‘‘व्यर्थ ही व्यर्थ, सब कुछ व्यर्थ है ।’’(सभोपदेशक 1:2)
1.माया मोह और लोभ में भाई भूला क्यों फिरे ?धास की नाई ये जवानी एक दिन मिट जाये ।मृत्यु आती ! मृत्यु आती !सब के जीवन में,अनुग्रह के दिन ऐ भाई घटते है जाते ।।
2.देख, समाधि मुंह पसारे है तेरे लिए;लेकिन यीशु अब बुलाता ऐ भाई तुझे ।
3.परमेश्वर के वचन के चिन्ह पूरे सब होते,प्याले उसके कोप के दुनिया पर डाले जाते ।
4.बलाओं को देखते-देखते दिल हैं हिल जाते,उसके सन्त उससे मिलने को तैयार हो जाते ।
5.‘सत्य और जीवन, मार्ग मैं हूँ’, कहा यीशु ने;दूसरी कोई राह नहीं है, देखो तुम खोज के ।
6.मुक्तिदाता है बुलाता तू उसकी सुन ले,छोड़ के पापों को पियारे अपना ले उसे ।