‘‘यहोवा सब गिरते हुओं को सम्भालता है ।’’ (भजन 145:14)
नहीं छोडे तू कभी भी मुझ को, गिरने से सम्भाल तारणहारा,गिरते हुए सब लोगों को, उठानेवाला तू है प्रभु ।।
1.प्रभु तेरी आज्ञा न मानकर कितनी बार गिरने के समय,प्रेमी, धीमी, मीठी आवाज से, तू ने प्रभु मुझे उठा लिया ।
2.आदम हव्वा ने अदन की बारी में लालसा से जब आज्ञा तोड़ी,बलिदान किया क्रूस की छाया जो, प्रिय जान कर वह छुड़ा लिया ।
3.अपनी प्रजा की अगुवाई करने मूसा को दर्शन दिया,बहाने बताने पर भी न छोड़ा, उसी को अगुवा प्रभु ने किया ।
4.अपनी इच्छा और विचार से जब दाऊद सन्दूक को लाया,उज्जा की मृत्यु से दाऊद का हृदय प्रभु तू ने हिला दिया ।
5.योना तेरी बातें न सुनी जब तारशीश को वह भाग चला,मछली के पेट से उसने पुकारा, तू ने प्रभु उसे छुड़ा लिया ।
6.पतरस ने दृढ़ता से कहा, मैं तुझे कभी न नकारूँगा,तीन बार उस ने नकारा तुझको, प्रेम से तू ने उसे क्षमा किया ।
7.हे प्रभु इस जग में जीने को शक्ति हमारी काफी नहीं,तू ने भरपूर आत्मा उण्ड़ेला, हल्लेलूयाह मैं गाऊँगा ।