(भजन - 92)
यहोवा का धन्यवाद है करना कैसा भला;(2)हे परम प्रधान तेरे नाम को भजना कैसा भला ।।(2)
1.प्रातःकाल को तेरी करुणा, (2) रात को तेरी विश्वासयोग्यता का (2)प्रचार करना, मेरे प्रभु, है कैसा भला । (2)
2.दस तार के बाजे और सारंगी पर, गम्भीर स्वर से वीणा के ऊपर;गान करना, मेरे प्रभु, है कैसा भला ।
3.क्योंकि यहोवा तू ने मुझ को, आनन्दित किया कामों से अपने;जय जयकार करूँगा, तेरे कामों के लिए ।
4.काम तेरे यहोवा कैसे बड़े है, कल्पनाएँ तेरी कैसी गंभीर है;पशु समान मूढ इसे समझते न जरा ।
5.दुष्ट जो घास नाई फूलते फलते, सब अनर्थकारी प्रफुल्लित होते;होते इसलिए, नाश हों वे सदा के लिये ।
6.यहोवा सदा विराजमान होगा, तेरे सब शत्रु नाश होंगे;सब अनर्थकारी भी तितर बितर हो जाएँगे ।
7.सींग मेरा तू जंगली साँढ सा, शत्रुओं पर ऊँचा किया है;टटके तेल से तूने मुझे अभिषेक किया ।