CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 338

माया मोह में धोखा

maaya moh mein dhokha

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‘‘व्यर्थ ही व्यर्थ, व्यर्थ ही व्यर्थ ! सब कुछ व्यर्थ है ।’’(सभोपदेशक 1:2)
माया मोह में धोखा न खाओ तुम,प्रभु यीशु में उद्धार मिलता है ।।
1.खेस कुटुम्ब और बीबी बच्चे सब, धन दौलत और मान सुन्दरता;ये सब चीजें भाप के समान है, कबर में ही सब अन्त हो जाएँ ।
2.फन खोले सांप जैसे भयंकर, वैसे ही पाप तेरे पीछे पड़ेगा;पाप की मजदूरी क्या मृत्यु नहीं ? इसका अन्त है अनन्त नरक ।
3.तुझ को बचाने के लिए प्रभु, स्वर्ग छोड़ कर दुनिया में आया;तेरे बदले में दुःख वह उठाया, क्रूस पर यीशु बलि हो गया ।
4.अभी तो अपना पाप सब मान ले, पापमय जीवन जो तेरा है;अनुग्रह से वह तुझ को बचाएगा, आज ही है देखो उद्धार का दिन ।
5.सारा बदन जो धायल हुआ था, पवित्र लोहू उसने बहाया;अनन्त जीवन तुझे देने को, मृत्यु पर जयवन्त हो के जी उठा ।

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