(भजन - 107:33-43)
बहती नदियों को यहोवा बियावान बनाता है,चश्मों को बहते पानी के खुश्क जमीन बनाता है ।
1.वह जमीन बनाता बंजर जो थी मेवेदार,क्योंकि उसमें पापी रहते, बदी करते है बदकार ।
2.सूखे जंगल को जब चाहे तब वह झील बनाता है,खुश्क जमीन में जब वह चाहे सोते आप निकालता है ।
3.भूखों और लाचारों को वह आप वहाँ बसाता है,उनके रहने के लिए वह नगर तैयार करता है ।
4.ताकि वहाँ खेती करें, दाखबारी लगावें भी;यों वे भांति भांति के फल पैदा करें वहाँ भी ।
5.जब आशीषें देता उनको, वे बहुत बढ़ जाते है;उनके पशुओं को भी तू न कभी घटने देता है ।
6.उपद्रव में तकलीफ आती शोकित होके मरते है,धीरे धीरे घटते जा कर बिलकुल ही दब जाते हैं ।
7.और हाकिमों पर अपमान का बोझा जब वह डालता है,तब वे जंगल में बेराह को भटके भटके फिरते हैं ।
8.वह दरिद्र को छुड़ा कर ऊँचे पर बैठाता है,और उनको भेड़ो के झुंड सा परिवार भी देता है ।
9.सीधे लोग यह सब कुछ देखकर पूर्ण आनन्दित होते हैं,और सब कुटिल लोगों के मुंह आप ही बन्द हो जाते हैं ।
10.जो कोई बुद्धिमान हो इन बातों पर ध्यान लगाएगा,और यहोवा की करुणा के कामों पर सोचेगा ।