‘‘मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिएजगत में आया जिन में सब से बड़ा मैं हूँ ।’’(1 तीमुथियुस 1:15)
मैं एक अधम पापी हूँ,बिनती करता हूँ प्रभु, तू क्षमा कर ।।(2)
1.अदन की बारी का गुनाह, आदम हव्वा से मुझे मिला;(2)आदि पाप जो मुझ में आ गया था, उसी को निर्मूल कर प्रभु;क्षमा करो यीशु प्रभु... ।
2.अपनी माता के गर्भ से, उत्पन्न हुआ मैं पाप में;ऐसी भयंकर परिस्थिति से प्रभु मुझे तू स्वतन्त्र कर;क्षमा करो यीशु प्रभु... ।
3.मेरे ही अपराधों के लिये, पापों के कारण जो मैं ने किये;सत्य रहित हूँ मृतक समान, मुझे जिला दे हे प्रभु;क्षमा करो यीशु प्रभु... ।
4.पापों को मैं ने छिपाया था, श्राप भारी मैं ने कमाया था;खतरे से निश्चिन्त जीवन बिताया, यीशु तू तारण दे मुझे;क्षमा करो यीशु प्रभु... ।
5.नख से सिर तक न कहीं भी, कुछ आरोग्यता नहीं थी,चोट और सड़े हुए घावों साथ आया हूँ, हे प्रभु चंगाई दे मुझे;क्षमा करो यीशु प्रभु... ।
6.माया-मोह से हृदय मोहित हो, देखने चला संसार को;दाऊद की नाई जाल में फँस गया हूँ, प्रभु तू छुटकारा दे मुझे;क्षमा करो यीशु प्रभु... ।
7.कितनी ही बार मैं दूर गया, प्रभु तेरी उपस्थिति से;योना की नाई हूँ पेट में मछली के, हे यीशु, तू मुझे खींच ले;क्षमा करो यीशु प्रभु... ।