझ जाऍं ||

1.जवानों में भय तेरा छाए, और ये सभी काँप उठे,
हे प्रभु उन में तेरा उद्धार हो, और पापों की माफी दे |

2.तेरी आवाज सुना दे इन को, मार्ग में तू उनको चला दे,
इन जवानों को प्यारे प्रभुजी, अपना गवाह बना दे |

3.अपवित्र लोगों के मध्य में तेरा वचन देने के लिए,
इन जवानों के उपर तू, आत्मा पवित्र उंडेल दे |

4.तेरी मंडली में ये सब रहकर, दर्शन तेरा यह सब पाकर,
इन जवानों को हे प्रभुजी आनन्द से तू भर दे |

5.तेरी मृत्यु और पुनरुत्थान में, भागीदार ये सब हो जाऍं,
जब दुःख-संकट आए प्रभुजी, स्तुति करना सीखे |

6.तेरे आगमन के लिए निर्दोष, इन के तू ठहरा,
धार्मिकता के फल से प्रभुजी, अब इन को भर दे |

7.ऊँची बुलाहट को ये जाने, योग्य बनें इनाम के लिए,
दौड़ते रहे निशाने की ओर, हल्लेलूयाह गीतों से |
662 सेवा प्रभु की तुम करेseva prabhu kee tum kare
"झट अच्छे से अच्छा वस्त्र निकालकर उसे पहिनाओ |" (लूका 15:22)

सेवा प्रभु की तुम करे ए जवानों आओ,
सुवार्ता फैलाने को अब शक्ति अपनी दो,
जवानों के लिए सेवा करना भला है ||

1.प्रभु यीशु मसीह मरा क्रूर क्रूस पर,
महान छुटाकारा उस ने पापी को दिया,
दिया मनुष्यों को उसने मुक्ति और जीवन,
क्या लोगों को तुम ये बातें न बताओगे ?

2.पाप वस्त्र को यीशु ने उतार दिया,
श्रापित बना तेरे लिए सुन तू ए ! जवान,
ढांपा तुझ हो उस ने बड़े उद्धार के वस्त्र से,
क्या यह समाचार जरूर सब को न दोगे ?

3.पाँवों में सुसमाचार की जूतियाँ दे दी,
हृदय में शान्ति और आनन्द दिया है,
परीक्षा और दुःख होंगे तुम को भी,
क्या प्रभु की सुवार्ता को न बताओगे |

4.खोया जब जग में तू दया उस ने की,
भोज बड़ा देकर उस ने अंगूठी भी दी,
दोषों को ढांप दिया प्रभु है महान,
क्या तुम अपने दोषियों को माफ न करोगे ?

5.पाने के लिए भाई तुम स्वर्गीय इनाम को,
सन्तों की सम्पत्ति देखो अति उत्तम है,
स्वर्गीय दौड़ के लिए अन्त तक तुम दौड़ोगे ?
जीवन मुकुट देगा प्रभु तुम क्या न लोगे ?
663 आगे बढ़ो ऐ जवानोंaage badho ai javaanon

Mark 16:15

तुम सारे जगत में जाकर सुसमाचार प्रचार करो | (मरकुस Mark 16:15)

आगे बढ़ो ऐ जवानों ...
नाम यीशु का परचम लहरा दो ||

1.बहर ओ बर को, पार है करना,
राह की मुश्किलों से खौफ न करना,
मुश्किल को आसान बना दो ... (2) नाम यीशु

2.हर कदम पे जा, वचन सुनाना,
सत्य की राह को सब को बताना,
मंजी को अपना बना लो |

3.बाँध लो कमर, सफर है करना,
इंजील का हर सुप्रचार है करना,
दुनिया बदल कर दिखा दो |
664 अपने जवानी ए जवान तूapane javaanee e javaan too
"अपनी जवानी के दिनों में अपने सृजनहार को स्मरण रख |" (सभोपदेशक 12:1)

अपने जवानी ए जवान तू,
व्यर्थ न कर, अब व्यर्थ न कर ||

1.ईश्वर का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है,
और उस को जानना ही बड़ी समझ है,
फल पाएगा तू ज्ञानी बनकर |

2.तुच्छ न जाने कोई तेरी जवानी को,
चाल चलन पवित्रता और बड़े प्रेम से,
जीवन दिखा सब को आदर्श बनकर |

3.क्रूस तेरी सामर्थ हो और निशान भी हो,
प्रभु का वचन तेरे हृदय में बसा हो,
बलवन्त हो जा दुष्ट पर जय पाकर |

4.जवानी के दिनों में तू सदा यह याद रख,
प्रभु तुझे देखता और सुनता तेरी वह,
इसलिए सदा सृजनहार को स्मरण कर |

5.प्रभु तुझे चाहता है, सेवा उसकी तू कर,
आत्मा बचा जितने जाते हैं नरक की ओर,
प्रभु खुश होगा तेरी सेवा देखकर |
665 नन्हें मुन्ने बच्चों, आओ चलेंnanhen munne bachchon, aao chalen
1.नन्हें मुन्ने बच्चों, आओ चलें,
प्यारे मसीह से हम बातें करें |

मिल के चलें, मिल के चलें,
प्यारे मसीह से हम बातें करें ||

2.खाना और कपड़ा वह देता हमें,
मामा और पापा और भाई बहनें |

3.छोटा प्यारा यीशु कभी न लड़ा,
हम भी किसी से कभी न लडे |

4.कितनी अच्छी चीजें वह देता हमें,
छोटा सा दिल भी उसी को दे दें |

5.प्यार से बुलाता है यीशु हमें,
उछलते, कूदते और गाते चलें |
666 छोटी-छोटी जीवनchhotee-chhotee jeevan
छोटी-छोटी जीवन-गाड़ी
हाथ से नहीं बनती है, (2)
दूर-दूर को जाती है, (2)
कैसी अद्भुत गाड़ी है,	 (2)
छोटी-छोटी जीवन-गाड़ी
हाथ से नहीं बनती है,

1.दो ही स्टेशन होते हैं,
स्वर्ग और नरक बोलते हैं,(2)
मार्ग जो स्वर्ग को जाता है, (2)
बाइबल में वह मिलता है | (2)
छोटी-छोटी . . .

2.इंजिन, घोड़े नहीं होते,
पर दो पाँव से चलती है,
मैंत का घण्टा बजता जब,
तब ही गाड़ी रूकती है |
छोटी-छोटी . . .

3.ताज और झण्डा वीणा भी,
स्वर्ग में हम को मिलेगा,
होशन्ना जय यीशु की,
स्तुति करते रहेंगे |
छोटी-छोटी . . .
667 छोटे बच्चों को दोस्तchhote bachchon ko dost

Matthew 19:14

"बालकों को मेरे पास आने दो |" (मत्ती Matthew 19:14)

छोटे बच्चों को दोस्त है यीशु,
तू दोस्त है यीशु,
मुझे दोस्त बना ले,
मुझे दोस्त बना ले ||

1.दोस्त बना रहना तू छोड़ना न मुझे,
तेरी चाह है मुझे, तेरी चाह है मुझे,
मुझे दोस्त बना ले |

2.अपने निकट रख, नित प्रिय यीशु,
मुझे नेक बना ले, मुझे नेक बना ले,
मुझे दोस्त बना ले |

3.जैसे इस जिन्दगी में बढ़ता मैं जाऊँ,
मेरा हांथ थाम ले, मेरा हाथ थाम ले,
मुझे दोस्त बना ले |
668 मेरा दिल है यीशु का बगीचाmera dil hai yeeshu ka bageecha
"मैं अपनी बारी में आया हूँ |"(श्रेष्ट्गीत Song of Songs 5:1)

मेरा दिल है यीशु का बगीचा,
उसका फल उसको आज दे दूँ |
मुहब्बत के काम मैं करूँ,
मुहब्बत की बोली बोलूँ ||

1.मेरे दिल के बगीचे को साफ कर,
यीशु प्यारे तू,
सारे कांटे और कडुवे दानों को,
मेरे दिल से निकाल दे तू |

2.मेरे दिल के बगीचें में आ जा,
ऐ यीशु प्यारे तू,
इस दिल को कर ले अपना,
इसका मालिक हो जा तू |
669 देखूंगा यीशु राजा कोdekhoonga yeeshu raaja ko

Isaiah 33:17

"तू अपनी आँखों से राजा को उसकी सुन्दरता में निहारेगा |" (यशायाह Isaiah 33:17)

देखूंगा यीशु राजा को ...
मैं हर वक्त देखूंगा ||

1.कोड़े लानत सहनेवाले, यीशु राजा को

2.अपना खून बहानेवाले यीशु राजा को ...

3.जान सलीब पर देनेवाले यीशु राजा को ...

4.मौत पर फतह पानेवाले, यीशु राजा को ...

5.शैतान का सिर कुचलनेवाले, यीशु राजा को ...

6.बादलों पर आनेवाले, यीशु राजा को ...

7.पाप के दाहिने बैठनेवाले, यीशु राजा को ...

8.दूतों के साथ आनेवाले, यीशु राजा को ...

9.र्रजाओं के राजा को, यीशु राजा को ...
670 दुनिया में सब सेduniya mein sab se
दुनिया में सब से प्यारी पुस्तक बाइबल, (2)
पढ़ें जो इस को रोज-ब-रोज,
मार्ग में खतरा कोई न हो,
ओ ! दुनिया में सब से प्यारी पुस्तक बाइबल ||
671 क्या ही बेशकीमतkya hee beshakeemat
"What a wonderful treasure"

क्या ही बेशकीमत खजाना,
तोहफा खुदा का शहाना,
दोनों सफर करेंगे,
मेरी बाइबल और मैं |
672 ईश्वर का सच्चा प्रेमeeshvar ka sachcha prem
1.ईश्वर का सच्चा प्रेम मिलता है धर्म पुस्तक में |	(2)

पढ़ो, पढ़ो भाई, ढूँढ़ो, ढूँढ़ो भाई,
मिलता है अनन्त जीवन |	(2)

2.ईश्वर का सच्चा ज्ञान मिलता है धर्मपुस्तक में |

3.ईश्वर की सच्ची शान्ति मिलती है धर्मपुस्तक में |

4.ईश्वर की सच्ची ज्योति मिलती है धर्मपुस्तक में |

5.ईश्वर का दर्शन मिलता है धर्मपुस्तक मे |

6.ईश्वर का अनुग्रह मिलता है धर्मपुस्तक में |

7.ईश्वर का वरदान मिलता है धर्मपुस्तक में |
673 खुदा के वायदे नहींkhuda ke vaayade nahin
खुदा के वायदे नहीं टलेंगे,
जो कुछ भी गिरे वे रहेंगे,
अगर बुझ जाऍं आसमान के तारे,
तौभी वे वायदे रहेंगे |
674 हर एक वायदा मेरेhar ek vaayada mere
हर एक वायदा मेरे लिए है,
हर एक बाब, हर एक आयत, हर एक लाईन,
उस के प्यार की सारी बरकतें,
हर एक वायदा मेरे लिए है |
675 बरकत और इज्जतbarakat aur ijjat
"Blessing and honour and glory"

बरकत और इज्जत और जय तेरी हो,
और जय तेरी हो ... और जय तेरी हो ...
बरकत और इज्जत और जय तेरी हो,
कि तु ही तख्त पर है |
तारीफ, तारीफ हर जुबान ललकारे,
तारीफ, तारीफ कि तू ही तख्त पर है |
बरकत और ... कि तू ही तख्त पर है |
676 मैं खुश हूँ और खुश हूँmain khush hoon aur khush hoo
"I am so happy"

मैं खुश हूँ और खुश हूँ, इसलिए
मेरा बोझ उठाया यीशु ने,
अब मैं गाता गीतें खुशी से,
सारा बोझ उठाया यीशु ने |
एक समय घबराहट मेरे दिल में थी,
यीशु ने हटाकर मुझ को शान्ती दी,
अब मैं गाता गीतें खुशी से,
सारा बोझ उठाया यीशु ने |
677 खुशी खुशी मनाओkhushee khushee manao
खुशी खुशी मनाओ, खुशी खुशी मनाओ,
बोलो बोलो मसीहा की जय, जय, जय |
मेरे लिए आया, मेरे लिए जीया,
मेरे लिए यीशु ने दुःख उठाया,
मेरे लिए मारा गया, मेरे लिए गाड़ा गया,
मेरे लिए फिर जी उठा, मेरा है मसीह.
मैं मसीह का हूँ ... हम मसीह के हैं,
खुशी खुशी मनाओ ... बोलो, बोलो ... जय, जय, जय |
678 जीवन की रोटीjeevan kee rotee
I am feeding on the Living Bread

जीवन की रोटी हम खाते हैं,
सोते से पानी पिते हैं,
और जो कोई पीवे यीशु ने कहा . . .
कि कभी प्यासा न होगा |
क्या प्यासा न होगा ?
नहीं, बभी न होगा |
क्या प्यासा न होगा ?
नहीं, बभी न होगा |
और जो कोई पीवे यीशु ने कहा . . .
कि कभी प्यासा न होगा |
679 जब मैं पाक कलामjab main paak kalaam
जब मैं पाक कलाम सुनूं ऐ खुदा,
तू आ फजल से मन को खोल दे |
तू आ फजल से कान को खोल दे |
तू आ फजल से आँख को खोल दे |
680 फतह आगे हैphatah aage hai
फतह आगे है, फतह आगे है,
यीशु मसीह के नाम से फतह आगे है,
यीशु पर भरोसा रख के पाँव उठाता हूँ,
ईमान से फतह मेरे आगे है |
681 वह न छोड़ेगाvah na chhodega
No never alone, no never alone

वह न छोड़ेगा, वह न छोड़ेगा,
अपने वायदे के मुआफिक,
हमें न छोड़ेगा,
वह न छोड़ेगा, वह न छोड़ेगा,
अपने वायदे के मुआफिक,
कभी न छोड़ेगा |
682 बोलो जय कि बोझ गिर गयाbolo jay ki bojh gir gaya
बोलो जय कि बोझ गिर गया,
समुद्र की तह में गिर गया,
उस को फिर मैं न देखूंगा ...
उससे दुःख मैं न पाऊँगा,
ओ, बोलो जय कि बोझ गिर गया,
समुद्र की तह में गिर गया |
683 मसीह की जय जयmaseeh kee jay jay
I’ve got the joy, joy . . .

