‘‘जीवन के आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप कीऔर मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया ।’’ (रोमियों 8:2)
1.दिल में आग जब जलती है,... रुह की आग पवित्र;रोज-ब-रोज वह बढ़ती है,... करती है परिपूर्ण;मेरा दिल ओ मन ओ जान,... मैं मसीह का हुआ;यह सदा का जीवन है,... जय जय हल्लेलूयाह ।
2.दूर हो गया हर एक बन्ध,... यीशु ख्रिस्त के द्वारा;मैं अब हूँ उसकी सन्तान,... वारिस हूँ खुदा का;सचमुच अब मैं हूँ आजाद,... मैं स्वतंत्र हुआ;था गुलाम पर हूँ आजाद,... जय जय हल्लेलूयाह ।
3.कुल जहान में अब सुना,... यीशु की खुश खबरी;जिसने मौत को मार ड़ाला,... अब्दी फतह पाई;कर ग्रहण अब जीवन को,... जीवन है जो अद्भुत;देख मुझ को मिल गया,... जय जय हल्लेलूयाह ।
4.अब खुदा की स्तुति हो,... पिता पुत्र आत्मा की;जिस ने मुक्ति दी हमको,... और पाप से आजादी;स्तुति करे हर जबान,... जिस को अनुभव हुआ;अब पुकारे हर इन्सान,... जय जय हल्लेलूयाह ।