CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 171

सभी अनुग्रह का प्रभु

sabhee anugrah ka prabhu

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‘‘और वे... एक नया गीत गा रहे थे ।’’(प्रकाशित 14:3)
1.सभी अनुग्रह का प्रभु... सब प्राणियों का आनन्द है;हम स्तुति के गीत गातें है... आनन्द से तेरी स्तुति करें ।हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह;(2)
हल्लेलूयाह मैं गाता हूँ, आनन्द से आगे मैं बढ़ता हूँ ।।
2.प्रेम से उसने ढूंढ़ा मुझे... प्रीति से उसने बचाया मुझे;पवित्र जीवन बिताने को... मुझ पापी पर किया दया ।
3.थोडे समय के क्लेश सहने... प्रतिदिन का अनुग्रह दिया है;पद चिन्हों पर प्रभु के... चलने को मुझे बुलाया है ।
4.नाशमान देह को बदल कर... महिमा का शरीर देने को;महिमा की आत्मा से भरा मुझे... मृत्यु के भय से छुड़ा लिया ।
5.पृथ्वी के उत्तम फल समान... ईश्वर की अनन्त मीरास की नाई;पृथ्वी के लोगों के बीच में हूँ... प्रेम से छुड़ोती का दाम दिया ।
6.यीशु का गीत गाने के लिए... जो दूसरे गा नहीं सकते;योग्य न था पर प्रेम किया... यीशु को क्या दे सकता हूँ ।

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