1.मसीह की (जय ४)
मेरे दिल में है,
मेरे दिल में है, हल्लेलूयाह
मेरे दिल में है,
मसीह की (जय ४) मेरे दिल में है,
उसकी हो तारीफ |

2.मसीह का (प्यार ४)

3.मसीह का (आनन्द ४)

4.मसीह की (शान्ति ४)

5.मसीह का (जीवन ४)
684 मसीह के खून की जयmaseeh ke khoon kee jay
मसीह के खून की जय,
जो बहता रहता है,
जो सदा बहता है,
उसमें धो के गुनाहगार,
पाक साफ हो जाता है |
685 यीशु नाम की जयyeeshu naam kee jay
यीशु नाम की जय जय हो,
उसके मार खाने से मैं चंगा हुआ,
यीशु नाम की जय जय हो |
686 हर एक यह बात जानेhar ek yah baat jaan
Everybody should know

हर एक यह बात जाने,
हर एक यह बात जाने,
मेरा प्रभु कैसा अजीब है ...
हर एक यह बात जाने |
687 यीशु के पीछे मैंyeeshu ke peechhe main
I have decided to follow Jesus

1.यीशु के पीछे मैं चलने लगा,
न लौटूंगा, न लौटूंगा |

2.गर कोई मेरे साथ न आवे,
न लौटूंगा, न लौटूंगा |

3.संसार को छोड़कर सलीब को लेकर,
न लौटूंगा, न लौटूंगा |

4.अगर मैं उस का इनकार न करूँ,
ताज पाऊँगा, ताज पाऊँगा |
688 युग युग से तू एकसाyug yug se too ekasa

Malachi 3:6

"क्योंकि मैं यहोवा बदलता नहीं |" मलाकी Malachi 3:6

युग युग से तू एकसा, हे अद्भुत परमेश्वर,
न कोई अदल बदल और न कोई छाया है,
न कोई परिवर्तन प्रभु यीशु तुझ में है |

1.कल और आज युगानुयुग, प्रभु तू तो एकसा है,
हरेक युग में तू ही, पिता, पुत्र और आत्मा है,
सर्वव्यापी, सर्वदर्शी, सर्वज्ञानी ईश्वर है |

2.मैं यहोवा न बदलता, प्रभु तू ने यह कहा है,
जगत के उत्पत्ति से पहले योजना जो तेरी है,
और संकल्प तेरा जो था, आज तक यह स्थिर है |

3.सनातन से सनातन तक, तेरा प्रेम जो एकसा है,
करूणा, ममता और सहशीलता, जो सब कुछ वैसा ही है,
तेरी मुक्ति जो महान है लोग आज भी पा रहे हैं |

4.वाचा मेरी जो अटूट है, प्रतिज्ञा सदा स्थिर है,
उसी वाचा को स्मरण करके प्रभु देहधारी हुआ है,
पापी के लिए प्रायश्चित किया और प्राण तू दिया है |

5.यदि तू यीशु बदलता, हम नाश सब हो जाते,
लेकिन तू कभी न बदला, यह हम सब जानते हैं,
इसलिए आभारी होकर हम सब गुण तेरा गाते हैं |

6.हे न बदलनेवाले, सुन ले यह बिनती है,
पृथ्वी के रहनेवालों पर जब परख का समय आए,
बचा रखना, प्रभु हमारे, यह हम सब चाहते हैं |
689 प्रभु यहोवा बदलता नहींprabhu yahova badalata nahin

Malachi 3:6

"मैं यहोवा बदलता नहीं |" मलाकी Malachi 3:6

प्रभु यहोवा बदलता नहीं, वह परमेश्वर है,
यदि वह बदले नाश सब होंगे, दया करने में वह धनी है ||

1.कौन खड़ा रह सकेगा, जब प्रभु यीशु आयेगा ?
परखेगा आप ही सब को आग से, जैसे सोना परखते हैं,
ले जायेगा संग उनको ही जिनको निर्मल किया है |

2.अब कुल्हाड़ा पेड़ों के जड़ पर रख दिया गया है,
जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता कट कर आग में जाता है,
मन फिराव का योग्य फल हमको निश्चय ही लाना है |

3.उस का सूप उसके हाथ में है खलिहान साफ करेगा,
गेहूँ से भू्सा अलग वह करके भूसा जला देगा,
गेहूँ खन्ते में रखे जाऍंगे क्योंकि वे प्रभु के हैं |

4.दिन आया है मंदिर-वेदी प्रभु इनको नापेगा,
यरूशलेम और भजन करते जो सब नापे जायेंगे,
आज ही अपने आपको नाप ले प्रभु के कोप से बहना है |

5.पवित्र नगर काटक उस के और जो शहरपनाह है,
सोने का गज वह हाथ में लेकर इन को भी नाप रहा है,
यदि हम उस के नाप में रहे, तब मीरास पाना है |
690 ईश्वर से भेट करनेeeshvar se bhet karane

Amos 4:12

"अपने परमेश्वर के सामने आने के लिए तैयार हो जा |" आमोस Amos 4:12

ईश्वर से भेट करने (2), तैयार हो जा (2),
वह आ रहा है, आ रहा है, शीघ्र ही आ रहा है ||

1.रात्रि के वस्त्र को अब तू निकाल दे,
गंदा मलिन और दाग सब लगे हैं,
लोहू से धो डाल कही मैल न रह जाये,
सुन्दर श्वेत मलमल तुझ को पहनना है |		वह आ रहा है ...

2.दूल्हे से भेंट करने क्या तू तैयार है ?
कुप्पियों में क्या तू तेल भी भरा है ?
मशालें जलती क्या मार्ग को दिखाने ?
चुने हुओं के साथ अंदर जाना है |			वह आ रहा है ...

3.समय अब थोड़ा जो बाकी रहा है,
युग अनुग्रह का यह आखरी घड़ी है,
कर ले सब ठीकठाक प्रभु के सन्मुख में,
निर्दोष तू बन जा प्रभु चाहता है |			वह आ रहा है ...

4.प्रभु के आने में देर यदि हो जाए,
निश्चिन्त न होना, न पाप में तू फँसना,
जागते रहना सदा प्रार्थना करना है,
अन्त तक विश्वासयोग्य तुझे रहना है |		वह आ रहा है ...

5.करेगा न्याय प्रभु बहुत ही सच्चाई से,
परखेगा तुझको वह अपनी आँखों से,
पवित्र बेदाग तू है, प्रमाण करना है,
आशीष, आदर मुकुट तब लेना है |			वह आ रहा है ...
691 हे मनुष्य के सन्तानhe manushy ke santaan
"हर एक बात का एक अवसर ... एक समय है |" सभोपदेशक 3:1

हे मनुष्य के सन्तान, तू इतना जान,
कि दिन तेरे कभी भी नहीं एक सामान ||

1.क्या तू जानता है, कि आया है कहाँ से ?
और लौटकर जायेगा, कहाँ तू यहाँ से ?
क्या है ठिकाना, तेरा इस जीवन का,
क्षणभर के लिए यह भाप के समान |

2.आज जो धूप तेरे जीवन में खिली है,
यह जान रख अंधेरा कल हो सकता है,
कभी धूप और कभी छाँव, यह जीवन में सिद्ध है,
सोच ले, समझ ले, अब छड़ सब मान |

3.हर बात का एक समय जो होता है,
हर काम का एक उद्देश्य भी रखा है,
आकाश और पृथ्वी और उसके नीचे जो,
ईश्वर ही सृष्टिकर्ता, तू यह जान |

4.जन्म का समय है और मरने का समय भी,
उसके बाद न्याय का होना ही निश्चय है,
यदि तू चाहता है कि दण्ड से बच जाये,
अभी यही समय है पश्चाताप को तू जान |

5.ईश्वर ठीक समय में प्रेम सब से किया,
तीशु ने प्राण अपना समय में दिया,
पवित्र आत्मा का समय है, कहना
तेरा समय है मसीह को तू जान |

6.ईश्वर का समय मनुष्य के लिए है,
हर जाति, भाषा और सब सृष्टि के लिए,
मौका वह देता अब मन को फिरा ले,
समय अब है निर्णय का तू यह जान |

7.समय आ गया है पृथ्वी के अन्त का,
प्रभु यीशु का समय है आने का,
उस के जो मरे या जिवित रहे हैं,
ले जायेगा उनको यह भी तु जान |
692 यीशु चरवाहा तू मेराyeeshu charavaaha too mera

Psalm 23:1

"यहोवा मेरा चरवाहा है |" भजन Psalm 23:1

यीशु चरवाहा तू मेरा, भेड़ तेरी मैं,
पीछे चलूंगा (2), तेरे प्रेम के खातिर मैं तुझे भजूंगा ||

1.अच्छा चरवाहा तू तो है,
अपनी भेड़ों के लिए तू ने प्राण दिया है,
शैतान के हाथ से मुझे छुड़ाया, न्यायदण्ड तू ने हटाया,
मैं गाऊँगा, मैं भजूंगा, महान उद्धार के गीत मैं गाऊँगा |

2.महान चरवाहा तू ही है,
अपनी भेड़ों को सिद्ध तू कर रहा है,
आता वह दिन जब तू उन्हें निर्दोष हाजिर करेगा,
तेरी इच्छा, तेरी आज्ञा मानकर तुझे मैं प्रसन्न करूँगा |

3.प्रधान चरवाहा तू ही है,
अपनी भेड़ों को लेने आ रहा है,
जिनको तू ने तैयार किया उन को तू ले जायेगा,
महिमा, मुकुट देगा उन्हें, मजदूरी का फल मैं पाऊँगा |
693 भज ले, भज लेbhaj le, bhaj le

Psalm 45:11

"वह तेरा प्रभु है, तू उसे दण्डवत कर |" भजन Psalm 45:11

भज ले, भज ले, प्रभु यीशु भज ले,
वही तेरा तो सृष्टिकर्ता और रूपदाता है,
जीवनदाता वही, तेरा मुक्तिदाता है ||

1.प्रेम किया वह तुझ से जो सनातन का है,
चुन लिया वह तुझ को सृष्टि के पहले से,
ईश्वर देहधारी हुआ नाम उसका यीशु है |

2.याहूब को वह सिरजा, इस्राएल को रूप दिया,
मत डर उसने कहा, मैं ने तुझ को छुड़ाया है,
नाम लेकर वह बुलाया और कहा तु मेरा है |

3.जल में से तू गुजरे या अग्नि भयानक हो,
बिजली आँधी गर्जन या घोर अंधेरा हो,
साथ-साथ चलता वही, क्योंकि तू जो उसका है |

4.प्रेम से तुझे प्रभु सिरजा ताकि तू उस की महिमा करे,
अपना रूप तुझे दिया ताकि तू उसकी स्तुति करे,
अनमोल तुझ को बनाया और आदर भी दिया है |

5.साथ-साथ तेरे चलता क्या तू उसको देखता है ?
छिदे हाथ से सम्भालता अनुभव क्या किया है ?
तेरे दुःख में दुःखी, वह कभी न छोड़ता है |

6.संगति में सदा जुटता तेरा दर्शन पक्का रहे,
चाहे कुछ भी आए प्रभु के पक्ष में रहना,
अन्त में इनाम पायेगा, प्रभु ने यह कहा है |
694 सुन लो, सुन लोsun lo, sun lo

Romans 13:12

"रात बहुत ही बीत गयी है, दिन निकलने पर है |" रोमियों Romans 13:12

सुन लो, सुन लो, ध्यान से सुन लो,
कोई पुकार रहा है (2), बोझ से पुकार रहा है,
रात बहुत बीत गयी है, दिन निकलने पर है,
वह दिन अब आता ही है ||

1.समय को जानकर अभी तैयार होना है,
जागो उठो, अभी नीम्द से जागना है, प्रभु शरण आना है,
हव घड़ी अब तो आ पहुँची है, छुटकारा अब तो निकट है |

2.इसलिए अब तो पाप से निश्चय बचना है,
सावधान रहो वह दिन फन्दा बन जाये, अचानक न आ जाये,
सारी पृथ्वी के लोगों के ऊपर प्रभु का दिन निकट अब है |

3.जागते रहना और सदा प्रार्थना करना है,
योग्य अब बनो बचना सब घटनाओं से जो जग पर आ रही है,
मसीह के सन्मुख खड़ा होना है, न्याय का सामना करना है |

4.त्यागो उन कामों को, अंधकार से जो होते हैं,
हथियार बंधो ज्योति के जो सब हैं, शत्रु से लड़ना अब है,
दिन को जो सोहता वैसा ही करना, सीधी चाल चलना अब है |

5.प्रभु यीशु को पहनकर तैयार रहना ही है,
वस्त्र उतारो जो मलिन हो गये है, लोहू से धुलवाना है,
गवाही को अपनी उज्ज्वल रखना है, क्योंकि प्रभु आता है |
695 यरूशलेम की बेटीyarooshalem kee betee
"हे सिय्योन, बहुत ही मगन हो ... क्योंकि तेरा राजा तेरे पास आएगा |" जकर्याह 9:9

यरूशलेम की बेटी, सिय्योन की प्यारी बेटी,
आनन्द तू कर अब ऊँची आवाज से बहुत ही हर्षित होकर,
देख तेरा राजा आ रहा है, तैयार तुझे रहना है ||

1.तू जो मसीह की कुवांरी कन्या, उसी के लिए ठहारायी हुई है,
उद्धार का वस्त्र पहनकर के बहुत ही सुन्दर और महिमित है,
परखी गयी और शुद्ध हुई है, राजा के महल में तू जाएगी,
क्या तू अब तैयार है ?

