‘‘ मनुष्य का पुत्र इस लिए आया किबहुतों की छुड़ौती के लिए अपना प्राण दे ।’’ (मत्ती 20:28)
1.आसमान को छोड़कर दुनिया में आया,दुःख और तकलीफों को उसने उठाया;तिस पर भी दुनिया ने उसको न चाहा,काँटो का ताज रखकर थूका मारा ।प्यारा यीशु, प्यारा यीशु,... प्यारा, प्यारा, प्यारा यीशु ।।
2.कीलों से ठोंका और किया मसलूब,अपनों ने किया यह उस से सलूक;फिर भी मुहब्बत का देखो यह हाल,मरते भी दम तक किया सब का ख्याल ।
3.आज तक उस क्रूस से है एक चश्मा जारी,बचना गर चाहता है कर ले तैयारी;आकर नहा ले और हो जा तू साफ,कल जो कुछ करना है, कर ले तू आज ।
‘‘मसीह का प्रेम विवश कर लेता है ।’’(2 कुरिन्थियों 5:14)
1.खुदा के प्यार की गहरी धार वह बहती है, वह बहती है;जैसा बाहर वह है अपार, वह बहती है, वह बहती है;वह मुझे देती है उम्मीद, कि मैं हरएक परीक्षा में;अब फतह पाऊँगा उसी में, यह प्यार की धार, वह बहती है ।हल्लेलूयाह ! वह बहती है, यह प्यार की धार, वह बहती है;ऐ रब्ब मैं करता हूँ कबुल, यह प्यार की धार जो बहती है ।।
2.वह सब घमण्ड़ निकालती है, वह बहती...और दिल की जंग बन्ध करती है, वह बहती...मुहब्बत देती है मुझे, कि मैं अपने पड़ोसी से;मुहब्बत रखूं दिल ही से, यह प्यार की धार, वह बहती है ।
3.अब अपनी खिदमत में खुदा, वह बहती...मुझे बिलकुल सरगर्म बना, वह बहती...और तू मेरे वसीले से, सब शोकितों को शान्ति दे;ताकि वे जान लेवें तुझे, और प्यार की धार जो बहती है ।