‘‘ताकि मेरी आत्मा तेरा भजन गाती रहे और कभी चुप न हो ।’’ (भजन 30:12)
ओह ! मेरा मन गा रहा है... गीत नया प्रभु का;कैसी खुशी है वर्णन से बाहर(2)... प्रेम बड़ा प्रभु का ।।
1.मसीह में मुझे मीरास बनाया, संकल्प क्या ही अद्भुत तेरा था;जगत की उत्पति से पहले ही(2)... प्रभु में चुन लिया था ।
2.मसीह में तू ने क्षमा किया है, लोहू बहाया मुझे धोया है;छुटकारा देकर निर्दोष भी किया(2)... पवित्र तू बनाया ।
3.मसीह में मुझे निकट बुलाया, बीच की दिवार को तू ने ढा दिया;ताकि मैं एक नया मनुष्य बन जाऊँ(2)... तू तो यही चाहता था ।
4.मसीह में दण्ड की आज्ञा नहीं है, पूरी आजादी उसमें मिली है;स्वर्गीय स्थानों में मुझको बिठाया(2)... नयी सृष्टि बनाया ।
5.मसीह में स्वर्गीय आशीष मिली है, पूर्ण शान्ति और आनन्द पाया है;महिमा और विजय मेें हमको बुलाया(2)... गाएँ सब हल्लेलूयाह ।