2.सोने के काम तेरे वस्त्र पर है, राजा के मन के अनुसार वह है,
तेरी सहेलियाँ कुंवारी भी तेरे पीछे वे जायेगी,
हर्ष आनन्द सब करते हुए, महल में राजा के वे आऍंगी,
आशा में तैयार रहना है |

3.प्रेम न करना संसार से अब तू मन न लगाना किसी से अब तू,
ख्रीष्ट का तू है और वह तेरा है, उसके ही याद में रहना अब तू,
यात्री तू है तेरा घर ऊपर है, परदेशी होकर यहाँ रहना है,
जाने को तैयार रहना है |

4.ख्रीष्ट का आना बड़ा अद्‍भुत होगा, पहले जो उसके उठाये जाऍंगे,
संतो के साथ फिर जब आएगा, हरेक की आँखें उसे देखेगी,
देखेंगे उस को छाती पीटेंगे, क्योंकि उन्होंने उस को वेधा था,
प्रचार कर तैयार रहना है |

5.प्रभु यीशु को जो नकारे थे, जग के मुक्तिदाता को तुच्छ जाने थे,
पाऍंगे दण्ड वे यीशु से तब, नरक में सदा तक वे जलेंगे,
लेकिन दुल्हिन सदा साथ रहेगी, दूल्हा और वह सदा राज्य करेंगे,
जय जयकार तुझे करना है |
696 यीशु बिना सब सूनाyeeshu bina sab soona

John 6:68

"हे प्रभु हम किसके पास जाऍं ? अनन्त जीवन की बातें तो तेरे ही पास है |" यूहन्ना John 6:68

यीशु बिना सब सूना, क्या कभी तुम ने यह जाना ?
आओ, सीकें हम, यह बड़ा भेद है, फिर सब को सिखाना ||

1.ख्रीष्ट बिना क्या जी सकते हो, क्या कोई और है ठिकाना ?
संसार, मित्र, जितना अपना हो, एक दिन होंगे अनजाना |

2.जग का जो मौज है लगता प्रिय है, हँसना और आनन्द मनाना ?
सब कुछ व्यर्थ है, हवा को पकड़ना, क्या कभी वह प्रिय जाना |

3.मर्जी जो अपनी पूरी करने में, किसी की न सुना और माना,
प्रभु के हृदय में दुःख को पहुँचाया, कभी भी न मन में यह जाना |

4.अभी भी समय है सचेत होने का, पश्चाताप टूटकर करना,
सब कुछ ठीकठाक कर के प्रभु से, तब प्रिय आगे तुम बढ़ना |

5.रात बहुत बीती दिन आता है, ज्योति के हथियार तुम पहनना,
यात्रा के लिए क्या प्रबन्ध किया है ? शरीर को जगह न देना |

6.जगते रहो सब, प्रार्थना सदा करो, बचना है बुरे समय से,
योग्य अब बनना है प्रभु के जो हैं, सामने उस के खड़ा होना |

7.आएगा प्रभु जब देखेगा हमें तब, बहुत ही प्यार वह करेगा,
श्वेत मलमल पहनकर दुल्हिन तैयार है, युग युग साथ उस के रहना |
697 मैं तो बान्ध लिया हैmain to baandh liya hai

Philippians 3:20

"हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है |" फिलिप्पियों Philippians 3:20

मैं तो बान्ध लिया है चलने का समान,
दूर देश है नगरिया, मार्ग है आसान || साथी मैं तो बान्ध . . .

1.जाना चाहते यदि उस नगर को, नया जन्म प्रभु यीशु से ले लो,
ग्रहण करो ख्रीष्ट मुक्तदाता को, बन जाओ उस के सन्तान |

2.तैयार करेगा अब ईश्वर तुमको, पवित्र, निर्दोष, निष्कलंक सबको,
करेगा उपस्थित एक एक व्यक्ति को, पाओगे बड़ा सन्मान |

3.अद्‍भुत वह नगर प्रेम से बनाया, सुन्दर स्वर्गीय गौरव से भरा,
सनातन का वह राज्य धार्मिकता का, राजा की नगरी महान |

4.दौड़ा चला हूँ निशाने की ओर अब, बाधा बहुत और रुकावट भी सब,
लेकिन देखूँगा मैं प्रेमी मसीह को, पूरा होगा अरमान |

5.प्रभु मैं चाहता की तुझे पाऊँ, आशा मेरी है तुझ में खो जाऊँ,
अन्त समय में (2), मैं गाऊँ तेरा नाम, हो जाए कल्याण |
698 कब तक दो मन के रहेंगेkab tak do man ke rahenge
"तुम कब तक दो मन के रहेगे |" 1 राजा Kings 18:21

कब तक दो मन के रहेंगे ? पक्का निर्णय हमें करना है,
यहोवा हमारा प्रभु है, या कोई और प्रभु बना है ?

1.ठानते हैं हम यह अभी से, मुँह से अपराध की बात न निकले,
हृदय में जो गुप्त पाप है, उसे हम अब निकालते हैं |

2.छल-कपट भेरे जीवन से, आओ हमें पश्चाताप करना है,
पवित्र निष्कलंक रहकर, वह दिन उपस्थित होना है |

3.मौका न देंगे हम यीशु को, लापरवाही से हमें बचना है,
मनुष्य को खुश नहीं करेंगे, प्रभु की इच्छा में रहना है |

4.अपने परमेश्वर के नाम में, शैतान का सामना हमें करना है,
जो कुछ प्रभु हम से कहता है, पूरे हृदय से उसे मानना है |

5.बीती बातों को आओ हम भूलें, अपने आप को अप अर्पण करें,
पीछे कभी न हम हटेंगे, निशाने की ओर हमें दोड़ना है |

6.भक्तों की नाई हम ठाने हैं, कि दुनिया से मिलन न होंगे,
स्वर्गीय क्रम में बने रहकर, आत्मिक ऊँचाई में हमें चढ़ना है |

7.यदि यीशु हमारा प्रभु है, उस के आधीन हम सब रहेंगे,
केवल उस को प्रसन्न करके, बाट उसकी हमें जोहना है |
699 हे पहरुआ क्या तूhe paharua kya too

Isaiah 21:11

"हे पहरुआ, रात का क्या समाचार है ?" यशायाह Isaiah 21:11

हे पहरुआ क्या तू जानता है ? कोई तुझको पुकारता है,
रात कितनी है तू बता दे अब, कोई तुझ को पूछता है ||

1.क्या उत्तर तेरा अब ये है, भोर होती है और रात भी,
यदि तुम पूछना चाहते पूछो, फिर लौट कर आना है |

2.प्रभु ने तुझ को ठहराया है, क्योंकि तू उसका पहरुआ है,
जागना ही तेरा काम है, अब नींद को तो भूलना है |

3.ऊँचाई पर तुझ को रहना है, ताकि तू दूर दूर देख सके,
शत्रु की गीत को देखकर, अब सब को उठाना है |

4.आत्मिक हथियार से तू सजकर, जागने के बुरुज पर रहना है,
नरसिंगे को तू फुंककर के, सन्तों को जगाना है |
700 अब ढाढ़स बाँधोंab dhaadhas baandhon

John 16:33

"ढाढ़स बाँधों, मैंने संसार को जीत लिया है |" यूहन्ना John 16:33

अब ढाढ़स बाँधों, यीशु ने कहा है,
संसार को मैंने जीत लिया है ||

1.मिसर में जब तुम थे, छुड़ाया था मैंने,
जब यात्रा में थे सम्भाला था मैंने,
वाचा अपनी स्मरण करके कार्य किया,
जाति जातियों को मैं ने हार दी है |

2.विधियों का जो लेख तुम्हारे नाम पर था,
विरोध में भी जो था उस में बन्धे सब थे,
क्रूस पर कीलों से जड़कर हटाया जो मैं,
खुल्लमखुल्ला शैतान को हरा दिया है |

3.मेरे हाथ में देखो दाऊद की कुंजी है,
अधोलोक की कुंजी, अथाहकुंड की भी है,
सब कुछ खोलना बन्द करना मेरे हाथ में है,
हिम्मत रखकर तुम को मुझ से बल पाना है |

4.मेरे वचन को धीरज से जो थामे हैं,
बचा रखूंगा मैं जब संसार परखा जाये,
रक्षा करूँगा मैं जब संकट आये,
आँखे रखूंगा मैं मेरा ये वायदा है |

5.आज तक तुम को कभी भी न छोड़ा,
हर समय हर दशा में मैं साथ साथ रहा,
जब तुम दुःखी हुए, मैं भी दुःखित हुआ,
मेरा बलवन्त अदृश्य हाथ जो चलाया है |
701 यहोवा ही प्रभुyahova hee prabhu
यशायाह Isaiah 12

यहोवा ही प्रभु और ईश्वर,
जो महिमा और आदर के योग्य है,
वध हुआ मेम्ना तू ही है, सदा था, रहेगा और अब है ||

1.तू मुझ पर क्रोधित हुआ था, पर अब तू तो शान्त हुआ है,
तेरी शान्ति अब मुझ को तू देकर, आनन्दित और हर्षित किया है,
मेरा हृदय तुझको धन्यवाद देता है, और खुशी से भरपूर है |

2.प्रभु यीशु मेरा उद्धार भी है, और भरोसा मेरा उस पर है,
अब लज्जित होना न पड़ेगा, और न मैं कभी घबराऊँगा,
क्योंकि तू ही मेरा अब बल बना है, और भजन का विषय भी है |

3.उस उद्धार के कुऍं से तुम सब आनन्दित होकर जल भरोगे,
और उस दिन तुम ये भी कहोगे प्रभु की स्तुति और बड़ाई हो,
सब जातियों में उसका प्रचार करो और कहो की वह महान है |

4.यहोवा का भजन सब गाओ, क्योंकि प्रतापमय काम किया है,
और पृथ्वी में प्रगट भी करो, क्योंकि वही उद्धार करता है,
प्रेम करता सबसे बचाता नरक से, आज सब को बुलाता वह है |
702 हे इब्रहीम, इसहाकhe ibraheem, isahaak
"मैं इब्रहीम का, इसहाक का और याकूब का परमेश्वर हूँ |" निर्गमन 3:6

हे इब्रहीम, इसहाक, और इस्राएल का ईश्वर जो,
जीवित सदा है तू ||

1.एलोहीम, अदोनाई, त्रिएक ईश्वर तू,
मालिक और सिरजनहार भी है तू,
सबको बचाता है अद्‍भुत है तू |

2.यहोवा परमेश्वर, प्रभुओं का प्रभु तू,
दर्शन देनेवाला ईश्वर तू,
खुद को सम्भालता और अनन्त है तू |

3.एल-शद्दाई प्रबु तू, सर्वशक्तिमान तू,
तृप्ति का भंडार है जो तू,
बहुतायत का ईश्वर, रक्षक है तू |

4.यहोवा-यीरे तू, उपाय जो करता तू,
तहोवा-रोपे चंगाकारी है तू,
यहोवा-निस्सी विजय देता है तू |

5.यहोवा-कादेश तू, पवित्र करता है तू,
यहोवा-शालेम, प्रभु शान्ति है तू,
यहोवा-सिदकेनु, धार्मिकता है तू |

6.यहोवा-रोही तू, जग का रखवाला तू,
भेड़ों को कभी भी न छोड़ता है तू,
साथ अपने उनको ले चलता तू |

7.यहोवा-शाम्मा तू, उपस्थित यहाँ तू,
और रहेगा प्रभु युग युग तू,
सदा हम को अपने पास रखेगा तू |
703 मैं शीघ्र आनेवाला हूँmain sheeghr aanevaala hoon

Revelation 22:20

"आमीन, हे प्रभु यीशु आ !" प्रकाशित Revelation 22:20

"मैं शीघ्र आनेवाला हूँ", यीशु ने कहा,
हम कहते हैं, आमीन, हे प्रभु यीशु आ |
आमीन, आमीन, हे प्रभु यीशु आ !

1.पिय यीशु को स्वीकार कर के ... यीशु की सेवा करना है,
अपना दीपक जलता हुआ ... और चमकते भी रखना है,
हे प्रभु यीशु आ | हे प्रिय यीशु आ | ... आमीन ... आमीन

2.प्रभु यीशु आनेवाला है ... हमें तो जागते रहना है,
लापरवाही से नहीं जीना है ... पर तैयार होकर रहना है,
हे प्रभु यीशु आ | हे प्रिय यीशु आ | ... आमीन ... आमीन

3.मसीह यीशु आनेवाला है ... हमें साक्षी बनकर रहना है,
सच्चे चेले हमें बनाना है ... उस के काम में लगे रहना है,
हे प्रभु यीशु आ | हे प्रिय यीशु आ | ... आमीन ... आमीन

4.दूतों के साथ जब वह आए ... हम विश्वास योग्य पाये जाए,
विश्वास से आगे बढ़ना है ... चैकसी के साथ हमें चलना है,
हे प्रभु यीशु आ | हे प्रिय यीशु आ | ... आमीन ... आमीन

5.जो जयवन्त जीवन जीयेंगे ... हवा में उठा लिए जायेंगे,
प्यारे यीशु से मिलेंगे ... सदा विश्राम हम पाऍंगे,
हे प्रभु यीशु आ | हे प्रिय यीशु आ | ... आमीन ... आमीन

6.प्रभु यीशु के आने के समय ... मन आनन्द से भर जाऍंगे,
ललकार से आते हुए ... सुन्दर यीशु को देखेंगे,
हे प्रभु यीशु आ | हे प्रिय यीशु आ | ... आमीन ... आमीन
704 क्या तेरी गवाहीkya teree gavaahee

Acts 15:26

"ये तो ऐसे मनुष्य हैं जिन्होंने आपने प्राण हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम के लिए जोखिम में डाले हैं |” प्रेरितो Acts 15:26

क्या तेरी गवाही? क्या है तेरा बलिदान?
मसीह यीशु को ग्रहण करके, क्यों तुम सोने लगे?
जागो ... उठो ... आओ ... विश्वासी ||

1.प्रेरितों के समय में ... हिंसा जब प्रबल हुई,
सब कुछ सहते हुए ... आत्मा बचाते रहे |

2.पत्थरवाह किये गये ... आरे से चीरे गये,
प्रचार वह करते रहे ... दर्शन में बने भी रहे |

