CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 516

ऐ मसीह मेरे गुनाहों को

ai maseeh mere gunaahon ko

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‘‘तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया ।’’ (भजन 32:5)
ऐ मसीह मेरे गुनाहों को मिटाया तू ने,दी नजात हम को गिरने से बचाया तू ने ।
1.दूर जब होता हूँ, शैतान फँसाता है मुझे,(2)शान दुनिया की दिखाके वह लुभाता है मुझे;(2)बढ़ गए अब तो कदम, तय करूँ में अब यह सफर,(2)ऐ मेरे मुंजी (मालिक) बता कैसे ? ऐ मसीह...
2.काफिला कैसे चले जब तू मेहरबान न रहे,रुक रुक जाऊँ अगर तेरा सहारा न मिले;बढ़ गए अब तो कदम, तय करूँ मैं अब यह सफर,ऐ मेरे मुंजी (मालिक) बता कैसे ?
3.आधियाँ उठती है तूफान डराता है मुझे,डगमग किश्ती है क्या करना नहीं मालुम मुझे;मांझी बनकर हे प्रभु पूरा करा दे यह सफर,ताकि मैं पहुँचू किनारे खुश होकर ।
4.दौड़ता जब हूँ तो कुछ बोझ दबाता है मुझे,पाप भी चुपके से फंदे में फँसाता है मुझे;आँख जब तुझ पे लगाता हूँ तो अन्त होवे सफर,गाऊँगा तेरी स्तुति जीवन भर ।

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