‘‘और सब खाकर तृप्त हो गए ।’’(मत्ती 14:20)
यीशु तू ने किया निहाल,जब मैं शरण में तेरी आया ।।
1.यीशु आकर तेरे द्वार... बरकत पाई बेशुमार;(2)कृपा तेरी हुई अपार... मेरे दिल का मैल मिटाया ।(2)... यीशु
2.तू ने बचाए मेरे प्राण... दीनी क्रूस पर अपनी जान;तुझ से हार गया शैतान... मेरे मन में तू ही समाया ।
3.तेरी सिफते है अजब निराली... देखी सूरत खूब जलाली;मेरे दिल में है खुशहाली... मैंने जीवन का सुख पाया ।
4.जो कोई तेरी शरण में आवे... वह पापों से बच जावे;मन में धर्म आत्मा पावे... इस को मैं ने है अजमाया ।
5.हे दास तेरा, विश्वासी... काटी तू ने काल की फाँसी;धन धन अमर लोग के वासी... दर्शन तेरा मैं ने पाया ।