प्रभु यीशु का गुण मैं तो गाऊँ, भक्ति उपासना से, तुझ को भजूं प्रभु तुझ को भजूं ।
1.स्तुति, प्रशंसा, से भरपूर हूँ, कैसे प्रभु अब मैं यह बताऊँ,युग युग यदि गाऊँ थोड़ा ही तो है, होठों के बलिदान से तुझे खुश हरूँ |
2.याद है मुझको तेरा वह काम, प्रेम के कारण प्रभु हुआ बलिदान,प्रायश्चित तूने किया, दिया लोहू दान, इस छोटे मुँह से मैं कैसे कहूँ ?
3.मुझे ये अच्छा लगा मुझ को चुने, माता के गर्भ से मुझे अलग करे,मुझ में उसके पुत्र का प्रकाश दे, क्या इसके योग्य हूँ कि धन्य बनूँ |
4.स्वर्गीय दर्शन जो मुझ को दिया, निशाने की ओर दौडूँ तू सिखाया,पिछली बातों को प्रभु तू ने हठाया, आँखे ऊपर रखकर दौड़ा चला हूँ |
5.शीघ्र ही प्रभु तू अब आ जाएगा, जो तेरे हैं जागते, ले जाएगा,बादल में प्रभु हमारा भेंट जो होगा, कैसा वह दिन होगा मगन मैं हूँ |