‘‘हे मेरे प्राण यहोवा को धन्य कह औरउसके किसी उपकार को न भूलना ।’’ (भजन 103:2)
सून ऐ मेरी जान, प्रभु के कामों को न भुल;(2)ऐ मेरी जान, प्रभु के कामों को न भूल ।।(2)
1.अपने पापों में था तू मुर्दा... बचाने आया वह;तुझ अभागे को स्वर्ग में पहुँचाने को... जान अपनी दी;उसको सारे दिल से भजले... कामों को उसके न भूल...तू
2.प्रेम बिना बैचैन था तू... और परदेशी;पिता की नाई यीशु ने आके... ढ़ाढस तुझ को दी;अपने आपको दे दे तू उसको,... कामों को उसके न भूल...तू
3.अन्न और वस्त्र दिया है तुझ को... आशीषें स्वर्ग की;स्वर्गीय पिता का वायदा है सच्चा... बेटों के लिये ही;स्तुति हो मन में प्रेम के लिये... कामों को उसके न भूल...तू
4.गतसमनी की प्रार्थना को... क्या कभी जाना ?कल्पना को यीशुजी की... क्या कभी समझा ?प्रेम हो दिल में यीशुजी का... कामों को उसके न भूल...तू,