‘‘और उसके वस्त्र और जांघ पर यह नाम लिखा है,राजाओं का राजा, प्रभुओं का प्रभु ।’’ (प्रकाशित 19:16)
राजाओं का राजा, प्रभुओं का प्रभु;सभों से उत्तम है, हल्लेलूयाह ।।
1.लोहू बहाके मुझे छुड़या, अपने लोहू से मुझे खरीदा;स्वर्गीय कुटुम्ब में मुझ को मिलाया, स्वर्गीय गीत है मुझको सिखाया ।
2.जीवन नैया झोंको में आवे, प्रभु मुझे तब ढ़ाढस दिलावे;किश्ती को मेरी पार लगावे, मन चाहे बन्दरस्थान में लावे ।
3.नाम लेकर मुझ को प्रेम से बुलाया, निज धन अपना मुझ को बनाया;माता की नाई गोद में उठाया, स्वर्गीय दर्शन मुझको है दिया ।
4.मृत्यु के दण्ड से मुझ को छुड़या, दोषों का स्मरण उसने मिटाया;प्रेम से है चुनके अपना बनाया, अपने साथ मुझ को राजा ठहराया ।
5.दुःख और परीक्षा जब मुझे घेरें, उसकी करुणा मुझ को सम्भाले;आँखो से मेरे सब आँसू पोंछे, मेरा कटोरा खुशी से छलके ।
6.उत्तमता अपनी हर साल दिखावे, चिकनाई तेरी मार्गो में टपके;जिस से चराईयाँ हरी हो जाएँ, पहाडियाँ सब खुशी मनाएँ ।
7.पवित्र मण्डली के साथ मिलकर, सन्मुख अपने प्रभु के आकर;नया गीत गाएँ खुशी से भरकर, हल्लेलूयाह उसकी जय हो निरन्तर ।