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SIYON KE GEET · SONG 160

मक्तिदाता यीशु प्रभु

maktidaata yeeshu prabhu

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‘‘कौन हमें मसीह के प्रेम से अलग कर सकता है ।’’(रोमियों 8:35)
मक्तिदाता यीशु प्रभु स्तुति मैं करुँ;शुद्ध और अनन्त प्रेम अपना मुझे दिखाया ।
1.प्रभु मेरे पक्ष हेै विरोधी कौन होवें ?दूत भी होवें प्रधान भी होवें,प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।
2.मनुष्य रुप धारण किया खाली हो गया,काल भी आवे, तलवार भी आवे;प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।
3.सर्वलोक तारण के लिए क्रूस पर तू चढ़ा,क्लेश भी आवे, मुसीबत आवे;प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।
4.अनगिनित मुसीबतें मसीह ने है सही,नंगाई आवे, उवद्रव आवे;प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।
5.मृत्यु को हराके प्रभु फिर तू जी उठा,मौत भी आवे, जीवन भी आवे;प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।
6.मेल कराया तूने प्रभु स्वर्गीय पिता से,पहाड़ भी आवे, तराईयाँ आवे;प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।
7.न बदलनेवाला यीशु संग हमारे है,वर्तमान में, भविष्य काल में;प्रभु प्रेम से न मुझे कोई हटाए-मसीह प्रेम से न मुझे कोई हटाए ।

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