(भजन 81:1-10)
1.जय गाओ प्रभु की वही बल है,याकूब के परमेश्वर की करो जय जय;भजन तुम उठाओ मधुर राग से,डफ, वीणा बजाओ पूरे बल से ।
2.गीत गाओं एक स्वर होके तबले के साथ,और रागें मिलाओं सितारों के साथ;नये चाँद और पूर्णमासी के समय,नरसिंगे तुम फूंको सब पर्वो समय ।
3.इस्राएल के लिए विधि है यही,याकुब के प्रभु का नियम है यही;यूसुफ के लिए यह चितौनी दे दी,मिस्र देश से उसको निकाला जभी ।
4.वहाँ मैंने अनजानी भाषा सुनी,उतारा कन्धों पर से बोझ सब ही;छुटा उनका टोकरी ढोना सब ही,संकट से छुड़ाया पुकार जब सुनी ।
5.घन गर्जन के गुप्त स्थान से तेरी सुनी,मरीबा के सोते पास परीक्षा भी की;हे मेरी प्रजा, सुन चितौनी मेरी,भला इस में है जो सुने तू मेरी ।
6.तेरे बीच ईश्वर पराया न हो,न दण्डवत करे तू पराए देव को;तेरा परमेश्वर यहोवा हूँ मैं,मिस्र से निकालकर के लाया हूँ मैं ।
7.तू मुँह अपना खोल कि मैं उसे भरूँ,तेरे दिल की चाहना पूरी करूँ;विश्वास से तू माँग कि मैं पूरी करूँ,तेरा परमेश्वर यहोवा मैं हूँ ।