CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 376

मैंने जब अपने त्राता को

mainne jab apane traata ko

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‘‘क्योंकि जो प्रभु का नाम लेेगा वह उद्धार पाएगा,... ।’’(रोमियों 10:13)
मैंने जब अपने त्राता को मेरे हृदय में अपनाया,कैसी शान्ति, अद्भुत आनन्द, मैं ने है अजमाया ।।
1.प्रभु का वचन मेरे पाप दर्शाया, आत्मा ने मेरा हृदय तोड़ा;खेदित हुआ मैं पाप मान लिया, लोहू को हृदय में लिया ।
2.जब मैं ने अपना पाप प्रगट किया, कुछ न छिपाया सब मान लिया;आँसुओं के साथ सच्चे विश्वास से, तब तू ने पाप क्षमा किया ।
3.पूरब से पश्चिम जितना दूर है, उतने ही दूर मेरे पापों को किया;सागर जैसा गहरा और क्या है, उस गहरे में पाप डाला ।
4.शान्ति के लिये कडुवाहट मिली, स्नेह करके मुझे खड्डे से निकाला;पापों को मेरे तूने उठाया, पीठ के पीछे फेंक दिया ।
5.मैं यहोवा, तेरे पापों को मिटाऊँ, स्मरण न करुँ भूल जाऊँगा;काली धटा और बादल की नाई अपराधों को मिटा दिया ।

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