‘‘तू वही है और तेरे वर्षो का अन्त नहीं होने का ।’’ (भजन 102:27)
आदि और अन्त रहित है, हे ईश्वर तू परिपूर्ण है;नीति और ज्ञान तुझ में है, ज्योति-निवासस्थान तू है ।
1.इब्राहीम को तूने बुलाया, उसी वंश में जन्म लिया;अनाथों का नाथ हुआ, अनाथ बनकर तू आया ।
2.इसहाक को तू ने छुड़ाया, बदले में बलि तू हुआ;यहुदा से बेचा गया, पापियों के लिये मृत्यु सही ।
3.योना समान ही तीन दिन, कब्र में अपनी रहा;मनुष्यों को उद्धार देने, फिर से जीवित तू हुआ ।
4.बारह गोत्रों से तू आया, बारह शिष्यों को बुलाया;कन्या से पैदा हुआ, कन्या सिय्योन को विवाहा ।
5.दाऊद का पुत्र तू है, दाऊद का प्रभु भी तू है;मुझ पापी से प्रेम करके, रक्षा मेरी करता है ।