3.कोड़ो से मारे हये ... कैद में भी डाले गये,
कैद की बेड़ियाँ भी ... उनको तो रोक ना सकी |

4.कुर्बानी देते हुए ... सेवा वह करते रहे,
वचन तो फैलता हया ... मंडली बनती गयी |

5.पके खेत तो बहुत हैं ... काटने वाले मजदूर थोड़े हैं,
मजदूर तू बन जा अभी ... समय अब थोड़ा ही है |
705 अपने प्रति सावधान रहोapane prati saavadhaan raho

Revelation 3:11

"मैं शीघ्र आनेवाला हूँ | जो कुछ तेरे पास है, उसे थामे रह कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले |" प्रकाशित Revelation 3:11

अपने प्रति सावधान रहो ... जागते रहो,
ऐसा न हो जो कमाया ... गवां दो ||

1.स्वर्ग में तुम्हें विजय से प्रवेश करना है,
प्रतिफल पूरा प्रभु से प्राप्त करना है |

2.मसीह यीशु को ग्रहण करके उस में चलना है,
और उसी में जड़ पकड़ते बढ़ते जाना है |

3.इस संसार के लालच से तुम्हें बच के जीना है,
प्रभु की इच्छा जानकर उस में बन के रहना है |

4.आत्मिक दौड़ में धीरज के साथ बढ़ना है,
यीशु की ओर ताकते आगे-आगे बढ़ना है |

5.हम दम अपनी चिन्ताओं को ख्रीष्ट पर डालना है,
क्योंकि वो सदा तुम्हारी चिन्ता करता है |

6.बहुत ही शीघ्र प्रभु यीशु आने वाला है,
जो तुम्हारे पास है उसे थामे रखना है |
706 प्यारा दूल्हा प्रभु यीशुpyaara doolha prabhu yeeshu

Matthew 25:6

"देखो, दूल्हा आ रहा है |" मत्ती Matthew 25:6

प्यारा दूल्हा प्रभु यीशु आनेवाला है,
तैयार रहो, जागो, उठो, आनन्द के साथ उससे भेंट करने को ||

1.सोचो भी नहीं तुम होंगे प्रियो, यीशु अचानक आ जाएगा,
तैयार जो हैं और बाट जोहते हैं, प्रभु से मिलने वह जाऍंगे |

2.आनन्द का समय तब वह होगा, दुःख के आँसू सब पोंछेगा,
शान्ति आनन्द के राज्य में हम, हजार साल तक राज्य करेंगे |

3.आत्मिक सुस्ती में जी पड़े हैं, जागने का समय अब आया है,
स्तुति जरा अगर हम करेंगे, मूरख कुंवारी जैसे रह जयेंगे |

4.ज्ञानी कुंवारी जैसे जो जागते हैं, आत्मा के दीये को न बुझाते,
दूल्हा जब आये वह भेंट करेंगे, आनन्द से वही साथ जायेंगे |

5.धन्य वे हैं, जो जाग रहे हैं, निश्चय ये ही उठाये जायेंगे,
युग युग प्रभु के साथ रहकर, हल्लेलूयाह सब हम गायेंगे |
707 हल्लेलूयाह, गाऊँगाhallelooyaah, gaoonga

Psalm 34:1

"मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूँगा, उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी |" भजन Psalm 34:1

हल्लेलूयाह, गाऊँगा ... स्तुति तेरी करूँगा,
हर समय प्रभु यीशु की ... स्तुति सदा होती रहेगी,
प्रभुजी स्तुति तेरी करूँगा ||

1.वायदा किया है तूने ... पूरा करता भी तू है,
सच्चा परमेश्वर तू है ... मुझे संभालने वाला तू है,
प्रभुजी ... स्तुति तेरी करूँगा |

2.अपने विरोधियों को ... गिरा देता है प्रभु,
महाप्रतापी तू है ... मेरा उद्धार का सिंग भी तू है,
प्रभुजी ... स्तुति तेरी करूँगा |

3.जितनों ने तुझ को देखा ... उन्होंने ज्योति पाई,
यही है अनुभव मेरा ... मेरे जीवन की ज्योति तू है,
प्रभुजी ... स्तुति तेरी करूँगा |

4.डर भय सब दूर है किया ... अब तक तू ने साथ दिया,
एबेनेजर बनकर प्रभु ... मेरी रक्षा तू ही है किया,
प्रभुजी ... स्तुति तेरी करूँगा |

5.जीवन में जो भी होवे ... सह लूंगा आनन्द के साथ,
जीऊँगा तेरे लिए ... मेरे जीवन का दाता तू है,
प्रभुजी ... स्तुति तेरी करूँगा |

6.दुनिया के इस सफर में ... जो कुछ भी मार्ग में आए,
तुझ को ही महिमा मिले ... मेरी विनती है तुझ से यही,
प्रभुजी ... स्तुति तेरी करूँगा |
708 हे प्रभु तेरे संग मुझेhe prabhu tere sang mujhe

John 6:68

"हे प्रभु हम किस के पास जाए? अनत जीवन की बातों तो तेरे ही पास है |" यूहना John 6:68

हे प्रभु तेरे संग मुझे रहना है,
हे प्रभु मेरे संग तुझे सदा चलना है ||

1.विश्वास तुझ में जो करता है ... अविनाशी हो जाता है,
हे प्रभु ले ले मुझे तेरी बाहों में ... तुझे छोड़ मैं जाऊँ कहाँ |

2.मार्ग और सच्चाई तू है ... जीवन भी तुझ में ही है,
हे प्रभु ले ले मुझे तेरे राज्य में ... तुझे छोड़ मैं जाऊँ कहाँ |

3.शरण तेरी जो आता है ... प्रेम तेरा वह पाता है,
हे प्रभु ले ले मुझे तेरे शरण में ... तुझे छोड़ मैं जाऊँ कहाँ |

4.मनुष्य की बातों न सुनूंगा ... तेरी आज्ञा मानूंगा,
हे प्रभु ले ले मुझे तेरे चरणों में ... तुझे छोड़ मैं जाऊँ कहाँ |

5.आत्मा प्राण शरीर सब मेरे ... सब कुछ तुझ को मैं सौंपता हूँ,
हे प्रभु ले ले मुझे तेरी गोद में ... तुझे छोड़ मैं जाऊँ कहाँ |

6.जब तक ये जीवन है मेरा ... तेरे लिए जीऊँगा,
हे प्रभु ले ले मुझे तेरी आड़ में ... तुझे छोड़ मैं जाऊँ कहाँ |

7.अनन्त जीवन की बातों तो ... प्रभुजी तेरे पास है,
हे प्रभु ले ले मुझे तेरे साथ में ... तुझे छोड़ मैं जाऊँ कहाँ |
709 पूर्ण हृदय से धन्यवादpoorn hrday se dhanyavaad

Psalm 108:1

"हे परमेश्वर, मेरा हृदय स्थिर है, मैं गाऊँगा ... |" भजन Psalm 108:1

पूर्ण हृदय से धन्यवाद, चढ़ाता हूँ मैं प्रभु को ||

1.मैं ने न चुना प्रभु को, प्रभुजी ने चुना मुझे,
मुझ जैसे पापी को, उद्धार दिया प्रभु ने
स्वर्गीय राज्य में, भगीदार किया |

2.मेरे हृदय के पाप को, अपने लोहू से धोया,
मृतक मेरे आत्मा को, प्रभुजी ने जिलाया,
अनन्त जीवन का दान मेझे दिया |

3.पाप के बन्धन में मैं था, हृदय में शान्ति नहीं थी,
पाप मैं ने मान लिया, निर्दोष लोहू से धोया,
शान्ति आनन्द से मुझे भर दिया |

4.कैसा महान प्रेम प्रभु का, वर्णन से बाहर वह है,
कैसे भूलूँ उसके प्रेम को, दिखाया मुझ पापी पर,
इसलिए गाऊँगा मैं, प्रशंसा उसकी |

5.स्वर्गीय देश में पहुँचाने, प्रतिझा उसने की है,
दुःख हो या सुख हो तौ भी, दौड़ पूरी करूँगा मैं,
स्थिर रहूँगा तब तक, पहुँचूं उस देश में |
710 सारी सृष्टि के मालिकsaaree srshti ke maalik

Acts 10:36

"यीशु, मसीह ... सब का प्रभु है |" प्रेरितों Acts 10:36

सारी सृष्टि के मालिक तुम ही हो,
सारी सृष्टि के रक्षक तुम ही हो,
करते हैं तुझ को सादर प्रणाम,
गाते हैं तेरे ही गुणगान,
हा ... हा ... हा ... हल्लेलूयाह (३) ... आमीन ||

1.सारी सृष्टि को तेरा सहारा,
सारे संकट से हम को बचाना,
तेरे हाथों में जीवन हमारा है,
अपनी राह पर हम को चलाना |

2.हम हैं तेरे हाथों की रचना,
हम पर रहें तेरी करुणा,
तन-मन-धन हमारा तेरा है,
इन्हें शैतान को छे न देना |

3.अब दूर नहीं है किनारा,
धीरज को हमारे बढ़ाना,
जीवन की हमारी इस नैया को,
भव सागर में खोने न देना |
711 दे देगा यीशु है नजातde dega yeeshu hai najaat

Revelation 22:17

"जो प्यासा हो वह आए, और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले |" प्रकाशित Revelation 22:17

दे देगा यीशु है नजात, ... सुन पापी बन्दे,
सुन के आ यीशु की आवाज ||

1.सुन ले यीशु का ये फरमान ... जीवन जल आकर ले,
फिर प्यास ऐसी न होवेगी कभी ... बहता रहेगा दरिया | सुन पापी बन्दे ... 

2.मिलेगा नहीं तुम्हें सच्चा कलाम ... चाहे तू ढूँढ़ता फिरे,
न इस जहाँ न नीचे आसमाँ ... होगा वचन का अकाल | सुन पापी बन्दे ... 

3.फूलों जैसी है तेरी ये शान ... मिटेगी घास की तरह,
फिर दिन सुख के न आऍंगे कभी ... सदा रहेगा तू लाचार | सुन पापी बन्दे ... 

4.यीशु सन्तों को उठा लेगा ... ताकि वो राज्य करे,
फिर करेगा शैतान दुखी तेरी जान ... पाओगे सदा की सजा | सुन पापी बन्दे ...
712 यीशु के पीछे पीछे चलाyeeshu ke peechhe peechhe chala

John 1:43

"यीशु ने कहा ... मेरे पीछे हो ले | यूहन्ना John 1:43

यीशु के पीछे पीछे चला जा रहा हूँ मैं,
क्रूस अपना मैं उठाए, चला जा रहा हूँ मैं,
उसके हृदय के अनुसार अब बन रहा हूँ मैं ||

1.बलिदान मेरे प्रभु का कितना अद्‍भुत है,
प्राण देकर प्रमाण किया, वह मेरे लिए है,
याद करते मैं अब उसको, चला जा रहा हूँ मैं |

2.संसार की सुन्दरता जो मुझे अब न बहकाए,
शैतान कि युक्तियाँ सब, कुछ काम अब न करे,
यीशु की वाणी सुनकर चला जा रहा हूँ मैं

3.ताड़ना प्रभु की अद्‍भुत, जो मुझ पर होती है,
उससे मुझ को सुधारता, यह प्रेम उसका है,
सुधर कर मैं अब आगे चला जा रहा हूँ मैं |

4.आँखें अब मेरी मसीह पर, चाहे आँधी तूफान आये,
अब यह मुझे न डुबाऍं, बन्दरगाह जो दिखता है,
शीघ्र ही पहुँचने के लिए चला जा रहा हूँ मैं |

5.अपनी इच्छा में रखकर, प्रसन्न वह होना चाहता,
भली बातों को सिखाकर, सिद्ध करता रहता है,
महिमा प्रभु से पाने चला जा रहा हूँ मैं |
713 प्रभुजी तेरे काम कोprabhujee tere kaam ko
"हे यहोवा, वर्तमान युग में अपने काम को पूरा कर |" हबक्कूक 3:2

प्रभुजी तेरे काम को ... पूरा तू कर दे हम में,
पवित्र ईश्वर तेरी ... प्रजा हैं हम इस जगत में ||

1.जैसे सालों-साल गुजरे ... जाते हैं, हे सच्चे ईश्वर,
अनमोल हैं तेरे काम जो ... प्रकट कर तू हम में |

2.अपराध करके तेरे ... क्रोध को बढ़ाया हमने,
क्रोध तू करते हुए भी ... दया करना प्रभुजी |

3.प्रेम से हमें तू बचाकर ... सुरक्षी दी है प्रभुजी,
प्रेम हम तो न कर पाए हैं ... प्रेममय प्रभु तुझ को |

4.ज्योतिर्मय किया हमको ... ज्योति तू ही है प्रभुजी,
कई परिस्थितियों में हम ... चमक नहीं पाए हैं |

5.बदलते हुए इस जगत में ... टूटे हौद से हम पीये,
जीवन का सोता तुझे छोड़कर ... भकट गये हैं प्रभुजी |

6.आपस में प्रेम करने का ... आदर्श हम छोड़े हैं प्रभुजी,
शान्ति तुझ से हम पाकर भी ... तसल्ली न दे पाए हैं |

7.चमकते सोने जैसे ... बनाया हम को प्रभुजी,
अशुद्ध होकर हम तो ... आलसी हो गये प्रभुजी |

8.वचन न टलते ईश्वर ... दृढ़ गढ़ हमारा है प्रभुजी,
वर्णन करूँ तेरे प्रेम को ... अनुपम है तू प्रभुजी |
714 महिमा की आशाmahima kee aasha
"मसीह जो महिमा की आशा है |" कुलुस्सियों 1:27

महिमा की आशा यीशु प्रभु है,
वही तो मुझ में रहता है,
प्रभु यीशु, प्यारा यीशु, महिमा की आशा है ||

1.महिमित और धन्य ... अद्‍भुत आशा भी, लोहू के द्वारा ... प्रभु ने दिया है,
आशा से भरपूर ... सदा रहूँगा |

