1.उठो ! मसीह के लिए,... हे क्रूस के योद्धाओ;झण्डे को रखो ऊँचा,... न उसे झुकने दो;ख्रिस्त जय पर जय दिलाता,... सेना बढ़ाएगा;जब तक सारे शत्रु वह,... आधीन न कर लेगा ।
2.उठो ! मसीह के लिए,... प्रहरी चिताता है;निश्चिन्तता से है हानि,... उठ, छोड़ आलस और भय;बुराईया हटा दो,... मनों से और आसपास;लड़ो प्रभु के नाम में,... कि शत्रु हो सब नाश ।
3.उठो ! मसीह के लिए,... तुरही के शब्द को सुन;चलो इस महायुद्ध में,... आ जय दिवस को चुन;आज्ञाँए उस की मानों,... कि शत्रु है अनेक;जोखिम में साहस पाओ,... और लड़ो वीरता से ।
4.उठो ! मसीह के लिए,... और उस में हो सबल;मनुष्य की सारी शक्ति,... सामने उस के निर्बल;आत्मा के शस्त्र बाँधो,... सब कुछ हो प्रार्थना से;अब चलो हो उपस्थित,... युद्ध जहाँ ही बढ़े ।
5.उठो ! मसीह के लिए,... युद्ध थोड़ी देर का है;संग्राम का शब्द आज सुनते,... कल जयनाद सुनेंगे;जो अन्त में जय पाएगा,... वह मुकुट पाएगा;वह संग सनातन राजा,... सदा राज करेगा ।