CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 288

आवाज प्रभु की सुनूँगा

aavaaj prabhu kee sunoonga

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‘‘यहोवा की वाणी,... ।’’ (भजन संहिता 29)
आवाज प्रभु की सुनूँगा, जब वह मुझ से कहे;(2)मधुर आवाज से कहे, धीमी आवाज से कहे ।।(2)
1.तेरी अजीब वाणी, जो ”मेधों के ऊपर है“;प्रतापी प्रभु गरजता, (2) मेघों के ऊपर वह रहे ।
2.तेरी भयंकर वाणी, ”प्रतापमय और सामर्थी है“;लबानोन के देवदार को तोड़े, (2) आग की लपटों को चीरे ।
3.”बन को हिलाती है, हरणी का जो गर्भ गिरे“;जंगल में पतझड़ है, (2) यह वाणी सदा जो रहे ।
4.मन्दिर में सब कहे, महिमा तेरी जो है;तू शान्ति आशीष देगा, (2) जो तेरी वाणी को सुने ।
5.तेरी मीठी वाणी, जो वचन से सुनता मैं;प्रार्थना के द्वारा से, (2) वह हर दिन मुझ से कहे ।
6.तेरी मीठी वाणी, जिस में है इच्छा तेरी;जीवन के हर पल में, (2) समझूं मैं जो तू कहे ।
7.तेरी धीमी वाणी, जो मार्ग दिखाती है;जब दहिने बायें फिरुँ, (2) पीछे से वह मुझ से कहे ।
8.आँधियां जब चलें, डर भय मुझ में आए;तब तेरी जो प्यारी आवाज, (2) ”मत डर“ मुझ से कहे ।
9.जब अन्धकार रूपी, मृत्यु की तराई में हूँ;”मैं तेरे साथ जो हूँ“, (2) यह वाणी मुझे सुन पडे ।
10.हे प्रभु तू अब कह, तेरा दास जो सुनता है;नम्र और दीन बनकर, (2) मानूँगा जो तू कहे ।

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