‘‘क्योंकी वह वाचा का मेरा लोहू हैजो बहुतों के लिए बहाया जाता है ।’’(मत्ती 26:28)
1.दिल के दाग को धोवे कौन ? लोहू जो कि क्रूस से जारी;मेरे मर्ज को धोवे कौन ? लोहू जो कि क्रूस से जारी ।यह चश्मा है मामूर, दाग दिल के करता दूर;है मुझ को दिल मंजूर, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।।
2.मेरे मर्ज का शाफी है, लोहू जो कि क्रूस से जारी;माफी को वह काफी है, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।
3.वह है मेरे कर्ज का दाम, लोहू जो कि क्रूस से जारी;वह है मेरा खास इनाम, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।
4.मेरी वह उम्मीद है खास, लोहू जो कि क्रूस से जारी;रास्ती का है खुश लिबास, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।
5.दुःख तकलीफ में है पनाह, लोहू जो कि क्रूस से जारी;वह है मेरे घर की राह, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।
6.मेरे गीत का है मजमून, लोहू जो कि क्रूस से जारी;मुझ को करता है ममनून, लोहू जो कि क्रूस से जारी ।