(भजन 36:5-10)
हे यहोवा तू अद्भुत है;(2) हे यहोवा तू धन्य है ।।(2)
1.तेरी करुणा स्वर्ग में है;(2) जो कोई आए तुझ से वह पाए, सब पर दयालु तू है ।(2)
2.तेरी विश्वासयोग्यता महान; बहुत ही ऊँची वह सब के लिए है, कभी न बदलती वह है ।
3.तेरी धार्मिकता दृढ़ है; जांचता तू सबको, कैसा गंभीर है, सब को सीधा बनाता है ।
4.तेरी ममता भी अनमोल है; पंखो में सब को ढांपे रहता है, जो कोई शरण लेते है ।
5.तेरे घर में ही तृप्ति है; सुख की नदी से वे सब पीते है, जीवन का सोता बहता है ।
6.तेरा प्रकाश अब हम पर है; जो तुझे जानते, जिन को तू जानता, कृपा सदा उन पर रहे ।