‘‘दूल्हा आ पहुँचा, और जो तैयार थी,वे उसके साथ ब्याह के घर में चली गई ।’’(मत्ती 25:10)
शीघ्र आओ यीशु बुलाता है ।।
1.नाश कोई न हो, प्रभु चाहता है;सब उद्धार पाए प्रभु धीरज धरता है,मन परिवर्तन का अवसर यह है, इसलिये प्रभु अब बुलाता है ।
2.जब तक यह द्वार खुला हुआ है,प्यार से प्रभु तुम्हें यह कहता है;प्रवेश करो मेरी यह इच्छा है, जो माने वह खूब आशीष पाता है ।
3.रात बहुत अब बीती, दिन निकलता है;पाप के कामों को तजो प्रभु कहता है,धार्मिकता का सूरज उदय होता है;हो जाओ तैयार अब प्रभु आता है ।
4.आधी रात को धूम मची, ‘‘दूल्हा आता है’’;भेंट करने के लिए तुम्हें जाना है;चल देंगे वे ही जो तैयार अब हैं,बाद में प्रभु द्वार बन्द करता है ।
5.जाना चाहते हो यदि, तैयार होना है;यीशु के लोहू से तुम्हें क्षमा लेनी है;आदर के साथ तुम्हें प्रवेश करना है,प्रेमी पिता की यही मनसा है ।