‘‘तुम इन व्यर्थ वस्तुओं से अलग होकर जीवतेपरमेश्वर की और फिरो ।’’ (प्रेरितों 14:15)
कुछ न भरोसा इस जीवन का,(2)करो भजन अब प्रभु यीशु का ।।(2)
1.बालकपन में तो खेल पहेली, जवानी बीती सब पापों में भूली; (2)व्यर्थ ही व्यर्थ है रोनक जवानी, (2)करो भजन अब प्रभु यीशु का । (2)
2.धन भी न देता है मन में शान्ति, साथ न जाती है सम्पति, भूमि;व्यर्थ ही व्यर्थ है धन और भूमि,करो भजन अब प्रभु यीशु का ।
3.संसार में जब मेरी दृष्टि है पड़ती, उपद्रव से भरी दिखती यह पृथ्वी;व्यर्थ ही व्यर्थ है यह पापी पृथ्वी,करो भजन अब प्रभु यीशु का ।
4.जब तेरा मन कहता है ”तू पापी,“ यीशु के लोहू से मिलती है मुक्ति;आनन्द ही आनन्द है और मन में शान्ति,करो भजन अब प्रभु यीशु का ।