‘‘जो मसीह यीशु के है, उन्होंने शरीर को उसकी लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है ।’’(गलतियों 5:24)
प्रभु यीशु की है जय, क्रूस की शक्ति से है जय;जय, जय, जय, जय, जय, जय, जय, जय ।।
1.यीशु के लोहू से मिलती जय, शैतान और सेना पर जय ।
2.क्रूस से हम को मिलती जय, पुराने स्वभाव पर मिलती जय ।
3.पुर्नजीवित प्रभु देता जय, पाप और मृत्यु पर देता जय ।
4.जग पर देता प्रभु जय, जीवन से अपने देता जय ।
5.आत्मा के द्वारा होती जय, शरीर के कामों पर होती जय ।
6.प्रभु के प्रेम से मिलती जय, दुःख संकट में मिलती जय ।
7.राजाओं का राजा देता जय, सब शत्रुओं पर उसकी जय ।