(भजन 76)
परमेश्वर यहुदा में जाना गया है,(2)उसका नाम इस्राएल में महान हुआ है;(2)और उसका मण्डप शालेम में है,(2)और उसका धाम भी सिय्योन में है ।(2)
1.वहाँ से उसने चमचमाते तीरों को...औरवहाँ से उसने युद्ध की मजबूत ढ़ालों को;वहाँ से उसने जंग की मजबूत तलवार को,...औरवहाँ से तोडा निदान ही लड़ाई को,हे परमेश्वर, तू है ज्योतिर्मय,अहेर से भरे हुए पहाडों से उत्तम है ।...परमेश्वर
2.दृढ़ मनवाले सभी लुट गए हैं,...औरभारी नींद में वे सब पड़े हुए हैं;शूरवीरों में से किसी का हाथ न चला,...औरवहाँ वह बिलकुल ही निकम्मा हो गया;याकूब के परमेश्वर तेरी घुड़की से,रथों समेत घोड़े भारी नींद में पड़े हैं ।
3.केवल यहोवा तू ही भय योग्य है,...क्रोधतेरे के सामने खड़ा कौन हो सके;जब यहोवा उठ गया न्याय करने को,...औरनम्र लोगों का भी उद्धार करने को;निर्णय का वचन स्वर्ग से सुनाया,पृथ्वी उस समय सुनकर भय से चुप हो गई ।
4.मनुष्य का कोप तेरी स्तुति बन जायेगा,...औरजो कोप रह जाए उसको तू ही रोकेगा;प्रभु की मन्नत मानो पूरी भी करो,...औरभय योग्य यहोवा के पास भेटें ले आओ;प्रधानों के अभिमान को मिटाएगा,भययोग्य वह पृथ्वी के राजाओं को लगेगा ।