2.इस संसार में ... क्लेश तो आते हैं, ढाढ़स बाँधों ... यीशु ने कहा है,
संसार को जीतकर ... आशा वो दी है |

3.इस जीवन में ... मैं हूँ मुसाफिर, क्रूस को उठाकर ... चलता रहूँगा,
आशा जो दी है ... आगे बढूँगा |

4.महिमा का ईश्वर ... मेरा जीवन है, उसके बिना मैं ... कुछ भी नहीं हूँ,
जीना तो मुझ को ... उस के लिए है |

5.मेरे लिए तो ... जीना मसीह है, और मुझे मर जाना ... लाभ है,
उस के पास जा रहूँ ... बहुत ही अच्छा है |

6.जीवित है मेरा ... छुड़नेवाला, और वो अन्त में ... फिर से आएगा,
परमेश्वर का मैं ... दर्शन पाऊँगा |
715 आनन्द से स्तुति करूँaanand se stuti karoon

John 10:10

"मैं इसलिए आया कि वे जीवन पाए, और बहुतायत से पाए |" यूहन्ना John 10:10

आनन्द से स्तुति करूँ
आत्मा से और सच्चाई से ||

उद्धार का प्याला ऊँचा उठाकर, स्तुति मैं तेरी करूँ,
र्षित होकर प्रणाम करूँ, यीशु की जय जयकार हो ||

1.मुझ पापी को उद्धार देने, यीशु सलीब पर चढ़ गया,
पवित्र जीवन देने मुझे, मृत्यु पर जयवन्त हुआ |

2.मृत्यु की तराई में जब मैं पड़ा था, मेरे लिए मानव रूप लिया,
स्वर्गीय जीवन देने मुझे, मृत्यु के कंड को तोड़ा |

3.शत्रु के फन्दे से छुड़ाने को, शत्रु को उसने हरा दिया,
स्थिरता का जीवन देने मुझे, ख्रीष्ट में मुझे छिपाया |

4.स्वर्गीय वारिस मुझे बनाने, स्वर्गीय महिमा को त्याग दिया,
भरपूर जीवन देने मुझे, अपना जीवन दे दिया |

5.बाधा, सतावत घेरे मुझे, जीवन की यात्रा में सामना करे,
जयवंत जीवन देने मुझे, जीत लिया संसार तूने |

6.संसार और शरीर से लड़ते हुए, आनन्द से क्रूस को उठाऊँगा,
अलगाव का जीवन जीने के लिए, जीवन मैं अर्पण करूँ |

7.स्वीकार करो प्रभु मेरे जीवन को, तुझ को ही सौंपता हूँ मैं,
हल्लेलूयाह आमीन हल्लेलूयाह, आमीन हल्लेलूयाह |
716 तेरा प्रेम कितना अपार हैtera prem kitana apaar hai

John 4:8

"... परमेश्वर प्रेम है |" 1 यूहन्ना John 4:8

तेरा प्रेम कितना अपार है, वर्णन के बाहर है मेरी,
उसकी गहराई को जानूं मैं, यह अल्प बुद्धि काफी नहीं ||

1.तू ने मुझसे जो प्रेम किया, शाश्वत प्रेम है,
प्रेम, दया और करुणा से मुझको बुलाया है,
स्तुति करूँ मैं जीवन भर, (फिर भी काफी नहीं) ... (2)

2.तू यदि मुझको नहीं मिलता, जीवन में आशा नहीं,
संसार चाहे द्वेष करे, तुझी में आनन्द मेरी,
प्रेम, दया, अनुग्रह मुझ पर (मेरा बल यही) ... (2)

3.तुझी में मेरी संतुष्टि, मन में है शान्ति,
सुख-दुःख हर समय तेरी, इच्छा करूँ पूरी,
सिखा प्रभु तेरे प्रेम का, (कैसे वर्णन करूँ) ... (2)
717 उदय हुआ दिव्य रक्षकuday hua divy rakshak

John 8:12

"यीशु ने ... कहा, जगत की ज्योति मैं हूँ |" यूहन्ना John 8:12

उदय हुआ दिव्य रक्षक, घोर अंधकार के इस लोक में,
महिमा यीशु उदय हुआ उद्धार की ज्योति देने को ... (2)

1.घोर अंधकार में दीपक बिना हम कई बार गिर रहे थे ... (2)
दुःख और निराशा में यात्री गण सब, मार्ग से भटके हुए थे ... (2)
मार्गदर्शी होकर उनको चला्या (2) प्रभु के पास लाया
दिव्य रक्षक वह भोर का सितारा-उदय हुआ धरती पर ... (2)

2.चिन्ता विचारों में डूबे हुए थे प्रार्थना हमारी सुना,
पापों में डूबकर ----- गए, प्राणों के हे रक्षक,
जगत के लिए मृत्यु को सहकर (2) नित्य जीवन देनेको,
दिव्य रक्षक वह भोर का सितारा उदय हुआ बचाने |

3.स्वर्गीय पिता करुणा दिखाकर यीशु मसीह को दिया,
अन्धों को दृष्टि देने के लिए ख्रीष्ट प्रभु आया,
अन्धकार में से दिव्य ज्योति में (2) लाया है ख्रीष्ट प्रभु,
रक्षक हमारा, शैतान के बन्धन को, उदय हुआ तोड़ने |
718 प्रभु यीशु का गुण मैंprabhu yeeshu ka gn main
प्रभु यीशु का गुण मैं तो गाऊँ,
 भक्ति उपासना से, तुझ को भजूं प्रभु तुझ को भजूं ।

1.स्तुति, प्रशंसा, से भरपूर हूँ, कैसे प्रभु अब मैं यह बताऊँ,
युग युग यदि गाऊँ थोड़ा ही तो है, होठों के बलिदान से तुझे खुश हरूँ |

2.याद है मुझको तेरा वह काम, प्रेम के कारण प्रभु हुआ बलिदान,
प्रायश्चित तूने किया, दिया लोहू दान, इस छोटे मुँह से मैं कैसे कहूँ ?

3.मुझे ये अच्छा लगा मुझ को चुने, माता के गर्भ से मुझे अलग करे,
मुझ में उसके पुत्र का प्रकाश दे, क्या इसके योग्य हूँ कि धन्य बनूँ |

4.स्वर्गीय दर्शन जो मुझ को दिया, निशाने की ओर दौडूँ तू सिखाया,
पिछली बातों को प्रभु तू ने हठाया, आँखे ऊपर रखकर दौड़ा चला हूँ |

5.शीघ्र ही प्रभु तू अब आ जाएगा, जो तेरे हैं जागते, ले जाएगा,
बादल में प्रभु हमारा भेंट जो होगा, कैसा वह दिन होगा मगन मैं हूँ |
719 यीशु का नाम मनोहर हैyeeshu ka naam manohar hai

Acts 4:12

"... स्वर्ग के नीचे मनुष्य में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें |” प्रेरितों Acts 4:12

यीशु का नाम मनोहर है, कितना वह मधुर भी है |
आकाश के नीचे, पृथ्वी के ऊपर, कोई और नाम नहीं है ||

1.अमूल्य प्राण दिया है, पापियों को बचाने,
दास का रूप लेकर, पृथ्वी पर उतर आया है,
करते हैं स्तुति तेरा नाम, करते हैं ऊँचा तेरा नाम,
आओ प्रभुजी बीच में हमारे, आशीष देने के लिए |

2.कलवरी पहाड़ पर, लोहे के कीलों से,
प्रभुजी आपके देह को, क्रूस पर चढ़ाया है |
करते हैं स्तुति तेरा नाम, करते हैं ऊँचा तेरा नाम,
आओ प्रभुजी बीच में हमारे, आशीष देने के लिए |

3.सम्पूर्ण चंगाई हमें, देता हैं बड़े प्रेम से,
स्वर्गीय शान्ति आनंद, मिलता है तेरे नाम से |
करते हैं स्तुति तेरा नाम, करते हैं ऊँचा तेरा नाम,
आओ प्रभुजी बीच में हमारे, आशीष देने के लिए |
720 तेरे कूजूर यीशुजी मैंtere koojoor yeeshujee main
तेरे कूजूर यीशुजी मैं आया आनन्द शान्ति पाने को,
खाली दिल को मैं हूँ ले आया पाक रूप की भरपूरी पाने को ||

1.खून से अपने मुझको धो देना, प्यारे यीशु तू
मुझ को पवित्र करनेवाला, मेरा मालिक तू
तू है मेहरबान जी ...

2.सारी दुनिया घूमकर देखी, कहीं न मिला आधार
शान्ति आनन्द ढूँढ़ता रहा मैं, हो गया बहुत लाचार
दुःखी अंदर मेरी जान जी ...

3.खोलता हूँ द्वार मैं दिल का, मेरे दिल में आ,
तू है ज्योति इस दुनिया का, दिल में ज्योति ला
बच जाए मेरी जान जी ...

4.कृपा कर मेरे सृजनहारा मैं रहा तेरे संग
तेरी स्तुति के गीतों को, गाऊँगा हरदम
बच जाए मेरी जान जी ...
721 प्रभु का धन्यवाद करूँगाprabhu ka dhanyavaad karoonga
प्रभु का धन्यवाद करूँगा, उसकी संगति में सदा रहूँगा,
साथ चलूंगा मैं जय जरूर पाऊँगा, प्रभु का धन्यवाद करूँगा ||

1.न देगी मुझे दुनिया कभी भी, कोई सुख और शान्ति का आराम,
मेरे यीशु के साथ धन्य संगति में, सदा मिलती खुशी मुझको |

2.मेरे जिन्दगी के हर परेशानी में, खुल जाता है आशा का द्वार,
कभी न डरूँगा कभी न हटूँगा, चाहे जान भी देना पड़े |

3.कितना अच्छा है वो कितन धन्य है वो, यीशु ही मेरा जीवन का साथी,
मेरे जरूरतों को पूरी करता है वह, कोई घटी नहीं मुझ को |

4.मेरे आयु के दिन पग-पग में सदा, तेरी सेवा तो पूरी करूँगा,
एक बत्ती समान जलता रहूँगा, तेरी महिमा मेरी कामना |
722 यह जीवन यीशु के लिएyah jeevan yeeshu ke lie

Romans 12:1

"परमेश्वर को भवता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है |" रोमियों Romans 12:1

यह जीवन यीशु के लिए बलिदान तुझे करना है,
आत्मा, प्राण और पूरे शरीर से प्रभु की सेवा करना है ||

1.मुक्ति दिया प्रभु ने यह अद्‍भुत है, पवित्र जीवन के लिए,
तेरी शरीर परमेश्वर का अब मन्दिर बना है, पवित्र उसे रखना है |

2.शरीर की ज्योति, तेरी आँखें हैं, मलिन चीजें यह न देखे,
बुरी बातें देखने से मलिन विचार आते हैं, सारा देह अँधेरा होता है |

3.होठों से तू कैसी बातें करता है, क्या अशुद्ध तो नहीं है ?
छोटी जीभ बड़ी आग को लगा सकती है, वश में उसे करना है |

4.हाथों से तू कैसे काम करता है, प्रभु क्या तुझ से खुश है ?
तेरे जीवन के हर काम प्रभु की गवाही है, नमूना का पात्र क्या तू है |

5.संगति तू कैसी जग में रखता है ? पाँव तेरे कहाँ जाते हैं ?
जो दुष्तों की युक्ति पर कभी चलता नहीं है, वही मनुष्य धन्य होता है |

6.पापों में तू क्यों जीता रहे नाश में अन्त तेरा क्यों हो ?
यीशु हाथ पसारे तुझे कहता है प्यारे, आ जा शरण उस की ले |

7.तेरे शरीर का जीवित, बलिदान करके, प्रभु यीशु को सौंप दे,
जो पवित्र और प्रभु को भावता हुआ है, यह तेरी आत्मिक सेवा है |
723 मंदिर में तेरे जो निवासmandir mein tere jo nivaas
"हे सेनाओं के यहोवा, तेरे निवास क्या ही प्रिय है |" भजन 84:1

मंदिर में तेरे जो निवास करते, धन्य हैं, धन्य हैं,
जो तुझ से सामर्थ पाते, धन्य हैं, धन्य हैं |

1.यहोवा, तुझ पर जो विश्वास लाते धन्य हैं,
तेरे वचन में, जो हर्षित होते, धन्य हैं, धन्य हैं |

2.मन के शुद्ध हैं, दयालु हैं, वे ही सचमुच धन्य हैं,
नम्र जो है, मेल जो करते, वे ही धन्य हैं |

3.मन सत्य है, वचन पढ़कर मनन करने वाले धन्य हैं,
लिखा हुआ, वचन सुनकर मानने वाले धन्य है |
724 क्रूस के पास आओkroos ke paas aao

Matthew 16:24

"यीशु ने कहा ... अपने आप का इंकार करे और अपना क्रूस उठाए, और मेरे पीछे हो ले |" मत्ती Matthew 16:24

क्रूस के पास आओ, क्रूस के पास आओ ... २
मेरे भाई क्रूस के पास आओ, मेरे बहन क्रूस के पास आओ ||

1.जवानी के पापों में तुम पड़कर, मृत्यु के मार्ग में चलोगे
यीशु बिन जीवन तुम बिताकर, पाप में क्या तुम मर जाओगे |

2.सब कुछ जीवन में नाश करके, टूटे हृदय से क्या तुम रोओगे
यीशु बिन जीवन तुम बिताकर, पाप में क्या तुम मर जाओगे |

3.क्रूस पर लटके मेरे यीशु को, आँखें उठाकर यदि देखोगे
यीशु के लोहू में पाप धुलकर, मेरे जवान तुम तर जाओगे |
725 जवान सिपाही तूjavaan sipaahee too
"विश्वास की अच्छी कुश्ती लड़ |" 1 तिमुथियुस 6:12

जवान सिपाही तू मलायुद्ध कर,
अंधकार की शक्तियों का सामना कर
इस अच्छी लड़ाई में, निश्चय ही विजय तेरी है ||

1.प्रभु ने कहा तू मत डर, तेरी चाहत मैं पूरा करूँगा	(2)
तुझको आनन्द और हर्ष होगा	(2)
शान्ति यही प्रतिज्ञा भी यही - मल्लयुद्ध कर विजय तेरी है |

2.हे प्रिय उठ और प्रकाशमान हो, तेरा प्रकाश अब आ गया है
यहोवा की महिमा तेरे ऊपर
उदय हुआ जवान सिपाही - मल्लयुद्ध कर ...

