‘‘हे जवान, अपनी जवानी में आनन्द कर... पर यह जानरख कि परमेश्वर तेरा न्याय करेगा ।’’ (सभोपदेशक 11:9)
खुदा को भुलकर मसरुफ क्यों है खुद परस्ती में,तू शबनम की तरह मेहमान शब मर बाग-ए-हस्ती में ।।
1.उठाकर सिर न चल गाफिल, (गरूरे जोश मस्ती में, 2)(2)तुझे सोना पड़ेगा एक दिन, तुरबत की बस्ती में ।(2)
2.तेरे मरने का दिन हर दिन, (करीब आता ही जाता है, 2)मगर तू मस्त है अब तक, शराबे-खुद-परस्ती में ।
3.अगर तू चाहता पार होना, (कहीं उस बहरे आसियाँ से, 2)तो सब कुछ तर्क करके बैठ जा यीशु के कदमों में