‘‘परमेश्वर विश्वासयोग्य है ।’’ (1 कुरिन्थियों 10:13)
विश्वासयोग्य मेरे प्रभु... मैं तेरी स्तुति करूँगा ।।
1.करुणा से बुलाया है... और मुझे सम्भाला है;इसलिए मैं तुझे भजूँगा... और तेरी स्तुति करूँगा ।
2.मैं तेरे प्रेम से हे प्रभु... कितनी ही बार दूर गया;पर जब मैं तेरे पास आया... तू ने मुझे क्षमा कर दिया ।
3.कीचड़ में जब मैं गिरा... तू ने मुझे उठा लिया;शत्रु के फन्दों से तू ने... मुझ को जयवन्त जीवन दिया ।
4.तू मेरा शरणस्थान है... और तू ही मेरा गढ़ भी है;मेरे किलों के चारों और... मेरा रक्षक तू ही था ।
5.तू मेरा सच्चा साक्षी है... विश्वासयोग्य तू प्रभु है;मेरा प्रभु सनातन का... मैं तेरी स्तुति करूँगा ।