‘‘उस उद्धार को जो मसीह यीशु में है,अनन्त महिमा के साथ पाएँ ।’’ (2 तीमुथि 2:10)
हृदय तुम खोलो, आओ यीशु पास;है मुक्ति केवल प्रभु यीशु में,कब तक तुम निश्चित बैठे रहोगे;प्रस्तुत हो जाओ अब न्याय के लिए,प्रस्तुत हो जाओ अब स्वर्ग के लिए ।। हृदय तुम खोलो...
1.गर्भ ही से मनुष्य पापी वह होता, धर्मी कोई नहीं है;लोभ, डाह, धृणा, कपट, अभिमान, पाप के दाग ये सब हैं ।
2.धर्म-कर्म के चादर से ढांपकर, पाप कभी नहीं छुपता;ये पाप के दाग जो हटाना चाहो, कोई दवा है नहीं ।
3.लापरवाह बनकर संसार में फँसे, मृत्यु आकर पकड़ेगी;पाप की मजदुरी नरक में जाना, बचाएगा कौन तुम को ?
4.पाप में तुम जीते आत्मा नाश करते, इससे क्या लाभ अब होगा;रोना, तडपना, सहने से बाहर, जलन तुम पाओगे ।
5.पाप तुम्हारे थे सजा तुम्हारी, तिस पर प्रेम ख्रिस्त ने किया ।क्रूस पर प्रभु ने लोहू बहाया, तुम्हें धोने के लिए ।
6.पाप अपना मानो, प्रभु को पुकारो, कि मैं पापी एक हूँ;लोहू से धोकर क्षमा वह देगा, और उद्धार तुम पाओगे ।