‘‘मन फिराओ, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है ।’’(मत्ती 4:17)
मन फिराओ, मन फिराओ; परमेश्वर का राज्य निकट है ।।
1.यहोवा का वह राज्य जो है, सब जातियों पर उसकी प्रभुता है;उस राज्य की महिमा की चर्चा करे,उसके राज्य के प्रताप में गौरव है ।
2.उसका राज्य सदाकाल का है, अटल और स्थिर रहता, दृढ़ है;जो मन के दीन, उन्हीं का यह है,वे धन्य है, स्तुति करते हैं ।
3.नये जन्म के अनुभव के द्वारा, उस राज्य को देखने पाओगे;आत्मा के द्वारा जो जन्म लिया,उस राज्य में प्रवेश करने का हक है ।
4.कोई मांस और लोहू न पाएगा, अधिकार उस अद्भुत राज्य में;पापी की कोई मीरास नहीं है,न दुष्टों का उस में भाग कोई है ।
5.आओ ! राज्य के योग्य हम सब बने,अन्धकार के वश से छुड़ाया हमें;अपने पुत्र के राज्य में वह लाया हमें,स्तुति प्रशंसा हम सब करते है ।