3.इस अच्छी लड़ाई को जीतना हो गर, विश्वास और अच्छे विवेक थामे रह
तीमुथियुस जैसा तू साधना कर
बहुमूल्य इनाम तुझे मिलेगा - मल्लयुद्ध कर ...

4.यीशु मसीह के अनुग्रह में, हे योद्धा तू बल प्राप्त कर,
विश्वास का कर्ता पूरा करने वाला
पीशु को देख जीवन थाम ले - मल्लयुद्ध कर ...

5.अच्छी लड़ाई यदि लड़ेगा अपनी दौड़ पूरी करेगा
विश्वास की रखवाली गर तू करे
यीशु को देख जीवन थाम ले - मल्लयुद्ध कर ...
726 तू मेरा दयालु हैtoo mera dayaalu hai
"जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूँ |" फिलिप्पियों 4:13

तू मेरा दयालु है, मैं तेरी करुणागत हूँ |
तू मेरा आश्रय भी है, मैं तेरी शरणागत हूँ |

1.सामर्थ, महिमा गौरव भी, विजय विभव तेरा ही है,
क्योंकि आकाश और पृथ्वी में, जो भी है तेरा ही है |

2.प्रभु यीशु ही तो मुझे, सामर्थ प्रदान करता है,
प्रभु मसीह के द्वारा ही तो, सब कुछ मैं कर सकता हूँ |

3.मन मेरा भीतर ही भीतर, बार-बार गिरा जाता है,
प्रभु तेरी सामर्थ पर ही, आस लगाकर जीता हूँ |

4.हर निराशा में मेरी, आशा बनकर तू आता है,
अपनी सामर्थ तू प्रकट कर, हिम्मत देकर लाता है |

5.सब दिशाओं में मुझे, तृप्त होना सिखाता है,
तेरा अनुग्रह मेरे लिए, हर दशा में काफी है |

6.इस संसार के क्लेश में तू, ढाढ़स बांधना सिखाया है,
क्योंकि तू ने इस संसार को मेरे लिए जीत लिया है |
727 प्रभु यीशु के पास आओprabhu yeeshu ke paas aao

Matthew 11:28

"हे सब परिश्रम करनेवालों और बोझ से दबे हुए लोगों, मेरे पास आओ, मैं तुम्हें विश्राम दूँगा |" मत्ती Matthew 11:28

प्रभु यीशु के पास आओ, तेरा बोझ सब उठा लेगा,
प्रभु यीशु ही मार्ग है, उसके सिवाय और कोई नहीं ||

1.हे परिश्रम करने वालों, बोझ से दबे हुए लोगों,
प्रभु यीशु के पास अब आओ, विश्राम तुम पाओ,
प्रभु यीशु बुलाता है, वो ही मुक्तिदाता है |

2.पाप और श्राप का दण्ड उठाया, सारे पापों को अपनाया,
प्रेम किया प्रभु यीशु ने,आपने आप को दे दिया,
तेरे लिए क्रूस पर उस ने, प्राण दिया उद्धार करने |

3.प्रभु यीशु को जान लो तुम मन को अब स्थिर कर लो तुम,
बहुतायत का जीवन देगा, शरण उसकी लो,
अपराधों को मान लो, आज प्रभु के पास आओ |

4.राजाओं का वह है राजा, उसके चरणों में तू आ जा,
अनुग्रहकारी परमेश्वर वह, दया का सागर भी,
शान्ति वह देगा, साथ अपने लेगा, कभी नहीं छोड़ेगा |
728 अर्पण करता प्रभु यह जीवनarpan karata prabhu yah jeevan
"क्योंकि हम उस के बनाए हुए हैं |" इफिसियों 2:10

अर्पण करता प्रभु यह जीवन तेरे ही सामर्थी हाथ में
तेरी महिमा करने मुझे योग्य पात्र बना ||

1.मैं मिट्टी हूँ कुम्हार तू ही है, तेरे सामर्थी हाथ हाथ से उठा ले,
सब अयोग्यता प्रभुजी हठाकर, अपने मन के अनुसार बना ले,
प्रभु चाहता हूँ तेरी महिमा करने, नमूना के योग्य व्यक्ति बना |

2.मैं अंजीर का पेड़ जो बिना फल, द्राक्षा की बारी में रोपा गया था,
फल कुछ भी न पाया तू मुझ से, केवल भूमि को रोके रखा था,
चारों और खोदकर खाद डाल दे प्रभुजी मुझे फल देने योग्य बना |

3.दबा हुआ छोटा मैं एक पेड़, झाड़ियों के बीच में गिराथा,
अभिलाषा और धन सुख के कारण, मैं उन में दबा रहा था,
झाड़ियों को निकाल दे प्रभुजी मुझ से, सौ गुना फल दूँ, तू यह बना |
729 चल रहा था मैं इसchal raha tha main is

Isaiah 30:12

"मार्ग यही है इसी पर चलो |" यशायाह Isaiah 30:12

चल रहा था मैं इस जंगली राह में,
यीशु प्यार से एक मार्ग दिखाया,
आनन्दित होकर चलता हूँ मैं ||

1.दुष्टता से भरे हुए पाप राह में, मरा पड़ा था मैं पाप के गोद में,
यीशु प्यार से मुझे जीवित किया है, जीवितों के देश में मुझे ले आया है |

2.भ्रष्टता से भरे हुए शाप राह में, भटक रहा था मैं तो अंधियारे में,
यीशु प्यार से मेरा हाथ पकड़कर, उसी के उजाले में मुझे ले आया है |

3.अशुद्धता से भरे हुए बुरे राह में, विनाश की ओर मैं चल पड़ा था अनजाने में,
यीशु प्यार से अपनें मार्ग में लाया है, जीवन कि ओर वह मुझे ले जाता है |

4.दीपक है वचन मेरे पाँव के लिए, उजियाला है मेरे मार्ग के लिए,
यीशु प्यार से मेरे साथ जो रहता है, अगुवाई करते हुए स्वर्ग में पहुँचाता है |

5.यीशु को देखते हुए दौड़ता रहूँगा, हलीलूयाह गाते हुए आगे बढ़ूँगा,
यीशु प्यार को फिर से आते देखूँगा, यीशु के रूप में मैं बदल जऊँगा |
730 आनन्द से प्रभु तेरीaanand se prabhu teree
"तेरी सच्चाई महान है |" विलापगीत 3:23

आनन्द से प्रभु तेरी कृपा सभी
सदा सर्वदा प्रशंसा करूँगा में ||

1.मृत्यु से गड़ढ़े से उठा लिया तू ने,
जीवन दिया मेरे जीवन दाता,
वर्णन करूँ तेरी सच्चाई जो कितनी महान,
हे प्रभु स्तुति करूँगा तेरी |

2.जवान सिंहों को तो घटी होती और,
वे भूखे भी रह जाते हैं,
परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी,
भली वस्तु की घटी न होगी |

3.कई प्रकार की परीक्षाएँ आकर,
मुझे गिरान कोशिश जब की,
महान तेरी सच्चाई मुझको संभाल है,
हे पिता स्तुति करूँगा तेरी |

4.धार्मिकता और न्याय तेरे सिंहासन की,
प्रभु यहोवा आधार बने हैं,
करूणा सच्चाई तेरे आगे आगे चलती है,
सदा सर्वदा और रहते भी हैं |

5.घोर अन्धकार की तराई में प्रभु तू,
जीवन ज्योति होकर मार्ग दिखा दी,
अनुग्रह से साथ रहकर मुझ को चलाता है,
वर्णन करूँगा सच्चाई तेरी |

6.पहाड़ियाँ सब हट जाने से भी,
पृथ्वी पूरी बदल जाने से भी,
सारा संसार चाहे बैरी मेरा हो जाए,
स्मरण करूँगा सच्चाई तेरी |
731 आराधना करूँगा मैंaaraadhana karoonga main
"सच्चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्चाई से करेंगे |" यूहन्ना 4:23

आराधना करूँगा मैं - स्तुति करूँगा - तुझे भजूँगा
तेरे प्रेम के कारण - स्तुति करूँगा - तुझे भजूँगा

1.इस्राइल से प्रभु प्रेम तू किया है किया,
मिस्र से प्रभु तू उनको छुड़ाया,
कानान देश में प्रवेश कराया |

2.प्रेम प्रभु तेरा मुझ पर दिखाया,
यीशु तेरा लोहू मुझ को जिलाया,
अपने ही मार्ग में तू मुझ को ले आया |

3.इच्छा प्रभु तेरी प्रगट तू लिया,
आवाज प्रभु तेरी, मुझ को सुनाया,
आज्ञा प्रभु तेरी मानना सिखाया |

4.वचन को स्वर्ग में स्थिर तू है किया,
वचन की ज्योति में चलना सिखाया,
वचन का मन्ना तू मुझे खिलाया |

5.दुःख और संकट में साथ है तू दिया,
आँधी तूफान को तू डाँटकर थमाया,
जीवन की नैया को पार तू पहुँचाया |
732 ईश्वर जिस का रचनेवालाeeshvar jis ka rachanevaala
"उस स्थिर नगर की बाट जोहता था, जिसका बनाने वाला परमेश्वर है |" इब्रानियों 4:13

ईश्वर जिस का रचनेवाला, बनानेवाला भी है,
मेरा निशान है वो ही नगर, मेरे सारे जीवन भर,
हल्लेलूयाह ... हल्लेलूयाह ... हल्लेलूयाह ... हल्लेलूयाह ...

1.मेरा प्रभु मुझ से प्रेम किया - क्रूस पर चढ़कर प्राण दिया,
अपने लोहू में मुझको धोया - मेरे पापों को मिटा दिया |

2.लहरें जब मुझ को घेरे - लहरों पर ही मैं चलूँगा,
लोग बने विरोधी मेरे - विजय प्रभु ही विजय देगा |

3.हर क्षण प्रभु अनुग्रह देता - हर दिन प्रभु अगुवाई करता,
सब वर प्रभु मुझको देता - बहुत-सा फल भी प्रभु से मिलाता |

4.प्रभु ने मुझे जो कार्य दिया - प्रभु के सामर्थ से निभाऊँगा,
प्रभु ने जो समय दिया - प्रभु के चरण में बिताऊँगा |

5.निश्चल भी है वो ही नगर - धार्मिकता से भरा हुआ,
सदा बसा रहूँगा वहाँ - प्रभु यीशु के सम्मुख में |
733 ख्रीष्ट के प्रेम को यादkhreesht ke prem ko yaad

John 5:24

"अनन्त जीवन उसका है, वह मृत्यु से पार होकर जीवन में प्रवेश कर चुका है |" यूहन्ना John 5:24

ख्रीष्ट के प्रेम को याद करता हूँ, आभारी हो झुकता हूँ,
क्या चढ़ाऊँ प्रेमी पिता को, जीवन को मैं सौंपता हूँ ||

1.पाप के कारण से मरा हुआ था, जीवन से मैं तो हार भी गया,
जिस दिन पाप को मैं मान लिया, अनन्तकाल का जीवन मिला |

2.मृत्यु के जाल में फँसा हुआ था, चिंता के बाढ़ में डूब गया था,
जिस दिन यीशु को ग्रहण किया, सच्ची मुक्ति और शान्ति मिली |

3.चौड़े से मार्ग को चुना था मैं, नरक में पहुँचने वाला था मैं,
जिस दिन यीशु को जीवन सौंफा, स्वर्गीय मीरास का वारिस बना |
734 गुण तेरे प्रभु मैं तोgun tere prabhu main to
"तुम एक चुना हुआ वंश ... इसलिए कि उसके गुणानुवाद करो |" 1 पतरस 2:9

गुण तेरे प्रभु मैं तो गाऊँगा,
स्तुति प्रशंसा तेरी करूँगा ||

1.पापों के सागर में डूब रहा था,
अपने ही आँसू पी भी रहा था,
घोर सन्धकार में घूम रहा था,
उसी समय प्रभु मुझको मिला था,
हाथ पकड़कर घर अपने लाया |

2.हृदय के पापों को लोहू से धोया,
अनंत राज्य का भागीदार बनाया,
शान्ति और आनन्द से मुँह भर दिया,
अनत जीवन देकर बचाया,
गोद में अपने मुझको बिठाया |

3.जीवित आशा देकर स्वर्ग में तू गया
मेरे लिए ही घर तू बनाया,
मुझको ले जाने फिर से आएगा,
जीवित हूँ मैं इसी आशा से,
छुटाकारा दिया सब दुःखों से |
735 धन्य-धन्य प्रभु यीशुdhany dhany prabhu yeeshu
"हमारे परमेश्वर की स्तुति ... धन्यवाद युगानुयुग रहे |" आमीन | प्रकाशित 7:12

धन्य-धन्य प्रभु यीशु स्तुति तेरी हो,
सृजनहार, पालनहार, तारणहार तू है ||

1.प्रेम जो प्रभु सनातन का है,
अनुग्रह सच्चाई तेरी अनमोल भी है,
तू ही दयालु और करुणामय है |

2.अपने हो क्गून से पापों की क्षमा की,
अपने ही नाम से उद्धार हमें दी,
महिमा हो प्रभु तेरे नाम की सदा |

3.सबसे महान प्रभु यीशु तू है,
सबका प्रधान प्रभु तू ही तो है,
राजाओं का राजा प्रभुओं का प्रभु है |

4.राज्य प्रभु तेरा सदा काल का है,
सिंहासन प्रभु तेरा युगानुयुग तक है,
प्रभुता प्रभु तेरी सनातन की है |

5.यीशु प्रभु तू फिर आनेवाला है,
अपने लोगों को तू ले जाने वाला है,
हल्लेलूयाह, गाते हुए बाट जोहते हैं |
736 जीऊँगा मैं प्रभु तेरे लिएjeeoonga main prabhu tere lie
"जो जीवित है, वे आगे अपने लिए न जीये |" २ कुरिन्थियों 5:14

जीऊँगा मैं प्रभु तेरे लिए,
ना जीऊँगा मैं अब अपने लिए ||

1.संसार का लालच सब मैं छोडूँगा,
शैतान की युक्तियों को तोडूँगा,
चलूँगा पीछे तेरे जी भर के जीऊँगा तेरे लिए |

2.चाहे बैरी सब संसार बने,
चाहे ये जीवन मुझ पर भार बने,
चलूँगा पीछे तेरे जी भर के जीऊँगा तेरे लिए |

3.चाहे संकट ने मुझे घेरा हो,
चाहे चारों ओर सख्त अँधेरा हो,
चलूँगा मैं पीछे तेरे जी भर के जीऊँगा तेरे लिए |

4.चाहे अग्नि में मुझे जलना हो,
चाहे काँटों पे मुझे चलना हो,
चलूँगा मैं पीछे तेरे जी भर के जीऊँगा तेरे लिए |
737 अनुग्रहकारी प्रिय प्रभुजीanugrahakaaree priy prabhuje
"अनुग्रहकारी प्रिय प्रभुजी, तेरी शरण में हम आते हैं |"

अनुग्रहकारी प्रिय प्रभुजी, तेरी शरण में हम आते हैं
तन, मन, धन से तुझको भेंट चढ़ाके,	(2)
करते हैं हम तुझे साष्टांग प्रणाम ||

1.हर दिन तू हमें आशीष देता,	(2)
गिरने से हमको बचाके तू रखता |	(2)
जीवन के इस लम्बे सफर में,	(2)
तेरा वचन है राह दिखाया ...	(2)

2.संकट क्लेष तो आते रहेंगे,
पर तेरा अनुग्रह, काफी है हर पल,
हम तेरे कदमों में चलते रहेंगे,
जीत हमारी होगी, आखिर जरूर ...

