‘‘उसे देखकर प्रभु को तरस आया ।’’ (लूका 7:13)
यीशु तु ने किया प्यार, कोई न था तारणहार,तुझ से न देखा गया, मेरे गुनाहों का भार ।।
1.तुझ से मैं दूर हो गया, ईश्वर रहित जग में था;बिलकुल मैं समझा नहीं, तेरे हृदय का वह प्यार ।
2.मैं ने न सोचा कभी, अन्त मेरा क्या कुछ होगा;अपने ही पापों में मैं, करता था तुझ को बेजार ।
3.देखा जब अपने को मैं, धृणा हुई इस जीवन पर;पश्चाताप बहुत किया मैं, माना मैं तू तारणहार ।
4.उद्धार मुझे मिल गया, लोहू से मैं धुल गया;भटके को लाया निकट, धोया तू पाप बेशुमार ।
5.मण्डली में लाया मुझे, मीरास बनाया मुझे;दिया बड़ा अधिकार, खोला तू ने स्वर्ग का द्वार ।