‘‘वही गाली सुनकर गाली नहीं देता था, और दुःखउठाकर किसी को धमकी नहीं देता था ।’’ (1 पतरस 2:23)
स्तुति के योग्य तू ही प्रभु,मेरे लिए निन्दित हुआ था; स्तुति के योग्य तू ही प्रभु ।।
1.तेरे अपने लोगों ने निन्दा की, और ग्रहण तुझ को नहीं किया,मेरे लिए तू ही दोषित हुआ, तेरे प्रेम के कारण स्तुति करुँ ।
2.सत्य, मार्ग और जीवन तू ही है, अनन्त जीवन देने आया;भरमानेवाला तुझ को कहा, पर तू दयालु यीशु प्रभु ।
3.यहूदा के गोत्र का तू सिंह है, जिस का न आदि न अन्त है;तुझ को सामरी और नीच कहा, पर तू जगत का नाथ प्रभु ।
4.सब शत्रुओं को तू ने क्षमा किया, दोष न गिना पर आशीष दी;‘दोषी तू है’ उन्होंने कहा, पर तू तो निर्दोष था प्रभु ।
5.दुष्टात्मा तुझे देख कर कांपे, डांटकर उन्हें तू बाहर किया;‘दुष्टात्मा है तुझ में’ ये कहा, हे दयालु प्रिय यीशु प्रभु ।
6.तेरा नाम मधु से भी मधुर है, मधुर गीत से तुझे मैं भजूँ;मुझ पापी के लिए बली हुआ, दण्डवत कर मैं तुझ को भजूँ ।