‘‘तुम्हारा बुलाने वाला विश्वासयोग्य है ।’’ (1 थिस्स 5:24)
हे प्रभु तू विश्वासयोग्य सामर्थी है,कैसा महान, अद्भुत, सच्चा, प्रतापी तू दयालु है ।।
1.स्वर्ग और पृथ्वी पर उसके नीचे जो, तेरे ही नाम पर घुंटने टेकें;ईश्वर की महिमा करें,हर एक की जीभ स्वीकार करें भी, तू ही प्रभु मसीह है ।
2.काम तेरे अद्भुत सामर्थ अपार जो, प्रभुता करता और देखता भी है;अद्भुत प्रेमी प्रभु है,पापी बचाने जग में तू आया, महान उद्धार दिया है ।
3.चालीस बरस तक उनको चलाया, जिनको छुड़ाया मिसर से तू ने;आँखों की पुतली समान,दृष्टान्त वे हुए हम सब के लिए, अद्भुत तेरी योजना है ।
4.स्वर्ग तूने खोला मन्ना बरसाया, और सब को जीवन का पानी दिया;तृप्ति बड़ी तुझ में है,अग्नि का खंभा और बादल का भी, अगुवाई सदा करते है ।
5.मार्ग में आंधी आशा, निराशा, शत्रु के हमले और क्लेष भी जो थे;सम्भाला हम को तूने,अपनी प्रतिज्ञा पूरी की उसने, मीरास हमें दी है ।