‘‘यहोवा... मेरा ऊँचा गढ़ है ।’’ (भजन 18:2)
स्तुति करें यीशुजी की, अति सुन्दर और उत्तम भी है ।।
1.तेरे ऊँचे महान नाम की... स्तुति करना अति उत्तम है;हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह, हल्लेलूयाह ।।
2.क्रूस पर अमूल्य लोहू बहाकर... प्रभु ने धोया हम दुष्टो को ।।
3.ऐसा महान उद्धार देकर... किया उसने हमें अपनी प्रजा ।।
4.मेरी चट्टान ढ़ाल है वह मेरी... मेरा प्रभु मेरा गढ़ भी है ।।
5.ऊँचा गढ़ वह उद्धार का सींग है... प्रभु हमारा छुडानेवाला ।।
6.सभों से भी तू परम सुन्दर... रमणीय है और अति प्रिय भी ।।
7.दिन और रात हजारों स्वरों से... स्तुति करना अति उत्तम है ।।