‘‘क्योंकि मैं प्यासी भूमि पर जल और सूखी भूमि परधाराएँ बहाऊँगा ।’’ (यशायाह 44:3)
प्रभु बरसा दो,(2)आशीषें बारिष बरसा दो;प्रभु बरसा दो ।।(2)
1.हे यीशु आज बिनती हमारी, मध्य में तुम प्रभु आज आओ;(2)आए है हम द्वार तुम्हारे,(2) खाली है प्रभु तुम भर दो ।(2)
2.प्यासी भूमि पर जल बरसाओ, सुखी भूमि पर धाराएँ;सन्तान है हम आत्मा उण्ड़ेलो, और आशीष से भर देओ ।
3.स्वर्ग तुम खोलो आज हम देखंे, पिता के दाहिने खड़ा यीशु को;अपना तेज प्रभु निवास स्थान में, बहुतायत से तुम भर दो ।
4.दोनों करुबो के मध्य में से आज, हमें सुनाओ मीठी आवाज;यीशु को छोड़ और किसी की न सुनें, आत्मा में तृप्ति दे जाओ।
5.स्वर्ग खुला है हम सब देखते, दूत भी चढ़ते उतरते हैं;अभिषेक दे दो घर यह तुम्हारा, एक महान कार्य कर जाओ ।