3.सेवा यीशु से हमको मिली है,
मिट्टी के बर्तन लेकिन, खजाना है स्वर्ग का,
टूट जाये तो भी, परवाह नहीं है,
महिमा हम तुझको देते रहेंगे |
738 मुक्ति दिलाये यीशु नामmukti dilaaye yeeshu naam
"मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिए जगत में आया |" 1 तिमुथियुस 1:15

मुक्ति दिलाये यीशु नाम
शान्ति दिलाये यीशु नाम ||

1.यीशु दया का बहता सागर,
यीशु दाता महान |

2.चरणी में तू ने जन्म लिया यीशु,
क्रूस पर किया बलिदान |

3.हम सब के पापों को मिटाने,
यीशु हुआ बलिदान |

4.हम पर भी यीशु कृपा करना,
हम हैं पापी नादान |

5.क्रूस पर अपना खून बहाया,
सारा चुकाया दाम |
739 आओ हम बनाएँगेaao ham banaenge
"आओ, हम ... बनाएँ |" नहेम्याह 2:17

आओ हम बनाएँगे, गिरी हुई दीवारों को,
जो शहरपनाह टूटी हुई है, जीवन की गवाही गिरी हुई है,
आओ हम बनाएँगे, गिरी हुई गवाही को ||

1.गिरी हालत क्या हमें दिखाती है, वेदना और दुःख इसके लिए है,
नहेम्या जैसे क्या रोते हैं, पुकार प्रभु से करते हैं,
आओ हम पुकारेंगे प्रभु से मदद पाने को |

2.इस्राएल प्रभु के लोगोंने, नहीं मानी प्रभु की आज्ञा को,
हम भी प्रभु के लोग होकर ऐसा किया करते हैं,
आओ निर्णय करेंगे, प्रभु की आज्ञा मानने को |

3.यरूशलेम की शहरपनाह को, जलाकर उजाड़ दिए है,
उसके फाटक बड़े बड़े जो, जलाकर उजाड़ दिए है,
आओ हम उठाएँगे, बिगड़े हुए काम को |

4.नहेम्याह ने जब कहा लोगों से, चलों दीवारों को हम बनाएँ,
सब लोगों ने मिलकर एक स्वर में कहा, आओ हम बनाएँ,
आओ हम भी बनाएँगे उद्धाररूपी दीवारों को |

5.प्रभु यीशु की क्या सुनोगे कहता है वह सब लोगों से,
सुनकर वह मीठी आवाज को क्या तुम सब यह न कहोगे,
आओ हम बनाएँगे यहोवा के मन्दिर को ?
740 हे विश्वासयोग्य ऐ प्रेमी मसीhe vishvaasayogy ai premee maseeh
हे विश्वासयोग्य ऐ प्रेमी मसीह, प्रभु दिल से, तुझको सराहते हैं,
तेरी स्तुति मीठे रागों से, गाते हुए शीश नवाते हैं |

1.तेरे हर उपकारों को गिन-गिनाकर, ये जीवन हमारा आभारी है,
तू हर पल हर पग साथ रहा, न कभी अकेला छोड़ा है,
सच्चा रखवाला और हम दम बन, हर बेड़ा पार लगाया है |

2.हम सब को पाप के बन्धन से, मसीह के लहू से छुड़ाया है,
स्वर्गीय मण्डाली में लाया हमें, स्वर्गीय आशीष बरसाया है,
माँ से ज्यादा प्रेम दिखाकर, हमें कभी न तू बिसराया है |

3.नित हमें तू स्वर्गीय भोजन देकर, आत्मा का भूख मिटाता है,
स्वर्गीय जल से हम सब का तू, आत्मा की प्यास बुझाता है,
हर पल शत्रु पर जय देकर, हमें प्रेम से बान्धे रखा है |

4.दिन में बादलों के खंभे में होकर, जीवन यात्रा में चैन दिया,
रातों में अग्नि का ज्वाला बन, शैतान की शक्ति को नाश किया,
एबेनेजर बन ये सभा के दिन तक, हमें बचा कर लाया है |
741 चलते चलो आगे बढ़ो सारेchalate chalo aage badho saare
"अतः हम उस विश्राम में प्रवेश करने का प्रयत्न करें |" इब्रानियों 4:11

चलते चलो आगे बढ़ो सारे,
विश्वासियों प्रभु का दिन आया है |

1.यात्रा सब थोड़ी बाकी है, थोड़ा समय अब हाथ में है,
सब कुछ ठीक ठाक अब करना है, प्रभु से मिलने से पहले,
योग्य होकर प्रभु से मिलना है, प्रभु का दिन आया है |

2.देखा साथ-साथ यहोवा है उसकी आँखे हमारे ऊपर है,
दुख यात्रा में साथ वह चलता है, गहेरी उपस्थित उसकी है,
कभी न हमें छोड़ेगा प्रतिज्ञा उसकी साथ है |

3.हिम्मत से आगे बढ़ना है, पिछली बातों को अब भूलना है,
जो कुछ भूल हमने किया है, सब कुछ प्रभु से कहना है,
प्रेम से क्षमा वह देता है क्योंकि पिता हमारा है |

4.आओ सब अर्पण हम करें और प्रभु से यह हम कहें,
क्षमा कर हमें तू यीशु दुःखित होकर हम आये हैं,
प्रेम तेरा याद है तेरी समानता में अब आना है |

5.तैयार अब हमें होना है तेरी समानता में अब आना है,
तेरे रूप में हमें बदलना है तेरा चेहरा अब हमसे दिखाना है,
तेरा अद्‍भुत वह कार्य है तेरी इच्छा पूरी होती है |
742 ऐ मेरे मसीह ये जीवन तू लेai mere maseeh ye jeevan too le

Romans 12:1

"... अपने शरीरों को जीवित, पवित्र और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके पढ़ाओ |" रोमी Romans 12:1

ऐ मेरे मसीह ये जीवन तू ले, तेरे हाथ में सदा तू यह रख ले,
अर्पण तुझे मैं करता हूँ, हर क्षण हर दिन और साल भी तू ले,
तेरी स्तुति, प्रशंसा, गौरव, जयजयकार,
जीवन से सदा प्रभु ये निकले |

1.मेरे हाथों को ले यह तेरे लिए, पवित्र रहे तेरी सेवा के लिए,
पाँव मेरे तैयार प्रभु तेरे लिए, जहाँ भेजेगा तू वहाँ जाने के लिए |

2.मेरी आवाज तू ले यह तेरे लिए, सदा गाता रहूँगा मैं तेरे लिए,
मेरे होठों को ले तेरी वाणी निकले, औरो को आशीष और सांत्वना मिले |

3.तेरी चाँदी सोना सब तेरे लिए, कुछ न रखूँ न कहूँ यह मुझ को मिले,
मेरी बुद्धि और ज्ञान मसीह सब कुछ तू ले, वह सब कुछ तेरी सेवा में लगा ले |

4.मेरे प्रेम को ले यह तेरे लिए, तेरे चरणों में रखता हूँ, ग्रहण तू कर ले,
क्षण भर का जीवन यहाँ तेरे लिए, जग को छोडूँ, वहाँ ग्रहण तू कर ले |

5.मेरी आँखों को ले यह तेरे लिए, सदा खुली रहें तुझे देखने के लिए,
तेरी सृष्टि से तुझको पाने के लिए, अपनी आँखों के द्वारा मुझे चला ले |

6.मेरे कान, मेरी इच्छा और हृदय को, ले सारा शरीर मेरा तेरे रहने के लिए,
समय जब आए मुझे तुझ में मिला ले, सनातन से सनातन साथ रहने लिए |
743 देखो दिन वह आया प्रभुdekho din vah aaya prabhu
लैव्य व्यवस्था 25:813

देखो दिन वह आया प्रभु पास चले,
जागने का साल यह है, यीशु से मिले |

1.नरसिंगे का शब्द सब सुनो यहोवा का है,
चलो चलो दौड़ो दौड़ो शीघ्र पहुँचना है,
पिता प्रेम से राह देखता है उससे हम मिले |

2.प्रायश्चित का साल यह है गुलाम छूट जाए,
कैदी और करजदार जो है आजाद ही जाएँ,
भटके हुए दूर जो थे घर वापस चलें |

3.बीते साल कैसे बीता क्या वह याद है ?
कैसे आत्मिक जागृति आई लोग उद्धार पाएँ ?
वचन के प्रकाश के द्वारा बन्धन से निकलें |

4.मसीह उनको घर में लाया वही मालिक है,
वचन, संगत, मेज और प्रार्थना में बने रहे,
उद्धार पाते थे जो रोज रोज मंडली में --- |

5.आज हमारी हालत क्या है क्या हम जानते है ?
आत्मिक जीवन में हम बढ़कर कहाँ पहुँचे है,
निर्णय करने प्रभु के पास आओ हम चलें |

6.पश्चाताप के अनुभव में आते तेरे पास,
मान लेते सब भूलों को क्षमा है तुझ पास,
प्रेम से हमें क्षमा दे लगा तू गले |
744 मैं घटता जाऊँ यीशुmain ghatata jaoon yeeshu

John 3:30

यूहन्ना John 3:30

मैं घटता जाऊँ यीशु तू बढ़ता जाये,
मैं मिटता जाऊँ प्रभु तू दिखाई दे |

यह मेरी प्रार्थना -- -- -- -- -- -- -- --

1.मैं मसीह के साथ जरूर क्रूस पर अब चदूँ,
स्वार्थी जीवन को प्रभु पूरा अन्त करूँ,
मसीह का मन मुझमें और स्वभाव भी हो,
स्वर्गीय जीवन उसका मुझ में बढ़ता जाए |		यह मेरी प्रार्थना ...

2.आदम का पाप मुझ में अभी भी जो रहता है,
पीशु का लोहू ही केवल नाश उसको करता है,
कोई बाधा न रहे अब जीवन को बढ़ने में,
मसीह का जीवन मुझमें अब बढ़ता जाए |

3.पुराना मनुष्य मेरा वह क्रूस पर चढ़ जाए,
सम्पूर्ण रीति से उसका प्रभाव मिट जाए,
सब बातों में आगे वह आना ही चाहता है,
प्रभु यीशु अब मुझ में रोज बढ़ता जाए |

4.कामना और लालसा अब क्रूस पर चढ़ जाए,
यीशु को बढ़ने के लिए स्थान पूरा मिल जाए,
शारीरिकता की मृत्यु हो आत्मिकता दिखाई दे,
आत्मिकता में जीवन प्रभु का बढ़ जाए |

5.संसार मेरे लेखे अब क्रूस पर चढ़ जाए,
मैं संसार के लिए भी अब अन्त हो जाए,
संसार नहीं, मसीह में बढ़ जाए,
सांसारिक जो कुछ है, मसीह में छिप जाए |

6.यह पार्थिव जीवन मेरा मिटता घटता जाये,
मसीह के तेजोसी रूप में रोज बदलता जाये,
एक दीन मसीह का रूप मुझ में संपूर्ण दिखे,
अंश अंश करके उसकी समानता में जाए |
745 मुझे याद है मुझे याद हैmujhe yaad hai mujhe yaad hai
1 कुरिन्थि 11:24,25

मुझे याद है मुझे याद है, तेरा आना याद है,
सारी दुनिया में धूम मची थी एक उद्धारक आया है,
वह दिन मुझे याद है |

1.जगत की उत्पत्ति से पहले तेरे मन में यह इच्छा थी,
विश्व को तू ऐसा बनाये उसी में पृथ्वी अनुपम हो,
रचा उसे जो अद्‍भुत है, कहाँ तू सबसे अच्छा है,
अंधकार के वश में विश्व को तू ज्योति में बदला है |

2.जिस दिन तूने मनुष्य बनाया क्या ही अद्‍भुत दिन वह था,
सारे स्वर्गदूत, सराफिम, करुव उसे वह ध्यान से देखते थे,
उनके मुँह से यह शब्द निकला, अचंभे का काम यह है तेरा,
तेरा स्वरूप और समानता देखकर जो उनमें तूने किया है |

