‘‘वह परमसुन्दर है,... वही मेरा प्रेमी, यही मेरा मित्र है ।’’ (श्रेष्ठ गीत 5:16)
शरण, शरण, शरण प्रभु करुणामय तू है;करुणामय तू है, हमारा शरणदाता तू है ।।
1.पाप-कोप रहित यीशु... शापवाहक है;शापवाहक है... शापमुक्त करता है ।
2.परमेश्वर स्वरुप यीशु... मनुष्यरुप है;मनुष्यरुप है... मनुष्यों का नाथ है ।
3.अनुग्रहकारी ख्रिस्त यीशु... दयावन्त है;दयावन्त है... दया सब पर करता है ।
4.सर्वशक्तिमान यीशु... सर्वोपकार है;सर्वापकारक है... सर्व जग-उद्धारक है ।
5.परम प्रेमी प्रभु यीशु... दीन मन का है;दीन मन का है... तू चाहता सब का है ।
6.मुक्ति-निमित्त रिक्त यीशु... विजयशाली है;विजयशाली है... तू विजयशाली है ।
7.सच्चा प्रभु तू ही यीशु... अच्छा शिक्षक है;अच्छा शिक्षक है... सत्य, मार्ग तू ही है ।
8.सर्व सृष्टिकर्ता यीशु... तू सनातन है;तू सनातन है... सनातन जीवन है ।
9.सब बातों में वरिष्ठ यीशु... श्रेष्ठ सब में है;श्रेष्ठ सब में है... हल्लेलूयाह हम गाएँ ।