‘‘वह धनी होकर तुम्हारे लिए कंगाल बना कि उसकेकंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओं ।’’(2 कुरिन्थियों 8:9)
जय, जय, जय, जय राजाधिराजा,स्तुति के योग्य है यीशु प्यारा ।।
1.नाम महान है सब से तेरा, तू कभी न बदलनेवाला;सब वायदों को पूरा किया, झूठ प्रभु, तू ने कभी न बोला ।
2.रखवाली चरवाहे करते थे, दूत गाके संदेश लाए;पैदा हुआ मुक्तिदाता, आओ मिलकर खुशीयाँ मनाएँ ।
3.ज्योतिषी पूछते पूर्व से आए, ‘‘जन्म राजा का हुआ कहाँ है ?’’पाके उस को सीस नवाए, सोना, लोबान, गन्धरस भेट चढ़ाएँ ।
4.तू महान और धनी परमेश्वर, गरीबों के लिए गरीब बनकर;हम पापीयों को धनी बनाकर, भागीदार महिमा का बनाया ।
5.प्रभु यीशु तू ने लोहू बहाया, प्रायश्चित देकर मुझको छुडाया;वर्णन से बाहर तेरी करुणा, स्तुति के योग्य है प्रभु हमारा ।
6.प्राण दिया तू ने क्रूस के ऊपर, जय पाई है तू ने सब पर;युग युग महिमा होवे तेरी, हल्लेलूयाह गाएँ मिलकर ।