(भजन - 130)
हे यहोवा गहरे स्थानों से... तुझ को मैंने पुकारा है;प्रभुजी मेरी प्रार्थना को सुनकर... हृदय का आग्रह अब तू सुन ।।
1.हे प्रभु जी तू दोषों को, ध्यान पूर्वक यदि देखे तो;कौन तब खड़ा रह सकेगा...
2.तू क्षमा करने वाला है, और अनुग्रह का धनी है;ताकि तुझ से हम भय माने...
3.मैं यहोवा की बाट जोहूँ, प्राण भी मेरा राह देखे;आशा मेरी वचन पर है...
4.जैसे पहरुए भोर के लिए, बाट वे जोहते रहते है;उनसे अधिक मैं तेरे लिए...
5.इस्राएल अब यहोवा पर, आशा तू लगाये रह;क्योंकि वही करुणामय है...
6.इस्राएल को यहोवा ही, सारे अधर्म के कामों से;सम्पूर्ण छुटकारा देगा... ,