‘‘में यहोवा से प्रेम रखता हूँ इसलिए कि उसने मेरेगिड़गिड़ाने को सूना है ।’’ (भजन 116:1)
मसीह तू मेरा प्यारा है... तू मेरे दिल का नूर;तू ही मेरा कफारा है... ऐ मेरे दिल मंजूर ।।
1.जब में शैतान के बन्ध में था... गुनाह से था मामूर;वह हालत तू न देख सका... ऐ मेरे दिल मंजूर ।
2.मैं जखमी धायल था लाचार... नालायक और मजबूर;पर तू था मेरा मददगार... ऐ मेरे दिल मंजूर ।
3.जब सभों ने छोड़ दिया था... जब सब हो गए दूर;तब तू ने गोद में लिया था... ऐ मेरे दिल मंजूर ।
4.पास अब मसीह मैं तेरा हूँ... मैं तेरा हूँ जरुर;काश तेरे पास मैं नित रहूँ... ऐ मेरे दिल मंजूर ।