‘‘जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर केसन्तान होने का अधिकार दिया,... ।’’(यूहन्ना 1:12)
यीशु को ग्रहण करो, ख्रिस्त यीशु को ग्रहण करो,अब हृदय के द्वार आज खोलो तुम, वह शीघ्र प्रवेश करेगा ।।
1.दया करने में वह धनी है, तुम्हें ममता करके वह छुड़ायेगा;पाप की भयंकरता से वह तुम को, छुटकारा देने ढूंढने आया ।
2.सारे पापों को माफ करेगा, वह सब रोगों को चंगा करेगा;करुणा करके मुकुट पहना कर, तुम को बहुत ही आदर देगा ।
3.अंधों को उसने आँखे दी, और लंगड़ो को उसने चलाया भी,नाना प्रकार के रोगी जो आये, तुरन्त उनको चंगाई भी दी ।
4.पाप का भार उठाने को, और रोगों को सब हटाने को;कोड़े खाये और दुःख सहा भी, जयवन्त हुआ परीक्षाओं पर ।
5.कलवरी क्रूस पर टंगाया गया, और लोहू की धार उससे फूट निकली;हाथों में कीलें, पावों में कीलें, काँटों का ताज सिर पर पहना ।
6.जीवन देने हमें प्राण दिया, और सब परीक्षा में वह जयवन्त हुआमारा गया और फिर जी उठा, योग्य है वही बचाने को ।