3.यह सब अद्‍भुत काम को देखकर शैतान ईर्ष्या से भर गया,
हानि पहुँचाने के लिए वह मन में दुष्ट संकल्प किया,
दुर्बल पात्र हव्वा को पाकर वह उसको भरमाया,
सारे मनुष्य आज पापी हुए, ईश्वर की महिमा से रहित है |

4.शैतान की सुनकर उसकी माने और उसकी दासत्व में फंसे,
मृत्यु के आधीन यह हो गए बचने का उपाय कोई ना रहा,
समय की पूर्णता में परमेश्वर मनुष्य बनकर आया है,
पापों का प्रायश्चित प्रभु देकर पापी के बदले प्राण दिया है |

5.क्रूस पर चढ़कर पूरा दाम दिया है, शैतान को उसने हराया है,
जी उठाकर यीशु जयवन्त हुआ, शत्रु के हाथ से छुड़ाया है,
अपने पुत्र के राज्य में लाकर, उसकी देह में उन्हें जोडा है,
ताकि तेरे रूप में यह बदले यही प्रभु तू चाहता है |

6.प्रभु तेरा दुःख उठाना तेरी ममता को मैंने जाना,
कोड़े खाना और लहू बहाना क्रूस चढ़ना मुझे याद है,
प्रतिज्ञा तेरी और अगुवाई रक्षा तेरी जो साथ साथ है,
शीघ्र तू आता मुझे लेने को यह भी मुझे याद है |
746 दिन दिन और महीने सालोंdin din aur maheene saalon
दिन दिन और महीने सालों के साल बीताते चेले आए हैं,
आरम्भ से अब तक हम को सम्भाला,
इसलिए आभारी हैं, बहुत ही हर्षित हैं |

1.बीते दिनों को याद करते हैं, काम तेरा बड़ा स्मरण में है,
एबेनेजर बन कर अब तक हे प्रभु सहायक तू खूद रहा है,
मेघ का खंभा और अग्नि का भी साथ-साथ चलते रहे हैं |	... इसलिए

2.अपने जीवन को चाँगते हुए, अन्दर अंधेरा हम देखते हैं,
तेरा दर्शन और नमूना कैसे हम भूल गए हैं,
सच्चे दर्शन और प्रकाश में रहे, अब से हम ठान लिए हैं |

3.नये साल में प्रभुजी हमको तू लाया, ताकि तेरे मन को हम जाने,
पूरे हृदय से आगे बढ़ेंगे, वाचा तुझसे बांधते हैं,
तैयार रहेंगे उस दिन के लिए, जितना भी दाम देना है |

4.ऊपर की ओर हमारी दृष्टि है, जहाँ ईश्वर का निवास-स्थान है,
जो जो दिन के सन्तान बने हैं, उनका छुटकारा निकट है,
प्रवेश करेंगे नई सृष्टि में क्योंकि विरास वे बने हैं |

5.आखिर नरसिंगा अब फूँका जायेगा, प्रायश्चित के दिन महाशब्द के साथ,
अन्तिम वे वर्ष को पवित्र करके, छुटकारे का प्रचार करना,
हजार साल जो आ रहा है, बाट उसकी हम जोहते हैं |
747 यीशु फिर से आ रहा हैyeeshu phir se aa raha hai
"मैं शीघ्र आने वाला हूँ |" प्रकाशित 22:20

यीशु फिर से आ रहा है,
अपने लोगों को स्वर्ग ले जाने,
यीशु शीघ्र आ रहा है |

1.यीशु ने चेलों से कहा भी था,
आऊँगा फिर से जरूर,
यीशु के साथ जो चले - संसार से अलग जो रहे,
जागते जो जीते - विश्वासयोग्य रहते,
उनको लेने आयेंगे |

2.मेरे लिए जगह तैयार करके,
आयेगा एक दिन जरूर,
प्रिय यीशु से मिलने को - तैयार हम होते हुए,
आओ हम मिलकर - आत्मा से भरकर,
एकता से सेवा करें |

3.प्रतिज्ञा पूरा सब करने यीशु,
आयेगा किसी दिन जरूर,
अद्‍भुत प्रेमी यीशु को - ललकार से आते हुए,
हम सब मिलेंगे - आनन्दित होंगे,
प्रभु को हम पायेंगे |

4.बादल की सवारी करके यीशु,
आयेगा अचानक जरूर,
प्यारे प्रभु यीशु को - महिमा में आते हुए,
हम सब देखेंगे - बदल जाएँगे,
प्रभु के साथ रहेंगे |
748 प्रभुजी निशाने की ओरprabhujee nishaane kee or
"... परमेश्वर ने मुझे यीशु मसीह में ऊपर बुलाया |" फिलिप्पियों 3:14

प्रभुजी निशाने की ओर मैं दौड़ा चला जा रहा हूँ
ऊँची बुलाहट के योग्य प्रतिफल पाने ज रहा हूँ ||

1.जो जो बातें मेरे लाभ की, उन्हीं को मसीह के कारण
कूड़ा समझकर मैं आगे, बढ़ता चला जा रहा हूँ |

2.मसीह को प्राप्त करूँ, मृत्युन्जय की सामर्थ के द्वारा,
दुखों में सहभागी होकर, उसकी समानता में आऊँ |

3.प्रभु मसीह की पहचान की, उत्तमता के कारण,
सबको अब हानि समझकर, आगे बढ़ता जा रहा हूँ |

4.पिछली बातों को अब भूलकर, आगे बातों की ओर अब
दौड़ा चला जा रहा हूँ, ताकि वह इनाम को पाऊँ |
749 प्रभु यीशु तारणहारprabhu yeeshu taaranahaar
प्रभु यीशु तारणहार, दृष्टि तू दे मुझे,
सदा निहारूँ तुझे मैं
अल्फा तू है, ओमेगा भी तू है

1.प्रिय शिष्य यूहन्ना पतमुस में प्रिय यीशु के स्वरूप को,
प्रेम निहारा धन्य हो गया प्रिय प्रभु निहारूँ तुझे मैं |

2.कितनी ही बार मैं गिरता रहा अंधे की नाई टटोलता रहा,
मुझे सुधार मेरी दृष्टि को साफ कर ध्यान से निहारूँ तुझे मैं |

3.जान बुझकर मैं बिगड़ ही गया कई बार मैं यीशु को घायल किया,
धोखे में आकर दृष्टि हटी मेरी दास तेरा निहारूँ तुझे मैं |

4.जितने यीशु की ओर दृष्टि किये, उनके चेहरे प्रकाशित हुए,
आनंद से भरकर स्थिर कदमों से, चलता निहारूँ तुझे मैं |

5.विश्वास का कर्ता है यीशु प्रभु पूरा करनेवाला है यीशु प्रभु,
विनम्रता से ताकते तेरी ओर धीरज से दौड़ना सिखा दे |

6.जो बातें आँख ने नहीं देखी जो बातें कान ने नहीं सुनीं,
बातें मनुष्य के जो चित्त में न चढ़ी मेरे लिए है तैयार की |

7.संसार की अभिलाषओं पर हे प्रभु दृष्टि न जाए अनुग्रह उंडेल,
महिमित और दिव्य तेरे स्वरूप को, पूर्ण मन से मैं निहारूँ |
750 पावन है वह प्रभु हमाराpaavan hai vah prabhu hamaara
"वह दीन लोगों को नहीं भूलता |" भजन 9:12

पावन है वह प्रभु हमारा, उसकी जय जयकार करो,
निर्बल का वह बल है न्यारा, जय हो, जय हो, जय हो, जय हो ||

1.दीन दुखियों का है दाता, भटके हुओं को राह दिखाता,
सीधे मार्ग में हमें चलाता, उसकी जय जयकार करो |

2.प्रभु हमारा बड़ा महान, निर्बद्धियों को देता ज्ञान,
पापियों को वह बचाता प्राण, उसकी जय जयकार करो |

3.प्रभु की महिमा अपरम्पार, जग का वह है तारणहार,
मानो उसे अपना आधार, उसकी जय जयकार करो |
751 सेवा करना तू सिखा देseva karana too sikha de
"तुम प्रभु यीशु मसीह की सेवा करते हो |" कुलुस्सियों 3:24

सेवा करना तू सिखा दे |
प्रभु सेवा का भेद बता दे ||

1.मूसा की सेवा मुझे तू समझा दे,
सीनै पहाड़ का दर्शन मुझे दे,
नम्रता से सेवा करना सिखा दे |

2.शमुएल की सेवा मुझे समझा दे,
हर दिन आवाज तेरी मुझे सुना दे,
तेरे घर में रहना तू ही सिखा दे |

3.एलिय्याह की सेवा मुझे तू समझा दे,
कर्मेल का पहाड़ का अनुभव मुझे दे,
निर्भय से सेवा करना तू सिखा दे |

4.पौलुस की सेवा मुझे तू समझा दे,
क्रूस की शक्ति का अनुभव मुझे दे,
संकट दुख क्लेश मुझे सहना सिखा दे |

5.पतरस की सेवा मुझे तू समझा दे,
मण्डली के नींव का दर्शन मुझे दे,
दर्शन में बने रहना तू सिखा दे |

s6.यूहन्ना की सेवा मुझे समझा दे,
s6.महिमा प्रभु तेरी मुझे दिखा दे,
s6.प्रेम का प्रचार तेरा करना सिखा दे |

s7.यीशु तेरी सेवा मुझे समझा दे,
s7.स्वभाव प्रभु तेरा मुझे तू दे दे,
s7.ज्ञान अपना देकर सेवा तू करा ले |
752 राजाओं का राजाraajaon ka raaja
"हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर |" भजन 27:11

राजाओं का राजा, प्रभुओं का प्रभु,
तेरी शरण आया हूँ मैं ... प्रभुजी
तेरे शरण आया हूँ मैं ||

1.प्रभुजी ... हे पिता ... मैं संकट में हूँ, मदद तू कर,
अगुवाई चाहते हुए आया हूँ मैं |

2.प्रभुजी ... मैंने ... खताऍं की हैं बहुत सी,
क्षमा चाहते हुए आया हूँ मैं |

3.प्रभुजी ... हे पिता ... इच्छा तेरी मुझे,
सही राह तू दिखाकर चला मुझे |
753 हे रब्बा ... हे पिताhe rabba ... he pita
"और यदि संतान है, तो वारिस भी, ... मसीह के संगी वारिस है |" रोमियों 8:17

हे रब्बा ... हे पिता ... मेरा मीरास तू है,
हे रब्बा ... हे पिता ... तेरा वारिस हूँ मैं ||

1.पावन मुझे तू करता है - पाप सब मिटाता है,
आत्मा से अपनी तू भरता है, प्रेम से मुझे चराता है |

2.प्रिय यीशु तुझ में ही - शान्ति और आनन्द है,
मुझ पर आत्मा की जो व्हाप लगी है, मीरास का वह बयाना है |

3.प्रभु यहोवा मेरा - मीरास का भाग है,
प्रभु यीशु की मृत्यु से मुझे, वारिस अपना बनाया है |

4.मसीह यीशु, तू मेरा - जयवंत राजा है,
प्रभु यीशु की सामर्थ से मुझे, हर पल प्रेम से संभालता है |

5.धन दौलत दुनिया की - मिटती जाती है,
स्वर्गीय मीरास को पाना है मुझे, अविनाशी निर्मल वह है |

6.कलीसिया में तू रहता है - जग का तू आधार है,
महिमा अपनी तू दिखाता है, महिमा स्वरूपी तू ही तो है |

7.प्रभु यीशु महिमा में - फिर से आता है,
यीशु प्रभु अब तू जल्दी आ, साथ सदा तेरे रहना है |
754 हे यीशु तेरे प्रेम कोhe yeeshu tere prem ko
"क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है |" कुरिन्थियों 5:14

हे यीशु तेरे प्रेम को, मैं स्मरण करता हूँ,
याद किया तूने मुझ पापी को, गिराए आत्मा को
ये जीवन तेरे लिए, आजीवन जीऊँगा ||

1.संसार में ये जीवन को, व्यर्थ में बिता रहा था,
आत्मापूर्ण जीवन को, तू ही दिया है मुझे |

2.सहारा ये जीवन में, मैंने न पाया कहीं,
सच्चे प्रेम से खींचा है तूने, सहारा दिया मुझे |

3.प्रभु को ही जीवन, मैंने अर्पण है किया,
मेरे पास में और है भी क्या, बलिदान देने के लिए |

4.जीवन भर तेरी सेवा, प्रेम से करता रहूँगा,
गाऊँगा हल्लेलूयाह, दूँगा आदर महिमा |
755 यीशु तेरे चेहरे कोyeeshu tere chehare ko

John 3:2

1 यूहन्ना John 3:2

यीशु तेरे चेहरे को देखता रहूँ
तेरे रूप में बदलता जाऊँ ||

1.यीशु तूने मेरे लिए स्वर्ग को छोड़ था,
दास का रूप लेकर नम्र बना था,
नम्र नही हूँ प्रभु, घमण्ड से भरा मैं हूँ,
तेरी नम्रता मैं अब पाऊँ |

2.प्रेमी प्रभु तूने, जग से प्रेम किया था,
प्रेम के कारण तूने, सब कुछ दिया था,
कठोर हृदय है मेरा, प्रेम नहीं करने वाला,
प्रेमी हृदय मैं चाहता हूँ |

3.सहनशील प्रभु तू सब, मनुष्य के लिए,
चाहता नहीं कोई नाश हो जाए,
सहता नहीं हूँ प्रभु, अधीरा स्वभाव मुझमें,
तेरी सहनशीलता मैं पाऊँ |

4.विस्वासयोग्य प्रभु तू, काम तेरे अद्‍भुत हैं,
विश्वासयोग्य तेरी, आकाश से ऊँची है,
मैं अविश्वस्त दास हूँ, संतुष्ट तुझे नहीं करता,
तेरी विश्वासयोग्यता चाहता हूँ |

5.तेरे रूप में बदलूं, समानता तेरी पाऊँ,
रूपान्तर के लिए प्रभु, बाट मैं जोहूँ,
तैयार अब मुझको तू कर, वह अद्‍भुत दिन के लिए,
वही हृदय से चाहता हूँ |