‘‘उस ने मुझे सत्यनाश के गढ़े और दलदल ककीच में से उबारा ।’’ (भजन 40:2)
1.हम करेंगे तारीफ खुदा के बेटे की मिलकर,आज और कल, अबद तक एकसा है आदरयोग्य प्रभु ।मुक्तिदाता यीशु है, उस में कोई दोष भी नहीं है;वही सभों में श्रेष्ठ भी है, हल्लेलूयाह आमीन ।।
2.सत्यनाश के गढ़े और दलदल की कीच से निकाला मुझे,बलवन्त हाथों से उठाकर रखा चट्टान पर उसने ।
3.आँख की पुतली समान मुझे रखता प्रभु यीशु,स्वर्गीय आशीषे उण्डेलता रहता है प्यारा प्रभु ।
4.माता-पिता छोडे प्रभु नहीं छोडेगा मुझे,दुःख तकलीफें शैतान लावे प्रभु उनसे छुडाए ।
5.आत्मिक शान्ति देता है कि पाऊँ विजय का जीवन,उस के साथ मैं राज्य करूँगा, हल्लेलूयाह गाऊँगा ।