‘‘धन्य है प्रभु, जो प्रतिदिन हमारा बोझ उठाता है ।’’ (भजन 68:19)
प्रति दिन मेरे बोझ को, उठाता है प्रभु;सदा अपनी भलाई से, भरता है प्रभु ।।
1.धन्य कह सर्वदा तू, मेरे प्राण यीशु को,पवित्र नाम की, प्रशंसा सदा हो;आशीषों के ऊपर आशीष हम पर लादी है ।
2.काँटा जो शरीर में आया, दुःख बहुत ही मैं पाया;वेदना से मैं ने पुकारा, धीरज तब दिया;मेरा अनुग्रह तुझ को काफी है कहा ।
3.पाप के फन्दे में जब मैं, जकड़ा हुआ रोता था;अपने लोहू से मुझे, स्वतंत्र तू किया;तेरे अनुग्रह के बड़े धन के अनुसार ।
4.सभी बातों में सदा, सारी भरपूरी से भी;बहुतायत से मुझ को तू ने, पाला पोसा है,प्रति पल अनुग्रह तेरा मुझ को दिया है ।
5.सभी समय संतुष्ठ रहना, मुझको सिखलाया भी है;सब कुछ करने के लिए बल भी दिया है,तुझ में शक्ति सदा पाऊँ, बलवन्त हे ईश्वर ।