‘‘मैं तुझे आशीष दूँगा... ।’’ (उत्पति 12:2)
आशीष के ऊपर आशीष तुझ को दूँगा,प्रभु ने कहा मैं बढ़ाता जाऊँगा ।।
1.यहोवा ने दर्शन देकर कहा... मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ;मेरे सन्मुख चल सिद्ध हो जा... मैं तेरे साथ वाचा बान्धूंगा ।
2.वंश को तेरे बहुत ही बढ़ाऊँगा... और तुझे मैं फुलाऊँ-फलाऊँगा;जाति-जाति का मूल बनाऊँगा... वंश के साथ वाचा स्थिर करूँगा ।
3.युग-युग तेरा ईश्वर रहूँगा... और कनान देश तुझ को दूँगा;सदा के लिए तेरा करूँगा... तुझ में महिमा पाऊँगा ।
4.मैं तुझ से बड़ी जाति बनाऊँगा... आशीष तुझ को निश्चय दूँगा;तेरा नाम मैं बड़ा बनाऊँगा... आशीष का कारण भी करूँगा ।
5.जो तुझ को आशीष अब देंगे... उनको मैं आशीष भी दूँगा;जो तुझे श्रापे, श्राप उन्हें दूँगा... आशीष सब पायें तुझ से, मैं करूँगा ।