‘‘परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है ।’’ (भजन 34:8)
चखकर मैं ने जाना है, यहोवा कैसा है भला,उद्धारकर्ता की शरण में, आकर मैं धन्य हुआ ।।
1.तू ही महान परमेश्वर, स्तुति के योग्य है तू ही,कि तू ही दयालु है, निश्चय ही मैं भजूँगा ।
2.अति उत्तम तू है ईश्वर, प्रभावशाली परमेश्वर,काम तेरे जो अद्भुत है, मैं पूरे दिल से भजूँगा ।
3.भलाई से भरे परमेश्वर, अति श्रेष्ठ भी तू ही है,तू ही अति सुन्दर है, सम्पूर्ण मन से भजूँगा ।
4.मेरे जीवन भर तुझ को, यहोवा सदा मैं भजूँगा,मेरी आखिरी सांस तक भी, गुण तेरा मैं गाऊँगा ।
5.दुःख और संकट में भी, आनन्दित सदा रहूँगा,अपने उद्धारकर्ता में, तसल्ली पाऊँगा ।
6.लगातार प्रार्थना करूँगा, प्रभु की उपस्थिति में,जो कुछ भी मैं मांगूँगा, बहुतायत से पाऊँगा ।
7.धन्यवाद मैं चढ़ाऊँगा, हरेक बात के लिए,मसीह में तृप्त होकर, मैं मगन होऊँगा ।