‘‘जो लोग अन्धकार में बैठे थे उन्होंने बड़ी ज्योति देखी ।’’(मत्ती 4:16)
बेथलेहैम के ऐ छोटे कस्बे, खामोश और सुनसान होते देखा;अन्धेरी गलियों में तेरी, लेकिन, जलाल-ए-अबदी चमकते देखा ।।
1.सुबह के तारे यह कह रहे थे, कि यीशु जब तू जमीन पर आया;तमाम आलम को खुरम्मी और, खुशी से लबरेज होते देखा ।
2.तू बादशाहत-ए-आसमान से, जमीन पर आया हकीम बनकर;हर एक इन्सान के दर्द औ गम को, लम्हें में मादुम होते देखा ।
3.दिली तमन्ना है यह हमारी, कि हम से मर्जी हो पूरी तेरी;कि जिस तरह इन्तिजाम रब्ब का, तेरी विलादत में होते देखा ।
4.अजब खामोशी के चन्द लम्हों में, खुदा की बख्सीश आती हुयी है;दिलों में दाखिल उसी तरह पर, यीशु मसीह को भी होते देखा ।
5.गुजर गई है शब्ब तारीकों की, चमक उठा नूर आसमान का;फिर एक दफा हम ने आसमान से, यीशु मसीह को आते देखा ।