‘‘मैं तेरे किए हुए उद्धार से आनन्दित हूँ ।’’ (1 शमूएल 2:1)
स्तुति प्रशंसा हे प्रभु, मैं गाऊँ बार बार;महान उद्धार दे दिया, दिल शान्त कर दिया ।
1.संसार के फन्दे में था, पापों का दास था;लोहू की शक्ति से प्रभु, तू ने छुडा लिया ।
2.पापों के भार से जीवन, मेरा दुःखी हुआ;प्रभु ने बोझ उठा लिया, दुःख दर्द सब हटा ।
3.अन्धेरा मन में था मेरे, पथ से भटक गया;उजियाला प्रभु बन गया, सत पथ से दिखा दिया ।
4.घूरे के ढेर से प्रभु, तू ने उठा लिया;फकीर और दरिद्र को, राजा बना दिया ।