CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 32

स्तुति प्रभु की, करो स्तुति प्रभु की

stuti prabhu kee, karo stuti prabhu kee

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(भजन - 103)
स्तुति प्रभु की, करो स्तुति प्रभु की, ... तुमहे मेरे प्राण, हे मेरे सब कुछ ।।
1.उपकार उसके कभी न भूलना,हे मेरे मन तू मत भूलना ... कभी (2), प्रभु को न कभी भूलना । (2)
2.तेरे अधर्म को क्षमा वह करता,तेरे रोगों को चंगा करता ... प्रभु, है सब कुछ ठीक वह करता ।
3.वह तेरे प्राण को विनाश होने से,कर के करुणा बचा लेता है... प्रभु, दया का मुकुट वह बान्धता है ।
4.उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है वही,जवानी तेरी ऊकाब की नाई ... ताकि, हमेशा होती जाए नई ।
5.अनुग्रहकारी, करुणामय यहोवा,सर्वदा वादविवाद न करेगा ... वह, वह हम पर क्रोध न करेगा ।
6.आकाश है ऊँचा पृथ्वी के ऊपर,वैसे करुणा उसकी डरवैयों पर ... होती, होती है प्रबल वह उन पर ।
7.पूरब से पश्चिम जितनी दूर है,पाप हमारे उतनी दूर किए हैं ... हम से, प्रभु ने दूर किए है ।
8.जैसे पिता अपने बच्चों पर करता,वैसे यहोवा है दया करता ... बहुत, दया वह सन्तों पर करता ।
9.मिट्टी हैं हम प्रभु स्मरण है रखता,सृष्टि हमारी वह है जानता ... क्योंकि, यहोवा है हमें जानता ।
10.हे यहोवा की सारी सेनाओं,हे स्वर्गदूतों और हे टहलूओं ... सारे, हल्लेलूयाह गीत सब गाओ ।

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