(1 इतिहास 28:20, नहे 6:16, गिनती 13:24)
प्यार से तू लेकर आया,ये विश्राम स्थान में लाया प्रभुजी ।।
1.सकेती में हम जब पड़े थे, तुझ से प्रार्थना की;चौड़े स्थान में लाया हमें तू, स्तुति हो अनुग्रह किया ।
2.बल दिया तू और हियाव भी, निर्भय हमें किया;इस संसार में मन्दिर बनानें, लोगों को इकट्ठा किया ।
3.अपने लिए जो घर है बनाया, उस का वह आदर;संसार में यह फैल भी जाए, तू ने संकल्प किया ।
4.मेरा आत्मा तुम्हारे बीच में, प्रभु यीशु ने कहा;प्रभुजी हमारे साथ तू रहकर, अद्भुत यह कार्य किया ।
5.बहुतायत की आशीष की जगह में, लेकर हमें आया;एश्कोल की अंगूर की नाई तू, फलदार बनें यह चाहा ।
6.जाति-जाति के लोग जितने थे, बहुत चकित हुए;क्योंकि प्रभु तू ने आश्चर्य काम किया, धन्य तू सब में हुआ ।
7.चाँदी-सोना जो सब कुछ तेरा, बहुतायत से हम को देगा;सारी भलाईयों के लिए प्रभुजी, गाता हूँ हल्लेलूयाह ।